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डिलीवरी के बाद वजन और पेट कम करने के लिए योग


डिलीवरी के बाद वजन और पेट कम करने के लिए योग 
(delivery ke baad vajan aur pet kam karne ke liye yoga)
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गर्भावस्था के बाद शिशु की देखभाल में व्यस्त जीवनशैली की वजह से मां को अपना ख्याल रखने का समय नहीं मिलता। इस वजह से अक्सर उसे कुछ शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टर कहते हैं कि प्रेगनेंसी के बाद महिलाओं के शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने में काफी समय लगता है, इसीलिए योग प्रसव के बाद महिलाओं के लिए शारीरिक और मानसिक समस्याओं से लड़ने का सबसे अच्छा उपाय है। इस ब्लॉग में हम आपको डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) के लाभ के बारे में बता रहे हैं
 -1. डिलीवरी के कितने दिनों बाद योग कर सकते हैं? (delivery ke kitne dino baad yoga kar sakte hai)2. डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? (delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)
नॉर्मल डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? (normal delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)
सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? (cesarean delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)3. प्रसव के बाद योग करने के क्या लाभ हैं? (delivery ke baad yoga karne ke kya fayde hai)4. क्या डिलीवरी के बाद योग करने से वजन कम होता है? (kya delivery ke baad yoga karne se vajan kam hota hai)5. प्रसव के बाद कौन से योग करने चाहिए? (delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)
नॉर्मल डिलीवरी के बाद कौन से योग करने चाहिए? (normal delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)
सिजेरियन डिलीवरी के बाद कौन से योग करने चाहिए? (cesarean delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)6. डिलीवरी के बाद योग करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें (delivery ke baad yog shuru karne se pehle kin bato ka dhyan rakhe) 1. डिलीवरी के कितने दिनों के बाद योग कर सकते हैं? (delivery ke kitne dino ke baad yoga kar sakte hai)डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या सिजेरियन, दोनों ही स्थिति में डॉक्टर आपको योग की सलाह देते हैं, लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद योग करने से महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए अगर आपकी नॉर्मल डिलीवरी हुई है तो आप प्रसव के छह सप्ताह बाद से योग अभ्यास शुरू कर सकती हैं। वहीं सिजेरियन डिलीवरी के मामले में आपको और अधिक समय लग सकता है। योग अभ्यास शुरू करने के पहले एक बार डॉक्टर से बात कर लें।2. डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? (delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)हमारे ऋषि मुनि हमें सदियों से योग का महत्व बताते आए हैं और वर्तमान समय में डॉक्टर्स भी योग को स्वस्थ रहने का एक महत्वपूर्ण तरीका मानते हैं, क्योंकि डिलीवरी के बाद योग करने से आपको कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों से राहत मिल सकती है। यहां डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) को दो भागों में बांटा गया है। नीचे नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करना क्यों जरूरी है, 



यह बताया गया है।नॉर्मल डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? (normal delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)नॉर्मल या सामान्य डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करना मां की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नॉर्मल डिलीवरी के दौरान महिलाओं के पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और यह खिंचाव डिलीवरी के बाद भी रह जाता है। एेसे में नॉर्मल डिलीवरी के बाद योग के विभिन्न आसनों की मदद से आपके पेट में खिंचाव, दर्द और अन्य कई शारीरिक समस्याएं कम हो सकती है। नियमित योग से आपकी मांसपेशियां फिर से अपने पुराने आकार में लौट आती हैं और मजबूत बनती है। इसके अलावा महिलाएं तनाव मुक्त होने के लिए भी डिलीवरी के बाद योग कर सकती हैंसिजेरियन डिलीवरी के बाद योग क्यों जरूरी है? 


