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वज्रासन


योग के आसन दूर कर सकते हैं डिप्रेशन

अक्सर किसी को खोने या जीवन में छोटी-बड़ी घटनाएं घटने से हम डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। कई बार हम लंबे समय तक इसे नजरंदाज करते रहते हैं। इस तरह ना तो हम प्रफेशनली अपना बेस्ट दे पाते हैं और न ही निजी जिंदगी में खुश रह पाते हैं। ऐसा माना गया है कि डिप्रेशन का इलाज योग में भी है। आइए जानें कि किस तरह दिनचर्या से कुछ वक्त निकालकर योग के जरिए हम डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं- 

उत्तनासन- इस आसन के जरिए हम अपने मन-मस्तिष्क को एकाग्रता की ओर ले जाते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस आसन को 2-2 मिनट के अंतराल पर करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। आसन में आपको सीधे खड़े रहकर अपने पैरों की ओर झुकना है और दोनों हथेलियां पंजों के करीब रखनी हैं। याद रहे पीठ को उतना ही लचीला रखें जितने में आप हाथ को पंजों के करीब ले जा सकें। 

जनुसिर्सान- इस आसन को करने से मस्तिष्क में सकारात्मकता का सृजन होता है। निरंतर अभ्यास के बाद आप खुद को तरो-ताज़ा और ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं। आसन को बैठकर हाथ आगे की ओर ले जाएं और पैरों को सीधा रखें। 


भुजंगासन- दिमाग को शांत कर नए सकारात्मक विचारों को अंदर लाने में मदद करने वाला यह आसन डिप्रेशन मरीजों के लिए बेहद लाभदायक है। ख़ास बात यह है कि इस आसन को नियमित करने से लिवर और किडनी ठीक से काम करते हैं। आसन को करने का तरीका है कि आप पेट के बल लेट जाएं और गर्दन से कमर तक के हिस्से को उठाए रखें। ध्यान रहे इस क्रिया में आपके हाथ ज़मीन पर ही रहेंगे, बस कमर से चेहरे तक का हिस्सा उठा हुआ रहेगा। ऐसा लगभग 5-15 मिनट तक अपनी सुविधानुसार करें। 

सेतुबंधसर्वांगासन- एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस आसन से आप शारीरिक-मानसिक संतुलन को मजबूत करते हैं। सीधे पीठ के बल लेटकर पैरों को ऐसे रखें कि जैसे आप बैठे हुए हैं। यह क्रिया कुछ वक्त तक निरंतर दोहराएं। इससे फेंफड़ों और स्वसन क्रिया पर भी सकारात्मक असर दिखता है। 
सलंबसिर्सासन- हालांकि यह आसन थोड़े से कठिन आसनों में आता है पर निरंतर अभ्यास से इसे करना काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इसमें आपको घुटनों पर पहले बैठ जाएं, फिर पूरे शरीर का बल हाथों पर लेते हुए पैरों को ऊपर उठाते हुए खुद को उल्टा खड़ा कर लें। यह क्रिया 10-15 सुविधानुसार नियमत करें।





वज्रासन


यह ध्यानात्मक आसन हैं। मन की चंचलता को दूर करता है। भोजन के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन हैं। आजकल अधिकतर लोगो की जीवनशैली अनियमित हो चुकी है| काम की व्यस्तता के चलते लोगो ने अपने शरीर पर ध्यान देना बिलकुल ही छोड़ दिया है| ना ही कोई व्यायाम को समय देता है और ना ही अच्छा खानपान लेता है| और हम सभी जानते है की अधिकतर लोगो का कार्य घंटो बैठने का होता है, जिसके चलते शरीर पर चर्बी जमना सामान्य बात है| और सबसे ज्यादा चर्बी जमती है पेट और कुलहो पर|

इसके अतिरिक्त तनाव भी शरीर पर वसा जमने का एक मुख्य कारण है| शरीर पर जमा हुआ वसा ना केवल आपको बेढोल दिखाता है बल्कि इससे कई बीमारिया होने का खतरा भी रहता है| मोटे शरीर वालो को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल आदि होने की सम्भावनाये रहती है|

इन सभी बीमारियों से दुरी बनाने और शरीर की चर्बी घटाने के लिए अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए| योग आपके शरीर को छरहरा रखने और मन को तनाव मुक्त रखने का सबसे अच्छा तरीका है| योग करने में आपको किसी तरह का व्यव भी नहीं लगता है| पेट की चर्बी को कम करने के लिए, पाचन को सुधारने के लिए योगासनों में वज्रासन सबसे प्रभावी है|

विधि -स्थिति में आइए ,पैरो को सामने सीधा का बैठ जाइए अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर नितंब के नीचे ले जाइए इसी तरह बायें पैर को भी मोड़कर नितंब के नीचे रखेंगे ,घुटनो को पास रखिए, मेरुदण्ड बिल्कुल सीधा रखिए, सिर ,कंधे ,नितंब एक सीध में,हाथों को घुटनो पर रखिए, आँखे बंद रखते हुए कुछ देर इसी तरह बैठिए।

साबधानी- घुटनों में दर्द होने की स्थिति में यह आसन न करें।

लाभ -वज्र अर्थात कठोर या मजबूत ,यह पैरो जांघों की मासपेशियों को मजबूत बनाता है,रक्त संचार तेज करता है,पाचन क्रिया सुधारता है । पीठ में और कमर में दर्द रहने वाले रोगियों में वज्रासन बहुत ही लाभप्रद है. ध्यान मुद्रा के लिए भी वज्रासन बहुत ही लाभप्रद है क्योंकि इसमें मेरूदंड सीधा होता है यही एकमात्र ऐसा आसन है जिसे आप खाना खाकर भी कर सकते हैं ।कब्ज व गैस में बहुत अधिक लाभकारी है।


वज्रासन सामान्य रूप से बैठकर किया जाना जाने वाला योग है. इस योग में जंघाओं, घुटनों, पैरों एवं कोहनियों का व्यायाम होता है. इस मु्द्रा से शरीर का पीछला भाग संतुलित रहता है. शरीर को सुडौल बनाए रखने के लिए भी यह योग लाभप्रद होता है.
विधि 
घुटने टेक कर ज़मीन पर बैठें. घुटनों के ऊपरी भाग हिप्स से लगे हों और तलवों के ऊपरी भाग ज़मीन से लगे हों.
सांस छोड़ते हुए अपने एड़ियों पर बैठें.
अपने हाथों को जंघाओं के ऊपर घुटनो के करीब रखें.
कंधे व शरीर के ऊपरी भाग आरामदायक स्थिति में होने चाहिए और मेरूदंड सीधा एवं तना होना चाहिए.
सिर को सीधा रखें और सामने देखना चाहिए.
इस मु्द्रा में 30 सेकेंड से 1 मिनट तक बने रहें.

लाभ 
जिन्हें पीठ में और कमर में पीड़ा रहती है उनके लिए वज्रासन बहुत ही लाभप्रद योग है
ध्यान मुद्रा के लिए भी वज्रासन बहुत ही लाभप्रद है क्योंकि इससे मेरूदंड सीधा होता है
शरीर का ऊपरी भाग रिलैक्स महसूस करता है.

निर्माण 
जब घुटनों अथवा टखनों में किसी प्रकार की परेशानी हो उस समय वज्रासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए.
योगासन: 
बैठ कर करने वाले आसनhttps://www.healthsiswealth.com/ 

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