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दवाएं लेते हैं तो इन खाने-पीने की चीजों से रहें दूर

दवाएं लेते हैं तो इन खाने-पीने की चीजों से रहें दूर
इन चीजों के साथ न लें दवाई


इलाज के साथ एहतियात बरतने की सलाह हर डॉक्टर देता है, ताकि आप जल्दी से ठीक हो पाएं। इसमें से एक है फूड। दरअसल, हम जो खाते हैं, उसका असर दवाइयों पर भी पड़ता है। तो हम बता रहे हैं आपको ऐसी चीजों के बारे में, जिन्हें आपको किसी भी तरह की दवा के साथ लेने से बचना चाहिए।

चाय-कॉफी

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कई दवाइयां ऐसी होती हैं, जो गर्म चीजों से खराब हो जाती है। उनकी कोटिंग गर्म पानी के साथ पहले ही गलकर खत्म हो जाती है और उसका असर आपको सही तरह से नहीं मिल पाता। बेहतर होगा आप चाय, कॉफी या किसी भी उबलती चीज के साथ दवाईयां न लें। उन्हें ठंडे पानी के साथ लें।

खट्टे फल


जब आप दवाई ले रहे हों, उन दिनों खट्टे फल न लें। खट्टे फल 50 से अधिक दवाओं को प्रभावित करते हैं। यह शरीर में कई तरीकों की परेशानियां पैदा कर सकता है, जैसे- ऐलर्जी के लिए फेक्सोफेनाडाइन (एलेग्रा) को बढ़ावा दे सकता है। तो वहीं एटोरवास्टेटिन (लिपिटर) जो आपके कलेस्ट्रॉल को कम करता है, उसे बढ़ा सकता है। ऐसे में आप खट्टे फल जैसे नींबू, संतरा, अंगूर और साथ में खट्टी चीजें जैसे अचार, खटाई और इमली आदि को भी खाने से बचना चाहिए।

केला


केला में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो कि सेहत के लिए अच्छा है। अगर आप ब्लडप्रेशर की दवाएं, जैसे-कैप्टोप्रिल, एंजियोटेनसिन इत्यादि ग्रहण करते हैं तो केला सहित अन्य पोटैशियम रिच खाद्य पदार्थ, जैसे-पत्तेदार सब्जियां, संतरा इत्यादि का अत्यधिक मात्रा में सेवन न करें। इन दवाओं के साथ पोटैशियम रिच फूड्स का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से दिल की धड़कन बढ़ सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप ब्लडप्रेशर की दवा के साथ केला जैसे पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले इस बारे में डॉक्टर को बताएं।

डेयरी प्रॉडक्ट

डेयरी उत्पाद जैसे कि दूध, पनीर, मक्खन और मलाई जैसी चीजें आपके शरीर को कुछ एंटीबायॉटिक दवाओं के असर को प्रभावित कर सकती हैं। दूध में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज प्रोटीन के साथ कुछ रिएक्शन कर लेते हैं, जो कुछ दवाइयों के असर को कम कर देते हैं।

ऐल्कोहॉल


ऐल्कोहॉल के साथ दवाई गलती से भी न लें। दवाइयों में ऐसे कई केमिकल हैं, जो ऐल्कोहॉल के साथ रिएक्शन का कारण बन सकती हैं। ऐसे में दवाई फायदा पहुंचाने के आपकी जान भी ले सकती है।

सोडा या कोल्ड ड्रिंक

सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स साथ दवाइयां लेने की भूल बिलकुल न करें। ऐसे में आपकी दवाई आपके लिए हानिकारक साबित हो सकती है और इसका फायदा तो आप भूल ही जाइए।

Heart को हेल्दी रखने में मदद करेंगे ये सुपरफूड्स
हार्ट हेल्थ में डायट की बड़ी भूमिका

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जब बात दिल यानी हार्ट की देखभाल की आती है तो बहुत से लोग सिर्फ एक्सर्साइज को ही पर्याप्त मानते हैं। इसका नतीजा होता है कि दिल को स्वस्थ रखने वाले आहार के सेवन और सही मात्रा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता। इस बात का ख्याल रखना जरूरी है कि डायट आपके हार्ट हेल्थ में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है, इसलिए हमें इसमें कुछ सुपरफूड्स भी जरूर शामिल करने चाहिए। कौन से हैं वे सुपरफूड्स, यहां जानें।
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​अंडा



