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एक्सरसाइज करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां


एक्सरसाइज करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
अगर आप भी जिम में एक्सर्साइज करते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए वरना आप इंजरी का शिकार हो सकते हैं.
अगर आप भी जिम में एक्सर्साइज करते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए वरना आप इंजरी का शिकार हो सकते हैं. और इससे आपका काफी नुकसान हो सकता है. तो आइए जानते हैं, जिम में एक्सरसाइज करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

​जिम में वार्मअप किए बिना एक्सरसाइज बिल्कुल भी न करें. अगर आप अच्छे से वार्मअप करेंगे तो क्रैंप और मसल टियर से बच सकते हैं.

जिम में जबरदस्ती वेट लिफ्टिंग न करें. अगर आप एक लिमिट के बाद वेट नहीं उठा सकते तो बिल्कुल न उठाएं. इससे इंजरी का खतरा होता है.

एक्सरसाइज के दौरान ब्रीदिंग पर पूरा ध्यान न देने से बौडी में औक्सीजन की कमी हो सकती है. इस वजह से कई बार लोग बेहोश भी हो जाते हैं. इसलिए एक्सरसाइज के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि आपकी सांस धीमी नहीं होनी चाहिए. ऐसे में मुंह और नाक दोनों से सांस लें.

इसके अलावा वेट ट्रेनिंग करते समय अपनी फार्म पर जरूर फोकस करें. अच्छा रिजल्ट हासिल करने और इंजरी से बचने के लिए भी फार्म सबसे ज्यादा जरूरी है.
नियमित दौड़ने वालों के लिए है यह जानकारी
आप दौड़ने में कितनी कैलोरी बर्न करते हैं यह आप की दौड़ने की गति और आप के भार पर निर्भर करता है. आप जितनी तेज गति से दौड़ेंगे आप की मैटाबोलिक दर उतनी ही अधिक होगी.


ब्रेकफास्ट हैल्दी डाइट में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह दौड़ने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराता है. अगर आप मौर्निंग रनर हैं तो आप का पोस्ट रन ब्रेकफास्ट अगले दिन दौड़ने के लिए रिकवर करता है. अगर आप दोपहर में दौड़ते हैं, तो ब्रेकफास्ट आप को दौड़ने के लिए ऊर्जा से भरा महसूस कराएगा. अगर आप शाम को दौड़ते हैं, तो ब्रेकफास्ट सारा दिन ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सहायता करेगा. ब्रेकफास्ट करने का दूसरा फायदा यह होगा कि आप दोपहर में हैवी लंच खाने से बच जाएंगे, जिस से आप को शाम को दौड़ते समय भारीपन महसूस नहीं होगा.

रनर्स ब्रेकफास्ट

ब्रेकफास्ट को दिन का सब से महत्त्वपूर्ण भोजन माना जाता है. 7-8 घंटे की नींद के बाद जब आप उठते हैं तो आप को अपने दिन की शुरुआत करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है. आप दौड़ने में कितनी कैलोरी बर्न करते हैं यह आप की दौड़ने की गति और आप के भार पर निर्भर करता है. आप जितनी तेज गति से दौड़ेंगे आप की मैटाबोलिक दर उतनी ही अधिक होगी और उतनी ही अधिक कैलोरी बर्न होगी. वैसे

1 मील चलने की तुलना में दौड़ने में लगभग दोगुनी कैलोरी बर्न होती है. 1 मील दौड़ने में एक औसत भार का व्यक्ति 100 कैलोरी बर्न कर लेता है. अगर आप मौर्निंग रनर हैं तो आप को अपने ब्रेकफास्ट को 2 भागों में बांटना होगा- प्रीरनिंग ब्रेकफास्ट और पोस्ट रनिंग ब्रेकफास्ट.

