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क्या Whey Protein महिलाओ को लेना चाहिए?



क्या Whey Protein महिलाओ को लेना चाहिए?


प्रोटीन शेक न केवल पुरुषों के लिए जरूरी है बल्कि इसकी आवश्यनकता महिलाओं को भी होती है। प्रोटीन महिलाओं के शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है क्यों कि इससे मांसपेशियों का निर्माण होता है। इसके अलावा हमारे शरीर का लगभग 75 प्रतिशत हिस्साल केवल प्रोटीन से ही बनता है।


पहले यह माना जाता था कि प्रोटीन शेक केवल लड़कों के लिए जरूरी होता है, क्यों कि उनको अपनी बॉडी बनानी होती है, पर वास्तयविक में ऐसा नहीं है। लड़कियों को भी प्रोटीन की आवश्य कता होती है, लेकिन कम मात्रा में। प्रोटीन की जरूरत की पूर्ति के लिए प्रोटीन शेक आहार की तुलना में जल्दी असर दिखाता है। डिब्बायबंद प्रोटीन शेक की बजाय घर में बने ताजे फलों का जूस ज्यापदा फायदेमंद होता है। इस लेख में जानिए महिलाओं के लिए प्रोटीन शेक के फायदों के बारे में।
नुट्रिशन सप्लीमेंट Nutrition Supplement

प्रोटीन शेक को नुट्रिशन का सप्ली मेंट भी कहा जाता है, इसे आप अपने ब्रेकफास्ट के साथ नहीं पी सकते हैं। प्रोटीन शेक को ब्रेकफास्टक की जगह पर ही पीना चाहिए न कि उसके साथ। घर में ताजे फलों से बनाये गये प्रोटीन शेक को पीने से शरीर को पर्याप्तह मात्रा में मिनरल, विटामिन मिलता है। इसके सेवन से शरीर के लिए नियमित रूप से आवश्यकक कैलोरी की पूर्ति भी हो जाती है। इसके अलावा यह महिलाओं के रक्ति, त्वसचा, हड्डियों और मांसपेशियों के लिए बहुत जरूरी होता है।
तुरंत ऊर्जा देता है Give Quick Energy


आहार की तुलना में प्रोटीन शेक महिलाओं को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। एक्सरसाइज के बाद जितनी तेजी से प्रोटीन आपके शरीर में पहुंचेगा उतनी ही जल्दी उसका असर होगा। जिम से आने के बाद यदि आप प्रोटीन शेक पीती हैं तो यह 30-40 मिनट में अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। वहीं दूसरी तरफ आहार में पाए जाने वाले प्रोटीन करीब एक घंटे के बाद असर दिखाते हैं।
वजन घटाने के लिए Helps to lose Fat


जो महिलायें वजन कम करना चाहती हैं उनको नियमित रूप से प्रोटीन शेक का सेवन करना चाहिए। कई शोधों ने भी इस बात की पुष्टि की है, कि प्रोटीन शेक के सेवन से आप अपना वजन आसानी से कम कर सकती हैं। स्टैंडफोर्ड यूनीवर्सिटी द्वारा किये गये एक शोध में ये पाया गया कि प्रोटीन डायट लेने वाली महिलाएं दिखने में ज्यादा अच्छी और बाकी महिलाओं की अपेक्षा 12 महीने के अंदर ही वजन घटाने में सफल हो सकती हैं।
जिम के बाद है जरूरी Best to Take After Gym


जो महिलायें नियमित जिम जाती हैं या वर्कआउट करती हैं उनके लिए प्रोटीन शेक का सेवन बहुत जरूरी है। दरअसल जब आप बहुत एक्सरसाइज करती हैं तब आपकी मांसपेशियों में दरार आ जाती है। इसको भरने और ठीक करने के लिए प्रोटीन का इस्तेमाल करना चाहिए। इसलिए जिम के बाद प्रोटीन शेक का सेवन जरूरी हो जाता है।
बीमारियों से बचाता है Protect from many Diseases

