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एक्सर्साइज़ करने में ये 12 चीज़ें आपकी मदद कर सकती हैं


एक्सर्साइज़ करने में ये 12 चीज़ें आपकी मदद कर सकती हैं
एक्सर्साइज़ करने से बचने के कई बहाने होते हैं, जब आपका एक्सर्साइज़ करने का काफी मन होता है, तब भी आप कोई न कोई बहाना बना ही लेते हैं। जैसे अभी काफी थकान लगी है, और अभी समय नहीं है।

आप नीचे दी गई सलाहों से अपने एक्सर्साइज़ के रूटीन को सही तरीके से फॉलो कर सकते हैं:

1.खुदके लिए कुछ करें: कई अध्यन में पता चला है है की जो लोग केवल अच्छा दिखने के लिए जिम जॉइन करते हैं वो लोग इसपर ज़्यादा टिक नहीं पाते हैं। और जो लोग केवल अपने लिए एक्सर्साइज़ करते हैं, वही एक्सर्साइज़ को हमेशा जारी रख पाते हैं।

2.सब कुछ धीरे-धीरे करें: आप एक दिन में 10 किलोमीटर तो भागेंगे नहीं, है न? जब आप सब कुछ एक साथ करने की कोशिश करते हैं तब या तो वो थक जाते हैं या उनका मन ऊब जाता है। इसलिए शुरुआत आराम से करें। शुरू में आप कम भी दौड़ सकती हैं। जब आपके लिए इतना भागना आसान हो जाए तो आप इसे बढ़ा सकती हैं।

3.कोशिश जारी रखें: कोई भी अपने शुरुआती दिन से ही पर्फेक्ट नहीं होता है। सभी प्रकार की एक्सर्साइज़ में मेहनत लगती है। आपको लगातार कोशिश करने से ही किसी चीज़ की आदत पड़ती है।

4.कई प्रकार की एक्सर्साइज़ करें: दिलचस्पी लगातार बनी रहने के लिए आपको अलग-अलग प्रकार की एक्सर्साइज़ करती रहनी चाहिए और इससे आपके शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर भी काम होता है। आपको अलग-अलग मशीन का भी प्रयोग करना चाहिए। आपको अपना पूरा रूटीन बदलने की ज़रूरत नहीं हैं, आपको बस थोड़े-बहुत बदलाव करने हैं।

5.ज़्यादा खुदको  कस्ट दें: ज़्यादातर लोग जो एक्सर्साइज़ प्लैन फॉलो करते हैं उसे पहले ही साल में छोड़ देते हैं, क्योंकि वो अपने आप को पहले साल काफी कश्ट देते हैं। आपको अपनी सीमाओं में काम करना चाहिए और धीरे-धीरे अपना रूटीन स्ट्रॉंग करना चाहिए।

5 आसान टेकनीक एब्स ट्रेनिंग के लिए
अपने एब्स की ट्रेनिंग के लिए आपको हमेशा जिम जाने की ज़रूरत नहीं है। अगर आपके पास थोड़ा वक्त है, तो अपने घर के आरामदेह माहौल में ही एक आसान लेकिन शानदार एक्सरसाइज रूटीन आजमा सकते हैं।

कैसे बनायें अपना निजी होम जिम
3 स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो लायेंगी पैरों में लचीलापन
5 चमत्कारिक ब्रीदिंग टेकनीक से अनिद्रा को अलविदा कहें


किसने कहा है कि आपके लिए एब्स की ट्रेनिंग मुश्किल है? बेशक यह सच है, इसके लिए आपको कठोर प्रयास करना होगा। लेकिन अच्छे नतीजे पाने के लिए आपको बेहद इंटेंसिव एक्सरसाइज रूटीन का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं है।

अपने एब्स को सुडौल बनाने में समय लगता है। इसके लिए स्वस्थ खानपान और व्यायाम का सही संयोजन होना चाहिए। लेकिन जैसा लोग सोचते हैं, उससे उलट, आसान एक्सरसाइज रूटीन के तहत एब्स वर्क-आउट के तरीके मौजूद हैं।

बेशक अगर पर्सनल ट्रेनर हो तो आपको जल्दी परिणाम मिलेंगे, फिर भी यदि आप नियमित करें तो इस रूटीन के साथ भी आपको नतीजे दिखाई देंगे। इन्हें आज ही आज़माने में जरा भी संकोच न करें!
1. ‘डेड बग’ एक्सरसाइज (


इसका नाम थोड़ा अजीब ज़रूर है, पर यह कोआर्डिनेशन यानी समन्वय पर आधारित एब्स ट्रेनिंग है। यह ऊपरी और निचले एब्स के लिए बहुत असरदार है। जाहिर है यह उन लोगों के लिए उत्तम है जो अपने पूरे पेट को सुडौल बनाना चाहते हैं।

