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प्रेगनेंसी में उपवास रखना सुरक्षित है या नहीं?


प्रेगनेंसी में उपवास रखना सुरक्षित है या नहीं? 
Pregnancy me upvaas rakhna safe hai ya nahi)

भारतीय संस्कृति में उपवास रखना ज़रूरी होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए व्रत न रखने की छूट रहती है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर छूट होने के बावजूद कई गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखना चाहती हैं। इसलिए उनके मन में कई तरह के सवाल होते हैं, जैसे- उपवास रखना चाहिए या नहीं और इससे उनके शिशु को नुकसान तो नहीं होगा आदि। गर्भवती महिलाओं के इन्ही तमाम सवालों के जवाब हम इस ब्लॉग में देने की कोशिश कर रहे हैं।

1. क्या प्रेगनेंसी में उपवास रखना सुरक्षित है? 
(Kya pregnancy me upvaas rakhna safe hai)

प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से गर्भवती या उसके शिशु को कोई नुकसान होता है या नहीं, इस बात का फिलहाल कोई सटीक जवाब नहीं मिल पाया है। एक रिसर्च की माने तो प्रेगनेंसी में उपवास रखने वाली गर्भवती महिलाओं के शिशु पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।

हालांकि कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि प्रेगनेंसी में उपवास रखने वाली गर्भवती महिलाओं के शिशु में जन्म के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखी जाती हैं। इसलिए यह कह पाना फिलहाल मुश्किल है कि गर्भावस्था में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) रखना सुरक्षित है या नहीं।

ध्यान दें-अगर गर्मियों के मौसम में गर्भवती महिलाएं उपवास रखती हैं, तो उन्हें सिरदर्द, गैस और थकान की समस्या हो सकती है।

2. प्रेगनेंसी की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में उपवास 
(Pregnancy ki pehli, dusri aur tisri timahi me upvaas)

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में उपवास- प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में उपवास रखने से जन्म के समय शिशु का वजन सामान्य बच्चों की तुलना में कम हो सकता है। चूंकि गर्भावस्था की पहली तिमाही काफी नाज़ुक होती है, इसलिए अगर गर्भवती को उपवास रखना है तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।


प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में उपवास- प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही, पहली और तीसरी तिमाही की अपेक्षा अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इसलिए इस दौरान गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बाद उपवास रख सकती हैं।


प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में उपवास- प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु के तेज़ी से विकास के लिए विटामिन (vitamin in hindi), मिनरल्स (minerals in hindi) और प्रोटीन (protein in hindi) आदि की काफी ज़रूरत होती है। इसलिए इस तिमाही में उपवास रखने से पहले गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।

3. क्या प्रेगनेंसी में लंबे व्रत रखने चाहिए? 
(Kya pregnancy me lambe vrat rakhne chahiye)

अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में लंबे समय के लिए उपवास रखने के बारे में सोच रही है, तो उन्हें एक बार डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करना चाहिए।


प्रेगनेंसी में नवरात्रि का उपवास (pregnancy me navratri ka upvaas)- नवरात्रि का उपवास पूरे नौ दिनों तक चलता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस व्रत को नहीं रखना चाहिए । प्रेगनेंसी में शिशु के विकास के लिए पौष्टिक चीज़ों की ज़रूरत होती है, ऐसे में अगर महिलाएं लंबे उपवास रखेंगी तो शायद उनके शिशु के विकास पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अगर बहुत ज्यादा ज़रूरी है तो वे पहले और आखिरी दिन व्रत रख सकती है।


प्रेगनेंसी में रमज़ान का उपवास (pregnancy me ramzan ka upvaas)- अगर गर्भवती महिला या उसके शिशु के जीवन को कोई खतरा होता है तो इस्लाम धर्म उपवास रखने की अनुमति नहीं देता है। इसके लिए इस्लाम धर्म में नियम बनाया गया है कि गर्भवती महिलाएं फिदया करके इस उपवास को पूरा कर सकती है।

