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प्यार का विज्ञान:


प्यार का विज्ञान: प्यार की शुरुआत वासना से होती है
Science of love: Story of lust

प्यार के पहले एहसास का अनुभव संभवत: दुनिया का सबसे रोमांचक एहसास होता है. जैसे ही आपके फ़ोन की घंटी बजती है, आप यह सोचकर बेहद रोमांचित हो जाते हैं कि हो सकता है यह आपके पार्टनर का फ़ोन हो. उसकी आवाज़ सुनते ही पेट में तितलियां फड़फड़ाने लगती हैं. उसके दीदार की सोच कर ही आप प्यार के एहसास से भर जाते हैं. तीन खंडों के लेख में हमने पता लगाने की कोशिश की, क्या होता है आपके दिमाग़ के साथ जब आप प्यार में होते हैं. कौन-से केमिकल्स ब्रेकअप और झगड़े के दौरान हमारे दिमाग़ पर राज करते हैं. एक्स्पर्ट्स से बात करके फ़ेमिना ने प्यार के विज्ञान को खंगाला. 

प्यार के तीन प्रकार 
फ़िशर और रेटगर्स यूनिवर्सिटी, यूएस के वैज्ञानिकों की टीम ने रोमैंटिक प्यार को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है: वासना, आकर्षण और लगाव. हर तरह के प्यार को अलग-अलग तरह के हार्मोन्स नियंत्रित करते हैं. इसका अर्थ है कि भले ही ये तीनों भावनाएं या प्रकार आपसी समन्वय के साथ काम करती हैं, ऐसा भी हो सकता है कि व्यक्ति इनमें से किसी एक का ही अनुभव करे. कहने का मतलब है कि लगाव, आकर्षण और वासना की हमारी भावनाएं अलग-अलग लोगों के लिए हो सकती हैं. आज हम वासना के बारे में बात करते हैं.

वासना, जिससे होती है प्यार की शुरुआत 
वासना ही वह चीज़ है, जो प्यार की शुरुआत के लिए ज़िम्मेदार होती है. महिला और पुरुष सबसे पहले एक-दूसरे की ओर सेक्शुअली अट्रैक्ट होते हैं. यह बेहद स्वाभाविक प्रक्रिया है, क्योंकि इसी के चलते तो सभी जीवों का अस्तित्व बना हुआ है. सही पार्टनर से हमारी सेक्शुअल संतुष्टि के लिए काम करनेवाली यह भावना, हमारे क्रमिक विकास (इवॉल्यूशन) के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इसी के चलते संतानोत्पत्ति संभव है. वासना के लिए सेक्स हार्मोन्स टेस्टेस्टेरॉन और ऑस्ट्रोजन की भूमिका काफ़ी अहम होती है. हालांकि इन दोनों हार्मोन्स को क्रमश: आमतौर पर ‘पुरुष’ और ‘महिला’ हार्मोन कहा जाता है, लेकिन ये दोनों महिला और पुरुष को उत्तेजित करने के लिए बेहद ज़रूरी हैं. सेक्सोलॉजिस्ट डॉ प्रकाश कोठारी के अनुसार,‘‘ऑस्ट्रोजन महिला के नारीपरक गुणों को बढ़ाने में मददगार है, तो वहीं टेस्टेस्टेरॉन की उसके यौन अंगों को उत्तेजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है.’’ एक्स्पर्ट्स के मुताबिक़, प्यार में वासना वाला स्टेज पार्टनर से मिलते ही सक्रिय हो जाता है और अगले दो वर्षों तक बना रहता है. 
वासना के वश में आकर यदि आप सेक्स संबंध बनाने जा रहे हैं आपके दिमाग़ में कुछ बातें क्लीयर होनी चाहिए. सेक्स संबंध बनाने की पहल करते समय दिमाग़ में तीन ‘आर’ होने चाहिए-राइट (अधिकार), रिस्पॉन्सिबिलिटी (ज़िम्मेदारी) और रिस्पेक्ट (सम्मान). आपको अपने पसंद के व्यक्ति से सेक्स करने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही आपको अपने तथा पार्टनर के प्रति ज़िम्मेदार होना होगा और एक-दूसरे का सम्मान भी करना होगा. 
क्या होते हैं वासना के लक्षण?
* किसी व्यक्ति के प्रति सेक्शुअली उत्तेजित महसूस करते हैं, जो कि पूरी तरह उसके शारीरिक बनावट के चलते हो.
* आपके लिए केवल उसका लुक ही महत्वपूर्ण हो. 
* आप दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, पर ज़रूरी नहीं है कि आप अच्छे दोस्त भी हों.
* आपकी रुचि केवल सेक्स में है, बातचीत में नहीं.

