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हर्निया का इलाज कैसे करें?



हर्निया का इलाज कैसे करें?
शरीर का कोई अंग जब अपनी कंटेनिंग कपैसिटी यानी अपने खोल या झिल्ली से बाहर निकल आता है, तो उसे हर्निया कहते हैं। इसमें मरीज को तेज दर्द होता है, चलने-फिरने में दिक्कत होती है। कई मामलों में हर्निया खतरनाक भी हो सकता है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे हर्निया के प्रकार और हर्निया के इलाज के तरीके।
जानिए हर्निया के कुछ प्रकार
रिड्यूसेबल 

इस हर्निया में कोई अंग बाहर निकलता है, फिर अंदर भी चला जाता है। कई बार डॉक्टर हाथ लगाकर भी अंदर कर देते हैं। इस लेवल तक सर्जरी के बिना भी काम चल सकता है। 

इररिड्यूसेबल (Irreducible) :

इसमें ऑर्गन कैविटी से बाहर निकलने के बाद अंदर नहीं जाता। इसके बाद ऑपरेशन जरूरी होता है। 

स्ट्रंग्युलेटिड (Strangulated):

अगर आंत अंदर फंस कर रुक जाए और जिसकी वजह से ब्लड सप्लाई पर असर पड़ता है। यह इमरजेंसी की स्थिति होती है। ऐसे में छह घंटे के अंदर ऑपरेशन जरूरी होता है। आमतौर पर, यह स्थिति छोटे हर्निया के साथ ही होती है, जोकि बाहर निकलकर फंस जाता है। ऐसे में बेहतर है कि हर्निया के साइज छोटा रहते हुए ही ऑपरेशन करा लें। 
कब जाएं डॉक्टर के पास?

अगर शरीर में कहीं भी सूजन लगे, तो डॉक्टर को दिखाएं। दर्द होने पर तो जाना ही पड़ेगा, लेकिन दर्द आमतौर पर बाद की स्टेज में होता है और तब तक स्थिति खराब होने लगती है। 

नोट- यह जानकारी किसी भी स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं हैं। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
हर्निया का इलाज
इसमें दवाएं काम नहीं करतीं। आमतौर पर, दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से पेनकिलर के तौर पर पैरासिटामोल (Paracetamaol) ले सकते हैं। लेकिन बेहतर है कि पेनकिलर का इस्तेमाल कम-से-कम करें। 
दर्द से राहत के लिए हॉट वॉटर बैग से सिकाई कर सकते हैं। इससे मसल्स रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है। 
चूंकि, यह फिजिकल डिफेक्ट है, इसलिए सर्जरी जरूरी हो जाती है। हर्निया का इलाज जितनी जल्दी हो सके करा लेना चाहिए, वरना बाद में सर्जरी में दिक्क्त होती है। 
सर्जरी

सर्जरी में आमतौर पर मेश (जाली) डालते हैं, ताकि कमजोर मसल्स को सपोर्ट किया जा सके। अगर बिना जाली डाले सिर्फ टांके लगाकर बंद कर देंगे, तो वह हिस्सा फिर बाहर निकल आएगा। जाली में बारीक छेद होते हैं, जिनमें से टिशू ग्रो करके उसे जकड़ लेते हैं। जाली की उम्र करीब 10 साल होती है। लेकिन, फिर टिशू उसे मजबूती देते हैं और वह हमेशा बनी रहती है। इस पकड़ को बनाने में करीब छह महीने लगते हैं। 18 साल से कम उम्र के मरीजों यानी बच्चों में जाली नहीं डाली जाती, क्योंकि उनकी मसल्स बढ़ रही होती हैं। 
सर्जरी दो तरीके से होती है
ओपन और टेलिस्कोप यानी दूरबीन वाली। ओपन में दो मसल्स के बीच जाली लगाते हैं। पहले मसल्स की लेयर होती है, फिर जाली और फिर मसल्स की लेयर। इस प्रक्रिया में जाली आंत में टच नहीं करती। सरकारी अस्पतालों में सिर्फ जाली की कीमत देनी होती है। दूरबीन वाली सर्जरी में दो लेयरों में जाली डाली जाती है। जाली की अब्जॉर्बल यानी घुलने वाली लेयर इंटेस्टाइन की तरफ होती है। 
हर्निया से बचाव के लिए यह करें
वजन को कंट्रोल में रखें। अपने तय वजन को पांत किलो से ज्यादा न बढ़ने दें। 
हर्निया से बचाव के लिए पौष्टिक खाना खाएं। प्रोटीन डाइट लें, ताकि मसल्स मजबूत बनीं रहें। 
स्मोकिंग से परहेज करें। इससे खांसी होती है और खांसी हर्निया की वजह बनता है। 
हर्निया से बचाव के लिए खूब पानी पिएं ताकि पेशाब से जुड़ी बीमारी न हों। 
ज्यादा वेट लिफ्टिंग न करें। जो भारी एक्सरसाइज करते हैं, वे लंगोट बांधें या सपोर्ट लगाएं। 
बहुत ज्यादा या जल्दी-जल्दी सीढ़ियां न चढ़ें। 
पेट को मजबूत बनाने वाले आसन करें। 


शरीर में कई कारणों से हर्निया हो सकता है। हर्निया किसी भी प्रकार का हो, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द हर्निया का इलाज करा लेना चाहिए। क्योंकि, ऐसा करने से यह गंभीर रूप धारण कर लेता है, जिसमें कई बार असहनीय दर्द होता है। आप अपने जीवन में ऊपर बताए बदलाव लाकर भी इस समस्या से बच सकते हैं।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेन न भूलें।


