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क्लीन इटिंग से वज़न घटाएँ


क्लीन इटिंग से वज़न घटाएँ

क्लीन ईटिंग को अपनी दिनचर्या में अपनाने को लेकर आप अब भी सोच में हैं तो इस दिये गए मील प्लान(Meal Plan) के आधार पर आप अपने रोज़मर्रा के खाने का मेनू(Menu) सुनियोजित कर सकते हैं। ध्यान देने योग्य बात ये है की तीनों मुख्य भोजन में प्रोटीन(Protein), कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrate) और फाइबर(Fibre) की उचित मात्रा को शामिल किया जाना बहुत ज़रूरी है। आपकी प्लेट में खाने की मात्रा कुछ इस प्रकार दिखनी चाहिए : 

क्लीन ईटिंग का एक उदाहरण(Example of Clean Eating)

सबसे पहले सुबह खाली पेट एक गिलास मेथी(Fenugreek) का पानी या फिर नींबू पानी(Lemon Water) पीकर दिन की शुरुआत करनी चाहिए। 1 चम्मच मेथी के दानों को एक गिलास पानी में डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह पानी को गुनगुना(Lukewarm) कर के छान कर पी लें। नींबू पानी के लिए हल्के गरम पानी में आधे नींबू का रस और आधा चम्मच शहद(Honey) मिलाकर पी लें।
अब बारी आती है नाश्ते(Breakfast) की



यह पूरे दिन के भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। स्वस्थ तरीके से वज़न कम करने और पूरा दिन खुद को चुस्त बनाए रखने के लिए नाश्ता करने की आदत ज़रूर डालनी चाहिए। नाश्ते में प्रोटीन(Protein) को शामिल ज़रूर करना चाहिये।


हेल्थी ब्रेकफ़ास्ट(Healthy Breakfast) में कैसे प्रोटीन और कार्ब्स(Carbs) को संयोजित करे?
एक स्लाइस(Slice) ब्राउन ब्रैड(Brown Bread) के साथ एक अंडे की सफेदी(Egg White) से बना ऑमलेट(Omlette)।
एक कप पके हुए ओट्स(Oats) में एक चम्मच सब्ज़ा के बीज(Chia Seeds) डालकर रख दें, जब चीया सीड्स फूल जाएँ तब नाश्ते में इसे खाया जा सकता है।
एक कप उबले हुए काबुली चने(Chickpeas) में प्याज़(Onion), टमाटर(Tomato), खीरा(Cucumber) और नींबू का रस(Lemon Juice) डालकर बनाया हुआ सलाद(Salad) भी नाश्ते के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
मूंग दाल से बने 2 चीले भी नाश्ते में खाये जा सकते हैं।
इसके साथ एक कप ग्रीन चाय(Green Tea) या फिर अपनी पसंद के अनुसार बनी चाय(बिना चीनी) को भी नाश्ते(Breakfast) में स्थान दे सकते हैं।
मिड मॉर्निंग स्नैक्स(Mid Morning Snacks)



नाश्ते और दोपहर के खाने(Lunch) के बीच के समय में आपको ऊर्जावान(Energetic) बनाए रखने में इन स्नैक्स(Snacks) की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नाश्ते के दो घंटे बाद स्नैक्स को खाया जा सकता है। इसके लिए कुछ हेल्थी विकल्प इस प्रकार हो सकते हैं

एक कप कोई भी फल जैसे अमरूद(Guava), सेब(Apple), तरबूज(Watermelon), अनानास(Pineapple), अंगूर(Grapes), अनार(Pomegranate) आदि। केले(Banana), आम(Mango) जैसे फलो का इस्तेमाल कम करें और अगर आप डाइबेटिक(Diabetic) हैं तो आम(Mango), केले(Banana), अंगूर(grapes) जैसे फलों का सेवन करने से बचें।
दोपहर का भोजन(Lunch)


इसमे एक रोटी या एक कप ब्राउन राइस(Brown Rice) के साथ एक कटोरी सब्जी या दाल, एक अंडे की सफेदी(Egg White), या सोयाबीन(Soyabean), या फिर उबले हुए चने(Grams), साथ ही आधी प्लेट सलाद (खीरा, टमाटर, प्याज़, गाजर, मूली,) को अपने भोजन में शामिल करें। साथ में आधी कटोरी दही(Curd) या फिर एक गिलास छाछ(Buttermilk) भी आप खाने के साथ ले सकते हैं।
दोपहर बाद के स्नैक्स(Snacks after Lunch) 



