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महिलाओं को दे रहा गठिया रोग

क्या आपको मालूम,टीवी-मोबाइल महिलाओं को दे रहा गठिया रोग

प्रयागराज/इलाहाबाद:झाड़ू-पोछा, बर्तन धोने के लिए बाई लगी है। कपडे़ धोने के लिए आटोमैटिक मशीन है। सिर्फ खाना ही पकाना है या सामने बनवाना है… ऐसी आरामतलब जिंदगी में लगातार टीवी या मोबाइल फोन देखने वाली महिलाएं आर्थराइटिस यानी गठिया की मरीज बन रही हैं। उन्हें बुढ़ापे का यह रोग 30 से 35 वर्ष की उम्र में ही घेर रहा है। शरीर के जोड़ों में दर्द, गठिया, मांसपेशियों में दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंची महिलाओं में एक बात लगभग एक सी रही कि वह सप्ताह में पांच दिन या अधिक टीवी के सामने रहीं या उनके हाथ में मोबाइल फोन रहा। साफ है टीवी और फोन महिलाओं को गठिया का रोगी बना रहा है।
केस एक- सिविल लाइंस के एक अपार्टमेंट में रहने वाली तूलिका (बदला नाम) के कमर में दर्द बना रहता है। अब नसों का खिंचाव गर्दन से सिर तक पहुंच गया है। हाथों की उंगलियों में सूजन है। पैथालॉजी जांच में यूरिक एसिड बढ़ा आया, कैल्शियम की कमी भी मिली। कारण बना टीवी, वह शाम छह से साढ़े नौ बजे तक सीरियल देखती हैं। दिन में मोबाइल फोन पर हाथ चलता है।

केस दो- बैंक कर्मी हर्षिता (बदला नाम) दिन में पांच घंटे कंप्यूटर पर काम करती हैं। बीच-बीच में मोबाइल पर भी नजर रहती है। मैसेज करने में उंगलियों का चलाना और गलत तरीके से कुर्सी पर बैठना उनकी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बना है। बारिश के बाद नमी बढ़ी तो दर्द से कराहने लगीं। डॉक्टरों ने दवाओं से दर्द कम किया फिर फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी।

केस तीन- गृहणी मंजरी (बदला नाम) गृहणी हैं। जार्जटाउन में उनका फ्लैट है, लेकिन घरेलू काम न के बराबर। शरीर का वजन तो बढ़ा ही, मांसपेशियों में खिंचाव के साथ घुटनों में सूजन आ गई। अब कमर से गर्दन तक दर्द परेशानी का कारण बना है। दो से तीन घंटे टीवी देखना और मोबाइल पर चैटिंग करना उनकी आदत में शामिल हैं। नतीजा आर्थराइटिस के रूप में सामने है।
महिलाएं ही नहीं युवा और बच्चे भी पीड़ित
अनियमित दिनचर्या, कंप्यूटर के सामने घंटों बैठना, मोबाइल पर चैटिंग, बाइक का चलाना युवाओं बुढ़ापे के रोग से पीड़ित कर रहा है। इस बदले मौसम में बुजुर्गों के साथ युवा भी उंगलियों में सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। यही नहीं 63 फीसदी स्कूली बच्च्चे भी मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बता रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बस्ते का बोझ और मोबाइल का इस्तेमाल है। एम्स के डॉक्टरों ने स्कूली बच्चों पर किए गए एक अध्ययन के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया। दस से 19 वर्ष तक के बच्चों में कई को कमर और कूल्हे के साथ गर्दन में भी दर्द की शिकायत रही। यहां भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। बच्चों को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे अभिभावकों ने भी इसी तरह की परेशानियां बताईं।

महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। टीवी, मोबाइल के साथ खानपान में ध्यान नहीं देतीं। वहीं बच्चों को पौष्टिक आहार न मिलने और उनकी जीवनशैली संतुलित न होने के कारण तकलीफें बढ़ रही हैं। व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करेंगे तो परेशानी पास नहीं फटकेगी।
डॉ. जितेंद्र जैन, हड्डी रोग और सेरेब्रल पालसी विशेषज्ञ
अनियमित दिनचर्या और मोबाइल की लत गठिया रोग बांट रही है। मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द का कारगर इलाज दवा नहीं फिजियोथेरेपी है। शारीरिक श्रम में कमी, तनाव से बढ़ता वजन शरीर के भार वाले हिस्से के जोड़ों को जकड़ रहा है। पीड़ितों में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के मुकाबले लगभग दोगुना है।


तनाव और चिंता को दूर करने के लिए करें ये योग,होंगे और ये भी फायदे

आज के इस दौर कई लोग तनाव व मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहें है जो की हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की तरह ही बराबर ध्यान मांगता है।

आपको मानसिक स्वास्थ्य पर समान ध्यान देने की जरूरत है। चिंता, अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से लड़ने के लिए कई तरीके हैं।

मानसिक रोगों के जोखिम को कम करने के लिए योग:प्राकृतिक रूप से कई मानसिक रोगों के जोखिम को कम करने के लिए योग एक और बेहतर तरीका हो सकता है। योगा आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैतनाव और चिंता को दूर करने के लिए करें ये उपाय एक्सरसाइज आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

आप अपनी व्यस्त जिंदगी होन के बावजूद भी अपने शरीर और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाएं रखने के लिए जरूरी समय देना काफी जरूरी है. हो सकता है आप ध्यान दे भी रहे हों लेकिन क्या आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे पाते हैं। आज वर्ल्ड हेल्थ मेंटल डे है।
योग आपको मन को मजबूत करने में मदद करते है:हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की तरह ही बराबर ध्यान मांगता है। अगर आप अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर 1 घंटा लगा रहे हैं तो मानसिक स्वास् पर इताना समय बिताने की जरूरत है। ऐस में योग आपको मन को मजबूत करने में मदद करते है।

