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कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी और साइटिका के लिए योगासन


कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी और साइटिका के लिए योगासन

यहां जिन आसनों का वर्णन करेंंगे वे मुख्यतः कमर दर्द, सर्वाइकल स्पाण्डलाइटिस, स्लिप डिस्क, सिटाटिका आदि मेरुदण्ड संबंधित सभी रोगों को दूर करने के लिए विशेष उपयोगी है।

चक्रासन

विधि-

A पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े। एड़ियाँ नितम्बों के समीप लगी हुई हों।

A दोनों हाथों को उल्टा करके कन्धों के पीछे थोड़े अन्तर पर रखें, इससे सन्तुलन बना रहता है।

A श्वास अन्दर भरकर कटिप्रदेश एवं छाती को ऊपर उठायें।

A धीरे-धीरे हाथ एवं पैरों को समीप लाने का प्रयत्न करें, जिससे शरीर की चक्र जैसी आकृति बन जाये।

A आसन से वापस आते समय शरीर को ढीला करते हुए कमर भूमि पर टिका दें। इस प्रकार 3 से 4 आवृत्ति करें।




लाभ-

A रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर वृद्धावस्था नहीं आने देता। जठर एवं आँतों को सक्रिय करता है।

A शरीर में स्फूर्ति, शक्ति एवं तेज की वृद्धि करता है।

A कटिपीड़ा, श्वासरोग,सिर-दर्द, नेत्रविकारों एवं सर्वाइकल स्पॉण्डलाइटिस में यह विशेष हितकारी है।

A हाथ-पैरों की मांसपेशियों को सबल बनाता है।

A महिलाओं के गर्भाशय के विकारों को दूर करता है।

मर्कटासन-1

विधि- सीधे लेटकर दोनों हाथों को कन्धों के समानान्तर फैलायें, हथेलियाँ आकाश की ओर खुली रहें; फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नितम्ब के पास लायें। अब घुटनों को दायीं ओर झुकाते हुए दोनों घुटनों और एड़ियों को परस्पर मिलाकर भूमि पर टिकायें, गर्दन को बायीं ओर मोड़कर रखें; इस तरह से बायीं ओर मोड़कर रखें; इसी तरह से बायीं ओर से भी इस आसन को करें, यह ‘मर्कटासन-1’ कहलाता है।

मर्कटासन-2
विधि- पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नितम्बों के पास रखें, पैरों में लगभग डेढ़ फुट का अन्तर रखें (दोनों हाथ कन्धों की सीध में फैले हुए हथेलियां ऊपर की ओर हों)। अब दायें घुटने को दायीं ओर झुकाकर भूमि पर टिका दें, बायें घुटने को इतना झुकायें कि वह दायें पैर के पंजे से स्पर्श करे, गर्दन को बायीं ओर अर्थात् विपरीत दिशा में मोड़कर रखें। इसी प्रकार से दूसरे पैर से भी करें। इसे ‘मर्कटासन-2’ कहते हैं।

मर्कटासन-3

विधि- सीधे लेटकर दोनों हाथों को कन्धों के समानान्तर फैलायें, हथेलियाँ आकाश की ओर खुली हों दायें पैर को 90 डिग्री (900) उठाकर धीरे-धीरे बायें हाथ के पास ले जायें, गर्दन को दायीं ओर मोड़कर रखें, कुछ समय इसी स्थिति में रहने के बाद पैर को 90 डिग्री (900) पर सीधे उठाकर धीरे-धीरे भूमि पर टिका दें। इसी तरह बायें पैर से इस क्रिया को करें।

अन्त में दोनों पैरों को एक साथ 90 डिग्री (900) पर उठाकर बायें ओर हाथ के पास रखें, गर्दन को विपरीत दिशा में मोड़ते हुए दायीं ओर देखें, कुछ समय पश्चात् पैरों को यथापूर्व सीधा करें। इसी तरह दोनों पैरों को उठाकर दायीं ओर हाथ के पास रखें। गर्दन को बायीं ओर मोड़ते हुए बायीं ओर देखें, यह एक आवृत्ति हुई। यह सम्पूर्ण क्रिया ‘मर्कटासन-3’ कहलाती है। इस प्रकार 3 से 4 आवृत्ति करें।
सावधानी-
जिनको कमर में अधिक दर्द हो, वे दोनों पैरों से एक साथ न करें। उनको एक-एक पैर से ही 2-3 आवृत्ति करनी चाहिए।