प्री रनिंग ब्रेकफास्ट
दौड़ने के बाद पौष्टिक और संतुलित भोजन खाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है दौड़ने के पहले शरीर को ऐनर्जाइज करना. आप दौड़ने से पहले जो खाते हैं, उस पर ही आप के दौड़ने की परफौर्मैंस निर्भर करती है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कब और कितना दौड़ने की योजना बना रहे हैं.

महत्त्वपूर्ण है टाइमिंग

अगर आप सुबह 6 बजे 3 मील दौड़ना चाहते हैं तो केवल 20 मिनट पहले एक संतरा खाना ठीक रहेगा. जो लोग रविवार को मैराथन दौड़ लगाना चाहते हैं उन्हें शनिवार की रात को भरपेट खाना चाहिए. खिलाडि़यों और ऐथलीटों को अपने प्रदर्शन के 3 दिन पहले से अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.


पचने में हो आसान

दौड़ने के पहले के खाने में वसा और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होनी चाहिए ताकि वह आसानी से पच सके.

ऊर्जा से भरपूर

प्री रनिंग ब्रेकफास्ट ऊर्जा से भरपूर होना चाहिए ताकि दौड़ते समय आप के मस्तिष्क और मांसपेशियों को लगातार ऊर्जा मिलती रहे.

कितना खाएं

दौड़ने से पहले कभी भी बहुत ज्यादा न खाएं. अगर आप ज्यादा खाएंगे तो थका हुआ महसूस करेंगे, लेकिन ऐसा भी न करें कि दौड़ने से पहले कुछ भी न खाएं क्योंकि खाली पेट दौड़ने से मांसपेशियां कमजोर होती हैं.

पानी का स्तर बनाए रखें

सब से पहली और जरूरी बात यह है कि शरीर में पानी का स्तर बनाए रखें. हालांकि आप दिनभर पानी पीते रहते हैं, लेकिन दौड़ने से पहले थोड़ा ज्यादा पानी पीएं.

प्रोटीन है जरूरी

दौड़ने से पहले जो भी खाएं, उस में प्रोटीन होना सब से जरूरी है. प्रोटीन मांसपेशियों को टूटने से बचाता है और इस से शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है.

पोस्ट रनिंग ब्रेकफास्ट

दौड़ने के 1 घंटे बाद ही कुछ खाएं. लेकिन पानी अवश्य पी लें, क्योंकि दौड़ने से शरीर में इलैक्ट्रोलाइट की बहुत कमी हो जाती है. स्वयं को पोषण देने के लिए नीबू पानी, नारियल पानी या सादा पानी ले सकते हैं. दौड़ने के बाद जो खाएं उस में अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन ले सकते हैं. अंडे, फल, दूध और दुग्ध उत्पाद, ब्रैड, बटर, साबूत और अंकुरित अनाज आदि लिए जा सकते हैं. अपने भोजन में नमक भी शामिल करें, क्योंकि पसीने से शरीर में नमक की कमी हो जाती है जिस से शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है. रक्त में शुगर का स्तर कम न हो इसलिए थोड़ी मात्रा में शुगर भी लें.

रनर्स के नाश्ते का कंपोजीशन

कार्बोहाइड्रेट: यह मांसपेशियों के लिए सब से आसानी से उपलब्ध ऊर्जा का स्रोत है. ब्रेकफास्ट की कुल कैलोरी का 55-70% कार्बोहाइड्रेट से आना चाहिए.

प्रोटीन: नाश्ते की कुल कैलोरी का 15% प्रोटीन से आना चाहिए. प्रोटीन मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए बहुत जरूरी है.

वसा: जो लोग नियमित रूप से दौड़ते हैं उन्हें वसा का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के सर्वाधिक सांद्रित ऊर्जा का स्रोत है.

फ्ल्यूड: रनर्स को पानी तो पीना ही चाहिए, लेकिन उस के साथ ही अन्य तरल पदार्थ का भी सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए. यह शरीर के ताप को नियंत्रित करने और शरीर में जल का स्तर बनाए रखने के लिए जरूरी है.

