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क्या करे जब नाभि खिसक जाये


क्या करे जब नाभि खिसक जाये


आज की ज़िन्दगी भाग दौड़ से भरी हुई है. भाग दौड़ टेंशन से भरे हुए माहौल में नाभि चक्र अव्यवस्थित हो जाता है. इसे साधारण भाषा में पेट उखड़ना भी कहते है. पेट उखड़ने से बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे पेट दर्द, पेचिश, पेट फूलना, हरारत आदि और लापरवाही करने पर ये हमेशा के लिए अपनी जगह बना लेते है.

नाभि खिसकने का पता लगाने का तरीका
सुबह खली पेट हाथ व पैर को ढीला छोड़ कर लेट जाये अब सीधे हाथ का अंगूठा और इसके साथ की दो उंगलिया मिलाकर पेट में नाभि स्थान पर रखे और दबा कर देखे की धड़कन महसूस हो रही है कि नहीं अगर धड़कन है तो नाभि ठीक है और अगर नहीं है तो इसका मतलब नाभि खिसक गयी है.

नाभि को अपनी जगह कैसे लाये

दोनों हथेलियों को आपस में मिलाये हथेली के बीच की रेखा मिलने के बाद बाये हाथ को कोहिनी से ऊपर दाए हाथ से पकड़ ले, इसके बाद बाये हाथ की मुट्ठी को कस कर बंद कर ले. हाथ को झटके से कंधे की और लाये ऐसा 8 या 10 बार करने से नाभि सेट हो जाती है.

कमर के बल लेट कर मालिश भी की जा सकती है इसके लिए सरसो का तेल पेट पर लगाए और नाभि जो ऊपर या किनारे सरक गयी है उस पर अंगूठे से दबाव डालते हुए नाभि तक लाने का प्रयास करे.

दो चम्मच सौंफ गुड़ में मिलाकर एक सप्ताह तक रोज खाने से नाभि अपने स्थान पर बनी रहती है.
खिसकी हुई नाभि को सही जगह पर लाना है, तो अपनाएं ये उपाय


नाभि खिसकने की समस्या को कुछ लोग नाभि का डिगना या धरण भी कहते हैं। कई बार कुछ कारणों से नाभि अपनी जगह से हट जाती है यानि खिसक जाती है। ऐसे में कई तरह की परेशानयां जैसे पेट में दर्द, उल्टी, कब्ज, जी मिचलाना आदि की समस्या हो जाती है। महिलाओं में ये समस्या होने पर पीरियड्स के समय सामान्य से ज्यादा ब्लड निकलता है। नाभि के खिसकने का मुख्य कारण भारी वजन उठाना, वजन लेकर झुकना, दुर्घटना आदि में अंगों का अचानक खिंचाव आदि है। ये समस्या बच्चों में ज्यादा पाई जाती है। हालांकि कुछ आसान घरेलू उपायों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।

लक्षण दिखने पर करें नाभि की जांच 
नाभि खिसकने की पुष्टि करने के कुछ खास तरीके हैं। सबसे आसान तरीका है व्यक्ति को लेटकर नाभि के आसपास वाले स्थान पर उंगुलियों से दबाव डालें। यदि नाभि वाले स्थान के ठीक बिलकुल नीचे कोई अगर धड़कन महसूस हो तो इसका मतलब है कि नाभि अपने स्थान पर ही है। लेकिन यही धड़कन नाभि के नीचे महसूस ना होकर आसपास की जगह पर महसूस हो तो समझ जाएं कि, नाभि अपनी जगह में नहीं है।