दोपहर के भोजन और रात के खाने के बीच के समय में आपको अतिरिक्त भूख लगने से बचाए रखने और ज़रूरत के मुताबिक ऊर्जा(Energy) देने में स्नैक्स(Snacks) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए आप इन विकल्पो को अपनी सुविधानुसार अपना सकते हैं:
एक कप बिना अतिरिक्त मक्खन(Butter) के बने हुए पॉपकॉर्न(Popcorn)।
एक मुट्ठी बादाम(Almond), अखरोट(Walnut), काजू(Cashew), या किशमिश(Raisins)।
एक कप ग्रीक योगहर्ट(Greek Yoghurt)
एक कप कोई भी फल।
रात का भोजन(Dinner)



एक रोटी या फिर ब्राउन ब्रैड(Brown Bread) या एक कप पके हुए ब्राउन राइस(Brown Rice), एक कटोरी कोई भी सब्ज़ी, या दाल, प्रोटीन के लिए एक अंडे की सफेदी या ऑमलेट ,या फिर टोफू(Tofu) और आधी प्लेट सलाद।
ध्यान देने योग्य बातें

ध्यान रखें की दिया गया मेनू(Menu) सिर्फ एक उदाहरण है कि किस तरह क्लीन इटिंग(Clean Eating) को आप अपने दिन भर के खाने में समायोजित करने का प्रयास कर सकते हैं। आप अपनी सुविधा और ज़रूरत के अनुसार इसमे फेर बदल कर सकते हें।


स्वास्थ बनाए रखने में संतुलित(Balanced) और पौष्टिक(Healthy) भोजन के साथ ही उचित व्यायाम(Exercise) का भी अपना महत्व है। इसलिए कम से कम आधे घंटे की किसी भी शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की कोशिश करें।


अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित हें तो अपने डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस तरीके को अपनाएं।
यह कोई क्रैश डाइट(Crash Diet) नहीं है जिसके परिणाम आप एक हफ्ते में पाने की उम्मीद रखें बल्कि यह अपनी दिनचर्या में स्थायी परिवर्तन लाने का एक प्रयास है।
खाने की मात्रा को अपनी ज़रूरत के अनुसार समायोजित करना इसकी सफलता का मूल मंत्र है।
अपनी पसंद के पकवान(Dishes) और जंक फूड(Junk Food) आप खा सकते हैं बस ज़रूरत है तो खाने की मात्रा और गिनती पर नज़र रखने की(Portion Control)।


अगर इस मील प्लान(Meal Plan) को लेकर आपके कुछ सवाल हैं तो आप कमेंट(Comments) कर के पूछ सकते हैं। मैं आपके प्रश्नो के उत्तर देने की पूरी कोशिश करूंगी।

तो दोस्तो स्वस्थ जीवन की ओर कदम मजबूती से बढ़ाने के लिए तैयार हो जाइए।


क्लीन ईटिंग स्वस्थ जीवन जीने का एक नज़रिया

दोस्तों आधुनिक जीवनशैली ने जहाँ हमे आरामदायक ज़िन्दगी से रूबरू कराया है वहीं स्वास्थ्य (Health) से जुडी कई समस्याओं को भी हमारा साथी बनाया है। इन सुख सुविधाओं का मोह छोड़ना तो आसान नहीं है लेकिन हम अपनी दिनचर्या मे कुछ बदलाव लाकर स्वास्थ्य की ओर कदम ज़रूर बढ़ा सकते हैं। इसी कड़ी में आज मैं क्लीन ईटिंग(Clean Eating) के बारे में बात करूँगी :-

क्लीन ईटिंग क्या है ?

यह कोई नयी सोच या आविष्कार नहीं है। खाने को जहाँ तक उसके सरल और प्राकृतिक रूप मे खाया जाये वो हमारे स्वास्थ्य के लिए उतना ही फायदेमंद रहेगा अक्सर ये बात हम अपने घर के बड़ो से सुनते आये हैं। क्लीन ईटिंग भी उसी पुरानी और मूल्यवान सोच पर आधारित है।
क्लीन ईटिंग से जुडी कुछ सामान्य बातें :
1. यह किसी तरह की डाइटिंग (Dieting) नहीं है 