प्रोटीन पावरहाउस होने के अलावा अंडा दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। जर्नल हार्ट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, रोजाना अंडे का सेवन करने से हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। अध्ययन के निष्कर्ष से सामने आया है कि रोज 1 अंडा खाने से हृदय संबंधी रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है।

​बेरीज



अगर आप स्मूदी पीने के शौकीन हैं तो उसमें स्वाद लाने के लिए ही सिर्फ बेरी का इस्तेमाल न करें। बेरी दिल के लिए भी बहुत अच्छी होती है। अगर आपको किसी बेरी का चुनाव करना है तो ब्लूबेरी चुनें। एक अध्ययन के अनुसार, रोजाना 1 कप (150 ग्राम) ब्लूबेरी के सेवन से संवहनी गतिविधियों में सुधार हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें पाया जाने वाला एन्थोकायनिन नाम का ऐंटीऑक्सिडेंट हृदय रोगों की रोकथाम में मदद करता है।

​पालक


दिल की सेहत का खयाल रखने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों की ताकत को कम न समझें। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि पालक हमारे दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। यह न केवल विटमिन-के का अच्छा स्रोत है, बल्कि इसमें नाइट्रेट की भी भरपूर मात्रा होती है। ये दोनों पोषक तत्व हमारी धमनियों की रक्षा करते हैं और ब्लड प्रेशर को कम कर हृदय रोगों से सुरक्षा देते हैं।

​ओट्स और क्वीन्वा


ओट्स और क्वीन्वा दोनों ही होल ग्रेन फूड हैं जो फाइबर से भरपूर होते हैं। ओट्स में बीटा ग्लूकन नाम का फाइबर होता है जो आपके डाइजेस्टिव हेल्थ को बेहतर बनाकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। वहीं, क्वीन्वा एक ग्लूटन-फ्री होल ग्रेन फूड है। विटमिन्स और मिनरल्स के अलावा इसमें 9 तरह का अमीनो ऐसिड पाया जाता है। होल ग्रेन फूड आइटम्स हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करने के लिए जाने जाते हैं।

​नट्स और चॉकलेट

नट्स में पाया जाने वाला हेल्दी फैट्स उन्हें सुपरफूड बनाता है जो हार्ट के लिए बेहद अच्छा और हेल्दी माना जाता है। खासकर बादाम, अखरोट और काजू ये 3 ऐसे नट्स हैं जिनमें ओमेगा 3 फैटी ऐसिड होता है जो ब्लड क्लॉट बनने के रिस्क को कम करते हैं और हार्ट को सुरक्षित रखते हैं। नट्स के साथ-साथ डार्क चॉकलेट भी हमारे हार्ट के लिए बेहद हेल्दी माने जाते हैं। वैसी डार्क चॉकलेट जिसमें 60 से 70 प्रतिशत कोकोआ की मात्रा हो उसके सेवन से कार्डिवस्क्युलर बीमारियों का खतरा कई गुना कम हो जाता है।


दिल्ली की जहरीली हवाओं से बचने के लिए क्या करें, क्या नहीं
​जहां तक संभव हो घर के अंदर ही रहें



दिल्ली में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। बुधवार सुबह एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 400 से ऊपर था। इसे गंभीर श्रेणी का माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर सलाह देते हैं कि जितना हो सके, घर के अंदर ही रहें। बाहर की सभी ऐक्टिविटी बंद कर दें। प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति की वजह से पिछले कुछ दिनों में सरकारी अस्पतालों में अस्थमा और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। प्रदूषण से बचने के लिए इन जरूरी बातों का रखें ध्यान...