मालिश करवाना 
नाभि खिसकने पर ज्यादातर लोग इसे मालिश द्वारा ठीक करते हैं। हालांकि ये मालिश सामान्य मालिश की तरह नहीं होती है इसलिए इसे सब लोग नहीं कर सकते। कुछ लोगों को नाभि को मालिश के द्वारा सही जगह पर लाने का तरीका पता होता है। मालिश सिर्फ उन्हीं से करवनी चाहिए वर्ना अंजाम खतरनाक हो सकता है। नाभि के खिसकने पर ध्यान रखें कि भूलकर भी वजन ना उठायें। क्योंकि वजन उठाने से स्थिति गंभीर हो जाती है। यदि आसपास कोई नहीं है और सामान उठाना जरूरी है तो उसे झटके से ना उठाएं।


कूदना भी है इलाज 
कई बार बड़े-बुजुर्ग नाभि के खिसक जाने पर कूदने की सलाह देते हैं क्योंकि कूदने से भी नाभि अपनी जगह पर आ जाती है। इसके लिए आपको लगभग 2 फीट की उंचाई (बेड या कुर्सी) से 2-3 बार कूदना होता है। कूधते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आपका पूरा वजन आपके पंजों पर पड़े बल्कि आप अलग से थोड़ा जोर लगाएं। इससे नाभि अपनी जगह पर आ जाती है।

गुड़ और सौंफ 
नाभि को जगह पर लाने के लिए सौंफ का उपाय अपनाएं। इसके लिए 50 ग्राम गुड़ में 10 ग्राम सौंफ मिलाएं और सुबह खाली पेट अच्छी तरह चबा-चबाकर खाएं। ऐसा तीन दिन तक करें। इस उपाय से दो से तीन दिन में नाभि अपनी जगह में आ जाएगी।
योगासन द्वारा इलाज 
नाभि के खिसक जाने पर कई योगासन भी इसे ठीक जगह ला सकते हैं जैसे- भुजंगासन, मत्स्यासन, कंधरासन, सूप्ता वज्रासन धनुरासन, मकरासन आदि। इस स्थिति में सभी तरह को योगासनों को करने से बचना चाहिए वर्ना स्थिति खतरनाक हो सकती है। केवल वही योगासन करें जिनसे गुदा के आसपास की मांसपेशियों पर दबाव पड़े। हालांकि इन योगासनों को करने से पहले भी किसी बड़े-बुजुर्ग से राय ले लें क्योंकि थोड़ी सी गलती से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। भूल कर भी इस स्थिति में अपने शरीर के साथ कोई छेड़खानी ना करें।

नाभि खिसकना या टलना क्‍या होता है, जाने कारण और इसका घरेलू इलाज

बचपन में खेलते हुए या कोई भारी सामान उठाने से पेट दर्द की वजह से जब कभी नाभि खिसक जाती थी तो अक्‍सर दाई को बुलाकर घर में दिखवाया जाता था कि कहीं नाभि तो नहीं खिसक गई? नाभि खिसकना जिसे आम भाषा में धरण गिरना या फिर गोला खिसकना भी कहते हैं।

यह एक ऐसी परेशानी है जिसकी वजह से पेट में दर्द होता है। कई दफा होता है रोगी को खुद समझ नहीं आता है कि अचानक उसके पेट में इतना तेज दर्द क्‍यों हो रहा है? और डॉक्‍टर्स को भी कई बार चैक करवाने के बाद रोगी को समस्‍या का हल नहीं मिलता है। वैसे तो ये परेशानी किसी को भी हो सकती है, लेकिन आमतौर पर नाभि खिसकने की परेशानी महिलाओं में सबसे अधिक पाई गई है। आइए जानते कि किन वजहों से नाभि खिसक जाती है?


नाभि खिसकने के कारण?