डाइटिंग वह होती है जिसे आप कुछ समय के लिए अपनाते हैं और अपनी इच्छा के अनुसार परिणाम मिलने पर छोड़ देते हैं जबकि क्लीन ईटिंग आपकी जीवनशैली (Lifestyle) मे आने वाला एक स्थायी बदलाव है जो कि समय के साथ आपकी ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है।
2. यह किसी तरह की कुर्बानी नहीं है

लोग अक्सर यह सोचते हैं की उन्हें अपनी पसंदीदा चीजों को खाना पूरी तरह छोड़ कर कुर्बानी देनी होगी जबकि क्लीन ईटिंग आपको स्वास्थ्यकारी विकल्प (Healthy Alternatives) ढूँढने मे मदद करता है।
3.यह कोई कड़ा कानून नहीं है

क्लीन ईटिंग को अपने जीवन में अपनाने पर आप अपनी खाने पीने की आदतों मे बदलाव लाते हैं लेकिन जैसे कि कोई भी बदलाव रातोंरात नहीं होता उसी तरह अपनी जीवनशैली को बदलना भी समय के साथ ही सफल हो पाता है। समय समय पर अपने मनपसंद खाने को खाया जा सकता है लेकिन एक निर्धारित मात्रा में 

जैसाकि मैंने कहा है 100 % खाने की आदतों मे बदलाव लाना बोरिंग हो सकता है और साथ ही जल्दी ही आपको आपके रास्ते से हटा सकता है इसलिए कोशिश करनी चाहिए की 80-90 % तक क्लीन ईटिंग को अपनी दिनचर्या मे अपनाने की कोशिश की जाये।
क्लीन ईटिंग को कैसे अपनाएं :

रिफाइंड खाद्य पदार्थो (Refined Food Items), चीनी (Sugar), सफ़ेद चावल (White Rice) के उपयोग को खाने मे कम करें।
अप्राकृतिक रंग (Artificial Colours) और केमिकल (Chemicals) का इस्तेमाल कर के बनी चीजों के उपयोग से बचें।
नशीले पदार्थों (Drugs) से दूरी बनायें या फिर उनकी मात्रा को धीरे धीरे कम करें।
सोडा (Soda) और डिब्बाबंद फलों के जूस (Canned Juice) के सेवन से बचें।
बदलाव की ओर कदम कैसे बढ़ायें ?

1. हर इंसान के लिए स्वास्थ्य (Health) का अर्थ अलग होता है। पहले अपना एक लक्ष्य निर्धारित करें फिर उसे पाने के लिए अपनी दिनचर्या (Lifestyle) में बदलाव लाने की शुरुआत करें।

2. प्रतिदिन अपने खाने में मौसम के अनुसार सब्जियों (Vegetables) को शामिल करें। कम से कम 3 कप सब्जियाँ खाने में शामिल करें।

3. हालांकि फल भोजन में मीठे खाद्य पदार्थो का अच्छा विकल्प हैं। लेकिन कुछ फलो में मीठापन ज़्यादा होने की वजह से ये खून में शुगर (Sugar) की मात्रा को अचानक बढ़ा सकते हैं इसलिए फलो का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए। 2 कप मौसमी फलों (Seasonal Fruits) का सेवन प्रतिदिन किया जा सकता है।

4. सभी तरह के वसायुक्त खाद्य पदार्थ (Fatty Foods) नुकसानदायक नहीं होते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खाने की चीज़ों में वसा को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए। जैसे कि अखरोट (Walnuts), बादाम (Almonds), अलसी के बीज (Flax Seeds), सीताफल के बीज (Pumpkin Seeds), मछली जैसी चीज़ें वसा के अच्छे स्त्रोत हैं। इन्हें उचित मात्रा में अपने भोजन में स्थान दे कर आप अपने मनचाहे लक्ष्य को पा सकते हैं।

5. मौसम चाहे कोई भी हो शरीर को पानी की उचित मात्रा की ज़रूरत होती ही है। समय समय पर पानी पी कर हम अपने शरीर और त्वचा (Skin) को स्वस्थ रख सकते हैं।

तो दोस्तों याद रखिए खुद को स्वस्थ रखने और वज़न को नियंत्रण में रखने के लिए आपको अपने खान पान में ज़रूरत के हिसाब से बदलाव लाने की आपकी चाह ही आपको अपने लक्ष्य के पास ले जा सकती है। छोटे छोटे यही कदम आपको अपने स्वास्थ्य रूपी मंज़िल तक पहुचाँऐंगे।