इन्हें न खाएं

रनर्स का ब्रेकफास्ट जितना पोषक होगा उन का प्रदर्शन उतना ही बेहतर रहेगा. इसलिए जरूरी है कि ब्रेकफास्ट में ऐसे भोजन को शामिल न किया जाए, जिस में कैलोरी की मात्रा तो भरपूर हो, लेकिन पोषकता अत्यधिक कम हो. नाश्ते में इन चीजों को खाने से बचें:

व्हाइट ब्रैड, पेस्ट्री, डोनट, हलवा, मिठाई, केक, वसा युक्त दूध और दुग्ध उत्पाद, सोडा और कोल्ड डिं्रक्स, परांठे, साबूदाना, पूरी सब्जी, कचौरी, समोसा.

क्यों जरूरी है ब्रेकफास्ट

ब्रेकफास्ट न करने से शरीर में वसा के मैटाबोलिज्म के लिए जरूरी ऐंजाइम्स उत्पन्न नहीं होते हैं. अगर आप सुबह ब्रेकफास्ट नहीं करेंगे तो रक्त में शुगर और कोलैस्टेरौल का स्तर बढ़ जाता है, जो आप को कई बीमारियों का आसान शिकार बना सकता है, साथ ही आप के लिए लंबे समय तक दौड़ना भी असंभव हो जाएगा.

ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए

ब्रेकफास्ट शरीर और मस्तिष्क को ईंधन उपलब्ध कराता है. अगर आप रनिंग करने के बाद ब्रेकफास्ट नहीं लेगे तो शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाएगा. ऊर्जा उपलब्ध करवाने के अलावा ब्रेकफास्ट महत्त्वपूर्ण पोषक का भी अच्छा स्रोत है. ब्रेकफास्ट में खाया जाने वाला साबूत अनाज, सूखे मेवे, फल और सब्जियां आदि प्रोटीन, विटामिंस और मिनरल्स के अच्छे स्रोत हैं. शरीर को इन आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और अगर ब्रेकफास्ट में इन का सेवन पर्याप्त मात्रा में न किया जाए तो दिन के बाकी समय में इन की पूर्ति करना संभव नहीं होता है.


अगर आप रोज रनिंग करने के बाद पोषक नाश्ता नहीं करेंगे तो आप की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाएंगी. इसलिए दौड़ने के 1 घंटा बाद पौष्टिक नाश्ते का सेवन बहुत जरूरी है.

ब्रेन पावर के लिए आवश्यक

ब्रेकफास्ट में अच्छे प्रकार का प्रोटीन खाने से अधिक देर तक पेट भरा लगता है. इस के अलावा यह प्रोटीन अमीनो ऐसिड टायरोसिन को मस्तिष्क में पहुंचने में सहायता करता है, जिस की सहायता से सजगता बढ़ाने वाले रसायनों डोपामाइन और ऐपिनेफ्रिन का उत्पादन होता है. अगर आप ब्रेकफास्ट नहीं करेंगे तो रक्त में शुगर का स्तर कम हो जाएगा जो नकारात्मक रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करता है. इस से आप अगले दिन खुद को दौड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाएंगे.
जोड़ों के दर्द को न करें अनदेखा
आर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बुढ़ापे में विकसित होते हैं, लेकिन आजकल ये लक्षण बच्चों और युवाओं में भी देखे जा रहे हैं. पुरुषों में और अधिक वजन वाले लोगों की तुलना में महिलाओं में आर्थराइटिस की बीमारी बड़ी तेजी से पैर पसार रही है.