हर्निया से बचाव के 5 आसान घरेलू नुस्खे


क्या-करें और क्या न करें, जिससे आपको हर्निया ना हो

हमारे शरीर के अंदर कुछ खोखले और रिक्त स्थान मौजूद होते हैं, जिन्हें बॉडी कैविटी कहते हैं। ये कैवेटी चमड़ी की झिल्ली और कुछ मांसपेशियों से ढकी होती हैं। जब ये झिल्लयां कभी-कभी फट जाती हैं या मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं, तो किसी अंग का कुछ भाग बाहर निकलकर उस जगह पर पहुंच जाता है, जहां उसे नहीं होना चाहिए। यही विकृति हर्निया है। अगर हर्निया दबाव या किसी झटके के साथ उभरता दिखा तो ये सामान्य (Reducible) हर्निया कहा जाता है, जिसे घटाया जा सकता है और ये खतरनाक नहीं होता। लेकिन अगर अंग या टिशू का वो हिस्स जो किसी कैवेटी में बढ़ गया है और वापस नहीं आ सकता तो इसे खतरनाक माना जाता है। इसे Incarcerated hernia कहते हैं, जो एक गंभीर समस्या है। सबसे ज्यादा खतरनाक हर्निया को स्ट्रैंगुलेटेड (strangulated) हर्निया कहते हैं, जिसमें टिशू में खून का प्रवाह रूक जाता है। हर्निया कई प्रकार के होते हैं जिसमें से ज्यादातर को कुछ में घरेलू टिप्स आजमाकर हर्निया से बचाव किया जा सकता है।
इंग्वाइनल हर्निया (Inguinal hernia)

वेक्षण हर्निया अर्थात इंग्वाइनल हर्निया पेट के निचले हिस्से में होता है। इस हर्निया में नसें और आंतों का कुछ हिस्सा जांघ की पिछली नली से नाभि के नीचे खिसक जाता है। महिलाओं के मुकाबले ये पुरुषों में सबसे ज्यादा होता है। पुरुषों में नसों का हिस्सा अंडकोष (testicles) में खिसक जाता है। ऐसा होने पर अंडकोष का आकार बढ़ जाता है। अंडकोष में सूजन हो जाने के कारण हाइड्रोसिल और हर्निया में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। हर्निया का यह प्रकार पुरुषों में पाया जाता है और ये घातक रूप भी ले सकता है। हर्निया के लगभग 70 प्रतिशत रोगियों को ये हर्निया ही होता है जिसमें भयानक दर्द होता है। 

नोट- यह जानकारी किसी भी स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं हैं। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
टिप्स
हर्निया एक ऐसी शारीरिक समस्या है, जिस पर सही समय पर अगर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा इसके लिए ऑपरेशन की एकमात्र जरिया बचता है। ऐसे में इन टिप्स की मदद से हर्निया से बचाव किया जा सकता है-
टिप नंबर-1: कब्ज से बचें

सबसे पहला उपाय तो यह है कि आप अपना पेट साफ रखें और कब्ज से बचें। कब्ज से पेट पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं और इंग्वाइनल हर्निया होने की संभावना ज्यादा रहती है। इसके अलावा ऐसे कार्यों को ज्यादा करने से बचें, जिनसे पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता हो। साथ ही अपने वजन को संतुलित रखने का प्रयास करें।
टिप नंबर-2 : धूम्रपान/मांसाहर से बचें

किसी भी प्रकार की धूम्रपान की आदत को तुरंतअलविदा कह दें। सिगरेट, तंबाकू से खांसी बढ़ती है। ज्यादा खांसने से निचले मांसपेशियों पर झटका पड़ता है। वहीं ज्यादा मांसाहार पेट पर दबाव बनाने के साथ कब्जियत बढ़ाता है।
टिप नंबर-3 : खानपान में बरतें ये सावधानी

अत्यधिक खाने से बचें और चाय, कॉफी एवं कैफीन युक्त अन्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। और पानी पीते समय एक बार में बहुत अधिक पानी न पिएं, बल्कि घूंट-घूंट में पान पिएं। इससे भी पेट पर कम दबाव पड़ेगा।
टिप नंबर-4 : खूब पानी पिएं पर समय का ध्यान रखें

पानी खूब पिएं पर खाना खाने के लगभग 1 घंटे बाद ही पानी पिएं। एक गिलास पानी में सेब का सिरका मिलाएं और इसे धीरे-धीरे घूंट-घूंट कर पिएं। 
टिप नंबर-5 : एक्सरसाइज करें

अपने वजन को कम करने का प्रयास करें। व्यायाम करें और पैदल चलना जारी रखें, इससे लाभ होगा।
निष्कर्ष

हर्निया के कुछ मामले जन्मजात होते हैं पर कुछ मामले जैसे इंग्वाइनल हर्निया हमारे असंतुलित खानपान, मोटापे और अगल आदतों की वजह से होते हैं। ऐसे में उपरोक्त टिप्स को अपनाकर आप हर्निया से बचाव कर सकते हैं।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।

जानें कब और क्यों होती है हर्निया की सर्जरी?


जब कोई फैटी टिशू, अंग या किसी अंग का हिस्सा शरीर की किसी कमजोर मांसपेशियों से बाहर निकल जाता है, तो इसे हर्निया कहते हैं। आमतौर पर देखा गया कि है कि हर्निया अपने आप ठीक नहीं होते हैं और लगातार समय के साथ बढ़ते चले जाते हैं। जब हर्निया लगातार बढ़ने लगते हैं तो ये जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए डॉक्टर्स इसकी सर्जरी की सलाह देते हैं। जरूरी नहीं है कि हर हर्निया की सर्जरी की जाए। ये पूर्ण रूप से इसके आकार और लक्षणों पर निर्भर करता है।

हर्निया की सर्जरी में मूल रूप से गलत जगह पर पहुंचे या बाहर निकले फैटी टिशू या अंग के हिस्से को वापस उसकी जगह सेट किया जाता है।
कब होती है हर्निया सर्जरी की आवश्यक्ता ?

