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सीखें अच्छा अभिभावक बनने के गुर


सिंगल मदर होने के फ़ायदे भी हैं

एकल मां होना आसान नहीं है. घर-बाहर सारी ज़िम्मेदारी अकेले निभाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन सिंगल मॉम होने के अपने फ़ायदे भी हैं. यहां हम उन्हीं फ़ायदों की बात कर रहे हैं.
आप ख़ुद सारे फ़ैसले ले सकती हैं
बच्चों से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने के लिए अपने पार्टनर को मनाने या उनके विचारों से असहमत होने पर भी समझौता करने के बजाय एकल मां होने पर आप ख़ुद अकेले ही फ़ैसले ले सकती हैं. बच्चे के लिए आपको जो कुछ भी सबसे सही लगता है, आप उसे बेझिझक चुन सकती हैं.

अब आप ज़्यादा व्यवस्थित रहती हैं
पहले आप बच्चों का कमरा ठीक करने, उनका बैग पैक करने जैसी छोटी-मोटी ज़िम्मेदारियां अपने पार्टनर को सौंप कर दूसरे कामों में लग जाती थीं. लेकिन वापस आने पर पता लगता कि आपके पार्टनर ने अपने हिस्से का काम नहीं किया है. इससे आप चिड़चिड़ी बनने लगती हैं. लेकिन अकेली होने पर आपको पता है कि बच्चे के लिए कौन-सी बोतल भरनी है, उनके कमरे का कौन-सा सामान कहां रखना है. आप ज़्यादा सतर्क होकर काम करती हैं.

आपका व्यक्तित्व मज़बूत बनता है
अभिभावक की ज़िम्मेदारी निभाना कोई आसान काम नहीं है. एक बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए अपना ढेर सारा समय उन्हें देना होता है. और जब बात एकल अभिभावक की हो तो मामला और भी जटिल हो जाता है. आपको बच्चे की हर छोटी-बड़ी ज़रूरत को पूरा करने के लिए अकेले ही सारे प्रयास करने होते हैं. आपकी ज़िम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, लेकिन यह आपके भविष्य के लिए काफ़ी अच्छा होता है. क्योंकि आप अपनी चीज़ें ख़ुद करना सीखती हैं और दूसरों पर निर्भर नहीं रहतीं.

सीखें अच्छा अभिभावक बनने के गुर
एक आम भारतीय अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा एक अच्छे स्कूल में पढ़े, आगे उसे अच्छे कॉलेज में दाख़िला मिले और अंतत: एक अच्छी नौकरी. इसका अर्थ है कि शुरुआत से ही बच्चों पर उम्मीदों का भारी बोझ होना. कई बार हम ज़िंदगी में जो कुछ हासिल नहीं कर पाते, उसे बच्चों के माध्यम से साकार करने का सपना पाल लेते हैं. और उनके लिए लगातार उनपर दबाव डालते हैं. आइए, दबाव डाले बिना बच्चों को प्रोत्साहित करने के नुस्ख़ों पर चर्चा करते हैं. ताकि आप आम भारतीय अभिभावकों से अलग बनें. 

कमियां निकालने के बजाय उनकी प्रशंसा करें: आपके बेटे ने आर्ट क्लास में जो आड़ी-टेढ़ी चित्रकारी की है, उसकी प्रशंसा करें. या आपकी बेटी जिस ढंग से अपने दादा-दादी के लिए दरवाज़ा खोलती है, उसकी सराहना करें. ‘‘यदि आप बच्चे को सही मायने में प्रोत्साहित करना चाहते हैं तो उसपर अपनी मर्ज़ी न थोपें,’’ कहती हैं साइकोलॉजिस्ट डॉ सुतापा दत्त. ‘‘आपका बच्चा जो कुछ भी हासिल करता है, उस पर गर्व करना बहुत ज़रूरी है.’’
जबरन कई सारी गतिविधियों का हिस्सा न बनाएं: बच्चों को कुछ समय के लिए फ्री भी रहने दें. वैसे भी वे स्कूल में काफ़ी व्यस्त रहते हैं. उन्हें भी ख़ुद के लिए समय चाहिए होता है. उन्हें ढेर सारी गतिविधियों का हिस्सा न बनाएं. ‘‘किसी भी गतिविधि का हिस्सा बनाने से पहले बच्चों की क्षमता को समझें. ऐसा करने से बच्चा भी ख़ुश रहेगा,’’ 
निर्णय लेने का मौक़ा दें: बच्चों का विकास तभी हो पाता है, जब वे अपने फ़ैसले ख़ुद लेना सीखते हैं. ‘‘मेरी बेटी ड्रॉइंग सीखना चाहती थी,’’ कहती हैं निदिशा श्रीनिवासन. ‘‘पर मैं हमेशा से चाहती थी कि वह बैले डांस सीखे. लेकिन बैले क्लासेस में वो ज़्यादातर समय एक कोने में बैठी रहती थी.’’ निदिशा ने महसूस किया कि उनकी बेटी को बैले में मज़ा नहीं आ रहा है. फिर उन्होंने उसका दाख़िला आर्ट क्लास में करा दिया.

