Header Ads

हेल्दी लाइफ स्टाइल के टिप्स…


हेल्दी होना बहुत जरूरी है. स्वस्थ शरीर के बिना हम कुछ नहीं कर सकते हैं. हेल्दी होने का मतलब मोटा होना नहीं है.

आज के इस मोर्डन टाइम में सबसे ज्यादा नुकसान स्वास्थ्य को पहुंचा है. पैसे कमाने और प्रतियोगी जीवन को लीड करने के चक्कर में इंसान ने हेल्दी लाइफस्टाइल को बहुत पीछे छोड़ दिया है. ऐसे में आज की व्यस्त जिंदगी में खुद को स्वस्थ रखना किसी चुनौती से कम नहीं. लेकिन खान-पान पर ध्यान और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाकर आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं. ब्लौसम कोचर से हुई खास बातचीत में उन्होंने बताया की आप कैसे हेल्दी और फिट रह सकते हैं.


हेल्दी लाइफ स्टाइल के लिए आपकी क्या सलाह है?
हेल्दी होना बहुत जरूरी है. स्वस्थ शरीर के बिना हम कुछ नहीं कर सकते हैं. हेल्दी होने का मतलब मोटा होना नहीं है. हेल्दी होना आपकी स्किन, बाल और बॉडी से दिखना चाहिए.




आपकी कार्यक्षमता से पता चलना चाहिए कि आप हेल्दी हैं. इसके लिए सही न्यूट्रिशन जरूरी है. दाल, चपाती, सब्जी के साथ दही, पनीर, मीट, दाल, अखरोट, बादाम, काजू आपकी डायट में होना चाहिए. हरी सब्जियां खूब खाना चाहिए. दिन भर में कम से कम आठ से दस गिलास पानी, फलों का जूस, दूध और छाछ आपके खाने का हिस्सा होना चाहिए. फ्राई फूड, फास्ट फूड, केक, पेस्ट्री, स्वीट्स, पीजा, बर्गर आ पकी सेहत का सत्यानाश कर देते हैं, इससे दूर रहें.


रोजाना कुछ घंटों की तेज वॉक बहुत जरूरी है. मैं थ्रेडमिल पर वॉक को पसन्द नहीं करती. सुबह घर से बाहर निकलो और सड़क पर या पार्क में जाओ और वहां तेज-तेज कदमों से चलो. फिर कुछ देर मेडिटेशन और योगा करो, प्राणायाम करो. यह चीजें आपकी आन्तरिक स्वास्थ्य और सुन्दरता को बढ़ा देंगी और इसका नतीजा आपके फेस पर नजर आएगा. हमारे लिए आठ से दस घंटे सोना भी बहुत जरूरी है.


भारतीय महिलाएं घर के कामों में इतना व्यस्त रहती हैं कि रात में 12 बजे से पहले बिस्तर पर नहीं जातीं. ये बहुत गलत है. उन्हें सुन्दर और हेल्दी रहना है तो दस बजे तक सो जाना चाहिए. कम से कम सात घंटे की नींद तो अति आवश्यक है. यह हमारी ब्यूटी और हेल्थ दोनों के लिए जरूरी है.
वर्ल्ड थायराइड डे: जाने क्यों होता है थायराइड
आज यानी 25 मई को थायरौइड जागरूकता दिन के रूप में विश्व थायरौइड दिवस 


बात करें साल 2018 की तो पूरे भारत में करीब 42 मिलियन भारतीयों में अलग-अलग प्रकार के थायराइड डिसऔर्डर पाए जा चुके हैं. भारत में थायराइड की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और खासकर महिलाओं में. इसका कारण यह है कि पुरुषों की तुलना में एक महिला के शरीर में हार्मोन असंतुलन की संभावना अधिक होती. महिलाएं हार्मोन संबंधी बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं

“थायराइड डिसऔर्डर

यह बीमरी आमतौर पर थायराइड ग्रंथि(Gland) की अधिक सक्रियता या फिर कम सक्रियता से होते हैं. सर्वाधिक पाए जाने वाले थायराइड डिसऔर्डर हैं – हायपरथायरौइडिज्‍म (थायराइड गतिविधि में असाधारण वृद्धि), हाइपोथायरौइडिज्‍म (थायराइड गतिविधि में असाधारण गिरावट), थायरौइडाइटिस (थायराइड ग्रंथि में सूजन), गोइटर और थायराइड कैंसर. थायराइड की बीमारियों की जांच और इलाज बेहद आसान है.