इसे कैसे करें
एक योगा मैट पर पीठ के बल लेटें। पैरों पूरी तरह फैले हों और हाथ हिप्स की बगल में हों।
मैट पर लेटे-लेटे पैर को छत की ओर उठाएं जब तक कि यह पूरी तरह तन न जाए।
अपने पैर को ऊपर उठाते हुए समय हाथ को अपने सिर के ऊपर फैलाएँ जब तक कि यह आपके पैर के साथ एक समकोण (right angle) न बना ले।
अब धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौटें और इसे दूसरे साइड भी दोहरायें।
इसे दोनों पैरों से बारी-बारी से करें जब तक आप 10 दोहराव पूरे न हो जाएँ।


यह आर्टिकल भी आपको दिलचस्प लगेगा : 40 की उम्र से ऊपर वाले लोगों के लिए आदर्श एक्सरसाइज
2. एब्स ट्रेनिंग के लिए रूसी ट्विस्ट

रूसी ट्विस्ट जबरदस्त एब्स ट्रेनिंग कराते हैं। न केवल बगलों की एब्स के लिए बल्कि ऊपरी और निचले एब्स को भी वे ताकतवर बनाते हैं। संतुलन बनाए रखने के लिए अपने एब्स पर अपनी ताकत को फोकस करना ज़रूरी है।

इसे कैसे करें
मैट पर पीठ के बल लेटें और ऊपरी शरीर को तब तक मोड़ें जब तक बैठने की पोजीशन में न आ जाएँ।
अब पैरों को फैलाएं और पांवों को इकट्ठे जोड़ लें।
बिना फ्लेक्सिंग के बाहों को स्ट्रेच करें और हथेलियों को जोड़े रखें।
थोड़ा पीछे झुकें और अपने ऊपरी शरीर को दाईं ओर झुकाएं।
कुछ सेकंड के लिए इसे स्थिति में रहें और इसे दूसरी बगल भी दोहराएं। प्रत्येक साइड इसके छह दोहराव करें।
3. बाइसिकिल क्रचेंज (Bicycle crunches)


एब्स ट्रेनिंग के लिए, उन्हें सुडौल और मजबूत बनाने के लिए यह एक्सरसाइज सबसे मुकम्मल एक्सरसाइज में आती है। करने में कठिन होने के कारण यह एक ही बार में पूरे रेक्टस एब्डोमिनिस (rectus abdominis) की वर्क-आउट करा देती है।

इसे कैसे करें
मैट पर सीधे लेट जाएं, पीठ सीधी हो और पैर पूरी तरह फैले हों।
हाथों को सिर के पीछे रखें, कोहनी आगे की ओर इशारा करते दिखने चाहिए।
दाहिने घुटने को तब तक उठाएं जब तक यह बाईं कोहनी तक नहीं पहुंचे।
अब शुरुआती पोजीशन में लौटें और घुटने और कोहनी की अदला-बदली करते हुए व्यायाम को दोहराएं।
हर साइड जब तक 10 दोहराव पूरे न हों तब तक इसे दोहरायें।
4. पर्वतारोही (Mountain climber)

एब्स ट्रेनिंग के साथ ही अगर आप कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज करना चाहते हैं, तो आप इस अभ्यास को पसंद करेंगे। यह ऊपरी और निचले एब्स की वर्क आउट कराती है। इसके अलावा,मूवमेंट के कारण यह आपकी धड़कन को भी तेज चलाती है।

इसे कैसे करें
हाथों के सहारे शरीर को टिकाते हुए मुंह नीचे की ओर रखते हुए लेट जाएं। ध्यान रखे कि हाथ आपके कंधों के ठीक नीचे हों।
यह भी देखें कि शरीर सीधा हो, और पैर की उंगलियों पर टिका हो।
अब एब्स को सिकोड़ें और घुटनों को आगे लाएं। हालाँकि यह पहली बार में आपके लिए कठिन हो सकता है, लेकिन मुख उद्देश्य घुटने को छाती तक लाना है।
शुरुआती पोजीशन में लौटें और दूसरे घुटने के साथ यही दोहरायें।
प्रत्येक साइड इसके 12 दोहराव करें।


इसे भी देखें : 6 एक्सरसाइज जो थुलथुल टांगों को सुडौल बनाएंगी
5. कैंची एब्स (Scissors abs)



इस सरल रूटीन को करने के लिए, हम एक क्लासिक एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं: यह है सीजर्स या कैंची एब्स। हालाँकि पहली नज़र में यह बहुत आसान एक्सरसाइज लग सकती है, लेकिन इसे करते हुए आप एब्स और ऑब्लिक में तनाव महसूस करेंगे।

