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पीरियडस का दर्द दूर करे


पीरियडस का दर्द दूर करे
मासिक-धर्म में दर्द होना आम समस्या है।
दर्द दूर करने के लिए दवाईयों का इस्तेमाल ना करे।
दर्द को दूर करने के लिए घरेलू नुस्खे अपनाएं।
अदरक या अदरक का शूप बेहतर उपाय है।
मासिक-धर्म के दौरान महिलाओं को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनमें से कमर के नीचे वाले भाग में दर्द होना एक आम समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए कई महिलाएं दवाईयों का इस्तेमाल करती हैं तो कई घरेलू नुस्खे अपनाती हैं। घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करना तो सही है लेकिन दवाईयों का इस्तेमाल करना सही नहीं है। इससे कई बार साइड इफेक्ट्स भी हो जाते हैं जिससे और अधिक समस्या उत्पन्न हो जाती है।

दवाईयों का प्रभाव

पीरियड्स के दौरान दवाईयों का इस्तेमाल विपरीत परिणाम देते हैं। कई बार दवाईयां महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रजनन अंगों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इस समस्या से निपट ने के लिए प्रकृतिक उपायों का जितना ज्यादा आप इस्तेमाल करें उतना ज्यादा अच्छा है। लेकिन इन प्राकृतिक उपायों के इस्तेमाल के बारे में भी सारी जानकारी होनी चाहिए। इनका सबसे ज्यादा फायदा है कि आप प्रकृतिक दवाईयां घऱ में ही बना सकते हैं। जैसे अदरक का इस्तेमाल पीरियड्स के दर्द का बेहतर इलाज है।

अदरक का उपयोग

अदरक का उपयोग करके दर्द दूर करें 29 ग्राम अदरक को एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छान लें। इस छने हुए पानी को दिन में दो बार पीयें, आप पीरियड्स शुरू होने के 15 दिन पहले इसे प्रारंभ कर सकते हैं। इसे दो महीने तक अपनाएं, आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा। पीरियड्स के दौरान चाय में सामान्य से कुछ अधिक मात्रा में अदरक का इस्तेमाल करें तथा इसे रोगी को दें। यह पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से आराम दिलाने में सहायक होगा।

अदरक-सोंठ सूप
मासिक-धर्म के दौरान दर्द की समस्या को दूर करने के लिए अदरक-सोंठ सूप तुरंत कारगर है। अदरक के टुकड़े, सोंठ और गुड़ को गर्म कर सूप बनाएं। जब ये हल्का ठंडा हो जाए तो पिएं। दर्द दूर हो जाएगा।

अजवाइन के फायदे

पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करती है अजवाइन।
मोटापा कम करने का असरदार नुस्खा है अजवाइन।
अजवाइन एक प्रकार का एंटी एसिड होता है।
अजवाइन को छाछ के साथ पीने से होता है फायदा।

मोटापा न सिर्फ आपकी पर्सनेलटी को खराब करता है, बल्कि कई बीमारियों का कारण भी बनता है। लेकिन मोटापा कम करना कोई आसान काम भी तो नहीं। लेकिन अगर हम आपको मोटापा कम करने का एक ऐसा नुस्खा बताएं जो न सिर्फ मोटापा कम करता है बल्कि बेहद सस्ता और आसानी से मिल जाने होता है, तो कैसा रहेगा। आपने अपनी रसोई में कई तरह के देखे होगें। उन्‍हीं में से एक है मसाला है 'अजवाइन'। अजवाइन न सिर्फ एक मसाला है, बल्कि एक ऐसी औषधि भी है जिसके प्रयोग से मोटापा कम किया जा सकता है और स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाया जा सकता है। तो चलिये जानें कि अजवाइन से मोटापे को कैसे कम किया जा सकता है।

पाचन संबंधी समस्या को सुधारती है
यदि पाचन ठीक न हो तो मोटाबॉलिज्म खराब होता है और इससे मोटापा भी बढ़ता है। अजवाइन पाचन संबधी किसी भी समस्‍या को ठीक करने में सहायक होती है। यह एक प्रकार का एंटी एसिड होती है जोकि बदहज़मी की समस्या से बचाव करती है। अजवाइन को छाछ के साथ पीने से पाचन संबधी समस्या जैसे अपच आदि से राहत मिलती है।

असरदार नुस्खा अजवाइन
अजवाइन मोटापे कम करने में भी कारगर होती है। इससे मोपाटा कम करने के लिये रात को एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह उठने पर इसे छानकर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीएं। इसके नियमित सेवन से जल्द ही मोटापा कम होने लगता है।