योग से आप अपनी मानसिक बीमारियों को कम करने में मदद पा सकते हैं। अगर आपका मानसिक स्वास्थ्य आपका साथ दे रहा है तो आप वह हासिक कर सकते हैं जो आप चाहते हैं।

लाइफ पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना:इसी के बिपरीत अगर आप मानसिक रूप से बीमार हैं तो आपकी लाइफ पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना लाजमी है। यहां कई सारी योग और आध्यात्मिक साधनाएं बताई गई हैं जिन्हें हम अपने मन की शक्ति और स्वास्थ्य के लिए अपना सकते हैं।

आप कुछ तकनीकों और व्यायामों को हर दिन कुछ मिनट करके मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक बीमारियों जैसे स्ट्रेस, चिंता को दूर करने के लिए अपना सकते हैं


सावधान:आप कैल्शियम या विटामिन की गोलियां खाते हैं?तो ये खबर आपके लिए है जरूरी

दिल्ली:आजकल हर चीज़ में मिलावट है, जिसके चलते लोगों में बीमारियां बढ़ती जा रही हैं. इम्यूनिटी कम हो रही है और शरीर कमज़ोर. इस कमज़ोरी को ठीक करने के लिए लोग विटामिन्स की गोलियों का सहारा लेते हैं. लेकिन एक रिसर्च में पता चला है कि विटामिन और मिनरल की गोलियों से सेहत में कोई खास फायदा नहीं होता है.

रिसर्च के अनुसार आमतौर पर खाने में मिलने वाले पोषक तत्वों की भरपाई के लिए लोग विटामिन और मिनरल की गोलियां लेते हैं जिससे सेहत में कोई खास फायदा नहीं होता है. हालांकि इससे कोई नुकसान भी नहीं होता है.


कनाडा में सेंट माइकल अस्पताल और टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि पूरक आहार के तौर पर मल्टीविटामिन , विटामिन डी , कैल्शियम और विटामिन सी सबसे अधिक लिया जाता है. इससे कोई लाभ नहीं मिलता. हालांकि इससे किसी तरह का कोई खतरा भी नहीं होता है.

जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता डेविड जेनकिन्स ने कहा, ‘‘हम यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि लोग आमतौर पर जो पूरक आहार लेते हैं , उसके बहुत ही कम सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते है.’’

जेनकिन्स ने बताया , ‘‘ हमारे अध्ययन में यह पाया गया कि अगर आप मल्टीविटामिन , विटामिन डी , कैल्शियम या विटामिन सी लेते हैं तो यह नुकसानदेह नहीं है. हालांकि इसका कोई स्पष्ट फायदा भी नजर नहीं आता है.”


 डाइट के अब वजन कम करना हुआ आसान,पोषण विशेषज्ञ ने खोजा प्राकृतिक उपाय!

बात हम वजन कम करने को लेकर करें तो आपको बतादें की अब तक का हमारे बड़ा वास्तविक उदाहरण अंजली जैसे एथलीट का सबसे बुरा अनुभव था। वह अपने करियर के अंतिम चरम पर थी, दो महीने पहले उसे देश के लिए एक एथलीट के रूप मे चुनना था।

उसे खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं, उसे काफी तनाव होने लगा, जिसकी वजह से तनाव और चिंता को कम करने के लिए वह दवाइयों का सेवन करने लग गई। उसे अंदाजा नही था कि तनाव कम करने का यह तरीका उसके करियर मे रुकाबट बन सकता है,और ऐसा ही हुआ।

उसका वज़न बढ़ना शुरू हो गया। वह अपनी फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पा रही थी, और दिन पर दिन सुस्त और आलसी होती गई। शायद ही उसे पता था कि तनाव कम करने वाली दवाईयां उसके लिए ऐसा कर रही हैं। हर दिन उसके अत्यधिक तनाव में रहने के कारण, उसने तनाव कम करने वाली गोलियों की खुराक बढ़ा दी, जिससे उसका वज़न और बढ़ता गया।
प्रतियोगिता में बाकी सभी से पहले दौड़ पूरी
उसकी दौड़(Race) से तीन दिन पहले, उसका प्रशिक्षक(Trainer) उसकी स्तिथि देखकर उसे इस कार्यक्रम में जाने और यहाँ तक कि दौड़ पूरी करने के प्रश्न पर बहुत परेशान था। “जीतना यहाँ सवाल ही नहीं है। मैं संतुष्ट होऊंगा, कि आप कम से कम प्रतियोगिता में बाकी सभी से पहले दौड़ पूरी कर पाओगी, ”ट्रेनर ने कहा।


अंजली के लिए, यह सबसे अनपेक्षित बयान था, जो वह कभी अपने ट्रेनर से सुनना चाहेगी। वह इस दौड़(Race) को जीतना चाहती थी जब से वह खेल में आई थी और अब जब उसके प्रदर्शन का समय था, तो उसका शरीर साथ नहीं दे रहा था।

बढ़े हुए वजन के कारण वह जल्दी थक जाती थी और सांस लेने के लिए बहुत संघर्ष करने लगती थी। वह जानती थी कि वह फिट नहीं है, लेकिन उसे ऐसा करना ही था, क्योंकि उसे इस तथ्य से उबरना था कि वह मोटापे का शिकार हो रही है, और उसका एकमात्र सपना अब उसकी नज़रो से दूर होता जा रहा था।
अंजली बचे हुए अधिकांश खेलों से बाहर


