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दिल के दौरे से बचने के लिए उपाय!
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ये याद रखिये की भारत मैं सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं।

आप खुद अपने ही घर मैं ऐसे बहुत से लोगो को जानते होंगे जिनका वजन व कोलस्ट्रोल बढ़ा हुआ हे।

अमेरिका की कईं बड़ी बड़ी कंपनिया भारत मैं दिल के रोगियों (heart patients) को अरबों की दवाई बेच रही हैं !

लेकिन अगर आपको कोई तकलीफ हुई तो डॉक्टर कहेगा angioplasty (एन्जीओप्लास्टी) करवाओ।

इस ऑपरेशन मे डॉक्टर दिल की नली में एक spring डालते हैं जिसे stent कहते हैं।

यह stent अमेरिका में बनता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डॉलर (रू.150-180) है।

इसी stent को भारत मे लाकर 3-5 लाख रूपए मे बेचा जाता है व आपको लूटा जाता है।

डॉक्टरों को लाखों रूपए का commission मिलता है इसलिए व आपसे बार बार कहता है कि angioplasty करवाओ।

Cholestrol, BP ya heart attack आने की मुख्य वजह है, Angioplasty ऑपरेशन।

यह कभी किसी का सफल नहीं होता।

क्यूँकी डॉक्टर, जो spring दिल की नली मे डालता है वह बिलकुल pen की spring की तरह होती है।

कुछ ही महीनो में उस spring की दोनों साइडों पर आगे व पीछे blockage (cholestrol व fat) जमा होना शुरू हो जाता है।
इसके बाद फिर आता है दूसरा heart attack ( हार्ट अटैक )

डॉक्टर कहता हें फिर से angioplasty करवाओ।

आपके लाखो रूपए लुटता है और आपकी जिंदगी इसी में निकल जाती हैं।

अब पढ़िए

उसका आयुर्वेदिक इलाज

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अदरक (ginger juice) –

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यह खून को पतला करता है।

यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।

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लहसुन (garlic juice)

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इसमें मौजूद allicin तत्व cholesterol व BP को कम करता है।

वह हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।

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नींबू (lemon juice)

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इसमें मौजूद antioxidants, vitamin C व potassium खून को साफ़ करते हैं।

ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाते हैं।

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एप्पल साइडर सिरका ( apple cider vinegar)

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इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।
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इन देशी दवाओं को

इस तरह उपयोग में लेवें

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1-एक कप नींबू का रस लें;

2-एक कप अदरक का रस लें;

3-एक कप लहसुन का रस लें;

4-एक कप एप्पल का सिरका लें;

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चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें;

अब आप

उसमें 3 कप शहद मिला लें

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रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें जिससे

सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।

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आप सभी से हाथ जोड़ कर विनती है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें ताकि सभी इस दवा से अपना इलाज कर सकें ; धन्यवाद् !

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जरा सोचिये की शाम के
7:25 बजे है और आप घर जा रहे है वो भी एकदम अकेले।

ऐसे में अचानक से आपके सीने में तेज दर्द होता है जो आपके हाथों से होता हुआ आपके

जबड़ो तक पहुँच जाता है।

आप अपने घर से सबसे नजदीक अस्पताल से 5 मील दूर है और दुर्भाग्यवश आपको ये नहीं समझ आ रहा की आप वहांतक पहुँच पाएंगे की नहीं।

आप सीपीआर में प्रशिक्षित है मगर वहां भी आपको ये नहीं सिखाया गया की इसको खुद पर प्रयोग कैसे करे।

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ऐसे में दिल के दौरे से बचने

के लिए ये उपाय

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चूँकि ज्यादातर लोग दिल के दौरे के वक्त अकेले होते है बिना किसी की मदद के उन्हें सांस लेने में तकलीफ