इसे कैसे करें
पीठ के बल लेट जाएँ फर्श। आपकी हथेलियेआन नितंबों के पीछे फर्श को छूनी चाहिए।
मैट से बाहों को अलग किए बिना थोड़ा आगे झुकें और पैरों को जमीन से कुछ फीट ऊपर उठाएं।
अब एक पैर को कूल्हों के ऊपर उठाएं और 90 डिग्री का कोण बनाएं।
कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहें और फर्श पर पैर को आराम दिए बिना वापस नीचे जाएं।
दूसरा पैर उठाएं और इसी एक्सरसाइज को इसके साथ दोहराएं।
12-15 दोहराव करें।

क्या आप एब्स ट्रेनिंग चाहते हैं लेकिन आपके पास बहुत समय नहीं है? यदि हां, तो यह आसान रूटीन आपके लिए एकदम सही है! आप देख सकते हैं, आपको विशेष किसी चीज की आवश्यकता नहीं है और न ही बहुत अधिक स्पेस चाहिए। कुछ ही दिनों में आपके पास ज्यादा सुडौल एब्स होंगे!



रनिंग से ज्यादा फायदेमंद है टहलना, जानिए इसकी 5 वजहें


स्वस्थ रहने के लिए कई लोग रोजाना सुबह उठने के बाद रनिंग (Running) करते हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि रनिंग (Running Exercise) करना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. हालांकि कई लोग दौड़ने की बजाय टहलना (Walking) पसंद करते हैं, लेकिन अगर आप सोचते हैं कि टहलने से ज्यादा फायदेमंद रनिंग करना है तो एक बार फिर से सोच लीजिए. रनिंग और टहलने के अपने फायदे हैं, लेकिन ज्यादा वजन वाले व्यक्ति दौड़ नहीं लगा सकते, इसलिए उन्हें टहलने की सलाह दी जाती है. केवल फिट व्यक्ति रनिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं, जबकि टहलना सभी के लिए सेहतमंद माना जाता है.

स्वस्थ रहने के लिए हर किसी को दिन में करीब 30 मिनट तक टहलने की सलाह दी जाती है. अगर आप हृदय रोग या डायबिटीज के मरीज हैं तो आपके लिए टहलना ज्यादा फायदेमंद रहेगा. रनिंग से ज्यादा टहलना क्यों फायदेमंद (Benefits of Walking) है चलिए जानते हैं इसके 5 कारण.


टहलने के फायदे-

1- रनिंग के लिए रनिंग शूज, रनिंग के कपड़े इत्यादि का इस्तेमाल करना पड़ता है, लेकिन टहलना एक ऐसा शारीरिक व्यायाम है जिसमें ज्यादा प्रयास करने की जरूरत नहीं होती है. सुबह के वक्त किसी पार्क में टहलने से शरीर को ताजी हवा मिलती है, जिससे सेहत तरोजताजा बनी रहती है. यह भी पढ़ें: रनिंग है एक बेहतरीन एक्सरसाइज, लेकिन दौड़ते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

2- रोजाना टहलने से कैलोरी बर्न होती है और शरीर का वजन नियंत्रित होता है. इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शुगर लेवल नियंत्रित होता है. दौड़ने की बजाय टहलने से चोट लगने की संभावना कम रहती है. इससे अच्छी नींद आती है और अनिद्रा की समस्या दूर होती है.

3- दौड़ना हर उम्र के लोगों के लिए आसान नहीं है, लेकिन सभी उम्र के लोग आसानी से टहल सकते हैं. खासकर, घास पर नंगे पैर चलने से हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है और शुगर लेवल भी नियंत्रित रहता है. रोजाना नंगे पैर हरी-हरी घास पर टहलने से आंखों और जोड़ों के दर्द की समस्या में फायदा होता है.

4- रनिंग स्टार्ट करने के बाद दौड़ने की वजह से कई लोगों को असहज महसूस हो सकता है. इससे शरीर में दर्द भी हो सकता है, लेकिन अगर आप दौड़ने की बजाय टहलते हैं तो इससे आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी. टहलने से न तो किसी तरह की असहजता महसूस होती है और न ही किसी भी तरह का दर्द होता है.

5- अगर आपके शरीर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत है तो रनिंग करने पर आपके जोड़ों और हड्डियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. जबकि इस तरह की समस्या में टहलना फायदेमंद माना जाता है. इससे जोड़ों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और चोट की कोई संभावना नहीं होती है. यह भी पढ़ें: इन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से पाना चाहते हैं निजात तो सुबह के वक्त घास पर नंगे पैर टलहना कर दीजिए शुरु

गौरतलब है कि अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको रनिंग करने से बचना चाहिए और उसके स्थान पर स्वस्थ रहने के लिए रोजाना टहलना चाहिए, क्योंकि टहलने से सेहत को बहुत फायदा होता है.
नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को केवल सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसमें दी गई जानकारियों को किसी बीमारी के इलाज या चिकित्सा सलाह के लिए प्रतिस्थापित नहीं किया जाना चाहिए. इस लेख में बताए गए टिप्स पूरी तरह से कारगर होंगे या नहीं इसका हम कोई दावा नहीं करते है, इसलिए किसी भी टिप्स या सुझाव को आजमाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.