लेकिन अजवाइन या अन्य रोई भी नुस्खा कोई चमत्कार नहीं होता है। इन नुस्खों के साथ-साथ नियमित एक्सरसाइज व पौष्टिक और संतुलित भोजन करने की भी जरूरत होती है। साथ ही शरीर को ठीक से हाइड्रेट भी रखना होता है।

- August 18, 2018 No comments: 
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सिर की खुजली दूर करे
ड्राई स्‍कैल्‍प, रूसी और स्‍कैल्‍प फंगस से होती है खुजली।
खुजली दूर करने में मददगार है घरेलू उपचार।
एंटी-इंफ्लेमेंटरी और एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरपूर गेंदा।
शैम्‍पू से पहले इससे अपने स्‍कैल्‍प पर अच्‍छे से मसाज करें।

कई बार ड्राई स्‍कैल्‍प, रूसी, शैंपू, गलत खान-पान और स्‍कैल्‍प फंगस के कारण सिर में खुजली होने लगती है, जब सिर में खुजली होती है तो समझ में नहीं आता कि इसे कैसे रोका जाये। कई बार तो सिर की खुजली सार्वजनिक रूप से परेशानी या शर्म का कारण बन जाती है और तो और कई बार जलन और खुजाने से इसमें लाली और चकत्‍ते भी पड़ने लगते है। लेकिन अब परेशान न हो क्‍योंकि घरेलू उपचार की मदद से आप खुजली की समस्‍या से आसानी से निजात पा सकते हैं। यह घरेलू उपाय आपके सिर की खुजली को दूर भगाने के साथ बालों की देखभाल में भी मददगार साबित होगा। आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से इस उपाय की जानकारी लेते हैं।

सिर की खुजली और गेंदे का फूल

समस्‍या से बचने के लिए महंगे उत्‍पादों को इस्‍तेमाल करने की बजाय आप गेंदे के फूल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। गेंदे के फूल हानिकारक मुक्‍त कणों के खिलाफ रक्षा में मददगार फलकोनोइड्स की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा गेंदा का फूल एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एंटीवायरल और एंटीबैक्‍टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है। यहां सिर में खुजली दूर करने के लिए इसके इस्‍तेमाल का तरीका बताया गया है।

स्‍कैल्‍प के लिए गेंदे का अर्क

गेंदा का अर्क तैयार करने के लिए आपको 4 गेंदा के फूल, 500 मिलीलीटर पानी और आधे नींबू की जरूरत होती है। अब अर्क को बनाने के लिए पानी में गेंदे के फूल को मिलाकर कुछ देर के लिए उबालें। फिर इस पानी में नींबू के रस को मिला लें। अर्क तैयार होने के बाद, शैम्‍पू से पहले इससे अपने स्‍कैल्‍प पर अच्‍छे से मसाज करें। इसके बाद स्‍कैल्‍प को रूसी से दूर करने के लिए आप अपने बालों को सेब साइडर सिरके से भी धो सकते हैं।

बाद में किसी हल्‍के शैंपू से बालों को धो कर प्राकृतिक रूप से सूखने दें। बालों में हेयर ड्रायर के इस्‍तेमाल से बचें क्‍योंकि यह खुजली को बढ़ा सकता है। सर्वोत्‍तम परिणाम पाने के लिए इस अर्क का उपयोग नियमित आधार पर करें। इस उपाय से स्‍कैल्‍प सोरायसिस के लक्षणों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

अन्‍य उपाय
प्राकृतिक तेल की मदद से भी सिर की खुजली को दूर किया जा सकता है। ड्राई स्‍कैल्‍प में भी खुजली होती है। इसलिए सिर पर टीट्री ऑयल, नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल, बादाम का तेल और एवोकाडो तेल को मिक्‍स करके लगाना चाहिए। जब तक खुजली की समस्‍या दूर नहीं हो जाती इस उपाय का इस्‍तेमाल नियमित रूप से करें।
इसके अलावा नींबू का रस भी बालों के लिए अच्छा है। सिर पर थोड़ा सा नींबू का रस मले और कुछ मिनटों के बाद बाल धो लें।


सीने में जलन को दूर करे
सीने में जलन के लिए अपनाये बेकिंग सोडा।
बेकिंग सोडा अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करता है।
बेकिंग सोडा के साथ नींबू से भी राहत मिलती है।
आपको मतली या उल्‍टी का अनुभव हो सकता है।

एसिडिटी होने पर कई बार आपको भोजन नली या सीने में जलन की महसूस होती है। कभी-कभार ऐसा होना सामान्‍य बात है, लेकिन अगर आप लगातार इस तरह की जलन महसूस करते हैं तो यह एक गंभीर समस्‍या भी हो सकती है। लेकिन घबराइए नहीं, आपकी इस परेशानी का इलाज बेकिंग सोडा में छिपा है। जीं हां, घर की सफाई, खान-पान और सौंदर्य निखारने के लिए फायदेमंद बेकिंग सोडा आपकी इस परेशानी को दूर करने का बहुत कारगर और फायदेमंद उपाय है, आइए जानें कैसे।