आपका डॉक्टर निम्नलिखित लक्षणों को देखकर सर्जरी की सलाह दे सकता है-
किसी प्रकार के टिशू या आंतें अगर किसी अन्य हिस्से में चली जाएं और फंस जाएं तो इसे Incarcerated hernia कहते हैं। अगर इसका उपचार नहीं किया जाता तो आंते उलझ भी सकती हैं। इसकी वजह से आंत में खून का प्रवाह थम जाता है और टिशू मरने लगते हैं। ऐसी खतरनाक स्थिति में डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं।
किसी भी हर्निया की वजह से अगर खून का प्रवाह थम जाए तो सर्जरी बेहद जरूरी हो जाती है। ऐसा नहीं करने पर पूरा अंग काम करना बंद कर सकता है और आप गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं। 
जब हर्निया हद से ज्यादा बढ़ जाए या उसका रंग बदलने लगे तो भी ये सर्जिकल इमरजेंसी हैं।
कब सर्जरी की जरूरत नहीं?
अगर आपके लेटने से या हल्का दबाव देने से हर्निया वापस अपनी जगह पर चला जाता है, तो ऐसी स्थिति में सर्जरी की आवश्यक्ता नहीं पड़ती।
अगर हर्निया बेहद छोटा है और उसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, तो भी आपको सर्जरी की आवश्यक्ता नहीं होती है।
इतने तरह की होती है हर्निया की सर्जरी

आपका डॉक्टर एक-दो तरह से हर्निया को ठीक कर सकता है। कई मामलों में आपको कुछ दिन हॉस्पिटल में रहना पड़ सकता है जबकि अन्य मामलों में आप सर्जरी वाले दिन ही घर जा सकते हैं
ओपन सर्जरी

ओपन सर्जरी में सबसे पहले एनेस्थीसिया देकर मरीज का वह अंग सुन्न कर दिया जाता है। इसके बाद सर्जन प्रभावित जगह के ऊपर की स्किन काटकर हल्का दबाव बनाकर हर्निया को वापस धकेलने की कोशिश करता है। कई बार उस हिस्से पर गठान बांध दी जाती है तो कई बार उस हिस्से को अलग भी कर दिया जाता है। इसके बाद उस अंग के पास मजूद कमजोर मांसपेशियों को टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है। अगर हर्निया काफी बड़ा है तो सर्जन उस जगह पर सपोर्ट भी लगा सकता है।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

इस सर्जरी में सबसे पहले पेट को हानिरहित गैस से भर दिया जाता है। इसकी मदद से सर्जन पेट और अन्य अंगों को आसानी से देख पाता है। हर्निया का पता लगने के बाद उसके पास कई कट लगाए जाते हैं और उन छिद्रों से कैमरा (लैप्रास्कोप) अंदर डाला जाता है। इस कैमरे से मिली इमेज के आधार पर सर्जन हर्निया के उपचार की रूपरेख बनाते हैं। ओपन सर्जरी के मुकाबले इस सर्जरी में लोग तेजी से ठीक हो जाते हैं और अपने दैनिक कार्य फिर से शुरू कर सकते हैं।
हर्निया की सर्जरी में क्या खतरे हो सकते हैं ?

हर्निया के ऑपरेशन यूं तो बहुत ही सुरक्षित होते हैं, लेकिन सभी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ खतरे हो सकते हैं।
इंफेक्शन

अगर हर्निया प्रभावित अंग निकाला जाता है तो इंफेक्शन का खतरा रहता है।
ब्लड क्लॉट

आप लंबे समय तक एनेसथीसिया पर रहते हैं और हिलते-डुलते नहीं हैं। ऐसे में ब्लड क्लॉट की संभावना बढ़ जाती है।
दर्द


ज्यादातर मामलों में सर्जरी के बाद घाव भरने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों में घाव भरने के बाद भी लंबे समय तक दर्द बरकरार रहता है।
दोबारा हर्निया होना

कई मामलों में सर्जरी के बाद भी हर्निया वापस हो जाता है। रिसर्च में दावा किया गया है कि सर्जरी के दौरान सपोर्ट लगाने से इसे दोबारा रोका जा सकता है।
क्या बिना सर्जरी के हर्निया का उपचार संभव है? 

कई मामलों में डॉक्टर आपके हर्निया को देखकर सपोर्टर और कई तरह के खास बेल्ट्स देखने की सलाह दे सकता है। इस तरह के सपोर्टिव अंडरगार्मेन्ट हर्निया वाली जगह पर हल्का दबाव बनाकर उसे अपने जगह पर रखते हैं। इससे व्यक्ति को कुछ हद तक उसके दर्द से भी राहत मिल जाती है।

निष्कर्ष – हर्निया की सर्जरी उसके आकार और लक्षण पर निर्भर करती है। अगर आपको लगता है कि आपको हर्निया हुआ है तो घबराएं नहीं और अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

