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सदमा - Grief


सदमा - Grief 
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सदमा लगना क्या है?
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किसी दुखद घटना के बाद लंबे समय तक दुखी या परेशान रहने को सदमा या सदमा लगना कहते हैं। वैसे तो सदमा लगने के मामले कम होते हैं, लेकिन ये व्यक्ति के साथ हुई घटना और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

सदमे से ग्रस्त व्यक्ति अपने दुख में इतना डूबा होता है कि उसे इस बात की खबर ही नहीं होती कि उसके आस-पास क्या हो रहा है और वह कौन है। व्यक्ति को ऐसा लगने लगता है कि भविष्य में उसके लिए कुछ अच्छा नहीं बचा है और उसकी जिंदगी अब बेकार है।

सदमा लगने के लक्षण क्या हैं?

सदमे से ग्रस्त व्यक्ति को कई तरह की समस्याएं व लक्षण अनुभव होते हैं, जैसे घटना के बारे में ही सोचते रहना, जिंदगी का आनंद न ले पाना, घटना के अलावा किसी और चीज पर ध्यान न लगा पाना, लोगों पर भरोसा न कर पाना, घटना या किसी की मौत को स्वीकार न कर पाना और हर चीज से अलगाव होना।

सदमा क्यों लगता है?

सदमा लगने का मुख्य कारण होता है कोई दुखद घटना होना या किसी बहुत ही प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो जाना। कोई भी घटना होने पर अंदर दुख की भावना उत्पन्न होती है, लेकिन जब आप इस भावना से निकल नहीं पाते या खुद को संभाल नहीं पाते, तो आप सदमे में चले जाते हैं।

कई घटनाओं से आपको सदमा लग सकता है, जैसे नौकरी चले जाना, किसी प्रिय रिश्ते का टूटना, बिसजनस में नुकसान होना, पालतू जानवर से दूर हो जाना, कोई सपना टूटना या बहुत अच्छी दोस्ती खत्म हो जाना।

सदमे का इलाज कैसे होता है?

सदमे का तुरंत इलाज करने का कोई तरीका नहीं होता। कोई बड़ी घटना होने पर आप कुछ महीनों तक रोजाना दुख महसूस करते हैं। हालांकि, सदमे से निकलने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते हैं ताकि आपका दुख कम हो और आप हल्का महसूस करें।

सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि किसी परिवार के सदस्य, दोस्त, सलाहकार या डॉक्टर से बात करना आवश्यक है, बात करने से आपका मन हल्का होगा और आप बेहतर महसूस करेंगे। रोजाना का नियम बनाए रखना और पर्याप्त नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सदमे में व्यक्ति अक्सर बहुत थक जाता है और उसे आराम ही आयश्यकता होती है।

संतुलित और पोषण से भरपूर आहार लेने से आपको सदमे से निकलने में काफी मदद मिल सकती है। इसके अलावा अगर आपको महसूस हो रहा है कि आप सदमे से निकल नहीं पा रहे हैं और आपको सलाह की आवश्यकता है, तो किसी अच्छे काउंसलर के पास जाएं और उन्हें अपनी सारी समस्या के बारे में बताएं।


