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ब्रेस्ट फ़ीडिंग के सेहत से जुड़े फ़ायदे


ब्रेस्ट फ़ीडिंग के सेहत से जुड़े फ़ायदे

वजात बच्चे के लिए मां के दूध जितना पोषक कोई और चीज़ नहीं होती. बच्चे को दूध पिलाना न केवल बच्चे की सेहत के लिए अच्छा होता है, मां के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है. डॉ राजलक्ष्मी वालावलकर, कंसल्टेंट, आईवीएफ़ ऐंड रिप्रोडक्टिव सर्जरी, ककून फ़र्टिलिटी कहती हैं,‘‘इसमें कोई दो राय नहीं है कि आप अपने बच्चे को सबसे बेहतर पोषण ब्रेस्ट फ़ीडिंग के माध्यम से ही दे सकती हैं.’’ उन्होंने हमें ब्रेस्ट फ़ीडिंग के फ़ायदों के बारे में बताया. 
ब्रेस्ट फ़ीडिंग से मां को होनेवाले फ़ायदे 
यह कई शोधों में साबित हो चुका है कि ब्रेस्ट फ़ीडिंग से बच्चे के साथ-साथ मां की सेहत के लिए भी बहुत ज़रूरी है. आइए, मांओं को होनेवाले फ़ायदों के बारे में जानते हैं. 

1. ब्रेस्ट फ़ीडिंग करानेवाली मांओं का प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा वज़न जल्दी कम होता है 
प्रेग्नेंसी के दौरान आपका शरीर मिल्क प्रोडक्शन के लिए एक्स्ट्रा कैलोरीज़ जमा करके रखता है. अत: यदि आप अपने बच्चे को फ़ॉर्मूला मिल्क की जगह अपना दूध पिलाती हैं तो आपका पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस उन महिलाओं की तुलना में कहीं ज़्यादा होगा, जो बच्चे को दूध लंबे समय तक नहीं पिला पातीं. ब्रेस्ट फ़ीडिंग से ख़ासकर शरीर के निचले हिस्से का फ़ैट बर्न होता है. 


2. ब्रेस्ट फ़ीडिंग से घटता है कैंसर का ख़तरा 
मांएं, जो अपने बच्चे को ब्रेस्ट फ़ीड कराती हैं उन्हें प्री और पोस्ट-मेनोपॉज़ल ब्रेस्ट कैंसर होने का ख़तरा उन मांओं की तुलना में काफ़ी कम होता है, जो अलग-अलग कारणों से ब्रेस्ट फ़ीडिंग अवॉइड करती हैं. इसका कारण यह है कि जो महिलाएं ब्रेस्ट फ़ीड कराती हैं उनमें हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिससे उनके मेन्स्ट्रुअल पीरियड्स देर से आते हैं. इससे वे एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स के संपर्क में उतने कम समय तक के लिए आती हैं. यह हार्मोन ब्रेस्ट कैंसर सेल्स की वृद्धि को प्रमोट करता है.

3. मां और बच्चे की बॉन्डिंग मज़बूत होती है 
बच्चे को अपना दूध पिलाते समय आप उसे जिस तरह से कैरी करती हैं उसके चलते बच्चा आपके हृदय की धड़कनों को जल्दी पहचानता है. इससे बच्चे को सुकून और सुरक्षित होने का एहसास होता है. यह सिद्ध हो चुका है कि ब्रेस्ट फ़ीड करानेवाली मांओं में ऑक्सिटोसिन यानी लव हार्मोन्स का प्रोडक्शन ज़्यादा होता है. इससे बच्चे और मां के बीच स्नेह का बंधन और तगड़ा होता है. 

ब्रेस्ट फ़ीडिंग से बच्चे को होनेवाले फ़ायदे 
मां का दूध किसी सुपर फ़ूड से कम नहीं है. पर्याप्त समय तक मां का दूध पीनेवाले बच्चों को ये फ़ायदे होते हैं. 

1. बच्चों को मिलता है सुपर न्यूट्रिशन 
नवजात बच्चों के विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक पदार्थ मां के दूध में मौजूद होते हैं. मां का दूध विटामिन, प्रोटीन और फ़ैट जैसे पोषक तत्वों का परफ़ेक्ट मिश्रण है. मां के दूध में ऐंटीबॉडीज़ होते हैं, जो आपके बच्चे को अनेक तरह के वायरस, बैक्टीरियाज़ और नुक़सानदेह एलर्जीज़ से बचाते हैं. कई शोध कहते हैं कि मां का दूध पीनेवाले बच्चों को आगे चलकर अस्थमा की समस्या होने की संभावना कम हो जाती है. 