(cesarean delivery ke baad yoga kyun zaroori hai)नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को कुछ ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सिजेरियन डिलीवरी के मामले में महिलाएं घाव और टांकें सूखने के बाद ही योग कर सकती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई असामान्य बदलाव होते हैं, जो अक्सर दवाइयों और गोलियों से ठीक नहीं हो पाते हैं, इसीलिए विशेषज्ञ महिलाओं को सिजेरियन प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने की सलाह देते हैं।3. प्रसव के बाद योग करने के क्या लाभ हैं? (delivery ke baad yoga karne ke kya fayde hai)प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने से महिलाओं को कई प्रकार के लाभ होते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि डिलीवरी के बाद टांकें सूखने और शिशु के जन्म के कम से कम छह महीनों के बाद ही योग किया जाना चाहिए। डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) के लाभ, दोनों प्रकार की डिलीवरी में लगभग एक समान होते हैं।
डिलीवरी के बाद योग करने से प्रसव पीड़ा से उबरने में राहत मिलती है : प्रसव के बाद कई महीनों तक महिलाएं प्रसव पीड़ा से उबर नहीं पाती है और उन्हें प्रसव पीड़ा जैसा दर्द महसूस होता है। एेसे में डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga), उन्हें प्रसव पीड़ा से उबारने में सहायक होता है।
डिलीवरी के बाद योग करने से मांसपेशियां मजबूत होती है : गर्भावस्था में शिशु के विकास के साथ गर्भाशय का आकार बढ़ता रहता है जिससे महिलाओं की मांसपेशियों मेंं खिंचाव आ जाता है। डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने से आपकी मांसपेशियां टोन हो जाती है।
डिलीवरी के बाद योग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है : अक्सर प्रसव के बाद महिलाओँ में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। योग विशेषज्ञ कहते हैं कि डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
डिलीवरी के बाद योग करने से तनाव कम होता है : गर्भावस्था के बाद महिलाओं में डिलीवरी के बाद तनाव होना आम बात है और इसे कम करने के लिए प्रसव के बाद योग को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। महिलाओं में अधिक तनाव होने पर विशेषज्ञ भी डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) अभ्यास की सलाह देते हैं।
डिलीवरी के बाद योग करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है : कई बार एेसा होता है कि डिलीवरी के बाद भूख न लगने की वजह से पाचन क्रिया पर इसका बुरा असर पड़ता है। प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने से आपको भूख भी लगेगी और आपकी पाचन क्रिया बेहतर होगी।
डिलीवरी के बाद योग करने से पीठ और कमर दर्द से राहत मिलती है : योग विशेषज्ञ कहते हैं कि नौ महीनों तक शिशु को गर्भ में रखने के बाद अक्सर महिलाओं को डिलीवरी के बाद पीठ और कमर दर्द की समस्या हो जाती है। प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) के विभिन्न आसनों में सेतुबंधासन यानी ब्रिज पोज करने से आपको पीठ और कमर दर्द से राहत मिल सकती है।
डिलीवरी के बाद योग करने से थकान कम होती है : शिशु के जन्म के बाद उसकी देखभाल से महिलाओं को अतिरिक्त थकान होती है। रोज़ाना योगाभ्यास करने से आपकी थकान कम हो सकती है।4. क्या डिलीवरी के बाद योग करने से वजन कम होता है? (kya delivery ke baad yoga karne se vajan kam karne se hota hai)प्रेगनेंसी के दौरान बढ़े वजन को कम करना काफी मुश्किल होता है और प्रसव के बाद अक्सर महिलाओं को अपने वजन की चिंता सताती है। नियमित रूप से योग अभ्यास करने पर महिलाओं को वजन बढ़ने की परेशानी से मदद मिल सकती है। डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) अभ्यास से धीरे-धीरे मांसपेशियां मजबूत होती है और ये पेट से अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करता है। यह एक धीमी लेकिन प्रभावी प्रक्रिया होती है और इसे गर्भावस्था के बाद वजन कम करने के लिए आदर्श माना जाता है। डिलीवरी के बाद पेट कम करने के लिए व्हील पोज़ और हाफ व्हील पोज़ जैसे आसन लाभकारी होते हैं, क्योंकि इन दोनों आसनों को करते समय पेट पर अत्यधिक दबाव पड़ता हैं, जिससे पेट की मांसपेशियां टोन होती है।।