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महिलाओं के लिए बेस्ट 10 योगासन


महिलाओं के लिए बेस्ट 10 योगासन, जानिए किससे क्या है मिलेगा

बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। यही कारण है कि आज हर महिला किसी ना किसी हेल्थ प्रॉब्लम से घिरी रहती हैं। हालांकि इसका कारण काफी हद तक गलत लाइफस्टाइल भी है। कुछ महिलाएं तो अपनी छोटी-मोटी प्रॉब्लम के लिए दवा लेती हैं लेकिन ज्यादा दवाइयां खाने से भी लिवर पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में क्या किया जाए कि आपकी प्रॉब्लम भी हर हो जाए और कोई नुकसान भी ना हो? परेशान ना हो आपकी हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान छिपा है योग में, जिससे ना सिर्फ आप अपनी हेल्थ प्रॉब्लम की छुट्टी कर सकती हैं बल्कि लंबे समय तक हेल्दी भी रह सकती हैं।


चलिए आप हम आपको 10 योगासन बताते हैं, जोकि महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। खास बात तो यह है कि आप इन्हें आसानी से घर पर भी कर सकती हैं।


बीमारियों का काल है सूर्यनमस्कार
सूर्य नमस्कार करने से हड्डियां मजबूत, तनाव और कब्‍ज, पीरियड्स रेगुलर, खूबसूरत त्‍वचा, मन की एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती हैं। सूर्य नमस्कार की 12 पोजीशन होती हैं, जो ना महिलाओं को फिट एंड-फाइन रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी यह आसन बेहद फायदेमंद है।
पीसीओडी - कपालभाती

कपालभाती आसन करने से महिलाओं में होनी वाली PCOD की समस्या से भी बचा सकता है। साथ ही यह आसान पीसीओडी के कारण बढ़ते वजन को भी कंट्रोल करने में मदद करता है। कपालभाति एक ऐसी सांस की प्रक्रिया है जो सिर तथा मस्तिष्क की क्रियाओं को नई जान देती है। इसके लिए ध्यान की मुद्रा में बैठकर आंखें बंद करें और शरीर को ढीला छोड़ें। इसके बाद धीरे से सांस अंदर ले और उसके बाद बाहर छोड़ें। शुरुवात इसे 30 बार करें और धीरे धीरे इसे 100-200 तक करें।
कमर व पीठ दर्द - मकरासन
आज ज्यादातर महिलाओं को पीठ या कमर दर्द की शिकायत रहती है, जिसके लिए वो दवा का सहारा लेती हैं लेकिन आप मकरासन करके भी इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं। इसके लिए अपनी ठुड्डी को फर्श पर लगाकर सीधे लेट जाएं। फिर अपने हाथों पर ठुड्डी को टिकाएं। अब सांस लेते हुए पैरों को मोड़ें और सांस छोड़ते हुए पैरों को सीधा करें। अब इस प्रक्रिया को दोनों पैरों पर करें। 
ग्लोइंग स्किन - सर्वांगासन

इस आसन से ना सिर्फ स्किन ग्लोइंग होगी बल्कि आप पिंपल्स, डार्क सर्कल्स औक एंटी-एजिंग जैसी समस्याएं भी दूर रहेंगी। इसके लिए पीठ के बल लेट जाएं और सांस खींचकर धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर पर लगाकर कमर को थामकर रखें। इस स्थिति में पूरे शरीर का भार कंधों पर रहना चाहिए। साथ ही कंधे से कोहनी तक के भाग को फर्श से सटाकर रखें तथा ठोड़ी को चेस्ट से लगाने की कोशिश करें। इस स्थिति में 30 सेकेंड तक रहें। फिर सांस लेते व छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
मोटापा घटाएं नौकासन योग
अगर आप भी बढ़ते वजन को लेकर परेशान है तो इस योग से आप अपनी हर समस्या का समाधान कर सकती हैं। पहले आकाश की ओर मुंह कर के पीठ के बल सीधे लेट जाएं। हाथों को सीधा कमर से सटा कर रखें, और अपनी हथेलियों को ज़मीन की और रखें। अब धीरे धीरे अपनी गर्दन ऊपर उठाएं और उसी समान अपने पैर भी उठाएं और एक नौका का रूप लें। इसी मुद्रा में करीब 25 से 30 सेकंड बने रहें। इस आसन को करने से वजन कंट्रोल में रहता हैं और चर्बी तेजी से बर्न होती है। 
झड़ते बाल - शीर्षासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप मैट के आगे बैठ जाए। अब आप अपनी उंगुलियों को इन्टर्लाक करके सिर को उस पर रखें। फिर पैरों को धीरे-धीरे ऊपर करके उंगुलियों को इन्टर्लाक करें और शरीर का पूरा भार सिर पर डालें। 2-3 मिनट तक इस स्थिति में कुछ देर रहने के बाद सामान्य हो जाएं। आप इस आसन को दीवार से साथ लगाकर भी कर सकते हैं। रोजाना इस आसन को करने से झड़ते बालों की समस्या दूर होती है।
माइग्रेन - अनुलोम-विलोम

