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प्रेगनेंसी में पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज़


प्रेगनेंसी में पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज़ 

पेल्विक फ्लोर क्या है?
पेल्विक फ्लोर यानी श्रोणि की मसल एक ऐसी मसल है जो आपके दोनों पाँव के बीच होती है। यह मसल जघन की हड्डी से होकर पीठ पर रीड़ की हड्डी के सामने तक जाती हैं। यह गुलेल की पट्टी की तरह होती है।
यह क्यों इतना इंपोर्टेंट है?
आपकी पेव्लिक फ्लोर में श्रोणि(पेल्विक) के अंग जैसे योनी, गर्भाशय, आंत, और थैली होती हैं। श्रोणि की मसल यानी मासपेशी से आपको पेशाब कंट्रोल करने में मदद मिलती है। वो तब ढीली हो जाती हैं जब यूरिन छोड़ता है।

कमजोर श्रोणि मसल से आपको मसल सिकोड़ने और यूरिन को बाहर करने में दिक्कत होती है। आप इसकी वजह से छींकते, और खांसी लेते हुए यूरिन लीक कर सकते हैं। ऐसा तब होता है जब आपकी श्रोणि की एक्सर्साइज़ को अच्छा सहारा नहीं मिलता है, इससे आपको हमेशा भारीपन लगता है।

श्रोणि की मसल से आपकी योनी की मसल पर भी असर पड़ता है। अगर आपकी श्रोणि की मसल कमजोर है तो आपको सैक्स उतना अच्छा नहीं लगेगा।


जैसे ही आपकी उम्र बढ़ती है वैसे ही श्रोणि की मसल यानी पेल्विक फ्लोर मसल कमजोर होती है। आपके लिए श्रोणि को मजबूत रखना काफी ज़रूरी है क्योंकि मासिक धर्म बंद के बाद श्रोणि की समस्या और बढ़ सकती है। दिन में कुछ एक्सर्साइज़ करने से आपको इस मसल को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

प्रेगनेंसी में पेल्विक फ्लोर पर क्या फर्क पड़ता है?

आपको बताया गया होगा की प्रेगनेंसी में आपको अपनी श्रोणि की मसल मजबूत करनी है। इसका कारण ये है की जब पेट बढ़ता है तो इससे श्रोणि पर भार पड़ता है। इससे मसल और ऊतक कमजोर या ज़्यादा खिंच सकते हैं। इससे बच्चे के पैदा होने से पहले ही कमजोरी का सकती है। कब्ज़ प्रेगनेंसी में काफी आम है, और इससे पेल्विक फ्लोर पर और असर पड़ सकता है।


पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज़ से कैसे मदद होती है?

इन एक्सर्साइज़ को केगल्स कहते हैं और ये प्रेगनेंसी में काफी अहम हैं। अगर इन्हे नियमित रूप से करें तो इनसे यूरिन लीक होना बंद हो सकता है। अपने डॉक्टर से इन एक्सर्साइज़ के बारे में पूछें।

मजबूत पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज़ से आपके बढ़ते हुए वज़न की गति रुक सकती है। इससे कूल्हों और योनी के बीच खून का संचार काफी अच्छा हो सकता है, और इससे मदद होती है। एक अच्छी सैक्स लाइफ रहती है, इससे ऑर्गेज़्म भी अ होता है।

मैं पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज़ कैसे करूँ?

सबसे पहले तो ये जानें की पेल्विक फ्लोर है कहाँ। इसे जानने के लिए आपको पेशाब करते हुए एक दम से रोक देनी चाहिए। इसे ज़्यादा ना करें, ऐसा करने से आपकी थैली को नुकसान हो सकता है।

यह एक्सर्साइज़ किसी भी अवस्था में की जा सकती है, यह दिन में किसी भी समय, यहाँ तक की खाली या भरे पेट भी की जा सकती है। 
अपनी कोख को ऐसे सिकोड़ें जैसे आप पेशाब को लीक होने से रोक रही हों या आप गैस निकलने से रोक रही हों। 
3 सेकंड के लिए सिकोड़ें और 3 सेकंड के लिए ही रिलेक्स करें। सिकोड़ना और रिलेक्स करना एक बराबर ही होना चाहिए। 
एक बार में 5-6 बार करें और दिन में 10-15 बार की जा सकती हैं। 