बेकिंग सोडा में अतिरिक्त एसिड का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी और सामान्य रूप से एंटासिड मौजूद होता है। सोडा का मूल स्वभाव नमक और पानी के गठन से पेट में अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाना होता है। जिससे गैस से राहत मिलती है और सीने की जलन दूर होती है।

बेकिंग सोडा का इस्‍तेमाल

बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से इस समस्या में झट से फायदा होता है। एसिडिटी के कारण होने वाली सीने में जलन के लिए आप बेकिंग सोडा को अलग-अलग तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते है। इसके लिए सबसे बेहतरीन तरीका है, एक गिलास पानी में एक चम्मच बेकिंग पाउडर मि‍लाकर पी लें। लेकिन ध्‍यान रहे कि इस उपाय को दिन में 3 बार से ज्‍यादा न आजमायें, क्‍योंकि इससे आपको नुकसान हो सकता है।
बेकिंग सोडा के साथ अदरक का इस्‍तेमाल भी आपको सीने में जलन से राहत दिलाता है। इसके लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्‍मच बेकिंग सोडा के साथ-साथ आधा चम्‍मच कद्दूकस किया हुआ अदरक मिला लें। इस पेय को पीने के बाद आप जलन से राहत महसूस करेंगे।
सीने में जलन को दूर करने के लिए आपने ठंडे दूध के बारे में सुना ही होगा। आप सीने में जलन होने पर एक गिलास दूध के साथ एक चम्‍मच बेकिंग सोडा मिलाकर भी पी सकते हैं। अगर आप लगातार इस समस्‍या से परेशान है तो आप सोते समय भी इस दूध का सेवन कर सकते हैं।
बेकिंग सोडा के साथ नींबू लेने से भी सीने में जलन से राहत मिलती है। समस्‍या होने पर आधा कप गर्म पानी में कुछ बूंदे नींबू की निचोड़ लें। अब इस गर्म नींबू पानी में आधा चम्‍मच बेकिंग सोडा मिलाकर, इस घोल को पी लें।

सावधानियां

सीने में जलन से बचने के लिए बेकिंग सोडा का इस्‍तेमाल करने से पहले आपको कुछ बातों को ध्‍यान में रखना होगा।
बेकिंग सोडा में अत्‍यधिक मात्रा में सोडियम की मौजूदगी के कारण, सोडियम का सेवन कम करने वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
नमक और सोडियम की मात्रा अधिक होने के कारण लगातार इन उपायों के प्रयोग से आपको मतली या उल्‍टी का अनुभव हो सकता है।
गर्भावस्‍था या नवजात शिशु होने पर महिलाओं को बेकिंग सोडा का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही 6 साल से कम उम्र के बच्‍चों को भी बेकिंग सोडा का उपयोग नहीं करना चाहिए।


नरेंद्र मोदी के 4 ऊर्जावान योगासन


योग की महत्‍ता भारत में सदियों से रही है और इसका नियमित अभ्‍यास करने वाले निरोग और बलिष्‍ठ होते हैं। भारत ने योग के महत्‍व को पूरी दुनिया के सामने रखा और इसकी अगुवाई भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इनके ही प्रयास से 21 जून को विश्‍व योग दिवस मनाया जाना निश्चित हुआ। रोज योग करने के कारण ही नरेंद्र मोदी पूरे दिन ऊर्जावान रहते हैं और उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती। क्‍या आप जानते हैं नरेंद्र मोदी इतने एनर्जेटिक और सक्रिय किन-किन योगासन का अभ्‍यास करके रहते हैं। इस लेख में हम आपको उन योगासनों के बारे में बता रहे हैं जिनका अभ्‍यास नरेंद्र मोदी करते हैं और आपको भी करना चाहिए।

सुखासन

यह योग श्वास-प्रश्वास और ध्यान पर आधारित है। इसको करने से घुटने 90 डिग्री मुड़ते हैं, जिससे उन्‍हें दर्द से आराम मिलता है। यह तनाव कमकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इस योगा को करते वक्‍त आपका सिर और गर्दन सीधा होना चाहिये। अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा कर के बैठें और उसे बिल्‍कुल भी ना मोड़े। अपने दोनों पैरों को तिरछा मोड़ कर बैठें और दोनों हाथों को अपने पैरों पर रखें। इससे आपकी मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है। पैरों में किसी भी प्रकार की समस्‍या हो तो यह आसन न करें। साइटिका अथवा रीढ़ के निचले भाग के आसपास किसी प्रकार का दर्द हो या घुटने की गंभीर बीमारी में इसका अभ्यास न करें।

