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मॉं की ममता


माँ लफ्ज़ ज़िंदगी का वो अनमोल लफ्ज है ... जिसके बिना ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं कही जा सकती .

मॉं की ममता 
मॉं की हृदय की सरलता ,
मॉं के हृदय की विस्तृता 
मॉं की व्याकुलता
मॉं की आत्मसमर्पणता
......समुदृ की गहराई से भी विशाल, मॉं को मेरा शत् शत् प्रणाम्


आज मेरी माँ की सवत्सरी के दिन पुण्य तिथि है ..

और मेरे पास कविता लिखने से अच्छी श्रदांजलि और क्या हो सकती है ..

मेरा बचपन थक के सो गया माँ तेरी लोरियों के बग़ैर
एक जीवन अधूरा सा रह गया माँ तेरी बातो के बग़ैर
तेरी आँखो में मैने देखे थे अपने लिए सपने कई
वो सपना कही टूट के बिखर गया माँ तेरे बग़ैर.....
माँ हर पल तुम साथ हो मेरे, मुझ को यह एहसास है
आज तू बहुत दूर है मुझसे, पर दिल के बहुत पास है। 
तुम्हारी यादों की वह अमूल्य धरोहर 
आज भी मेरे साथ है,
ज़िंदगी की हर जंग को जीतने के लिए, 
अपने सर पर मुझे महसूस होता आज भी तेरा हाथ है। 
कैसे भूल सकता हूँ माँ मैं आपके हाथों का स्नेह,
जिन्होने डाला था मेरे मुंह में पहला निवाला, 
लेकर मेरा हाथ अपने हाथों में,
दुनिया की राहों में मेरा पहला क़दम था जो डाला
ज़िंदगी जब भी उदास हो कर तन्हा हो आई,
माँ तेरे आँचल ने ही मुझे अपने में छिपाया था
आज नही हो तुम जिस्म से साथ मेरे,
पर अपनी बातो से , अपनी अमूल्य यादो से
तुम हर पल आज भी मेरे साथ हो.......... 
क्योंकि माँ कभी ख़त्म नही होती .........
तुम तो आज भी हर पल मेरे ही पास हो.........  अशोक जैन

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