घटना को एक साल बीत चुका है और अंजली अभी भी उस दिन को नहीं भूल पा रही है जब सांस की कमी के कारण वह दौड़ के बीच में गिर गई थी। अपने करियर में एक बड़े झटके के बाद, अंजली बचे हुए अधिकांश खेलों से बाहर हो गई थी।
उसे अनफिट घोषित कर दिया गया था और वह बहुत उदास हो गई उसे ऐसा लगने लगा कि अब कुछ भी नहीं बदल सकता था। तनाव कम करने वाली गोलियों पर उसकी निर्भरता के कारण उसका वज़न और बढ़ता गया,एक साल बाद उसका वजन 109 किलोग्राम था। “मुझे पता था कि मैं भारी और अनफिट थी। अपने मोटापे के कारण, मैं आलस्य और नकारात्मकता की ऊंचाइयों पर पहुंच गई थी। मैं अपने आप को उदास और नाकारा महसूस करने लगी। ”
अंजली के डॉक्टर ने उसे बताया कि
एक नियमित स्वास्थ्य जांच में, अंजली के डॉक्टर ने उसे बताया कि अब समय आ गया है कि वह अपने स्वास्थ की तरफ ध्यान दे और बढ़ते हुए वज़न को गंभीरता से ले, अन्यथा वह जल्द ही अन्य स्वास्थ सम्बन्धी बीमारियों का शिकार हो सकती है, जैसे मधुमेह और ह्रदय रोग। मेरे डॉक्टर शुरू से ही बहुत सहायक रहे हैं। पर इस बार मेरे शरीर की स्तिथि देखकर जिस प्रकार उन्होंने अपनी राय दी, उसने मुझे भयभीत कर दिया।”


बिना कपडे के सोने कई है फायदे

वर्ल्ड मीडिया टाइम डेस्क : कपड़े पहनकर सोने की अपेक्षा बिना कपडे पहनकर सोना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इस बात का दावा स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों ने किया है। सेहत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नग्न सोना शरीर का तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और आप रात में अच्छी नींद ले पाते हैं।


डेली मेल’ की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल स्लीप फाउंडेशन के पोल के अनुसार अमेरिका में केवल 8 फीसदी लोग ही नग्न होकर सोना पसंद करते हैं।

‘मेन्स हेल्थ’ की नींद से जुड़े परामर्शदाता डब्ल्यू क्रिस्टोफर विंटर (एमडी) का कहना है कि आपके शरीर का तापमान पूरी रात कम-ज्यादा होता रहता है। जैसे ही आप नींद की आगोश में जाते हैं आपका शरीर ठंडा पड़ने लगता है और जैसे-जैसे आप जगने के करीब आते जाते हैं आपका शरीर धीरे-धीरे गर्म होने लगता है।
विंटर का कहना है कि आपके शरीर का तापमान गिरने पर रात के समय पहने गए कपड़े आपको गर्म महसूस होने लगते हैं जिसके चलते आप करवट बदलने लगते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिना कपड़ों के सोने के कई फायदे हैं। पत्रिका ‘डॉयबिटीज’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक नग्न सोने से वजन कम करने में मदद मिलती है।
‘मेन्स हेल्थ’ के अनुसार गहरी नींद आपकी उपापचय (मेटाबोलिज्म) को तेज करने के साथ ही आपके गर्दन में एकत्रित ब्राउन फैट की उत्पादकता को बढ़ता है। यह ब्राउन फैट आपके शरीर को गर्म करने के लिए कैलोरिज बर्न करता है।
न्यू जर्सी के अटलांटिक सिटी के यूरोलोजिस्ट ब्रायन स्टेक्सिनर का कहना है कि नग्न होकर सोने से निजी अंगों की सुरक्षा होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पायजामा और अन्त: वस्त्र अपने अंदर गर्मी और नमी को बनाए रख सकते हैं। इससे बैक्टीरिया के उत्पन्न होने का खतरा बना रहा है। पुरुष और महिला दोनों यदि हवादार जगह पर सोते हैं तो उनके जननांग ज्यादा स्वस्थ होते हैं।
‘मेन्स हेल्थ’ के मुताबिक नग्न सोना शुक्राणु की उत्पादकता बढ़ाता है। कसे हुए अंत: वस्त्र और गर्म अंडकोष शुक्राणु के लिए ठीक नहीं माने जाते। यही नहीं अच्छी नींद तनाव के हार्मोन कॉर्टिसोल को नियंत्रित करने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के साथ नग्न अवस्था में सोने पर ऑक्सीटोसीन का स्तर बढ़ता है।


कई बीमारियो की अचूक दवा है गाय का दूध


शास्त्रों में कहा गया है की गाय के दूध मेंं अमृत और मांस में विष होता है। प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान में कहा गया है कि शुद्ध आहार खाने वाली गाय का दूध पीने से असमय खो चुका यौवन भी लौट आता है। लेकिन इसके अलावा भी इसके कई फायदे हैं। सिर्फ एक गिलास गाय का दूध कितना फायदा प हुंचा सकता है आप भी जानिए
गाय का दूध पीने से पेट में गैस बनने की समस्या खत्म होती है और इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।
पीलिया – गाय के दूध से बने 50 ग्राम दही में 10 ग्राम हल्दी का चूर्ण मिलाकर रोज सुबह खाली पेट खाने से पीलिया में आराम मिलता है।
गाय का दूध बीमारियों के साथ साथ चेहरे की सुंदरता को भी निखारता है। गाय के दूध में मसूर की दाल और बेसन को भिगोकर रात भर के लिए रख दें। सुबह इन्हें पीस कर पेस्ट बना लें। इसे नियमित तौर पर लगाने से मुंहासे, चेचक के दाग, चेहरे पर बाल और झाइयां खत्म हो जाती हैं।
बबासीर – गाय के दूध से बने घी में जायफल को घिस लें। इस मिक्सचर को बबासीर के मस्सों पर लगाने से उनका दर्द खत्म हो जाएगा।
अगर बाल झड़ रहे हैं और गंजापन आ रहा है तो गाय के दूध से बना म_ा कुछ दिन रखकर इससे बाल धोएं, इससे बालों के झडऩे की समस्या दूर होगी।
खूनी बवासीर – आयुर्वेद के अनुसार गाय के दूध की छाछ में मसूर की दाल का उबला पानी मिलाकर पीएं। इससे भी बवासीर में रक्तस्राव में आराम मिलता है।
कब्ज – गाय के दूध से बनी ताजी छाछ (250 मी.ली.) के साथ लगभग 5 ग्राम अजवाईन का चूर्ण मिलाकर सुबह सुबह खाली पेट पिए। कब्ज में आराम होगा।
अगर मुंह में छाले परेशान कर रहे हैं तो रात को सोने से पहले इन छालों पर खूब सारी मलाई लगाएं। छाले ठीक हो जाएंगे। यदि सुबह के समय गाय के दूध से बने दही के साथ पका हुआ केला खाएंगे तो मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।
एग्जिमा से त्वचा खराब हो रही है तो सूती कपड़े की पट्टी बनाकर इसे गाय के दूध में भिगोए और एक्जीमा वाली जगह पर दस मिनट के लिए बांध दें। एक हफ्ते तक ये पट्टी करें, देखिए एक्जीमा और उसकी खुजली गायब हो जाएगी।