हाइटल हर्निया : एसिडिटी और बदहजमी को न करें नजरअंदाज

ये हाइटल हर्निया के लक्षण हो सकते हैं, रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप लंबे समय से एसिडिटी व बदहजमी का शिकार हैं और दवाईयों से आपको राहत नहीं मिलती तो सावधान हो जाएं, क्योंकि ये हाइटल हर्निया (Hiatal Hernia) हो सकता है। ऐसे में तत्काल डॉक्टर्स से मिलकर जांच कराई जानी चाहिए। हाइटल या हाइटस हर्निया तब होता है जब हमारे पेट का कुछ हिस्सा फैल कर सीने के नीचे चले जाता है। यहां एक छोटा से छेद (आमाशय के ऊपर मौजूद छिद्र) होता है, जिसके जरिए हमारी फूड पाइप पेट तक जाने से पहले गुजरती है लेकिन इस हर्निया के होने से पेट का हिस्सा इसी छेद से ऊपर की ओर आ जाता है। ऐसा होने पर खाना पेट से वापस फूड पाइप में चढ़ने लगता है व्यक्ति को सीने में भयानक जलन और एसिडिटी का अहसास होता है। इसी वजह से सीने की जलन या एसिडिटी को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ये हैं हाइटल हर्निया के लक्षण
आमतौर पर हाइटल हर्निया के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब ये बढ़ जाता है तो निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं-
सीने में जलन होना
डकार के साथ मुंह में खाना आ जाना
गले में जलन और एसिड आ जाना (एसिड रीफ्लक्स)
खाना निगलने में तकलीफ होना
सांसे उखड़ना
खून की उल्टी होना या काला मल त्याग होना, जिसका अर्थ है पेट के अंदर ब्लीडिंग
उपरोक्त लक्षणों के नजर आते ही बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए।
इस वजह से होता है हाइटल हर्निया

हमारे कमजाेर मसल्स को इस तरह के हर्निया के लिए जिम्मेदार माना जाता है। हालांकि, ऐसा क्यों होता है ये साफ नहीं है फिर भी मेडिकल साइंस में इसके पीछे इन वजहों को माना जाता है-
उम्र के साथ-साथ पेट के ऊपरी मसल्स में बदलाव आना
किसी चोट या सर्जरी की वजह से पेट के ऊपरी मसल्स कमजोरी होना
जन्म के दौरान बड़े हाइटस यानी (आमाशय के ऊपर मौजूद छिद्र) के साथ पैदा होना
पेट या उसके आसपास के हिस्सों में अत्यधिक दबाव पड़ना। इसके पीछे खांसी, उल्टी, किसी भारी वस्तु को उठाने जैसे कारण भी हो सकते हैं
किन लोगों को हो सकती है ये बीमारी


हाइटल हर्निया 50 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों को और मोटापे से ग्रस्त लोगों को हो सकती है।
ऐसे पता लगाया जा सकता है इस बीमारी का

सीने में जलन या अत्यधिक एसिडिटी की शिकायत के बाद डॉक्टर्स इसके होने का कारण पता कर सकते हैं, जिसमें हाइटल हर्निया का पता चल सकता है। 
डॉक्टर्स निम्नलिखित टेस्ट से इसका पता लगा सकते हैं-
1. पाचन तंत्र का एक्स-रे 

डॉक्टर्स एक्स-रे के जरिए हाइटल हर्निया का पता लगा सकते हैं। इसमें सबसे पहले एक लिक्विड पिलाया जाता है, जिससे ये पाचन तंत्र में पहुंचकर कोटिंग करता है। इस कोटिंग को देखकर डॉक्टर्स फूड पाइप और पेट में गड़बड़ी का पता लगा लेते हैं।
2. अपर एंडोस्कोपी

डॉक्टर्स फूड पाइप के जरिए एक ट्यूब पेट में उतारते हैं, जिसमें कैमरा और लाइट लगा होता है। इससे भी फूड पाइप और पेट में किसी समस्या को देखा जा सकता है।
3. ईसोफैगस मेनोमेट्री 

इस टेस्ट में मसल्स के कॉन्ट्रेक्शन को ध्वनि तरंगों की मदद से मापा जाता है। जैसे ही आप किसी चीज को निगलते हैं तो पता लग जाता है कि आपके मसल्स कितना दबाव बना रहे हैं। दबाव में किसी तरह का बदलाव हाइटल हर्निया की ओर इशारा करता है।

नोट- यह जानकारी किसी भी स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं हैं। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
ऐसे होता है हाइटल हर्निया का इलाज

यूं तो शुरुआती अवस्था में हाइटल हर्निया के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन सीने में अत्यधिक जलन होने पर इसकी जांच और उपचार बेहद जरूरी हो जाता है। निम्नलिखित तरीकों से हाइटल हर्निया का इलाज संभव है
दवाईयों के जरिए


अगर आपको सीने में जलन की शिकायत है तो डॉक्टर आपको कई तरह की दवाईयां दे सकता है। जैसे पेट में एसिड की मात्रा कम करने के लिए एंट एसिड और फूड पाइप को पहुंचे नुकसान को भरपाई के लिए भी दवाईयां दी जाती हैं।
सर्जरी

हाइटल हर्निया के कुछ मामलों में सर्जरी आवश्यक हो जाती है। डॉक्टर्स अगर पाते हैं कि प्रभावित व्यक्ति पर दवाईयों का कोई असर नहीं हो रहा है, या फूड पाइप सिकुड़ना शुरु हो जाए तो ऐसी खतरनाक स्थिति में सर्जरी के जरिए हर्निया को ठीक किया जाता है। इस सर्जरी में पेट को वापस अपनी जगह पर सेट किया जाता है। सर्जन इसके लिए पेट के ऊपर मौजूद छिद्र को छोटा कर सकते हैं।
हाइटल हर्निया से बचने के उपाय


आप अपने दैनिक जीवन में निम्न बदलाव कर इस तरह के हर्निया से बच सकते हैं
एकसाथ ज्यादा खाना खाने से बेहतर है दिन में कई बार छोटे-छोटे मील लें।
एसिडिटी से बचें। ऐसे खाने से परहेज करें, जिससे एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है, जैसे फ्राई, अत्यधिक तेल-मिर्च वाला खाना, लहसुन, चॉकलेट आदि।
शराब के सेवन से बचें।
दिन में खाना खाने या देर से खाना खाने के बाद लेटने से बचें
वजन नियंत्रित रखें