अनुलोम-विलोम से फेफड़ों में ऑक्सीजन व ब्लड फ्लो सही रहता है, जिससे शरीर की कोशिकाओं और दिमाग को अधिक ऑक्सीजन मिलने लगती है। इससे डिप्रैशन, माइग्रेन, सांस संबंधी दिक्कत, ब्लड प्रैशर और शुगर कंट्रोल में रहता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठे। फिर दाई नाक को बंद करके बाई नाक से सांस लें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 मिनट तक दोहराएं। एेसा करने से कुछ ही मिनटों में सिर का दर्द दूर हो जाएगा।
तनाव - मेडिटेशन
मेडिटेशन करने के लिए चौकड़ी माकर बैठ जाएं। इसके बाद आंखों को बंदकर कमर को सीधी करके बैठ जाएं। अब लंबी-लंबी सांस लें। आप चाहें तो शुरुआत में रिलैक्सेशन के लिए गाने भी लगा सकते हैं ताकि आपका ध्यान इधर उधर ना भटके। रोजाना मेडिटेशन करने से मन शांत, तन स्वस्थ, डिप्रैशन से छुटकारा मिलता है।
थायराइड - कुंडलिनी योग

इससे फेफड़े खुलते हैं और आपको थायराइड जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा यह अर्थराइटिस और पैरों से जुड़ी समस्या को भी दूर करता है। इस योग को करने के लिए अपने पैरों को क्रॉस करके बैठ दाए और दोनों हाथों को प्रार्थना मुद्रा में जोड़ें। इस बात का ख्याल रखें कि आपकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी हो। इसके बाद दोनों आंखों को बंद करके ध्यान केंद्रित करें और 'ओम नमो, गुरु देव नमो' मंत्र का जाप करें। अपनी सांस पर ध्यान दें, ताकि आप रिलैक्स हो सकें।
पीरियड्स प्रॉब्लम्स - अधोमुख श्वानासन
इस आसन को करने से ना सिर्फ पीरियड्स दर्द, ऐंठन जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है बल्कि यह अनियमित पीरियड्स की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। इस आसन करने के लिए घुटनों के बल बैठ जाएं फिर अपने हाथों को जमीन पर रखें। अब हाथों पैरों को V आकार में फैला कर शरीर को ऊपर उठाएं। इस आसन को करते हुए रीढ़ की हड्डी को एक दम सीधी रखें। हर दिन कम से कम 1 मिनट के लिए इस आसन को करें।

औरतों के लिए बेस्ट हैं ये 10 योगासन, हर किसी का है अलग फायदा

बिजी शेड्यूल के कारण अक्सर महिलाएं अपनी फिटनेस पर ध्यान देना भूल जाती है जिस वजह से उन्हें अक्सर मोटापे, कमर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट संबंधी शिकायत रहती हैं। अगर आपको भी हैल्थ से जुड़ी इन छोटी-मोटी प्रॉब्लम रहती हैं तो आप योग का सहारा लें। आज हम आपको कुछ ऐसे ही 10 योगासन बताएंगे जिनको आप घर पर आसानी से कर सकती हैं और खुद को फिट रख सकती हैं।

नौकासन योग- मोटापा घटाएं

पहले आकाश की ओर मुंह कर के पीठ के बल सीधे लेट जाएं। हाथों को सीधा कमर से सटा कर रखें, और अपनी हथेलियों को ज़मीन की और रखें। अब धीरे धीरे अपनी गर्दन ऊपर उठाएं और उसी समान अपने पैर भी उठाएं और एक नौका का रूप लें। इसी मुद्रा में करीब 25 से 30 सेकंड बने रहें। इस आसन को करने से वजन कंट्रोल में रहता हैं और चर्बी तेजी से बर्न होती है।

कपालभाति प्राणायाम- मोटापा व अस्थमा में राहत
इस आसन को करने से मोटापा दूर होता है और सांस और पेट संबंधी बीमारियां भी ठीक रहती हैं। इसके अवाला यह बालों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होता है। इससे स्किन डिजीज भी दूर रहती हैं। अगर डार्क सर्कल्स की समस्या है तो भी इस आसन को अभ्यास आपके लिए अच्छा होगा। ध्यान रहें कि इस आसन को केवल सुबह के समय ही करें।