प्रोटीन शेक कई खतरनाक बीमारियों से भी महिलाओं को बचाता है। जीवनशैली के कारण महिलायें अपने खानपान पर ध्याकन नहीं दे पाती हैं जिसके कारण उनके शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसके कारण दिल की बीमारियां, किड्नी से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में प्रोटीन शेक आपके शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरी करता है साथ ही इन जानलेवा बीमारियों से भी बचाता है।


आप घर पर आसानी से प्रोटीन शेक बना सकती हैं, स्किम्ड मिल्क पाउडर, मिल्क और एग में अपनी पसंद का फ्लेवर भी डाल सकती हैं, जैसे – केसर, इलायची या अन्य कोई फ्लेवर। शेक को और अधिक टेस्टी बनाने के लिए शहद और कोको पाउडर मिलायें।





मल्टिविटामिन जरूरी है या नही

आजकल ज्‍यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत पोषक तत्‍वों से भरपूर नाश्‍ते की बजाय मल्‍टीविटामिन (Multivitamins) की गोलियों से करने लगे है।आपने देखा होगा कि आपके आस-पास या ऑफिस में कई लोग ऐसे होंगे जो लंच करने के तुरंत बाद ही अपनी मेज पर रखी मल्‍टीविटामिन की दवा का सेवन कर लेते होंगे। उनका मानना है कि मल्‍टीविटामिन की गोलियां शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने, ऊर्जा को बढ़ाने के साथ उन्‍हें खूबसूरत भी बनाती है।

ऐसा भी हो सकता है कि कई बार आपके डॉक्‍टर ने भी आपको मल्‍टीविटामिन (Multivitamins) की टैबलेट किसी पोषक तत्‍व की कमी को दूर करने के लिये दी हो। बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो टीवी पर दिखाए जाने वाले एड से प्रसन्‍न हो कर भी ये गोलियां खाना शुरु कर देते हैं।लेकिन क्‍या यह सही है। माना कि आहार की कमियों को पूरा करने के लिए एक सीमा तक मल्टीविटामिन का इस्‍तेमाल फायदेमंद हो सकता हैं, लेकिन ये कभी भी स्वस्थ आहार का विकल्प नहीं हो सकतीं। आइए मल्‍टीविटामिन के फायदे और नुकसान के बारे में जानें।

अगर आप फलों और सब्जियों से युक्त संतुलित आहार नहीं ले रहें है, तो आपके लिए पोषण तत्‍वों की कमी को पूरा करने के लिए मल्‍टीविटामिन फायदेमंद हो सकता है। अमेरिका में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार, मनुष्‍य के शरीर को 13 विटामिनों की आवश्‍यकता होती है। विटामिन (VITAMIN A, C, D, E & K) ए, सी, डी, ई, के और आठ प्रकार के विटामिन बी। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए विटामिन का अलग-अलग कार्य होता है।
विटामिन के प्रकार ( Types Of Vitamins)

कई लोग मानते हैं कि विटामिन अधिक लेने के कोई नुकसान नहीं होता। उनका मानना हैं कि अधिक विटामिन यूरीन के रास्‍ते बाहर निकल जाता है। लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं। क्‍योंकि विटामिन दो तरह के होते हैं, फैट सॉल्‍यूबल और वॉटर सॉल्‍यूबल। विटामिन बी और सी वॉटर सॉल्‍युल है जो य‍ूरिन के जरिए बाहर चला जाता है। लेकिन विटामिन ए, डी, ई और के फैट सॉल्‍युबल ( fat soluble vitamins ) है। यह शरीर में जमा हो जाते हैं।
कब लें मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स

एक सीमित मात्रा में मल्टीविटामिन टैबलेट से नुकसान नहीं होता लेकिन इनपर निर्भरता कतई ठीक नहीं है। आमतौर पर डॉक्टर भी इन परिस्थितियों में मल्टीविटामिन सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं-