5. प्रसव के बाद कौन से योग करने चाहिए? (delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) करना विभिन्न प्रकार से फायदेमंद होता है। लेकिन नॉर्मल डिलीवरी या सिजेरियन डिलीवरी, दोनों ही स्थिति में आपको अपने शरीर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योगासन करना चाहिए। नीचे नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी होने पर किए जाने वाले योगासनों के बारे बताया जा रहा है।नॉर्मल डिलीवरी के बाद कौन से योग करने चाहिए? (normal delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)
व्याघ्रासन (vyaghrasan / tiger pose) : सामान्य प्रसव के बाद रोजाना व्याघ्रासन करने से आपके पैरों की मांसपेशियों को एेंठन से राहत मिलती है और इससे पेट की मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है। व्याघ्रासन करने से खून का प्रवाह भी सुचारू रूप से हो पाता है।
भुजंगासन (bhujangasan / cobra pose) : डिलीवरी के बाद लगभग हर महिला को पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या होती है। रोजाना भुजंगासन करने से पीठ व पेट के निचले हिस्से के दर्द और कंधों के दर्द से राहत मिलती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे महिलाओं के पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों तक खून का प्रवाह अच्छी तरह से होता है।
कपोतासन (kapotasan / pigeon pose) : आमतौर पर प्रसव के बाद नियमित रूप से कपोतासन करने से महिलाओं के शरीर के निचले हिस्से की अकड़न कम होती है और इससे उनकी कमर व कुल्हों के निचले हिस्से में लचीलापन आता है। इसके अलावा सामान्य प्रसव के बाद रोजाना कपोतासन करने से महिलाओं में मूत्राशय संक्रमण का खतरा कम होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्रसव के बाद होने वाले तनाव को भी कम करता है।
चाइल्ड पोज (child pose) : डिलीवरी के बाद चाइल्ड पोज आसन करने से जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती है। रोजाना चाइल्ड पोज आसन करने से प्रेगनेंसी के बाद सूजन की समस्या कम होती है और टखनों को आराम मिलता है। यह तनाव और थकान को कम करने के लिए भी फायदेमंद होता है।
उष्ट्रासन (ustrasana / camel pose) : प्रसव के बाद उष्ट्रासन (delivery ke baad yoga) करने से शरीर के निचले हिस्से और कंधों के खिंचाव से राहत मिलती है। इसके अलावा उष्ट्रासन करने से प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ा वजन और पेट की चर्बी कम होती है। यह अस्थमा, थायराइड और स्पॉन्डलाइटिस के लिए भी फायदेमंद होता है।
अधोमुख श्वानासन (adhomukh swanasan / quarter dog pose) : अधोमुख श्वानासन पीठ के दर्द को कम करने में सहायक होता है, यह शरीर की ढीली पड़ी मांसपेशियों को सख्त या मजबूत बनाने में मदद करता है।
त्रिकोणासन (trikonasan / triangle pose) : प्रसव के बाद महिलाओं के पेट में जमी चर्बी को दूर करने में त्रिकोणासन असरदार होता है। रोजाना त्रिकोणासन करने से महिलाओँ को तनाव और घबराहट से राहत मिल सकती है।
गरुड़ासन (garudasan / eagle pose) : रोजाना गरुड़ासन करने से मांसपेशियों में खिंचाव और जोड़ों का दर्द कम होता है। यह घुटनों, टखनों और कलाइयों के दर्द को कम करता है। गरुड़ासन, अवसाद एवं तनाव कम करने में भी सहायक होता है।
अर्धमत्स्येन्द्रासन (ardha matsyendrasana / half-spinal twist pose) : गर्भावस्था के बाद अर्धमत्स्येन्द्रासन करने से रीढ़ की हड्डी का दर्द और पीठ का दर्द कम होता है। रोज़ाना इस आसन को करने से शरीर के सभी अंगों में रक्त का प्रवाह ठीक से होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि नियमित अर्धमत्स्येन्द्रासन करने से मन स्थिर रहता है।
