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डाइटिंग के बाद भी आपका वजन कम क्यों नहीं हो रहा है?

डाइटिंग के बाद भी आपका वजन कम क्यों नहीं हो रहा है?)
हमारे देश भारत में बचपन से बड़े होने तक वजन बढ़ना कोई समस्या नहीं समझा जाता बल्कि खाते पीते घर का/की है कह कर नजरंदाज किया जाता रहा है। समस्या तब शुरू होती है जब कोई मेडिकल समस्या सामने आ जाती है, जैसे:- डायबिटीज (Diabetes), ब्लड प्रैशर (Blood Pressure), कॉलेस्ट्रोल(Cholestrol), ह्रदय रोग(Heart Disease), आदि। ऐसे में इन रोगों की शुरुआत या इनके शुरुआती लक्षणों को देखते ही लोगों का अपनी सेहत तथा वजन की ओर ध्यान देना लाज़मी है।



लोगों के पास कई स्वास्थ्यवर्धक उपाय उपलब्ध होते हुए भी वे कोशिश करते हैं कि बिना किसी व्यायाम तथा सही खान-पान अपनाए एक शॉर्टकट मिल जाये। और ऐसा एक शॉर्टकट डाइटिंग(Dieting) है जिसे हमारे देश में एक आसान और बिना झंझट मोल लिए सेहत सही करने का तरीका समझने वालों की भीड़ बढ़ रही है। यह उपाय यदि सही प्रकार से उपयोग में लाया जाये तभी कारगर सिद्ध होता है आर यदि सही प्रकार न उपयोग किया जाये तो लाभ के स्थान पर हानि होने की संभावना ज्यादा होती है।


आज मैं डाइटिंग तथा सही खान-पान को अपनाने की कोशिश करते हुए भी वजन कम न हो पाने के लिए जिम्मेदार कुछ मुख्य गलतियों को आपके साथ शेयर करूंगा… 
पैकेज्ड हेल्थ फूड(Packaged Health food) का उपयोग


पैकेज्ड हैल्थ फूड का उपयोग हम ये मान कर करते हैं की ये हमारे लिए सेहतमंद हैं पर ये हमारी सबसे बड़ी गलती है। हमारा शरीर केवल प्राकर्तिक भोजन का उपयोग करके ही स्वस्थ रह सकता है, जबकि हम महंगे हैल्थ फूड का उपयोग ये सोच कर करते हैं की ये एक हेल्थी चॉइस है। कुछ हैल्थ फूड शुरुआत में असर दिखाते हैं पर ये केवल कुछ समय के लिए होता है और कई बार हम इस तरह के फूड के टेस्टी होने के कारण जरूरत से ज्यादा भी खा लेते हैं। 
नींद पूरी ना होना



कई बार हम बिना कुछ खाये सोने के लिए चले जाते हैं पर भूख के कारण हमको सही प्रकार से नींद नहीं आती। ये एक सामान्य सा नियम है कि स्वस्थ रहने के लिए कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद पूरी ना होने पर अगले दिन बॉडी ज्यादा खाना खाने की डिमांड करती है और आप एक दिन भूखे रह कर जितनी कैलोरी कम खाते हैं उससे ज्यादा अगले दिन खा ली जाती हैं। 
केवल सलाद(Salad) खाना


केवल सलाद खा कर हमको शायद कुछ देर भूख ना लगे पर कार्बोहाइड्रेट्स के बिना हमारे होर्मोन्स जोकि भूख के लिए उत्तरदाई हैं वो कंट्रोल नहीं हो पाते और हम ज्यादा खाने की ओर बढ्ने लगते हैं जिससे सलाद खाना कोई हेल्थी तरीका नहीं माना जा सकता। 
खाने की सही मात्रा ना खाना(Portion Control)



हम कई प्रकार के लो कैलोरी फूड खाना शुरू कर देते हैं पर ऐसा करते हुए हम ये भूल जाते हैं की अगर इन लो कैलोरी फूड को भी अधिक मात्रा में खाया जाएगा तो वजन घटने की जगह बढ्ने लगेगा। इन फूड्स की मात्रा का उपयोग किसी अच्छे डायटीशियन की देखरेख में करें। 
किसी का साथ ना मिलना



