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क्या होता है, जब आप सेक्स नहीं करते?


क्या होता है, जब आप सेक्स नहीं करते?
सेक्स से संबंधित विभिन्ना शोध के आंकड़ों की मानें तो सेक्स को लेकर हमारे समाज में बेहद असंतुलित रुझान नज़र आता है. जहां एक ओर किशोर कम उम्र में ही सेक्स संबंध बनाने लगे हैं, वहीं वह आबादी, क़ायदे से जिन्हें सेक्स को लेकर सक्रिय होना चाहिए, सेक्स से दूर होती जा रही है. तमाम शोधों का निष्कर्ष यह है कि ऐसा हमारी तनावपूर्ण जीवनशैली की वजह से है. ऑफ़िस की व्यस्तता, तनाव, टेक्नोलॉजी की ज़िंदगी में बढ़ती दख़लअंदाज़ी कुछ ऐसे कारण हैं, जो हमारे जीवन से सेक्स के पल कम कर रहे हैं. शुरू-शुरू में यह कमी अखरती है, फिर जल्द ही हम इससे तालमेल बिठा लेते हैं और धीरे-धीरे हमें सेक्स की इतनी ज़रूरत महसूस नहीं होती. आइए, जानते हैं क्या होगा अगर आप सेक्स करना बंद कर देंगे या लंबे-लंबे ब्रेक्स लेने लगेंगे.

पहले ख़ुद पर और फिर पार्टनर पर से भरोसा डगमगाने लगता है 
ज़्यादातर जोड़ों की ज़िंदगी में सेक्स की कमी का सीधा असर उनके रिश्ते पर होता है. इसका पहला प्रहार आपसी विश्वास पर होता है. यह यूं ही नहीं कहा गया है कि अच्छा सेक्शुअल रिलेशन रिश्तों को जोड़ता है. इस कथन का उल्टा भी उतना ही सही है. यानी सेक्स की कमी रिश्तों को तोड़ सकती है. रिश्ते में रहने की ख़ुशी, संतुष्टि और किसी के द्वारा चाहे जाने या प्यार किए जाने की भावना कम से कमतर होती जाती है. विशेषज्ञों की मानें तो जिस पार्टनर की व्यस्तता के चलते सेक्स संबंध कम हो रहे होते हैं, पहले तो वो गिल्ट महसूस करता है, फिर धीरे-धीरे उसके अंदर की यह भावना ख़त्म होकर इसे सामान्य समझने में बदल जाती है. वहीं दूसरा पार्टनर पहले तो चीज़ों को सहानुभूतिपूर्वक नज़रिए से देखता है, फिर उसे ख़ुद के उपेक्षित किए जाने जैसा लगता है. और यदि चीज़ें नहीं सुधरीं तो वो खीझ से भर जाता है. फिर धीरे-धीरे दोनों के बीच अनबन और छोटे-मोटे झगड़े जैसी बातें आम होने लगती है.
ये झगड़े दोनों पार्टनर के बीच दूरी लाने का काम करते हैं और अंतत: रिश्ते की सुरक्षा भी दांव पर लग जाती है. साइकोलॉजिस्ट और सेविंग योर मैरिज बिफ़ोर इट स्टार्ट्स के लेखक लेस पैरोट के अनुसार,‘‘सेक्सलेस कपल्स में ऑक्सिटोसिन जैसे बॉन्डिंग हार्मोन्स का स्तर कम हो जाता है. इतना ही नहीं उनमें यह डर भी घर करने लगता है कि कहीं पार्टनर अपनी सेक्शुअल ज़रूरतें पूरा करने के लिए किसी और के प्रति तो नहीं आकर्षित हो रहा. इससे रिश्ते में संदेह की भावना जन्म लेने लगती है.’’ हालांकि वे यह भी कहते हैं,‘‘ऐसा ज़रूरी नहीं है कि हर सेक्सलेस कपल असंतुष्ट या नाख़ुश हो. सेक्स आपसी घनिष्टता का महज़ एक एक्सप्रेशन है. यदि आप अपने पार्टनर के साथ अंतरंग समय बिताने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो चुंबन, गिफ़्ट्स, तारीफ़ों और यूं ही अचानक उसका हाथ पकड़कर कोई बात छेड़कर, उसे इम्पॉर्टेन्ट महसूस करवा सकते हैं.’’

