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पेट और जांघों को पतला करने के लिए योग के 5 टिप्स!


पेट और जांघों को पतला करने के लिए योग के 5 टिप्स!

वजन घटाने के लिए योग को सबसे कारगर और सरल तरीका माना जाता है। योग को लेकर सबसे बढि़या बात यह है कि इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। योग किसी भी उम्र वर्ग के लिए खासा लाभदायक है। गर्भवती महिलाओं को भी कुछ विशेष सावधानियों के साथ योग करने की सलाह दी जाती है। ज्ञात हो कि तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां जन्‍म लेती हैं। लेकिन योग के आसनों के जरिये इससे निजात पाया जा सकता है। 
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नई दिल्ली : वजन घटाने के लिए योग को सबसे कारगर और सरल तरीका माना जाता है। योग को लेकर सबसे बढि़या बात यह है कि इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। योग किसी भी उम्र वर्ग के लिए खासा लाभदायक है। गर्भवती महिलाओं को भी कुछ विशेष सावधानियों के साथ योग करने की सलाह दी जाती है। ज्ञात हो कि तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां जन्‍म लेती हैं। लेकिन योग के आसनों के जरिये इससे निजात पाया जा सकता है। 


वजन घटाने और फिट रहने के लिए योग काफी कारगर है और इससे तनाव का स्‍तर घटने के साथ व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ता है। नीचे योग के कुछ आसनों के बारे में जिक्र किया गया है, जिसको निरंतर करने से वजन घटाने में काफी मदद मिलती है।
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चक्रासन: योग के तहत यह एक अहम आसन है, जिसके जरिये आप अपने पेट को दुरुस्‍त और संबंधित मसल्‍स को पूरी तरह ठीक रख सकते हैं। इस आसन में पहले आप पीठ के सहारे लेट जाएं, फिर घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवे को कुछ दूरी बनाकर जमीन पर टिकाकर रखें। फिर अपने हाथों को शरीर की दिशा में ले जाएं। ध्‍यान रहे कि हथेलियां नीचे की ओर रहे। आप अपने हाथों को मिलाकर साथ रखें और फिर अपने शरीर को उपर की ओर उठाएं। इस अवस्‍था में तीस सेकेंड से लेकर 01 मिनट तक रहें। फिर शरीर को धीरे धीरे सतह पर ले आएं। इस अभ्‍यास को पांच बार दोहराएं।
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भुजंगआसन : इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए नाग के समान हो जाती है इसीलिए इसको नाग आसन, भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है। इस आसन से पेट की चर्बी घटती है तथा रीढ़ की हड्डी सशक्त बनती है। दमे की, पुरानी खांसी अथवा फेफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, तो उनको यह आसन करना चाहिए। इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है। मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते हैं। पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियां दूर होती है। कब्ज दूर होता है। इस आसन को करते समय अकस्मात् पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें। उल्टे होकर पेट के बल लेट जाए। ऐड़ी-पंजे मिले हुए रखें। ठोड़ी फर्श पर रखी हुई। कोहनियां कमर से सटी हुई और हथेलियां ऊपर की ओर। इसे मकरासन की स्‍थिति कहते हैं। धीरे-धीरे हाथ को कोहनियों से मोड़ते हुए आगे लाएं और हथेलियों को बाजूओं के नीचे रख दें। ठोड़ी को गरदन में दबाते हुए माथा भूमि पर रखे। पुन: नाक को हल्का-सा भूमि पर स्पर्श करते हुए सिर को आकाश की ओर उठाएं। फिर हथेलियों के बल पर छाती और सिर को जितना पीछे ले जा सकते हैं ले जाएं किंतु नाभि भूमि से लगी रहे। 0 सेकंड तक यह स्थिति रखें। बाद में श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को नीचे लाकर माथा भूमि पर रखें। छाती भी भूमि पर रखें। पुन: ठोड़ी को भूमि पर रखें और हाथों को पीछे ले जाकर ढीला छोड़ दें। शुरू में 30 सेकेंड करने के बाद लंबे अभ्यास के बाद इसे तीन मिनट तक किया जा सकता है। कम से कम दो से पांच बार कर सकते हैं।