खेलते-कूदते समय भी आपकी अचानक से नाभि खिसक जाती है। असावधानी से दाएं-बाएं झुकने, दोनों हाथों से या एक हाथ से अचानक भारी बोझ उठाने, तेजी से सीढ़ियां चढ़ने-उतरने, सड़क पर चलते हुए गड्ढे में अचानक पैर चले जाने या अन्य कारणों से किसी एक पैर पर भार पड़ने या झटका लगने से नाभि इधर-उधर हो जाती है। कभी कभी कुछ अनाप शनाप खाने से भी ये समस्‍या हो सकती है।
क्‍या होता है जब नाभि खिसकती है?
पेट में धरण पड़ने से या नाभि खिसकने से पेट में तेज दर्द और दस्त की समस्या हो जाती है। नाभि खिसकने पर रोगी को अपच और कब्ज की समस्या हो जाती है। दर्द से पेट में बहुत जोर से मरोड़े आने लगती है।

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ऐसी गलती ना करें
घर में बड़े बुर्जुगों को नाभि का सही ज्ञान होता था, इसलिए वो अपने अनुभव से नाभि को सही जगह लाने में पारंगत होते थे। अपनी तरफ से कभी भी खुद कभी भूले से भी कोशिश न करें। नाभि यदि अपनी सही जगह पर आने की बजाय कहीं और खिसक गई तो समस्‍या और विकट हो सकती है। ऊपर की ओर खिसकने से सांस की दिक्कत हो जाती है, लीवर की ओर चले जाने से वह खराब हो जाता है। यदि नाभि पेट के बिलकुल मध्य में आ जाए तो मोटापा हो जाता है। इसलिए आसपास किसी अनुभवी दाई का मदद से नाभि को वापस अपनी जगह लाया जा सकता है वरना जाकर डॉक्‍टर को दिखाएं।
ऐसे पहचानें नाभि खिसक गई है?
पेट दर्द के दौरान कि नाभि खिसक गई है, इस बात की पहचान कैसे होगी? सबसे आसान तरीका है लेटकर नाभि को दबाकर जांच करना। रोगी को पूरी तरह लिटाकर, उसकी नाभि को हाथ की चारों अंगुलियों से दबाएं। यदि नाभि के ठीक बिलकुल नीचे कोई धड़कन महसूस हो तो इसका मतलब है कि नाभि अपने स्थान पर ही है। लेकिन यही धड़कन यदि नाभि के नीच ना होकर कहीं आसपास महसूस हो रही हो, तो समझ जाएं कि नाभि अपनी जगह पर नहीं है।


गुड़ और सौंफ
10 ग्राम सौंफ को पीसकर उसमें 50 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह खाली पेट खाएं। 2-3 दिन इसका सेवन करने से नाभि अपनी जगहें पर आ जाएगी।
सरसों का तेल
3-4 दिन तर लगातार सुबह खाली पेट सरसों के तेल की कुछ बूदें नाभि में डालें। इससे नाभि धीरे-धीरे अपनी जगहें पर आनी शुरू हो जाएगी।

सूखे आंवला और नींबू
सूखें आंवले को पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर नाभि के चारों तरफ बांधकर रोगी को 2 घंटा जमीन पर लेटा दें। दिन में 2 बार ऐसा करने से नाभि अपनी जगहें पर आ जाएगी।
नमक और गुड़
नमक और गुड़ को एक साथ मिलाकर खाने से भी नाभि अपनी जगह आ जाती है।

मूंग की खिचड़ी

नाभि खिसक जाने पर सिर्फ और सिर्फ मूंग की खिचड़ी ही खाइए। क्‍योंकि नाभि खिसकने पर ज्‍यादा भारी खाना नहीं खाना चाहिए। इससे पेट पर कम दबाव बनता है।
इन चीजों का करे परहेज
जब तक नाभि फिर से अपनी सही जगह नहीं आ जाती है तब तक कुछ बातों का विशेष ख्‍याल रखें। नाभि खिसकने के दौरान किसी भी तरह की एक्‍सरसाइज न करें। भारी वजन न उठाएं और कोई भारी काम न करें। जहां तक हो गुनगुना पानी ही पीएं। हल्‍का खाने खाएं और मिर्च मसालें को इग्‍नोर करें। ढ़ीले कपड़े ही पहनें। तेज मल या मूत्र लगनें पर इसे रोकें नहीं।


नाभि खिसकना (Nabhi Chakra )