क्लीन ईटिंग (Clean Eating) को अपने प्रतिदिन के खाने में कैसे अपनाया जा सकता है और वज़न को नियंत्रित करने के लिए डाइट चार्ट (Diet- Chart) बना कर उस पर कैसे काम किया जा सकता है इस पर हम अगली पोस्ट में बात करेंगे।






सेहत की मिठास गुड़ JAGGERY-SWEETNESS OF HEALTH

प्राचीन काल से ही गुड़ (Jaggery) का उपयोग भारतीय भोजन तथा उसके बाद किया जाता रहा है। क्या यह केवल इसके मीठे स्वाद के लिए किया गया या फिर इसके पीछे कोई और भी कारण था, इस सवाल का जवाब आज के विज्ञान ने भी दे दिया है। आज गुड़ की मिठास के पीछे छिपे इसके स्वास्थ्य(Health) अच्छा करने वाले गुणों के बारे में बात करते हैं
पाचन में मदद (Helps in Digestion)


गुड़ का उपयोग बहुत से पाचन संबंधी दोषों को दूर करने में किया जा सकता है। गुड़ हमारे शरीर में पाचक रसों (Digestive Enzymes) के निकलने में मदद करता है जोकि भोजन के पाचन में मदद करते हैं। सही पाचन की वजह से आँतों (Intestines) में होने वाली परेशानियों को भी दूर करने में मदद मिलती है। कब्ज (Constipation), अपच (Indigestion), गैस बनना (Flatulence), पेट के कीड़ों (Intestinal Worms) जैसी परेशानियों में गुड़ का उपयोग इनको खत्म करने का कारण बंता है।
रक्त विकारों में उपयोगी (Useful in Blood Disorders)

गुड़ का उपयोग करने से शरीर में रक्त साफ होता है और शरीर स्वस्थ होता है। गुड़ में उपस्थित आयरन (Iron) के कारण यह रक्त की कमी (Anaemia) को भी दूर करने का काम करता है। हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) बनने में मदद करने के कारण गुड़ का उपयोग गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान से कम नहीं है।
मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं में उपयोगी (Useful in Menstrual Period)

गुड़ के अंदर मौजूद बहुत से जरूरी खनिजों (Minerals) के कारण यह मासिक धर्म के समय महिलाओं के बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। इस दौरान पेट में होने वाले दर्द (Stomach Ache) और ऐंठन (Cramps) में गुड़ का उपयोग इन समस्याओं से निजात दिलाता है।
वजन कम करने में लाभकारी (Beneficial in Weight Loss)


गुड़ के अंदर पॉटेशियम (Potassium) उपस्थित होता है जोकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) को संतुलित करने के साथ साथ मसल्स(Muscles) बनाने में मदद करता है। गुड़ का उपयोग मेटाबोलिज्म (Metabolism) को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही शरीर में वॉटर रीटेंसन (Water Retention) कम करता है। इन सभी गुणों के कारण गुड़ वजन कम करने में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।
रक्त दाब को नियंत्रित करना (Controls Blood Pressure)

गुड़ में पॉटेशियम (Potassium) और सोडियम (Sodium) उपस्थित होता है जोकि शरीर में रक्त दाब को नियमित करने के लिए लाभकारी खनिज हैं। इस प्रकार गुड़ का सेवन करने से रक्त दाब (Blood Pressure) को सही करने में भी मदद मिलती है पर साथ ही यह ध्यान रखना चाहिए कि इसकी मात्रा बहुत अधिक नहीं लेनी चाहिए।
श्वास संबंधी रोगों में उपयोगी (Useful in Breathing Disorders)
गुड़ के नियमित सेवन के द्वारा बहुत से श्वास संबंधी रोगों जैसे अस्थमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस (Bronchitis), आदि में लाभ मिलता है। श्वास संबंधी रोगों के लिए गुड़ को तिल (Sesame Seeds) के साथ खाने से अधिक लाभ मिलता है।
खाँसी-जुकाम में लाभकारी (Beneficial in Cough-Cold)

गुड़ प्राकृतिक रूप से खाँसी-जुकाम (Cough & Cold) को ठीक करने में मदद करता है। गुड़ का उपयोग किसी कफ़ सीरप (Cough Syrup) की तरह काम करता है, यदि आपको सीधे गुड़ खाने पसंद न हो तो इसको गरम पानी के साथ मिला कर पिया जा सकता है।
जोड़ों के दर्द से निजात (Relieves Joint Pain)

जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन लाभकारी होता है। इससे शरीर को कैल्सियम (Calcium) और पॉटेशियम (Potassium) मिलता है जो हड्डियों को मजबूत करने का काम करते हैं साथ ही आर्थेराइटिस (Arthritis) के प्रभाव को कम करते हैं। आर्थेराइटिस के दर्द से निजात पाने के लिए गुड़ के साथ अदरक (Ginger) के सेवन की सलाह दी जाती है।
मूत्र रोगों और किडनी को स्वस्थ करता है (Healthy Kidney)


गुड़ गन्ने (Sugarcane) से बनाया जाता है और यह इसके प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण (Diuretic) से भी युक्त होता है। इसके इसी गुण के कारण यह किडनी रोगों से बचाव के साथ साथ अनेक मूत्र रोगों में लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
लीवर स्वस्थ रखता है (Healthy Liver)


गुड़ का नियमित प्रयोग करने से यह शरीर में उपस्थित अशुद्धताओं (Impurities) और विषाक्त पदार्थों (Toxins) को दूर करने में मदद करता है। जिसके कारण लीवर पर कम दबाव करता है क्यूंकि गुड़ लीवर का काम आसान बना देता है। लीवर पर कम दबाव इसको अधिक मजबूत बनाने में सहायक होता है।
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है (Boosts Immunity)



गुड़ में अनेक खनिज (Minerals), पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सिडेंट (Anti-oxidants) होते हैं जोकि शरीर के सामान्य परिचालन में मदद के साथ साथ हमको अनेक प्रकार के रोगों से लड़ने में भी मदद करते हैं। गुड़ में उपस्थित सेलेनियम (Selenium) इसको हमारे शरीर को फ्री रैडिकल (Free Radicals) से होने वाली परेशानियों में उपयोगी बनाता है।
रजनोवृति में लाभदायक (Helpful in PMS)

रजनोवृति (PMS) के समय महिलाओं के शरीर में अनेक हार्मोन्स (Hormones) संबंधी बदलाव आते हैं जिसके कारण अनेक प्रकार की परेशानियों का आना शुरू हो जाता है। ऐसे समय में गुड़ का सेवन लाभदायक हो सकता है क्यूंकि यह एंडोर्फीन (Endorphins) हार्मोन को बढ़ाता है जिससे शरीर को अन्य हार्मोन्स के संतुलन को बनाने में मदद मिलती है।
हिचकी आने में लाभदायक (Helpful in Hiccups)
कई लोगों को लंबे समय तक हिचकी आती रहती है और विभिन्न तरीकों से लाभ नहीं मिलता है। ऐसे समय पर गुड़ के साथ सौंठ (Dry Ginger Powder) का सेवन हिचकी को दूर करने में मदद कर सकता है। इसके लिए गुड़ के साथ सौंठ मिलाकर थोड़े गुनगुने (Lukewarm) पानी के साथ सेवन लाभदायी साबित हो सकता है।
पौरुष वर्धक (Virility Boosting)

आयुर्वेद के अनुसार आँवला पाउडर (Gooseberry Powder) के साथ गुड़ का नियमित सेवन करने से यह स्पर्म (Sperm) उत्पादन में बढ़ोतरी करता है और साथ ही स्पर्म क्वालिटी को भी बेहतर करने में मदद करता है। यह पुरुषों में होने वाले मूत्र विकारों के साथ साथ कमजोरी में भी मदद करता है।
चीनी का विकल्प (Alternative for Sugar)

चीनी का स्वास्थ्य पर बुरा असर होने का कारण इसका बहुत तेजी से शरीर में ग्लूकोज (Glucose) में बदल जाना है जिसकी वजह से पैंक्रियास (Pancreas) के सुचारु क्रियाकलाप पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से डायबिटीज (Diabetes) जैसी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। डायबिटीज में चीनी एकदम जहर समान है। ऐसे में चीनी के स्थान पर गुड़ का प्रयोग लाभकारी हो सकता है क्यूंकि इसमें उपस्थित ग्लूकोज धीरे-धीरे रक्त में मिलता है किन्तु डायबिटीज होने पर इसका उपयोग सीमित मात्रा में डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
त्वचा के लिए लाभदायक (Beneficial for Skin)
गुड़ का उपयोग अगर त्वचा के ऊपर किया जाये तो भी यह एक बेहतरीन एंटी सेप्टिक (Antiseptic) और मॉइश्चराइजर (Moisturiser) के रूप में त्वचा को स्वस्थ बनाता है। साथ ही मुहासों (Pimples) और त्वचा विकारों से निजात दिला सकती है। त्वचा के ऊपर इसे लेप के रूप में लगाने से इन लाभों को प्राप्त किया जा सकता है।