अगर हम एक स्वस्थ दिनचर्या अपनाना चाहते हैं तो जरूरी है कि कोई साथी हमारे साथ हो जिसका गोल भी हमारे जैसा ही हो, क्यूंकि एक साथी का साथ हमको अपनी स्वस्थ दिनचर्या को अपनाए रखने के लिए प्रेरित करने के साथ ही हमको गलतियाँ करने से भी रोकता है। किसी साथी के अभाव में हम अपनी दिनचर्या को लंबे समय तक चालू नहीं रख पाते हैं। 
लंबे समय तक ना खाना

यदि हम लंबे समय तक खाना नहीं खाते हैं तो हमारा मेटाबोलिक रेट कम हो जाता है जिससे थोड़ा खाया हुआ खाना भी शरीर के लिए जरूरी ऊर्जा बनाने की जगह फैट में बदलने लगता है। साथ ही लंबे समय के बाद खाने से हम खाने की अधिक मात्रा खा लेते हैं जिससे उल्टा नुकसान होता है। 
खान-पान का सही रेकॉर्ड(Record) ना रखना

जब हम किसी प्लान को लिख कर रखते हैं तो उसमें गलतियाँ करने की संभावना उतनी ही कम होती है, डाइट का पूरा लेखा जोखा रखने से हम दिन के अंत में की गयी गलतियों को पहचान सकते हैं और उनको दोहरने से बच सकते हैं। अगर हम बिना किसी रेकॉर्ड के ये काम करते हैं तो हमारे फ़ेल होने की संभावना बढ़ जाती है। 
पानी कम पीना


खाना कम खाने के साथ ही हम पानी की मात्रा भी कम कर देते हैं जिससे हमारी बॉडी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और लंबे समय में किडनी पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ये एक सिम्पल सी आदत बना लें की कुछ भी खाने से पहले 1-2 ग्लास पानी पी लें ऐसा करने से आप जरूरत से ज्यादा खाने से बचेंगे। 
नाश्ता(Breakfast) ना करना




यदि हम नाश्ता सही प्रकार से नहीं करते या फिर बिलकुल नहीं करते तो उसका असर हमारे मेटाबोलिक रेट(Metabolic Rate) पर पड़ता है और लंच या डिनर खाते समय जो खाना बॉडी शरीर के लिए ऊर्जा बनाने में प्रयोग करती है उसके स्थान पर उस खाने को फैट में बदलने लगती है जोकि बिल्कुल भी हैल्थी(Healthy) नहीं है। 
बाहर का खाना खाना या फिर सही प्रकार से खाना ना बनाना


यदि हम बाहर खाना खाएँगे तो हमको इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि किसी होटल(Hotel) या रैस्टोरेंट(Restaurant) कि कोशिश खाने को टेस्टी बनाने की ज्यादा होगी नाकि हैल्थी बनाने की। ऐसे में कई दिन तक किया हुआ फूड कंट्रोल बेकार चला जाता है। साथ ही यह बात भी ध्यान में रखने की है कि घर पर बने खाने को भी अधिक से अधिक हैल्थी बनाने कि कोशिश करें नाकि टेस्टी बनाने की क्यूंकि ये बात सभी जानते हैं कि हेल्थी खाना थोड़ा कम टेस्टी तो होता ही है। 
फैट(Fat) ना खाना


डाइट में बॉडी के लिए बिना फैट का खाना खाना भी एक अच्छी आदत नहीं है क्यूंकि बॉडी को थोड़ी मात्रा में फैट की भी जरूरत होती है और इसके ना मिलने पर बॉडी पर गलत असर पड़ सकता है।


तो दोस्तों आगे से इन गलतियों को दोहराने से बचें और हैल्थी लाइफ़स्टाइल फॉलो(Healthy Lifestyle Follow) करें।

शारीरिक व्यायाम के दौरान की जाने वाली कुछ गलतियाँ

किसी मेडिकल समस्या(Medical Condition) के सामने आते ही हमारे मन में हताशा की भावना आ जाती है और ऐसे में हम अपने आप को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए शारीरिक व्यायाम(Exercise) की ओर आकर्षित हो जाते हैं, और पूरे जोर-शोर से व्यायाम शुरू कर देते हैं। पर कई बार इस प्रकार के जोश भरे सही निर्णय के भी सही परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते और कभी-कभी तो उल्टा नुकसान हो जाता है। क्या हैं वो गलतियाँ जो हम जाने-अंजाने करते हैं, आइये जानें…