होती है । वे बेहोश होने लगते है और उनके पास सिर्फ 10 सेकण्ड्स होते है ।

ऐसे हालत में पीड़ित जोर जोर से खांस कर खुद को सामान्य रख सकता है। एक जोर की सांस

लेनी चाहिए हर खांसी से पहले

और खांसी इतनी तेज हो की

छाती से थूक निकले।

जब तक मदद न आये ये

प्रक्रिया दो सेकंड से दोहराई

जाए ताकि धड्कण सामान्य

हो जाए ।

जोर की साँसे फेफड़ो में

ऑक्सीजन पैदा करती है

और जोर की खांसी की वजह

से दिल सिकुड़ता है जिस से

रक्त सञ्चालन नियमित रूप से

चलता है ।



बाँझपन Sterlity :: संतानोत्त्पत्ति क्षमता न होने के कारण और इलाज

संतानोत्त्पत्ति क्षमता न होने या गर्भ न ठहर पाने की स्थिति को बन्ध्यापन (बाँझपन) कहते हैं। पुरुषों के शुक्र दोष और स्त्रियों के रजोदोष के कारण ही ऐसा होता है। अत: बंध्यापन चिकित्सा में पुरुषों के वीर्य में वीर्य कीटों को स्वस्थ करने, वीर्य को शुद्ध करने की व्यवस्था करें और स्त्रियों को रजोदोष से मुक्ति करें। इससे संतान की प्राप्ति होगी।


बंध्या दोष दो प्रकार का होता है। पहला प्राकृतिक जो जन्म से ही होता है। दूसरा जो किन्ही कारणों से हो जाता है। इसमें पहले प्रकार के बाँझपन की औषधि नहीं है। दूसरे प्रकार के बाँझपन की औषधियां हैं। जिनके सेवन से बाँझपन दूर हो जाता है।


कारण:

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किसी भी प्रकार का योनि रोग, मासिक-धर्म का बंद हो जाना, प्रदर, गर्भाशय में हवा का भर जाना, गर्भाशय पर मांस का बढ़ जाना, गर्भाशय में कीड़े पड़ जाना, गर्भाशय का वायु वेग से ठंडा हो जाना, गर्भाशय का उलट जाना अथवा जल जाना आदि कारणों से स्त्रियों में गर्भ नहीं ठहरता है। इन दोषों के अतिरिक्त कुछ स्त्रियां जन्मजात वन्ध्या (बाँझ) भी होती है। जिन स्त्रियों के बच्चे होकर मर जाते हैं। उन्हें “मृतवत्सा वन्ध्या“ तथा जिनके केवल एक ही संतान होकर फिर नहीं होती है तो उन्हें `काक वन्ध्या` कहते हैं।


लक्षण:

बाँझपन का लक्षण गर्भ का धारण नहीं करना होता है।
विभिन्न औषधियों से उपचार-
1. मैनफल:
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मैनफल बीजों का चूर्ण 6 ग्राम केशर के साथ शक्कर मिले दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्यापन अवश्य दूर होता है। साथ ही मैनफल के बीजों का चूर्ण 8 से 10 रत्ती गुड़ में मिलाकर बत्ती बनाकर योनि में धारण करना चाहिए। दोनों प्रकार की औषधियों के प्रयोग से गर्भाशय की सूजन, मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना, अनियमित स्राव आदि विकार नष्ट हो जाते हैं।

2. दालचीनी:


वह पुरुष जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होता है, यदि प्रतिदिन तक सोते समय दो बड़े चम्मच दालचीनी ले तो वीर्य में वृद्धि होती है और उसकी यह समस्या दूर हो जाएगी।जिस स्त्री के गर्भाधान ही नहीं होता, वह चुटकी भर दालचीनी पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर अपने मसूढ़ों में दिन में कई बार लगायें। थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा।

3. गुग्गुल:

गुग्गुल एक ग्राम और एक ग्राम रसौत को मक्खन के साथ मिलाकर प्रतिदिन तीन खुराक सेवन करने से श्वेतप्रदर (लिकोरिया)के कारण जो बन्ध्यापन होता है। वह दूर हो जाता है। अर्थात श्वेतप्रदर दूर होकर बन्ध्यापन (बाँझपन) नष्ट हो जाता है।

4. तेजपात:

गर्भाशय की शिथिलता (ढीलापन) के चलते यदि गर्भाधान न हो रहा तो तेजपात (तेजपत्ता का चूर्ण) 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की शिथिलता दूर हो जाती है तथा स्त्री गर्भधारण के योग्य बन जाती है।कभी-कभी किसी स्त्री को गर्भाधान ही नहीं होता है बाँझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को गर्भ रुकने के बाद गर्भस्राव हो जाता है। तेजपात दोनों ही समस्याओं को खत्म करता है। तेजपात का पाउडर चौथाई चम्मच की मात्रा में तीन बार पानी से नियमित लेना चाहिए। कुछ महीने तेजपात की फंकी लेने से गर्भाशय की शिथिलता दूर होकर गर्भाधान हो जाता है जिन स्त्रियों को गर्भस्राव होता है, उन्हें गर्भवती होने के बाद कुछ महीने तेजपत्ते के पाउडर की फंकी लेनी चाहिए। इस तरह तेजपत्ते से गर्भ सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं और स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।

5. तुलसी:


यदि किसी स्त्री को मासिक-धर्म नियमित रूप से सही मात्रा में होता होता हो, परन्तु गर्भ नहीं ठहरता हो तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।

6. नागकेसर:
नागकेसर (पीला नागकेशर) का चूर्ण 1 ग्राम गाय (बछड़े वाली) के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करें, और यदि अन्य कोई प्रदर रोगों सम्बन्धी रोगों की शिकायत नहीं है तो निश्चित रूप से गर्भस्थापन होगा। गर्भाधान होने तक इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें गर्भधारण में अवश्य ही सफलता मिलती है।

7. कंटकारी:

कंटकारी, भटकटैया और रेंगनीकाट आदि नामों से इसे जाना जाता है। इसके फल आधे से एक इंच व्यास के चिकने, गोल और पीले तथा कभी-कभी सफेद रंग के होते हैं। ये सभी हरे रंग के और धारी युक्त होते हैं। फूलों की दृष्टि से ये दो प्रकार के होते हैं। एक गहरे नीले रंग की तथा दूसरा सफेद रंग की। सफेद रंग वाली को श्वेत कंटकारी कहते हैं। श्वेत कंटकारी की ताजी जड़ को दूध में पीसकर मासिकस्राव के चौथे दिन से प्रतिदिन दो ग्राम पिलाने से गर्भधारण होता है।

8. गोखरू:

छोटा गोखरू और तिल को समान मात्रा में लेकर, चूर्ण बनाकर रख लें। इसे 4 से 8 ग्राम सुबह-शाम बकरी के दूध में सेवन करने से गर्भाशय शुद्ध होकर बंधत्व (बाँझपन) नष्ट हो जाता है। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि गोखरू दो प्रकार का होता है। एक छोटा और दूसरा बड़ा। यहां छोटे गोखरू के बारे में लिखा गया है। बड़े वाले गोखरू में यह क्षमता नहीं होती है।लगभग 10-20 ग्राम गोखरू के फल के चूर्ण की फंकी देने से स्त्रियों में बाँझपन का रोग मिट जाता है।

9. अमरबेल:

अमरबेल या आकाशबेल (जो बेर के समान वृक्षों पर पीले धागे के समान फैले होते हैं) को छाया में सुखाकर रख लें। इसे चूर्ण बनाकर मासिक-धर्म के चौथे दिन से पवित्र होकर प्रतिदिन स्नान के बाद 3 ग्राम चूर्ण 3 ग्राम जल के साथ सेवन करना चाहिए। इसे नियमित रूप से नौ दिनों तक सेवन करना चाहिए। सम्भवत: प्रथम आवृत्ति में ही गर्भाधान हो जाएगा। यदि ऐसा न हो सके तो योग पर अविश्वास न कर अगले आवृत्ति में भी प्रयोग करें, इसे घाछखेल के नाम से भी जाना जाता है।
 से लाभ होता है!