अनमोल विलोम प्राणायाम- बीपी कंट्रोल

इसको रोजाना लगातार करने से बीपी कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा इससे अस्थमा, सर्दी-जुकाम, साइनस या डायबिटीज जैसी प्रॉब्लम्स भी दूर रहती हैं। इसको करने के लिए सामान्य मुद्रा में बैठ कर अपने पैर क्रॉस कर के मौड़ लें अब अपने दाए हाथ को दाए घुटने पर आराम से टीकाकर बाए हाथ के अंगूठे से नाक का बाया छिद्र बंद करें, और दाए छिद्र से गहरी सांस अंदर लें। फिर बाया छिद्र मुक्त करें और दाया छिद्र बंद करें।

बालासन- जांघों की चर्बी कम
घुटनों को पीछे की ओर मौड़ कर घुटनों के बल बैठ जाएं। ऐडियों पर शरीर का वज़न बनाते हुए, सांस अंदर लेते हुए आगे की और झुकें। हथेलियां ज़मीन की ओर लगाएं। ध्यान रहें कि छाती जांघों और घुटनों के अगले भाग को छुनी चाहिए। साथ ही आपका सिर जमीन को छूना चाहिए। इस आसान को करने से जांघों की चर्बी कम होगी औ कंधों का दर्द दूर।

उत्कटासन- स्लिप डिस्क से राहत

उत्कटासन करने से कमर व पीठ का दर्द ठीक रहता है। खासकर इस आसन को करने का सबसे बड़ा फायदा है कि यह साइटिका और स्लिप डिस्क होने से बचाए रखता है, लेकिन ध्यान रखें कि जिन महिलाओं को पहले से ही यह प्रॉब्लम्स हो, उन्हें ये योगासान करने से बचना चाहिए क्योंकि यह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप प्रैग्नेंस है तो एक्सपर्ट और डाक्टर की सलाह और निगरानी में इस योगासन को करें।

धनुआसन- पेट के रोग दूर

इस आसन को करने के लिए एकदम से पीछे की तरफ न झुकें। आसन करने के लिए पेट के बल लेटें।घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को हाथों से खींचकर कमर के पास लाएं। सांस लेते हुए सिर और छाली को जमीन से ऊपर उठाएं। कुछ देर इसी स्थिति में रहे। इस आसन को करने से पेट के रोग दूर होंगे और पीठ का दर्द ठीक।

हस्तपादासन- रीढ़ की हड्डी के लिए बेस्ट

लगातार काम करने या खुद को झुकाकर रखने से रीढ़ की हड्डी में दर्द होने लगता है। ऐसे में महिलाओं को हस्तपादासन करना चाहिए। सीधे खड़े होकर हाथों को सिर के ऊपर उठाएं। कमर को सीधा रखते हुए धीरे-धीरे नीचे झुके। हथेलियों से पैरों के पंजों और माथे से घुटने को छूने की कोशिश करें। इस आसन को करने से न केलव रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी प्रॉब्लम्स दूर होगी बल्कि मिर्गी या अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर होने का खतरा भी दूर होगा।

सर्वांगासन- ग्लोइंग स्किन

इस आसन का अभ्यास कंधे के बल खड़े होकर किया जाता है। सर्वांगासन को ग्लोइंग या चमकदार त्वचा के लिए सबसे असरदार आसन माना जाता है। इस आसन के अभ्यास से न सिर्फ स्किन की सेहत सुधरती है बल्कि चेहरे का ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। सर्वांगासन का अभ्यास दिन में 3-5 बार करें।

भारद्वाजासन- जहरीले टॉक्सिन्स निकालें
शरीर से जहरीले टॉक्सिन्स का निकलना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे बॉडी डिटॉक्स रहती है और हानिकारक तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। जब ये बाहर निकलते हैं तो शरीर हैल्दी रहता है और स्किन ग्लो करती हैं। जहरीले टॉक्सिन्स का बेहतर तरीका है भारद्वाजासन, जिसका नियमित अभ्यास आपको काफी फायदा पहुंचा सकता हैं।

अधोमुख श्वान आसन-एनर्जेटिक रखें

इस आसन को करने के लिए हाथों और पैरों के बल खड़ें हो जाएं और आपके पीठ का ऊपरी हिस्सा ऊपर की तरफ करें। सांस को छोड़ते हुए कमर को ऊठाएं और अपने शरीर को वी-शेप में लें आएं। इस आसन को करने से शरीर में लचीलापन आता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। महिलाएं पूर दिन खुद को एनर्जेटिक रखने के लिए इस आसन को कर सकती हैं क्योंकि इससे शरीर को लंबे समय तक काम करने की ताकत मिलती हैं।



महिलाएं हो रही हैं इस बीमारी की शिकार, सिर्फ छींकने से भी हो जाता है फ्रैक्चर


ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हड्डी का एक रोग है जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 50 साल की उम्र के बाद हर तीन में एक महिला को यह समस्या होती है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसकी चपेट में जल्दी आ जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बीमारी दिल की बीमारियों के बाद विश्व की दूसरी सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बीमारी है। ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की मजबूती और घनत्व को कम करता है, जिससे वह खोखली सी बन जाती हैं।



