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यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट


यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट 



मूत्र संक्रमण महिलाओं और पुरुष दोनों में सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. हालांकि फिर भी महिलाओं में इसके होने की संभावना ज्यादा ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र संक्रमण के आयुर्वेदिक उपचारों पर एक नजर डालें ताकि इसे लेकर लोग कुछ जागरूक हो सकें.

क्या है मूत्र संक्रमण का कारण?

जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण-

मूत्र संक्रमण के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती महिलाएं और शादी-शुदा औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग आमतौर पर अधिक पाया जाता है.




यूरिन इन्फेक्शन के आयुर्वेदिक उपचार-
पहला प्रयोग-

मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए आपको पहले प्रयोग के अंतर्गत केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण नामक औषधि के साथ 100 मि.ली. पानी की मात्रा में मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ को अच्छे से पीसकर उसका पेडू पर लेप लगाने से पेशाब खुलकर आता है.

दूसरा प्रयोग-
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.

तीसरा प्रयोग-

मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.
चौथा प्रयोग-

आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.

पाँचवाँ प्रयोग-

इस प्रयोग के लिए आपको सबसे पहले तो 50-60 ग्राम करेले के पत्तों का रस लेना होगा उसके बाद उसमें चुटकी भर हींग मिलायेँ. इस मिश्रण को पीड़ित को देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है इसके अलावा आप चाहें तो उपलब्ध हने पर 100 ग्राम बकरी के कच्चे दूध में 1 लीटर पानी और शक्कर का मिश्रण बनाकर इसे पियें.

अन्य उपचार-

1. नींबू-

नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.

2. पालक-

पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.

3. गाजर-

मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.

4. खीरा ककड़ी-

मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर तीन घंटे के अंतराल पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.

5. मूली के पत्तों का रस-

मूत्र संक्रमण जैसे विकारों में मरीज को मूली के पत्तों का 100 मिली रस आपको नियमित रूप से दिन में 3 बार सेवन कराना होगा. आपको बता दें कि ये एक बेहद प्रभावी और अचूक औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.

6. मट्ठा-

आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.

7. भिंडी-

ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.

8. सौंफ-

सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है.
पेशाब रोकने तथा यौन संबंध बनाने से होता है, यूरिन इंफेक्‍शन.

। यूरिन इंफेक्‍शन फंक्‍शन या बैक्‍टीरिया के अलावा ज्‍यादा देर तक पेशाब रोकने से भी मूत्राशय में बैक्‍टीरिया पनपने से होता है। यूटीआई का संक्रमण अपर यूरिनरी ट्रैक्‍ट और लोअर यूरेनरी ट्रैक्‍ट होता है। बच्‍चों से लेकर बुजुर्गों तक यूरिनरी इंफेक्शन (मूत्राशय संक्रमण) सभी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। मह‍िलाओं में यूआईटी की समस्‍या सबसे ज्‍यादा होती है। इसमें ब्लैडर में सूजन हो जाती है। भाशरीर की स्वच्छता पर ध्यान न देना, इम्यूनिटी कमजोर होना, मूत्र मार्ग में सर्जरी और पानी कम पीना ब्लैडर इंफेक्शन या एक्यूट यूटीआई के लिए जिम्मेदार कुछ प्रमुख कारक हैं।
एक बार यूरिन इंफेक्‍शन होने के बाद शरीर में बैक्‍टीरिया प्रवेश करने के बाद इन जीवाणुओं की संख्या बढ़ने की वजह से भविष्य के लिए काफी घातक साबित हो सकते है। यह एक बेहद खतरनाक ब्लैडर सिंड्रोम है, जिसकी वजह से यूरीन भंडार, जिसे ब्लैडर कहा जाता है, में सूजन होने लगती है। इस दौरान बहुत ही ज्‍यादा यूरिन आता है। लेकिन यूरिन बहुत ही कम मात्रा में आता है। ब्‍लैडर की मांसपेशियां हो सकती है कमजोर यूरिन को बार-बार रोकने से ब्लैडर की मांसपेशियां बहुत कमजोर भी हो जाती हैं। ऐसा होने पर यूरीन की क्षमता पर भी असर पड़ता है। यूरिन इंफेक्‍शन के दौरान ब्‍लैडर की मांसपेशियां बहुत ही कमजोर हो जाती है जिस वज‍ह से आपको कितना ही तेज यूरिन क्‍यों नहीं आ रहा हो लेकिन आप इसे शरीर से बाहर न‍िकाल नहीं पाते है। यौन सम्बन्ध के समय साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना यूरिन इन्फेक्शन होने का एक बड़ा कारण है।



यूरिन में इन्फेक्शन 16 से 35 वर्ष की महिलाओं को अधिक होता है। गर्भावस्‍था में होती है ज्‍यादा समस्‍या गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के बढ़ने के कारण मूत्राशय और मूत्र नली की संकुचन की क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से मूत्राशय के सही प्रकार से काम न कर पाने के कारण यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है। किडनी की समस्या रक्त में मौजूद टॉक्सिन को फिल्टर ना कर पाने की वजह से किडनी में समस्याएं होने लगती है, जो आगे चलकर किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। यूरीन में किसी भी तरह का इंफेक्शन सीधे किडनी पर असर डालता है। किडनी फेल हो जाने की वजह से बॉडी में विषैले पदार्थ घुलने लगते हैं और वे यूरीन के साथ भी बाहर नहीं निकल पाते। यूरिन इंफेक्‍शन के लक्षण अगर लगातार आपका यूरिन का रंग गहरा हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपका शरीर संक्रमण के घेरे में आ रहा है। यूरिन का रंग डार्क या खूनी होना।

यूरिन से बहुत ज्यादा गंदी बदबू आना और इसे रोकना मुश्किल होना। पेट के निचले हिस्से में दर्द और प्राइवेट पार्ट में खुजली होना। यूरिन के दौरान जलन होना। पुरुषों में यूरिन इंफेक्‍शन पुरुषों में डायबिटीज या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण यूरिन में इन्फेक्शन हो सकता है। इन बातों का ध्‍यान रखें पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। इसके अलावा नारियल पानी या जूस आदि तरल पदार्थ पीएं। यूरिन को रोक कर न रखें। इससे संक्रमण का खतरा और भी बढ़ सकता है। प्राइवेट पार्ट की सफाई रखें। उसे सूखा रखें और टिशू का इस्तेमाल करें। मसालेदार चीजों का सेवन करने से बचें और कैफीन की अधिक मात्रा न लें। आधा गिलास चावल के पानी में चीनी मिलाकर पीने से यूरिन में होने वाली जलन से छुटकारा मिलता है। बादाम की 5 गिरी में 7 छोटी इलायची और मिसरी डालकर पीस लें। फिर इसे पानी में घोलकर पीएं। इससे दर्द और जलन कम होती है।



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