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वज्रासन करने का तरीका और फायदे


वज्रासन करने का तरीका और फायदे 




वज्रासन घुटनों को मोड़ने के बाद पैरों पर बैठकर किया जाने वाला आसन है। यह संस्कृत के शब्द ‘वज्र’ से बना है, जिसका अर्थ है आकाश में गरजने वाली बिजली। इसे डायमंड पोज भी कहते हैं। इस योगासन में बैठकर प्राणायाम, कपालभाति व अनुलोम-विलोम किया जा सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि वज्रासन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहतरीन योग है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम वज्रासन करने का तरीका, वज्रासन के फायदे और इससे जुड़े कुछ जरूरी टिप्स के बारे में बात करेंगे।
विषय सूची

वज्रासन के बारे में कुछ जरूरी बातें – Things To Know About Vajrasana in Hindi
वज्रासन करने का तरीका –
सावधानी
वज्रासन के फायदे – Benefits Of Vajrasana In Hindi


सबसे पहले हम वज्रासन के बारे में कुछ जरूरी बातें जान लेते हैं।

वज्रासन के बारे में कुछ जरूरी बातें – Things To Know About Vajrasana in Hindi


ज्यादातर योगासन खाली पेट किए जाते हैं, लेकिन वज्रासन अन्य आसनों की तुलना में अलग है। इसे आप खाना खाने के बाद भी कर सकते हैं, बल्कि खाना खाने के बाद वज्रासन करना पाचन तंत्र के लिए अच्छा माना जाता है।

स्तर : शुरुआती
अवधि : 5 से 10 मिनट
पुनरावृत्ति : कोई नहीं
स्ट्रेच : टखने, जांघ, घुटने, कूल्हे
मजबूती : पैर, पीठ
वज्रासन करने का तरीका –
घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एड़ियों को अलग रखें।
अब अपने नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं।
अब हथेलियां को घुटनों पर रख दें।
इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें।
दोनों घुटनों को आपस में मिलाकर रखें।
अब आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
इस अवस्था में आप पांच से 10 मिनट तक बैठने की कोशिश करें।

सावधानी

यूं तो यह आसन पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन शुरुआत में आपको नीचे बताई गई बातों का ध्यान रखना चाहिए।
अगर आपके घुटनों में कोई समस्या है या हाल ही में घुटने की सर्जरी हुई है, तो यह आसन करने से बचें।
गर्भवती महिलाएं इस आसन को करते हुए अपने घुटनों में थोड़ा अंतर बनाकर रखें, ताकि पेट पर दबाव न पड़े।
अगर आपको रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की समस्या है, तो इस आसन को करने से बचें। खासतौर पर, अगर आपके रीढ़ के जोड़ में कोई परेशानी है, तो वज्रासन न करें।
जो लोग हर्निया, आंतों के अल्सर और छोटी बड़ी आंतों में किसी तरह की समस्या से पीड़ित हैं, तो आप प्रशिक्षक की निगरानी में रहकर ही यह आसन करें।

यह था वज्रासन करने का तरीका, आइए अब कुछ टिप्स पर नजर डाल लेते हैं।
  1.  कोशिश करें।
वज्रासन की शुरुआत करने वाले लोगों के लिए टिप्स

जो लोग पहले बार वज्रासन करते हैं, उन्हें शुरुआत में पैरों में दर्द हो सकता है। अगर ऐसा है, तो वज्रासन से उठकर पैरों को आगे की ओर ले आएं। फिर टखनों, घुटनों और पिंडलियों पर मालिश करें। ऐसे में नियमित रूप से अभ्यास करने पर आप कुछ समय में यह आसन 30 मिनट तक कर पाएंगे।


इसके अलावा, शुरुआत में यह आसन धीरे-धीरे करना चाहिए। जैसे ही आपकी पीठ का निचला हिस्सा इसका आदी हो जाएगा, तो उन्हें आसन करते समय सांस लेने में तकलीफ नहीं होगी। ध्यान रहे कि अगर आप अपनी क्षमता से ज्यादा इस योगासन को करते हैं, तो इसका असर कम हो सकता है।

एडवांस पॉज
वज्रासन का एडवांस पॉज सुप्त वज्रासन है। इसमें आप वज्रासन में बैठकर पीछे की ओर झुकें और हाथों व कोहनियों को जमीन पर लगाएं। यह आसन गर्दन, पीठ और छाती के आसपास के भाग की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करेगा। यह फेफड़ों संबंधी समस्याओं से राहत पाने में भी मदद करता है। इस योगासन को किसी प्रशिक्षक की निगरानी में ही करना चाहिए, तभी यह फायदेमंद साबित होगा।
वज्रासन के फायदे – Benefits Of Vajrasana In Hindi

वज्रासन के फायदे बहुत हैं, जिनके बारे में हम नीचे बताने जा रहे हैं :
नियमित रूप से वज्रासन करने से आपका पाचन ठीक रहता है और कब्ज की समस्या दूर होती है।
बेहतर पाचन होने से एसिडिटी और अल्सर की समस्या से बचाव होता है।
यह आसन पीठ को मजबूत करता है और पीठ के निचले हिस्से की समस्या और साइटिका की समस्या से राहत दिलाता है।
यह श्रोणि मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।
यह प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद करता है और मासिक धर्म की ऐंठन को भी कम करता है।
ध्यान लगाने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ आसनों में से एक है।