सेतुबंधासन (setubandhasan / bridge pose) : महिलाएं प्रसव के बाद चिंता और तनाव को कम करने के लिए सेतुबंधासन कर सकती हैं। नियमित रूप से सेतुबंधासन करने से मन को शांति मिलती है और यह सिर दर्द कम करने में भी मदद करता है।सिजेरियन डिलीवरी के बाद कौन से योग करने चाहिए? (cesarean delivery ke baad kon se yoga karne chahiye)
अग्निसार क्रिया (agnisaar kriya) : सिजेरियन डिलीवरी के बाद अग्निसार क्रिया करने से तनाव कम होता है। इसके अलावा यह शरीर की पाचन क्रिया को सुचारू बनाता है और कब्ज़ की समस्या को दूर करने में मदद करता है।
कंधरासन (kandharasana) : सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को अक्सर पेल्विक क्षेत्र में असहजता महसूस होती है। रोज़ाना कंधारासन करने से पेल्विक क्षेत्र और गर्भाशय में होने वाली असहजता कम होती है।
भुजंगासन (bhujangasan / cobra pose) : सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगभग हर महिला को पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है। रोज़ाना भुजंगासन करने से पीठ व पेट के निचले हिस्से के दर्द और कंधों के दर्द से राहत मिलती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे महिलाओं के पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों तक खून का प्रवाह अच्छी तरह से होता है।
उर्ध्व प्रसरिता पादासन (urdhva prasarita padasana) : उर्ध्व प्रसरिता पादासन, सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं के शारीरिक गठन को वापिस लाने में मदद करता है। इसके अलावा रोजाना उर्ध्व प्रसरिता पादासन करने से पीठ के निचले हिस्से का दर्द कम होता है।
अधोमुख श्वानासन (adhomukh swanasan / quarter dog pose) : अधोमुख श्वानासन, सिजेरियन डिलीवरी के बाद पीठ दर्द को कम करने में सहायक होता है। यह शरीर की कमज़ोर व ढीली मांसपेशियों को सख्त और मजबूत बनाने में मदद करता है।
ताड़ासन (tadasan / mountain pose) : सिजेरियन डिलीवरी के बाद नियमित रूप से ताड़ासन करने से आपके पूरे शरीर को लाभ मिलता है। यह शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और शरीर में रक्त प्रवाह को सुचारू बनाने में मदद करता है।
वृक्षासन (vriksasan) : अगर सिजेरियन डिलीवरी के बाद आप ऊपर बताए गए आसनों को करने में सक्षम हो जाती हैं तो इसके बाद आप वृक्षासन कर सकती है। वृक्षासन, आपके पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।6. डिलीवरी के बाद योग करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें (delivery ke baad yog shuru karne se pehle kin bato ka dhyan rakhe)डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने से पहले आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए -
डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ले लें।
रोजाना योग करने के लिए समय निर्धारित करें।
प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) शुरू करने के पहले आरामदायक कपड़े पहनें।
डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने के लिए किसी योगा मैट या चटाई का उपयोग करें।
प्रसव के बाद योग (delivery ke baad yoga) करने के दौरान संतुलित आहार लें।
खाली पेट योग करें, इससे योग ज्यादा असरदार होता है।
अगर किसी व्यायाम से पेट पर ज़ोर पड़ता है, तो उसे टांकें ठीक होने के बाद ही करें।
बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं की व्यस्त दिनचर्या की वजह से उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देने का समय नहीं मिलता है। एेसी परिस्थिति में कई महिलाएं अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने के लिए प्रसव के बाद योग करने को प्राथमिकता देती हैं। हमारे ब्लॉग में डिलीवरी के बाद योग (delivery ke baad yoga) से जुड़ी कई अहम बातें बताई गई हैं जिनसे आप न केवल अपनी सेहत का संपूर्ण ख्याल रख सकती हैं बल्कि पहले की तरह स्वस्थ भी रह सकती हैं। नॉर्मल या सिजेरियन डिलीवरी होने की स्थिति में योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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