​बाहर निकलते वक्त रखें ध्यान



- प्रदूषण गंभीर श्रेणी में है, तो बाहर के काम कुछ दिनों के लिए टाल दें और बाहर जाने से बचें- बाहर जाना है तो पहले पलूशन लेवल चेक कर लें। उसके हिसाब से बाहर का प्लान बनाएं - अच्छी क्वॉलिटी का मास्क और चश्मा जरूर पहनकर जाएं। मास्क पहनने से सांस लेने में आसानी होगी और चश्मा प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन रोकने में मदद करेगा - नाक और आंख को कुछ-कुछ देर बाद पानी से गीला करते रहें। इससे प्रदूषण के कण शरीर में प्रवेश नहीं करेंगे

​ये नुस्खे दिलाएंगे आराम

- प्रदूषण की वजह से गले में दर्द महसूस हो रहा हो, तो भाप ले सकते हैं। इससे आराम न आए तो डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाएं- दिन में चार से पांच लीटर पानी जरूर पिएं। प्रदूषण के जो कण शरीर में गए हैं, पानी के साथ वह बाहर निकल जाएंगे - खाने में ज्यादा से ज्यादा विटमिन-सी और ओमेगा-3 वाले पदार्थों का सेवन करें - मॉर्निंग वॉक, साइक्लिंग से परहेज करें - घर की बालकिनी या फिर छत पर एरेका पाम, मनी प्लांट, ऐलोवेरा, इंग्लिश आइवरी जैसे पौधे लगाएं। ये प्रदूषण कम करने में मददगार साबित होते हैं।

​एक्सपर्ट्स की राय

वैसे बुजुर्ग जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी कुछ बीमारी है, वे अपनी दवा और इन्हेलर रेगुलर लेते रहें। साथ ही निमोनिया वैक्सीनेशन भी जरूर करवाएं। बुजुर्गों को निमोनिया हुआ तो लंबे समय तक वे परेशान हो सकते है। -डॉ़ विजय गुर्जर, असिस्टेंट प्रफेसर, एम्सअच्छी क्वॉलिटी का मास्क प्रदूषण के कण को लंग्स में जाने से रोकता है। अगर आप मास्क नहीं पहनते तो यह कण शरीर में जाकर ब्लड में घुल जाते हैं, जो बेहद खतरनाक साबित होते हैं। आप एन-95 या एन-99 मास्क का इस्तेमाल करें। -डॉ़ विकास मल्होत्रा, ईएनटी डिपार्टमेंट, एलएनजेपी
​महिलाएं अपनाएं ये तरीके

- गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने से बचें और साथ ही घर में भी मास्क लगाकर रहें।- गांव-देहात या शहरों में भी कई जगह महिलाएं खाना बनाने के लिए लकड़ियां जलाती हैं और पाइप से फूंक मारती हैं, ऐसा न करें। - घर में ऐसी चीज न बनाएं या न जलाएं, जिससे धुआं हो क्योंकि इससे घर में प्रदूषण फैलता है। - कोशिश करें कि घर में प्रदूषण का स्तर 10 से ज्यादा न हो।

​बुजुर्ग क्या करें



- अस्थमा या सांस से संबंधित कोई बीमारी है, तो अपनी दवाएं नियमित लें- डॉक्टर द्वारा दिए गए इन्हेलर (पंप) को बंद न करें। ऐसे मौसम में नियमित इन्हेलर लेते रहें - डायबीटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज दवाओं में लापरवाही न बरतें। समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप करवाते रहें - प्रदूषण के साथ-साथ सर्दियों का भी मौसम है, इसलिए स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। सावधानी बरतें और डॉक्टर के संपर्क में रहें।

बच्चों का ध्यान रखना जरूरी


- प्रदूषण का स्तर 150 से ज्यादा हो, तो बच्चों को बाहर खेलने से रोकें- बच्चों को सुबह बाइक या स्कूटर से स्कूल छोड़ने न जाएं। बस या मेट्रो का इस्तेमाल करें। बाइक या स्कूटर से जाते वक्त प्रदूषण के कण सीधे शरीर में प्रवेश करते हैं- अधिक प्रदूषण होने पर अगर बच्चे की आंख लाल हो जाती है या फिर आंख में जलन होती है तो उसे तुरंत आंखों के डॉक्टर को दिखाएं - बच्चे जब स्कूल से या बाहर कहीं से घर आएं तो उनकी आंखों और नाक को गुनगुने पानी से धोएं - बच्चों की स्किन सॉफ्ट होती है। प्रदूषण होने पर स्किन से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।

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