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डिप्रेशन को दूर करना है तो पहले अपने घर को बदलें


डिप्रेशन को दूर करना है तो पहले अपने घर को बदलें 
डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जो कि पीड़ित व्यक्ति के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। डिप्रेशन को कम करने के लिए आपको अपने आसपास के वातावरण खासकर अपने घर में कुछ बदलाव करने जरुरी हैं।



अगर कोई व्यक्ति एक बार डिप्रेशन का शिकार हो जाता है तो इससे आसानी से निकल पाना संभव नहीं होता। थेरेपी, मेडिटेशन, दवाईयां, परिजनों और दोस्तों की मदद आदि कई चीजें होती हैं जिससे डिप्रेशन को कम करने में मदद मिल सकती है। अपनी जीवनशैली और अपने आसपास की कुछ चीजों में बदलाव करके भी आप अपने डिप्रेशन से उबरने में खुद की मदद कर सकते हैं। आसपास का वातावरण भी डिप्रेशन को कम करने और बढ़ाने में सहायक होता है इसलिए अपने घर के वातावरण में आप अच्छे परिवर्तन करके डिप्रेशन की समस्या में राहत पा सकते हैं। आइए जानते हैं क्या बदलाव करनाबेहतर है। [ ये भी पढ़ें: क्या एक व्यक्ति से दूसरे को हो सकती है डिप्रेशन की समस्या और इससे कैसे बचें]

1.घर में पौधे लगाना: प्रकृति के साथ समय बिताना आपके मानसितक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। एक अध्ययन के अनुसार पेड़-पौधे और हरियाली के संपर्क में रहने से आपका तनाव कम होता है साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है। इसलिए घर में पेड़-पौधे लगाने से आपको डिप्रेशन कम करने में मदद मिलती है। इसलिए घर में खूबसूरत पौधे लगाएं।

2. दीवारों पर लगाएं पेंटिग: प्रकृति का संपर्क आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है लेकिन अगर आप प्रकृति के संपर्क में लगातार बने रहना चाहते हैं तो अपने घर के अंदर आप खूबसूरत पेंटिंग्स लगा सकते हैं। ये खूबसूरत पेंटिंग प्रकृति से जुड़ी हुई होनी चाहिए जो आपके डिप्रेशन को कम करने में मदद करती हैं लेकिन कोशिश करें कि आप जिस वातावरण में रह रहें है उसी के अनुरुप पेंटिग लगाएं यानि अगर आप पहाड़ों पर रहते हैं तो समुद्र के किनारे की पेटिंग लगाने की बजाय पहाड़ों और झरनों की पेंटिंग या फोटो घर में लगा सकते हैं। [ ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के कारण आपको हो सकती है ये गंभीर बीमारियां]
3. लाल और नारंगी रंग देखना:

वार्म कलर्स आपकी खुशी को बढ़ाते हैं और आपको आशावादी बनाते हैं। रंगों का जीवन में काफी महत्व होता है वे आपके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का प्रभाव डालते हैं। जरुरी है ये जानना कि आप पर किस रंग का सकारात्मक प्रभाव होता है। अपने घर की दीवारों को नारंगी और लाल रंग से रंगने से आपको डिप्रेशन को कम करने में मदद मिलती है। नारंगी रंग आपको तरोताजा बनाता है और आपके अंदर सकारात्मक, रचनात्मकता और सामाजिकता की भावना लाता है। लाल और नारंगी रंग का संबंध खुशी से होता है। इसलिए आप अपने घर की दीवारों को ऐसे रंग से रंग सकते हैं जिससे आपकी खुशी बढ़ती हो ।
4. अलग-अलग चमकीले रंगों को घर में लाएं:
अपने दीवारों का रंग बदलने के साथ-साथ आप अपने फर्नीचर, मेज-कुर्सी, तकिए, और घर के सारे साजो-सामान को खूबसूरत और रंग-बिरंगे रंगों मे रंगे। घर को डिजाइन करते समय कोशिश करें कि आपके बेडरुम की खिड़की से आपको खूबसूरत प्राकृतिक नजारा दिखे जिससे आपका तनाव कम होता है और डिप्रेशन को कम करने में मदद मिलती है।
5. लाइट बॉक्स का इस्तेमाल करें: प्राकृतिक रोशनी में रहना सभी के लिए महत्वपूर्ण होता है। सूरज की किरणें आपके अंगर नई उमंग भरती हैं। जो लोग सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर से परेशान होते हैं यह उनके लिए सबसे ज्यादा जरुरी होती है। यह डिप्रेशन अक्सर सर्दियों में लोगों को होता है। ऐसे में लाइट बॉक्स आपकी मदद कर सकते हैं। ये पर्याप्त रोशनी देकर रोशनी की कमी महसूस नहीं होने देते। इन्हें आप बेडरुम या किचन कहीं भी रख सकते हैं। ये लाइट बॉक्स सूरज जैसी रोशनी तो देते ही है साथ ही इनमें से हानिकारक यूवी किरणें भी नहीं मिलती जिससे दिनभर में 30 मिनट ही इस रोशनी में रहना फायदेमंद होता है।


महिलाओं को डिप्रेशन की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक क्यों होती है

depression in women:
 पुरुषों की तुलनाओं में महिलाओं को डिप्रेशन की समस्या अधिक होती है। घरेलू और बाहरी जिम्मेदारियों को एक समान सामंजस्य के साथ पूरा करते हुए महिलाओं को अक्सर तनाव हो ही जाता है लेकिन इसके अलावा कई कारणों से महिलाओं को डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है।
डिप्रेशन की स्थिति महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा प्रभावित करती है।
depression in women: आजकल के समय में डिप्रेशन एक साधारण समस्या बन चुका है जो आपको मानसिक रुप से बुरी तरह प्रभावित करता है। डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरुषों की तुलनाओं में महिलाओं को डिप्रेशन की समस्या अधिक होती है। घरेलू और बाहरी जिम्मेदारियों को एक समान सामंजस्य के साथ पूरा करते हुए महिलाओं को अक्सर तनाव हो ही जाता है लेकिन इसके अलावा किन कारणों से महिलाओं को डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है आइए जानते हैं।[ये भी पढ़ें: Effects of Depression: डिप्रेशन दिमाग को कैसे प्रभावित करता है]
depression in women: महिलाओं को डिप्रेशन की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक होने के क्या कारण होते हैं
हार्मोन्स में अंतर के कारण
सामाजिकता में अंतर के कारण
अनुवांशिकता के कारण
साइकोलॉजी में अंतर के कारण