वज्रासन का वैज्ञानिक आधार
वज्रासन एक स्थिर, दृढ़ मुद्रा है और इसे करने वालों को आसान से हिलाया नहीं जा सकता है। यह एक ध्यान मुद्रा है, लेकिन इस मुद्रा में बैठना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके करने के लिए पैरों में दर्द से राहत पानी होगी और अपने दिमाग को शांत और स्थिर रखना होगा।

वज्रासन पेल्विक भाग में रक्त संचरण को दुरुस्त करता है। पैरों पर बैठने से पैरों पर रक्त प्रवाह कम पड़ता है और पाचन भाग में बढ़ता है, जिस कारण पाचन तंत्र ठीक से काम करता है।

वज्रासन से पहले करें ये आसन – Preparatory Poses
अर्ध शलभासन
शलभासन

वज्रासन के बाद करें ये आसन – Preparatory Poses
मक्रासन
बालासन
शवासन

इसमें कोई दो राय नहीं कि योगासन से तन और मन को स्वस्थ बनाया जा सकता है। वहीं, बात की जाए वज्रासन की, तो इसे करना न सिर्फ आसान है, बल्कि इसे कभी भी किया जा सकता है। यह फायदेमंद कितना है, इस बारे में तो आप जान ही चुके हैं। अगर आपने अभी तक कोई योगासन नहींं किया है, तो शुरुआत इसी से करें। इसे करने से आपको किस प्रकार लाभ हुआ, अपने अनुभव नीचे दिए कमेंट बॉक्स में हमारे साथ जरूर शेयर करें।

सुखासन की विधि और लाभ


सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। जब भी हम इस आसन को करते हैं, तो सच में ही हमें आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है, यही कारण है कि हम इस आसन को सुखासन के नाम से जानते हैं। सुखासन बैठकर या फिर इसे पलथी मार कर किया जाने वाला आसन होता है, लेकिन आज समय कुछ ऐसा है कि हमारे पास पलथी मारकर बैठने का समय नहीं है। प्राचीन समय में लोग पलथी मारकर खाना खाते थे। लेकिन अब समय कुछ ऐसा है जिसमें लोग नीचे बैठकर खाना नहीं खाते बल्कि डायनिग टेवल पर बैठकर ही खाना खाते हैं। आज के समय में व्यक्ति जितना सुखी है, उतना ही वह बीमारियों से ग्रसित है, लेकिन जब हम आसन करते हैं तब हमारे शरीर को होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं।


सुखासन की विधि ( Sukhasana Steps ) :

सुखासन अर्थात सुख देने वाला आसन। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई तनाव से ग्रस्त है, जिसके कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, ऐसे में जब हम मन की शांति चाहते हैं तो सुखासन इसके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है सुखासन को किस प्रकार से किया जाता है इस बारे में बात करते हैं…




सुखासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछा लें।
अपने दोनों पैरों को सामने और सीधे रखें।
अपने एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे रखें फिर दूसरे पैर की एड़ी को भी इसी प्रकार से रखें। ऐसा करके आप पलथी में आ जाओगे।
अपनी पीठ और मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखें। इस बात पर ध्यान दे की आप अधिक झुके हुए न हो।
अपने कंधों को ढीला छोड़ते हुए अपनी सांस को पहले अंदर की ओर ले फिर बाहर की ओर छोड़ें।
अपनी हथेलियों को एक के ऊपर एक करके अपनी पलथी के ऊपर रखें।
अपने सिर को ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों आखों को बंद कर लें।
अपना पूरा ध्यान अपनी श्वास क्रिया पर लगाते हुए सांस लम्बी और गहरी लें।
अगर आप इसे पहली बार कर रहे हो, तो आपको कठनाई महसूस हो सकती है। आप किसी दीवार का सहारा लेकर इसको कर सकते हो।


सुखासन करने के लाभ ( Sukhasana Benefits ) :
जब भी हम इस अभ्यास को नियमित रूप से करते हैं, तो हमें मानसिक सुख और शांति का अनुभव होता है।
यदि आप चिंता, अवसाद या फिर क्रोध से ग्रस्त हैं, तो आप को सुखासन को करना चाहिए, क्योंकि इसे करने से आप को बहुत ही लाभ मिलता है।
इस आसन को करने से हमारी बैठने की सही आदत बन जाती है।
यह आसन हमारे मन की चंचलता को कम करने में सहायक होता है।
इस आसन को करने से हमारी रीढ़ की हड्डी में होने वाली रोगों से निजात मिलती है।
जब भी हम सुखासन को करते हैं तो हमारा चित शांत और मन एकाग्रस्त होता है।


सुखासन सावधानियां ( Sukhasana Precautions )
जिन लोगों के घुटनों में दर्द है उन्हें ये आसन नहीं करना चाहिए। अगर करना हो तो किसी एक्सपर्ट की निगरानी में करना चाहिए।
अगर आप की रीढ़ की चोट लगी हुई हो, तो आप को इस आसन को बहुत ही ध्यान पूर्वक करना चाहिए और आप को लम्बें समय तक नहीं बैठना चाहिए।
अपने शरीर की प्रकिया को समझकर उसके अनुरूप आसन को करना चाहिए।
इस आसन को एकांत में करना चाहिए और अगर आप इसे अध्यात्मिक रूप से कर रहे हो तो आप को पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके इस आसन को करना चाहिए।




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