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पीरियड्स में होता है दर्द तो खाएं ज्यादा से ज्यादा गाजर


पीरियड्स में होता है दर्द तो खाएं ज्यादा से ज्यादा गाजर

पीरियड्स के समय में ज्यादातर लड़कियां परेशान रहती है. इस समय उनकी लाइफस्टाइल बिल्कुल बदल जाती है और लीकेज से बचने के लिए लड़कियां कम दौड़-भाग करती हैं. इस समय लड़कियां दर्द, मूड स्वींग और चिड़चिड़ापन के दौर से गुजर रही होती हैं.




नई दिल्ली: पीरियड्स के समय में ज्यादातर लड़कियां परेशान रहती है. इस समय उनकी लाइफस्टाइल बिल्कुल बदल जाती है और लीकेज से बचने के लिए लड़कियां कम दौड़-भाग करती हैं. इस समय लड़कियां दर्द, मूड स्वींग और चिड़चिड़ापन के दौर से गुजर रही होती हैं.

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इन दिनों में कमर दर्द, पेट दर्द जैसी और भी कई परेशानियां लड़कियों को परेशान करती हैं. इन दिनों में सफर करना तो मुश्किल होता ही है साथ ही लड़कियों के लिए एक जगह ध्यान लगाना भी मुश्किल होता है. वैसे तो गाजर खाने के बहुत से फायदे हैं, मगर उन्हीं में से एक फायदा पीरियड्स से जुड़ा है.

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गाजर इस दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मददगार है. ज्यादातर महिलाओं को इस दौरान काफी असहज महसूस होता है. रोमजर्रा के काम में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस समस्या से निपटने का एक उपाय यह है कि आप गाजर से दोस्ती कर लें. यह न सिर्फ ब्लड फ्लो को नियमित करने, दर्द से राहत दिलाने में मददगार है बल्कि इसकी वजह से आप को महीने के उन दिनों में कम थकावट का भी एहसास होगा.

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आखिर क्यों गाजर पीरियड्स के दौरान इतना फायदेमंद है ?
आयरन
गाजर में आयरन से होता है भरपूर पीरियड्स के दौरान काफी ब्लीडिंग होती है, इसलिए गाजर खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है. वहीं यह न सिर्फ दर्द को कम करता है बल्कि ब्लड फ्लो को भी नियमित करता है.

बीटा कैरोटीन
गाजर में बीटा कैरोटीन पाया जाता है. पीरियड्स के दौरान ऐसी चीज खाना अच्छा होता है, जिसमें बीटा कैरोटीन की मात्रा ज्यादा होती है. गाजर में भी इसकी भरपूर मात्रा पाई जाती है. यह शरीर में जाकर विटामिन ए में बदल जाता है जो ब्लड फ्लो को कम करने और हैवी ब्लीडिंग को नियंत्रित करने में मददगार होता है.

इन दिनों गाजर का जूस बनाकर दिन में दो बार पी सकते हैं. अगर कोई दिक्कत ना हो फिर भी अच्छी सेहत के लिए गाजर को सलाद में शामिल कर सकते हैं.




प्रेग्नेंसी में महिलाएं शराब से रहें दूर नहीं तो बच्चों में डायबिटीज का खतरा, रिसर्च में खुलासा

Drinking Alcohol In Pregnancy Is Harmful: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को शराब से बिल्कुल दूर रहना चाहिए. अगर गर्भावस्था के दौरान महिला शराब का सेवन करती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे शिशु में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाएगा. पुरूष साथी को भी अपने महिला साथी का ध्यान ऱखते हुए उनकी गर्भावस्था के समय शराब से दूर रहना चाहिए. यह बात जर्नल ऑफ-फिजियोलॉजी रिसर्च में सामने आई है.


अगर आप प्रेग्नेंट है तो भूलकर भी ना पिए शराब

नई दिल्ली. गर्भावस्था में शराब पीना नुकसानदायक है. यह बात एक रिसर्च में सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान कभी-कभार पी गई शराब से भी शिशु में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है. गर्भावस्था के समय बहुत ही कम मात्रा में पी गई शराब के सेवन से मां और शिशु दोनों को खतरा हो सकता है. जर्नल ऑफ-फिजियोलॉजी के शोध में पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान शराब के सेवन से इंसुलिन प्रतिरोध में वृद्धि होने से डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए किसी विशेष अवसर पर भी गर्भवती महिला को शराब पीने से बचना चाहिए.

जर्नल ऑफ-फिजियोलॉजी के रिसर्च में चूहों पर की गई स्टडी के दौरान विशेष अवसर पर गर्भवती को एक या दो गलास शराब पीने के लिेए दिया गया. प्रसव पूर्व शराब के इस निम्न स्तर के संपर्क में आने वाले नर चूहों में लगभग छह महीने पुराने मधुमेह होने के लक्षण दिखाई दिए. शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था के दौरान केवल दो दिन ही मां के चूहों को शराब दी थी. चूहों के रक्त में शराब की मात्रा केवल 0.05 प्रतिशत ही पाई गई फिर भी पुरूष संतान में डायबिटीज के लक्षण देखे गए.