थकावट दूर करने को आजमाएं ये फिटनेस टिप्स


अगर आप ऑफिस में दिनभर चेयर पर बैठकर काम करते-करते, थोड़ी दूर पैदल सफर करने के बाद मन में आलस,सुस्ती या यंू कहें ढीलापन आप पर भी हावी होता होगा। तो इससे घबराइए नहीं, कुछ आसान टिप्स जो आपको कर देंगे एकदम तरोताजा।
अगर आप ऑफिस में ज्यादातर बैठे रहते हैं और खुद में आलस्य महसूस करते हैं तो इस आलस को भगाने के लिए सबसे अच्छा उपाय हो सकता है आपका लंच ब्रेक। जी हां, आप अपने लंच ब्रेक में छोटी से वॉक पर जा सकते हैं या साइकिल चलाकर खुद को बूस्ट कर सकते हैं। है न ये कमाल का आइडिया?
हल्का भोजन करना आपको फिट रखेगा। दोपहर में लंच के समय ध्यान रहे कि आपके खाने में 500 कैलोरीज से ज्यादा न हों। इससे कैलोरीज को पचाने में कम एनर्जी खर्च होगी और आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे।
हम में से ज्यादातर लोग कॉफी पीना पसंद करते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि काफी आपके लिए सेहत की पुडय़िा साबित हो सकती है। दरअसल, कॉफी पीने के बाद 15 से 30 मिनट तक एक छोटी से नींद ली जाए, तो कॉफी आपको एनर्जी से भर देती है। बेस्ट रिजल्ट के लिए ब्लैक कॉफी पिएं।


जैसा कि सभी बड़े बुजुर्ग अक्सर सलाह देते हैं कि सुबह का नाश्ता हो सके तो अच्छे से करो। ये बात बिलकुल सही है। अगर आप सुबह प्रोटीन युक्त नाश्ता करते हैं तो आपको इससे भरपूर एनर्जी मिलती है।
पुरानी कहावत है कि जल ही जीवन है। ये एकदम सच है। आपके शरीर के सारे अंगों को सही रूप से काम करने के लिए पानी की जरूरत होती है। इसलिए जितना हो सके, ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और अपने आप को चुस्त दुरुस्त महसूस करें।
आज हर जगह लोग धूप से बचते नजर आते हैं। लेकिन ठहरिए, ऐसा करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। धूप से हमें भरपूर मात्रा में बिटामिन मिलता है। जो हमारे शरीर की एनर्जी को बरकरार रखने के लिए रामबाण होता है। कम से कम सुबह के समय घर की खिड़कियां, रोशनदान खुले रखिए। ताकि कुछ धूप अंदर आ सके।
कार्डिफ विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया है कि फाइबर युक्त खाने से हमें जो एनर्जी मिलती हैं वो ज्यादा देर तक शरीर में ठहरती है। इसलिए लिए खाने में ज्यादा से ज्यादा फाइबर मील इस्तेमाल करना लाभदायक होगा।
शरीर की एनर्जी के लिए बिटामिन क्च बेहद जरूरी है। इसके लिए आप किसी डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

सिरदर्द की परेशानी से जल्द मिलेगा छुटकारा, अपनाएं ये उपाय
सिरदर्द की परेशानी से तुरंत राहत पाने के लिए योग कारागार उपाय है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी से भी आप सिरदर्द जैसी समस्या में आराम पा सकते है।

अक्सर सिरदर्द की समस्या से कई लोग झूझते रहते है। ज्यादातर काम-काज का प्रेशर रहने से सिरदर्द जैसी परेशानी होती है तनाव, पर्याप्त नींद नहीं लेना, ज्यादा शोर, फोन पर ज्यादा देर बात करना, ज्यादा सोचना, थकावट, सिर में रक्तप्रवाह कम होना जैसे कई कारणों से अक्सर हम सिरदर्द जैसी परेशानी से झूझते है।

बता दें कि नियमित दो बार 10-20 मिनट ध्यान करने से शरीर व मन दोनों को आराम मिलता है। सिर में रक्तप्रवाह बढ़ता है। जिसके कारण आप सिरदर्द की परेशानी में राहत मिलती है।

सिर दर्द की समस्या से छुटकारा पाने के लिए बेहतर होगा की आप शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाए जिससे बचने के लिए अच्छा होगा की आप पर्याप्त मात्रा में पानी पिए जिससे आप खुद को सिरदर्द की परेशानी से बचा सकते है।

मसल्स और शरीर में खिंचाव रहने से भी सिर दर्द होता है ऐसे में बेहतर होगा की आप थोड़े-थोड़े अंतराल पर स्ट्रेचिंग करें ऐसा करना बेहतर होगा। इन उपायों को करके आप सिरदर्द की परेशानी में राहत पा सकते है। सिरदर्द की परेशानी से तुरंत राहत पाने के लिए योग कारागार उपाय है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी से भी आप सिरदर्द जैसी समस्या में आराम पा सकते है।