डॉक्टर(Doctor) से परामर्श न करना


किसी भी प्रकार की मेडिकल कंडीशन के होने पर ये जरूरी है कि एक बार डॉक्टर के परामर्श के बाद ही किसी प्रकार के व्यायाम की शुरुआत की जाये। कई बार हम अपनी मेडिकल कंडीशन के मुताबिक व्यायाम न करके अपने स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकते हैं या फिर इसके मनचाहे परिणाम प्राप्त नहीं होते।


बहुत बड़ा लक्ष्य(Goal) लेकर चलना


हम अपने जोश में कई बार बहुत बड़े लक्ष्य को ध्यान में रख कर कसरत करने लगते हैं पर जब कुछ दिनों के बाद हम को ये लक्ष्य प्राप्त नहीं होता तो हम कसरत करना छोड़ देते हैं। इसलिए ये जरूरी है कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाए जाएँ ताकि उनके पूरा होने पर हम और जोश के साथ अपने स्वास्थ्य को अच्छा करने के लिए प्रेरित(Motivate) हों। 
अपनी प्रोग्रैस का रेकॉर्ड(Progress Record) न रखना


हम अपनी प्रोग्रैस का रेकॉर्ड लिखित रूप में न रख कर एक बहुत बड़ी गलती करते हैं क्यूंकि ऐसा करके हम अपनी कड़ी मेहनत के फल को पहचान नहीं पाते और कई बार जबकि हम सही दिशा में बढ़ रहे होते हैं, हम रुक जाते हैं। इसलिए अपनी कसरत और प्रोग्रैस का एक लिखित रेकॉर्ड जरूर बनाएँ ताकि अपनी गलतियों को दोहराने से बचें और सही दिशा की ओर ही बढ़ें।


प्लानिंग(Planning) ना करना


बिना प्लानिंग किए जो भी काम किया जाता है उसका सफल होना हमेशा ही मुश्किल होता है। इसलिए जरूरी है कि अपने ट्रेनर(Trainer) और डॉक्टर की सहायता से एक एक्सरसाइज प्लान बनाएँ और उसे फॉलो(Follow) करें। ऐसा करके आप अपने लक्ष्य को आसानी से पा सकते हैं. 
सप्लिमेंट्स(Supplements) पर ज़ोर देना



अपने शरीर को स्वस्थ बनाने के चक्कर में आई बार हम सप्लिमेंट्स का सहारा लेने लग जाते हैं क्यूंकि आपके जिम ट्रेनर(Gym Trainer) ने ऐसा कहा है, यह बिलकुल गलत है क्यूंकि इस प्रकार के सप्लिमेंट्स की आपको जरूरत है या नहीं ये केवल आपका डॉक्टर ही आपको बता सकता है। साथ ही कई सप्लिमेंट्स सही स्टैंडर्ड(Standard) के नहीं होते जो आपको और अधिक बीमार कर सकते हैं। 
वार्म-अप(Warm-up) ना करना


किसी भी प्रकार के शारीरिक व्यायाम से पहले ये जरूरी होता है कि आप थोड़ा वार्म-अप जरूर करें ताकि आपके शरीर की स्थिलता दूर हो सके। ऐसा न करके आप चोटों को निमंत्रण देते हैं जोकि कई बार ज्यादा बड़ी भी हो सकती हैं, साथ ही आपके रूटीन(Routine) को भी बिगाड़ सकती हैं।

पूरे शरीर पर ध्यान ना देना


व्यायाम अरते समय हमको अपने पूरे शरीर की माशपेशियों(Muscles) पर ध्यान देना चाहिए और इसके लिए किसी अच्छे ट्रेनर से मदद लेनी चाहिए क्यूंकि ऐसा न करके हम कई बार अपने शरीर का पूरा व्यायाम नहीं करते जिससे बॉडी के कुछ पार्ट अनदेखे रह जाते हैं। 
शरीर की क्षमता का ध्यान न रखना


कई बार हम अपने जोश में अपने शरीर की क्षमता को भूल कर व्यायाम करने लगते हैं, जोकि बिलकुल सही नहीं है। ऐसा करने से आप थके हुए महसूस करेंगे और फिर अपने व्यायाम को करने से बचना शुरू कर देंगे। बॉडी के पूरी तरह से थकने से कुछ समय पहले व्यायाम बंद कर देना चाहिए जिससे आपकी बॉडी को चोट लगने की संभावना भी कम होगी। 
वर्कआउट(Workout) से ब्रेक(Break) ना लेना
ये जरूरी है कि एक सप्ताह में कम से कम एक दिन का ब्रेक जरूर लेना चाहिए, ऐसा करने से हमारे शरीर को आराम का मौका मिल जाता है और ये भी ध्यान रखना चाहिए कि इस प्रकार के ब्रेक के दौरान भी हमको व्यायाम के लाभ मिल रहे होते हैं। 
वर्कआउट मिस(Workout Miss) करना