एक दिलचस्प बात और शोध के दौरान सामने आई कि इंसुलिन प्रतिरोध सेक्स पर निर्भर करता है. इसके कुछ संभावित कारण ये हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा प्रसव पूर्व तनाव के लिए अलग-अलग चीजों पर निर्भर करता है, अगर यह एक पुरुष या महिला भ्रूण है तो यह घातक वृद्धि और विकास पर प्रभाव डाल सकता है.

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अध्ययन पर टिप्पणी करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड की शोधकर्ता लीसा अकिसन ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान शराब की थोड़ी मात्रा भी हानिकारक हो सकती है. परिवार, साथी और दोस्तों को गर्भावस्था के दौरान शराब नहीं पीने के लिए एक महिला की पसंद का समर्थन करना चाहिए. यदि कोई महिला गर्भवती हो जाती है और अनजाने में अपनी गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में शराब पी लेती है तो एक बार जानकारी होने के बाद शराब पीना छोड़ देनी चाहिए. उन्हें अच्छी डाइट लेनी चाहिए और गर्भावस्था के बाकी समय में खुद की देखभाल करनी चाहिए.



डिप्रेशन अवसाद चिंता तनाव के समय खुश कैसे रहें, वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर ये टिप्स पढ़कर अपनी जिंदगी खूबसूरत बनाएं

 आज के दौर में मानसिक तनाव इतना बढ़ रहा है कि हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति सुसाइड यानी आत्महत्या कर अपनी जान दे रहा है. हममें से कई लोग डिप्रेशन या अवसाद, चिंता या तनाव से गुजरते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि अवसाद से कैसे बाहर निकलें, डिप्रेशन को कैसे दूर करें, जिंदगी में खुश कैसे रहें? विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस यानी वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के मौके पर हम आपको जीवन में खुश रहने के टिप्स बता रहे हैं.



डिप्रेशन और तनाव के वक्त ये टिप्स अपनाएंगे तो सुसाइड का कभी ख्याल नहीं आएगा


नई दिल्ली. आज 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस यानी वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जा रहा है. 21वीं सदी में जहां कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. लोगों को एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ सी मची हुई है. ऐसे में डिप्रेशन यानी अवसाद की बीमारी बढ़ रही है. किसी के लिए पैसा तो किसी के लिए प्यार, किसी के लिए परिवार तो किसी के लिए कारोबार, तरह-तरह की चिंता से मानसिक तनाव उत्पन्न हो रहा है. इसलिए जरूरी है कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी स्वस्थ रखें तो जीवन में हमेशा प्रसन्नचित रहेंगे. वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के मौके पर आपको अवसाद (Depression), तनाव (Anxiety) जैसी समस्याओं से निजात पाने और जिंदगी में खुश रहने के टिप्स बता रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर अपनी जिंदगी खत्म कर देता है. वर्तमान दौर में लोग खुद से इतनी घृणा (Self Hatred) करने लगें हैं कि आत्महत्या यानी सुसाइड जैसे खतरनाक कदम उठाने से नहीं कतराते. चाहे हमारे साथ जीवन में कितना ही बुरा ही क्यों न हुआ हो लेकिन सकारात्मक सोच रखेंगे और खुश रहेंगे तो कभी सुसाइड करने की नहीं सोचेंगे.

किताबें अच्छी दोस्त होती हैं-
यदि आप अवसाद के दौर से गुजर रहे हैं तो ऐसे समय में किताबें आपकी सबसे अच्छी दोस्त हो सकती हैं. सामान्य दिनों में भी आप अपने व्यस्त समय से कुछ पल किताब पढ़ने में लगाएं तो खुद को ज्ञानवर्धक और सकारात्मक महसूस करेंगे. अपनी रुचि और मूड के अनुसार किताबों का चयन कर सकते हैं. गुलाम मोहम्मद कासिर का शेर कुछ इस तरह है-

‘बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आंखों का इक्कीसवां ख्वाब तो अच्छा हो‘

नकारात्मकता फैलाने वालों से दूर रहें, चाहे वो आपका कोई करीबी ही क्यों न हों-
वैसे तो डिप्रेशन के दौरान व्यक्ति खुद को अकेले ही रखना पसंद करता है. मगर इस समय यदि नकारात्मक विचार आपके आस-पास भी फटक जाए तो अवसादग्रस्त व्यक्ति और भी निगेटिव हो जाता है. स्थिति ज्यादा खराब हो जाए तो वह आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम भी उठा सकता है. ऐसे में जरूरी है कि डिप्रेशन के दौरान जितना हो सके आप सकारात्मक माहौल में रहें. यदि आपके आस-पास घर या ऑफिस, कॉलेज कहीं भी कोई भी नकारात्मक बातें करता है तो आप उससे दूरी बना लें, चाहें वह आपका कितना भी करीबी क्यों न हों.