फिदया का मतलब है कि रमज़ान के दिनों में रोज़ाना गर्भवती महिलाएं एक गरीब को अपने हाथों से खाना खिलाएं। ऐसा करने से गर्भवती महिलाओं का रमज़ान का उपवास खंडित नहीं होता है और उन्हें फल भी पूरा मिलता है।

4. प्रेगनेंसी में उपवास रखते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? 
(Pregnancy me upvaas rakhte samay kya sawdhaniya baratni chahiye)

अगर गर्भवती महिलाएं एक या दो दिन के लिए उपवास रखना चाहती हैं तो वे नीचे लिखी गयी कुछ प्रमुख टिप्स को आज़मा सकती हैं-


खूब पानी पीएं- प्रेगनेंसी में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) शुरू करने से पहले गर्भवती महिलाओं को पूरे दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए, ताकि उपवास वाले दिन उनमें पानी की कमी न रहे।


जूस पीएं- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से पहले गर्भवती महिलाओं को शरीर में तरल पदार्थों की कमी न होने के लिए ताज़े फलों का जूस पीना चाहिए। जूस पीने से गर्भवती महिलाएं काफी ऊर्जावान भी रहेंगी।


फल खाएं- प्रेगनेंसी में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) रखने वाली गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइट में फलों को शामिल करना चाहिए। आधे या एक घंटे के अंतराल में उन्हें कोई न कोई फल खाते रहना चाहिए, क्योंकि इससे उनमें ऊर्जा की कमी नहीं आएगी।


कैफीन युक्त पदार्थों से बचें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से पहले गर्भवती महिलाओं को कैफीन युक्त पदार्थों (जैसे- चाय और कॉफी आदि) को नहीं लेने चाहिए, क्योंकि ये सभी मूत्रवर्धक है और इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।


तनाव लेने से बचें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने वाली गर्भवती महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।


भारी भोजन से बचें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) के दौरान गर्भवती महिलाओं का पेट पूरा दिन खाली रहने वाला है, इसलिए इससे ठीक एक दिन पहले उन्हें भारी भोजन यानि तेल, चिकन और फास्ट फूड आदि से बचना चाहिए।


डॉक्टर की सलाह लेें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने के लिए गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से ज़रूर सलाह लेनी चाहिए।

5. प्रेगनेंसी में उपवास रखने के लिए कैसे तैयार हो? 
(Pregnancy me upvaas rakhne ke liye kaise taiyar ho)

यदि गर्भवती महिलाओं को लगता है कि वे ऊपर बताए गये सुझावों का पालन कर सकती हैं तो अब हम उन्हें प्रेगनेंसी में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) के लिए खुद को तैयार करने की जानकारी दे रहे हैं-


नशा करना बंद करें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से एक या दो हफ्ते पहले ही गर्भवती महिलाओं को नशा करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह सभी मूत्रवर्धक होते हैं और इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है।


खानपान में बदलाव करें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से एक या दो हफ्ते पहले ही गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान में विशेष बदलाव करना चाहिए। अगर गर्भवती महिलाएं चॉकलेट, चिकन, चीनी और उच्च वसा लेती हैं तो इसे व्रत से एक या दो हफ्ते पहले ही लेना बंद कर दें।

इन पदार्थों के बजाय गर्भवती महिलाएं उपवास से एक या दो हफ्ते पहले सब्जियों और फलों आदि को अपनी डाइट में शामिल करें, क्योंकि इससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिलेगी।


तरल पदार्थ लें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से एक या दो हफ्ते पहले गर्भवती महिलाओं को खूब तरल पदार्थ (पानी और जूस आदि) लेने चाहिए, ताकि व्रत के दौरान उनके शरीर में इसकी कमी न रहे।

दरअसल, प्रेगनेंसी में तरल पदार्थों की कमी से शिशु तक पहुंचने वाली रक्त प्रवाह में बाधा आ जाती है इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खूब पानी और जूस पीना चाहिए।


जांच कराएं- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से एक या दो हफ्ते पहले ही गर्भवती महिलाओं को शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच ज़रूर करा लेनी चाहिए, ताकि वे पूरी तरह से आश्वस्त हो सकें।