लाभ-

A पेट-दर्द, दस्त, कब्ज एवं गैस को दूर करके पेट को हल्का बनाता है। नितम्ब तथा जोड़ों के दर्द में विशेष लाभदायक है।

A कमर-दर्द, सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क एवं साइटिका में विशेष लाभप्रद आसन है।

कटि-उत्तानासन

विधि-

A शवासन में लेटकर दोनों पैरों को मोड़कर रखें। दोनों हाथ दोनों ओर पार्श्व में फैलाकर रखें।

A श्वास अन्दर भरते हुए पीठ को ऊपर की ओर खींचे। नितम्ब तथा कन्धे भूमि पर टिके हुए हों। फिर श्वास छोड़ते हुए पीठ को नीचे भूमिपर दबाकर पूरा सीधा कर दें। इस प्रकार यह अभ्यास 8 से 10 बार तक करें।

लाभ- स्लिप डिस्क, सियाटिका एवं कमर-दर्द में विशेष उपयोगी है।

मकरासन

विधि- उदर के बल लेटकर हाथों की कोहनियों को मिलाकर स्टैण्ड बनाते हुए हथेलियों को ठोड़ी के नीचे लगाकर, छाती को ऊपर उठायें। घुटनों से लेकर पंजों तक पैरों को सीधा तानकर रखें, अब श्वास भरते हुए पैरों को क्रमश पहले एक-एक तथा बाद में दोनों पैरों को एक साथ मोड़ें, मोड़ते समय पैरों की एड़ियाँ नितम्बों का स्पर्श करें, श्वास बाहर छोड़ते हुए पैरों को सीधा करना ‘मकरासन’ कहलाता है। इस प्रकार 10-12 आवृत्ति करें।

लाभ-

A स्लिप डिस्क (रीढ़ की गोटियों का इधर-उधर खिसक जाना), सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस (गर्दन व उसके पीछे वाले हिस्से में दर्द का होना) एवं सियाटिका (कुल्हों का दर्द) के लिए बहुत लाभकारी अभ्यास है।

A अस्थमा (दमा और फेफड़े-सम्बन्धी किसी भी विकार) तथा घुटनों के दर्द के लिए विशेष कारगर है तथा पैरों को सुडौल बनाता हैं।

भुजंगासन 1

विधि- उदर के बल लेटकर हाथों की हथेलियां भूमि पर रखते हुए हाथों को छाती के दोनों ओर रखकर कोहनियां ऊपर उठी हुई तथा भुजाएं छाती से सटी हुई होनी चाहिए। पैरों को सीधा रखकर पंजों को एक साथ मिलाकर पीछे की ओर खींचकर रखें। श्वास अन्दर भरकर छाती एवं सिर को धीरे-धीरे ऊपर उठायें। नाभि के नीचे वाला भाग भूमि पर टिका रहे, सिर व गर्दन को अधिकाधिक पीछे की ओर मोड़ें; इस स्थिति में लगभग 30 सैकेण्ड तक रुकें, तत्पश्चात् धीरे-धीरे प्रारम्भिक अवस्था में आ जायें। इस पूरी प्रक्रिया को ‘भुजङ्गासन (प्रथम)’ कहते हैं। इस क्रिया को 3 से 5 बार दोहरायें।

शलभासन-1

विधि- उदर के बल लेटकर दोनों हाथों को जंघाओं के नीचे रखें, ठुड्डी जमीन पर लगी रहेगी। श्वास अन्दर भरकर दायें पैर को बिना घुटना मोड़े ऊपर उठाकर 10 से 30 सैकेण्ड तक इस स्थिति में रहें। सामान्य स्थिति में आकर पुन बायें पैर से अभ्यास करें। इस प्रकार 5 से 7 आवृत्ति करें।

अब दोनों पैरों को एक साथ मिलाकर बिना घुटने मोड़े हथेलियों का रुख अपनी सुविधानुसार ऊपर या नीचे की ओर रखें, (सभी अंगुलियाँ मिली रहेंगी) अब ऊपर की ओर उठें, इसमें नाभि से नीचे तक का भाग ऊपर उठ जाएगा। यह क्रियाभ्यास ‘शलभासन-1’ कहलाता है।