रोगभ्रम - Hypochondria 
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हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य से लेकर चिंता तो रहती ही है, जो कि एक आम बात है। लेकिन कुछ लोगों को बीमार पड़ने का डर कुछ ज्यादा ही रहता है, भले ही उनका स्वास्थ्य अच्छा हो। बीमार पड़ने के डर के कारण उन्हें अपनी रोजाना की लाइफ जीने में भी परेशानी रहती है। यदि किसी व्यक्ति को बीमार पड़ जाने का लगातार डर बना रहता है, जबकि मेडिकल टेस्ट के परिणामों में कुछ नहीं मिल पाता है तो ये रोगभ्रम (हाइपोकॉन्ड्रिया) विकार के लक्षण हो सकते हैं।
इसे हाइपोकॉन्ड्रिया हेल्थ एंग्जायटी डिसऑर्डर भी कहा जाता है, जिसमें मरीज को गंभीर रूप से चिंता रहती है कि कहीं वह बीमार ना पड़ जाए। इस विकार में कोई विशेष लक्षण विकसित नहीं होता है। कुछ मामलों में मरीज को शरीर में हल्की झुनझुनी या किसी गंभीर बीमारी के लक्षण महसूस होने लगते हैं। जबकि टेस्ट करवाने पर वह बीमारी सामने भी नहीं आ पाती है।
रोगभ्रम क्या है - What is Hypochondria
रोगभ्रम क्या होता है?
रोगभ्रम को स्वास्थ्य की चिंता (Health anxiety) भी कहा जाता है। यह एक ऐसा विकार है, जिसमें मरीज ज्यादातर समय यही सोचता रहता है कि वह गंभीर रूप से बीमार हो गया है या फिर बीमार हो सकता है। इस विकार से व्यक्ति का जीवन भी प्रभावित होने लगता है।
रोगभ्रम से ग्रस्त व्यक्ति के दिमाग में ऐसा विचार बैठ जाता है, जिससे उसको लगता है कि उसे कोई गंभीर या घातक रोग हो गया है। ऐसा विचार आने के कारण मरीज गंभीर रूप से चिंता ग्रस्त हो जाता है और यह चिंता मरीज को महीनों से लेकर सालों तक रह सकती है, भले ही टेस्ट करवाने पर कोई भी रोग ना मिले।
रोगभ्रम के लक्षण - Hypochondria Symptoms
रोगभ्रम से क्या लक्षण होते हैं?
खुद को गंभीर रूप से बीमार समझना रोगभ्रम के मरीजों का सबसे आम लक्षण होता है। मरीज आमतौर पर शरीर में किसी प्रकार की सनसनी महसूस होने या फिर त्वचा पर हल्के चकत्ते होने पर ही खुद को गंभीर रूप से रोग ग्रस्त समझने लग जाता है। इसके अलावा रोगभ्रम में निम्न लक्षण भी देखे जा सकते हैं:
यह सोचकर चिंतित रहना कि छोटे-मोटे लक्षण गंभीर रोग का संकेत हो सकते हैं
बार-बार मेडिकल सलाह लेने जाना या फिर डॉक्टरों से बचने की कोशिश करना
बार-बार डॉक्टर बदलते रहना, क्योंकि उसे लगता है कि वे सभी अयोग्य हैं
सामाजिक रिश्ते तनावपूर्ण हो जाना
स्वास्थ्य के बारे में लगातार जानकारियां खोजते रहना
बार-बार अपने शरीर में लक्षणों की जांच करना जैसे किसी प्रकार की गांठ या घाव आदि
लगातार स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर अध्ययन करते रहना
ज्यादातर मरीज अपने लक्षणों व उनके कारणों को मानसिक कारकों से जोड़ना पसंद नहीं करते और हिचकिचाते हैं, जिस वजह से काफी बार वे डॉक्टर से पूरी तरह से मदद नहीं ले पाते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
आपको किसी बीमारी के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द इस बारे में जांच करवाएं यदि आपने पहले नहीं करवाई है। जब डॉक्टर को लगेगा है कि आपको रोगभ्रम विकार है, तो वे आपको मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास भी भेज सकते हैं।
रोगभ्रम के कारण व जोखिम कारक - Hypochondria Causes and Risk Factors
रोगभ्रम क्यों होता है?
इस विकार के सटीक कारणों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन कुछ स्थितियां हैं जो रोगभ्रम का कारण बन सकती हैं, जैसे:
धारणाएं:
शरीर में महसूस होने वाली झुनझुनी को कुछ लोग किसी गंभीर रोग का संकेत समझ लेते हैं।
परिवार:
रोगभ्रम से ग्रस्त व्यक्ति के करीबी रिश्तेदार, जैसे सगे भाई-बहन या माता-पिता आदि को भी यह विकार होने का खतरा अधिक रहता है।
पहले कभी हुई बीमारी:
यदि किसी व्यक्ति को जीवन में स्वास्थ्य संबंधी कोई बुरा अनुभव रहा है, तो उनके मन में यह डर बैठ सकता है कि कहीं यह रोग फिर से ना हो जाए।
अन्य किसी रोग से संबंधित होना:
कुछ अन्य मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जो रोगभ्रम विकार के लक्षणों से संबंधित हो सकती है। हाइपोकॉन्ड्रिया से ग्रस्त ज्यादातर लोगों को डिप्रेशन, पेनिक विकार, ओसीडी या चिंता विकार हो सकता है।
रोगभ्रम होने का खतरा कब बढ़ता है?