एथलीटों को तगड़े उनके स्वास्थ्य का अनुकूलन और उनकी फिटनेस के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए मल्टीविटामिन भी जरूरी है।
किसी लंबी बीमारी से रिकवर होने के लिए।
हेवी दवाओं के साथ मल्टीविटामिन टैबलेट या सप्लीमेंट।
सर्जरी के बाद तेजी से रिकवरी के लिए।
बढ़ती उम्र में महिलाओं में होने वाले विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए।
शरीर में विटामिन बी12, फोलिक एसिड व आयरन की कमी होती है जिसे पूरा करने के लिए डॉक्टर विटामिन सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं।
मल्टीविटामिन टैबलेट के कई हैं फायदे
लंदन : शोधकर्ताओं का कहना है कि रोजाना मल्टीविटामिन का एक टैबलेट लेने से याददाश्त को बढ़ाने के साथ ही मानसिक विकारों को कम किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि मल्टीविटामिन टैबलेट लेने से याददाश्त पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि इससे मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षमता बढ़ती है।

शरीर के समुचित विकास के लिए 13 विटामिन की जरूरत होती है। इनमें विटामिन ए, सी, डी, ई और के का शरीर के विकास में अहम योगदान होता है।
क्या हो सकता है विकल्प
नट्स खासतौर पर बादाम का सेवन रोज करें।
अच्छी हेल्दी डाइट और घर के बने खाने का कोई विकल्प नहीं है।
सप्लीमेंट्स के रूप में कॉर्नफ्लेक्स, दाल, दलिया आदि अच्छा विकल्प है।
विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए एक दिन में चार अलग-अलग रंग के फल खाएं।
दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स भरपूर मात्रा में लें।


विटामिन क्या है, नाम, प्रकार और फायदे । 
Importance of Vitamins
विटामिन क्या हैं ,

विटामिन जिसे जीवन सत्व भी कहते है| ये हमारी बॉडी के लिए बहुत हीजरूरी है,हमारी बॉडी के विकास में भी इनका अहम रोल है| हमे विटामिन की जरुरत माइक्रोग्राम में होती है मतलब एक ग्राम का हजारवां हिस्सा| इसीलिए यह विभिन्न खाद्य प्रदार्थों में बहुत थोड़ी मात्र में पाए जाते है, इनकी कमी से शारीर में बीमारियाँ हो सकती है, विटामिन जीवन को बनाये रखने वाले शारीरक क्रियाओं को पूरा करने में मदद करते हैं|

अगर विटामिन्स की कमी हो जियर तो कई तरह की बिमारिय हमे घेर लेती है , और हमारी बॉडी में बे कई प्रोब्लेम्स आने लगती है, इसलिए हम हर बार पोष्टिक भोजन खाने की सलाह देते है , जिसमे सभी पोष्टिक तत्वयानि क विटामिन्स , प्रोटीन, फैट , इत्यादिउचित मात्रा में हो|
विटामिन के प्रकार – Types of Vitaminविटामिन को मुख्य दो भागो में बाँट सकते है


Fat soluble Vitamin (वसा में घुलनशील )

इस तरह के विटामिन हमारे शारीर के वसा उत्तकों में जमा हो सकते है इन्हे शारीर में जमा करना आसान होता है और यह हफ़्तों तक जमा रहते है. और ये आंत से रक्त में सोखे जाते है वासा की मदद से| विटामिन A, D और K फट में घुलनशील विटामिन है|
Water soluble Vitamin (पानी में घुलनशील)

पानी में घुलनशील विटामिन हमरे शारीर मं ज्यादा दिनों तक जमा नहीं हो सकते है यह पानी में घुल कर किडनी द्वारा बहार कर दिए जाते है.विटामिन C और सभी प्रकार के विटामिन B पानी में घुलनशील है|विटामिन्स के प्रकार
विटामिन्स 13 प्रकार के होते है। आईये जानते है।