1.हार्मोन्स में अंतर के कारण-
हार्मोन्स जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करते हैं। इन हार्मोन का स्तर कम होने के कारण मूड डिसऑर्डर की समस्या पैदा हो जाती है। पीरियड साइकल और मेनोपॉज के दौरान इस कारण ही महिलाओं को डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है।
2. सामाजिकता में अंतर के कारण-
सामाजिक कारणों से महिलाओं को हमारे समाज में पुरुषों की तुलना में कम समझा जाता है। यह बात भी तनाव और डिप्रेशन का एक कारण होता है। सामाजिक वातावरण के अलग और कम खुलापन होने के कारण महिलाओं को अधिक डिप्रेशन होने का खतरा रहता है।

3.अनुवांशिकता के कारण-
परिवार में अगर किसी को पहले से डिप्रेशन होता है तो महिलाओं और पुरुषों को भी डिप्रेशन होता है लेकिन महिलाओं में जीन्स के कारण डिप्रेशन होने का खतरा अधिक रहता है।

4.साइकोलॉजी में अंतर के कारण-
महिलाएं रिश्तों को लेकर अधिक गंभीर होती है और वैचारिक तौर पर वे हर रिलेशनशिप से जुड़ाव रखती है। रिश्तों में उतार-चढ़ाव उन्हें ज्यादा प्रभावित करता है जिससे उन्हें डिप्रेशन होने की समस्या बढ़ जाती है।

डिप्रेशन से ग्रसित लोग कौन-से शब्द नहीं सुन सकते हैं 
Depressed person: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर अगर व्यक्ति कुछ शब्द सुन ले तो उन्हें बुरा लग सकता है। इसलिए डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति कुछ शब्दों कों सुनकर दुखी हो जाते हैं।

Depressed person: डिप्रेशन से ग्रसित लोग कुछ शब्द नहीं सुन पाते हैं।
डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जो व्यक्ति के आत्मविश्वास को कम करके, अकेला महसूस कराता है। जिसकी वजह से व्यक्ति परेशान रहता है और नाउम्मीद सा महसूस करने लगता है। डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को कभी भी कुछ भी बुरा लग सकता है। इसलिए उनसे बात करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आपको पता नहीं होता है कि डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को आपकी कौन-सी बात बुरी लग जाए। आपके कुछ शब्द उन्हें बहुत दुखी कर सकते हैं। इसलिए डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति से कुछ शब्द कभी नहीं कहने चाहिए। तो आइए आपको उन शब्दों के बारे में बताते हैं जो डिप्रेशन से ग्रसित लोग नहीं सुन पाते हैं। [ये भी पढ़ें: Causes of Depression: क्या एक दर्दनाक घटना डिप्रेशन का कारण बन सकती है]
Depressed person: कौन से शब्द डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति नहीं सुन पाते हैं

डिप्रेशन से बाहर आ जाएं
इससे कुछ सीखें
आप एक्टिंग कर रहे हैं
मैं समझ सकता हूं तुम्हे कैसे महसूस हो रहा है
मैं आपको डिप्रेशन के बारे में बताता हूं

डिप्रेशन से बाहर आ जाएं 
इस बात को हमेशा समझना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से डिप्रेशन से ग्रसित नहीं होता है। मानसिक समस्या से कोई भी व्यक्ति अपने आप बाहर नहीं आ पाता है। इसलिए उनसे बार-बार यह ना कहें कि डिप्रेशन से बाहर आ जाएं।

इससे कुछ सीखें 
अगर आप किसी की मदद करना चाहते हैं तो उनसे बदत्तमीजी से बात ना करें। हर कोई जीवन में कुछ ना कुछ सीखता है लेकिन डिप्रेशन से ग्रसित होने पर व्यक्ति परेशान हो जाता है। तो अगर आप अपने किसी डिप्रेशन से ग्रसित दोस्त की मदद करना चाहते हैं तो कभी उनसे यह ना कहें।

आप एक्टिंग कर रहे हैं 
किसी भी डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति से यह नहीं कहना चाहिए कि वह एक्टिंग कर रहे हैं। इससे उस व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। वह पहले से दुखी होते हैं अपनी इन बातों से उन्हें दुखी ना करें।

मैं समझ सकता हूं तुम्हे कैसे महसूस हो रहा है 
किसी को दिलासा देने के लिए लोग अक्सर यह बात कहते हैं कि वह आपकी परिस्थिति समझ सकते हैं। पर असल में आपको पता भी नहीं होता है कि वह व्यक्ति किस परिस्थिति से गुजर रहा है। इसलिए इस तरह के शब्द ना ही कहें।
मैं आपको डिप्रेशन के बारे में बताता हूं 
खुद को ज्यादा होशियार समझते हुए उन्हें डिप्रेशन के बारे में ना समझाएं। आपके डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को कुछ बताने से उनकी परिस्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए किसी भी डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को डिप्रेशन के बारे में ना बताएं।
डिप्रेशन दिमाग को कैसे प्रभावित करता है 
Effects of Depression: 
डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जो आपके दिमाग के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है। डिप्रेशन के संकेत दिखने पर इन्हें अनदेखा ना करें। इसके कारण आपका दिमाग लंबे समय के लिए प्रभावित हो सकता है।
Depression: डिप्रेशन के कारण व्यक्ति बेहद दुखी और नाउम्मीद महसूस करने लगता है।