“प्राथमिक उपचार”

अगर थायराइड ग्रंथि (Gland) में थोड़ी सी भी सूजन नज़र आती है तो बिना किसी लापरवाही के इसकी तुरंत जांच करानी चाहिए. जब भी इसके संकेत देखने को मिलें तो तत्काल डॉक्टर की सलाह लेनी ज़रूरी है. थायराइड पर नियंत्रण के लिए इसकी जल्द पहचान और इलाज दोनों ही महत्वपूर्ण है.

“गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा”
एक गर्भवती महिला को थायराइड डिसऔर्डर का खतरा अधिक होता है, खासकर तब जब उसके शरीर में थायराइड गतिविधि असाधारण रूप से अधिक या कम हो जाती है. महिला के शरीर में हार्मोन स्तर असंतुलित होने से विभिन्न प्रभाव देखने मिलते हैं, जैसे असामान्य माहवारी(Menstruation), असंतुलित या गैर-मौजूद ओव्युलेशन चक्र (Ovulation cycle),मिसकैरेज,समय पूर्व प्रसव,गर्भ में मृत शिशु की डिलीवरी,प्रसव के बाद रक्तस्राव और जल्द रजोनिवृत्ति(Menopause) की शुरुआत भी हो सकती है.

बचाव-

शरीर में आयोडीन की कमी को आसानी से अपने आहार में नियंत्रण रखे साथ ही नियमित व्यायाम से थायराइड के खतरे को दूर किया जा सकता है. थायराइड की समस्याएं रोकने के लिए व्यस्कों को 150 एमसीजी आयोडीन का प्रतिदिन सेवन करने की सलाह दी जाती है. वहीं, गर्भवती महिलाओं के लिए यह मात्रा अधिक होती है.

लक्षण
1.थकान
2.एकाग्रता में कमी
3.रूखी त्वचा
4.कब्ज़
5.ठंड लगना
6.शरीर में तरल पदार्थों का रुकना / वजन बढ़ना
7.मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द
डिप्रेशन
8.बाल झड़ना


थायराइड डिसऔर्डर की जांच एवं पुष्टि के लिए शारीरिक जांच के अलावा कुछ विशेष परीक्षण भी किये जाते हैं. आमतौर पर खून की जांच के द्वारा थायराइड हार्मोन और टीएसएच (थायराइड स्टिम्यूलेटिंग हार्मोन्स) स्तर की जांच भी की जाती है. उपरोक्त कोई भी लक्षण महसूस होने पर थायराइड हार्मोन्स स्तर और टीएसएच जांच की सलाह दी जाती है. अधिकतर मामलों में थायराइड डिसऔर्डर को इलाज के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है और इनसे जान को खतरा नहीं होता. हालांकि कुछ स्थितियों के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है.
जाने क्यूं हार्ट अटैक से अलग है कार्डियक अरेस्ट
कार्डियक अरेस्‍ट को अक्सर लोग दिल का दौरा समझते हैं, मगर ये उससे अलग है. जानिए क्यूं अलग है कार्डियक अरेस्‍ट...

कार्डियक अरेस्‍ट होना आज के इस व्यस्त समय में एक आम बात हो गई है. आए दिन कार्डियक अरेस्‍ट से होने वाली मौत इस बात का सबूत है. पर क्या आप जानते है की कार्डियक अरेस्‍ट क्यूं और इसके लक्षण क्या होते है तो चलिए हम आपको बताते है.

कार्डियक अरेस्‍ट

कार्डियक अरेस्‍ट का मतलब है अचानक दिल का काम करना बंद हो जाना. ये कोई लंबी बीमारी का हिस्‍सा नहीं है इसलिए ये दिल से जुड़ी बीमारियों में सबसे खतरनाक माना जाता है.

दिल के दौरे से क्यूं अलग है कार्डियक अरेस्‍ट
कार्डियक अरेस्‍ट को अक्सर लोग दिल का दौरा समझते हैं, मगर ये उससे अलग है. जानकार बताते हें कि कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल शरीर के चारों ओर खून पंप करना बंद कर देता है. मेडिकल टर्म में कहें तो हार्ट अटैक सर्कुलेटरी समस्या है जबकि कार्डियक अटैक, इलेक्ट्रिक कंडक्शन की गड़बड़ी की वजह से होता है.

