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बेवफाई शायरी


बेवफाई शायरी




तमन्ना जब किसी की नाकाम होती है,

जिन्दगी उस की एक उदास शाम होती है,

दिल के साथ दौलत ना हो जिस के पास,

महोब्बत उस गरीब की निलाम होती है .. ...





उनकी महोब्बत के अभी निशान बाकी है,

नाम लब पर है और जान बाकी है,

क्या हुआ अगर देख कर मुँह फेर लेते है,

तसल्ली है की शकल की पहचान बाकी है. .

मौत पर कविता


मौत माँगते है तो जिन्दगी खफा हो जाती है,

जहर लेते है तो वो भी दवा हो जाती है,

तू ही बता ऐ दोस्त क्या करूँ,

जिसको भी चाहा वो बेवफा हो जाती है..




रोना पडता है एक दिन मुस्कुराने के बाद,

याद आती है वो दुर जाने के बाद,

दिल तो दुखता ही है उसके लिए,

जो अपना ना हो सका....

.... इतनी महोब्बत जताने के बाद



दिल के जख्मों को उनसे छुपाना पड़ा,

पलके भीगीं थी पर मुस्कुराना पड़ा,

कैसे उल्टे हैं महोब्बत के ये रिवाज?

रूठना चाहते थे पर उनको मनाना पड़ा.. ...




अर्ज अब भी है खुदा से ऐ बेवफा,

मेरे दामन की दुआ तुझको मिल जाए,

करना हो ख़ाक तेरा आशियाँ जिसको,

वो बिजली मेरे नशेमन पे गिर जाए.. ...





Chaman Se Bichhda Hua Ek Gulab Hoon,

Main Khud Apni Tabaahi Ka Jawaab Hoon,

Yoon Nigaahein Na Fer Mujhse Mere Sanam,

Main Teri Chahaton Mein Hi Hua Barbaad Hoon. ..

बेवफा शेर शायरी


Bahut Log Puchte hai ke,

Kaun Bewafa Hai Jo Teri Yeh Halat kr Gaya

Me Muskura kar Kehti Hu

Uska Naam hr Kisi Ke Lab Par Accha Nahi Lgta...


टीस बाकि है शायद दिल के किसी खाने में.
अभी तकलीफ बहोत होती है मुस्कुराने में..
वक्त के साथ सबके चेहरे बदल जाते हैं ,
डर सा लगता है अब तो दोस्त भी बनाने में..
जो न ढाला खुद को वक्त के टकसाल में,
चला है ऐसा सिक्का कब इस ज़माने में..
शमा दिया था खुदा ने रौशनी लुटाने को,
लगा दिया है उसे नशेमन जलाने में..
शहर के तौर-तरीके हमने सीखा न
लूट गए हैं हम तो वफायें निभाने में..


उन्हें चाहना हमारी कमजोरी है,

उनसे कह नही पाना हमारी मजबूरी है,

वो क्यूँ नही समझते हमारी खामोशी को,

क्या प्यार का इज़हार करना जरूरी है..






हम कभी मिल ना पाऐ तो माफ करना,

आप को याद ना कर पाऐ तो माफ करना,

इस दिल से तो कभी हम भुला ना पायेंगे आपको,

पर ये दिल ही अगर रूक जाऐ तो माफ करना..



बिन बात के ही रूठने की आदत है;

किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;

आप खुश रहें, मेरा क्या है;

मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।

बिन बात के ही रूठने की आदत है;

किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;

आप खुश रहें, मेरा क्या है;

मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।

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