ऐसा लगता है कि दुनियाभर का तनाव आपको सौंप दिया गया हो
यह कोई सीक्रेट नहीं है कि सेक्स एक बेहतरीन स्ट्रेस बस्टर है. यदि आप और आपके पार्टनर नियमित रूप से सेक्स संबंधी गतिविधियों के लिए समय निकालते हैं तो तनाव दूर हो जाता है. यह आपने भी अनुभव किया होगा कि जैसे ही आप लंबे समय तक सेक्स से दूरी बना लेते हैं, स्ट्रेस लेवल में बढ़ोतरी होने लगती है. आर्काइव्स ऑफ़ सेक्शुअल बिहेवियर नामक एक जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ लंबे समय तक सेक्स से दूर रहने पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक डिप्रेस्ड महसूस करती हैं. हालांकि उस रिपोर्ट में एक तथ्य पर एक्स्पर्ट्स एक राय नहीं हैं. दरअस्ल, उस रिपोर्ट में लिखा गया था कि जिन महिलाओं के पार्टनर कंडोम पहनकर सेक्स करते हैं, उनका स्ट्रेस लेवल उन महिलाओं की तुलना में अधिक होता है, जिनके पार्टनर बिना कंडोम सेक्स करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुरुषों के स्पर्म में मेलाटोनिन, सेरोटोनिन और ऑक्सिटोसिन जैसे मूड बूस्टिंग कम्पाउंड्स होते हैं. इस शोध में भले ही कंडोम के बिना सेक्स को तनाव भगानेवाले बताया गया है, सच तो यह है कि अनप्रोटेक्टेड सेक्स के अपने अलग ख़तरे हैं. ये कई बार तनाव बढ़ानेवाले साबित होते हैं. 
सेक्स से दूर होते ही सर्दी-खांसी आपसे नज़दीकी बढ़ाने लगती है 
यह तो आपने सुना ही होगा कि नियमित रूप से सेक्स करने से हमारे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सेक्स और इम्यूनिटी का संबंध ख़ासा तगड़ा होता है. इस तरह देखें तो कम सेक्स या न के बराबर सेक्स बीमारियों को आमंत्रित कर सकती है. पेन्सल्वेनिया की विल्किस-बेयर यूनिवर्सिटी के रिसचर्स ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से सप्ताह में एक या दो बार सेक्स का आनंद लेते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता सेक्स से दूर रहनेवाले (चाहे किसी भी वजह से) लोगों की तुलना में 30% अधिक होती है. आप ख़ुद भी यह फ़र्क़ महसूस कर सकते हैं, याद करें जब आपने आख़िरी बार सेक्स से लंबा ब्रेक लिया था, तब सर्दी-खांसी जैसी बीमारियां आपको कुछ ज़्यादा ही परेशान कर रही थीं. सर्दी-खांसी तो आम समस्या हो गई. डॉक्टर्स की मानें तो यदि आपके जीवन में प्यार भरे रूमानी पलों का अकाल पड़ जाता है तो शरीर उन हार्मोन्स का स्राव कम कर देता है, जो हमारे हृदय की सेहत के लिए अच्छे होते हैं. यानी आपको दिल की बीमारियों से भी जूझना पड़ सकता है.
पुरुषों के मामले में यह देखने मिला है कि जो पुरुष सेक्स में कम रुचि लेते हैं, उन्हें दूसरों के मुक़ाबले प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. अमेरिकन यूरोलॉजिकल असोसिएशन ने गहन अध्ययन के बाद यह बताया है कि नियमित रूप से सेक्स करनेवाले पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना 20% तक कम हो जाती है. इसका कारण यह है कि इजैकुलेशन के समय सीमन के साथ-साथ वो केमिकल्स भी बाहर आ जाते हैं, जिनसे प्रोस्टेट को नुक़सान पहुंचने की संभावना हो सकती है.
चिड़चिड़ापन आपका पक्कावाला दोस्त बन जाता है
अच्छा सेक्स हमारी मानसिक स्थिति को सामान्य बनाए रखने में बड़ा मददगार होता है. एक स्कॉटिश अध्ययन की मानें तो जो लोग सप्ताह में एक या दो बार सेक्स करते हैं, वे सेक्स से सन्यास लेनेवालों की तुलना में कहीं ज़्यादा ख़ुश रहते हैं. दरअस्ल, सेक्स के दौरान मस्तिष्क फ़ील-गुड केमिकल्स रिलीज़ करता है. एन्डॉर्फ़िन और ऑक्सिटोसिन नामक ये केमिकल्स हमें ख़ुशनुमा एहसास कराते हैं. यह आंतरिक ख़ुशी हमारे चेहरे पर भी झलकती है. वहीं जिन लोगों की सेक्स लाइफ़ अच्छी नहीं चल रही होती है वे थोड़े चिड़चिड़े और झक्की बन जाते हैं. वे अपना आप बहुत जल्दी खो बैठते हैं.