जाने, लड़कियों की वर्जनिटी को लेकर क्या सोचते है लड़के
भारतियों में आपने अक्सर एक बात नोटिस करी होगी कि वह सेक्स लाइफ पर खुलकर बात बहुत कतराते है। उनके मन में क्या चल रहा है वो खुल कर नहीं बता पाते है।

नई दिल्ली : भारतियों में आपने अक्सर एक बात नोटिस करी होगी कि वह सेक्स लाइफ पर खुलकर बात बहुत कतराते है। उनके मन में क्या चल रहा है वो खुल कर नहीं बता पाते है। हालांकि बदलते जीवन शैली और समय के साथ अब कुछ लोगों ने इस पर खुल कर बात करना शुरू कर दिया है। ऐसे लोग अब सेक्स लाइफ के बारे में बात करने में या अपने जीवन में घटी ऐसी कोई घटना बताने में अब काम कतराने लगे है।

लेकिन आपको बता दें कि अभी हाल ही में एक जानकारी के मुताबिक पता चला है कि बस 60 फीसदी लोग अपनी सेक्स लाइफ को लेकर संतुष्ट दिखाई देते हैं। बाकी यहीं सोचते रह जाते है हमारी पार्टनर वर्जिन है या नहीं या फिर उसके साथ रिलेशन में हमें संतुष्टि मिलेगी या नहीं। इन सब के चलते 40 फीसदी लोग इसी सोच में रहते है। आपको बता दें कि पार्टनर की वर्जिनिटी का विषय आज भी गंभीर बना हुआ है।

इनका कहना है कि रिलेशनशिप में आने के लिए पार्टनर की वर्जिनिटी काफी मायने रखती है। भारतीय सोच में कितने भी उचाई पर पहुँच जाए लेकिन वर्जिनटी के बारे में उनकी सोच हमेशा एक जैसी ही बानी हुई रहती है कि लड़किया वर्जिन होना चाहिए अगर वो वर्जिन नहीं है तो जरूर ये बेकार होगी या कुछ और। साथी ही आपको ये भी बता दें कि, भारत में 53 फीसदी लोग अपने पार्टनर की वर्जिनिटी को बहुत गंभीरता से लेते हैं। साथ ही ज्यादा तर लोग रिलेशन में आने से पहले लड़कियों की वर्जिनिटी पर ज्यादा गौर करते है।


हर तरह की खांसी में काम नहीं आएगा एक तरह का सिरप
खांसने से आपके फेफड़ों की नलियों में छिपी हानिकारक चीजें साफ होती हैं। लेकिन कई कफ वायरल इंफेक्शंस जैसे कोल्ड और फ्लू से पैदा होते हैं।

बदलते मौसम के साथ जुकाम-खांसी आम समस्या है। खांसी एक नैचरल रिफ्लक्स है जो आपके लंग्स की सुरक्षा करती है। खांसने से आपके फेफड़ों की नलियों में छिपी हानिकारक चीजें साफ होती हैं। लेकिन कई कफ वायरल इंफेक्शंस जैसे कोल्ड और फ्लू से पैदा होते हैं। जहां कई बार कफ अपने आप ठीक हो जाता है, वहीं कभी-कभी आपको कफ के लिए दवा भी लेनी पड़ सकती है। सभी कफ एक जैसे नहीं होते तो दवा भी एक तरह नहीं हो सकती।

सामान्य तौर पर खांसी दो तरह की होती है
कफ या बलगम वाली खांसी
सूखी खांसी

कफ या बलगम वाली खांसी

अगर आपको कफ वाली खांसी है तो ऐसा कफ सिरप लेना चाहिए जो इस कफ को आपके फेफड़ों से बाहर निकाले। इसके लिए एक्सपेक्टोरैंट सिरप आते हैं। ये कफ को पतला करके इसे बाहर निकालने में मददगार होते हैं। आप डॉक्टर की सलाह पर एक्सपैक्टोरेंट ले सकते हैं इसके साथ ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं इससे म्यूकस पतला होगा।

एक्सपेक्टोरैंट सिरप आपका कफ निकालते हैं। अगर आपको खांसी से दर्द, जकडऩ या सांस फूलने या सांस लेने की समस्या को दूर करने के लिए ब्रॉन्कोडायलेटर ले सकते हैं। यह एयर पैसेज को खोलर सांस लेना आसान करते हैं। ब्रॉन्कोडायलेटर को आप डॉक्टर की सलाह पर सिरप या इनहेलर के तौर पर ले सकते हैं।

सूखी खांसी

सूखी खांसी में कोई कफ नहीं आता लेकिन यह काफी दिक्कत देती है। इसके लिए आपको कफ सप्रेसैंट्स दिए जाते हैं। कफ सप्रेसैंट से खांसी में आराम मिलता है। सामान्य तौर पर ये सिरप के तौर पर लिए जाते हैं, इन्हें डॉक्टर की सलाह पर लेना चाहिए।

थ्रोट लॉन्जेज

ये छोटी गोलियां होती हैं जो कि मुंह में घुलकर खांसी रोकती हैं। इनमें शहद, अदरक, पेपरमिंट, मेंथॉल, यूकेलिप्टस ऑइल, सप्रेसेंट और दूसरे सूदिंग एजेंट्स होते हैं। फायदा: यह थोड़ी देर के लिए आपकी खांसी रोकती हैं और गले को राहत देती हैं।

जरूर याद रखें ये बातें
तीन हफ्तों से ज्यादा खांसी बुखार के साथ आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।।
बेहतर होगा कोडीन वाले कफ सिरप न लें क्योंकि इनकी आदत पड़ जाती है।
बच्चों या बड़ों ऐंटी-ऐलर्जी दवाएं न दें वर्ना उन्हें नींद आती रहेगी।
कई सिरप्स में सप्रेसैंट्स, एक्सपेक्टोरैंट्स और ऐनाल्जेसिक्स होते हैं, इन्हें न लें क्योंकि जरूरी नहीं कि आपको ये तीनों ही समस्याएं हों।


लिवर को तंदुरुस्त बनाना है तो करें यह काम
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हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, 2017-18 की तुलना में इस साल गैर-एल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) के मामलों में वृद्धि हुई है. हालांकि, अभी तक कोई निश्चित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वे हर महीने कम से कम 10 से 12 नए मामले देख रहे हैं जो हर आयु वर्ग के हैं.