प्यार का विज्ञान : लगाव को क्यों कहते हैं प्यार का सबसे अच्छा प्रकार?

अपने वर्ष 2014 के विख्यात टेड टॉक में अमेरिकी ऐन्थ्रोपोलॉजिस्ट (मानवविज्ञानी) हेलन फ़िशर, जो कि प्यार और आकर्षण की बायोलॉजी की जानी-मानी विशेषज्ञ हैं, ने प्यार में ख़ुशी-ख़ुशी गिरफ़्तार लोगों पर किए गए अपने पहले अध्ययन के बारे में बताया था. हेलन फ़िशर के अनुसार रिसर्चर्स ने प्यार में गिरफ़्तार लोगों के मस्तिष्क के वेंट्रल टेग्मेंटल एरिया (वीटीए) के ए10 सेल्स में गतिविधि देखी. ए10 सेल्स डोपामाइन बनाने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. डोपामाइन वह केमिकल है, नर्व सेल्स जिसके इस्तेमाल से एक-दूसरे को सिग्नल भेजते हैं. वीटीए हमारे मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम का वह हिस्सा है, जो वांछित अनुभव करने, प्रेरित महसूस करने, भूख लगने, चरमोत्कर्ष, प्यार से जुड़ी गहन भावनाओं से संबंध रखता है. यह दिमाग़ का वही हिस्सा है, जो नशीली दवाओं का सेवन करने से सक्रिय हो जाता है और प्यार की शुरुआती भावनाओं के अंकुरित होते समय भी. शायद यही कारण है कि रोमैंटिक एहसास और प्यार, नशे की तरह आपको अपना आदी बना लेता है. 
लेकिन इसके पहले कि आप किसी व्यक्ति विशेष के आदी हो जाएं, आपका दिमाग़ अपने स्तर पर कई रिसर्च करता है. वह इस बात का आकलन करने की कोशिश करता है कि वह व्यक्ति बतौर पार्टनर जीवनभर आपका साथ निभाने लायक है या नहीं. पहली नज़र में जीवनभर का प्यार हो जानेवाली रोमैंटिक फ़िल्मों के इतर, जहां नायक-नायिका को एक-दूसरे से नज़रें मिलते ही प्यार हो जाता है, असल ज़िंदगी में असली वाले प्यार के होने की प्रक्रिया काफ़ी अलग और जटिल होती है. डॉ दिनेश भुगरा, सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर, मेंटल हेल्थ ऐंड कल्चरल डायवर्सिटी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइकियाट्री, साइकोलॉजी ऐंड न्यूरोसाइंस, किंग्स कॉलेज, लंदन इसे स्पष्ट करते हैं,‘‘रूमानी प्यार कई चीज़ों से प्रभावित होता है, शारीरिक आकर्षण से लेकर भावनात्मक अटैचमेंट तक महत्वपूर्ण कारक हैं. इसके अलावा सांस्कृतिक व सामाजिक मानक भी महत्वपूर्ण हैं. भारत के संदर्भ में अभी भी ज़्यादातर जोड़ों की अरेंज्ड मैरिज होती है, उन्हें आगे चलकर धीरे-धीरे प्यार हो जाता है. एक जैसा नज़रिया, पारिवारिक पृष्ठभूमि जैसी बातें आपसी लगाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. पहली नज़र का प्यार होता है, पर ऐसे मामले बहुत कम होते हैं.’’ 
प्यार के विज्ञान की तीसरी कड़ी में आज हम बात करने जा रहे हैं प्यार के उस स्तर की, जब वासना और आकर्षण का समय ख़त्म हो चुका होता है. ऐसे में संबंधों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हो जाती है लगाव की भूमिका. आइए, लगाव के विभिन्न पहलुओं पर नज़र डालते हैं. 