निष्कर्ष- आमतौर पर लोग एसिडिटी और सीने में जलन को अपच या खाने से जुड़ी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से वे बड़े खतरे में पड़ सकते हैं। बार-बार एसिडिटी की समस्या हो, तो एक बार हाइटल हर्निया के लिए जांच जरूर कराएं




फीमोरल हर्निया क्या है? जानें लक्षण और उपाय

जानें क्या है फीमोरल हर्निया (Femoral hernia)?
हमारी मांसपेशियां यूं तो हमारी आंतों और अन्य अंगों को जगह पर रखने के लिए काफी मजबूत बनी होती हैं। पर कई बार किसी अंदरूनी मांसपेशी में कमजोरी की वजह से पेट के निचले हिस्से में किसी अंग का हिस्सा उतर जाता है। लेकिन अगर कोई टिशू या अंग कमजोर मांसपेशियों को पार करता हुआ जांघ के हिस्से में मौजूद (femoral canal) में पहुंच जाए, तो इसे फीमोरल हर्निया femoral hernia कहते हैं। इस हर्निया में पेट के निचले हिस्से या जांघ के पास अजीब सा उभार नजर आने लगता है। फीमोरल कैनाल फीमोरल धमनियों और रक्तवाहिकाओं से भरी हुई होती है। ये हिस्सा पेट और जांघ के बीच जोड़ में मौजूद होता है। फीमोरल हर्निया को फीमोरोसिल femorocele भी कहते हैं।
कितना सामान्य है फीमोरल हर्निया?

वैसे देखा जाए तो इस तरह का हर्निया कम ही होता है। हालांकि, पुरुषों से ज्यादा इस हर्निया के होने की संभावना महिलाओं में ज्यादा होती है। ज्यादातर हर्निया जो पेट के निचले हिस्से में होते हैं वो इंग्वाइनल हर्निया inguinal hernias होते हैं। कुल मिलाकर सभी हर्निया में से 3 प्रतिशत ही फीमोरल होते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।
क्या है फीमोरल हर्निया के लक्षण?

कई तरह के छोटे और मध्यम हर्निया के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। फीमोरल हर्निया के कई मामलों में भी हो सकता है कि कोई लक्षण नजर ना आएं। लेकिन अगर हर्निया का आकार बड़ा है, तो ये तकलीफदेह हो सकता है और इसे आसानी से पहचाना भी जा सकता है। पेट के निचले हिस्से से लेकर जांघ के ऊपरी हिस्से में उभार नजर आने लगता है। कई बार खड़े होने पर, किसी भारी वस्तु उठाने पर और अत्यधिक मेहनत करने पर भयानक दर्द का अहसास होता है। आमतौर पर फीमोरल हर्निया हिप बोन के पास होता है, जिसकी वजह से हिप में भी दर्द का अहसास होता है। इसे hip pain भी कहते हैं।

फीमोरल हर्निया तब खतरनाक रूप ले लेता है जब ये आपकी आंतों में अवरोध पैदा करने लगे। इस खतरनाक स्थिति को strangulation कहते हैं। strangulation की वजह से आंतें या बॉवल टिशू मरने लगते हैं और इससे आपकी जान खतरे में पड़ जाती है। ये एक तरह की मेडिकल इमरजेंसी है। इस स्थिति में निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं-
भयानक पेट दर्द
पेट के नीचे अचानक दर्द
बेचैनी
उल्टी

अगर आपको उपरोक्त लक्षण नजर आते हैं तो तत्काल डॉक्टर की मदद लें। अगर हर्निया की वजह से आपकी आंतों में खून के प्रवाह में अवरोध आता है तो इमरजेंसी ऑपरेशन कर जान बचाई जा सकती है। 

उपरोक्त के अलावा भी कई तरह के लक्षण इस हर्निया में नजर आ सकते है। अगर आपको किसी लक्षण को लेकर परेशानी है, तो अपने डॉक्टर से बात करना ना भूलें।
कब मिलें डॉक्टर से?

अगर आपको किसी भी तरह के लक्षण नजर आते हैं, या मन में कोई शंका है तो मेडिकल टेस्ट कराएं या डॉक्टर से मिलें। हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। इसलिए इस स्थिति में सबसे बेहतर है डॉक्टरी सलाह।
किस वजह से होता है फीमोरल हर्निया?

अबतक फीमोरल हर्निया की किसी ठोस वजह का पता नहीं चल सका है। पर ऐसा माना जाता है कि जन्म के दौरान कमजोर फीमोरल कैनाल के होने से या भविष्य में फीमोरल कैनाल के कमजोर पड़ने पर ये बीमारी होती है।
इन वजहों से होता है फीमोरल हर्निया का खतरा?
लगातार कब्जियत
ज्यादा वजन उठाना
मोटापा
प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना
लगातार खांसी
कैसे पता चलता है इस बीमारी का?

डॉक्टर शारीरिक जांच कर और प्रभावित हिस्से को छूकर ही इसका पता लगा सकते हैं। अगर हर्निया बड़ा है, तो निश्चित ही उसमें उभार नजर आता है। अगर छूकर पता न चले तो स्कैन से भी हर्निया का पता लगाने के साथ कमजोर मांसपेशियों का पता किया जा सकता है।
कैसे होता है फीमोरल हर्निया का इलाज?

