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गर्भावस्था में कमर दर्द से छुटकारा


गर्भावस्था में कमर दर्द से छुटकारा दिलांएगे ये आसान उपाय
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जब कोई महिला गर्भवती होती है तब उसके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। यह बदलाव अंदर भी होते हैं और बाहर भी। गर्भवती होने के पहले महीने में महिला को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे- जी का मिचलाना, मॉर्निग सिक्नेस और उल्टी आना लेकिन जैसे ही महिला गर्भअवस्था के दूसरे या तीसरे महीने में कदम रखती है तो उसे कमर दर्द की भी शिकायत होने लगती है जो डिलीवरी होने तक रहती है। ऐसे में गर्भवती महिला गर्भअवस्था के 6 से 7 महीने तक हर दिन असहनीय कमर दर्द को झेलती है और इसे दूर करने के एक नहीं बल्कि कई सारे तरीकों को अपनाती है। लेकिन उसमें से कुछ तरीके ही कमर दर्द से राहत पहुंचाने में मददगार साबित होते हैं।
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गर्भावस्था में कमर दर्द होने के कारण
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बढ़ता वज़न: गर्भावस्था के दौरान वज़न बढ़ना आम बात है। जब कोई महिला गर्भवती होती है तो आमतौर पर उसका वज़न 11 से 16 किलो तक बढ़ता है जिसकी वज़ह से कमर दर्द बढ़ते वज़न के साथ होना शुरू हो जाता है। वजन बढ़ने के बाद सारा भार रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर आता है जिसका सीधा असर कमर पर पड़ता है और परिणामस्वरूप गर्भवती महिला को कमर दर्द होता है।

हार्मोंस में बदलाव: गर्भावस्था के दौरान बाहरी के साथ अंदरूनी बदलाव भी होते हैं जो महसूस किए जाते हैं। इनमें से एक है हार्मोंस का बदलना। जब महिला गर्भवती होती है तब उसके शरीर में रिलैक्सिन नाम का हार्मोन बनना शुरू होता है जिसकी मदद से बच्चे के जन्म में लिए श्रोणि भाग को ढीला होता है। इस हार्मोन की वज़ह से गर्भवती महिला को कमर के साथ पीठ में दर्द हो सकता है।

मांसपेशियों का अलग होना : जैसे जैसे गर्भवती महिला का गर्भाशय समय के साथ बढ़ने लगता है वैसे-वैसे महिला के शरीर की मांसपेशियां अलग होने लगती हैं, जिसकी वज़ह से कमर से तीव्रता के साथ कमर दर्द होने लगता है।
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स्थिति में बदलाव होना: गर्भावस्था के कारण महिला का गुरूत्वाकर्षण केंद्र बदल जाता है। जिसकी वज़ह बिना आपको पता लगे आपकी मुद्रा बदलने लगती है और आपकी कमर में दर्द होने लगता है।

तनाव: गर्भावस्था के दौरान ज़्यादातर महिलाएं कोई ना कोई बात सोचती ही जैसे डिलीवरी सही से होगी की नहीं, बच्चा सव्सथ रहेगा की नहीं, शरीर में ज़्यादा बदलाव तो नहीं आएगा..वगैरह वगैरह..और यही सब बाते सोचकर वह तनाव महसूस होता है। जिसकी वज़ह से उन्हें कमर दर्द होता है।

मुद्रा का सही ना होना: गर्भवती महिला को इन बातों को ध्यान देना चाहिए कि वह कैसे कैसे बैठ रही हैं और कैसे लेट रही हैं क्योंकि इसका इसका असर भी कमर और पीठ पर सीधा पड़ता है। अगर मुद्रा गलत है तो कमर या पीठ दर्द की समस्या होने लगती है।
गर्भावस्था में कमर दर्द होने से पहले रोकथाम

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बैठते वक्त रखें ध्यान: ध्यान रखें कि जब आप बैठें तो आपकी कमर एकदम सीधी रहे और उस पर कोई दबाव न पड़े।

हील्स को करे नज़रअंदाज़: गर्भावस्था के दौरान फुटवियर में फ्लैट स्‍लीपर्स पहनें जो कर्म्‍फटेबल हों। हाई हील्‍स और जूतों को ना पहनें क्योंकि इससे कमर पर अधिक भार पड़ता हैं।

अच्छे गद्दे का करें इस्तेमाल: जिस बिस्तर पर आप सोती हैं उसके गद्दे जितने अच्‍छे होंगे उतनी ही आपको नींद भी अच्‍छी आएगी। सोते समय अपने घुटनों के नीचे तकिया लगाएं, इसकी वज़ह से आपकी कमर पर कम भार पड़ेगा। इसके साथ ही आप अपने घुटनों के बीच भी तकिया लगाकर सो सकती हैं। ऐसा करने के आप कमर दर्द से बच सकती हैं।