जब हम ब्रेक के बहाने अपना वर्कआउट जल्दी जल्दी मिस करते हैं तो हम अपनी आदत को भूल रहे होते हैं जोकि हमने बड़ी मेहनत से बनाई होती है, इसलिए अपने निश्चित ब्रेक से पहले वर्कआउट मिस न करें क्यूंकि ऐसा करने से हमारा शरीर स्थिल पड़ने लगता है और व्यायाम का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। 
व्यायाम के बाद कुछ ना खाना

व्यायाम के बाद हमारी बॉडी को थोड़े खाने की जरूरत होती है ताकि वह अपनी मांसपेशियों की मरम्मत कर सके और साथ ही ऐसा करने से हमारा मेटाबोलिक रेट(Metabolic Rate) भी बढ़ता है जोकि हमारे वजन को कम करने में मदद करता है, पर ये ध्यान रखें कि बहुत हैवी खाना ना खाएं।


व्यायाम के समय बातें करना


ये सही है कि व्यायाम के लिए किसी साथी का होना किसी वरदान से कम नहीं पर अगर आप व्यायाम के दौरान भी उस साथी से बातों में लगे रहेंगे तो आपका फोकस व्यायाम से हटेगा और साथ ही आप मुँह से साँस लेने लगते हैं जोकि व्यायाम के समय बिलकुल भी अच्छा नहीं कहा जा सकता।


तो दोस्तों इन गलतियों से तौबा करें और अपने आप को स्वस्थ और सुन्दर बनाने में लगे रहें। 
वॉक करें, स्वस्थ रहें !

बहुत से लोग कहते हैं उनके पास व्यायाम (Exercise) करने के लिए समय नहीं है या फिर जिम (Gym) तक जाने के लिए समय खराब करना पड़ेगा, या फिर बिना महंगी मशीन (Machines or Equipments) के अपनी हैल्थ (Health) के लिए कुछ करना संभव नहीं है। उनके इन सभी बहानों के लिए केवल एक ही जवाब है – वॉकिंग (Walking) या फिर कहें पैदल चलना।


वॉकिंग करने के बहुत से फायदे हैं जोकि हमको बिना किसी परेशानी और मुफ्त (Free) मिल जाते हैं। वॉकिंग (Walking) करने के कुछ फायदे इस प्रकार हैं : 
वॉकिंग करने से ब्लड का सर्कुलेशन (Blood Circulation) ठीक होता है और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL-Bad Cholesterol) कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL-Good Cholesterol)बढ़ता है, साथ ही हाइपरटेंशन (Hypertension) से छुटकारा मिल सकता है। 
हड्डियों के रोग ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) से पीड़ित लोगों को कम से कम 30 मिनट वॉकिंग करने से फ्रेक्चर (Bone Fracture) होने की संभावना 40 % कम हो जाती है। 
50-60 वर्ष के लोग यदि 30 मिनट वॉकिंग रोज करें तो उनको उम्र से संबंधी बीमारियों के होने का खतरा कम होता है जिससे उम्र बढ़ती है। 
वॉकिंग करने से वजन (Weight) भी कम किया जा सकता है। 
वॉकिंग करने से पैरों और कमर की माशपेशियाँ (Muscles) मजबूत होती हैं। 
रोज सुबह कम से कम 1 घंटे वॉकिंग करने से नींद ना आने (Insomnia) की समस्या कम होती है। 
वॉकिंग करने से उम्रदराज लोगों में मैमोरी लॉस (Memory Loss)और अल्ज़ाइमर (Alzheimer) होने का खतरा कम होता है। 
रोज वॉकिंग करने से आप कई बीमारियों का खतरा कम कर सकते हैं, जैसे – डायबिटीज (Diabetes) होने का खतरा 60 % तक कम हो जाता है। 
वॉकिंग घर से बाहर ही की जाती है जिसके कारण आपको सूरज की धूप मिलती है जो आपको जरूरी विटामिन डी (Vitamin D) मिलने में मदद करता है। 
वॉकिंग से कई प्रकार के कैंसर (Cancer) से बचा जा सकता है, वॉकिंग की आदत से ब्रैस्ट कैंसर (Breast Cancer) और कोलोन कैंसर (Colon Cancer) होने का खतरा काफी कम हो जाता है। 
वॉकिंग के लिए कैसे प्लान करें ?