पद्मासन

पद्मासन को अंग्रेजी में लोटस पोज भी कहते हैं। यह आसन पेट को दुरुस्‍त और दिमाग की एकाग्रता बढाने के लिये लाभकारी माना जाता है। जमीन पर बैठकर बाएं पैर की एड़ी को दाईं जंघा पर इस प्रकार रखते हैं कि एड़ी नाभि के पास आ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को उठाकर बाईं जंघा पर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियां नाभि के पास आपस में मिल जाएं। मेरुदण्ड सहित कमर से ऊपरी भाग को पूर्णतया सीधा रखें। ध्यान रहे कि दोनों घुटने जमीन से उठने न पाएं। तत्पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को गोद में रखते हुए स्थिर रहें। इसको पुनः पैर बदलकर भी करना चाहिए। फिर दृष्टि को नासाग्र भाग पर स्थिर करके शांत बैठ जाएं।

उस्तरासन

इस योगासन में हमारी पीठ स्ट्रेच होती है, सिर थोड़ा झुका हुआ रहता है और पेट उठा हुआ रहता है, इसलिए इस आसन की मदद से पेट और पीठ के निचले हिस्से का परिमार्जन होता है। यह आसन हमारे हिप्स और थाई को मजबूत बनाता है। यह आसन आपकी जांघों पर वसा कम कर देता है। यह आपके कंधे, पीठ, जांघों और बांह को मजबूत करता है, कूल्हे फ्लेक्सोर्स को खोलता है, कोख, गर्दन और पेट को भी टोन उप करने में सहायक है।

वज्रासन

यह एकमात्र ऐसा आसन है जिसे खाना खाने के बाद किया जाता है। भोजन करने के बाद दस मिनट तक वज्रासन में बैठने से भोजन जल्दी पचने लगता है और कब्ज, गैस, अफारा आदि से छुटकारा मिलता है। यदि घुटनों में दर्द रहता हो, तो वज्रासन नहीं करना चाहिए। पेट और हाजमा सही रहने से बाल भी स्वस्थ बनते हैं। विधि - दोनों घुटनों को सामने से मिलाएं और पैर की एड़ियां बाहर की तरफ रखें और पंजे अन्दर की ओर। अपने दोनों हाथों को घुटनों के ऊपर रखें।

योगासन स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाता है, मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है।

मकरासन से दूर कमर दर्द

आजकल की व्यस्त जीवनशैली में हम सभी को ज्यादातर काम झुककर करना पडता है। नतीजन पीठ दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल और अन्य सामान्य समस्याएं आम हो गई हैं। सामान्य दर्द को दूर करने के लिए दवा से बेहतर उपाय है योग। मगर एक संस्कृत शब्द‍ है जिसका अर्थ होता है मगरमच्छ। इस आसन में शरीर पानी में तैरते हुए मगर के जैसा प्रतीत होता है। मकरासन में पेट के बल लेट कर पूरे शरीर को पांव के पंजों तथा हाथ की हथेलियों पर टिका देते हैं। इस आसन में पूरे शरीर पर जोर पडता है जिससे पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। मकरासन में हमारी रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों के दर्द को दूर करता है। यह आसन सभी उम्र के लोग कर सकते हैं।

मकरासन करने की विधि

सबसे पहले चादर बिछाकर जमीन पर पेट के बल लेट जाइए। उसके बाद दोनों हाथों की कोहनियों को मिलाते हुए गाल के नीचे रख लीजिए। दोनों पैरों को मिलाकर सांस को अंदर कीजिए, उसके बाद सांस को बाहर करते हुए दोनों कोहनियों को अंदर की तरफ खींचिए। इस क्रिया को कम से कम 5 बार दोहराइए। उसके बाद पेट पर दोनों हथेली दोनों गाल के नीचे और कोहनियां मिला कर रखिए। सांस को आराम से लेते हुए पैरों को बारी-बारी घुटने से मोडिए। कोशिश कीजिए कि आपके पैरों की एडी नितंबों को छुए। इस क्रिया को 20 बार दोहराइए।

पहले की स्थिति में रहते हुए अब दोनों पैरों को एक साथ मोडिए। इस क्रिया को कम से कम 20 बार दोहराइए। पैरों को मुडा रखकर गर्दन को घुमाकर दोनों पैरों की एडियों को देखने का प्रयास कीजिए।
इसके बाद पेट पर हाथों की कलाई को रखने के बाद चिन (ठुड्डी) को कलाई पर रखिए। इसमें भी दोनों पैर आपस में मिले हुए हों। अब सांस को अंदर करते हुए पेट को फुलाने का प्रयास कीजिए, पेट को फुलाकर कुछ सेकेंड तक रुकने की कोशिश कीजिए। पूरे शरीर को ढीला छोडकर इस क्रिया को पांच बार दोहराएं।