पहले आप सेक्स से दूरी बनाते हैं, फिर सेक्स आपसे बेवफ़ाई करने लगता है
यदि आप काम की व्यस्तता या किसी अन्य कारण से सेक्स को इग्नोर करते हैं तो धीरे-धीरे सेक्स करने की इच्छा भी आपको नज़रअंदाज़ करने लगती है. यानी सेक्स से परहेज़ का सीधा-सीधा असर आपकी कामेच्छा पर पड़ता है. वैसे सेक्स महिलाओं की तुलना में पुरुषों से अधिक रूठता है. अब इसका मतलब यह है कि ‌यदि महिला-पुरुष सामान रूप से सेक्स से दूरी बनाते हैं तो पुरुषों की कामेच्छा अधिक प्रभावित होती है. पुरुषों द्वारा अपने प्राइवेट पार्ट्स का इस्तेमाल न करने से वे इरेक्टाइल डिस्फ़ंक्शन की समस्या से दो-चार हो सकते हैं. ऐसा हम अपने मन से नहीं कह रहे हैं, यह कहना है अमेरिकन जरनल ऑफ़ मेफडिसिन की एक स्टडी रिपोर्ट का. वहां यह भी सलाह दी गई है कि यदि पुरुषों को सेक्स करने का समय नहीं मिल पा रहा है तो वे मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन का सहारा लेकर अपनी कामेच्छा को सजीव बनाए रख सकते हैं.
वहीं उन महिलाओं, जिन्होंने सेक्स से लंबी छुट्टी ले रखी है, के लिए भी थोड़ी बुरी ख़बर है. यदि आपकी उम्र 50 के क़रीब है और आप सेक्शुअली ऐक्टिव नहीं हैं तो इस बात की काफ़ी संभावना है कि आपकी वेजाइना सेक्स को लेकर उतनी उत्तेजित महसूस न करे. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सेक्शुअली निष्क्रिय रहने से वेजाइना की दीवारें पतली और कमज़ोर हो जाती हैं. इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि यदि कभी-कभार सेक्स करते भी हैं तो उतना आनंद महसूस नहीं हो.

