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कोहनी में दर्द से निजात पाने के सबसे सटीक तरीके


कोहनी में दर्द से निजात पाने के सबसे सटीक तरीके

एल्बो पेन या कोहनी का दर्द इंसानी हड्डियों में कई विसंगतियों के चलते हो जाता है। मांसपेशियों और हड्डियों के बीच रंध्रों में विच्छेद या ऊतकों में संक्रमण के चलते ऐसी समस्या हो जाती है। यह समस्या एथलीट और टेनिस खिलाड़ियों के साथ ज्यादा देर तक डेस्क पर काम करने वालों में देखी जाती है। हाथ और कंधों के बीच स्थित कोहनी के जोड़ में मौजूद द्रव में खिंचाव और मांसपेशियों में संकुचन की स्थिति कोहनी में दर्द रूप धारण कर लेती है। एल्बो पेन क्यों होता है, इसके क्या कारण और लक्षण होते हैं? जैसी स्थितियों के साथ ऐसी समस्या के सम्पूर्ण निदान के लिए कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनपर मंथन करके जीवन मे ऐसी कष्टकारी समस्याओं से काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।
कोहनी दर्द के प्रमुख कारण
कोहनी में दर्द एक ऐसी समस्या है जो कमोवेश कई कारणों से हो जाती है। इस तरह का दर्द आम तौर पर एथलीट और टेनिस खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। ज्यादा देर तक खेलने या फिर दौड़ लगाने से कोहनी की मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हड्डियों के इस जोड़ में दर्द आनुवंशिकता के कारण भी हो सकता है जो माता या पिता के जीन द्वारा बच्चों में फैलने वाला रोग होता है।
शरीर मे यूरिया या यूरिक एसिड की मात्रा का बढ़ाव भी दर्द का मुख्य कारण बनता है जो अक्सर गठिया या अर्थराइटिस के रूप में सामने आता है। दफ्तर में डेस्क पर बैठकर देर तक काम करने वाले लोगों में भी कोहनी का दर्द हो जाता है। धमनियों में रक्त संचार की गति में परिवर्तन या विसंगति भी एल्बो पर दबाव बनाती है जो किसी आंतरिक रोग की भी वजह हो सकती है जिसके चलते दर्द हो जाता है। कुछ परिस्थितियों में यह दर्द सामान्य रहता है लेकिन अक्सर इसकी विषमता काफी तकलीफ देने वाली होती है।
कोहनी में दर्द के प्रमुख लक्षण

कोहनी या हड्डियों का शिरा जो धमनियों से आपस मे जुड़ा होता है, हाथों को जोड़ने वाला एक ऐसा जोड़ होता है जिससे हाथ संचालित होते हैं। हथेलियों में सुन्नता के साथ सूजन भी कोहनी में दर्द के लक्षण होते हैं। मांसपेशियों में खिंचाव के चलते कोहनी में सूजन और दर्द का आभास होता है। उंगलियों में जकड़न या फिर कंधों में दर्द उठना भी कसक लक्षण माना जाता है। रक्तचाप में अवरोध से हड्डियाँ प्रभावित होती हैं जिनके चलते सिर चकराने जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है और कोहनी का दर्द शुरू जो जाता है।
पुरुषों में कोहनी का दर्द
वैसे आधुनिक युग मे महिलाएं पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में कम नही हैं लेकिन शारीरिक संरचना में भिन्नता की वजह से दोनों में रोग भेद अलग-अलग होते हैं। एक सर्वे के मुताबिक देश के करोड़ों युवा आज कोहनी में दर्द का दंश झेल रहे हैं। कुछ परिस्थितियों में अधिक शारीरिक श्रम करने वाले पुरुष हड्डियों में खिंचाव के चलते कोहनी दर्द का शिकार हो जाते हैं।