Effects of Depression: डिप्रेशन को आमतौर पर एक मूड डिसऑर्डर के रूप में जाना जाता है जो आपके विचार, अनुभव और व्यवहार करने के तरीके में बदलाव का कारण बनता है। इस डिसऑर्डर के दौरान आमतौर पर ग्रसित व्यक्ति को उदासीनता और निराशा की भावना महसूस होती है। कुछ दिनों के अंदर, डिप्रेशन के कारण व्यक्ति बेहद दुखी और नाउम्मीद महसूस करने लगता है। इसलिए इन संकेतों के दिखने के बाद जरुरी है कि आप इन पर ध्यान दें क्योंकि ये भावनाएं एक मामूली समस्या को लेकर निराश होने से कहीं अलग हैं और इनका असर लंबे समय तक रहता है। डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी होने के कारण आपके दिमाग को बुरी तरह प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कि डिप्रेशन दिमाग को कैसे प्रभावित करता है। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के कारण कैसे आपकी याददाश्त प्रभावित होती है]
Effects of Depression: 
दिमाग पर पड़ने वाले डिप्रेशन के असरDepression: डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी होने के कारण आपके दिमाग को बुरी तरह प्रभावित करती है।
डिप्रेशन आमतौर पर हमारे दिमाग के हिप्पोकैम्पस, अमिगडाला और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्सों को प्रभावित करता है। हिप्पोकैम्पस हमारे दिमगा का मुख्य हिस्सा है। यह कोर्टिसोल के कम उत्पादन के लिए और हमारी मेमोरी को स्टोर करने के लिए जिम्मेदार होता है। कोर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है जिसका स्तर बढ़ने पर हमें शारीरिक तनाव और मानसिक तनाव अनुभव होता है।
डिप्रेशन की समस्या तब उत्पन्न होती है जब स्ट्रेस के रेस्पोंस में या शरीर में रासायनिक असंतुलन के कारण कोर्टिसोल का अधिक उत्पादन होने लगता है। शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाने से ब्रेन सेल्स या न्यूरोंस के फॉर्मेशन में परेशानी होती हैं। ये न्यूरोंस हिप्पोकैम्पस के एक हिस्से डिनेट गाइरस में बनते हैं। डिप्रेशन के कारण पहले से मौजूद न्यूरोंस सिकुड़ने लगते हैं जिससे आपको चीजें याद रखने में दिक्कत होती है।Depression
: डिप्रेशन के दौरान शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।
वही दूसरी ओर प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो कि हमारे दिमाग का सामने वाला हिस्सा है, दिमाग के मुख्य कार्य करने में मदद करता है। यह हिस्सा भावनाओं, निर्णय लेने और यादों को बनाने के लिए काम करता है। डिप्रेशन के दौरान जब कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, तो इस हिस्से का आकार कम होने लगता है। डिप्रेशन के कारण, यह हिस्सा ठीक से काम नहीं कर पाता है। इसके कारण शरीर में अन्य हार्मोन और केमिकल्स रिलीज होते हैं जिससे असंतुलन बढ़ता है।
डिप्रेशन का उपचार कैसे मदद करता है
डिप्रेशन के उपचार के लिए जरुरी है कि कोर्टिसोल के स्तर को संतुलित किया जाए। इसके अलावा, शरीर में केमिकल्स के स्तर को कम करना भी जरुरी है। साथ ही कुछ प्राकृतिक तरीके और थेरेपी भी डिप्रेशन से छुटकारा पाने में मदद करती हैं।


ये कुछ प्रभाव हैं जो डिप्रेशन के कारण ग्रसित व्यक्ति के दिमाग पर पड़ते हैं। आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।
खाद्य पदार्थ जो डिप्रेशन से आपको दूर रखने में मदद करते हैं 
Read in English

डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जिसे दूर करने के लिए आपके दिमाग का स्वस्थ होना जरुरी होता है। दिमाग को स्वस्थ रखने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करके डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है।



डिप्रेशन एक मानसिक अवस्था है जिसे नकारात्मक विचारों, अजीब व्यवहार, चिंता, अच्छा महसूस ना करने जैसी कई चीजों से पता किया जा सकता है। हर बार आपके मूड में बदलाव होना डिप्रेशन के संकेत नहीं होते हैं। डिप्रेशन सिर्फ एक कारण की वजह से नहीं होता है इससे ग्रसित होने के पीछे कई सारे कारण होते हैं। डिप्रेशन से बाहर आने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं। कुछ थैरेपी करवाते हैं, कुछ लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं तो कुछ लोग अपने किसी खास की मदद से इससे बाहर आने की कोशिश करते हैं। इन सभी के साथ ही आपकी डाइट भी डिप्रेशन से बाहर आने में मदद करती है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले खाद्य पदार्थ डिप्रेशन से लड़ने में भी मदद करते हैं। तो आइए आपको इन खाद्य पदार्थों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: जब कोई आपका करीबी डिप्रेशन से ग्रसित हो तो क्या करें]

सेब: सेब में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यह ऑक्सीडेटिव डैमेज और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही सेब में घुलनशील फाइबर होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को ठीक रखने में मदद करते हैं जिससे व्यक्ति खुश रहता है।

विटामिन बी 6: मछली, केला, चिकन, एवोकाडो आदि विटामिन बी 6 के अच्छे स्त्रोत होते हैं जो तनाव को कम करने में मदद करते हैं। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर किन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें]

ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट और मोनोसैचुरेटिड फैटी एसिड होते हैं जो दिमाग से सूजन कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही कार्डियोवॉस्कुलर डिजीज के खतरे को कम करते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और डिप्रेशन आपसे दूर रहता है।

अखरोट और काजू: अखरोट में मैग्नीशियम होता है और काजू में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। यह दोनों डिप्रेशन के खतरे को कम करता है और दिमाग को स्वस्थ रखते हैं।

दूध: दूध में विटामिन डी होता है जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन डी न्यूरोट्रांसमीटर की तरह काम करता है। सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन फायदेमंद होता है


खाद्य पदार्थ जो डिप्रेशन से आपको दूर रखने में मदद करते हैं 
डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जिसे दूर करने के लिए आपके दिमाग का स्वस्थ होना जरुरी होता है। दिमाग को स्वस्थ रखने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करके डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है।