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धनुरासन : इस आसन को करने से शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसको धनुरासन कहते हैं। यह आसन मेरुदंड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। पेट की चर्बी कम होती है। हृदय मजबूत बनाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। कब्ज दूर होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है। श्वास की क्रिया व्यवस्थित चलती है। सर्वप्रथम मकरासन में लेट जाएं। मकरासन अर्थात पेट के बल लेट जाएं। ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। हाथ कमर से सटे हुए और पैरों के पंजे एक-दूसरे से मिले हुए। तलवें और हथेलियां आकाश की ओर रखें। घुटनों को मोड़कर दाहिने हाथे के पंजे से दाहिने पैर और बाएं हाथ के पंजे से बाएं पैर की कलाई को पकड़ें। सांस लेते हुए पैरों को खींचते हुए ठोड़ी-घुटनों को भूमि पर से उठाएं तथा सिर और तलवों को समीप लाने का प्रयत्न करें। जब तक आप सरलता से सांस ले सकते हैं इसी मुद्रा में रहें। फिर सांस छोड़ते हुए पहले ठोड़ी और घुटनों को भूमि पर टिकाएं। फिर पैरों को लंबा करते हुए पुन: मकरासन की स्थिति में लौट आएं।
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पश्चिमोत्‍तनासन : पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं. इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। इसके अभ्यास से शरीर की चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है तथा मधुमेह का रोग भी ठीक होता है। अपने पैर को सामने की ओर सीधी करके बैठ जाएं। दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए। पीठ को इस दौरान बिल्‍कुल सीधा रखें और फिर अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। ध्‍यान रखें कि आपका घुटना न मुड़े और अपने ललाट को नीचे घुटने की ओर झुकाए। 5 सेकेंड तक रुकें और फिर वापस अपनी पोजीशन में लौट आएं। यह पोजीशन किडनी की समस्‍या के साथ क्रैम्‍स आदि जैसी समस्‍या से भी निजात दिलाता है।
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चक्‍की चलनासन : योग का यह आसन पेट की चर्बी को दूर करने में काफी कारगर है। इससे वजन कम करने में भी फायदा मिलता है। पहले आप जमीन पर आराम से बैठ जाएं। इस दौरान अपने पैरों को सामने की ओर से फैलाएं। दोनों पैर आपस में सटे रहें, इस बात का ध्‍यान रखें। अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर पकड़ लें और फिर बिना घुटनों को मोड़े सर्कुलर (चक्र के तौर पर) दिशा में घुमाएं। दस बार इस आसन को घड़ी की दिशा में घुमाएं और फिर कुछ देर रुकने के बाद इस बार घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं। फिर धीरे-धीरे छोड़ दें।
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योगासनों का सीधा ताल्लुक हमारे शरीर और स्वास्थ्य से होता है। इसलिए यह बहुत लाभदायक है। इससे आजकल के लाइफस्टाइल के चलते होने वाली कई बीमारियां कंट्रोल हो सकती हैं। सिर्फ यही नहीं, महिलाएं भी इसका फायदा उठा सकती हैं। इससे कई स्त्रीरोगों पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं हैं। लेकिन, इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से ज़रूर सलाह लें।