रोज़ पैदल चलने से शरीर को मिलते हैं ये फायदे


आज के समय में स्‍वस्‍थ और तंदुरूस्‍त रहना कोई आसान बात नहीं है। इसके लिए अपने टाइट शेड्यूल से वक्‍त निकालना पड़ता है और कई लोग तो वक़्त रहने के बावजूद भी आलस की वजह से एक्‍सरसाइज़ नहीं करते हैं। स्‍वस्‍थ और फिट रहने के लिए आपको रोज़ जिम जाने की जरूरत नहीं है। रोज़ाना वॉकिंग यानि पैदल चलने से भी आप स्‍वस्‍थ और सेहतमंद रह सकते हैं।

एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए हम रोज़ पैदल चलते हैं। ये कोई मुश्किल काम नहीं है और अगर आप रोज़ पैदल चलते हैं तो इससे आपकी सेहत को बहुत फायदा मिलेगा। व्‍यायाम का सबसे आसान तरीका सैर करना ही है और इससे वजन भी नियंत्रित किया जा सकता है।
रोज़ाना सिर्फ 30 मिनट वॉक करने के फायदों के बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगें। तो चलिए जानते हैं कि वॉक यानि सैर करने का शरीर पर क्‍या असर पड़ता है और इसके क्‍या फायदे हैं।

एनर्जी बढ़ाए

रोज़ाना काम दूरी के सैर से भी शरीर की मानसिक और शारीरिक उत्‍पादकता बढ़ती है। अगर आपको बहुत जल्‍दी थकान महसूस होती है तो आपको रोज़ सैर करना चाहिए। इससे एनर्जी लेवल बढ़ता है, मूड बेहतर होता है और आप ऊर्जा से भरपूर महसूस करते हैं।
कार्डियोवस्‍कुलर रोगों से बचाव

रोज़ सैर करने से रक्‍तप्रवाह तेज होता है और कैलोरी घटती है जिससे कार्डियोवस्‍कुलर सेहत बेहतर हो पाती है। रोज़ सैर करने से हार्ट रेट बेहतर होता है और हाइपरटेंशन का खतरा कम रहता है।


इसके साथ ही ये हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक और धमनी रोग के खतरे को भी कम करता है।

वज़न कम करे
सैर करने या पैदल चलने से वज़न कम करने में भी मदद मिलती है और ये वज़न कम करने की सबसे बढ़िया एक्‍सरसाइज़ है। रोज़ 30 मिनट की एक्‍सरसाइज़ से वज़न घटाया जा सकता है। अगर आप रोज़ वॉक करते हैं तो इससे कैलोरी और बीएमआई घटने की संभावना बढ़ जाती है।

पैरों को करे टोन

रोज़ाना पैदल चलने से पैर भी टोंड रहते हैं। अगर आपको टोंड पैर चाहिए तो इसके लिए पैदल चलना सबसे आसान तरीका है।

तनाव को रखे दूर
पैदल चलने पर शरीर में सेरो‍टोनिन और एंडोर्फिंस नामक हार्मोन रक्‍तवाहिकाओं में रिलीज़ होते हैं जिससे आप बेहतर महसूस कर पाते हैं। रोज़ाना सैर करने से बेचैनी, तनाव, डिप्रेशन भी दूर होता है।

और भी हैं कई लाभ


खाने के तुरंत बाद थोड़ी सैर करने से ही ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर 12 प्रतिशत तक कम होता है। सबसे ज़्यादा फायदा शाम के खाने के बाद होता है जब कार्बोहाइड्रेट का सेवन सबसे ज्‍यादा किया जाता है और शरीर थोड़ा कम एक्टिव रहता है।

खाने के तुरंत बाद सैर करने से रक्‍त में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कम करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से लोगों की इंसुलिन इंजेक्‍शन पर निर्भरता कम हो सकती है और ये वज़न को भी कंट्रोल में रख सकता है। अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो खाने के बाद कुछ समय की सैर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर आप खाने में खूब कार्बोहाइड्रेट जैसे कि ब्रेड, चावल, आलू या पास्‍ता का सेवन करते हैं तो आपको खाने के तुरंत बाद 10 मिनट की वॉक जरूर करनी चाहिए।


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