हार को स्वीकारना सिखाएं: बच्चों को अपनी हार स्वीकारना सिखाएं. उन्हें हारने से डराने के बजाय उन्हें डट कर लड़ने और हर तरह की परिस्थिति का सामना करने के गुर सिखाएं. उनसे कहें,"चिंता मत करो, जीवन में आगे बढ़ने के और भी मौक़े मिलेंगे."

दूसरों से तुलना न करें: हर बच्चा अपने आप में अलग होता है और हर बच्चे की सीखने और आगे बढ़ने की गति अलग-अलग होती है. ज़रूरी नहीं कि वे आपके दोस्त के बच्चे की तरह ही क्लास में अव्वल हो. हो सकता है आपके बच्चे में कोई ऐसा गुण हो, जो उसके बाक़ी साथियों में न हों. अतः दूसरों से अपने बच्चे की तुलना न करें.


यूं सिखाएं बच्चों को अनुशासन
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे में अच्छे गुण हों. चिल्लाने, डांटने-फटकारने, डराने या लालच देने से बच्चे सीखते कम हैं, उल्टा जवाब ज़्यादा देने लगते हैं. यहां जानें बच्चों को अनुशासन सिखाने के तरीक़े.

विकल्प तलाशें: ज़्यादातर समय अभिभावक बच्चों को यह बताते हैं कि उन्होंने क्या ग़लत किया, लेकिन बजाय इसके उन्हें यह बताना चाहिए कि वे कैसे इसे सही कर सकते थे. बच्चों को स्थितियों को ठीक करने के विकल्प देने से उनकी सोच और समझ विकसित होती है.

सीखने को प्रोत्साहित करें: रजनी बख्शी, साइकोलॉजिस्ट, मुंबई का कहना है,"बच्चों को डांट-फटकारकर मना करने से वे मान जाते हैं, लेकिन इस तरह से वे हार मानना सीखते हैं, न कि स्वीकार करना. उन्हें ग़लतियों से सीखने के लिए प्रेरित करें."

अच्छे कामों की प्रशंसा करें: उनकी छोटी-छोटी अच्छी आदतों, जैसे-लाइट बंद करना या चीज़ों को सही जगह रखना, को सराहने से उन्हें अच्छी आदतों को अपनाने में मदद मिलती है. वे अगली बार उस काम को करने के लिए प्रोत्साहित महसूस करते हैं.

नियमित रहें: आप किस मामले में उनसे क्या उम्मीद करती हैं, यह पहले ही स्पष्ट कर दें. यह बताने के अपने तरीक़ों पर क़ायम रहें. अपनी उम्मीदों और अनुशासनों के प्रति एक समान रवैय्या रखें.

न मारे, न लालच दें: रजनी के मुताबिक़,"डांट लगाने से गुरेज़ नहीं करना चाहिए, लेकिन हाथ उठाना किसी भी उम्र के बच्चे के लिए सही नहीं है. डांटते वक़्त भी माहौल और शब्दों का ख़्याल रखना बेहद ज़रूरी है."