अदरक का रस कान में डालने से कान के दर्द, बहरेपन एवं कान के बंद होने पर लाभ होता है।
कान में आवाज होने पर :–

लहसुन एवं हल्दी को एक रस करके कान में डालने पर लाभ होता है। कान बंद होने पर भी यह प्रयोग हितकारक है।

कान में कीड़े जाने पर :–
दीपक के नीचे का जमा हुआ तेल अथवा शहद या अरण्डी का तेल या प्याज का रस कान में डालने पर कीड़े निकल जाते हैं।
कान के सामान्य रोग :–
सरसों या तिल के तेल में तुलसी के पत्ते डालकर धीमी आँच पर रखें। पत्ते जल जानेपर उतारकर छान लें। इस तेल की दो-चार बूँदें कान में डालने से सभी प्रकार के कान-दर्द में लाभ होता है

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गठिया बाँय – Gout- छोटे जोडो का दर्द!
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ठियाबाँय की परिभाषा(Definition):-जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगीके एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है,

इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं। यह कई तरह का होती है, जैसे-एक्यूट, आस्टियो, रूमेटाइट, गाउट आदि।

क्या है गठिया?जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनताहै। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है।
गठियाबाँय के लक्षण(Symptoms)
गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। इसका प्रभाव प्राय घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों में होता है उसके बाद यह कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ भी दिखाई पड़ता है।
गठियाबाँय के कारण ( Cause)
महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को होता है। यह पुरुषों को 75 की उम्र के बाद होता है। महिलाओं में यह महावारी के बन्द (मेनोपॉज) के बाद होता है। या समय से पहले महावारी का बन्द होने से।

अगर आपके माता-पिता को यह बीमारी है तो आपको भी 20% चांस होगा कि यह बीमारी हो जाए।

बारिश में ज्यादा भींगने सें। सर्दी लगने सें।
खट्टी और बादी चीजों का ज्यादा इस्तेमाल करने सें।
आर्थराइटिस के जोखिम कारक से
महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण,
शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी,
मोटापा, ज्यादा शराब पीना, हाई ब्लड प्रेशर , अधिक सैक्स करने से,
और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।
किस तरह से दिखता है गठिया!
पैरों के अंगूठों में सूजन पैरों में गठिया का असर सबसे पहले देखने को मिलता है। अंगूठे बुरी तरह से सूज जाते हैं और तब तक ठीक नहीं होते जब तक की उनका इलाज ना करवाया जाए।

उंगलियों का होता है यह हाल उंगलियों के जोड़ में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा हो जाते हैं। इससे उंगलियों के जोडो़ में बहुत दर्द होता है जिसके लिये डॉक्टर का उपचार लेना पड़ता है।

दर्द से भरी कुहनियां गठिया रोग कुहनियां तथा घुटनों में हो सकता है।इसमें कुहनियां बहुत ही तकलीफ देह हो जाती हैं और सूजन से भर उठती हैं।

परहेज :- (Avoid)
गरम व मिठे पदार्थ से परहेज करें। लाल मिर्च -गोश्त-चाय-लहसुन-प्याज-अंड़ा-मछली-आम-बैंगन- आलू-अरबी-चावल-चना-मसूर की दाल-बर्फ-अफीम-मटर-भांग-शराब-उड़द की दाल-फूलगोभी- बेसन-गुड-तम्बाकू-मैदे की रोटी-केला-पापड.-चाकलेट-सिरका-ब्रेड-डिब्बा बंद पदार्थ-तैल की पकी हुई चीजें नहीं खावें।अम्ल व नमकीन – कचौड़ी – और तेज मसालेदार पदार्थ से परहेज करें।बादी पदार्थ से परहेज करे।अति अध्ययन-धुपमें चलनें-फिरनें और अधिक चिन्ता – अधिक मैथुन से बचें।

उपयोग:- (Use)
हरी तरकारियों में सें पालक- चोकर युक्त आटे की रोटी – मक्का – बाजरा- जौ- ग्वार की फली – छिलके वाली मूंग की दाल – लौकी- पत्ता गोभी – चुकन्दर- चौलाई की फली – कुलफा-तोरई-शलगम-कददू-टिंडे-मूँग की दाल-दूध-दही-ककड़ी-गाजर-करेला-मक्खन-मलाई-अरहर की दाल-खिचड़ी-धनिया -पोदीना-मूली-राई-बथुआ-भिंडी-साबूदाना वगैरा ।