दिल में दर्द के कारण

सीने में अगर दर्द हो रहा हो तो जरूरी नहीं कि वो दिल का दौरा ही हो, डौक्‍टर्स के मुताबिक ऐसा हार्ट बर्न या कार्डियक अटैक के कारण भी हो सकता है. कार्डियक अरेस्ट में दिल का ब्लड सर्कुलेशन पूरी तरह से बंद हो जाता है. दिल के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा हो जाने से इसका असर दिल की धड़कन पर पड़ता है. इसलिए कार्डियक अरेस्ट में कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है.
कार्डियक अरेस्‍ट के लक्षण
कार्डियक अरेस्ट वैसे तो अचानक होने वाली बीमारी है. लेकिन जिन्हें दिल की बीमारी होती है उनमें कार्डियक अरेस्ट की आशंका ज्यादा होती है.

1.कभी-कभी छाती में दर्द होना
2.सांस लेने में परेशानी
3.पल्पीटेशन
4.चक्कर आना
5.बेहोशी
6.थकान या ब्लैकआउट हो सकता है.

कार्डियक अरेस्‍ट का ट्रीटमेंट
हार्ट अटैक से पुरी तरह अलग कहे जाने वाले कार्डियक अरेस्‍ट के ट्रीटमेंट में मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है, जिससे उसकी दिल की धड़कन को रेगुलर किया जा सके. इसके मरीजों को ‘डिफाइब्रिलेटर’ से बिजली का झटका देकर हार्ट बीट को रेगुलर करने की कोशिश की जाती है.



खाने में दही के इस्तेमाल से सेहत रहेगी दुरुस्त
जिन लोगों को डाइजेशन यानी पाचन की प्रौब्लम होती है, उनके लिए दही बहुत इफेक्टिव होती है. दही प्रोबायोटिक से भरपूर होती है. इसमें ऐसे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो हमारे पेट के पाचन क्रिया को आसान बनाता है.
तेज गरमी में बौडी को सुकून पहुंचाने के लिए हर घर में दही का इस्तेमाल होता है, जिसे हम बिना हेल्थ की टेन्शन लिए खा सकते हैं. दही, दूध से बना प्रौडक्ट है, जिसमें विटामिन बी-12, पौटिशियम और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दही के कुछ ऐसे फायदे, जो गरमी में स्किन को तो फायदा पहुंचाएंगे ही, साथ ही हेल्थ के लिए भी काफी असरदार होंगे. चलिए जानते हैं क्या हैं ये फायदे…

1. डाइजेशन का अच्छा सोर्स है दही

जिन लोगों को डाइजेशन यानी पाचन की प्रौब्लम होती है, उनके लिए दही बहुत इफेक्टिव होती है. दही प्रोबायोटिक से भरपूर होती है. इसमें ऐसे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो हमारे पेट की पाचन क्रिया को आसान बनाता है.

2. ब्यूटीफुल और सौफ्ट स्किन के लिए इफेक्टिव है दही

आजकल की बिजी लाइफ में हम अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान नहीं रख पाते हैं, लेकिन दही में स्किन को मौइस्चाराइज रखने के लिए कई नेचुरल गुण होते हैं. दही का इस्तेमाल हम फेसपैक बनाकर कर सकते हैं, जिसे फेस पर लगाने से हमारी स्किन में मौजूद डैड सैल्स साफ हो जाते है और आपको एक क्लीन और शाइनी स्किन मिलती है.

3. स्ट्रौंग इम्यूनिटी के लिए इस्तेमाल करें दही

दही में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जिससे हम कई बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं. औस्ट्रिया की वियाना विश्वविद्यालय की खोज में ये पाया गया है कि दही रोज खाने से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम स्ट्रौंग होता है.
4. हड्डियों के लिए भी इफेक्टिव है दही

आप जानते ही होंगे कि हमारी बौडी की हड्डियों के लिए कैल्शियम कितना जरूरी होता है. एक कप दही में 275mg कैल्शियम होता है. जिससे हड्डियों को कैल्शियम मिलता है और हमारे बोन्स मजबूत होते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.