लाभ- मेरुदण्ड के नीचे वाले भाग में होने वाले सभी रोगों को दूर करता है। कमर-दर्द एवं सियाटिका दर्द में विशेष लाभप्रद है। फेफडे मजबूत बनते हैं, कब्ज टूटती है। यौन-रोगों में लाभकारी है।

शलभासन-2

विधि- उदर के बल लेटकर दायें हाथ को कान तथा सिर से स्पर्श करते हुए सीधा रखें तथा बायें हाथ को पीछे कमर के ऊपर रखकर श्वास अन्दर भरते हुए आगे से सिर एवं दायें हाथ को तथा पीछे से बायें पैर को भूमि से ऊपर उठाकर, थोड़ी देर इस अवस्था में रुककर शनैः-शनैः वापस आयें, इसी प्रकार बायीं ओर से इस आसन को करें। यह आसन ‘शलभासन-2’ कहलाता है।

शलभासन-3

विधि- उदर के बल लेटकर दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर सीधा रखते हुए, एक दूसरे हाथ की कलाइयों को पकड़ें, श्वास भरकर सिर व छाती को अधिकाधिक ऊपर उठायें (पीछे से हाथों को खींचकर रखें), दृष्टि आकाश की ओर जमी रहेगी। इस प्रक्रिया को ‘शलभासन-3’ कहते हैं।

लाभ- पूर्ववत्।

उष्ट्रासन

विधि-

A वज्रासन की स्थिति में बैठे।

A अब एड़ियों को खड़ा करके उन पर दोनों हाथों को रखें। हाथों को इस प्रकार रखें कि अंगुलियाँ अन्दर की ओर तथा अंगुष्ठ बाहर को हों।

A श्वास अन्दर भरकर सिर एवं ग्रीवा को पीछे मोड़ते हुए कमर को ऊपर उठायें। श्वास छोड़ते हुए एड़ियों पर बैठ जायें। इस प्रकार तीन-चार आवृत्ति करें।

लाभ-

A यह आसन श्वसन-तत्र के लिए बहुत लाभकारी है। फेफड़ों के प्रकोष्ठ को सक्रिय करता है, जिससे दमा के रोगियों को लाभ होता है।

A सर्वाइकल स्पॉण्डलाइटिस एवं सियाटिका आदि समस्त मेरुदण्ड के रोगों को दूर करता है।

A थायरॉइड के लिए लाभकारी है।


और पढ़े- थायरॉइड रोग का घरेलू इलाज

अर्धचन्द्रासन

विधि-
A उष्ट्रासन की स्थिति में घुटनों के बल हो जायें। दोनों हाथों को छाती पर रखें।

A श्वास अन्दर भरकर ग्रीवा एवं सिर को पीछे की ओर झुकाते हुए कमर को ऊपर की ओर तानें।

A जब सिर को पीछे झुकाते हुए एड़ियों पर टिका देते हैं, तब यह पूर्ण चन्द्रासन होता है।

लाभ-

A इसके सभी लाभ उष्ट्रासन के समान हैं। जो उष्ट्रासन नहीं कर सकते, वे इस आसन से लाभान्वित हो सकते हैं।

त्रिकोणासन

विधि-

A दोनों पैरों के बीच में लगभग डेढ़ फुट का अन्तर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथ कन्धों के समानान्तर पार्श्वभाग में खुले हुए हों।

A श्वास अन्दर भरते हुए बायें हाथ को सामने से लेते हुए बायें पंजे के पास भूमि पर टिका दें अथवा हाथ को एड़ी के पास लगायें तथा दायें हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर गर्दन को दायीं ओर घुमाते हुए दायें हाथ को देखें। फिर श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आकर इसी अभ्यास को दूसरी ओर से भी करें।

लाभ-

A कटिप्रदेश लचीला बनता है। पार्श्वभाग की चर्बी को कम करता है। पृष्ठांश की मांसपेशियों पर बल पड़ने से उनकी संरचना सुधरती है। छाती का विकास होता है।

पादहस्तासन

विधि- सीधे खड़े होकर श्वास अन्दर भरते हुए हाथों को ऊपर उठाते हुए सामने झुक जायें। सिर घुटनों में लगा दें। हाथ पीछे पिण्डलियों के पास रहेंगे।