प्यार, प्यार, प्यार…. बांटते चलो प्यार-
प्रेम, मोहब्बत, लव, इश्क, प्यार…. आप इसे जो नाम दें, यह बहुत खूबसूरत भाव है. प्रेम की कोई सीमा नहीं होती. इसे आप किसी लड़के या किसी लड़के तक, या फिर जवान उम्र तक सीमित नहीं कर सकते. एक शिशु जब जन्म लेता है, प्रेम की प्रक्रिया उसके लिए वहीं से शुरू हो जाती है. उसका पहला प्यार उसे जन्म देने वाली मां होती है. प्रेम पूरी जिंदगी मरते दम तक चलता है.

आप अपने पति या पत्नी, बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड से इश्क-मोहब्बत तो करें हीं. साथ-साथ अपने आस-पास मौजूद हर चीज से प्रेम करना सीखें. इससे आपकी जिंदगी इतनी खूबसूरत हो जाएगी जितना आपने कभी सोचा नहीं होगा. अपने काम से प्रेम करें. अपने विचारों में प्रेम भाव लाएं. लोगों से प्रेम करें. जानवरों से प्रेम करें. दोस्तों से प्रेम करें और यहां तक कि दुश्मनों से भी प्रेम करें. क्योंकि प्यार से पूरे जग को जीता जा सकता है.

खुद से इश्क करना सीखें-
दूसरों को प्यार बांटने से पहले खुद से प्रेम करना सीखें. दुनिया चाहे आपके बारे में जो सोचें, यदि आप खुद को लेकर सकारात्मक रहेंगे, खुद को पसंद करेंगे तो अवसाद में कभी नहीं जाएंगे. किसी ने खूब लिखा है-

‘मुस्कान से खिला चेहरा, हर गम की दवा है,
दुख का कोई भी पहरा, इसके आगे न टिका है‘.

हालांकि सिर्फ चेहरे पर खुशी लाने से आप खुश नहीं हो सकते, मन को भी खुश रखना जरूरी है. ऐसे काम करें जिससे आपको मानसिक सुख मिल सके. अगर आपको पेंटिंग बनाना पसंद है तो वो बनाएं. लिखना पसंद है तो कविता-कहानियां लिखें. गाना पसंद है तो संगीत की अभ्यास करें. डांस पसंद है तो डांस करें. आपको जिसमें सुख मिले वो करें. आपका मन खुश होगा तो चेहरे पर खिलखिलाहट अपने आप ही आ जाएगी.

सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त न बिताएं-
सोशल मीडिया के इस डिजिटल दौर में हम सोशल होना भूल गए हैं. फेसबुक पर हमारे हजारों फ्रेंड्स हैं. इंस्टाग्राम, ट्विटर पर भी हमारे हजारों फोलोवर्स हैं. मगर हम ये भूल गए हैं कि असल जिंदगी में हमारे कितने दोस्त हैं. हम रोज सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, लोगों से चैट करते हैं, लाइक-कमेंट करते हैं. मगर असल जिंदगी में हमारे पास रहने वाले लोगों से उतना ही दूर भागते हैं. यानी कि सोशल मीडिया के इस दौर में हम सोशली (सामाजिक तरीके से) एक्टिव होना भूल गए हैं. जरूरत है कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकल कर असल जिंदगी में लोगों के साथ वक्त बिताएं. इससे आप मानसिक रूप से खुशी महसूस करेंगे.

सोशल मीडिया लोगों को एक दूसरे से जला रहा-
फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज दिखावे की होड़ मची हुई है. जिस व्यक्ति के सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फ्रेंड्स या फॉलोवर्स होते हैं वो खुद को ‘राजा’ समझने लगता है. वहीं जिन लोगों के कम फॉलोवर्स होते हैं उन्हें वे तुच्छ समझते हैं. पोस्ट पर लाइक्स और कमेंट्स भी ‘स्टेटस सिंबल’ बनते जा रहे हैं. डिजिटल दौर में दूसरों से बेहतर बनने की ललक लोगों को ले डूब रही है. जरूरी है कि इन सभी चीजों से दूर रहें और सोशल मीडिया को महज एक सूचना और मनोरंजन का साधन ही समझें.
आध्यात्मिक पक्ष को मजबूत करें-
कहते हैं- ‘जब कोई नहीं आता, ऊपर वाला आता है’. यदि हम ऊपर वाले यानी भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, ईश्वर किसी पर भी विश्वास करते हैं तो दुख के दिनों में अक्सर उसे याद करते हैं. धर्म और अध्यात्म इंसान को सकारात्मकता देता है, उसे जीने की राह दिखलाता है. यदि आप अवसाद से गुजर रहे हैं तो अपने ईश्वर का ध्यान करें, उस पर विश्वास रखें कि वह आपका बुरा दौर खत्म कर देगा. अध्यात्म आपको आत्मचिंतन की ओर ले जाता है, इससे अपने अंदर मौजूद गुण-अवगुणों का आभास होता है और आपको आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है.
प्रेरणादायक लोगों की जीवनियां पढ़ें-
दुनियाभर में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर बुरे दिन देखे हैं. लगातार मिली हार के बावजूद वे फिर उठ खड़े हुए और अपने विचारों से पूरी दुनिया बदल कर रख ली. ऐसे महान लोगों के जीवन की प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने पर आपके विचारों में भी पॉजिटिविटी आएगी.

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