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ना में तुम्हें कहना चाहता हूँ ना तेरी याद में रोना चाहता हूँ


ना में तुम्हें कहना चाहता हूँ ना तेरी याद में रोना चाहता हूँ
जब तक ज़िन्दगी है में तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ


ज़िन्दगी तुम बिन उल्फत लगती है एक पल की जड़ी मुद्दत सी लगती है
पहले नहीं पर अब सोचते है हम हर लम्हा तेरी ज़रूरत सी लगती है


दिल की आवाज़ को इज़हार कह्ते है
झुकी निगाह को इनकार कह्ते है
सिर्फ पाने का नाम इश्क नहीं
कुछ खोने को भी प्यार कह्ते है

किसी को खुवाब दिखाकर भाग जाना गलत है
मन में ज़हर हो तो होठों से मुस्कुराना गलत है



कुछ तबियत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने को सूरत न हुई
जिसे चाहा उसे अपना न सके जो मिली उस से मोहब्बत न हो सकी


इज़हार मोहब्बत का कुछ ऐसा हुआ
किया कहें की प्यार कैसे हुआ
उनकी एक झलक पे निशार हुए हम
सादिगी पर मर मिटने और आँखों से इनकार हुआ


दुआओं पे हमारे ऐतबार रखना
दिल में अपने ना कोई सवाल रखना
देना चाहते हो अगर खुसिया हमें
तो बस आप खुश रहना और अपना ख्याल रखना



वो जब मेरे पास होगी तो शायद क़यामत होगी
अभी तो उसकी तस्वीर ने ही तबाही मचा रखी है



जिसने ख़ुशी खोजी उसे धन मिला
जिसने हंसी खोजी उसे चमन मिला
लेकिन जो प्यार खोजने चला
उसे ना तन मिला ना मन मिला



सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा
ना जाने किया बात थी उन में और हम में
सारी महेफिल भूल गए बस वो चहेरा याद रहा






अजीब तरह से गुजर रही है ज़िन्दगी
सोचा कुछ किया कुछ हुआ कुछ और मिला कुछ




ये कयाम कैसा है रह में तेरे इश्क को किया हुआ
अभी चार काटें चुभे नहीं तेरे सब इरादे बदल गए


हर बात तेरी मानु न मुमकिन है
जिद छोड़ दे ए दिल अब तो बचचा नहीं रहा

मुझे ज़िन्दगी की दुआ देने वाले
हंसी आ रही है तेरी सादगी पर


दोस्त वो है जो दोस्ती का हक दोस्त की गैर मौजूदगी में अदा करे
और गैरों की महफिल में उसकी इज्ज़त की हिफाज़त करे


फुर्सत में याद करना हो तो कभी मत करना
मैं तनहा ज़रूर हु मगर फुजूल नहीं



किसी को औकात याद दिलने के लिए जो अलफ़ाज़
हमारी जबान से निकलते है
वो दर हकीक़त दूसरों को हमारी औकात बता रहे होते है



उफ़ उसके रोठने की अदाएँ भी गजब की थी
बात बात पे ये कहना शोच लो फिर मैं बात नहीं करूंगी





वो अनजान चला है जन्नत को पाने की खातिरबे

खबर को इत्तेला कर दो की माँ बाप घर पर है





खुवाइश बद्साहों को गुलाम बना देती है
मगर सब्र गुलामो को बादशा बना देती है















ना में तुम्हें कहना चाहता हूँ ना तेरी याद में रोना चाहता हूँ
जब तक ज़िन्दगी है में तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ

ज़िन्दगी तुम बिन उल्फत लगती है एक पल की जड़ी मुद्दत सी लगती है
पहले नहीं पर अब सोचते है हम हर लम्हा तेरी ज़रूरत सी लगती है


दिल की आवाज़ को इज़हार कह्ते है
झुकी निगाह को इनकार कह्ते है
सिर्फ पाने का नाम इश्क नहीं
कुछ खोने को भी प्यार कह्ते है


किसी को खुवाब दिखाकर भाग जाना गलत है
मन में ज़हर हो तो होठों से मुस्कुराना गलत है


कुछ तबियत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने को सूरत न हुई
जिसे चाहा उसे अपना न सके जो मिली उस से मोहब्बत न हो सकी



इज़हार मोहब्बत का कुछ ऐसा हुआ
किया कहें की प्यार कैसे हुआ
उनकी एक झलक पे निशार हुए हम
सादिगी पर मर मिटने और आँखों से इनकार हुआ


दुआओं पे हमारे ऐतबार रखना
दिल में अपने ना कोई सवाल रखना
देना चाहते हो अगर खुसिया हमें
तो बस आप खुश रहना और अपना ख्याल रखना


वो जब मेरे पास होगी तो शायद क़यामत होगी
अभी तो उसकी तस्वीर ने ही तबाही मचा रखी है


जिसने ख़ुशी खोजी उसे धन मिला
जिसने हंसी खोजी उसे चमन मिला
लेकिन जो प्यार खोजने चला
उसे ना तन मिला ना मन मिला



सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा
ना जाने किया बात थी उन में और हम में
सारी महेफिल भूल गए बस वो चहेरा याद रहा
















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Dard Shayari

Shayari With Love










हमारी एक मुस्कुराहट पर वो हमारे साथ सो गए,
गौर फरमायेगा…..
हमारी एक मुस्कुराहट पर वो हमारे साथ सो गए,
जब वो P@nty पहनने लगे,
हम फिर से जरा मुस्करा दिए…..

आशकी लिखे दीवानगी लिखे या अपनी ख्मुशी लिखे
दिल के ज़ज्बात अब अल्फाज़ नही बनते
आखिर आज क्या लिखे



चूमेंगे किस की ज़ुल्फ़ घटाओ को देखकर
एक जुर्म ऐ खुश ग्वार का मौसम ना आजाए



तेरी चाहत मेरी आँखों में है
तेरी खुशबू मेरी सांसो में है
मेरे दिल को जो घायल कर जाए
ऐसी अदा सिर्फ तेरी बातो में है





पलकों की हलचल को इकरार कहते है
किसी को ढूढे नजर तो उसे इन्तजार कहते है
किसी के बिना जब बेचैन हो दिल तो उसे प्यार कहते है



यूं नजर से बात की और दिल चुरा गए
अँधेरे से सायो में धड़कन सुना गए
हम समझते थे अजनबी आप को
पर आप तो हमको अजनबी बना गए




दुआओं पे हमारे ऐतबार रखना
दिल में अपने ना कोई सवाल रखना
देना चाहते हो अगर खुसिया हमें
तो बस आप खुश रहना और अपना ख्याल रखना

उम्र गुजारी है इल्तिजा करते
किस्सा -ऐ – गम लब आशना करते
जीने वाले तेरे बगैर ऐ दोस्त
मर ना जाते तो और क्या करते



इस दिल को किसी की आस रहती है
निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है
तेरे बिना किसी चीज़ की कमी तो नही
पर तेरे बिना ज़िन्दगी बड़ी उदास रहती है



सीने से लगा के यार रूठ गए है
जाने क्यों है उन्हें हमसे मोहब्बत ज्यादा
जो वो हर बात जनके भूल जाते है

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