लाभ- कमर एवं पेट को स्वस्थ बनाता है। कद-वृद्धि के लिए अति लाभप्रद है।


और


घुटनों के दर्द से आराम दिलाएं ये घरेलू नुस्खे : 
बढ़ती उम्र में घुटनों में दर्द होना एक आम समस्या है, आमतौर पर घुटनों का दर्द गठिया या आर्थराइटिस बीमारी के कारण ही होता है। शरीर के जोड़ों में सूजन उत्पन्न होने पर गठिया रोग होता है या जोड़ों में उपास्थि (कोमल हड्डी) भंग हो जाती है। शरीर के जोड़ ऐसे स्थल होते हैं जहां दो या दो से अधिक हड्डियाँ एक-दूसरे से मिलती है जैसे कि कूल्हे या घुटने। उपास्थि जोड़ों में गद्दे की तरह होती है जो दबाव से उनकी रक्षा करती है और क्रियाकलाप को सहज बनाती है। जब किसी जोड़ में उपास्थि भंग हो जाती है तो आपकी हड्डियाँ एक-दूसरे के साथ रगड़ खाती हैं, इससे दर्द, सूजन और ऐंठन उत्पन्न होती है और यही घुटनों में दर्द का कारण बन जाता है।


घुटनों का दर्द क्या है? (What is Knee Pain?)

सबसे सामान्य तरह का गठिया हड्डी का गठिया होता है। इस तरह के गठिया में, लंबे समय से उपयोग में लाए जाने अथवा व्यक्ति की उम्र बढ़ने की स्थिति में जोड़ घिस जाते हैं जोड़ पर चोट लग जाने से भी इस प्रकार का गठिया रोग हो जाता है। हड्डी का गठिया अक्सर घुटनों, कूल्हों और हाथों में होता है। जोड़ों में दर्द और सूजन शुरू होने लगता है। समय-समय पर जोड़ों के आस-पास के ऊतकों या टिशु में तनाव होता है और उससे दर्द बढ़ता है।

घुटनों में दर्द होने के कारण (Causes of Knee Pain)

वात एवं कफ दोष जब अपने चरम स्थिति में होते हैं तब घुटनों एवं जोड़ों में दर्द होता है। घुटनों में दर्द होने के और भी बीमारियों के संकेत होते हैं-
-जोड़ों का दर्द
-गाउट
-रूमेटाइड अर्थराइटिस
-बर्साइटिस
-घुटने का अर्थराइटिस
-ऑस्टियोआर्थराइटिस
-ऑस्टियोमायइलिटिस
-टेन्डीनिस
-बेकर्स सिस्ट
-घिसा हुआ कार्टिलेज (उपास्थि) (मेनिस्कस टियर)
-घिसा हुआ लिगमेंट (ए.सी.एल. टियर)
-झटका लगना अथवा मोच
-घुटने की चोट
-श्रोणि विकार (pelvic inflammatory disease)

और पढ़ें: अर्थराइटिस में देवदार के फायदे


घुटनों में दर्द के लक्षण (Symptoms of Knee Pain)

घुटनों या जोड़ों में दर्द होने की समस्या को आप इन लक्षणों से पहचान सकते हैं : 
-चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द।
-सूजन और क्रेपिटस
-चलते समय जोड़ों का लॉक हो जाना
-जोड़ों का कड़ापन, खासकर सुबह में या यह पूरे दिन रह सकता है।
-मरोड़।
-वेस्टिंग और फेसिकुलेशन
-शरीर में अकड़न।
-घुटनों और जोड़ों में दर्द होना।

–पैर चलाने, हाथों को हिलाने और ज्वाइंट्स हिलाने में काफी तकलीफ और दर्द का सामना करना होता है।

-बाल, चेहरे आदि में रूखापन ।

-सुबह-सुबह जोड़ों में अकड़न व चलने, चौकड़ी मार कर बैठने में परेशानी।

-भारतीय शौचालय में बैठने में परेशानी।


घुटनों के दर्द से बचने के उपाय (How to Prevent Knee Pain)

घुटनों में दर्द (Ghutno ka dard) होने से बचने के लिए इन बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत होती है-

–चाय तथा रात के समय हल्का व सुपाच्य आहार लें।

-रात के समय चना, भिंडी, अरबी, आलू, खीरा, मूली, दही, राजमा इत्यादि का सेवन भूलकर भी नहीं करें।

–दही, चावल, ड्राई फ्रूट्स, दाल और पालक बंद कर दें। इनमें प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है।

-रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन करना हानिकारक है। इससे शरीर में ज्यादा मात्रा में यूरिक एसिड जमा होने लगता है। छिलके वाली दालों से पूरी तरह परहेज करें।

-नॉन वेज खाने के शौकीन है तो मीट, अंण्डा, मछली का सेवन तुरन्त बंद करें। इसे खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है।

-बेकरी फूड जैसे कि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, क्रीम बिस्कुट इत्यादि ना खाएं। ट्रांस फैट से भरपूर खाना यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ाता है।

-पानी पीने के नियम भी जरूर फॉलो करना चाहिए। खाना खाते समय पानी न पीएं। पानी, खाने से डेढ़ घण्टे पहले या बाद में ही पीना चाहिए।

-यूरिक एसिड की परेशानी से बचने के लिए सोया मिल्क, जंक फूड, चटपटे खाद्य पदार्थ, ठण्डा पेय, तली-भूनी चीजें न खाएं।

-गठिया के रोगी को अधिक तापमान पर पकी चीजों का सेवन करने से भी बचना चाहिए। माइक्रोवेव या ग्रिलर में बना खाना जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है।

-अधिक मात्रा में मीठी चीजें जैसे- चॉकलेट, केक, सॉफ्ट ड्रिंक और मैदे से बनी चीजों को खाने से शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है जो गठिया रोग बढ़ने का कारण बन जाता है।

-जंक फूड का भी पीठ दर्द से गहरा नाता होता है। अधिकांश जंक फूड शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान नहीं करते। इनके कारण मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं। दूसरी ओर, साबुत अनाज, प्रोटीन युक्त दही और सब्जियों के रूप मांसपेशियों पर सकारात्मक असर डालते हैं।

-धूम्रपान ऑक्सीजन की मात्रा को सीमित कर देता है। जिससे मांसपेशियों को ऑक्सीजन जरूरत पूरी नहीं होती है। साथ ही निकोटीन रीढ़ की हड्डी की डिस्क्स में रक्त प्रवाह को बाधित करता है। पीठ दर्द के अलावा धूम्रपान से थकान और फेफड़ों का रोग भी हो सकता है। यदि आप पीठ दर्द की समस्या से पीड़ित हैं तो कुछ समय के लिए अपनी इस आदत को छोड़ दें।

-रात को शराब पीने के बाद अगर अगली सुबह आपको पीठ दर्द की समस्या होती है तो इसका कारण शराब हो सकता है। निर्जलीकरण दर्द को और बदतर बना सकता है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ निर्जलीकरण को रोकने में मदद करते हैं। गंभीर रूप से होने वाले पीठ दर्द में शराब को सीमित मात्रा में लेना अच्छा रहता है।

-जोड़ों को चोट से बचाना चाहिए- अगर जोड़ों पर चोट लगती है तो वो हड्डी को तोड़ भी सकती है, इसलिए कोशिश करें कि जोड़ों को चोट से बचाकर रख सकें, जब भी कोई ऐसा खेल खेलें जिसमें जोड़ों पर चोट लगने का डर रहता हो तब शरीर पर ज्वाइंट सेफ्टी पेड्स पहनकर रखें। अगर किसी गंभीर चोट की वजह से घुटनों में दर्द हो रहा है तो घुटनों का इलाज (ghutno ke dard ka ilaj) कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जोड़ों के दर्द की दवा खाएं. 
–गतिशील रहना चाहिए- जोड़ों के दर्द से राहत के लिए सदैव गतिशील रहे। अगर जोड़ों की मूवमेंट होती रही तो आपको लंबे समय किसी भी प्रकार का कोई दर्द नहीं सताएगा। बहुत देर तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से भी जोड़ों में कठोरता महसूस होती है।

-वजन को नियंत्रित रखना चाहिए- यदि आपका वजन नियंत्रण में रहेगा तो आपका शरीर और शरीर के सारे जोड़ भी स्वस्थ रहेंगे। शरीर का ज्यादा वजन घुटनों और कमर पर अधिक दबाव डालता है और इससे आपके शरीर के कार्टिलेज के टूटने का डर बना रहता है। अब ऐसे में आपको अपने वजन को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है।