मदिरा सेवन के साथ चेन स्मोकर या फिर धूम्रपान के लती लोग भी इस मर्ज का सामना करते हैं। अधिक मात्रा में सेवन की गई अल्कोहल लीवर सहित किडनी ओर खून में यूरिया के स्तर को बढ़ाने के साथ बिलिरुबिन की मात्रा को भी बढ़ा देता है जो हर मामले में हड्डियों का दुश्मन माना जाता है। इस समस्या के साथ ही कोहनी का दर्द होना सामान्य बात होती है लेकिन सही उपचार ना मिलने की स्थिति में मर्ज जानलेवा हो जाता है।
महिलाओं में कोहनी दर्द
टेनिस खेलने वाली महिलाओं में कोहनी दर्द की समस्या हो जाती है। इसके अलावा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषक आहार ना मिलने पर कैल्शियम की कमी से दर्द होना एक आम समस्या है। वेट लिफ्टिंग ओर स्क्वैश जैसे खेल खेलने वाली महिलाओं की मांसपेशियों के फटने या खिंचाव की स्थित में दर्द उत्पन्न हो जाता है। उम्र की ढलान पर पहुंचने वाली स्त्रियों में गठिया या पुरानी चोट के चलते टेंडन में तनाव या फिर दर्द दीर्घायु तक बना रहता है।
बदलते मौसम में कोहनी दर्द
पुरानी चोट या फिर हड्डियों के टूटने या चटकने के चलते जोड़ों के ठीक हो जाने के कई सालों बाद भी मौसम के बदलाव के साथ कोहनी में दर्द हो जाता है। सर्दियों का मौसम इस तरह के दर्द का बड़ा माकूल समय होता है। इस मौसम में एल्बो में लगी पुरानी चोट उभरकर सामने आती है जो सूजन के रूप में दर्द पैदा कर सकती है। कोहनी मेंदर्द के साथ लाल रेशेज का पड़ना स्वाभाविक होता है। सर्दियों के अलावा बारिश के मौसम में पुरवाई हवा का वेग भी कोहनी का दर्द दे सकता है। इसके अलावा गठिया जैसे रोगों के पनपने का भी यह मौसम सबसे अनुकूल माना जाता है। हालांकि आंतरिक रोगों से होने वाले दर्द में मौसम का कोई खास योगदान नही माना जाता।
कोहनी दर्द होने से पहले रोकथाम

मकैनिक हो या फिर खिलाड़ी, हर कोई कोहनी में दर्द की समस्या से बच सकता है। यदि हड्डियों में फ्रैक्चर हो गया हो और घाव भर जाने के बाद एल्बो पेन की आशंका हो तब भी कुछ उपायों को अपनाकर काफी हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती है। यदि कोई प्लम्बर या मकैनिक जो अपनी कलाई को ज्यादा देर तक काम मे लगाता है उसे सबसे पहले तो अधिक श्रम करने से बचना चाहिए। यदि किन्हीं कारणों से काम नही रोक सकता तो काम के बाद घर आने पर गुनगुने पानी मे थोड़ा नमक मिलाकर हथेलियों और कोहनी को हल्के हाथों से धुलना चाहिए। इस प्रक्रिया से खिलाड़ी और मकैनिक दोनों की एल्बो मांसपेशियों को राहत मिलती है और दर्द की आशंका दूर हो जाती है। हड्डियों को सुरक्षित और मजबूती प्रदान करने के लिए खान पान में सुधार करने की जरूरत होती है। ऐसा भोजन इस्तेमाल करें जो हल्का और सुपाच्य हो। कई परिस्थितियों में वात रोग भी कोहनी का दर्द बढ़ाने का कारण बन जाता है। मानसिक सकारत्मकता के साथ जीवनशैली में सुधार कर नियमित नियंत्रित योग भी इस तरह की समस्या से राहत प्रदान करती हैं।
कोहनी का दर्द हो जाने पर उपचार
कोहनी में दर्द हो जाने पर आधुनिक दवाओं का सेवन एक चलन तो बन ही गया है अपितु यह लोगों की मजबूरी भी होती है। वैसे तो दुनिया मे कई उपचार विधाएं मौजूद हैं लेकिन सबसे प्रचलित ऐलोपैथ या आधुनिक उपचार के अलावा यूनानी, आयुर्वेद और होम्योपैथी के माध्यम से दुनिया भर के कोहनी में दर्द के मरीजों का उपचार किया जाता है। यदि किसी कारण से आपको कोहनी दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो कुछ उपचार के माध्यम से इस मर्ज को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
यूनानी उपचार से कोहनी दर्द का इलाज