डिप्रेशन एक मानसिक अवस्था है जिसे नकारात्मक विचारों, अजीब व्यवहार, चिंता, अच्छा महसूस ना करने जैसी कई चीजों से पता किया जा सकता है। हर बार आपके मूड में बदलाव होना डिप्रेशन के संकेत नहीं होते हैं। डिप्रेशन सिर्फ एक कारण की वजह से नहीं होता है इससे ग्रसित होने के पीछे कई सारे कारण होते हैं। डिप्रेशन से बाहर आने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं। कुछ थैरेपी करवाते हैं, कुछ लाइफस्टाइल में बदलाव करते हैं तो कुछ लोग अपने किसी खास की मदद से इससे बाहर आने की कोशिश करते हैं। इन सभी के साथ ही आपकी डाइट भी डिप्रेशन से बाहर आने में मदद करती है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले खाद्य पदार्थ डिप्रेशन से लड़ने में भी मदद करते हैं। तो आइए आपको इन खाद्य पदार्थों के बारे में बताते हैं। 
सेब: सेब में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। यह ऑक्सीडेटिव डैमेज और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही सेब में घुलनशील फाइबर होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को ठीक रखने में मदद करते हैं जिससे व्यक्ति खुश रहता है।

विटामिन बी 6: मछली, केला, चिकन, एवोकाडो आदि विटामिन बी 6 के अच्छे स्त्रोत होते हैं जो तनाव को कम करने में मदद करते हैं। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर किन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें]

ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल में एंटीऑक्सीडेंट और मोनोसैचुरेटिड फैटी एसिड होते हैं जो दिमाग से सूजन कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही कार्डियोवॉस्कुलर डिजीज के खतरे को कम करते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और डिप्रेशन आपसे दूर रहता है।

अखरोट और काजू: अखरोट में मैग्नीशियम होता है और काजू में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। यह दोनों डिप्रेशन के खतरे को कम करता है और दिमाग को स्वस्थ रखते हैं।

दूध: दूध में विटामिन डी होता है जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन डी न्यूरोट्रांसमीटर की तरह काम करता है। सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन फायदेमंद होता है। 

डिप्रेशन से जुड़े अजीबो-गरीब लक्षण 

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जो कि धीरे-धीरे आपको निराशा की ओर ले जाती है। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के अंदर कई तरह के बदलाव होते हैं। अक्सर कुछ बदलाव इतने अजीबो-गरीब होते हैं कि आप उन्हें पहचान भी नहीं पाते हैं।

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है जो की ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। डिप्रेशन एक ऐसा मेंटल डिसऑर्डर है जो कि आपको मानसिक के साथ शारीरिक रुप से भी आपको प्रभावित करता है। इससे आप धीरे-धीरे उदासी और निराशा में घिरते चले जाते हैं। समय पर डिप्रेशन का इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा पीड़ित व्यक्ति के लिए यह अत्यंत घातक हो सकता है। पीड़ित में डिप्रेशन के लक्षण पहले ही दिखने लग जाते है इसलिए इन लक्षणों की पहचान करना काफी जरुरी होता है। डिप्रेशन के कुछ अजीबो-गरीब लक्षण भी होते हैं जिनके बारे में सबको पता नहीं होता है। तो आइए आपको इन्हीं अजीबो-गरीब लक्षणों के बारे में बताते हैं।
1.बहुत ज्यादा सोना: तनाव और अवसाद के कारण नींद नहीं आती है यह तो आप सब जानते हैं लेकिन आपको यह नहीं पता होगा की बहुत ज्यादा सोना भी डिप्रेशन का लक्षण होता है। 8 घंटे की नींद हर किसी के लिए आवश्यक होती है लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोजाना 8 घंटे से बहुत ज्यादा सोता है तो यह डिप्रेशन का एक लक्षण हो सकता है।

2. शरीर में दर्द होना: जब आपके दिमाग में सबकुछ ठीक नहीं होता तो आपके शरीर में भी दर्द होता है। ऐसा तब होता है जब आप नकारात्मक रहते हैं तो अपने शरीर के दर्द पर ज्यादा ध्यान देना शुरु कर देते हैं जिससे आपको ज्यादा दर्द महसूस होता है। डिप्रेशन के कारण आपको अक्सर पेट , सिर, हाथ-पैर आदि शरीर के हिस्सों में दर्द हो सकता है। [ये भी पढ़ें: व्यवहार जो बताते हैं कि आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं]

3.बहुत ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना: यह डिप्रेशन का एक ऐसा संकेत है जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। हालांकि आजकल लोग बहुत ज्यादा फोन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन डिप्रेशन से ग्रस्त लोग सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल करने लगते हैं। ऐसे में उन्हें किसी और चीज का ध्यान नहीं रहता और वे बहुत ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। बहुत ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना भी आपके दिमाग को नुकसान पहुंचाकर डिप्रेशन का शिकार बना देता है।

4.दिमाग में बहुत ज्यादा विचार आते रहना: डिप्रेशन के कारण दिमाग में बहुत सारे विचार आते रहते हैं। ऐसे में व्यक्ति सही मूड में नहीं होता और अक्सर नकारात्मक विचार आते हैं। ऐसे में व्यक्ति चिंतित, उदास और परेशान रहता है। वह अंदर से दुखी और उदास रहता है और बहुत ज्यादा सोचता है।

5.आप बालों को कंघी नहीं करते हैं: जो लोग डिप्रेशन का शिकार होते हैं वे अक्सर अपना ख्याल रखना बंद कर देते हैं। अक्सर डिप्रेशन से परेशान लोग अपने बालों को कंघी नहीं करते हैं ।उनके लिए अपने आपको अच्छा दिखाना अधिक महत्वपूर्ण नहीं होता है। वे ना तो अपनी खूबसूरती और ना ही अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखते हैं।[

जब कोई आपका करीबी डिप्रेशन से ग्रसित हो तो क्या करें 
जब कोई आपका करीबी डिप्रेशन से ग्रसित होता है तो आपको समझ नहीं आता है कि क्या करें। इस दौरान आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि वह आपकी किसी बात से परेशान ना हो जाएं।



डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जो व्यक्ति को हर तरह से प्रभावित करता है। इस दौरान व्यक्ति की मानसिक स्थिति संतुलित नहीं होती है। डिप्रेशन के दौरान व्यक्ति को फैमिली और दोस्तों के साथ की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। अपने किसी करीबी को डिप्रेशन से ग्रसित होता देखना थोड़ा मुश्किल होता है। इस दौरान आप बेसहारा महसूस करते हैं क्योंकि आप अपने करीबी की मदद नहीं कर पा रहे होते हैं। आपको इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। उनका सहारा बनकर आप उनकों डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं। तो आइए आपको इन तरीकों के बारे में बताते हैं। [