डॉक्टर्स की मानें तो सभी प्रकार के एनएएफएलडी घातक नहीं हैं, लेकिन इनकी अनदेखी आगे चलकर परेशानी का सबब बन सकती है. एक बार फैटी लिवर के पता लगने के बाद रोगी को यह जानने के लिए आगे के परीक्षणों से गुजरना होता है कि लिवर में जख्म या सूजन तो नहीं है. लिवर की सूजन के लगभग 20 प्रतिशत मामलों में सिरोसिस विकसित होने की संभावना होती है. इसे एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है. जब तक स्थति में प्रगति न हो, तब तक लक्षणों की स्पष्ट कमी होती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
हेल्थ केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.के.के. अग्रवाल का कहना है कि एनएएफएलडी में लिवर की अनेक दशाओं को शामिल माना जाता है, जो ऐसे लोगों को प्रभावित करती हैं जो शराब नहीं पीते हैं. जैसा कि नाम से पता चलता है, इस स्थिति की मुख्य विशेषता लिवर कोशिकाओं में बहुत अधिक वसा का जमा होना है. एक स्वस्थ लिवर में कम या बिल्कुल भी वसा नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि एनएएफएलडी वाले लोगों में हृदय रोग विकसित होने की अधिक संभावना रहती है और यह उनमें मृत्यु के सबसे आम कारणों में से एक है. वजन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी लाने से वसायुक्त लिवर और सूजन में सुधार हो सकता है.कुछ शोधों के मुताबिक, दालचीनी अपने एंटीऑक्सिडेंट और इंसुलिन-सेंसिटाइजर गुणों के कारण लिपिड प्रोफाइल और एनएएफएलडी को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.
डॉ. अग्रवाल के लिवर का हेल्दी रखने के कुछ सुझाव दिए हैं-

फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा से भरपूर वनस्पति आधारित आहार का सेवन करें.

यदि आप अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो प्रत्येक दिन खाने वाली कैलोरी की संख्या कम करें और अधिक व्यायाम करें. यदि आपका स्वस्थ वजन है, तो स्वस्थ आहार का चयन करके और व्यायाम करके इसे बनाए रखने के लिए काम करें.

सप्ताह के अधिकांश दिनों में व्यायाम करें. हर दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करने की कोशिश करें.



लगातार गर्म चाय पीने हैं शौक़ीन तो हो जाय सावधान, आप को हो सकता हैं एसोफेगल कैंसर
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हमारे शरीर के अंदर के अंग बहुत ज्यादा नाजुक और संवेदनशील होते हैं। ऐसे में अगर उनके साथ जरा भी सख्ती से पेश आया जाए या जरूरी बातों को नजरअंदाज किया जाए तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हाल ही में एक रिसर्च में पाया गया है जो लोग लगातार तेज गर्म चाय पीते हैं उनमें एसोफेगल कैंसर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। द अमेरिकन कैंसर सोसाइटी में हुई इस रिसर्च में कहा गया है कि उन लोगों को काफी सचेत होने की जरूरत है जो गर्म चाय, कॉफी या फिर अन्य पेय पदार्थ पीने के शौकीन होते हैं। आपको बता दें कि ऐसोफेगस कैंसर भारत में छठें नंबर का सबसे गंभीर कैंसर है जबकि विश्व स्तर पर इस कैंसर को आठवें पायदान पर खतरनाक पाया गया है।
द अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के मुख्य लेखक फरहाद इस्लामी का कहना है कि कुछ लोग गर्मागर्म चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों का काफी लुत्फ उठाते हैं। यह शौक एक स्तर के बाद एसोफेगस में दिक्कत करने लगता है, जिसके चलते एसोफेगस कैंसर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। किसी भी गर्म पेय पदार्थ को लगभग 4 मिनट ठंडा करने के बाद पीना चाहिए। अन्यथा इससे गले और पेट के बीच का ‘फूड पाइप’ बुरी तरह प्रभावित होता है। यह खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जो लगातार 75 डिग्री सेल्सियस पर पेय पदार्थों का सेवन करते हैं।

रोजाना 60 डिग्री सेल्सियस पर 700ml चाय पीने से 90 प्रतिशत तक ऐसाफेगल कैंसर होने का खतरा रहता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा इसलिए क्योंकि तेज गर्म पानी (पेय पदार्थ) से मुंह और गले में जलन होने लगती है, जो एक वक्त के बाद कैंसर का रूप ले लेती है। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि यह कैंसर महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को होता है।






असुरक्षित यौन संबंध से फैलती है ये बीमारी, रहें सावधान वर्ना हो सकती है आपकी मौत

यदि आप पहले से यौन रोग से ग्रसित पार्टनर के साथ असुरक्षित संबंध बनाते हैं तो सिफलिस नामक रोग महिलाओं या पुरुषों को हो सकता है. सिफलिस एक खतरनाक यौन संक्रामक रोग है जो असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से फैलता है. इस बीमारी को इलाज से ठीक किया जा सकता है. यदि आप इसका इलाज नहीं करवाते हैं तो यह समस्‍या धीरे धीरे गंभीर होती जाती है. इसलिए सिफलिस के संकेत पता चलते ही डॉक्‍टर से सलाह जरूर लेना चाहिए.