छींकने से भी हो सकता है फ्रैक्चर
यह बीमारी इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इसकी चपेट में आने पर हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि कई बार सिर्फ झुकने या छींकने बस से भी फ्रैक्चर हो जाता है। इससे जुड़े फ्रैक्चर आमतौर पर रीढ़ की हड्डी, कलाई और कूल्हे के हिस्से में होते हैं। पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में इस बीमारी के चांस ज्यादा होते हैं।

महिलाओं होती है जल्दी शिकार

महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले जन्म के वक्त से ही कमजोर होती हैं। वहीं बढ़ती उम्र के साथ-साथ महिलाओं की हड्डियों का द्रव्यमान ज्यादा तेजी से खत्म हो जाता है, जोकि इस रोग का कारण बनता है। दरअसल, हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन और कई तरह के मिनरल्स से बनी होती हैं। अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में ये मिनरल्स जल्दी नष्ट हो जाते हैं। इससे हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और वह कमजोर होने लगती है। इसके अलावा कहीं न कहीं डाइटिंग भी महिलाओं में आॅस्टियोपोरोसिस का कारण बनती है। डाइटिंग के कारण महिलाओं के शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिसके कारण वह इस रोग की चपेट में आ जाती है।
क्यों होता है ऑस्टियोपोरोसिस?

-उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का विकास कम होने लगता है। ऐसे में वह कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
-पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को हड्डियों की समस्याएं ज्यादा होती है यही वजह है कि उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस होने के चांस भी ज्यादा होते हैं।
-अगर आपके परिवार में कोई इस बीमारी से पहले पीड़ित रह चुका है तो संभव है कि यह आपके जीन्स में आया हो और आपको भी बढ़ती उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस अपनी चपेट में ले ले।
-ऐसे पुरुष या महिलाएं जिनकी हाइट कम होती है उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा रहता है।
-थाइरॉयड और सेक्स हॉर्मोन में कमी भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ाते हैं।
-डायट में कैल्शियम से जुड़े फूड शामिल नहीं करना और शरीर में विटमिन डी की कमी हड्डियों को बहुत ज्यादा कमजोर बनाते हैं। यही वजह है कि ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका बढ़ जाती है।
-लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी हड्डियों को नुकसान पहुंचाते हुए ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ाता है।
-ज्यादा शराब व स्मोकिंग भी ऑस्टियोपोरोसिस होने के रिस्क फैक्टर्स में शामिल हैं।
-ऑस्टियोपोरोसिस के चांस तब भी बढ़ जाते हैं जब व्यक्ति किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करता।
बचाव के तरीके

-अपनी डायट में प्रोटीन रिच फूड शामिल करें। प्रोटीन हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में मदद करता है जिससे उनके खोखले होने की आशंका कम हो जाती है।
-वजन को नियंत्रित रखें। ज्यादा वजन हड्डियों पर प्रेशर बढ़ाता है जिससे उनका घिसाव ज्यादा होता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
-18 से 50 साल की महिलाएं व पुरुषों को रोजाना करीब 1,000 मिलिग्राम कैल्शियम और इससे ज्यादा की उम्र के लोगों को 1,000 मिलिग्राम कैल्शियम इनटेक रखना चाहिए ताकि बोन की मजबूती बरकरार रखी जा सके।
-विटमिन डी टेस्ट जरूर करवाते रहें। इसकी कमी कैल्शियम को अब्जॉर्ब नहीं होने देती, जिससे हड्डियों को कैल्शियम का फायदा नहीं मिलता और वह कमजोर होती चली जाती हैं।
-रोज व्यायाम जरूर करें। चाहे हेवी वर्कआउट न कर पाएं लेकिन वॉकिंग या जॉगिंग या फिर योग करें, ताकि हड्डियों को मजबूत मिले।

इसके अलावा आप कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर भी इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।
नारियल का तेल

नारियल तेल का सेवन हड्डियों का घनत्व बढ़ता है और इससे शरीर में एस्ट्रोजन की कमी भी पूरी होती है।
बादाम का दूध

कैल्शियम से भरपूर बादाम वाले दूध का सेवन शरीर में इसकी कमी को पूरा करता है, जोकि ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए जरूरी है।
तिल के बीज

मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मैंगनीज, तांबा, जिंक और विटामिन डी से भरपूर तिल के बीज भी हड्डियों की कमजोरी को दूर करते हैं।
धनिया के बीज
धनिया के बीजों को गर्म पानी में उबालकर कुछ देर ढक कर रखें उसके बाद गुनगुना होने पर इसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे भी इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम करता है।

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