गठियाबाँय का यूनानी ईलाज (Treatment):
मुफरदात नुस्खा(Single Medicine)
(1) 25 ग्राम सोंठ, 50 ग्राम हरड़, 15 ग्राम अजमोद तथा 10 ग्राम सेंधा नमक-सबको पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से 3 ग्राम चूर्ण सुबह और 3 ग्राम शाम को सेवनकरें!
(2) सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सफेद जीरा, लहसुन, हींग तथा नमक-सबको पीसकर चूर्ण बना लें! इस चूर्ण में से 4-4 ग्राम की मात्रा दिन में चार बार शहद के साथ चाटें!

(3) अड़ूसा के पत्ते गरम करके प्रभावित अंगों को सेंकनाचाहिए!इससे सूजन कम हो जाती है!

(4) कपूर 2 ग्राम और अफीम 1 ग्राम दोनों को सरसों के तेल में पकाकर गठिया के अंगों पर सुबह-शाम मालिश करें।

(5) सरसों के तेल में दो चम्मच अजवायन, चार कलियां लहसुन तथा जरा सी अफीम डालकर पका लें! इस तेल को छानकर शीशीमें रख लें! रोज धूप में बैठकर इस तेल की मालिश करें!
6) सोंठ 30gm – जीरा स्याह 30gm- कालीमिर्च 15gm – पोदीना 30gm- असगन्द 30gm- सुरंजान 30gm – इसपन्द खूलन्जान 30gm- अजवाइन खुरासानी 25gm इन सब दवाईयाँ का बारीक पाउण्ड़र बनाकर एक एक चम्मच सुबह शाम ले।


(7) रात को हल्का भोजन करके जल्दी सो जाएं !तेज धूप तथा पुरवाई में न बैठें! गरमी के मौसम में सुबह तथा जाड़ों में शाम को टहलना अच्छा रहता है!


(8) भाप से सेंक लें !गठिया के दर्द में सिकाई करना मना होना हैलेकिन अगर आप भाप यानि स्टीम लेते हैं तो आपको आराम मिलेगा। इसके लिए गुनगुने पानीमें तौलिया भिगोकर दर्द वाली जगह पर सिकाई करें।

(9) स्टीम बॉथगठिया का दर्द होने पर स्टीम बॉथ लें और उसके तुरंत बाद जैतून के तेल की मालिश कर लें। इससे बेहद आराम मिलेगा।
(10) नमक और पानी– शाम के समय थोडा गरम (सहने लायक) पानी में 10 चमच्च नमक ले कर उसे अपने पैरों को सेका करे, ऐसा करने से जोड़ो के दर्द से राहत मिलेगी ।

यूनानी मुरक्कब नस्खाँ (Compound Medicine)



नूस्खाँ नम्बर एक :- (1)माजून चोबचीनी 7gm सुबह के समय पानी से लें।

(2) इतरीफल शाहतरा 7gm रात को सोते समय पानी के साथ लें।

(3) शर्बत उन्नाब 20-20ml सुबह शाम पानी के साथ लें।

(4) कैप्सुल औजाई 2-2 सुबह शाम पानी के साथ ले।

(5) कुर्स गौदन्ती 1-1 टेबलेट सुबह शाम पानी के साथ ले।

(6) रोगन (तेल) सुर्ख + सुरंजान + लौंग को आपस में मिलाकर थोड़ा गर्म करके मालिश करें।

ये नुस्खां एक महिने तक इस्तेमाल करें
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सेक्स के लिए दिन में बेस्ट है सुबह का समय :: रिसर्च
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सुबह का समय वैसे भी बहुत अच्छा माना जाता है। एक रिसर्च की मानें तो सुबह की तरोताजगी आपको संभोग के लिए भी अच्छा माहौल मुहैया कराती है। एक नई रिसर्च में कहा गया है कि सेक्स का सबसे बढ़िया समय जगने के करीब 45 मिनट बाद यानी 7.30 बजे सुबह है। रात भर की बेहतर नींद के बाद इस समय ऊर्जा का स्तर भी काफी बढ़ा होता है। इसका मतलब यह हुआ कि दोनों पार्टनर के अंदर काफी स्टैमिना होता है।