नाभि स्पंदन से रोग की पहचान का उल्लेख हमें हमारे आयुर्वेद व प्राकृतिक उपचार चिकित्सा पद्धतियों में मिल जाता है। परंतु इसे दुर्भाग्य ही कहना चाहिए कि हम हमारी अमूल्य धरोहर को न संभाल सके। आज की जीवन-शैली कुछ इस प्रकार की है कि भाग-दौड़ के साथ तनाव-दबाव भरे प्रतिस्पर्धापूर्ण वातावरण में काम करते रहने से व्यक्ति का नाभि- चक्र निरंतर क्षुब्ध बना रहता है। इससे नाभि अव्यवस्थित हो जाती है। परिणाम ये होता है कि पेट दर्द , पेचिस -पतले दस्त ,पेट आम जाना पेट फूलना -अरूचि -हरारत आदि होता है !और जहाँ तक इसे अपने नियत स्थान पर पुन:स्थापित नही कर दिया जाये रोगी का आराम नहीं होता है और लापरवाही करने पर ये हमेशा के लिए अपनी जगह बना लेता है वैसे नाभि पुरुषो में बायीं तरफ और स्त्रियों में दायी ओर टला करती है

योग में नाड़ियों की संख्या बहत्तर हजार से ज्यादा बताई गई है और इसका मूल उदगम स्त्रोत नाभिस्थान है। कई बार नाभि के टल जाने पर भी कब्ज की शिकायत हो जाती है। जब तक नाभि टली है, तब तक कब्ज ठीक नहीं हो सकता। इसके लिए हमें सबसे पहले अपनी नाभि की जांच करवा लेनी चाहिए। अगर नाभि स्पंदन केंद से खिसक गई है तो उसे टली नाभि कहते हैं। इसके सही जगह में आते ही कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है।


नाभि खिसकना से होने वाले रोग :-
Nabhi में लंबे समय तक अव्यवस्था चलती रहती है तो उदर विकार के अलावा व्यक्ति के दाँतों, नेत्रों व बालों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। दाँतों की स्वाभाविक चमक कम होने लगती है। यदाकदा दाँतों में पीड़ा होने लगती है। नेत्रों की सुंदरता व ज्योति क्षीण होने लगती है। बाल असमय सफेद होने लगते हैं। आलस्य, थकान, चिड़चिड़ाहट, काम में मन न लगना, दुश्चिंता, निराशा, अकारण भय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों की उपस्थिति नाभि चक्र की अव्यवस्था की उपज होती है।

यदि Nabhi का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो अग्नाशय खराब होने लगता है। इससे फेफड़ों पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं। यदि यह स्पंदन नीचे की तरफ चली जाए तो पतले दस्त होने लगते हैं। बाईं ओर खिसकने से शीतलता की कमी होने लगती है, सर्दी-जुकाम, खाँसी, कफ-जनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।दाहिनी तरफ हटने पर लीवर खराब होकर मंदाग्नि हो सकती है। पित्ताधिक्य, एसिड, जलन आदि की शिकायतें होने लगती हैं। इससे सूर्य चक्र निष्प्रभावी हो जाता है। गर्मी- सर्दी का संतुलन शरीर में बिगड़ जाता है। मंदाग्नि, अपच, अफरा जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।
नाभि स्पंदन किस तरफ है ?
यदि Nabhi पेट के ऊपर की तरफ आ जाए यानी रीढ़ के विपरीत, तो मोटापा हो जाता है। वायु विकार हो जाता है। यदि Nabhi नीचे की ओर (रीढ़ की हड्डी की तरफ) चली जाए तो व्यक्ति कुछ भी खाए, वह दुबला होता चला जाएगा। Nabhi के खिसकने से मानसिक एवं आध्यात्मिक क्षमताएँ कम हो जाती हैं।


नाभि को पाताल लोक भी कहा गया है। कहते हैं मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में छः मिनट तक रहते है।