विटामिन ए | Vitamin A in Hindi

विटामिन A का रासायनिक नाम रेटिनॉल (Retinol) है। यह फैट-सॉल्युबल (fat-soluble) 
विटामिन है। विटामिन A का मुख्य काम है की हमारी मांसपेशियाँ और हड्डी को मज़बूती और ताकत देना। ये खून में कैल्शियम का संतुलन बनाये रखता है और मुँहासो के इलाज के लिए भी उपयोगी है। इसकी कमी से हमे आँखों के रोग हो सकते है।

विटामिन ए के मुख्य स्रोत है दूध, हरी सब्ज़ियां, पनीर। ये हमारे बालो को भी स्वस्थ रखता है।
विटामिन बी | Vitamin B in Hindi

विटामिन बी – इसके कई रूप है। इसके बारे में विस्तार से जानकारी आपको निचे मिल जाएगी।विटामिन बी – 1
रासायनिक नाम: थाइमिन (Thaimine)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: सूरजमुखी के बीज, अनाज, आलू, संतरे और अंडे।
फायदे: मस्तिष्क को विकसित रखने के लिए बहुत ही उपयोगी है। इसकी कमी से हमे बेरीबेरी रोग हो सकता है
विटामिन बी – 2
रासायनिक नाम: राइबोफ्लेविन (Riboflavin)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: केला, दूध, दही, मास, अंडे, हरी बीन्स और मछली।
फायदे: त्वचा को अच्छी रखने के लिए बहुत ही उपयोगी है।
विटामिन बी – 3
रासायनिक नाम: नियासिन (Niacin)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: खजूर, दूध, अंडे, टमाटर, गाजर, एवोकाडो।
फायदे: रक्तचाप को नियंत्रण में रखने और सिरदर्द, दस्त को कम करती है।
विटामिन बी – 5 
रासायनिक नाम: पैंटोथेनिक एसिड (Pantothenic acid),
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: एवोकैडो, अनाज, मांस।
फायदे: बालो को स्वस्थ और सफेद होने से बचाता है। इससे तनाव भी कम होता है।
विटामिन बी – 6
रासायनिक नाम: प्यरीडॉक्सीने (Pyridoxine)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: अनाज, मांस, केले, सब्जियां।
फायदे: यह सुबह की थकान कम करता है। तनाव और अनिद्रा से भी मुख्ती देता है।
(जरूर पढ़े: खाली पेट गरम पानी पीने के फायदे)
विटामिन बी – 7
रासायनिक नाम: बायोटिन (Biotin)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: अंडे की जर्दी (Egg yolk), सब्जियां।
फायदे: यह त्वचा और बालो के लिए बहुत ही अच्छा है। इसकी कमी से हमे जिल्द की सूजन (dermatitis) हो सकती है।
विटामिन बी – 9
रासायनिक नाम: फोलिक एसिड (Folic acid)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: पत्तीदार शाक भाजी, सूरजमुखी के बीज, कुछ फलो में भी यह होता है।
फायदे: यह त्वचा के लोग और गठिया के उपचार हेतु बहुत ही शक्तिशाली है। गर्भवती महिलाओं को यह लेने ही सलाह दी जाती है।
विटामिन बी – 12
रासायनिक नाम: कयनोसोबलमीन (Cyanocobalamin)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
स्रोत: मछी, मास, दूध, अंडे और दूध दे बनाये उत्पादों में यह होता है।
फायदे: यह एनीमिया (खून की कमी), मुँह में अलसर जैसी बिमारियों को कम करता है।

विटामिन सी | Vitamin C in Hindi

रासायनिक नाम: एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic acid)
यह वाटर-सॉल्युबल विटामिन है।
यह हमारी त्वचा और हड्डियों के लिए बहुत ही आवश्यक है। यह किसी घाव को ठीक करने में बहुत ही ज्यादा मदद करता है। विटामिन सी की कमी हम फल और सब्ज़ियां खा कर पूरी कर सकते है। टमाटर, ब्रोकोली में अच्छी मात्रा में विटामिन सी होता है। यह गर्भवती महिलाओ, धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को ज्यादा मात्रा में खाना चाहिए।
विटामिन डी | Vitamin D in Hindi