सुबह के सेक्स का यह फायदा होता है कि इस दौरान निकलने वाले हॉर्मोन एंडॉर्फिन से आपका ब्लड प्रेशर और स्टेस लेवल कम होता है जिससे आप दिन भर ऊर्जा से भरा महसूस करता है।

यह सर्वे इंग्लैंड के फॉर्जा सप्लिमेंट्स ने कराया है। करीब 1000 हजार लोगों ने इस सर्वे में भाग लिया।

इस स्टडी में यह भी पाया गया कि दौड़ लगाने के लिए सुबह में 7 बजे से ठीक पहले का समय सबसे अच्छा है। इस स्टडी में बताया गया है कि मदिरा सेवन के लिए सबसे अच्छा समय शाम में 6.10 बजे है। बिस्तर पर जाने से चार घंटे पहले शराब पीने से लिवर रिकवरी के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

सोने के लिए आदर्श समय 10.10 बजे है। नाश्ते का बेहतरीन समय 7.15 बजे, लंच के लिए 2.15 बजे दिन में और डिनर का सबसे अच्छा समय शाम 6 बजे है इससे आपको वजन कम करने में मदद मिलती है।

पार्टनर के साथ इन चीज़ों से उत्तेजित होती हैं महिलाएं :: 
पार्टनर के साथ मानिसक रूप से जुड़ने के लिए उससे बेडरूम से बाहर संवाद एक अच्छा तरीका है। आप उनसे अपनी या उनकी सेक्शुअल पसंद और नापसंद के बारे में भी बातें कर सकते हैं। इससे आपकी पार्टनर को कंफर्टेबल महसूस होता है और वह आपकी ओर आकर्षित होती हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस ने हाल के दिनों में एक स्टडी कराई है जिसमें पता चला है, जब शारीरिक संबंध की बात आती है तो महिलाओं को उत्तेजित करने वाली कौन सी चीजें हैं। आइये जानते हैं इस स्टडी से महिलाओं की पसंद के बारे में…
पार्टनर के साथ मानिसक रूप से जुड़ने के लिए उससे बेडरूम से बाहर संवाद एक अच्छा तरीका है। आप उनसे अपनी या उनकी सेक्शुअल पसंद और नापसंद के बारे में भी बातें कर सकते हैं। इससे आपकी पार्टनर को कंफर्टेबल महसूस होता है और वह आपकी ओर आकर्षित होती हैं।

अगर आपकी पार्टनर आपसे आपके शेड्यूल के बारे में पूछती है, तो ज्यादा संभावना होती है कि वह आपसे अंतरंग होना चाहती है। वह आपके निजी जीवन में प्राइवेसी के बारे में भी पूछ सकती है ताकि उनको पता चल सके कि आपके साथ उनको तंहाई में कुछ वक्त मिल पाएगा या नहीं।

उनकी बातें सुनने और बात करने से एक भावनात्मक लगाव पैदा होता है, जिससे आपके लिए उनके दिल में इच्छा पैदा होती है।

जर्नल ऑफ साइकॉलजी के मुताबिक, महिलाओं आम पुरुषों के मुकाबले उस पुरुष की ओर ज्यादा आकर्षित होती हैं जिनके अंदर सेंस ऑफ ह्यूमर हो और उनके साथ डेट करने का 31 फीसदी ज्यादा चांस होता है। इसलिए अपनी पार्टनर के साथ अपने दिन की डिटेल शेयर करते वक्त मजाक करना ना भूलें।

जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल सोशल साइकॉलजी के मुताबिक, महिलाएं उन पुरुषों की ओर ज्यादा आकर्षित होती है जो किसी से टकराव की स्थिति में विवादों में नहीं उलझता है और चालाकी से मामले को हैंडल कर लेता है।