शरीर के किसी भी जोड़ में दर्द, अकड़न और सूजन को अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह आर्थराइटिस यानी गठिया रोग हो सकता है. जोड़ वह जगह होती है जहां पर दो हड्डियों का मिलन होता है, जैसे कोहनी या घुटना. कुछ तरह के आर्थराइटिस में जोड़ों की बहुत ज्यादा क्षति पहुंचती है. आर्थराइटिस यानी जोड़ों की सूजन, शरीर में एक या एक से अधिक जोड़ों को प्रभावित कर सकती है. डाक्टर्स की मानें तो हमारे शरीर में सौ से ज्यादा प्रकार की आर्थराइटिस होती है. सबसे आम प्रकारों में से दो – आस्टियो आर्थराइटिस और रूमेटोइड आर्थराइटिस है, जिससे ज्यादातर लोग प्रभावित होते हैं.

आर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों में जलन और क्षति के कारण पैदा होता है. जलन के कारण ही ऊतक गर्म, सूजन और दर्द से भर जाते हैं. आर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बुढ़ापे में विकसित होते हैं, लेकिन आजकल ये लक्षण बच्चों और युवाओं में भी देखे जा रहे हैं. पुरुषों में और अधिक वजन वाले लोगों की तुलना में महिलाओं में आर्थराइटिस की बीमारी बड़ी तेजी से पैर पसार रही है.

क्यों होती है यह बीमारी?

असंयमित जीवनशैली, न्यूट्रीशन की कमी और प्रदूषण के कारण आर्थराइटिस की बीमारी आज बच्चों, युवाओं और वृद्धों सभी को अपना निशाना बना रही है. इसकी वजह आनुवांशिक भी हो सकती है. सही खानपान न होना, अधिक समय तक बैठ कर काम करना, वाकिंग की कमी, एक्सरसाइज की कमी, धूप की कमी जैसे कारक इस रोग का कारण होते हैं. अगर इस बीमारी का समय पर और जल्दी उपचार नहीं करवाया जाए तो, यह स्थाई अपंगता का रूप ले सकती है. इस हालत में चलना-फिरना और घर का नार्मल कामकाज करने में भी परेशानी पैदा होने लगती है. घुटनों और कोहनी की जकड़न चलना-फिरना तक मुश्किल कर देती है और ज्यादातर बैठे रहने की वजह से शरीर का वजन तेजी से बढ़ने लगता है और इससे यह बीमारी और जटिल हो जाती है.


इस तरह पहचानें लक्षण

आर्थराइटिस में शरीर के जोड़ों में दर्द और सूजन महसूस होती है. एक जगह बैठे रहने पर अकड़न होती है. हर वक्त थकान महसूस होती है. भूख भी कम लगती है और धीरे-धीरे वजन भी कम होने लगता है. कई बार बुखार भी आता है. कई बार जोड़ों में पानी भर जाता है. कई मामलों में ये लक्षण कुछ दिनों बाद ही दिखने लगते हैं, तो कुछ में कई महीनों या सालों बाद ये लक्षण सामने आते हैं. कई लोगों में ये लक्षण उभरकर ठीक भी हो जाते हैं और दोबारा कुछ साल बार वापस आ सकते हैं. आर्थराइटिस में जब रोग अपने चरम पर होता है, तो सुबह उठने के साथ ही जोड़ों, हड्डियों में दर्द के साथ अकड़न होती है और यह अकड़न लगभग एक से पांच घंटे तक बनी रहती है.
शुरुआती अवस्था में डाक्टर जोड़ों में दर्द के प्रकार, सूजन आदि के आधार पर ही बीमारी का पता लगाते हैं. हालांकि डाक्टर कई बार सी-रिएक्टिव प्रोटीन, कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी), ईएसआर आदि टेस्ट भी करवाते हैं. कुछ आर्थराइटिस में विशेष टेस्ट करवाये जाते हैं, लेकिन यह बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है. इसके अलावा एक्सर-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई भी करवानी पड़ सकती है. बीमारी की शुरुआत में दर्द से निजात देने के लिए डाक्टर कार्टिसोन टेबलेट या इंजेक्शन देते हैं. हालांकि कई बार यह दर्द तो ठीक कर देते हैं, लेकिन इसके चलते क्लिनिकली रोग का पता लगाने में दिक्कत होती है और बीमारी होने के बावजूद उसके लक्षण दब जाते हैं.