यदि Nabhi ठीक मध्यमा स्तर के बीच में चलती है तब स्त्रियाँ गर्भधारण योग्य होती हैं। यदि यही मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे
रीढ़ की तरफ चली जाए तो ऐसी स्त्रियाँ गर्भ धारण नहीं कर सकतीं। अकसर यदि Nabhi बिलकुल नीचे रीढ़ की तरफ चली जाती है तो फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। कई वंध्या स्त्रियों पर प्रयोग कर Nabhi को मध्यमा स्तर पर लाया गया। इससे वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो गईं। कुछ मामलों में उपचार वर्षों से चल रहा था एवं चिकित्सकों ने यह कह दिया था कि यह गर्भधारण नहीं कर सकती किन्तु नाभि- चिकित्सा के जानकारों ने इलाज किया।


नाभि खिसकना की जांच करना

दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों को सामने सीधा करके मिला लें। हथेलियों के बीच स्थित रेखाओं को आपस में मिलाकर देखें कि दोनों हाथों की छोटी उंगली समान है या छोटी-बड़ी दिखाई दे रही है। अगर वे समान है, तो Nabhi ठीक है। यदि उंगलियां छोटी- बड़ी लगती हैं, तो इसका मतलब नाभि टली हुई है।

सुबह खाली पेट हाथ और पैरों को ढीला छोड़कर सीधे लेट जाएं। अब सीधे हाथ का अंगूठा व उसके साथ वाली दो अंगुलियों को मिलाकर पेट में नाभि स्थान पर रखें और दबाकर देखें कि नाथि स्पंदन महसूस हो रहा है या नहीं। यदि स्पंदन Nabhi के ठीक बीच में है, तो नाभि ठीक है। अगर वो किनारे या ऊपर- नीचे है, तो Nabhi टली है। यह स्पंदन Nabhi से थोड़ा हट कर महसूस होता है ; जिसे Nabhi टलना या खिसकना कहते है .


यह अनुभव है कि आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है।

Nabhi के ऊपर या किनारे हो जाने से कब्ज होता है और नीचे की तरफ खिसकने से लूज मोशन हो जाते हैं। अगर Nabhi टली हो, तो
उसको आप बड़ी आसानी से अपने आप ठीक कर सकते हैं।
नाभि को अपनी जगह लाना 
दोनों हथेलियों को आपस में मिलाएं। हथेली के बीच की रेखा मिलने के बाद जो उंगली छोटी हो यानी कि बाएं हाथ की उंगली छोटी है तो बायीं हाथ को कोहनी से ऊपर दाएं हाथ से पकड़ लें। इसके बाद बाएं हाथ की मुट्ठि को कसकर बंद कर हाथ को झटके से कंधे की ओर लाएं। ऐसा ८-१० बार करें। इससे Nabhi सेट हो जाएगी।
कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनोंपैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। ३-३ बार करने के बाद Nabhi सेट हो जाएगी।
इसके अलावा उत्तानपादासन, मत्स्यासन, धनुरासन व चक्रासन भी Nabhi सेट करने में कारगर होते हैं।
कमर के बल लेटकर पेट की मालिश भी की जा सकती है। इसके लिए सरसों का तेल लेकर पेट पर लगाएं और Nabhi स्पंदन जो ऊपर या साइड में सरक गया है, उस पर अंगूठे से दबाव डालते हुए नाभि केंद में लाने का प्रयास करें।
दो चम्मच पिसी सौंफ, ग़ुड में मिलाकर एक सप्ताह तक रोज खाने से नाभि का अपनी जगह से खिसकना रुक जाता है।
मरीज को सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है तथा दस्त आदि उपद्रव शांत हो जाते हैं।
Nabhi खिसक जाने पर व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें। दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस पिलाने से लाभ होता है।
Nabhi बार बार स्थान च्युत होने से रोकने के लिए नाभि सेट करके पाँव के अंगूठों में चांदी की कड़ी भी पहिनाई जाती है -कमर पेट हमेशा कस कर बांधे जाने चाहिए

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