अगर फीमोरल हर्निया छोटा है या उसके कोई लक्षण नजर नहीं आते तो इसके इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। डॉक्टर इसपर निगरानी रखते हैं अगर ये बढ़ता है और मध्यम या बड़े आकार का होता है, तो ही सर्जरी की आवश्यक्ता पड़ती है। फीमोरल हर्निया की सर्जरी में पहले बाहर आए अंग के हिस्से को वापस अपनी जगह पर ढकेला जाता है। इसके बाद कमजोर मांसपेशियों को ठीक किया जाता है। अन्य हर्निया के मुकाबले इस हर्निया के बढ़ने पर सीधे सर्जरी की सलाह दी जाती है क्योंकि इसके खतरे ज्यादा हैं।
इन दो तरीकों से होता है फीमोरल हर्निया का इलाज
ओपन सर्जरी (Open surgery)

इस सर्जरी में कट लगाकर सर्जन बाहर आए हिस्से को वापस ढकेलता है।
लैप्ररोस्कोपी या कीहोल सर्जरी 
(Laproscopy (keyhole) surgery) 

इसमें कई कट लगाकर लैप्रोस्कोप/कैमरा की मदद से सर्जन प्रभावित जगह को देखता है और सर्जरी करता है।

हर सर्जरी के अपने-अपने फायदे और नुकसान है। ये आपकी स्थिति पर निर्भर करता है कि आपके लिए कौन सी सर्जरी सही रहेगी। कुछ लोग सर्जरी के बाद उसी दिन घर जा सकते हैं। जबकि कुछ लोगों को ठीक होने में कुछ महीने लग सकते हैं। ज्यादातर लोग फीमोरल हर्निया सर्जरी के बाद छह हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

हर्निया के भयानक दर्द से बचाएंगी घर पर मौजूद ये चीजें



बर्फ, अदरक और सिरके से करें हर्निया का उपचार

जब पेट या जांघ के कुछ मसल्स कमजोर पड़ जाने पर आंत या नसें किसी अन्य जगहों पर चली जाती हैं तो इसे हर्निया कहते हैं। पुरुषों में ये समस्या ज्यादा देखी जाती है, जिसमें आंतों का कुछ हिस्सा अंडकोषों में उतर जाता है। इसे वेक्षण हर्निया अर्थात इंग्वाइनल हर्निया कहते हैं। वहीं कई मामलों में आंत का एक हिस्सा पेट की मसल्‍स के एक कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है। इसमें पेट की त्वचा के नीचे असामान्य उभार आ जाता है, जो नाभि के नीचे होता है। इसे अम्बिलिकल हर्निया कहते हैं। इंग्वाइनल हर्निया में भयानक दर्द होता है, जिससे कई बार पुरुषों को बेहोशी तक आ जाती है। ऐसे में इसके दर्द और उपचार के लिए कुछ घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं।

नोट- यह जानकारी किसी भी स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं हैं। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
1.बर्फ से भगाएं दर्द


बर्फ हर्निया का उपचार करने में मददगार साबित हो सकता है। बर्फ से हर्निया के दर्द को कम करना बहुत ही पुराना, आसान और प्रचलित उपाय है। बर्फ को हर्निया वाली जगह पर लगाने से काफी आराम मिलता है। दर्द के साथ-साथ अंडकोष या अन्य जगहों पर आई सूजन और गठान भी कम होती है। खेलकूद में शामिल लोगों को हर्निया होने की संभावना ज्यादा रहती है। उन्हें भी इसके दर्द से ऐसे ही आराम दिया जाता है।
2.गर्म पानी



इसके अलावा पेट के या अम्बिलिकल हर्निया के लिए गर्म पानी की बॉटल से सिकाई की जा सकती है। सिखाई की वजह से प्रभावित अंग का खून सतह तक आ जाता है और हर्निया को ठीक होने में सबसे ज्यादा मदद मिलती है।
3.अदरक की जड़


मेडिकल साइंस में अदरक को बहुत महत्व दिया गया है सदियों से इसे दर्द कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। अदरक की जड़ पेट में गैस्ट्रिक एसिड से हुए नुकसान से बचाव करती है। यह हर्निया से हुए दर्द में भी काम करता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों दवाई की तरह प्रभावी हैं। आप इसका सेवन इसे उबाल कर इसकी चाय बनाकर कर सकते हैं या इस स्थिति में होने वाले दर्द और असुविधा को कम करने के लिए कच्‍ची अदरक भी खा सकते हैं
4.एप्‍पल साइडर विनेगर (सिरका)

एप्‍पल साइडर सिरका हर्निया के कारण होने वाले लक्षण जैसे हार्टबर्न और एसिडिटी की तकलीफ को कम करने का एक उत्‍कृष्‍ट उपाय है। जब भी आपको एसिडिटी या हार्टबर्न महसूस हो तो एप्‍पल साइडर सिरके की 1 से 2 चम्‍मच को गर्म पानी में मिलाकर, घूट-घूट करके पीएं। इसके अलावा इसका सबसे अच्छा फायदा यह है कि ये मोटापे में वजन कम करने में भी सहायक है। हर्निया से प्रभावित लोगों को हमेशा वजन कम करने की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष- इंग्वाइनल हर्निया और अम्बिलिकल हर्निया के कुछ मामलों में असहनीय दर्द होता है। कई बार लगातार दवाई लेने से भी हमारे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इसके लिए इन घरेलू उपचार की मदद भी ली जा सकती है। इसके अलावा हर्निया के शुरुआती लक्षण दिखते ही इसका इलाज कराया जाना चाहिए क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ इसकी सर्जरी में मुश्किलें आने लगती हैं।


क्या प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है हर्निया ?