रासायनिक नाम: एरगोसेल्सिफेरोल (Ergocalciferol)
यह फैट-सॉल्युबल विटामिन है।
विटामिन डी ( VItamin D) हमारे शरीर में कैल्शियम अब्सॉर्ब करने में बहुत ही मदद करता है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने में भी मदद करता है, दांतो की सड़न को कम करता है। इसकी कमी से हमे सूखा रोग (Rickets) हो सकता है।
तीन चीज़ो के ज़रिये हमे विटामिन डी मिल सकता है – त्वचा के माध्यम से, अपने आहार से, और पूरक से। हमारा शरीर खुद विटामिन डी बना लेता है जब उसे सूरज की रौशनी मिलती है। आहार की बात करे तो दूध और अंडे की जर्दी से भी हमे विटामिन डी मिल जाता है।
विटामिन ई | Vitamin E in Hindi

रासायनिक नाम: तोसोफेरोल्स (Tocopherols)
यह फैट-सॉल्युबल विटामिन है।
विटामिन ई हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत बनाता है। वनस्पति तेल, अनाज, बादाम, एवोकैडो, अंडे और दूध से हमे विटामिन ई मिल जाता है। जिन लोगो को किसी प्रकार के यकृत रोग होते है उनको यह ज्यादा लेने के लिए कहा जाता है। विटामिन ई के लिए कोई पूरक लेने से पहले डॉक्टर से जरूर परामर्श लें।
विटामिन के | Vitamin k in Hindi

रासायनिक नाम: फीलोक्विनोने (Phylloquinone)
यह फैट-सॉल्युबल विटामिन है।

विटामिन के स्वस्थ हड्डियों और ऊतकों के लिए प्रोटीन बनाकर हमारे शरीर की मदद करता है।

अगर आपका कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते है।

धन्यवाद
विटामिन ए के स्त्रोत, फायदे और नुकसान


Vitamin A| विटामिन ए

विटामिन ए (Vitamin A) हमारे शरीर के लिए अत्यधिक जरूरी है, जो के फलो और सब्जियो में मुख्य रूप से पाया जाता है. फलो और सब्जियो में केरोतिनायद की मात्र भरपूर होने के कारण उनका रंग गहरा और चमकीला होता है. यह केरोटीन हमारे शरीर में के अंदर से ही हमारी स्किन को प्रोटेक्ट और cure करने का काम करता है और बाहर के वातावरण और धूप के द्वारा हमारे शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करता है साथ ही धूप के हुए नुकसान को कम करने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है |

विटामिन ए (Vitamin A) हमारी आँखों की कार्यप्रणाली के सबसे अधिक आवश्यक होता है और इसकी कमी हमारे देखने की क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है | वैसे तो कोई भी 
विटामिन (Vitamin) हो सबकी शरीर में अलग अलग काम के लिए जरुरत होती है लेकिन किसी विशेष विटामिन (Vitamin) की कमी की वजह से जो अंग सबसे अधिक प्रभावित होता है उसकी कार्यक्षमता में कमी की वजह से हमे परेशानी का और health issues का सामना करना पड़ता है और विटामिन ए की कमी से सबसे अधिक असर हमारी आँखों पर पड़ता है
विटामिन ए (Vitamin A) के स्त्रोत

विटामिन A के बढ़िया स्त्रोत अनाज, धनिया, मीट, कलेजी, हरी पत्तेदार सब्जिया, पालक, ब्रोकोली,आम , तरबूज, चीकू, , पनीर, साग, राजमा, बीन्स, अंडा, शलगम, चुकन्दर, कद्दू, दूध, पनीर,शकरकंद, टमाटरऔर लाल शिमला मिर्च. ये सभी विटामिन A के अछे स्त्रोत्र है . आपको इन्हें अपनी डाइट में लाना चाहिए.
विटामिन ए (Vitamin A) की कमी से नुकसान