2. मां का दूध पीनेवाले बच्चों का आईक्यू ज़्यादा होता है 
मां का दूध लॉन्ग चेन सैचुरेटेड फ़ैटी एसिड्स से भरपूर होता है, जो कि बच्चों के दिमाग़ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यही कारण है कि ‌जो मांएं अपने बच्चों को अपना दूध लंबे समय तक पिलाती हैं उनका आईक्यू लेवल ज़्यादा होता है, क्योंकि शुरुआती सालों में उनके ब्रेन का अच्छा डेवलपमेंट हो जाता है. 


3. बच्चे की जीभ और जबड़ों की सेहत के लिए ब्रेस्ट फ़ीडिंग है वरदान 
ब्रेस्ट फ़ीडिंग करते समय बच्चों की मुंह की मांसपेशियों का ख़ास ढंग से मूवमेंट होता है, विशेषकर जीभ और जबड़ों की मांसपेशियों में ग़ज़ब का समन्वय होता है. वहीं जब बच्चे बॉटल से दूध पीते हैं तो यह स्थिति अलग होती है. बच्चों के दांतों और श्वसन नली के विकास में भी ब्रेस्ट फ़ीडिंग बेहद अहम् है.






ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़ी ये 6 बातें हैं मिथ, कभी न करें विश्वास


जन्म के बाद कम से कम 6 महीने तक बच्चे का जीवन मां के दूध पर निर्भर करता है। इससे न सिर्फ बच्चे का विकास अच्छी तरह से होता है बल्कि इससे मां और शिशु कई समस्याओं से भी बचे रहते हैं। मगर आज हम आपको ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े कुछ ऐसे मिथक बताने जा रहे हैं, जिसे हर महिला सच मान लेती हैं। तो चलिए इस वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक(WBW) के मौके पर जानते हैं ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े कुछ झूठ, जिनपर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।


ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े मिथ
1. ब्रेस्ट साइज
ज्यादातर महिलाओं का मानना है कि ब्रेस्ट साइज छोटा होने से शिशु को पर्याप्त दूध नहीं मिल पाता, जोकि गलत है। अगर मां स्वस्थ है तो शिशु को पर्याप्त दूध मिलने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती। इसलिए अपनी डाइट का ख्याल रखें।

2. सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद
अगर आपको भी लगता है कि स्तनपान करवाना केवल शिशु के लिए फायदेमंद होता है तो आप गलत हैं। आपको बता दें कि ब्रेस्ट फीडिंग मां और शिशु दोनों के लिए अच्छी होती है। इतना ही नहीं, स्तनपान करवाने से महिलाओं में कैंसर का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।


3. बिगड़ सकता है साइज
कई महिलाओं को लगता है कि स्तनपान करवाने से ब्रेस्ट साइज में फर्क पड़ जाता है, जोकि गलत धारणा है। क्योंकि इससे ब्रेस्ट साइज में कोई फर्क नहीं आता है बल्कि इससे मां और शिशु दोनों स्वस्थ रहते हैं।


4. बीमार हाे ताे न पिलाएं दूध
मां का दूध शिशु के लिए अमृत के सामान माना जाता है। ऐसे में अगर आपको लगता है कि मां के बीमार होने पर उसे बच्चे काे दूध नहीं पिलाना चाहिए तो यह गलत है। आपके बीमार होने पर दूध पिलाने से बच्चे के स्वस्थ पर काेई फर्क नहीं पड़ता।

5. ब्रेस्ट फीडिंग पर दवाओं का साइड इफेक्ट
कुछ महिलाओं को लगता है कि सिजेरियन डिलिवरी के बाद दी जाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट से मां के शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। यह धारणा बिलकुल गलत है क्योंकि सिजेरियन डिलिवरी का लैक्टेशन से कोई संबंध नहीं है। बस आपको अपनी डाइट का ख्याल रखना चाहिए।