लगाव को क्यों माना जाता है सबसे अच्छे प्रकार का प्यार? 
यह तीसरा और सबसे अच्छे तरह का प्यार है. लंबे समय तक चलनेवाले रिश्ते में लगाव सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. इसमें माता-पिता और बच्चे का जुड़ाव, दोस्ती भी शामिल है. यही वह चीज़ है, जो पार्टनर की ख़ामियों के बावजूद उनके साथ जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करती है. यह भावना मुख्य रूप से ऑक्सिटोसिन और वैसोप्रेसिन से संचालित होती है और यही अपने पार्टनर के प्रति अभिभावकों वाली भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित करती है. ठीक उसी तरह जैसे सेक्स, ब्रेस्टफ़ीडिंग और बच्चे के जन्म के दौरान हाइपोथलैमस बड़ी मात्रा में डोपामाइन, ऑक्सिटोसिन प्रोड्यूस करता है. डॉ प्रकाश कोठारी कहते हैं,“कई बार शारीरिक आकर्षण को लोग, एक-दूसरे के प्रति प्यार समझ बैठते हैं. लेकिन यह समझ नहीं पाते कि आकर्षण केवल वासना के जीवित रहने तक टिक पाएगा. लोगों को इस बात को लेकर स्पष्ट होना चाहिए कि क्या वे उस व्यक्ति से इसलिए प्यार करते हैं, क्योंकि उन्हें पसंद करते हैं या फिर वे उन्हें पसंद करते हैं, क्योंकि वे उनसे प्यार करते हैं. प्यार की भावना स्नेह, उत्साह, प्रतिबद्धता, सुरक्षा, परवाह, सच्चाई इत्यादि से जुड़ी है.” रोचक यह है कि पुरुषों और महिलाओं में जुड़ाव की भावना के उत्प्रेरक अलग-अलग होते हैं. ढेरों अध्ययन के मुताबिक़, पुरुष एक-दूसरे के आसपास या कहें, अगल-बगल होने पर भावनात्मक जुड़ाव विकसित करते हैं, तो वहीं महिलाएं आमने-सामने से बात करने पर आत्मीयता महसूस करती हैं.
क्या होते हैं लगाव के लक्षण? 
* आप किसी व्यक्ति के प्रति बहुत अनुराग और सौहार्दता महसूस करते हैं.
* आप अपनी सबसे गुप्त भावनाएं भी उनसे साझा कर सकते हैं.
* उनकी मौजूदगी में महफ़ूज़ महसूस करना और उनसे प्रतिबद्ध रहने की भावना आना.
* उनके परिवार और दोस्तों से मिलने की इच्छा होना.
यह भावना टिकेगीः यदि आपने शुरुआती दोनों स्टेजेस को पार कर लिया है, तो लंबे समय तक.

कैसे बनाएं रखें प्यार का उत्साह?
समय के साथ एकरसता, पार्टनर की तरफ़ से प्रतिक्रिया में कमी और बढ़ते सामाजिक व फ़ायनैंशियल तनाव के कारण कपल के बीच का शारीरिक आकर्षण मंद पड़ सकता है. एक ही जगह पर, एक ही तरह से उसी व्यक्ति के साथ समान चीज़ें करना उबाऊ हो सकता है. इसलिए अपने रिश्ते की बीच के उत्साह को जगाने के लिए डॉ कोठारी ये टिप्स देते हैं:
* अनप्लैन्ड वेकेशन पर निकल जाएं. * अपने पार्टनर को ग्रांटेड न लें. * कामुक खेल खेलें, लेकिन सेक्स न करें. यदि आप अपने रिश्ते की बीच की गर्माहट को बढ़ाना चाहते हैं, तो दो दिनों तक फ़ोरप्ले तो करें, लेकिन सेक्स न करें. * इसके साथ अपने पार्टनर से अपनी पसंद और नापसंद के बारे में बात करें.
अंततः वासना, आकर्षण या लगाव यह तीनों संभवतः हार्मोन्स का खेल हों, लेकिन हर एक भावना इंसान की बुनियादी ज़रूरत से उभरती है, वह है इंसान से जुड़ना. तरु कपूर, जनरल मैनेजर, टिंडर, इंडिया कहती हैं,“इंसान से जुड़ने की यह ज़रूरत सार्वभौमिक है और निर्विवाद सत्य है. यह हमेशा से रही है और आगे भी रहेगी.”