कैरी ना करें एक्‍स्‍ट्रावेट: कोशिश करें कि गर्भावस्था के 9 महीनों के दौरान ज़्यादा भार लेकर ना चलें। यदि आप ज़्यादा वेट अपने साथ लेकर चलती हैं तो आपकी कमर पर एक्सट्रा भार पड़ता है जिससे आपके कमर दर्द बढ़ सकता है।

सही तरीके से झुकें: गर्भावस्था में अगर आपको ज़मीन से कुछ उठाना है तो पहले अपने घुटनों को मोड़ें और कमर को सीधा रखें। इसके अलावा झुकते समय कोशिश करें कि आपके शरीर का प्रेशर आपके पैरों पर पड़े कमर पर नहीं। नहीं तो कोशिश करें कि जो भी सामान आपकी ज़रूरत का है वो आपकी पहुंच के अंदर हो।

लंबे समय तक बैठने से बचें: गर्भावस्था के दौरान सबसे ज़्यादा भार आपकी कमर पर पड़ता है। ऐसे में देर तक बैठने को नज़रअंदाज़ करें। फिर भी अगर मजबूरी में आपका कोई ऐसा काम है जो लंबे समय तक बैठकर करना है तो स्‍टूल पर पैर रखकर बैठें।

वर्किंग वूमेन रखें ध्यान: ऑफिस में काम करते आपको लंबे समय तक बैठना पड़ता है तो बैठते वक्त कमर के पीछे तकिया जरूर लगाकर बैठें। बैठते वक्त तकिया लगाने से इससे आपकी पीठ को सहारा मिलेगा और कमर में दर्द नहीं होगा।
गर्भावस्था में होने वाले कमर दर्द से कैसे मिलेगा आराम?

गर्भावस्था के दौरान होने वाले कमर दर्द को दूर करने के लिए आप नीचे दिए गए तरीको को अपना सकती हैं।
व्यायाम देगा आराम


गर्भवास्था में कमर दर्द को दूर करने के लिए आप व्यायाम कर सकती है। व्यायाम में श्रोणि, मांसपेशियों और पेट वाले व्यायम आपकी कमर में पड़ने वाले भार और दबाव को कम करने में मददगार साबित होंगे। इस आसन को करने कि लिए आप अपने दोनों हाथों और घुटनों के बल बैठ जांए और पीठ को सीधा रखें। इसके बाद आप सांस को अंदर लें और सांस बाहर छोड़ें और इसी दौरान अपनी श्रोणि मांसपेशियों को अंदर की तरफ खींचे। फिर अपनी नाभि अंदर की तरफ और बाहर की तरफ खींचे। ऐसा आप 5-10 सैकंड तक बिना अपनी सांस को बिना रोके और बिना कमर हिलाए करती रहें। ध्यान रखें कि व्यायाम को पूरा करने के बाद मांसपेशियों को थोड़ा आराम दें। इसके अलावा बिड़ालासन भी ट्राई कर सकती हैं। कमर दर्द के आराम में ये भी फायदेमंद हो सकता है।
मालिश देगा रिलीफ


गर्भावस्था के दौरान मालिश करना काफी फायदेमंद साबित होता है। मालिश करने से ऐसी मांसपेशियां जो थकी हैं और जिनमें दर्द है उनको आराम मिलेता है। मालिश करने के लिए कोई भी कुर्सी लें और उसकी पीठ के ऊपर से आगे की ओर झुकें। इसके बाद अपने पति या माँ से आपकी पीठ के नीचे के हिस्से को मालिश करने को कहें। इसके अलावा मांसपेशियों पर भी मालिश करने को कहें।
तैराकी दिलाएगी कमर दर्द में राहत


अपने घर के आस-पास पता करें कि कोई पूल या कल्ब है की नहीं। अगर हों तो स्पेशल एक्वानेटल क्लासेस के बारे में पूछें। स्पेशल एक्वानेटल क्लासेस गर्भावस्था में पीठ व कमर दर्द को कम करने में राहत देती हैं।
एक्यूपंक्चर थैरेपी है असरदार

एक्यूपंक्चर थैरेपी किसी एक्सपर्ट से करवांए। किसी नये एक्यूपंक्चर थैरेपिस्ट से थैरेपी लेना नुकसान पहुंचा सकता है।
गर्म पानी की सिकाई से मिलेगा चैन

कोशिश करें कि दिन में एक बार गर्म पानी से नहांए। हो गर्म पानी का शावर लें, इससे कमर दर्द में आराम मिलेगा।
पट्टी का सहारा

सहारा देने वाली पट्टी पहनने से आपके पेट की मांसपेशियों और कमर पर पड़ने वाला थोड़ा वजन इसके ऊपर आ जाता है। अगर आप चाहती हैं कि आपको ढंग का आराम मिले तो अपने लिए सही नाप की पट्टी ही लें।
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ऊपर दिए गए तरीकों से आप गर्भावस्था के दौरान होने वाले कमर दर्द से राहत पा सकते है। लेकिन इनमें से आप जो भी तरीका अपनांए उसे लगातार करें, एक दो बार करने से आपके कमर दर्द से राहत नहीं मिलेगी।

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