-ज्यादा स्ट्रेच नहीं करना चाहिए- अगर आप नियमित व्यायाम करते हैं तो व्यायाम के साथ आपको स्ट्रेचिंग करने की भी सलाह दही जाती है, तब ये बात हमेशा ध्यान में रखें कि व्यायाम करते समय स्ट्रेचिंग हफ्ते में केवल तीन बार करें। स्ट्रेचिंग को एकदम शुरु नहीं करना चा हिए, ऐसा करने की जगह पहले थोड़ा वार्मअप भी करें।

-दूध पीएं- दूध में कैल्शियम और विटामिन-डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो जोड़ों को मजबूत रखने के लिए बेहद जरूरी होता है, इसलिए हर रोज दूध जरूर पीना चाहिए। जिससे हड्डियाँ मजबूत बनती हैं, अगर आपको दूध पसंद नहीं है तो दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे पनीर, दही आदि।

-सही आसन बनाकर रखें- जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए सही पोश्चर या आसन में उठना, बैठना और चलना बेहद आवश्यक है। आपका सही पोश्चर ही गर्दन से लेकर घुटनों तक शरीर के सभी जोड़ों की रक्षा करता है।

-व्यायाम करें- जोड़ों के दर्द से निजात के लिए और अपने स्वास्थ्य की सही देखभाल के लिए आपको, व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। तैराकी करना जोड़ों के दर्द के लिए सबसे फायदेमंद व्यायाम होता है।

घुटनों के दर्द से छुटकारा पाने का घरेलू इलाज (Home Remedies for Knee Pain in Hindi)

घुटनों में दर्द होने पर तुरंत जोड़ों के दर्द की दवा (jodo ke dard ki dawa) ना खाएं बल्कि पहले घरेलू उपायों से इसे ठीक करें. अगर घरेलू उपायों से दर्द ठीक ना हो तो फिर जाकर इलाज करवाएं. आइये पहले घुटनों के दर्द से राहत पाने के आसान घरेलू उपायों के बारे में जानते हैं : 


घुटनों का दर्द दूर करता है हल्दी-चूने का लेप (Turmeric and Caustic lime Paste Reduces Knee Pain in Hindi)

हल्दी और चूना दर्द को दूर करने में अधिक लाभदायक साबित होते हैं। हल्दी और चुना को मिलाकर सरसों के तेल में थोड़ी देर तक गर्म करे फिर उस लेप को घुटने में लगाकर रखने से घुटनों का दर्द (Ghutno ka dard) कम होता है. 


हल्दी दूध का सेवन घुटनों के दर्द में फायदेमंद (Turmeric Milk Beneficial in Knee Pain in Hindi)

एक ग्लास दूध में एक चम्मच हल्दी के पाउडर को मिलाकर सुबह-शाम कम से कम दो बार पीने से घुटनों के दर्द (Ghutno ka dard) में लाभ मिलता है। यह जोड़ों का दर्द दूर करने का सबसे कारगर घरेलू इलाज है।


प्राकृतिक उपचार घुटनों के दर्द में फायदेमंद (Natural Treatment for Knee Pain in Hindi)

विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत सूरज से उत्पन्न धूप है, जिससे आपको नेचुरल विटामिन-डी मिलती है जो हड्डी के लिए अधिक लाभदायक होता है। इसलिए गठिया के मरीजों को नियमित रूप से सुबह कुछ देर धूप में टहलना चाहिए. 


घुटनों का दर्द दूर करने में सहायक है अदरक (Ginger: Home Remedy for Knee pain in Hindi)

गर्म प्रकृति होने के कारण यह सर्दी जनित दर्द में फायदेमंद है। सांस संबंधी तकलीफ, घुटनों में दर्द, ऐंठन और सूजन होने पर अदरक का सेवन करना लाभकारी होता है।

एलोवेरा से करें घुटनों के दर्द का घरेलू उपचार (Aloe Vera : Home Remedies for Knee pain in Hindi)

जोड़ों के दर्द, चोट लगने, सूजन, घाव एवं त्वचा संबंधी समस्याओं से होने वाले दर्द में ऐलोवेरा का गूदा, हल्दी के साथ हल्का गर्म करके बांधने पर लाभ होता है। घुटनों में दर्द (Ghutno ka dard) होने पर भी आप इस घरेलू उपाय को आजमा सकते हैं. 