मकरासन करने से लाभ

मकरासन आरामदायक आसन के अंतर्गत आता है। जब भी पेट के बल लेटकर यह आसन किया जाता है तब सांस लेने की गति बढ जाती है, सांस की गति को सामान्य करने के लिए मकरासन किया जाता है। मकरासन के प्रत्येक दिन अभ्यास करने से समस्त कोशिकाओं, मांसपेशियों को आराम मिलता है। मकरासन से शरीर में खून का संचार सुचारु रूप से होने लगता है जिससे वे हमेशा स्वस्‍थ और निरोगी रहते है।
मकरासन की क्रिया में फेफड़े फैलते है जिससे इनके अंदर ऑक्सीजन अधिक मात्रा में अंदर जाती है तथा कार्बनडाइआक्साफइड बाहर निकलती है। मकरासन से दमा रोग व सांस से संबंधित रोगों को समाप्त करने में भी सहायता मिलती है। मकरासन को करने से शवासन के भी लाभ प्राप्त होते है। मकरासन कमर दर्द, पीठ दर्द, सर्वाइकल में आराम देता है।

मकरासन करते वक्त सावधानी

मकरासन करते वक्त दोनों पैरों में इतना अंतर होना चाहिए कि वे जमीन को ना छुएं। सीना जमीन से ऊपर की तरफ उठा हुआ होना चाहिए। दोनों हाथों की कैंची जैसी आकृति बनाने के बाद ही सिर को बीच में रखते हैं। सांस लेने की प्रक्रिया सामान्य अवस्था में होनी चाहिए।


योगा, विश्व को आज के शहरीकरण के दौर में स्वस्थ रखने का रामबाण इलाज है, जिसके तर्ज पर ही 21 जून को विश्व योगा दिवस के मनाया जाता है। योग सभी के लिए है और इसका नियमित अभ्‍यास करने से सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं। यह न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि नियमित योग करने से शरीर मजबूत होता है। लड़कों को योग क्‍यों करना चाहिए, इससे उनको क्‍या-क्‍या फायदा होगा। इस लेख में इसके बारे में चर्चा करते हैं।

शरीर को बनाये लचीला

प्राकृतिक तौर पर लड़कियों का शरीर लड़कों के शरीर की तुलना में अधिक फ्लेक्सिबल होता है। इसलिए उम्र बढ़ने पर लड़कियों की तुलना में लडकों को रीढ़ या पीठ के दर्द की समस्या अधिक होती है। इन दर्द से छुटकारा पाने का एक ही इलाज है योगा। लड़के योगा कर अपने शरीर को फ्लेक्सिबल बना सकते हैं और रीढ़ या पीठ से संबंधित दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। उन लड़कों के लिए तो योग ब्रह्मास्त्र का काम करता है जो ऑफिस में नौ घंटे बैठ कर काम करते हैं।

शरीर को मजबूत बनायें

अब आप सोच रहे होंगे की योग करके कैसे ताकतवर बना जा सकता है। ठीक है आप पुशअप करते हैं, डम्बल उठाते हैं। लेकिन ऐसा करने मात्र से ही अपने आप को ताकतवर ना समझे और अगर ताकतवार समझ रहे हैं तो पैर की उंगलियों में पांच मिनट के लिए खड़ें हो जाएं। अपनी सारी ताकत का अंदाजा आपको इन पांच मिनटों में हो जाएगा। जबकि योग करने के दौरान ये पांच मिनट आपको ताकतवर भी बनाएंगे और शारीरिक व मानसिक तौर पर चुस्त-दुरूस्त करेंगे।

तरो-ताजा रखेगा

योग सामान्य तौर पर सुबह-सुबह किया जाता है जिससे आप खुद को प्रकृति के नजदीक महसूस करेंगे। जो आपको पूरे दिन तरोताजा बनाए रखेगा औऱ मानसिक तौर पर शांत बनाएगा। इससे चेहरे पर निखार आएगी और तनाव कम करेगा।

योग के अन्य फायदे
- योग आपकी बुद्धि को तेज और शार्प बनाता है। साथ ही आपकी आत्मनियंत्रण की शक्ति तेज होती है।
- संयमी और आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाता है।
- बीमारियों से शरीर को दूर रखता है। श्वसन क्रिया को नियमन करता है। 

- August 18, 2018 No comments: 
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कब्ज का आयुर्वेदिक उपचार




पेट ठीक से साफ ना होना होता है कब्ज।
कब्ज में लाभदायक होता है आर्य़ुवेद।
कब्ज होने पर अधिक मात्रा में पानी पीयें।
खासतौर पर करें रेशेदार सब्जियों का सेवन।