वॉक करने के लिए एक जोड़ी अच्छे स्पोर्ट्स शूज (Sports Shoes) में इन्वेस्ट (Invest) करें और ये ध्यान रखें कि जूते आरामदायक (Comfortable) होने के साथ साथ आपके पैरों को जरूरी सुरक्षा (Protection) भी प्रदान करें। 


अपनी वॉकिंग के लिए एक ऐसा रास्ता चुनें जहां बहुत ज्यादा ऊबड़-खाबड़ न हो साथ ही किसी प्रकार का गड्ढा न हो और जमीन फिसलन भरी न हो। 
वॉकिंग करने से पहले थोड़ा वार्मअप (Warm up) करें जोकि 5-10 मिनट धीमे चलकर किया जा सकता है और फिर थोड़ा तेज वॉक(Brisk Walk) करें। वॉक खत्म करने से पहले अपनी गति फिर से कम करके कूल डाउन (Cool Down) करें। 
वॉकिंग खत्म करने के बाद थोड़ा स्ट्रैच (Stretch) करें जिससे बॉडी की जकड़न कम हो जाये। 
वॉक करने की शुरुआत में इसकी अवधि कम रखें और धीरे धीरे बढ़ाएँ जिससे बॉडी को वॉकिंग की आदत पड़ जाए, ऐसा न हो कि पहले दिन ही बहुत ज्यादा वॉक करने की वजह से आप थक जाएँ और फिर वॉकिंग न कर पाएँ। 
वॉकिंग करते समय इन गलतियों से बचें :
वार्मअप (Warm up) ना करना



वॉकिंग से पहले वार्मअप (Warm up) ना करने से चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है और कई बार ये बहुत ज्यादा गंभीर भी हो सकती है। वॉकिंग की आदत डालने की शुरुआत में ही किसी चोट का लगना हमको दोबारा वॉकिंग शुरू करते समय डराने लगता है जिससे हम इसे करना छोड़ देते हैं।


सही पॉश्चर (Posture)न रखना


वॉकिंग करते समय सही पॉश्चर (Posture) बनाकर न रखने से हमको इसका पूरा लाभ नहीं मिलता बल्कि कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि सही पॉश्चर में वॉक की जाये, नीचे देखने की जगह सामने देखते हुए वॉक करनी चाहिए। कंधे, गर्दन और कमर रिलैक्स (Relax) रखें और कमर को सीधा रखें। हाथ आगे पीछे जाने के लिए ढीले छोड़ें और पेट की मसल्स (Muscles) थोड़ा टाइट (Tight) रखें।


थकान को अनदेखा करना



कई बार हम जोश में थकान को अनदेखा कर देते हैं। यदि किसी दिन थकान महसूस हो तो उस दिन वॉकिंग को आराम से कर सकते हैं या फिर ब्रेक (Break) ले सकते हैं। यदि हम थकान में भी जबर्दस्ती किसी भी प्रकार का शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise) करते हैं तो इससे हमको चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। अधिक थकान हो जाने पर हमको वॉकिंग (Walking) से लंबा ब्रेक भी लेना पड़ सकता है और ऐसा आप हरगिज़ नहीं चाहेंगे। 
पानी सही प्रकार से ना पीना




वॉकिंग शुरू करने से पहले थोड़ा पानी पी लेना चाहिए और वॉकिंग के दौरान यदि प्यास लगे तो एकदम से बहुत ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए बल्कि थोड़ा थोड़ा सिप (Sip) करते हुए पानी पी सकते हैं। यदि प्यास लगने पर भी आप पानी नहीं पीयेंगे तो माशपेशियों में खिंचाव हो सकता है या फिर मोच (Sprain) आ सकती है। वॉकिंग के तुरंत बाद भी पानी केवल थोड़ी मात्रा में सिप करके पीना चाहिए वरना पेट में दर्द हो सकता है।

फिर आप किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं, आप भी वॉकिंग के फायदे उठाने के लिए वॉकिंग शुरू कीजिये पर ऊपर बतायी गयी गलतियों से बचते हुए।

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