लोगों में हर्निया की दिक्कत तब आती है जब शरीर का अंदरूनी अंग या कोई हिस्सा या टिशू किसी और जगह पर चले जाएं या बढ़ जाता है। ज्यादातर मामलों में हर्निया पेट या पेट के निचले हिस्सों में होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी हर्निया होना संभव है। हालांकि, ये तबतक चिंता का विषय नहीं है जबतक इसमें किसी प्रकार का दर्द न हो। लेकिन अगर आपको लगता है कि बात बिगड़ रही है तो बिना देर किए डॉक्टर की मदद ली जानी चाहिए क्योंकि कई मामलों में हर्निया खतरनाक साबित हो सकता है। प्रेग्नेंसी के पहले और बाद में हर्निया की जांच जरूरी है जिससे डॉक्टर्स संभावित खतरे और उनसे निपटने के तरीके बता सकते हैं।
किस वजह से होता है हर्निया?

हर्निया कमजोर मसल्स की दीवार के टूटने या पूर्ण रूप से विकसित नहीं होने की वजह से होते हैं। दरअसल हमारे शरीर में अंदरूनी कैवेटी चमड़ी की झिल्ली से ढकी होती है। जब इन कैवेटी की झिल्लियां कभी-कभी फट जाती हैं, तो किसी अंग का कुछ भाग बाहर निकल जाता है और उस जगह पर पहुंच जाता है, जहां उसे नहीं होना चाहिए। यही विकृति हर्निया है। कई लोगों में यह विकृति जन्म से कमजोर सेल्स की वजह से आ जाती है, तो कई बार भारी वजन होने से, पेट में तरल भरने या अत्यधिक दबाव पड़ने, मलमूत्र के वेग रोकने से, अत्यधिक खांसने या छींकने से और अत्यधिक मोटापे की वजह से भी होती है। वहीं प्रेग्नेंट महिलाओं में यह विकृति इसलिए आती है क्योंकि इस समय उनकी मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, मांसपेशियां पतली और कमजोर हो जाती हैं।
क्या हैं हर्निया के लक्षण?

कई महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान हर्निया के लक्षण किसी भी तरह से नजर नहीं आते तो वहीं कई में लक्षण साफ दिखाई देते हैं। लेटने पर या छूने पर एक गांठ या उभारी महसूस होता है। ये चमड़ी के नीचे से उठा हुआ नजर आता है। वहीं किसी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान, झुकने, खांसने और जोर से हंसने पर दर्द महसूस होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान हर्निया होने से गर्भवती महिलाओं को हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती हैं
कैसे होता है हर्निया का इलाज?

हर्निया को ठीक करने का एकमात्र तरीका सर्जरी है। लेकिन इस तरीके से बच्चे और उसकी मां खतरे में पड़ सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर्स बच्चा हो जाने के बाद जब मां पूरी तरह स्वस्थ हो जाती है, तब ऑपरेशन करते हैं। 
कैसे बचें हर्निया से?

हर्निया को रोक पाना संभव नहीं है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि प्रेग्नेंसी से हर्निया बढ़ता है बल्कि सिर्फ इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि आप अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों से बचे रहें।

ऐसे बच्चे जन्म से ही हो सकते हैं अम्बिलिकल हर्निया का शिकार

जन्म के दौरान कई बार बच्चों की नाभि (Umbilical cord) बाहर को निकली हुई होती है या सामान्य से ज्यादा उभरी हुई और बड़ी होती है। ऐसा अम्बिलिकल हर्निया की वजह से हो सकता है। आमतौर पर बच्चों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है मगर 3 साल की उम्र तक भी बच्चे की नाभि का यह हिस्सा कम न हो तो ये निश्चित ही अम्बिलिकल हर्निया के संकेत हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
जानें शिशु की नाभि के बारे में

बच्चे के जन्म से पहले बच्चे के विकास के लिए जो भी जरूरी पोषक तत्व चाहिए, वो उसे मां द्वारा गर्भनाल से मिलते हैं। ये गर्भनाल बच्चे के पेट पर नाभि वाली जगह से जुड़ी होती है। जन्म के बाद बच्चे के साथ ये गर्भनाल भी बाहर आ जाती है। जन्म के बाद इस नाल को बांधा जाता है और काट दिया जाता है। क्योंकि इस नाल में कोई नस नहीं होती है इसलिए बच्चे को दर्द नहीं होता है। अगर इसे बांधा नहीं भी जाता है, तो स्वाभाविक रूप से खुद ही बंद हो जाती है।
किस वजह से होता है अम्बिलिकल हर्निया?

जन्म से लेकर 3 साल तक बच्चे के तमाम अंदरूनी अंगों का विकास तेजी से होता रहता है। ऐसे में अगर कोई आंतरिक अंग बच्चे के पेट में किसी कमजोर हिस्से पर दबाब बनाता है, तो वो हिस्सा उभर आता है। आमतौर पर जन्म के दौरान अम्बिलिकल कॉर्ड यानी नाभि वाला हिस्सा कमजोरी होता है क्योंकि उस जगह से गर्भनाल निकलने की जगह होती है। ऐसे में अत्यधिक दबाव गर्भनाल को भी तय सीमा से ज्यादा बाहर धकेल देता है।

कई बार जब मां एक से ज्यादा बच्चे को जन्म दे तभी भी किसी एक या दोनों बच्चों को प्रतिकूल माहौल की वजह से ये बीमारी हो सकती है। इसी स्थिति को अम्बिलिकल हर्निया कहते हैं। बच्चों में ये हर्निया सामान्य है मगर बड़ों को भी ये समस्या हो सकती है। सामान्यतः शुरुआती दिनों में 10 प्रतिशत बच्चों में ये समस्या होती है, जिनमें से ज्यादातर बच्चों में ये अपने आप ठीक हो जाती है।
क्या खतरनाक है नाभि का हर्निया?