हर्बल पद्धति से तैयार यूनानी दवाओं को हड्डी दर्द या फिर कोहनी में दर्द जैसी समस्याओं से स्थाई समाधान का सबसे सटीक तरीका माना जाता है। हर्बल द्वारा केमिकल फ्री दवाएं हड्डियों का पोषण तो करती ही हैं अपितु पुरानी से पुरानी चोट से उभरने वाली इस तरह की मर्ज को उपचार के माध्यम से जड़ से समाप्त कर देती हैं। सबसे खास बात यह है कि इन दवाओं का किसी भी तरह का शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नही होता। कुछ परहेज के साथ कि गई यूनानी उपचार वाकई काफी असरदार होती है। सबसे खास बात यह है कि इन मामलों में फौरी राहत पहुंचाने वाली एलोपैथी दवाओं का इस्तेमाल इन दवाओं के साथ किया जा सकता है वह भी बिना किसी नुकसान के, यदि मरीज को कोई आकस्मिक जरूरत पड़े तब।
एलोपैथी उपचार विधा से कोहनी के दर्द का इलाज

एलोपैथी ऐसा उपचार माध्यम होता है जो कोहनी के दर्द में तुरंत राहत देता है। एलोपैथी चिकित्सक उम्र और लिंग के अनुसार इस मर्ज में एक्सरे या एमआरआई के साथ कुछ ब्लड टेस्ट कराने के बाद उपचार करता है। पेनकिलर दवाओं के माध्यम और कुछ गर्म पट्टी बांधने के उपायों के साथ दर्द दूर होने लगता है। आधुनिक उपचार माध्यम फौरी राहत तो देता है लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं जिनसे शरीर को कई तरह की दुश्वारियों को झेलना पड़ता है।
आयुर्वेद से कोहनी दर्द का उपचार

कोहनी में दर्द के उपचार के लिए यह माध्यम प्राचीन और पारंपरिक के साथ काफी प्रासंगिक भी माना जाता है। जड़ी बूटियों से तैयार होने वाली ये दवाएं कोहनी में लगी चोट या फ्रैक्चर के दौरान काफी राहत पहुंचाने वाली होती हैं। इनके प्रभाव से मांसपेशियों में हुआ खिंचाव खत्म हो जाता है और दर्द भी दूर होने लगता है। यूनानी और आयुर्वेद उपचार माध्यम को एक साथ अपनाना सोने में सुहागा जैसा होता है।
होम्योपैथी से घुटने दर्द का इलाज
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होम्योपैथी या जर्मन तकनीक की दवाओं का प्रचलन भारत जैसे विशाल देश मे काफी चलन में है। इस माध्यम में चिकित्सक सबसे पहले रोग के लक्षण प्रकट होने वाली दवाओं के सेवन की सलाह देते हैं। यदि प्रारंभिक उपचार के दौरान दवाएं सफल हो जाती हैं तब कोहनी में दर्द जैसे उपचार में आसानी होती है। हालांकि ऐसी दवाएं काफी देर बाद शरीर पर असर दिखाना शुरू करती हैं और इसमें काफी परहेज भी बताया जाता है। आकस्मिक दर्द के दौरान होम्योपैथी दवाएं बिल्कुल बेअसर होती हैं।
कोहनी दर्द में जीवनशैली संबंधित जरूरी सुझाव

कोहनी का दर्द या एल्बो पेन ऐसी समस्या होती है जिसके रोकथाम के लिए कुछ खास बातें ध्यान में रखनी चाहिए। हड्डियों को मजबूत करने के लिए कैल्शियम की भरपूर मात्रा का सेवन किया जाना चाहिए। दर्द के दौरान गर्म पट्टी से सिंकाई और आराम की जरूरत होती है। पानी की भरपूर मात्रा का सेवन करें। दूध और हरी साग सब्जियों का सेवन करें। हल्का व्यायाम करते रहें। मन को खुश रखें और चिकित्सक की सलाह पर दवाओं का सेवन करें।