पूरी नींद लें- प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने से पहले गर्भवती महिलाओं को रात में 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए, ताकि व्रत वाले दिन उन्हें बार बार नींद न आए।

6. क्या गर्भावस्था में उपवास रखने से कोई दुष्प्रभाव होता है? 
(Kya pregnancy me upvaas rakhne se koi side effects hota hai)

प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने की वजह से गर्भवती महिलाओं को नीचे लिखे गए दुष्प्रभाव हो सकते हैं-


वजन में बदलाव होना- अगर उपवास के दौरान गर्भवती महिलाओं का वजन कम या ज्यादा हो रहा है तो उन्हें फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


पानी की कमी होना- अगर उपवास के दौरान पेशाब की मात्रा कम हो गई है तो यह पानी की कमी का संकेत हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खूब पानी या जूस पीना चाहिए।


उल्टी, गैस और कब्ज होना- अगर उपवास के दौरान गर्भवती महिला को उल्टी, गैस और कब्ज की समस्या महसूस हो रही है तो उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


शिशु की गतिविधि में कमी महसूस होना- अगर उपवास के दौरान गर्भवती महिलाओं को शिशु की गतिविधि में कमी महसूस हो रही हो तो उन्हें फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा अगर गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा महसूस हो रहा है तो वे तुरंत अस्पताल जाएं।

ध्यान दें-अगर गर्भवती महिलाओं को उपवास के दौरान ऊपर बताई गई चीज़े महसूस हो रही हैं तो उन्हें व्रत तोड़ देना चाहिए।

7. गर्भावस्था में उपवास तोड़ने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? 
(Pregnancy me upvaas todne ka sabse achcha tarika kya hai)

दिन भर के व्रत के बाद गर्भवती महिलाओं के शरीर में कमज़ोरी आ जाती है, जिसकी वजह से उन्हें नीचे लिखे गए तरीकों से ही अपना उपवास तोड़ना चाहिए-


आलू खाएं- उपवास के बाद गर्भवती महिलाओं को भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट की ज़रूरत होती है और इसके लिए उन्हें अपना व्रत आलू खाकर तोड़ना चाहिए।


प्रोटीन युक्त पदार्थ लें- उपवास वाले दिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में प्रोटीन (protein in hindi) की कमी हो जाती है और यह शिशु के विकास के लिए ज़रूरी होता है, इसलिए उन्हें अपना व्रत अंडा, नट, दूध और सेम आदि से तोड़ना चाहिए।


कैफीन युक्त पदार्थ न लें- उपवास को तोड़ने के लिए गर्भवती महिलाओं को चाय और कॉफी का सहारा नहीं लेना चाहिए, बल्कि उन्हें पानी और भोजन का सहारा लेना चाहिए।

8. क्या प्रेगनेंसी में उपवास रखने से शिशु को नुकसान होता है? 
(Kya pregnancy me upvaas rakhne se shishu ko nuksan hota hai)

प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक नहीं होता है, लेकिन जन्म के बाद उसमें दो तरह की जटिलताएं हो सकती है-


सीखने की क्षमता प्रभावित होना- प्रेगनेंसी में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) के दौरान पौष्टिक चीज़ों की कमी होने की वजह से कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर बढ़ सकते हैं और इससे शिशु में जन्म के बाद लंबे समय तक सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

जन्म के बाद शिशु का विकास प्रभावित होना- प्रेगनेंसी में उपवास (fasting during pregnancy in hindi) के दौरान पौष्टिक चीज़ों की कमी होने की वजह से शिशु का वजन स्थायी रूप से कम हो सकता है या फिर उसका कोई अंग स्थायी रूप से विकलांग हो सकता है।

अगर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में उपवास (pregnancy me upvaas) रखने के बारे में सोच रही हैं तो उन्हें ऊपर बताए गए टिप्स और सावधानियों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा अगर व्रत के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी भी तरह की दिक्कत महसूस हो तो उन्हें उपवास तोड़ देना चाहिए और डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी में किसी तरह की जटिलताएं न हो।

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