कितनी तरह का आर्थराइटिस

आर्थराइटिस मुख्य रूप से दो तरह का होता है – रूमेटायड और स्पौन्डिलोआर्थोपेथी. रूमेटायड में हड्डियों के जोड़ों पर, खासतौर पर दोनों हाथ, कलाइयां, घुटने, कोहनी, कंधे, पैर के पंजे और एड़ियों में दर्द होता है. वहीं स्पौन्डिलोआर्थोपेथी में कूल्हे, कंधे और रीढ़ की हड्डी में दर्द रहता है. महिलाओं में रूमेटायड आर्थराइटिस की शिकायत ज्यादा होती है, वहीं पुरुषों में स्पान्डिलोआर्थोपेथी ज्यादा होता है. कई बार अधिक उम्र की महिलाओं में अचानक किसी एक जोड़ में या पैर के पंजे अथवा उंगली में गंभीर दर्द और सूजन हो जाती है. यह खून में बढ़े हुए यूरिक एसिड के कारण भी हो सकता है. इसे गाउट कहते हैं, जो आर्थराइटिस का ही एक प्रकार है.


जल्दी शुरू करें उपचार

अगर आर्थराइटिस के लक्षण नजर आ रहे हैं, तो इस दर्द और सूजन को टालें नहीं और न ही दर्दनिवारक दवा खा कर इसको दबाने की कोशिश करें. आर्थराइटिस के लक्षण दिखने पर तुरंत रूमेटोलाजिस्ट के पास जाएं. इलाज जितना जल्दी शुरू होगा, उतना ही जोड़ों को कम नुकसान पहुंचेगा और भविष्य में जोड़ों के विकार के आसार कम होंगे. आर्थराइटिस में होने वाले दर्द, सूजन और अन्य परेशानियों को कम करने के लिए डौक्टर्स दवाइयां देते हैं, लेकिन अच्छा जीवन जीने के लिए मरीज को दवाइयों के साथ-साथ नियमित व्यायाम भी करना चाहिए. सरसों या जैतून के गर्म तेल की मालिश दर्द और सूजन में काफी राहत पहुंचाती है
आदतों में बदलाव से कम करें ब्लडप्रैशर
आविष्कारों की वजह से इनसान का जीवन आज बड़ा ही आरामदायक बन गया है. चूंकि उसे शारीरिक श्रम बिलकुल भी नहीं करना पड़ता इसलिए उस के शरीर में चरबी की मात्रा बढ़ती है, जिस के फलस्वरूप मोटापा बढ़ जाता है.

आविष्कारों की वजह से इनसान का जीवन आज बड़ा ही आरामदायक बन गया है. चूंकि उसे शारीरिक श्रम बिलकुल भी नहीं करना पड़ता इसलिए उस के शरीर में चरबी की मात्रा बढ़ती है, जिस के फलस्वरूप मोटापा बढ़ जाता है. मोटापा बढ़ने का मतलब है अनेक रोगों को आमंत्रित करना, जिन में से ब्लडप्रैशर भी एक है. आइए, जानें कि ब्लडप्रैशर कम करने के लिए क्या उपाय किए जाएं.

सब से कठोर उपाय तो यही है कि हम अपनी आदतों में बदलाव लाएं. हालांकि यह कठिन तो अवश्य है लेकिन इन में बिना सुधार लाए काम भी तो नहीं चल सकता है.

ब्लडप्रैशर कम करने के लिए वजन घटना है जरूरी

मोटापा बढ़ जाने से हृदय को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है. आप के बढ़े मोटापे के हर अतिरिक्त पाउंड के लिए हृदय को बड़ी ताकत लगानी पड़ती है. शरीर के वजन को उम्र और लंबाई के अनुसार ठीक कर लेने पर ब्लडप्रैशर को 15 से 20 प्वाइंट तक कम किया जा सकता है.