कोहनी और हाथ में दर्द हो सकता है टेनिस एल्बो, जानें लक्षण और प्राकृतिक इलाज


टेनिस एल्बो के कारण हाथों को हिलाने-डुलाने में परेशानी होने लगती है।
टेनिस एल्बो की शुरुआत कोहनी में दर्द से होती है।
कुछ प्राकृतिक उपायों से टेनिस एल्बो के दर्द से राहत पाई जा सकती है।

हो सकता है आपने कभी टेनिस न खेला हो, मगर आपकी कोहनी और हाथ में होने वाले दर्द को डॉक्टर टेनिस एल्बो बताएं। दरअसल टेनिस एल्बो एक ऐसी बीमारी है, जो ज्यादातर टेनिस खिलाड़ियों को होती है। खेल कैरियर में भारत के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भी ये बीमारी हो चुकी है। टेनिस एल्बो एक खतरनाक बीमारी है, जिसके कारण हाथों को हिलाने-डुलाने में परेशानी होने लगती है। आमतौर 30 से 50 साल की उम्र में इस बीमारी के लोग ज्यादा शिकार होते हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है ये बीमारी है किस तरह कुछ प्राकृतिक उपायों से किया जा सकता है इसका इलाज।
क्यों होता है टेनिस एल्बो

कोहनी की हड्डी व मांसपेशियों पर अतिरिक्‍त दबाव पड़ने के कारण टेनिस एल्बो की समस्या हो सकती है। ये बीमारी होने पर आमतौर पर कोहनी में दर्द होता है। कभी-कभी यह दर्द असहनीय हो जाता है और संवेदनशीलता के कारण कोहनी और कलाई में सूजन आ सकती है। टेनिस एल्बो किसी भी व्यक्ति को तब होता है जब वह किसी भी भारी काम में अपने एक हाथ का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करता है।
खतरनाक होता है टेनिस एल्बो

टेनिस एल्बो की शुरुआत कोहनी में दर्द होने से होती है, लेकिन सही समय पर इलाज न करवाने से यह पूरी बाजू में आ जाता है। इस बीमारी के कारण हाथ उठने में परेशानी होती है। उंगलियां भी इसके कारण प्रभावित हो सकती हैं और कलाई और कोहनी के बीच के हिस्‍से में भी दर्द होता है।
क्या है इलाज
टेनिस एल्बो होने पर आमतौर पर सर्जरी के द्वारा ही इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। नियमित व्यायाम या हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करने से इस बीमारी की संभावना कम हो जाती है। लेकिन कुछ प्राकृतिक उपायों द्वारा इसके दर्द में राहत पाई जा सकती है।
हल्दी का करें प्रयोग

हल्‍दी में पाया जाने वाला कुरकुमीन नामक तत्‍व, एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट और प्राकृतिक दर्द निवारक दवा के रूप में काम करता है। इसके अलावा, हल्‍दी एंटीऑक्‍सीडेंट का समृद्ध स्रोत होने के कारण फ्री रेडिकल्‍स से लड़ने और उपचार को गति प्रदान करने में मदद करता है। एक कप दूध में आधा चम्‍मच हल्‍दी मिलाकर उसे हल्‍का सा गर्म लें। फिर इसमें थोड़ी सा शहद मिलाकर कुछ हफ्तों तक दिन में दो बार पिएं। इससे दर्द में राहत मिलेगी और सूजन भी दूर हो जाएगी। इसके साथ ही चिकित्सक से संपर्क करें।
बर्फ से सिंकाई

बर्फ की सिंकाई दर्द और सूजन को कम करने का सबसे आसान तरीक है। इसके लिए एक पतले तौलिये में बर्फ के कुछ टुकड़ों को लपेटें। अपनी कोहनी को तकिये और किसी गद्देदार क्षेत्र में आराम से रखें। फिर प्रभावित जगह पर धीरे से तौलिया को रखें। 10 से 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। दर्द दूर होने तक इस उपाय को दिन में कई बार दोहराये। लेकिन एक बात को हमेशा ध्‍यान में रखें कि बर्फ को सीधे त्‍वचा पर न लगाएं।

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