डिप्रेशन के अलावा और भी चीजों पर ध्यान दें: डिप्रेशन में व्यक्ति मानसिक रुप से स्वस्थ नहीं होता है। हालांकि सिर्फ ये ही नहीं होता है। याद रखें कि इस स्थिति के अलावा भी कई चीजें होती हैं। तो सिर्फ डिप्रेशन के लक्षणों पर ध्यान ना दें।

उनके हाथ में नहीं होता है: अक्सर लोग डिप्रेशन की परिस्थिति को गलत समझ बैठते हैं और उस व्यक्ति को सकारात्मक चीजों पर फोकस करने को कहते हैं। ऐसा करना इतना आसान नहीं होता है तो आपको समझना चाहिए कि यह परिस्थति उनके हाथ में नहीं होती है। [ये भी पढ़ें: पोषक तत्वों की कमी के कारण भी आप हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार]

उन्हें आपके साथ की जरुरत होती है: बहुत से लोगों को लगता है कि अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन में हैं तो उन्हें कुछ समय के लिए अकेले छोड़ देना ही बेहतर होता है। मगर ऐसा करना गलत होता है, जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन से ग्रसित होता है तो उसे आपके सहारे की जरुरत होती है। तो कोशिश करें कि आप उनके साथ रहें।

सम्मान करें: अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन से ग्रसित है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप उनका सम्मान ना करें। उनसे पहले की तरह प्यार से बात करें। यह उन्हें बुरा महसूस करने से बचाने में मदद करता है।
अपनी देखभाल करना भी जरुरी होता है: जब आपके आस-पास कोई डिप्रेशन से ग्रसित होता है तो लोग अक्सर अपनी देखभाल करना भूल जाते हैं। इस दौरान अपना ध्यान रखना भी उतना ही जरुरी होता है जितनी आप अपने करीबी की करते हैं।




व्यवहार जो बताते हैं कि आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं

डिप्रेशन से ग्रसित लोगों के व्यवहार में अचानक से बदलाव आने लगता है और वो हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा जाते हैं और कई बार तो वो अपने आस-पास के लोगों के लिए आक्रामक हो जाते हैं।




डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जिसकी वजह से आपके सोच और व्यवहार में बदलाव आने लगता है। अपनी दैनिक दिनचर्या और अपने आसपास की कुछ चीजों में बदलाव लाकर आप खुद को डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं। डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति अपने जीवन में कोई नई चीजें नहीं कर पाता है और उनकी जिंदगी धीमी हो जाती है। इससे ग्रसित व्यक्ति को कुछ चीजें करनी चाहिए और कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए, ताकि वो इस समस्या से जल्दी बाहर निकल पाए। डिप्रेशन होने की वजह से लोग अपने जीवन बोझ समझने लगते हैं और खुद को सबसे छुपाने लगते हैं। ऐसे में डिप्रेशन से ग्रसित लोगों को भावनात्मक सपोर्ट की जरुरत होती है। डिप्रेशन से ग्रसित लोग कई बार अपनी समस्या को नहीं समझ पाते हैं। आइए जानते हैं वो कौन से व्यवहार हैं जो बताते हैं कि आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। [ये भी पढ़ें: पुरानी यादों को भुलाकर डिप्रेशन से कैसे बाहर आएं]

दुखी और खालीपन महसूस करना:
डिप्रेशन से ग्रसित लोग हमेशा दुखी रहते हैं और खुद को अकेला महसूस करते हैं। इसके अलावा उन्हें हमेशा अपनी जिंदगी में किसी ना किसी चीज का खालीपन लगता है और इस वजह से वो खुश नहीं हो पाते हैं।

गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना:
जो लोग डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं उन्हें हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है और वो अपना गुस्सा हमेशा दूसरों पर निकाल देते हैं। इसके साथ-साथ उन्हें किसी बात पर आसानी से चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के दौरान क्या नहीं करना चाहिए]

चीजों में कम रूची लेना:
डिप्रेशन से ग्रसित लोगों को किसी भी चीज में कोई रूची नहीं होती है। बल्कि अगर आप उन्हें इस बात का एहसास भी दिलाएंगें तो वो ध्यान नहीं देंगे। लोगों के साथ रहने में भी उन्हें कोई रूची नहीं होगी।

शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाना:
शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाना या फिर तुरंत थकान महसूस होने लगना भी डिप्रेशन के लक्षणों में से एक है। किसी छोटी सी चीज को करने के बाद भी थकान महसूस होने लगेगा।
खान-पान में बदलाव आना:
जो लोग डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं उनके खान-पान में बदलाव आ जाता है। अचानक से वो जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं जिस वजह से उनका वजन भी बढ़ने लगता है। कुछ लोग कम खाने लगते हैं जिसकी वजह से उन्हें कमजोरी महसूस होने लगती है।



डिप्रेशन से ग्रसित होने पर किन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें

डिप्रेशन से ग्रसित होने पर व्यक्ति को अपना खास ध्यान रखने की जरुरत होती है क्योंकि आपकी छोटी सी गलती डिप्रेशन को बढ़ा सकती है। डिप्रेशन से ग्रसित होने पर आपको कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।




डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जो आपको मानसिक के साथ शारीरिक रुप से प्रभावित करती है। यह आपकी रोजाना की आदतें जैसे- सोना, खाना और काम आदि को भी प्रभावित करता है। डिप्रेशन से ग्रसित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग बीमार होने की वजह से तो कुछ लोग जीवन में होने वाले बदलावों की वजह से भी डिप्रेशन में चले जाते हैं। डिप्रेशन से बाहर आना थोड़ा मुश्किल होता है। डिप्रेशन के दौरान सभी चीजों का ध्यान रखना जरुरी होता है। आपका खाना भी डिप्रेशन के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आपको और डिप्रेशन में ले जा सकता है तो उससे बाहर आने में मदद भी कर सकता है। कुछ खाद्य पदार्थ डिप्रेशन को बदरत बना देते हैं इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। तो आइए आपको उन खाद्य पदार्थों के बारे में बताते हैं जिनका डिप्रेशन ले ग्रसित होने पर सेवन करने से बचना चाहिए। [ये भी पढ़ें: पुरानी यादों को भुलाकर डिप्रेशन से कैसे बाहर आएं]