धूम्रपान को रोकना है जरूरी

धूम्रपान आप के शरीर के लिए आवश्यक विटामिन व खनिज, जो शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं, का हृस करता है. तंबाकू में निकोटीन होता है और धूम्रपान से जब यह शरीर में जाता है तो रक्त नलिकाओं को सिकोड़ देता है, जिस से ब्लडप्रैशर बढ़ जाता है. इस के अलावा निकोटीन के और भी बुरे प्रभाव हैं, यह विटामिन ‘बी’ नायसिन की मात्रा को भी घटा देता है.

धूम्रपान का एक बड़ा नुकसान यह भी है कि सिगरेट के धुएं में कार्बन- मोनोआक्साइड होता है, जो रक्त की आक्सीजन वहन करने की क्षमता को कम करता है. इस से हृदय को अपना काम करने के लिए अधिक बल लगाना पड़ता है.
धूम्रपान छोड़ कर ब्लडप्रैशर को 5 से 10 प्वाइंट तक कम किया जा सकता है. सिगरेट व कौफी दोनों को छोड़ देने से ब्लडप्रैशर 15 से 20 प्वाइंट तक कम किया जा सकता है. यह याद रखें कि एक कौफी के कप का असर करीब 2 घंटे तक बना रहता है. आप को अपने ब्लडप्रैशर की बिलकुल सही रीडिंग लेनी है तो कौफी पीना छोड़ दें.

नियमित व्यायाम है जरूरी
नियमित व्यायाम के साथ उपयुक्त पोषक आहार लेने से हृदय मजबूत बनता है. आनुवंशिक रक्त धमनियां खुल जाती हैं, तनाव कम रहता है, वजन सामान्य रहता है और ब्लडप्रैशर कम होने में सहायता मिलती है. सच तो यह है कि यदाकदा किया गया कठोर परिश्रम रोजाना टहलने की अपेक्षा कम असरदार होता है.

तनाव घटाना है जरूरी

ब्लडप्रैशर को सामान्य बनाए रखने में तनाव बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. सब से पहले तो तनाव क्यों है, इस बात का ठीकठीक पता लगाएं. इस से भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि तनाव की समस्या है क्यों? यह बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन बड़ी बात यह है कि इस समस्या से आप निबटते कैसे हैं?

आप ने एक बार समस्या का कारण जान लिया तो उस का तुरंत समाधान भी मिल जाएगा. यह समाधान पत्नी के साथ मनमुटाव रखने या बच्चों को डांटने जैसा नहीं है. यह समाधान है व्यायाम करने में, संगीत सुनने में, योग करने में. इन्हें जीवन में उतार कर ही समाधान ढूंढ़ा जा सकता है.


तनाव का एक और बड़ा कारण नौकरी का माहौल भी है. नौकरी में पदोन्नति के अवसर न हों, जिस में भविष्य न हो तथा असुरक्षित नौकरी हो, इन सब का ब्लडप्रैशर से सीधा संबंध है और हृदय संबंधी बीमारी से पीडि़त होने की आशंका हो जाती है.

देखा गया है कि योगाभ्यास से अधिकांश लोगों का ब्लडप्रैशर कम हुआ है लेकिन इसे नियमित रूप से किया जाए तो ही लाभ मिलता है.

अगर आप बायोफीड बैक से अपरिचित हों तो इस के बहुत ही आसान व सस्ते तरीके हैं जिन से इन के फायदे जाने जा सकते हैं. आप को पल्स मोनिटर खरीद लेना चाहिए. पल्स मोनिटर एक छोटा सा यंत्र है जिसे तर्जनी में पहना जाता है, जिस से नाड़ी की गति को बड़ी ही आसानी से जाना जा सकता है.

तनाव से मुक्त रहने तथा ब्लडप्रैशर को नियंत्रण में रखने में पालतू जानवर भी बहुत उपयोगी होते हैं. ऐसे हजारों जानवर होंगे जिन्हें अच्छे सहारे की आवश्यकता रहती है.

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