कैसे सिखाएं बच्चों को शिष्टाचार?
बच्चों को बड़ों के साथ सलीके से पेश आने, दूसरों के स्पेस का ख़्याल रखने जैसे शिष्टाचार सिखाने में हम आपकी मदद कर रहे हैं. ये 5 चीज़ें सिखाकर आप अपने बच्चों को एक ज़िम्मेदार इंसान बना सकती हैं.

लोगों से मिलना-जुलना: कई बच्चे अजनबी लोगों से शर्माते हैं और अपनी असहजता को छिपाने के लिए वे आंख मिलाने और अभिभावदन करने से बचते हैं. अपने बच्चों को बड़ों से पेश आना सिखाएं, फिर चाहे वे रिश्तेदार हों, दोस्तों के अभिभावक हों या कोई भी दूसरा व्यक्ति, जिनसे वे मिलते हैं.

बड़ों का सम्मान करना: फिर चाहे बात सहायता करने की हो, बड़ों के बीच न बोलने और बोलते वक़्त अपनी बारी का इंतज़ार करने की हो. शुरू से ही घर के बड़ों के साथ इन नियमों का पालन करने के लिए कहें, ताकि यह उनकी आदत में शामिल हो जाए.

दूसरों के स्पेस का ख़्याल रखना: निजी और सार्वजनिक दोनों ही जगहों पर एक-दूसरे के स्पेस का ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी है. अपने बच्चों को इसका सम्मान करना सिखाएं. उदाहरण के लिए किसी के कमरे में प्रवेश करने से पहले खटखटाना न भूलें. या फिर जब सार्वजनिक जगहों पर हों तो दूसरों के लिए रास्ता छोड़ें.

इजाज़त लेना: बच्चों को दूसरों की चीज़ें छूने या इस्तेमाल करने से पहले उनकी इजाज़त लेना सिखाएं. उदाहरण के साथ उन्हें समझाएं-किसी के घर में जाने पर खाने का सामान लेने के लिए रेफ्रिजरेटर से सीधे सामान निकालने से पहले एक बार उनसे ज़रूर पूछें.

साझा करना: 'साझा करना ही असल में ख़्याल रखना है' बच्चों को सिखाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण पाठ है. उन्हें सिखाएं कैसे किताबें और अन्य चीज़ें दोस्तों के साथ साझा करना एक अच्छा विचार हो सकता है. घर में छोटी-छोटी चीज़ों को साझा करने से शुरुआत करें.


कामकाज़ी मां के लिए 15 मिनट फ़ॉर्मूला
एक कामकाज़ी महिला की ज़िंदगी में खाना बनाने से लेकर बच्चों की देखरेख करने और ऑफ़िस के लिए तैयार होने की भागदौड़ के बीच, जो एक बड़ी चीज़ सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ हो जाती है, वह है अपने बच्चों के साथ क्वॉलिटी समय बिताना. हम आपकी समस्या को समझते हैं और इसलिए विशेषज्ञों से बात कर हम पेश कर रहे हैं 15 मिनट की कुछ ऐसी गतिविधियां, जो आपके और बच्चे के बीच के रिश्ते को मज़बूत बनाएंगी.

15 मिनट के लिए सुनें: परवरिश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है-अपने बच्चे की बातों को शांति से सुनना. बच्चों का दिन आमतौर पर किसी न किसी के दिशा-निर्देशों पर चलता है, फिर चाहे वे माता-पिता हों, टीचर्स हों या कोई और बड़ा. सोने के समय उन्हें संवाद करने का अवसर दें. आपके इस सकारात्मक क़दम से वे अपनी भावनाओं को अच्छी तरह से अभिव्यक्त करना सीखते हैं और साथ ही वे बातचीत करना सीखते हैं.
15 मिनट के लिए खेलें: इससे पहले कि आप रात के खाने की तैयारी में जुट जाएं और बच्चे अपनी किताबों में गुम हो जाएं, उनके साथ उनका कोई पसंदीदा आउटडोर खेल खेलें या फिर साइक्लिंग करें.

15 मिनट के लिए करें बातचीत: फिर चाहे आप उनका कमरा ठीक कर रही हों, घर साफ़ कर रही हों या ग्रॉसरीज़ ख़रीद रही हों, इनसे अपने बच्चों को जोड़ना न केवल इन गतिविधियों को मज़ेदार बनाता है, बल्कि उन्हें अधिक ज़िम्मेदारपूर्ण बनाता है. उन्हें टीमवर्क की छोटी-मोटी बातें सिखाता है.