कब्ज होने का अर्थ है आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान व्यक्ति तरोजाता महसूस नहीं कर पाता। अगर आपको लंबे समय से कब्ज रहता है और आपने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया है तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकती है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कते भी होती हैं, जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यादि । कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्य‍म से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।
कब्ज होने पर अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है, डॉक्टर्स गर्म पानी पीने की भी सलाह देते हैं।
कब्ज के रोगी को तरल पदार्थ व सादा भोजन जैसे दलिया, खिचड़ी इत्यादि खाने की सलाह दी जाती है।
कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं। ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।
हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस या कच्चा पालक, किश्मिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
दरअसल, पानी और तरल पदार्थों की कमी कब्ज का मुख्य कारण है। तरल पदार्थों की कमी से मल आंतों में सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। जिससे कब्ज रोगी को खांसी परेशानी होने लगती है।
डॉक्टर्स कब्ज को दूर करने के लिए अकसर ईसबघोल की भूसी खाने की सलाह देते हैं। इसे रात को सोने से पहले गर्म दूध में या फिर पानी में घोल कर भी पिया जा सकता है।
खाने में हरे पत्तेदार सब्जियों के अलावा रेशेदार सब्जियों का सेवन खासतौर पर करना चाहिए। इससे शरीर में तरल पदार्थों में बढ़ोत्तरी होती है।
चिकनाई वाले पदार्थ भी कब्ज के दौरान लेना अच्छा रहता है।
गर्म पानी और गर्म दूध कब्ज‍ दूर करते हैं। रात को गर्म दूध में केस्टनर यानी अरंडी का तेल डालकर पीना कब्ज को दूर करने में कारगार है।
नींबू को पानी में डालकर, दूध में घी डालकर, गर्म पानी में शहद डालकर पीने से कब्ज दूर होती है। सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से भी कब्ज को दूर करने में बहुत मदद मिलती है।
अलसी के बीज का पाउडर पानी के साथ लेने से कब्ज में राहत मिलती है
इस तरह के प्रभावी प्राकृतिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से कब्ज को स्थायी रूप से आसानी से दूर किया जा सकता है।


मस्सो का इलाज

मस्से त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं।
ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस के कारण होते हैं
आयुर्वेद में मस्सें की समस्या का इलाज होता है।
विटामिन इ को मस्सों पर लगाने से भी लाभ मिलता है।

लाखों लोग त्वचा की समस्याओं से ग्रसित रहते हैं। इनमे से कुछ समस्याएँ गंभीर होती हैं, और कुछ गौण समझी जाती हैं, और इन गौण समस्याओं में से एक समस्या होती है, मस्से।यह सिर्फ गौण ही नहीं बल्कि आम समस्याओं में गिनी जाती है। मस्से त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं, और सुसाध्य समझे जाते हैं, यानि कि वे कैंसरयुक्त नहीं होते। इसके बावजूद इनसे ग्रसित कई लोग इन्हें निकालने के लिए आतुर रहते हैं, क्योंकि उनके अनुसार मस्से त्वचा पर अच्छे नहीं दिखते। यह बात आप शायद न जानते हों कि मस्से 'ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस' के कारण विकसित होते हैं।
त्वचा पर बेडौल और रुखी सतह का विकास होना, मस्सों के लक्षण होते हैं। मस्से अपने आप विकसित होकर अपने आप ही गायब हो जाते हैं, पर इनमे से कई मस्से अत्याधिक पीड़ादायक होते हैं। यह तेज़ी से फैलते हैं, और इनमे से कई मस्से बरसों तक बने रहते हैं जिनका इलाज कराना ज़रूरी होता है।
बरगद के पेड़ के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही असरदार होता है। इस प्रयोग से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
एक चम्मच कोथमीर के रस में एक चुटकी हल्दी डालकर सेवन करने से मस्सों से राहत मिलती है।
कच्चे आलू का एक स्लाइस नियमित रूप से दस मिनट तक मस्से पर लगाकर रखने से मस्सों से छुटकारा मिल जायेगा।
केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। और ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से ख़तम नहीं हो जाते।
अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम पड़ जायेंगे, और धीरे धीरे गायब हो जायेंगे। अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं।
लहसून के एक टुकड़े को पीस लें, लेकिन बहुत महीन नहीं, और इस पीसे हुए लहसून को मस्से पर रखकर पट्टी से बांध लें। इससे भी मस्सों के उपचार में सहायता मिलती है।
एक बूँद ताजे मौसमी का रस मस्से पर लगा दें, और इसे भी पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में लगभग 3 या 4 बार करें। ऐसा करने से मस्से गायब हो जायेंगे।
बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्ते के डंठल का रस मस्से पर लगाने से मस्से झड़ जाते हैं। अगर तब भी न झड़ें, तो पान में खाने का चूना मिलाकर घिसें।
अम्लाकी को मस्सों पर तब तक मलते रहें जब तक मस्से उस रस को सोख न लें। या अम्लाकी के रस को मस्से पर मल कर पट्टी से बांध लें।