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सबसे पहले सिफलिस घाव या दाग की तरह दिखने लगते हैं. ये घाव शरीर में बैक्‍टीरिया के घुसने से बनने लगता है जो कम से कम तीन सप्‍ताह के बाद विकसित होते हैं. कभी ये सिर्फ एक घाव तो कभी ये शरीर में कई जगह देखने को मिलता है. लेकिन अक्‍सर लोग इस पर ध्‍यान नहीं देते हैं. क्‍योंकि इन घावों में दर्द नहीं होता है और कुछ दिन बाद ठीक हो जाते हैं. जब इसका इलाज नहीं कराते हैं तो ये कुछ दिनों बाद फिर दिखने लगते हैं. जो आगे चलकर आपके लिए कई समस्‍याओं का कारण बनते हैं. आइए जानते हैं सिफलिस के बारे में.

बुखार : आपको बुखार, गले में खराश और लिम्फ नोड्स में सूजन हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक कमजोरी और बेचैनी भी हो सकती है।


बालों को झड़ना : आपके बाल झड़ सकते हैं। इतना ही नहीं आइब्रो और पलकों के बाल भी झड़ने लगते हैं.


मांसपेशियों में दर्द : बुखार के अलावा आपको गले में खराश और शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द और जोड़ों में भी दर्द हो सकता है।


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सिफिलिटिक मेनिनजाइटिस : सिफलिस इन्फेक्शन के बाद विकसित होने में कई साल लग सकता है। मेनिनजाइटिस में दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास उत्तकों में सूजन होने लगती है। अगर सिफलिस ज्‍यादा बढ़ जाए तो आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है.


न्‍यूरोसिफिस : अगर इसका इलाज नहीं कराया जाए, तो यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। बैक्टीरिया के तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करने को न्यूरोसिफिस (neurosyphilis) के रूप में जाना जाता है।


ह्रदय संबंधी समस्याएं : सिफलिस बैक्टीरिया आपकी हृदय प्रणाली पर हमला कर सकता है। रक्त वाहिकाओं के संकुचन और धमनियों में सूजन की वजह से कई मामलों में यह हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है।

खड़े होकर सम्भोग करने से होते हैं ये कमाल के फायदे, सुनकर नही होगा यकीन


मोटी से मोटी तोंद भी नौवें दिन गायब हो जाएगी
नारियल तेल का उपयोग संभोग को बनाता है आसान |

भारत में सदियों से नारियल का तेल नैचरल लुब्रिकेंट की तरह सहवास करने में उपयोग होता आ रहा है और यह तब से इस्तेमाल हो रहा है, जब कंडोम इजाद भी नहीं हुए थे। क्या नारियल का तेल आर्टिफिशल लुब्रिकेंट्स से बेहतर ऑप्शन है? इससे कॉन्डम इस्तेमाल करने में कोई परेशानी तो नहीं होगी? इस तरह के प्रश्न कई बार सभी के मन में उठते है।

आप नारियल का तेल(coconutoil) बिना किसी शंका के इस्तेमाल कर सकते हैं। यह हर मायने में आर्टिफिशल लुब्रिकेंट से बेहतर ऑप्शन है। नारियल तेल की लुब्रिकेशन की क्षमता को इस बात से भी समझा जा सकता कि इसका लुब्रिकेशन तकरीबन वैसा ही होता है, जैसा महिला की योनि का नैचरल एवं चिकना लुब्रिकेशन होता है। जहां तक बात है कॉन्डम के इस्तेमाल की, तो इससे कॉन्डम के इस्तेमाल में कोई दिक्कत नहीं आती। पेट्रोलियम जेली से भले ही कंडोम(condom) को कोई नुकसान पहुंचे, लेकिन नारियल का तेल पूरी तरह से सेफ है।

यदि नारियल का तेल एवं कंडोम दोनों लगाकर सम्भोग करना है तो पहले कंडोम पहन ले उसके बाद नारियल के तेल को स्त्री की योनि में डाल दे, फिर धीरे धीरे मर्दन करे। यदि कंडोम नहीं लगा रहे हो तो नारियल का तेल लेकर लिंग के आगे के भाग में लगा ले एवं फिर लिंग को योनि में प्रवेश कराये। इससे लिंग का प्रवेश सुगम तरीके से होता है।
भारत में मुखमैथुन कामन नहीं है जिससे स्त्री की योनि मैथुन क्रिया करने से पहले गीली नहीं हो पाती है, इससे बचने के लिए लिंग पर नारियल तेल लगाकर योनि में लिंग प्रवेश करने से सम्भोग आसान एवं सुगम हो जाता है। बिना नारियल तेल या चिकनाई के सम्भोग करने से लिंग एवं योनि के बीच में ड्राईनेस की वजह से रगड़ लगती है जिससे दोनों को कष्ट होता है। यदि नारियल तेल भी उपलब्ध ना हो तो पुरुष अपना थूक भी लिंग पर लगाकर मैथुन कर सकता है।

सेक्‍स की चाहत सभी को होती है लेकिन कई बार जगह ना मिलने से कई सारी समस्याएं खड़ी हो जाती है। जिससे आप परेशान हो जातें हैं। इस कड़ी में हम आपको कुछ ऐसी चीजें बताने जा रहे हैं। जिससे आपकी समस्या कुछ हद तक कम जरूर होगी। बता दे कि यह सेक्‍स का आनंददायक आसन है। इसमें कम जगह होने पर भी बेहतर सेक्‍स किया जा सकता है। सेक्‍स की तीव्र इच्‍छा मन में जग रही हो, बिस्‍तर उपलब्‍ध न हो और प्रतीक्षा करने का जरा भी मन नहीं कर रहा हो तो यह एक आनंद से भरा आसन है।