कॉफी: कॉफी का सेवन आपके डिप्रेशन को बढ़ा सकता है। कॉफी में मौजूद कैफीन आपकी नींद को बाधित करती है। नींद आपके मानसिक स्थिति से जुड़ी हुई होती है। अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो यह आपके डिप्रेशन को बदतर बना सकती है।

सोडियमयुक्त खाद्य पदार्थ: डिप्रेशन से ग्रसित होने पर जिन खाद्य पदार्थों में अत्यधइक मात्रा में सोडियम होता है उनका सेवन करने से बचना चाहिए। यह खाद्य पदार्थ आपके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। सोडियम की वजह से थकावट होती है और आपके न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को भी प्रभावित करता है। हालांकि नमक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है लेकिन डिप्रेशन के दौरान अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन आपके लिए हानिकारक हो सकता है। [ये भी पढ़ें: व्यवहार जो बताते हैं कि आप डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं]

फ्रूट जूस: डिप्रेशन के दौरान फ्रूट जूस का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं होता है। फ्रूट जूस में फाइबर नहीं होता है जिसकी वजह से यह आपकी ऊर्जा को जितनी तेजी से बढ़ाता है उतनी ही जल्दी कम कर देता है। डिप्रेशन के दौरान आप फलों का सेवन कर सकते हैं यह ऊर्जा को जल्दी तो बढ़ाते हैं लेकिन कम नहीं होने देते हैं।

एल्कोहल: एल्कोहल का सेवन आपके मूड को बदतर बना देता है। इसकी वजह से आपकी डिप्रेशन के साथ चिंता भी होने लगती है। एल्कोहल आपके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है जो आपके इमोशन की प्रक्रिया को कंट्रोल करता है इसलिए डिप्रेशन के दौरान एल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए।

आर्टिफिशियल शुगर: जिन फूड्स में आर्टिफिशियल शुगर होती है डिप्रेशन के दौरान उनका सेवन करना हानिकारक होता है। आर्टिफिशियल शुगर सेरोटोनिन के उत्पादन को रोक देती है जिसकी कमी की वजह से डिप्रेशन और सिरदर्द की समस्या होती है।


शरीर में कौन से तत्वों की कमी के कारण डिप्रेशन की समस्या होती है 


Nutrient Deficiency: 
प्रेशन की समस्या एक आम समस्या है और लोग इसकी वजह से मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं। यह समस्या शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है। उन तत्वों की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए।


Nutrient Deficiency: 
डिप्रेशन की समस्या एक गंभीर समस्या है
Nutrient Deficiency: डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है और यह समस्या हर उम्र के लोगों को हो सकती है। इस समस्या से ग्रसित लोग भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। कई लोगों को यह समस्या अधिक चिंता या तनाव के कारण हो जाती है या फिर अनुवांशिकता की वजह से भी होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए अक्सर लोग दवाइयों का सेवन करते हैं, लेकिन कई लोगों को इन दवाइयों से नुकसान पहुंचते हैं। चिंता और तनाव के अलावा शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी के कारण भी डिप्रेशन की समस्या हो जाती है। कई लोगों को इसके बारे में सही तरह से जानकारी नहीं होती है और इस वजह से वो इसका इलाज नहीं कर पाते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक पोषक तत्वों वाले फलों और सब्जियों का सेवन करने की जरूरत है ताकि इस समस्या से छुटकारा पा सकें। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के कारण कैसे आपकी याददाश्त प्रभावित होती है]
Nutrient Deficiency: किन पोषक तत्वों की कमी के कारण डिप्रेशन की समस्या होती है:
ओमेगा-3 फैटी एसिड
आयोडीन
मैग्निशियम
सेलेनियम
आयरन

ओमेगा-3 फैटी एसिड:
शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी के लिए मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और मष्तिष्क में कई समस्याएं भी हो जाती हैं जैसी- तनाव, चिंता और डिप्रेशन। ऐसे में आपको मछली और फ्लैक्स सीड ऑयल का सेवन करना चाहिए।
आयोडीन:Nutrient Deficiency: आयोडीन की कमी के कारण डिप्रेशन होता है
आयोडीन थायरॉयड को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। थायरॉयड एंडोक्राइन सिस्टम का एक हिस्सा है जो शरीर का एक महत्वपूर्ण ग्लैंड होता है थायरॉयड ग्लैंड शरीर के इम्यून सिस्टम, तापमान और दिमाग के कार्यो को प्रभावित करता है। ऐसे में आयोडिन की कमी को दूर करने के लिए आलू, केल्प, अंडा, ब्रोकली और क्रैनबेरी का सेवन करना चाहिए। [ये भी पढ़ें: आयोडीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जो सेहत के लिए लाभकारी होते हैं]

मैग्निशियम:
मैग्निशियम डिप्रेशन के दौरान शरीर के लिए एक प्रकार से एंटी डोट की तरह काम करता है। ऐसे में यदि शरीर में इसकी कमी होती है तो आपकी डिप्रेशन की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में आपको पालक, नट्स, दाल और साबुत अनाज की सेवन करनी चाहिए।

सेलेनियम:
सेलेनियम एक मिनरल है जिनमें उच्च मात्रा में एंटीऑरक्सीडेंट होता है। यह बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। सेलेनियम मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और थायरॉयड को सही तरीके से कार्य करने में मदद करता है। ऐसे में आपको अखरोट, चिकन और मछली खाना चाहिए।

आयरन:
शरीर में आयरन की कमी की वजह से थकान, चिड़चिड़ाहट और अनिमिया की समस्या होती है और ये डिप्रेशन के लक्षण होते हैं। इसलिए शरीर में आयरन की कमी को दूर करने के लिए रेड मीट और मछली का सेवन करें।

[जरूर पढ़ें: खाद्य पदार्थ जो डिप्रेशन से आपको दूर रखने में मदद करते हैं]

तनाव, चिंता और डिप्रेशन शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है। ऐसे में आपको उन जरूरी तत्वों की जानकारी जरूर होनी चाहिए, ताकि आप इस समस्या से बच सकें।
पोषक तत्वों की कमी के कारण भी आप हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार

डिप्रेशन एक मूड डिसऑर्डर है जिसमें आपको लगातार दुख, गुस्से और निराशा के भाव आते हैं। यहीं भावनाएं दिनों-दिन आप में बढ़ने लगती हैं। इसके पीछे का एक कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो सकता है।



उतार-चढ़ाव हर किसी के जीवन का हिस्सा हैं लेकिन लगातार लंबे समय तक दुखी और निराश महसूस करना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप डिप्रेशन में है। भूख का कम होना, वजन कम होना, वजन अचानक बढ़ना, सोने के तरीके में बदलाव, आदि डिप्रेशन के कई संकेत हैं। कई कारणों से आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। इसी के साथ पोषण की कमी के कारण भी आपको डिप्रेशन हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन-किन पोषक तत्वों की कमी के कारण आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के दौरान क्या नहीं करना चाहिए]

1.विटामिन D: विटामिन D की कमी डिप्रेशन का एक मुख्य कारण होती है। विटामिन D सेरोटोनिन और डोपामाइन हार्मोन्स के संश्लेषण का कार्य करता है जो कि हैप्पी हार्मोन्स होते हैं। इनके कम होने से डिप्रेशन हो जाता है। यहीं कारण है कि सर्दियों के मौसम में धूप की कमी से विटामिन D की कमी हो जाती है और लोग सीजनल डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। इसलिए विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

2.विटामिन B12: विटामिन B12 की कमी के कारण होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है जो कि डिप्रेशन को बढ़ा सकता है। इसलिए विटामिन B12 युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, डेयरी प्रोड्क्ट आदि का सेवन करें। [ये भी पढ़ें: क्या होता है हिस्टीरिया, लक्षण और निदान के उपाय]

3.फोलेट की कमी: फोलेट सेरोटोनिन और डोपामाइन हार्मोन्स के संश्लेषण के कार्य को सही तरह से करता है। ये हार्मोन आपको खुश रखने का काम करते हैं। यहीं कारण है कि फोलेट की कमी के कारण डिप्रेशन का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फोलेट युक्त खाद्य पदार्थ जैसे -ग्रीन बीन्स, पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।

4.ओमेगा -3 फैटी एसिड: ओमेगा -3 फैटी एसिड में इंफ्लेमेशन कम करने के गुण होते हैं, साथ ही यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड दिमाग की इंफ्लेमेशन से रक्षा करता है। इसकी कमी से भी डिप्रेशन पैदा हो सकता है। इसलिए अखरोट, साल्मन, फ्लैक्स सीड्स आदि का सेवन करें और शरीर में इस फैटी एसिड की कमी ना होने दें।
5.मैग्नीशियम:मैग्नीशियम शरीर में एंजाइम्स को सक्रिय करता है जो मूड बूस्टर हार्मोन्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के उत्पादन में मदद करते हैं। इसलिए मैग्नीशियम की कमी भी डिप्रेशन होने का कारण हो सकती है। इसलिए टोफू, सोया मिल्क, हरी सब्जियां आदि का सेवन करके आप इससे बचाव कर सकते हैं।
पुरानी यादों को भुलाकर डिप्रेशन से कैसे बाहर आएं 
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पुरानी यादों के बारे में सोचकर अक्सर लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं। इस दौरान डिप्रेशन से ग्रसित होने पर यह मानसिक रुप से आपको अस्वस्थ करता है। पुरानी यादों को दूर करके डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है।


यादें हमारे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। किसी के जाने से हमें खुशी होती है तो किसी के जाने से हम दुखी हो जाते हैं। यादों के बारे में सोचकर खुश रहना अच्छा होता है। हालांकि कुछ यादों की वजह से आपको डिप्रेशन हो जाता है जिन्हें दिल और दिमाग से बाहर निकालने में दिक्कत होती है। कुछ लोगों को यादों से बाहर आने में परेशानी होती है और व्यक्ति डिप्रेस्ड हो जाता है। जो लोग पुरानी यादों की वजह से डिप्रेशन में चले जाते हैं उन्हें उनको दिमाग से बाहर निकालने में समय लगता है। अगर आपके आस-पास या कोई प्रियजन पुरानी यादों की वजह से डिप्रेशन में चले गए हैं तो कुछ तरीकों की मदद से उन्हें बाहर लाया जा सकता है। तो आइए आपको इन तरीकों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन से ग्रसित लोगों में दिखतें हैं भावनात्मक लक्षण]

सच्चाई को स्वीकारें: आपको इस बात को स्वीकारना चाहिए कि जो भी आपके बीच था वह खत्म हो चुका है और आपको इससे बाहर आने की जरुरत है। अगर आप पुराने सपनों में रहते हैं तो यह आपके डिप्रेशन को बदतर बना सकता है। जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

पुरानी चीजों को हटा दें: अगर आपके पास कुछ चीजें हैं जो आपको अतीत की याद दिलाते हैं तो उन्हें खुद से दूर कर देना बेहतर होता है। कोई लेटर, गिफ्ट या फोटो पर आपके पास है तो उसे खुद से दूर कर दें। यह आपको जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती हैं। साथ ही डिप्रेशन से बाहर आने में मदद करेंगी। [
सकारात्मक रहें: दिमाग में सकारात्मक विचार रहने से खुशियां भी आपके साथ रहती हैं। अतीत के विचारों की वजह से आपके दिमाग में नकारात्मक चीजें चलती रहती हैं जो आपको खुश नहीं रहने देती हैं। इसलिए सकारात्मक रहने की कोशिश करें जो डिप्रेशन से लड़ने में मदद करती हैं।

विश्लेषण करें कि जो आप सोच रहे हैं वह महत्वपूर्ण है कि नहीं: आपका अतीत बीत चुका है, इसलिए आपको पता होना चाहिए कि जो आप सोच रहे हैं वह महत्वपूर्ण है कि नहीं। इसलिए पहले सोचें कि आप अपने अतीत के बारे में सोचना चाहते हैं या अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं।