प्यार का विज्ञान : क्या अहमियत है प्यार में आकर्षण की?
कहते हैं प्यार पूरी दुनिया को बदल देता है. जिन लोगों ने प्यार किया होगा, वे इससे सहमत होंगे. जिन लोगों को नया-नया प्यार होता है, उनकी हालत किसी अलग ही दुनिया से आए एलियन जैसी हो जाती है. वे हर दिन, हर पल ख़ुश रहते हैं (सोमवार की सुबह भी), फ़ोन पर बतियाते हुए उन्हें दिन-रात नहीं सूझता. उनके हर क़दम महबूब के मकान की ओर जाने को मचलते हैं. कुल मिलाकर हमारे कहने का मतलब है, प्यार में डूबे इंसान को पहचानना बहुत ज़्यादा मुश्क़िल नहीं होता. उसके चेहरे से झलकनेवाली ख़ुशी सबकुछ बयां कर देती है. आख़िर क्यों प्यार में पड़ते ही इंसान का बर्ताव बावरों जैसा हो जाता है? क्यों वह अपने प्रेमी या प्रेमिका को पाने के लिए, उसके साथ रहने के लिए रोमियो और जूलिएट की तरह जान की भी परवाह नहीं करता? क्यों आसपास कई और आकर्षक महिलाओं और पुरुषों के होते हुए भी, उसका दिल सिर्फ़ एक उसी इंसान के लिए धड़कता है? इन सभी सवालों के जवाब छुपे हैं विज्ञान में. 
हम यह तो जानते ही हैं कि प्यार के तीन प्रकार होते हैं-वासना, आकर्षण और लगाव. आप वासना के कारण इस सिरीज़ की पहली कड़ी में पढ़ चुके हैं, आइए आकर्षण की पड़ताल करते हैं.
आकर्षण, जो बनाता है रिश्तों को मज़बूत 
आकर्षण व्यक्ति को अपनी रुचि के व्यक्ति से संबंध बनाने के प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करता है. इस प्रक्रिया में डोपामाइन और नोरेपिनाफ्रिन जैसे केमिकल्स शामिल होते हैं. ये जिन्हें हम चाहते हैं, उनके साथ ज़्यादा वक़्त गुज़ारने और सेक्स करने के लिए प्रेरित करते हैं. आकर्षण का स्टेज व्यक्ति की तंदुरुस्ती में भूमिका निभानेवाले हार्मोन सेरोटोनिन जिसे ‘हैप्पी केमिकल’ भी कहा जाता है, के स्तर को कम करता है. यह हार्मोन मूड और खाने की इच्छा से और ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिस्ऑर्डर से पीड़ित लोगों से भी जुड़े होने के लिए जाना जाता है. इस बात ने वैज्ञानिकों को इस अनुमान पर पहुंचाया कि प्यार के पहले स्तर पर तीव्र चाहत के पीछे की वजह सेरोटोनिन हो सकता है. ज़्यादातर रोमैंटिक कॉमेडी फ़िल्मों में इसी तरह का प्यार दिखाया जाता है. गुड़गांव के सायकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप काउंसलर वीर शर्मा के अनुसार,“डिग्री, पैसे, शारीरिक आकर्षण इत्यादि सतही चीज़ों पर आधारित रिश्ते समय के साथ कमज़ोर पड़ने लगते हैं. किसी भी रिश्ते के लंबे समय तक टिके रहने के लिए दोनों लोगों में एक-दूसरे को समझने के लिए धैर्य और भावनात्मक स्तर पर जुड़ने की क्षमता होना चाहिए.” रोमैंटिक जुड़ाव में वासना और आकर्षण नहीं होता. यानी कि ऐसा हो सकता है कि आप किसी व्यक्ति के प्रति शारीरिक रूप से आकर्षित महसूस करें, लेकिन फिर भी उनके लिए आपके दिल में प्यार की भावना न हो.
क्या होते हैं आकर्षण के लक्षण? 
* आप दोनों का एटिट्यूड और दुनिया को देखने का नज़रिया एक जैसा है.
* आपको अपने से बिल्कुल विपरीत पर्सनैलिटी वाले व्यक्ति के साथ भी पूर्णता का एहसास होता है.
यह भावना टिकेगीः 18 महीने से तीन साल तक.
पर दिल लगाने के ख़ामियाज़े भी हैं 
प्यार में होने पर बढ़नेवाले हार्मोन्स के कुछ नुक़सान भी हैं. उदाहरण के लिए सेक्शुअल अराउज़ल हमारे दिमाग़ के उस हिस्से को एक तरह से बंद कर देता है, जो पेचीदा विचार-विमर्श, आत्म चेतना और तर्कपूर्ण व्यवहार को नियंत्रित करता है. इसमें दिमाग़ का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स भी शामिल है, जो हमारे व्यक्तित्व के अभिव्यक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार को संचालित करता है. हमें भावनात्मक रूप से अपने पार्टनर पर निर्भर महसूस कराने के लिए डोपामाइन ज़िम्मेदार है. यही वजह है कि ब्रेक-अप के बाद हमें लगता है कि हमारा सपोर्ट सिस्टम बिखर चुका है. पार्टनर के साथ संबंध बनाने में मदद करनेवाले ऑक्सिटोसिन हमें समान संस्कृति व सभ्यता से न होनेवाले लोगों से विरक्त महसूस कराता है. ब्रेक-अप के दौरान दिमाग़ मुख्य रूप से तनाव पैदा करनेवाला हार्मोन कॉर्टिसोल रिलीज़ करता है. इस स्तर पर दिमाग़ का वह हिस्सा जो शारीरिक दर्द से जुड़ा है, जागृत हो जाता है और हमें शरीर के टूटने जैसा दर्द महसूस कराता है.

प्यार का विज्ञान  क्या अहमियत है प्यार में आकर्षण की?

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