विटामिन A की मात्रा को कम लेना हानिकारक हो सकता है, इसकी कमी खासकर क हमारे खानपान की वजह से हे आती है. विटामिन A की कमी से सिरदर्द, डीएसटी, बाल झाड़ना, ख्तावत, स्किन प्रोबेल्म, दिल के रोग इत्यादि हो सकते है.

महिलाओ में इसकी कमी से असमय मासिक धरम (menstruation )की प्रॉब्लम हो सकती है.
विटामिन ए (Vitamin A) की कमी सबसे अधिक प्रभावित करती है तो वो है हमारी vision और इसकी कमी की वजह से आपको कई तरह के vision disorders हो सकते है जिनमे सबसे सामान्य है रतौंधी जिसमे रोगी तो रात में असामान्य रूप से कम दिखाई देता है | साथ ही vitamin a की कमी से आँखों में नमी की कमी हो जाती है जिसकी वजह से पलकें झपकने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है और आँखों में इसकी वजह घाव की शिकायत भी हो जाती है क्यूंकि वो हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से है |
छोटे बच्चो में अगर विटामिन ए (Vitamin A) की कमी होती है तो उनके विकास पर उनका असर पड़ता है और उनका कद भी छोटा रह सकता है |

विटामिन ए (Vitamin A) की कमी से आपके immune system पर भी बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से कुछ परिस्थितों में मलेरिया और डायरिया से होने वाली मौत का खतरा भी बढ़ जाता है |

अगर आपका कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते है।

धन्यवाद




CLA क्या होता है|


सीएलए (CLA (Conjugated Linoleic Acid) ओमेगा -6 फैटी एसिड से संबंधित है, दो प्रकार के आवश्यक फैटी एसिड में से एक है जो शरीर को चयापचय दर बढ़ाने में मदद करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देती है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांच में रहता है। CLA लिनोलिक एसिड (सूरजमुखी और कुसुम तेल में उच्च मात्रा में पाया जाता है) का उपयोग किया जाता है जो एक प्रक्रिया का उपयोग करता है जो धीरे-धीरे लिनोलिक एसिड को संयुग्मित लिनोलिक एसिड में परिवर्तित कर देता है। लेकिन लीन मास (Lean Mass) में वृद्धि करते समय फैट को कम करने की चुनौती में फैटी एसिड कैसे मदद कर सकता है? आइये जाने

कई अध्ययनों से पता चला है कि सीएलए फैट को कम कर देता है, और मसल (muscle) साइज़ बढाता है। एक मानव अध्ययन में 53 सामान्य स्वस्थ व्यक्तियों को 4.2 ग्राम सीएलए / दिन दी गई जिसके परिणाम स्वरुप उनके शरीर की फैट में एक महत्वपूर्ण कमी (3.8%) देखि गई। इसके अलावा मोटापे और अधिक वजन वाले आबादी वाले एक अध्ययन में यह पता चला है कि शरीर में फैट में महत्वपूर्ण कमी देखने के लिए 12 सप्ताह की अवधि के लिए कम से कम 3.4 ग्राम सीएलएप्रति दिन लेना आवश्यक है|
CLA के मुख्य स्त्रोत्र

सीएलए डेयरी और पशु वसा, जैसे गोमांस, भेड़ का मॉस, दूध, और अंडों में पाया जाता है, लेकिन मानव शरीर द्वारा उत्पादित नहीं किया जा सकता है।

Best CLA Brands In India:

Muscle Pharma’s CLA Core

Now Foods, CLA, 800 mg, 90 Softgels
CLA के फायदे
इम्यून सिस्टम को अच्छा करता है
कैंसर से प्रिवेंट करता है
रक्त (Blood) लिपिड और रक्त शुगर को मैनेज करता है
फैट loss में हेल्प करता है
मसल्स बिल्डिंग में हेल्प करता है



अश्वगंधा और शतावरी के फायदे |



आज कल हमारे भारतीय आयर्वेद ने बहुत तरक्की कर ली है , जिसका प्रयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है , चाहे वो हमरा दैनिक जीवन हो , या बॉडीबिल्डिंग (Bodybuilding). स्टेरॉइड ( Steroid) के बेहद खतरनाक नतीजों और दवाओं के सीरियस साइड इफेक्ट ( Side Effects) सामने आए हैं। इसी बीच आयुर्वेदिक दवाओं ने बॉडीबिल्डिंग (Bodybuilding) के मैदान में अपनी अच्छी जगह बना ली है। ये बात सही है कि यह स्टेरॉइड जैसे नतीजे नहीं देतीं मगर हां, बहुत कम साइड इफेक्ट में अच्छे नतीजे दे देती हैं।

आजकल जिम (gym) जाने वाले और स्टेरॉइड से परहेज करने वाले लोग अश्वगंधा (Ashwagandha), शतावरी (Shatavari), मूसली, कॉन्च बीज और गोक्शुरा का खासतौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा हाजमा ठीक रखने या लिवर की सेफ्टी के लिए भी आयुर्वेदिक दवाएं और सिरप काम आ रही हैं। इनके साथ दो बातें ऐसी हैं जो अच्छी हैं। एक तो इनके साइड इफेक्ट बहुत ज्यादा नहीं हैं और दूसरी बात इनकी कीमत ज्यादा नहीं होती। इसके अलावा ये लंबे टाइम तक बॉडी में नहीं ठहरतीं जैसे स्टेरॉइड।

स्टेरॉइड का यूज करने के बाद आपको पीसीटी (PCT) भी करनी होती है मगर इनके साथ ऐसा नहीं है। ये दवाएं आमतौर पर बॉडी पर कोई लॉन्ग टर्म इफेक्ट नहीं डालतीं जबकि आज लिया गया स्टेरॉइड दस साल भी नुकसान पहुंचा सकता हैै। कुल मिलाकर समझने वाली बात ये है कि इंसानी की पावर को बूस्ट करने का काम करने वाली ये दवाएं भरोसे के लायक होती हैं। इसीलिए इन पर किसी तरह की पावंदी सरकार ने नहीं लगाई है।
बॉडीबिल्डिंग में अश्वगंधा और शतावरी ( Ashwagandha & Shatavari in Bodybuilding)

यहां हम बॉडीबिल्डिंग में अश्वगंधा (Ashwagandha) और शतावरी (Shatavari) के यूज पर बात करेंगे। यह दोनों जड़ी बूटियां लंबे समय से अलग अलग किस्म की परेशानियों और बीमारियों के इलाज में ली जाती हैं। पर अब इन्हें जिम जाने वाले लोग भी ले रहे हैं, खासतौर पर वो लोग जो गेनिंग कर रहे हों। हालांकि जो लोग गेनिंग नहीं कर रहे हैैं वो भी इनका इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इनमें पावर बढ़ाने और इम्यून सिस्टम को ठीक रखने की काबलियत है। ये दोनों ही दवाएं बहुत अच्छी मानी जाती हैं।
शतावरी क्या है और उसके फायदे ( Benefits of Shatavari)

शतावरी (Shatavari) एक चमत्कारी पौधा है जिसे कई रोगों के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है.ख़ासतौर पर सेक्स शक्ति बढ़ाने के लिए इसका विशेष योगदान है. शतावर या शतावरी आपको हमेशा जवान बने रहने में मदद करती है। यह रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाती है।