सेक्स के बाद, ज़रूर करें ये 5 काम
सेक्स के बाद ज़्यादातर लोग क्या करते हैं? अलग-अलग सर्वे में यह बात सामने आई है कि जहां महिलाएं आफ़्टर प्ले और पार्टनर द्वारा पैम्पर किए जाने की उम्मीद में पार्टनर की बांहों में खोना और सोना पसंद करती हैं, वहीं पुरुष सेक्स के तुरंत बाद बेफ़िक्र होकर खर्राटे लेने लगते हैं. पर विज्ञान कहता है कि आपको सेक्स के बाद बिस्तर में अलसाने या नींद की आगोश में चले जाने के बजाय कुछ ज़रूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए. तो आइए, विज्ञान के अनुसार सेक्स के तुरंत बाद क्या और क्यों करना चाहिए समझने की कोशिश करते हैं.
विज्ञान के अनुसार आपका पहला काम: तुरंत बाथरूम जाएं और यूरीनरी ब्लैडर ख़ाली करें
सेक्स के बाद बाथरूम जाकर पेशाब करना सबसे पहला काम होना चाहिए. सेक्स के बाद यह काम करने से महिलाओं को यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन (यूटीआई) की संभावना काफ़ी हद तक कम हो जाती है. इसका विज्ञान यह है कि सेक्स के बाद यूरिनेशन से वेजाइना के अंदर के बैक्टीरिया पनपने के चांसेस कम हो जाते हैं. वैसे तो वेजाइना के लूब्रिकेशन में अपने ख़ुद के अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो इन्फ़ेक्शन्स से लड़ने में मददगार होते हैं, पर यदि आप अपनी ओर से यह काम कर लेंगी तो यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन से आपका बचाव और पुख़्ता हो जाएगा.
विज्ञान के अनुसार आपका दूसरा काम: प्राइवेट पार्ट्स को झटपट क्लीन करें
यदि आप अंतरंग पलों का आनंद लेने के बाद तुरंत निढाल होकर सो जाते हैं तो अपनी इस आदत को बदलें. सेक्स के दौरान प्राइवेट पार्ट पसीना, लूब्रिकेंट और सलाइवा के चलते कई तरह के बैक्टीरिया की ऐशगाह बन जाता है. ऐसे में आप बिना उसकी साफ़-सफ़ाई किए सो जाएंगे तो शर्तिया यीस्ट इन्फ़ेक्शन को न्यौता देंगे, क्योंकि नमी के कारण प्राइवेट पार्ट उनकी ग्रोथ के लिए मुफ़ीद जगह बन जाता है. तो आप करें यह कि किसी सूखे कपड़े से प्राइवेट पार्ट को पोंछ लें या पहले पानी से धोकर सुखा लें. आपका यह क़दम आपको प्राइवेट पार्ट्स के आसपास होनेवाले दाद और खुजली से बचाएगा. पार्टनर को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें.
विज्ञान के अनुसार आपका तीसरा काम: थोड़ा क्रैनबेरी जूस पिएं
कई विदेशी जर्नल्स में इस तरीक़े के बारे में बताया गया है. उन जर्नल्स में अलग-अलग शोधों का हवाला देते हुए यह कहा गया है कि सेक्स के बाद क्रैनबेरी जूस पीने से यूटीआई के चांसेस काफ़ी हद तक घट जाते हैं. यह जूस बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार है. इसका वैज्ञानिक कारण यह है जब हम क्रैनबेरी जूस पीते हैं तब यह हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम में विघटित होने के बजाय सीधे हमारे यूरीनरी ट्रैक्ट में पहुंचता है. वहां पहुंकर ब्लैडर की दीवार या रास्ते में जमा किसी भी तरह के बैक्टीरिया को मार भगाता है.
वैसे यह ज़रूरी नहीं कि केवल सेक्स के बाद ही क्रैनबेरी जूस पीने से इसके फ़ायदे मिलते हैं. कई शोधों में यह पाया गया है कि रोज़ाना 240 मिली क्रैनबेरी जूस पीने से महिलाओं को यूटीआई से राहत मिलती है. 

विज्ञान के अनुसार आपका चौथा काम: अंडरवियर को निकाल फेंकें 
सेक्स के बाद अंडरवियर न पहनने की विज्ञान की सलाह का फ़ंडा एकदम सिम्पल है उसका कारण मॉइस्चर से जुड़ा है. दरअस्ल, जब हम टाइट अंडरवियर पहनते हैं तब प्राइवेट पार्ट्स के आसपास पसीना अधिक होता है. मॉइस्चर बढ़ने से बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है. इससे बचने का सबसे सिम्पल तरीक़ा है अंडरवियर के बिना सोना. य‌दि आप इस तरह सोने में सहज महसूस न कर रही हों तो चादर ओढ़कर सोएं या फिर कॉटन अंडरवियर या लूज़ फ़िटिंग वाला पजामा पहनें.

विज्ञान के अनुसार आपका पांचवां काम: कॉन्डम चेक कर लें
सुरक्षित सेक्स संबंध बनाने के लिए कॉन्डम सबसे सुविधाजनक विकल्प है. आपने सुरक्षा तो अपना ली, पर इसकी जांच भी उतनी ही ज़रूरी है. सेक्स के बाद आप और पार्टनर यह सुनिश्चित कर लें कि कहीं कॉन्डम फट तो नहीं गया था. बेशक कॉन्डम के फटने की घटनाएं उतनी कॉमन नहीं हैं, पर ऐसा होता है. कॉन्डम फटने की स्थिति में पहला ख़तरा एस.टीडी की होता है और दूसरा होता अन्वॉनटेड प्रेग्नेंसी का. ज़ा‌हिर है बेहतरीन पलों का आनंद लेने के बाद आप ये अनचाहे सौगात तो नहीं ही लेना चाहेंगे.

आपको लग सकता है कि सेक्स के इतने आनंददायक अनुभव के बाद बजाय पार्टनर की बांहों में सुकून से सोने के इन कामों में समय क्यों वेस्ट किया जाए? यक़ीन मानिए इनमें आपको बमुश्क़िल पांच मिनट लगेंगे, उसके बाद तो आपको पार्टनर के साथ लिपटकर सोना ही है. बेहतर सेक्शुअल हेल्थ के लिए पांच मिनट बिल्कुल भी ज़्यादा नहीं हैं.

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