जब आपके उनकी शरीर के किसी हिस्से को स्पर्श करें तो उनकी प्रतिक्रिया देखें और इस बात पर गौर करें कि वह शरीर के किस हिस्से को लेकर ज्यादा सचेत होती हैं। कुछ ऐसा न करें कि उनमें असुरक्षा का भाव पैदा हो। अगर आप ऐसा करेंगे तो वह आपकी ओर आकर्षित होगी।

अगर आप सोचते हैं कि जिम में मसल्स बनाकर उनको इंप्रेस कर देंगे तो आप गलत है। यूसीएलए द्वारा की गई एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि महिलाएं ज्यादातर वैसे लोगों को पसंद करती हैं जिनकी ऐथलेटिक जैसी बॉडी लगती है।


जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन में बताया गया है कि किसी महिला को सेक्शुअली मोटिवेट करने के लिए उनके प्रति वफादार रहना जरूरी है।


जर्नल इवॉल्युशनरी साइकॉलजी में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, इस बात की बहुत कम उम्मीद होती है कि महिलाएं एक बैड किसर के साथ अगले लेवल तक जाती हैं। आप अपनी किसिंग स्किल से उनको इंप्रेस कर सकते हैं।


रोना भी सेहत के लिये फ़ायदेमंद होता है, जानिये कैसे!
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इंसान परेशानी, दुःख में आमतौर पर रोटा है, कभी कभी कोई घटना ऐसी हो जाती है कि आँखों से आंसू बहने लगते हैं, बहुत बार खुशी प् कर आंसू छलक जाते हैं|


रोना कोई कमज़ोरी या बिमारी नहीं है, रोना अच्छा और बुरा समझा जा सकता है, रोने के कई सारे फायदे भी हैं|


क्‍यों जरुरी है रोना-
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1. आंखों को साफ करे- आंसू हमें साफ देखने में मदद करता है, जी हां यह सच है। आंसू, आइबॉल और पलखों को ल्‍यूब्रिकेट करता है और म्‍यूकस झिल्‍ली को सूखने से बचाता है।

2. बैकटीरिया को नष्‍ट करे- आंसू एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी वाइरल ऐजेंट की तरह काम करता है। इसमें लाइसोजाइम पाया जाता है, जो कि एक द्रव होता है और 90 से 95 प्रतिशत बैक्‍टीरिया को केवल 5 से 10 मिनट में ही मारने की शक्‍ति रखता है।

3. मूड सही करे- यह माना जाता है कि रोने से किसी भी इंसान का मैगनीज़ लेवल कम हो जाता है। वरना अगर यह हाई होगा तो चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन, थकान, आक्रामकता, भावनात्मक अशांति आदि पैदा हो जाती है।


4. स्‍ट्रेस कम होता है- स्‍ट्रेस की वजह से शरीर में जो रसायन का निमाण हो जाता है, उसे आंसू जड़ से मिटा देता है। लियूसीन, इंकीफालीन और प्रोलेक्‍टिन आदि ज्‍यादा स्‍ट्रेस की वजह से बन जाते हैं। आंसू को रोकने या दबाने से स्‍ट्रेस लेवल बढ़ता है जिससे हाई ब्‍लड प्रेशर, अल्‍सर और हार्ट संबधी बीमारी का खतरा बढ जाता है।

5. आँसू भावनाओं को बहाता है- आंसू चिकित्सीय होते हैं। यह चिंता और निराशा को बाहर निकालता है। इससे पहले कि यह आपके स्नायु और हृदय प्रणाली को तबाह करे आप रो लीजिये। अगर आप रोएंगे नहीं और सारा दुख दिल में समाये रखेंगे तो वह दिमाग के लिम्‍बिक प्रणाली के अंदर इकट्ठा और दिल के कुछ कोनों में जाने लगेगा। फीलिंग एक हवा के समान होती है, जिसे जितना दबाया जाए वह उतना ही ऊपर आने की कोशिश करती है। रोने से मन की सफाई हो जाती है और यह बहुत स्वस्थ माना जाता है जिससे आराम महसूस होता है।

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