अतीत के अलावा भी सोचें: अतीत के अलावा सोचने के अलावा आपको दूसरी चीजों के बारे में भी सोचना चाहिए। ध्यान दें कि आपमें क्या बदलाव आ रहे हैं और आपने इस समय में क्या प्राप्त कर लिया है। यह समझने की कोशिश करें कि जीवन का दूसरा हिस्सा भी आपके लिए महत्वपूर्ण है।
डिप्रेशन के दौरान क्या नहीं करना चाहिए 

डिप्रेशन से ग्रसित होने के दौरान व्यक्ति को हर चीज में निराशा दिखने लगती है। इससे बाहर आने के लिए आपको कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए। नहीं तो इन चीजों की लत लग जाती है जिसकी वजह से डिप्रेशन से बाहर आने में दिक्कत होती है।




डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जिसमें व्यक्ति नाखुश और परेशान रहने लगता है। जो लोग डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं उन्हें जीवन व्यतीत करने में दिक्कतें होती है। डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने में दिक्कतें आती हैं। इससे ग्रसित होने के दौरान व्यक्ति को कुछ चीजें करनी चाहिए और कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए। डिप्रेशन से ग्रसित होने पर आपको अपनी देखभाल करनी चाहिए। यह डिप्रेशन से बाहर आने में मदद करती है। डिप्रेशन से छुटकारा पाने के लिए इलाज के साथ-साथ लाइफस्टाइल को भी बेहतर करने की जरूरत होती है। तो आइए आपको बताते है डिप्रेशन से ग्रसित होने के दौरान आपको किन चीजों को करने से बचना चाहिए। 
एल्कोहल का सेवन करने से बचें: डिप्रेशन से बचने के लिए लोग अक्सर गलत रास्ते पर चले जाते हैं और एल्कोहल का सेवन करना शुरु कर देते हैं। एल्कोहल और धूम्रपान से दूर होने पर डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलती है। डिप्रेशन के दौरान जब आप एल्कोहल का सेवन करने लगते हैं तो आपको इसकी लत लग जाती है।

पर्सनल बांड को ना तोड़ें: जब आप डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं तो आपको भावनात्मक सपोर्ट की जरुरत होती है। अपने प्रियजनों का सपोर्ट आपको मोटिवेट करता है और आशावादी रखने में मदद करता है। इसलिए आपका साथ देने वाले लोगों से दूर ना हों। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन को दूर करना है तो पहले अपने घर को बदलें]

खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखें: डिप्रेशन के दौरान आपके दिमाग में नकारात्मक विचार चलते रहते हैं। इसलिए खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखें ताकि यह विचार ज्यादा ना आएं। इस दौरान कोशिश करें कि आप दुनिया में होने वाली किसी भी नकारात्मक चीज से कैसे दूर रखा जाए।

सोशल मीडिया से दूर रहें: आजकल लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल लोगों का मजाक उड़ाने के लिए करते हैं। जिसका डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति पर नकारात्मक रुप से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।

निराश माहौल में ना रहें: आपके आस-पास का माहौल आपके मूड को प्रभावित करता है। अगर आपके आस-पास का माहौल नकारात्मक है तो यह आपके डिप्रेशन को बदतर बना देता है। इसलिए हमेशा खुशनुमा माहौल में रहें। इससे डिप्रेशन से बार आने में आपको मदद मिलेगी। 



डिप्रेशन के दौरान क्या नहीं करना चाहिए 

डिप्रेशन से ग्रसित होने के दौरान व्यक्ति को हर चीज में निराशा दिखने लगती है। इससे बाहर आने के लिए आपको कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए। नहीं तो इन चीजों की लत लग जाती है जिसकी वजह से डिप्रेशन से बाहर आने में दिक्कत होती है।


डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है जिसमें व्यक्ति नाखुश और परेशान रहने लगता है। जो लोग डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं उन्हें जीवन व्यतीत करने में दिक्कतें होती है। डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ने में दिक्कतें आती हैं। इससे ग्रसित होने के दौरान व्यक्ति को कुछ चीजें करनी चाहिए और कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए। डिप्रेशन से ग्रसित होने पर आपको अपनी देखभाल करनी चाहिए। यह डिप्रेशन से बाहर आने में मदद करती है। डिप्रेशन से छुटकारा पाने के लिए इलाज के साथ-साथ लाइफस्टाइल को भी बेहतर करने की जरूरत होती है। तो आइए आपको बताते है डिप्रेशन से ग्रसित होने के दौरान आपको किन चीजों को करने से बचना चाहिए। [ये भी पढ़ें: क्या है साइकोटिक डिप्रेशन और इसके संकेत]

एल्कोहल का सेवन करने से बचें: डिप्रेशन से बचने के लिए लोग अक्सर गलत रास्ते पर चले जाते हैं और एल्कोहल का सेवन करना शुरु कर देते हैं। एल्कोहल और धूम्रपान से दूर होने पर डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलती है। डिप्रेशन के दौरान जब आप एल्कोहल का सेवन करने लगते हैं तो आपको इसकी लत लग जाती है।

पर्सनल बांड को ना तोड़ें: जब आप डिप्रेशन से ग्रसित होते हैं तो आपको भावनात्मक सपोर्ट की जरुरत होती है। अपने प्रियजनों का सपोर्ट आपको मोटिवेट करता है और आशावादी रखने में मदद करता है। इसलिए आपका साथ देने वाले लोगों से दूर ना हों। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन को दूर करना है तो पहले अपने घर को बदलें]

खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखें: डिप्रेशन के दौरान आपके दिमाग में नकारात्मक विचार चलते रहते हैं। इसलिए खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखें ताकि यह विचार ज्यादा ना आएं। इस दौरान कोशिश करें कि आप दुनिया में होने वाली किसी भी नकारात्मक चीज से कैसे दूर रखा जाए।

सोशल मीडिया से दूर रहें: आजकल लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल लोगों का मजाक उड़ाने के लिए करते हैं। जिसका डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति पर नकारात्मक रुप से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।
निराश माहौल में ना रहें: आपके आस-पास का माहौल आपके मूड को प्रभावित करता है। अगर आपके आस-पास का माहौल नकारात्मक है तो यह आपके डिप्रेशन को बदतर बना देता है। इसलिए हमेशा खुशनुमा माहौल में रहें। इससे डिप्रेशन से बार आने में आपको मदद मिलेगी।

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