घुटनों के दर्द से आराम दिलाये सरसों तेल की मालिश (Musturd Oils Massage Beneficial in Knee Pain in Hindi)

सरसों का तेल शारीरिक दर्द, घुटनों के दर्द, सर्दी जनित दर्द में बेहद लाभकारी होता है। नियमित रूप से सरसों के तेल से घुटनों की मालिश करने पर घुटनों का दर्द (Ghutno ka dard) जल्दी दूर हो जाता है।


घुटनों का दर्द दूर करता है लौंग (Clove Reduces Knee Pain in Hindi)

दांत व मसूड़ों के दर्द, घुटनों के दर्द (Ghutno ka dard) और सूजन आदि में लौंग काफी लाभकारी है। दर्द वाली जगह पर लौंग का पाउडर या लौंग के तेल में भीगा रूई का फोहा रखना बेहद असरकारक होता है। 


अश्वगन्धा एवं सोंठ पाउडर से करें घुटनों के दर्द का घरेलू उपचार (Ashwagandha and Ginger Powder Beneficial in Knee Pain)

इसके लिये 40 ग्राम नागौरी अश्वगंध पाउडर, 20 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा 40 ग्राम की मात्रा में खाण्ड पाउडर लें। तीनों को अच्छी तरह से मिला लें। जोड़ों एवं घुटनों के दर्द में इस चूर्ण को 3-3 ग्राम मात्रा में सुबह शाम गर्म दूध के साथ लेने से जोड़ों के दर्द में और सूजन में बहुत अच्छा आराम मिलता है। गठिया के घरेलू इलाज के रूप में यह नुस्खा काफी प्रचलित है, कई लोग इसे घुटनों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं।



घुटनों का दर्द दूर करने के लिए करें मेथी का उपयोग (Fennel Seed Beneficial in Knee Pain in Hindi)

मेथी दाना का जोड़ों पर असर दर्द की गोली की तरह ऐनलजेसिक एवं एंटी-इंफ्लामेट्री होता है। इसके लिये दाना मेथी का पाउडर आधा से एक चम्मच सुबह शाम खाने के बाद गर्म पानी से लें। इससे घुटनों के दर्द (Ghutno ka Dard) से आराम मिलता है।

मसाज या सिकाई से पाएं घुटनों के दर्द से आराम (Massage Benefits for Knee Pain in Hindi)

आयुर्वेद में जड़ी-बुटियों से बने तेल से मालिश करने के बहुत से फायदे बताये गये हें इससे जोड़ों में चिकनाई आती है, जकड़ाहट दूर होती है, दर्द व सूजन में आराम मिलता है। इसके लिये 250 ग्राम सरसों के तेल को कढ़ाई में डालकर गर्म करने के लिये गैस पर रखें। इसमें 8-10 कली लहसुन की छील कर डाल दें। गर्म तेल में एक-एक चम्मच अजवायन, दानामेथी, सोंठ पाउडर भी डाल दें। जब सारा मसाला पक जाये तो पकने पर नीचे उतार लें। ठण्डा होने पर किसी काँच की शीशी में डाल कर रख लें। सर्दियों में सुबह-सुबह की गुनगुनी धूप में इस तेल से घुटनों की मालिश करें या जिस भी जोड़ों में दर्द हो वहां मालिश करें।
एक्सरसाइज घुटनों के दर्द में फायदेमंद (Exercise for Knee Pain in hindi) 

यह जान लें कि नियमित व्यायाम करना घुटनों या जोड़ों के दर्द का सबसे असरदार इलाज है। फिजियोथेरेपिस्ट की राय से एक्सरसाइज करें या योगा शिक्षक से सीख कर नियमित योगा करें। 
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए (When to Contact a Doctor)
आमतौर पर लोगों को जब भी घुटनों में दर्द होता है तो वे घुटनों या जोड़ों के दर्द की दवा खाकर दर्द से राहत पा लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करने से बचें बल्कि पहले जोड़ों के दर्द के घरेलू उपचार अपनाएं। अगर इनसे उचित लाभ ना हो तब जाकर डॉक्टर से घुटनों के दर्द का इलाज करवाएं। इसके अलावा अगर दर्द फ्रेक्चर की वजह से है या दर्द के साथ सूजन है, लालिमा है, गर्माहट है या फिर दर्द के साथ बुखार है और वजन कम हो रहा है और रात में तेज दर्द होता है तो फ़ौरन ऑर्थोपीडिक डॉक्टर को दिखाना बेहतर होता है।

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