आमतौर पर इस तरह का हर्निया का खतरनाक नहीं होता लेकिन अगर इसकी वजह से किसी हिस्से में खून का प्रवाह रूक जाए तो यह स्थिति खतरनाक होती है।
कैसे होती है अम्बिलिकल हर्निया की जांच?

आमतौर पर डॉक्टर्स शिशु की नाभि देखकर अम्बिलिकल हर्निया के बारे में पता लगाते हैं। कई मामलों में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के द्वारा इस बात की जांच की जाती है कि अम्बिलिकल हर्निया के कारण शरीर में कोई परेशानी या किसी अंदरूनी अंग का दबाव तो नहीं है। इसके अलावा ब्लड इंफेक्शन या एस्केमिया की आशंका होने पर खून की जांच भी की जाती है।
क्या है उभरी हुई नाभि का इलाज?
अगर शिशु की उभरी हुई नाभि 3-4 साल की उम्र तक ठीक नहीं होती है, तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई बार बच्चे को इस हर्निया के कारण दर्द होता है या ब्लड सर्कुलेशन में समस्या आती है, तो भी सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई बार बच्चों के पेट में दर्द का कारण आंत में मरोड़ भी हो सकता है इसलिए ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

निष्कर्ष- यूं तो नाभि में कई उभार अपने आप चले जाते हैं पर अगर ऐसा न हो तो बच्चों के डॉक्टर को अवश्य दिखाना चाहिए। वहीं व्यस्कों में एक उम्र के बाद भी इस तरह के उभार नाभि में आ जाते हैं। ऐसा कमजोर मांसपेशियों की वजह से होता है, इसके लिए भी डॉक्टर की मदद ली जानी चाहिए।




पेट के निचले हिस्से और अंडकोष में दर्द को भूलकर न करें नजरअंदाज




वेक्षण हर्निया अर्थात इंग्वाइनल हर्निया पेट के निचले हिस्से में होता है। इस हर्निया में नसें और आंतों का कुछ हिस्सा जांघ की पिछली नली से नाभि के नीचे या अंडकोष (testicles) में खिसक जाता है। ऐसा होने पर अंडकोष का आकार बढ़ जाता है। अंडकोष में सूजन हो जाने के कारण हाइड्रोसिल और हर्निया में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। हर्निया का यह प्रकार पुरुषों में पाया जाता है और ये घातक रूप भी ले सकता है। हर्निया के लगभग 70 प्रतिशत रोगियों को ये हर्निया ही होता है जिसमें भयानक दर्द होता है। हालांकि ऐसी स्थिति अधिकतर जन्‍म से पहले होती है। ऐसे में कुछ बातों को कभी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए…

नोट- यह जानकारी किसी भी स्वास्थ्य परामर्श का विकल्प नहीं हैं। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
पुरुषों में इंग्वाइनल हर्निया के लक्षण
अंडकोष में सूजन आना
जांघों पर सूजन आना
कमर या अंडकोष की थैली में उभार आ जाना
अंडकोष में अचानक दर्द और गांठ उभरना 
हर्निया के अन्‍य लक्षण
पेट और कमर या कमर के आसपास दर्द होना।
पेट पर अधिकतर दबाव पड़ने के कारण दर्द होता है।
भारी वस्‍तु उठाने के बाद निचले हिस्से में दर्द होना
बाथरूम या शौच के दौरान तकलीफ होना।

हर्निया होने पर व्‍यक्ति लंबे समय तक न तो खड़ा रह सकता और न ही बैठ सकता है। अधिक देर तक खड़े रहने या बैठने में दर्द महसूस होता है। पुरुष को खांसते समय पेट और आंतों में दर्द का अनुभव हो सकता है। इसका असर पुरुष की कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। इसलिए यदि आपको इसका लक्षण दिखे तो तुरंत चिकित्‍सक से संपर्क करें।
पुरुषों को क्यों होता है इंग्वाइनल हर्निया?

इंडायरेक्ट और इंग्वाइनल हर्निया जन्म से हो सकता है। ऐसा जन्म के पहले विकास में हुई गड़बड़ियों की वजह से होता है। अम्बिलिकल हर्निया यानी नाभी का हर्निया तब होता है जब नाभी का छोर पूरी तरह से बंद नहीं हो पाता। ऐसे अन्य तरह के हर्निया में मांसपेशियों और झिल्लयां ठीक से नहीं बन पातीं और कमजोर पड़ती जाती हैं।
इन वजहों से भी हो सकता है हर्निया
समय से पहले पैदा होना: जो लोग जन्म के दौरान समय से पहले पैदा होते हैं, या कम वजन के साथ पैदा होते हैं उन्हें जन्म के दौरान ही या भविष्य में हर्निया होने की संभावना ज्यादा होती है।
अचानक वजन बढ़ना/मोटापा
भारी वस्तु उठाने से
कब्ज की वजह से
लगातार खांसी से
कब होता है खतरा

जब किसी पुरुष को इंग्वाइनल हर्निया होता है और नस या आंत का हिस्सा वापस अपनी जगह न जाए तो इसकी वजह से अंडकोष या प्रभावित जगह का आकार बढ़ने लगता है। इसमें असहनीय दर्द होता है और बाहर आई आंत या नसों में खून का प्रवाह रूक जाता है, जिससे वो पूरी तरह खराब हो सकती है। अगर उस गठान का रंग लाल या बैंगनी पड़ जाए तो ये खतरे की घंटी है। ऐसे में डॉक्टर को दिखाकर सर्जरी कराई जा सकती है।

निष्कर्ष- इंग्वाइनल हर्निया में असहनीय दर्द पुरुषों की कार्यक्षमता और उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। इस हर्निया के शुरुआती लक्षण दिखते ही इस इलाज कराया जाना चाहिए क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ इसकी सर्जरी में मश्किलें आने लगती हैं।

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