15 मिनट के लिए उन्हें दुलारें: स्पर्श एक ऐसी चीज़ है, जिस पर बच्चे सबसे ज़्यादा प्रतिक्रिया देते हैं. उन्हें पढ़ाते हुए पकड़े रखें, गले लगाएं या सोने से पहले उन्हें किस करें. ये हावभाव न केवल उन्हें आपके प्यार का एहसास कराएंगे, बल्कि तनाव को कम करने में भी मदद करते हैं.

15 मिनट के लिए कुछ भी न करें: यह समय ऐसा हो, जहां आप और आपके बच्चे दोनों को पूरी तरह आराम मिलना चाहिए, कोई घर का काम नहीं, न ही होमवर्क, खेलना या अन्य कोई भी गतिविधि. इस ख़ाली समय में यूं ही लेटे रहें या बुक में रंग भरें, संगीत सुनें या खिड़की पर बैठकर पक्षियों को देखें. कुछ समय तक इस तरह सुस्ताना आप दोनों को नई ऊर्जा से भर देगा.



कहीं आप भी दबाव बनानेवाले अभिभावक तो नहीं?
कहीं आप उन अभिभावकों में तो नहीं, जो अपने बच्चों पर बेवजह दबाव बनाकर न केवल उनका बचपना ख़त्म करते हैं, बल्कि भविष्य की कई समस्याओं का बीजारोपण भी करते हैं. यह आलेख पढ़िए और इन पॉइंट्स के ज़रिए जानिए कि आप कैसे अभिभावक हैं.

आप हमेशा कमियां निकालते रहते हैं
बच्चे को लगातार उसकी ग़लतियां बताने से उसपर दबाव बनता है. कल्पना करें, आपका बेटा घर आकर गर्व से बताता है कि उसे गणित में 20 में से 15 मार्क्स मिले हैं, और आप कहें,‘‘19 मार्क्स क्यों नहीं मिले?’’ सोचा है उसे कैसा महसूस होता होगा? आप संदेश देते हैं कि उसे पऱफेक्ट बनना होगा.

आपने उसे कई गतिविधियों का हिस्सा बना दिया है 
ज़्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को ढेर सारी गतिविधियों का हिस्सा बना देते हैं. कई बार वो गतिविधियां बच्चों के बजाय अभिभावकों की रुचि की होती हैं. यदि किसी चीज़ में आपकी रुचि है तो उसे बच्चों को सिखाने के बजाय, ख़ुद सीखें.

सारे निर्णय आप ही लेते हैं
आप घर के बड़े हैं. आपको घर से जुड़े फ़ैसले लेने का हक़ है. पर आपका बेटा क्रिकेट खेलना चाहता है और आप उसपर टेनिस चुनने का दबाव बना रहे हैं. आपकी इस ज़िद से वह घुटन महसूस कर सकता है.

आप बच्चे से कहते हैं
‘‘मैच में सबसे ज़्यादा रन नहीं बनाओगे तो कोच तुम्हें अगले मैच में नहीं लेंगे.’’ या ‘‘बेसिक गणित ही नहीं समझ पा रहे हो. कठिन सवाल कैसे करोगे?’’ इस तरह आप बच्चे को बता रहे हैं कि उसके पास चीज़ों को सही करने का सिर्फ़ एक ही मौक़ा है. बजाय इसके आपको कहना चाहिए ‘‘चिंता मत करो, जीवन में आगे बढ़ने के और भी मौक़े मिलेंगे.’’
बच्चे की दूसरों से तुलना करते हैं
बच्चे की दूसरे से तुलना करके आप उसकी उपलब्धियों को कम आंक रहे हैं और उसमें प्रतियोगिता की भावना भर रहे हैं. ऐसा न कहें,‘‘तुम्हारी बहन क्लास में टॉपर थी, क्योंकि वह हमेशा पढ़ती थी.’’

आप अक्सर ग़ुस्सा होते हैं
आप केवल इसलिए ग़ुस्सा होते हैं, क्योंकि बच्चा आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता. यदि ऐसा है तो यक़ीन मानिए आप उसपर बहुत ज़्यादा दबाव डाल रहे हैं.