6. डिलवरी के तुरंत बाद दूध न पीलाना
मां के पहले दूध में गंदगी होती है। इसलिए महिलाओं को लगता है कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को फीड नहीं कराना चाहिए लेकिन आपको बता दें कि डिलिवरी के बाद का दूध शिशु के लिए सबसे फायदेमंद होता है। क्योंकि उसमें कोलोस्ट्रम नामक ऐसा तत्व होता है, जो शिशु के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।

स्‍तनपान कराने वाली महिलाएं ना खाएं ये चीजें, होगा बच्‍चे को नुकसान
अगर आप ब्रेस्टफीड करा रही हैं तो आपको कुछ चीजों से बिलकुल दूर रहना चाहिए। उरद की दाल और उरद से बनी चीजें बिलकुल न खाएं। क्योंकि ये पेट में गैस का कारण बन सकता है।




मुख्य बातें

उरद की दाल और उरद से बनी चीजें बिलकुल न खाएं
शुगर या शुगर वाली चीजों को ज्यादा खाने से बचें क्योंकि ये आपसे ज्यादा शिशु के लिए हानिकारक होगा
बहुत मसालेदार और तीखा खाना खाने से आपका शिशु दूध उलट सकता है

नई दिल्‍ली। Breastfeeding Diet: डिलेवरी के बाद मां के अंदर पोषण की कमी हो जाती है ऐसे में उसे इस दौरान बेहद पौष्टिक और बैलेंस डाइट लेने की जरूरत होती है। ऐसा खुद के साथ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है क्योंकि आपके खाए पोषक तत्व उसे दूध के जरिए मिलेंगे।
इसलिए यदि आपने आपने आहार के साथ जरा सी भी चूक कि तो वह शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो जाता है। इसलिए अगर आप ब्रेस्टफीड करा रही हैं तो आपको कुछ चीजों से बिलकुल दूर रहना चाहिए। खास कर ऐसी चीजें जो आम भारतीय खाने में होती ही हैं। तो आइए जानें किन-किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए किन चीजों से करें परहेज
उरद की दाल और उरद से बनी चीजें बिलकुल न खाएं। क्योंकि ये पेट में गैस का कारण बन सकता है और शिशु के पेट दर्द का कारण भी।
बहुत ज्यादा घी या तेल से बनी हुई चीजें या पंजीरी आदि न खाएं। ये एसिडीटी और अपच का कारण शिशु के लिए हो सकता है क्योंकि उसका लीवर अभी बहुत डेवलप नहीं हुआ होता है।
शुगर या शुगर वाली चीजों को ज्यादा खाने से बचें क्योंकि ये आपसे ज्यादा शिशु के लिए हानिकारक होगा। मां का ज्यादा चीनी खाना भविष्य में शिशु को डायबिटिक बना सकता है।
जंक फूड ,चिप्‍स, कोल्‍ड ड्रिंक्‍स और पिज्‍जा, बर्गर खाना बच्चे में भविष् में ओबेसिटी की संभावना को बढ़ाएगा साथ ही मौजूदा समय में वह दस्त का शिकार भी हो सकता है।
स्मोकिंग, अल्कोहल के साथ ही आपको ज्यादा आर्टिफिशिय प्रिर्जेवेटिव वाले ड्रिंक्स से भी बचना चाहिए क्योकि ये शुगर से भरी होती हैं और शिशु के लिए कई खतरे पैदा करेंगी।
बासी और पुराना खाना बिलकुल न खाएं क्योंकि ये आपके साथ आपके शिशु के पेट की समस्या का कारण बन सकता है। साथ ही आपके दूध में पोषक तत्व भी कम होंगे।
बहुत मसालेदार और तीखा खाना खाने से आपका शिशु दूध उलट सकता है क्योंकि उसके गले में आपके दूध से जलन पैदा होगी और एसिडिटी से ऐसा करेगा।
गोभी, सेम, मटर और कच्ची सब्जियां न खाएं। पका हुआ और अच्छी तरह उबला हुआ ही खाना खाएं।
कच्चा चना, कच्चा सलाद आदि बहुत न खाएं क्योंकि ये आपके जरिये शिशु के पेट दर्द का कारण बन जाएगा।
बादी करने वाली चीजें और जिन खाने को पचने में बहुत समय लगे जैसे नॉनवेज आदि को बहुत सोच-समझ कर कम मात्रा में खाएं।
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