कसीसादी तेल मस्सों पर रखकर पट्टी से बांध लें।मस्सों पर नियमित रूप से प्याज़ मलने से भी मस्से गायब हो जाते हैं।पपीता के क्षीर को मस्सों पर लगाने से भी मस्सों के गायब होने में मदद मिलती है।थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड सावधानीपूर्वक लगाने से मस्से निकल जाते हैं।



बच्चे को चुप करना
नवजात बच्चें को शुरू के तीन महीने में दिक्कतें आती है, अक्सर उसको शाम के समय दर्द होता है। बच्चे को दूध पीते हुए भी प्रॉब्लम हो सकती है चाहे वो स्तनपान कर रहा हो या दूध की बोतल से दूध पी रहा हो। जब उसके पेट में थोडा दर्द हो रहा हो तो दोनों हाथों की हथेलिओं को रगड़कर उसके दर्द वाले जगह लगाये। अगर इससे उसको आराम नहीं मिल पा रहा तो फिर उसको डॉक्टर की सलाह से दवाई देनी होती है। छोटे बच्चे को कुछ चीजे पचती नहीं है सो उसको गैस की शिकायत भी रहती है।

गर्भधारण पर आहार

कुछ ऐसे प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार है जिनको अपनी डाइट में शामिल करके आप आसानी से गर्भधारण कर सकती हैं। आइए जानें ऐसे ही कुछ आहारों के बारे में।

1) प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार

गर्भाधारण में भोजन की अहम भूमिका होती है, लेकिन ज्‍यादातर महिलाएं इस ओर ध्‍यान ही नहीं देती। अगर आप गर्भाधारण करना चाहती हैं तो आपको फर्टिलिटी आहार के बारे में पता होना चाहिए ताकि आप आसानी से गर्भधारण कर सकें। कुछ ऐसे प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार है जिनको अपनी डाइट में शामिल करके आप आसानी से गर्भधारण कर सकती हैं। आइए जानें ऐसे ही कुछ आहारों के बारे में।

2) विटामिन सी युक्त आहार

रोचेस्टर मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय, न्यूर्याक के अनुसार- अगर आप गर्भवती होना चाहती है तो आयरन को अवशोषित करने के लिए मासिक धर्म के दौरान विटामिन सी वाले आहार जैसे संतरा, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी व किवी फ्रूट का सेवन बढ़ा देना चाहिए। इनका सेवन करने से महिलाओं को कंसीव करने में मदद मिलती है।

3) ओमेगा 3 फैटी वाले आहार

गर्भवती होने की इच्‍छा रखने वाली महिलाओं को बादाम, अखरोट और एप्रीकॉट को सेवन भी बढ़ा देना चाहिए। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए जरूरी होता है।

4) हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियां प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। इसमें मौजूद आयरन, फोलिक एसिड व एंटीऑक्सीडेंट काफी मददगार साबित होते हैं। पालक में पाया जाने वाला फोलिक एसिड गर्भधारण में मदद करता है।

5) बीटा केरोटीन युक्त आहार

महिलाओं को अपने खाने में नारंगी व पीले रंग की सब्जियों को शामिल करना चाहिए। यह सब्जियां एंटी ऑक्सीडेंट व बीटा केरोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं। बीटा केरोटीन महिलाओं में हार्मोन्स के असंतुलन को कम करता है जिससे आपको कंसीव करने में मदद मिलती है। इसके अलवा गर्भपात की संभावना भी कम हो जाती है।

6) फोलिक एसिड

फोलिक एसिड से भरपूर आहार भी गर्भधारण में मदद करते हैं क्‍योंकि फोलिक एसिड, प्रजनन प्रणाली में अंडों के प्रोडक्‍शन बढा़ कर जल्‍द गर्भधारण करने में मददगार साबित होता हैं। फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों में सोया प्रोडक्‍ट, बींस, आलू, गेहूं, पत्‍ता गोभी, बीट रूट, केला, ब्रोकली, अं‍कुरित दालें और चावल शामिल हैं।

7) फाइबर युक्त आहार लें

फाइबर युक्त आहार पचने में आसान होते हैं और इनके सेवन से पाचन क्रिया सही रहती है। जिससे शरीर में कोई भी विषैला तत्‍व नहीं रहता है। इसलिए गर्भधारण की इच्‍छा रखने वाली महिलाओं को अपने आहार में साबुत अनाज, ब्राउन राइस, गेहूं की ब्रेड, बींस और अलसी के बीज शामिल करना चाहिए।