यह विकार आमतौर पर व्यक्ति को वयस्क होने के दौरान विकसित हो सकता है और उम्र के साथ गंभीर होता रहता है। इस विकार से ग्रस्त अधिक उम्र वाले लोगों को अक्सर अपनी याददाश्त खोने का डर रहता है।
कुछ कारक हैं, जो रोगभ्रम होने का खतरा बढ़ा देते हैं जैसे:
हर समय जीवन से संबंधित कोई गंभीर तनाव रहना
किसी बीमारी से गंभीर खतरा महसूस करना, जो कि गंभीर नहीं होती है।
बचपन में बहुत अधिक डांट पड़ना
बचपन से लगी कोई गंभीर बीमारी या माता-पिता को कोई गंभीर बीमारी होना
व्यक्तित्व आदतें जैसे बहुत अधिक चिंता करने की आदत होना
स्वास्थ्य से संबंधित इंटरनेट पर बहुत अधिक सर्च करना

रोगभ्रम से बचाव - Prevention of Hypochondria
रोगभ्रम से रोकथाम कैसे करें?
रोगभ्रम विकार की रोकथाम करने का कोई सटीक तरीका नहीं है। यदि आपको स्वास्थ्य से संबंधित लगातार चिंता रहने लगी है और समय के साथ-साथ आपकी चिंता बढ़ रही है, तो आपको डॉक्टर से इस बारे में मदद ले लेनी चाहिए। यदि आप स्वास्थ्य संबंधित चिंता से जीवन में परेशान रहते हैं या फिर अन्य परेशानियां होने लगी हैं, तो ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। हालांकि कुछ सुझाव हैं, जो रोगभ्रम विकार से बचाव करने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं:
यदि आपको किसी भी स्थिति से संबंधित चिंता होती है, तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मदद ले लेनी चाहिए। क्योंकि चिंता विकार गंभीर होने पर आपके सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकता है।
यह पहचान करना सीखें कि आपको तनाव कब महसूस होता है और यह शरीर को किस तरह से प्रभावित कर सकता है। रोजाना तनाव को कम करने का अभ्यास करें और रिलेक्सेशन (शांति प्रदान करने वाली) तकनीकों को अपनाएं।
डॉक्टर द्वारा बताई गई इलाज प्रक्रिया का पालन करें ताकि इसको बार-बार या और बदतर होने से रोका जाए।
रोगभ्रम का परीक्षण - Diagnosis of Hypochondria
रोगभ्रम का परीक्षण कैसे किया जाता है?
स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण व कुछ अन्य टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं। मरीज को किसी प्रकार का ऐसा रोग है जिसका इलाज करना जरूरी है, तो परीक्षण के दौरान डॉक्टर उसका पता लगा लेते हैं और उसके अनुसार लैब टेस्ट व इमेजिंग टेस्ट करवा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आपको विशेषज्ञों के पास भी भेज सकते हैं।
इस विकार का परीक्षण करने के लिए अक्सर निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं:
शारीरिक परीक्षण:
इस टेस्ट के दौरान सामान्य रूप से मरीज के वजन व ऊंचाई की जांच की जाती है, साथ ही शारीरिक महत्वपूर्ण संकेतों की जांच की जाती है जैसे दिल की धड़कनें, ब्लड प्रेशर और शारीरिक तापमान आदि। इसके अलावा शारीरिक परीक्षण के दौरान हृदय व फेफड़ों से निकलने वाली आवाज और पेट की जांच भी की जा सकती है।
मानसिक मूल्यांकन:
इस परीक्षण के दौरान मानसिक रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर आपसे आपके विचार, भावनाओं, सोच व व्यवहार के बारे में बात करेंगे। डॉक्टर इस दौरान आपसे लक्षणों के बारे में भी कुछ सवाल कर सकते हैं, जैसे लक्षण कब शुरु हुए थे, कितने गंभीर हैं और आपको पहले ऐसा कोई लक्षण महसूस हुआ है या नहीं।
लैब टेस्ट:
इसमें मरीज का कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी) किया जाता है, जिसकी मदद से खून में अल्कोहल या अन्य दवाओं के असर की जांच की जाती है। खून का सेंपल लेकर थायराइड फंक्शन टेस्ट भी किया जा सकता है।
रोगभ्रम का इलाज - Hypochondria Treatment
रोगभ्रम का उपचार कैसे किया जाता है?
रोगभ्रम के इलाज का मुख्य लक्षण आपकी स्वास्थ्य से संबंधित चिंता को कम करना और रोजाना किए जाने वाले कार्यों को करने की क्षमता में सुधार करना होता है। इस विकार के इलाज में मानसिक परामर्श, रोग संबंधी शिक्षा देना और दवाएं आदि शामिल हैं।
मानसिक परामर्श:
इस प्रक्रिया को साइकोथेरेपी भी कहा जाता है, जो रोगभ्रम का सबसे मुख्य उपचार विकल्प होता है। साइकोथेरेपी का एक प्रकार कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) भी होता है, जो इस स्थिति के लिए सबसे प्रभावी इलाज साबित हो सकता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद से चिंता से संबंधित व्यवहार को रोक दिया जाता है, जैसे लगातार अपने स्वास्थ्य की जांच करवाना।
रोगभ्रम से संबंधित शिक्षा प्रदान करना:
इस प्रक्रिया को “साइकोएजुकेशन” (Psychoeducation) के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान मरीज व उसके परिवार वालों को रोगभ्रम से संबंधित शिक्षा दी जाती है। ऐसे में वे अच्छे से समझ जाते हैं कि रोगभ्रम क्या है, यह क्यों होता है और इससे होने वाली स्वास्थ्य चिंता से कैसे बचें।
दवाएं:
कुछ प्रकार की दवाएं हैं जो डिप्रेशन व चिंता को कम करके रोगभ्रम के लक्षणों का इलाज करने में मदद करती है। उदाहरण के लिए सेरोटोनी रयूप्टेक इनहिबिटर (SSRIs) जिसमें फ्लोक्सेटिन (Fluoxetine), फ्लूवोक्सामिन (Fluvoxamine) और पेरोक्सेटिन (Paroxetine) आदि शामिल हैं। इसके अलावा यदि आपको कोई अन्य मानसिक या शारीरिक समस्या भी है, तो उसके अनुसार डॉक्टर आपको कुछ अन्य दवाएं भी दे सकते हैं।
घरेलू देखभाल
ज्यादातर मामलों में खुद से उपचार करने पर रोगभ्रम के लक्षणों में सुधार नहीं हो पाता है। हालांकि कुछ ऐसे तरीके हैं, तो इसका इलाज करने में मदद करते हैं, जैसे:
तनाव को कम करने और शांति प्रदान करने वाली तकनीक सीखना:
ऐसी प्रक्रियाएं व तकनीकें सीखना जिनसे तनाव को कम करके शांति मिल सके, जैसे प्रोग्रेसिव मसल रिलेक्सेशन तकनीक जो चिंता को कम करने में मदद करती है।
शारीरिक रूप से गतिशील रहना:
नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करते रहने से आपके मूड पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है, चिंता कम होती है और शरीर के काम करने की क्षमता में सुधार होता है।
गतिविधियों में भाग लें:
अपना खुद का काम करने में मग्न रहने और साथ ही साथ परिवार व अन्य सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेने से मन को शांति मिलती है और साथ ही दूसरों से सहारा भी मिलता है।
शराब व अन्य नशीले पदार्थों का सेवन ना करें:
नशा करने से खुद की देखभाल करना काफी मुश्किल हो सकता है। आप शराब व अन्य प्रकार के नशे की लत को छोड़ने के लिए डॉक्टर से भी मदद ले सकते हैं।
रोगों के बारे में सर्च ना करें:
यदि आप संभावित रोगों के बारे में लगातार इंटरनेट पर खोजते रहते हैं, तो ऐसा करने से भी आपको उलझन या चिंता हो सकती है। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई लक्षण महसूस हो रहा है, जिससे आप चिंतित हैं, तो आप डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेकर उनसे इस बारे में बात कर सकते हैं।
रोगभ्रम की जटिलताएं - Hypochondria Complications
रोगभ्रम से क्या समस्याएं हो सकती हैं?
यह विकार मरीज को बुरी तरह से चिंताग्रस्त और अक्षम (कुछ कर पाने में सक्षम न रहना) बना देता है। रोगभ्रम में व्यक्ति को अपने शारीरिक लक्षणों के कारण का पता लगाने का जूनुन हो जाता है, जिससे उसकी सामान्य लाइफ काफी प्रभावित रहती है। जैसे कि वह रोगभ्रम के कारण बार-बार स्कूल या काम से छुट्टी लेने लग जाता है। मरीज सिर्फ अपने स्वास्थ्य के बारे में ही सोचता है और उसके बारे में बात करता रहता है, जिस कारण से उससे दोस्त व परिवार वाले लोग परेशान हो जाते हैं। कुछ सामान्य जटिलताएं हैं, जो रोगभ्रम से जुड़ी हो सकती हैं जैसे:
पारिवारिक व सामाजिक रिश्तों में परेशानियां पैदा होना, क्योंकि बहुत अधिक चिंता करने से दूसरे लोग परेशान हो जाते हैं।
ठीक से काम ना कर पाना या अक्सर छुट्टी लेना 
रोजाना के काम करने में परेशानी होना, संभावित रूप से अक्षम बन जाना

बार-बार डॉक्टर के पास जाने से या मेडिकल बिल के कारण पैसे संबंधी समस्याएं होना
रोगभ्रम के साथ कुछ अन्य मानसिक रोग भी हो सकते हैं जैसे डिप्रेशन, चिंता विकार और व्यक्तित्व विकार आदि।

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