ज्ञात हो कि पति पत्‍नी को इस आसन को जरूर ट्राई करना चाहिए ताकि सेक्‍स जीवन में नीरसता या ऊब न आए। स्त्री-पुरुष दोनों मिलकर संभोग करते हैं, लेकिन दोनों के संभोग सम्बंधी अनुभव भिन्न हैं। इस आसन में थोड़ा बदलाव आते हुए पुरुष दीवार के सहारे खड़े हो जाए और अपनी महिला साथी को गोद में उठा ले। महिला अपने दोनों पैर से पुरुष के नितंब को कैंची की तरह जकड़ ले और धक्‍का लगाए। इसमें धक्‍का स्‍त्री को ही लगाना पड़ता है।

1-थोड़ा रुक-रुक कर वह दीवार से पैर को सपोर्ट दे सकती है, जिससे धक्‍के लगाने में आसानी होगी। हालांकि इस आसन में पुरुष का बलिष्‍ट होना जरूरी है ताकि स्‍त्री के भार और उसके धक्‍के को एक साथ झेल सके।

2-वैसे पुरुष के ऊपर से भार कम करने के लिए पीछे टेबल लगाया जा सकता है, जिसपर अपना हाथ रखकर महिला अपने वजन को पुरुष के ऊपर से कम कर सकती है।
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3-खड़े होकर सेक्‍स करने के दौरान अधिक आनंद के लिए थोड़ा और बदलाव कर सकते हैं। इस आसन में खड़ी स्‍त्री अपनी टांगे फैला देती है। इसके बाद पुरुष चाहे तो उसके सामने से या फिर उसके पीछे से अपने लिंग को उसकी योनि में प्रवेश करा सकता है। सामने 

से प्रवेश करने पर फैली हुई योनि में लिंग का प्रवेश आसानी से हो जाता है, हां पुरुष को थोड़ा झुकना पड़ सकता है।

4-पीछे से प्रवेश के लिये महिला को अपना नितंब बाहर की ओर निकालना होगा ताकि पुरुष को भग प्रदेश न केवल दिखे, बल्कि फैल भी जाए। महिला अपने घुटनों को मोड़ते हुए थोड़ा नीचे झुकेगी तो नितंब भी बाहर आ जाएगा और भग प्रदेश भी खुल जाएगा। इसके बाद पुरुष लिंग को पीछे से प्रवेश कराए। इन बातों पर सही तरीके से अमल करके आप सेक्स का भरपूर आनंद उठा सकते हैं। लेकिन सावधानी जरुर रखें। ताकि किसी तरह की समस्या से आपको गुजरना ना पड़े।

अगर आपको भी है ये आदत तो हो जाइए सावधान, नाश्ता नहीं करने से बढ़ सकता है जान का खतरा!


क्या आप सुबह का नाश्ता नहीं करते और रात का खाना भी देर से खाते हैं? अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे आपकी जान को खतरा हो सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी दी है.

क्या कहती है रिसर्च-
प्रिवेन्टिव कार्डियोलॉजी के यूरोपीय जर्नल ‘द फाइंडिग्स’ में छपे शोध पत्र में बताया गया है कि इस प्रकार की अनहेल्दी लाइफस्टाइल वाले लोगों में समय से पहले मौत होने की आशंका चार से पांच गुणा बढ़ जाती है और दूसरा दिल का दौरा पड़ने की भी संभावना बढ़ जाती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
शोध के सह-लेखक ब्राजील के साउ-पाउलो सरकारी विश्वविद्यालय के मार्कोस मिनीकुची का कहना है, “हमारे शोध के नतीजों से पता चलता है कि खाना खाने के गलत तरीके को जारी रखने का नतीजा बहुत खराब हो सकता है, खासतौर से दिल के दौरे के बाद.”

कैसे की गई रिसर्च-
यह शोध दिल के दौरे के शिकार 113 मरीजों पर किया गया, जिनकी औसत उम्र 60 साल थी. इनमें 73 फीसदी पुरुष थे. इसमें पाया गया कि सुबह का नाश्ता नहीं करने वाले मरीज 58 फीसदी थे, जबकि रात का भोजन देर से करने वाले मरीज 51 फीसदी थे, और 48 फीसदी मरीजों में दोनों तरह की आदतें पाई गई.

रिसर्च के नतीजे-
शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि खाने की आदत को सुधारने के लिए रात के भोजन और सोने के समय में कम से कम 2 घंटे का अंतर होना चाहिेए.

एक अच्छे नाश्ते में ज्यादातर दुग्ध उत्पादों (फैट फ्री या लो फैट दूध, दही और पनीर), कार्बोहाइड्रेट (गेंहू की रोटी, सेंके हुए ब्रेड, अनाजों) और फलों को शामिल करना चाहिए.





लड़की को खुले आम चूमना पड़ा भारी, पुलिस ने किया गिरफ्तार


मुंबई में खुलेआम लड़की को चूमना एक मनचले पर भारी पड़ गया. पुलिस ने लड़की के परिजनों की शिकायत पर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के हत्थे चढ़े शख्स का नाम वसीम शेख बताया जा रहा है जो पेशे से ड्राइवर है और मुंबई के पवई इलाक़े का निवासी है.

मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित लड़की और आरोपी दोनों एक ही कॉलोनी के रहने वाले थे. लेकिन लड़की के मना करने के बावजूद वसीम शेख उसके आसपास मंडराता रहता था.
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घटना बीते रविवार की है. जब पीडिता ट्यूशन से घर वापस आ रही थी तो मौका पाकर विक्रोली रेलवे स्टेशन पर आरोपी वसीम शेख उसका ने हाथ पकड़कर पीछे खींचा और सबके सामने जबरदस्ती किस किया. जिसके बाद घर जाकर पीड़िता ने घर वालों को आप बीती सुनाई.

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता के परिजनों ने वसीम शेख के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया. जिसके बाद पुलिस कार्रवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.

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