8) भरपूर पानी का सेवन
स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं ज्यादा पानी पीने से गर्भधारण में भी मदद मिलती है। ज्यादा पानी पीने से प्रजनन अंग ठीक से कार्य करते हैं और स्पर्म सर्विक्स तक आसानी से पहुंचते हैं।

9) विटामिन बी युक्त आहार

अगर आप गर्भधारण करना चाहती हैं तो अंडे और इम्प्लांटेशन की रिहाई की मदद के लिए ओवुलेशन के सप्ताह के दौरान विटामिन बी से भरपूर खाद्य पदार्थ को शामिल करें। विटामिन बी में पत्तेदार साग, साबुत अनाज, अंडे, और स्वच्छ मांस युक्त आहार शामिल होता हैं।

10) डेयरी प्रोडक्‍ट

डेयरी प्रोडक्‍ट कैल्शियम का अच्‍छा स्रोत होने के साथ-साथ फर्टिलिटी हार्मोन यानी की एफएसएच और एलएच को भी बढ़ाते हैं। इसलिए गर्भधारण की इच्‍छुक महिलाओं को अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए दूध, दही, अंडे और मछली जैसे फर्टिलिटी खाद्य पदार्थ को अपने आहार में शमिल करना चाहिए।

11) अनानास

अगर आप गर्भधारण करना चा‍हती हैं तो ओवुलेशन के बाद सप्‍ताह के दौरान अनानास खाएं। क्‍योंकि इसमें पाया जाने वाला ब्रोमेलिन अंडे के आरोपण के दौरान गर्भाशय अस्‍तर को गाढ़ा होने में मदद करता है।
पथरी का इलाज

पत्थरचट्टा से पथरी के निकालने की विधि आयुर्वेद में भी है वर्णित।
यह किडनी स्टोन और प्रोस्टेट गंथि से जुड़े रोगों में है फायदेमंद।
इसके 4-5 पत्तों को सुबह शाम जूस के रूप में पीना फायदेमंद।
इस दौरान धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से बिलकुल परहेज करें।
पथरी ऐसी समस्या है जो बहुत ही कष्टदायी है। लोग इससे निजात पाने के लिए सर्जरी भी करवाते हैं। लेकिन कई तरीके ऐसे भी हैं जिनमें बिना सर्जरी के भी पथरी को आसानी से शरीर से निकाला जा सकता है। पत्थरचट्टा भी उन तरीकों में से एक है। आयुर्वेद में पत्थरचट्टे के पौधे को किडनी स्टोन और प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़े रोगों के इलाज में उपयोगी माना गया है। इसे पर्णबीज भी कहते हैं। इसके पत्ते को मिट्टी में गाड़ देने से ही यह उस स्थान पर उग जाता है। तासीर में सामान्य होने की वजह से इसका प्रयोग किसी भी मौसम में कर सकते हैं। इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। इसके बारे में विस्तार से इस लेख में जानते हैं।

पथरी के लिए फायदेमंद

पत्थरचट्टा के प्रयोग से पथरी आसानी से बाहर आ जाती है। महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज, पेशाब में जलन व पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या में भी यह बहुत ही लाभकारी है। इसके सेवन से 10-15 एमएम तक की पथरी पेशाब के जरिए बाहर निकल जाती है।

कैसे करें प्रयोग

पत्थरचट्ठा के 4-5 पत्तों को एक गिलास पानी में पीसकर सुबह-शाम जूस के रूप में लगभग 1-2 माह तक पिएं। जूस के अलावा पत्तों को चबाकर व पकौड़े बनाकर भी खाया जा सकता है। स्वस्थ व्यक्ति भी यदि इसके पत्तों का सेवन नियमित रूप से करे तो वह कई परेशानियों से बच सकता है।

इन बातों का ध्यान रखें

इस दौरान तम्बाखू, चूने, सुपारी आदि का सेवन करने से बचें।
एक गमले में पत्थरचट्टा का पौधा लगा लें, इस की डाली या पत्ता ही लग जाता है और कुछ ही दिनों में पौधा बन जाता है।
प्रति सप्ताह हम से कम एक पत्ते का सेवन करते रहें या सब्जी में एक-दो पत्ते डालें।
जिनको बार-बार पथरी होती रहती है, वे हर दूसरे दिन पत्थर चट्टा का आधा पत्ता सेवन करें, लेकिन बिंदु एक में वर्जित अस्वास्थ्यकर व्यसनों के साथ ही टमाटर के बीजों का सेवन भी नहीं करें।

पथरी की समस्या बहुत ही कष्टदायी होती है, इसलिए अगर इस प्रयोग को आजमाने के बाद भी पथरी की समस्या दूर नहीं हो रही है तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्य करें।

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