इससे स्पार्म काउंट बढ़ता है। पेशाब से जुड़े रोगों को ठीक करती है और अच्छी नींद, माइग्रेन व खांसी सहित कई बीमारियों के इलाज में काम आती है। इसकी एक और क्वालिटी है और वो ये है कि इसे खाने से वेट बढ़ सकता है। कुछ लोग इसे साइड इफेक्ट के तौर पर देखते हैं मगर गेनिंग कर रहे जिम जाने वाले लोग इसी साइड इफेक्ट पर फिदा हैं।
अश्वगंधा क्या है और उसके फायदे ( Ashwagandha And Benefits)

अश्वगंधा ( Ashwagandha ) का दवा के रूप में सैकड़ों वर्षों से उपयोग किया जाता रहा है. अश्वगंधा में अनेक चमत्कारी गुण हैं, और कई परेशानियों में यह आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी है. अश्वगंधा का आयुर्वेद में बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है. इसका सही मात्रा में उपयोग करना कई मामलों में फायदेमंद है, इससे मर्दों का स्पेर्म काउंट बढ़ता है। यह शरीर में कमजोरी को दूर करती है।

हड्डियों के लिए काफी अच्छी होती है और फिजिकल व दिमागी थकान को दूर करने में मदद करती है। इसके और भी बहुत सारे फायदे हैं मगर हमारा कोर एरिया बॉडी बिल्डिं ग है इसलिए हम अभी वही बात करेंगे। इसे खाने से जिम में परफॉर्मेंस सुधरती है, रिकवरी में मदद मिलती है।
डोज

अश्वगंधा और शतावरी को साथ में भी लिया जाता है और अलग अलग। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अश्वगंधा और शतावरी का पाउडर एक एक चम्मच। हल्के गर्म दूध के साथ लिया जाता है। इन्हेंव सुबह खाली पेट और रात को गर्म दूध के साथ लिया जाता है। वैसे तो यह जरूरी नहीं है इसे खाली पेट ही लिया जाए मगर तब ये दवाएं ज्यादा अच्छे से काम करती हैं।

गर्मियों में इसका यूज थोड़ा संभलकर करना चाहिए क्योंकि यह गर्म होती हैं। इसलिए लोग पहले आधा आधा चम्म च की डोज लेते हैं और फिर धीरे धीरे डोज बढ़ा लेते हैं।इस बात की उम्मीद न करें कि इन्हेंस लेते ही आपमें बदलाव आना शुरू हो जाएगा। रिजल्ट दिखने में टाइम लगेगा और हां गेनिंग तभी होगी जब आपकी डाइट अच्छी होगी। ये दवाएं पावरफुल होती हैं इसलिए अगर आप इन्हें ले रहेे हैं तो कसरत जरूर करें।
साइड इफेक्ट
ये दोनों दवाएं पावरफुल होती हैं। अगर आपका बीपी हाई रहता है तो अश्वगंधा से परहेज करें।
अगर आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं तो आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए क्योंजकि – अश्वगंधा दूसरी दवाओं को काम करने से रोक सकती है।
अश्वगंधा लेने से कई लोगों को हर समय नींद या सुस्तीर आने लगती है।
इससे पेट की प्रॉबलम भी बढ़ सकती हैं। अगर आपके पेट में एसिड ज्यादा बनता है तो अश्वगंधा परेशानी को बढ़ा सकती है।
किडनी और दिल से जुड़ी बीमारी होने पर शतावरी का यूज डॉक्ट र से पूछे बिना नहीं करना चाहिए
अगर शतावरी खाने के बाद कसी तरह की एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्क्त होती है तो इससे परहेज करें
जिन लोगों को सांस से जुड़े रोग हों वो भी शतावरी का यूज करने से बचें।
अश्वगंधा के साथ खटाई का परहेज करना चाहिए।
शतावरी खाने से कुछ लोगों में चिंता, चक्कर आना, सर घूमना, जी मिचलाना, पेट में गैस और पेट की गड़बड़ी की शिकायत भी पैदा हो सकती है।

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