पेवलिक फ्लोर मसल यानी कोख की मासपेशियों को बाकी मसल से अलग करने के लिए हमें छोटे से टेस्ट की ज़रूरत होती है। जब भी आप अगली बार पेशाब करने जाएँ तो रोक-रोक कर पेशाब करने की कोशिश करें। इस समय ध्यान दें की किन मसल की वजह से आप पेशाब रोकती हैं। ये मसल ही आपकी पेलविक फ्लोर मसल हैं। इसे ज़्यादा ना करें क्योंकि डॉक्टर ज़्यादा देर तक या ज़्यादा बार पेशाब नहीं रोकने की सलाह देते हैं।

मुझे कैसे पता चलेगा की ये एक्सर्साइज़ सही हो रही है?

इसे जानना का एक तरीका है, इसे तब ही करें जब आपको खून निकलने, और योनी या थैली में कोई इन्फ़ैकशन नहीं हो, और सैक्स के लिए आपको मना ना किया गया हो।


नहाते हुए आराम से अपनी योनी में एक या दो उंगली डालें। फिर एक्सर्साइज़ करना शुरू करे दें। अगर आपको योनी में कोई सिकुड़न लगे तो आप सही तरीके से एक्सर्साइज़ कर रही हैं।

एक्सर्साइज़ करने में ये 12 चीज़ें आपकी मदद कर सकती हैं 



एक्सर्साइज़ करने से बचने के कई बहाने होते हैं, जब आपका एक्सर्साइज़ करने का काफी मन होता है, तब भी आप कोई न कोई बहाना बना ही लेते हैं। जैसे अभी काफी थकान लगी है, और अभी समय नहीं है।


आप नीचे दी गई सलाहों से अपने एक्सर्साइज़ के रूटीन को सही तरीके से फॉलो कर सकते हैं:


1.खुदके लिए कुछ करें: कई अध्यन में पता चला है है की जो लोग केवल अच्छा दिखने के लिए जिम जॉइन करते हैं वो लोग इसपर ज़्यादा टिक नहीं पाते हैं। और जो लोग केवल अपने लिए एक्सर्साइज़ करते हैं, वही एक्सर्साइज़ को हमेशा जारी रख पाते हैं।


2.सब कुछ धीरे-धीरे करें: आप एक दिन में 10 किलोमीटर तो भागेंगे नहीं, है न? जब आप सब कुछ एक साथ करने की कोशिश करते हैं तब या तो वो थक जाते हैं या उनका मन ऊब जाता है। इसलिए शुरुआत आराम से करें। शुरू में आप कम भी दौड़ सकती हैं। जब आपके लिए इतना भागना आसान हो जाए तो आप इसे बढ़ा सकती हैं।

3.कोशिश जारी रखें: कोई भी अपने शुरुआती दिन से ही पर्फेक्ट नहीं होता है। सभी प्रकार की एक्सर्साइज़ में मेहनत लगती है। आपको लगातार कोशिश करने से ही किसी चीज़ की आदत पड़ती है।


4.कई प्रकार की एक्सर्साइज़ करें: दिलचस्पी लगातार बनी रहने के लिए आपको अलग-अलग प्रकार की एक्सर्साइज़ करती रहनी चाहिए और इससे आपके शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर भी काम होता है। आपको अलग-अलग मशीन का भी प्रयोग करना चाहिए। आपको अपना पूरा रूटीन बदलने की ज़रूरत नहीं हैं, आपको बस थोड़े-बहुत बदलाव करने हैं।

5.ज़्यादा खुदको कश्ट ना दें: ज़्यादातर लोग जो एक्सर्साइज़ प्लैन फॉलो करते हैं उसे पहले ही साल में छोड़ देते हैं, क्योंकि वो अपने आप को पहले साल काफी कश्ट देते हैं। आपको अपनी सीमाओं में काम करना चाहिए और धीरे-धीरे अपना रूटीन स्ट्रॉंग करना चाहिए।

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