 सीखें अच्छी सौतेली मां बनना
पति की पहली शादी से हुए बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें ये बात थोड़ी ट्रिकी हो सकती है. करीना कपूर ख़ान बिल्कुल वैसी ही सौतेली मां हैं, जिसे उनके बच्चे पसंद करते हैं और जिनसे इस बारे में कुछ सीखा जा सकता है.
आप उनकी मां नहीं हैं, इसे अच्छे ढंग से लें
बच्चों के पास अपनी ख़ुद की मां हैं, यदि आप उनकी मां की तरह बरताव करेंगी तो टकराव होगा. ‘‘मैं हमेशा ऐसा रिश्ता बनाए रखती हूं, जैसे हम दोस्त हैं. उनकी एक बहुत अच्छी मां हैं, जिन्होंने उनकी बेहतरीन ढंग से परवरिश की है,’’ करीना ने कई इंटरव्यूज़ में कहा है. ‘‘उन दोनों के पास अपने माता-पिता हैं, यदि उन्हें एक दोस्त की ज़रूरत है तो मैं हूं ही. सारा न्यू यॉर्क में दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है और अमूमन 99 प्रतिशत मार्क्स लाती है.’’

वाजिव आशाएं रखें
उनके दिलों में दर्द है अत: वे आपको पूरी तरह अपनाएं इससे पहले आपको सीखना होगा कि आप उनसे ज़्यादा अपेक्षाएं ना रखें. ‘‘अपने नए परिवार को समय दें, ताकि वे अपनी पृष्ठभूमि, रूपरेखा के अनुरूप आपको स्वीकार सकें वो भी बिना इस तरह का दबाव बनाए कि चीज़ें कैसी होनी चाहिए थीं,’’ कहना है ओपरा के थेरैपिस्ट डॉ फ़िल मैक्ग्रॉ का.
अनुभवों को बांटें
साथ-साथ समय बिताना, मसलन-महीने में एक बार मिलना, निश्चित रूप से आप लोगों को क़रीब लाएगा. करीना और सैफ़ अली ख़ान ने बच्चों को शादी की तैयारियों में शामिल किया था. ‘‘सारा मेरे लिए माला थामे हुई थी, जबकि इब्राहिम ने रिंग पकड़ी हुई थी,’’ सैफ़ कहते हैं. ‘‘करीना और मैं चाहते थे कि बच्चे हर चीज़ का हिस्सा बनें. किसी भी रिश्ते में प्यार और समझदारी की ज़रूरत होती है और यदि ये बातें हैं तो सभी लोग साथ रह सकते हैं.’’
उन्हें अपने पिता के साथ अकेले समय बिताने दें
आपके सौतेले बच्चे अपने पिता के साथ अकेले समय बिताना चाहते हैं. यह समय देना ज़रूरी है. जब आप पति को बच्चों के साथ समय
बिताने देती हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उनके स्नेह को लेकर आपमें और उनके बच्चों में कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है.
वर्ष 2014 में सात वर्ष की उम्र के 12,877 बच्चों पर किए गए ब्रिटिश सोशियोलॉजिकल ऐसोसिएशन के एक अध्ययन में पाया गया है कि सौतेले माता/पिता के साथ रह रहे बच्चे भी उतने ही ख़ुश पाए गए, जितने बायोलॉजिकल माता-पिता के साथ रह रहे बच्चे थे.‘
आप मेरी मां नहीं हैं’
‘‘जब कोई बच्चा ये कहे तो विश्लेषण कीजिए कि वो ऐसा क्यों कह रहा है,’’ कहते हैं साइकियाट्रिस्ट डॉ यूसुफ़ माचेसवाला. ‘‘इसमें पिता की भी भूमिका होती है. बच्चे से बात करें. कहें,‘मैं तुम्हारी मां की जगह लेने की कोशिश नहीं कर रही हूं. लेकिन यदि तुम्हें लगता है कि मुझमें कहीं कोई कमी है तो बताओ. हम समस्या के बारे में बात करके हल तो निकाल ही सकते हैं.’’

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