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मुमक़िन है सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी से निपटना


मुमक़िन है सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी से निपटना
यह तो आप जानते ही हैं कि जिन पार्टनर्स में इस ऊर्जा का स्तर एक समान नहीं होता उन्हें सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबल (यौन असंगत) कहा जाता है. आफत की बात यह है कि सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी के चलते रिश्ते आसानी से दरक सकते हैं और राहत की बात यह है कि इस समस्या से निपटा जा सकता है. कामसूत्र में भी स्त्री-पुरुष के कई भेद बताए गए हैं और सभी की यौन-इच्छाएं भी अलग-अलग बताई गई हैं. हालांकि मॉडर्न मेडिकल साइंस ने साफ़ किया है कि सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी की समस्या शारीरिक संरचना से अधिक मन की दशा पर निर्भर करती है. ताज़ातरीन अध्ययनों से भी स्पष्ट होता है कि सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी के लिए शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्थितियां ज़िम्मेदार होती हैं. बीमारी, गर्भावस्था, सर्जरी, स्ट्रेस, नशा जैसी कई स्थितियां सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी का कारण बन सकती हैं. 

इस समस्या से निपटने की ओर इस तरह आगे बढ़ें 
सेक्सोलॉजिस्ट डॉ सागर मूंदड़ा कहते हैं कि सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी कोई लाइलाज समस्या नहीं है. पार्टनर के मूड का ख़्याल रखकर, लाइफ़स्टाइल और व्यवहार में थोड़ा-सा परिवर्तन लाकर इस समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है. अक्सर लोगों की पसंद अलग-अलग होती है. किसी को घर या बंद कमरे में रहना उबाऊ लगता है. बाहर जाकर सैर करना, बाइक चलाना, पर्वतारोहण करना अच्छा लगता है. इसके विपरीत किसी को लाइब्रेरी में जाकर किताबें पढ़ना, नाटक या फ़िल्म देखना लुभाता है, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों एक साथ किसी चीज़ में एक जैसा आनंद नहीं पा सकते हैं. 

नज़र में शोख़ियां, लब पर मुहब्बत
एक्स्पर्ट्स का कहना है कि सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी के लिए संवादहीनता भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार होती है. पार्टनर के बीच जो संप्रेषण होता है उसमें शब्दों की भूमिका केवल 8 प्रतिशत होती है और 92 प्रतिशत संवाद तो नि:शब्द होता है. जब भी अपने पार्टनर के साथ बात करें, तो आपके स्वर में गहराई हो, आंखों में प्रेम झलकता हो, सांसों में शोखियां घुली हों. दिनभर की भागदौड़ का पतझड़ पत्ता-पत्ता झड़ जाने के बाद प्रेम का वसंत किसी आंधी की तरह नहीं, बल्कि धीरे-धीरे खिलने दें. दरअस्ल, पार्टनर एक-दूसरे के साथ रहते-रहते एक-दूसरे को अच्छी तरह जानने लगते हैं. इसके फ़ायदे भी हैं और नुक़सान भी. जब आप बात प्रेम की करते हैं, लेकिन आपकी भाव-भंगिमा से प्रेम नहीं झलकता है, तो आपके पार्टनर को यह फ़ौरन पता चल जाता है. ऐसे में सेक्शुअल इन्कॉम्पैटिबिलिटी से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आपसी संवाद बरक़रार रखा जाए, आत्मीयता बढ़ाई जाए.

पार्टनर से साझा करें समस्या
यदि आपको लगता है कि बेड पर पार्टनर के साथ बात अच्छी तरह नहीं बन रही है, तो इस समस्या को टेबल पर ले आएं. अपने पार्टनर से अपनी पसंद-नापसंद की चर्चा करें. उसकी पसंद के बारे मे जानें और मिलकर प्रेम की मंज़िल तय करें. यदि लगता हो कि समस्या गंभीर है, तो किसी अच्छे सेक्स एक्स्पर्ट से सलाह लें.
स्ट्रेस से छुटकारा पाएं
स्ट्रेस सेक्स लाइफ़ को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है. स्ट्रेस के चलते लोग लंबे समय तक अंतरंग नहीं हो पाते. बेहतर होगा कि आप अपने स्ट्रेस का कारण पता लगाएं और उसका विश्लेषण कर उसे दूर करें. अपने रिश्ते को सुलझाने के लिए एक-एक करके उनसे निपटना शुरू करें. अपने स्ट्रेस को पार्टनर पर न हावी होने दें. 
अंतरंग होने के नए तरीक़े खोजें
अंतरंग होने के लिए सेक्स ही एकमात्र उपाय नहीं है. यदि आपका पार्टनर सेक्स के प्रति अरुचि रखता हो, तो बेहतर होगा कि उसका हाथ पकड़ें और किसी रोमैंटिक स्थल की सैर पर निकल जाएं. जेब गंवारा करे तो डिनर डेट पर निकल जाएं. एक साथ एक्सरसाइज़ करें. कुछ दिनों तक ऐसा करने से न केवल आत्मीयता बढ़ती है, बल्कि सेक्स लाइफ़ में भी सुधार आता है. 
अपनी उत्तेजना के कारकों को पहचानें 
उन बातों पर ग़ौर करें जिनसे आपका मूड ठीक होता है या आपमें उत्तेजना आती है. ख़ुशहाल सेक्स जीवन के लिए अपनी और अपने पार्टनर के उत्तेजना के कारकों को जानना-पहचानना ज़रूरी होता है. यदि उत्तेजना को लेकर कोई जटिल समस्या हो, तो किसी पेशेवर चिकित्सक से परामर्श करें.

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