1- मार्जरासन
इस आसन के अभ्यास से आपकी गर्दन, कंधे और पीठ में ज़्यादा लचीलापन आता है। यह मासिक धर्म के दौरान ऐंठन की समस्या का भी इलाज है और कई स्त्रीरोगों का भी।
ज़मीन पर चटाई बिछा लीजिए और उस पर अपने घुटने टेक लीजिए। आगे से झुकें और अपने हाथों को भी ज़मीन पर जमा लें, बिल्कुल ऐसे ही जैसे की कोई बच्चा क्रॉल करना शुरू करता है। इस मुद्रा मेंआपनी बाजू और जांघों को सीधा रखें।
गहरी सांस लें, अपनी पीठ को अंदर की तरफ दबाएं और ऊपर देखें। इस मुद्रा में 3 सेकंड तक रहें।
सांस छोड़ें, पीठ को ऊपर उठाएं और पेट को सिकुड़ने दें। आप अब ऊपर नहीं, बल्कि सिर झुक कर अपने साइज की ओर देख रही हैं। इस मुद्रा में 3 सेकंड तक रहें।
अब वापस उसी मुद्रा में आ जाएं, जहां से शुरुआत की थी।
यह पहला राउंड था। आपको ऐसे 10 राउंड्स करने हैं।
2- भुजंगासन
पेट के बल लेट जाएं। आपके पैरों के तलवों में गैप हो, लेकिन पैरों के अंगूठे जोड़ लें। अपने माथे को ज़मीन पर लगने दें और आपकी हथेलियां भी ज़मीन पर फ्लैट हों।
इस आसन के अभ्यास से आपके पेट की चर्बी कम होती है, आपकी पीठ मजबूत बनती है, कई स्त्रीरोगों में आराम मिलता है और कब्ज़ की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
सांस लें, अपने सीने को आगे की तरफ स्लाइड करें, ऊपर देखें। अपने सीने और कंधों को भी ऊठाएं।
आपकी कोहनियां थोड़ी मुड़ी हुई हों, लेकिन बॉडी और कोहनी में ज़्यादा गैप न हो।
इस मुद्रा में रहने के लिए अपनी हथेलियों का सहारा लें।
सांस छोड़ें और उसी मुद्रा में आएं, जहां से शुरुआत की थी।
3- शशांकासन
इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, पीठ की समस्याएं दूर होती हैं, यह तंत्रिकाओं/नर्व पर पड़ने वाला दबाव को कम करता है और प्रजनन प्रणाली/रिप्रोडक्टिव सिस्टम की समस्याओं का भी आसान इलाज है।
अपने घुटनों के बल, पैर की एड़ी पर बैठ जाइए। घुटने जोड़ लें और हथेलियां जांघों पर रख लें।
आपका सिर और पीठ सीधी होनी चाहिए।
सांस लें, अपने हाथ सिर के ऊपर ले जाएं और सीधे रखें। हथेलियां सामने की तरफ हों।
सांस छोड़ें और धीरे-धीर आगे की तरफ झुकना शुरू करें, लेकिन बाजू मोड़े नहीं और हाथ सीधा रहने दें।
अब आपका माथा ज़मीन को छुएगा और हथेलियां ज़मीन पर फ्लैट रहेंगी, लेकिन हाथ सीधे रखें।
सामान्य रूप में सांस लेते रहें और 10 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें।
अब सांस लेते हुए उसी मुद्रा में आएं, जहां से शुरुआत की थी।
यह पहला राउंड था। 7-10 राउंड्स का अभ्यास करें।
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4- कुंभकासन
इस आसन के अभ्यास से आपकी बाजू, कंधे, पेट और पीठ को मजबूती मिलती है।
पेट के बल लेट जाएं। अपनी हथेलियां भी ज़मीन पर जमा लें, अपने पैर के अंगूठे अंदर की तरफ रखें और पैर की एड़ी जुड़ी होनी चाहिए।
अब पैर के अंगूठों और हथेलियों के सहारे थोड़ा ऊपर उठें।
इसी मुद्रा में पहले अपनी छाती उठाएं। फिर पेट।
इसके बाद, इसी मुद्रा में कमर उठाएं और घुटने, लेकिन ध्यान रहे कि बाजू सीधी हो।
अब आप सिर्फ अपने पैर के अंगूठों और हथेलियों के सहारे जमे हुए हैं। सामान्य रूप से सांस लें और 30-60 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें।
फिर वापस उसी मुद्रा में आ जाएं, जहां से शुरुआत की थी।

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