गुणों की खान-जीरा CUMIN SEEDS THE SUPERFOOD


“ ऊँट के मुँह में जीरा “ कई बार सुना होगा और बोला भी होगा। पर यह कहावत केवल इसके छोटे आकार को ध्यान में रख कर बनाई गयी है ना कि इसके गुणों को देखकर। जीरा(Cumin Seed) गरम मसाले में पड़ने वाला एक मुख्य मसाला है और इसका प्रयोग भारतीय रसोई में सदियों से कई प्रकार से होता आया है और शायद यह केवल इसके गुणों के कारण ही हुआ है। तो आइये आज मैं आपको इस छोटे से मसाले के बड़े बड़े गुणों के बारे में बताता हूँ:

पाचन में मदद(Help in Digestion)

सदियों से भारतीय परम्परा जीरे के इस गुण को जानती है पर अब वैज्ञानिक(Scientists) भी यह मानते हैं। उनका कहना है कि जीरा पैंक्रियाटिक एन्ज्यायम्स(Pancreatic Enzymes) को हमारे शरीर में बढ़ाने का काम करता है जिससे खाना अच्छे से पचता है साथ ही खाने के सभी पौष्टिक तत्व(Nutrients) भी शरीर में आसानी से अवशोषित(Absorve) हो जाते हैं।
त्वचा(Skin) के लिए लाभकारी
जीरे में विटामिन ई(Vitamin E) की मात्रा काफी होती है जिसके कारण यह त्वचा को स्वस्थ रखने में हमारी मदद करता है। जीरे में एंटी फंगल(Anti-Fungal) और एंटी बैक्टीरियल(Anti-Bacterial) गुण होने के कारण यह त्वचा को फंगल और बैक्टीरियल इन्फ़ैकशन(Infection) से भी बचाता है। यदि जीरे को पेस्ट(Paste) रूप में त्वचा के इन्फ़ैकशन(Skin Infection) पर लगाया जाये तो यह त्वचा को जल्दी ठीक करने में भी मदद करता है।
खुजली(Itching) में मददगार

यदि आपको खुजली की समस्या है तो जीरे को पानी में उबाल कर उस पानी को ठंडा करके नहाने से खुजली में आराम मिलता है और कई प्रकार के त्वचा विकारों(Skin Ailments) से छुटकारा भी मिल जाता है।
हथेलियों और तलवों की जलन में लाभ

यदि आपको अपने तलवों और हथेलियों में जलन महसूस हो तो लगभग 2-3 लिटर पानी में 1 चम्मच जीरा डालकर उसे उबाल लें और इस पानी को 4-5 दिन तक गुनगुना करके पीएं तो जलन में आराम मिलता है। इस पानी को ठंडा भी पी सकते हैं पर गुनगुना पानी अधिक लाभ पहुंचाता है।
गंजेपन(Baldness) में लाभकारी
यदि आपके बाल बहुत अधिक झड़ रहे हों और गंजेपन के लक्षण दिखने लगें तो काले जीरे के तेल को जैतून के तेल(Olive Oil) में बराबर की मात्रा में मिला लें। नहाने के बाद इस तेल को बालों और सिर(Scalp) पर लगाएँ, यह बालों के झड़ने की समस्या के साथ ही बालों को बढ़ाने में भी मदद करता है। काले जीरे के तेल को कैप्सूल(Capsule) के रूप में खाने से भी लाभ मिलता है।
ब्लड ग्लूकोस(Blood Glucose) ठीक करना

जीरे के उपयोग से बढ़े हुए शुगर को कंट्रोल(Sugar Control) किया जा सकता है और यह डायबिटीज(Diabetes) को मैनेज(Diabetes Manage) करने और होने से रोकने दोनों में ही मदद करता है। इसके लिए खाने में जीरे का प्रयोग बढ़ाने के साथ जीरे के पानी को पीना अच्छा रहता है।
अनीमिया(Anaemia) में उपयोगी

जीरे में आइरन(Iron) की मात्रा काफी होती है जिसके कारण इसके उपयोग से अनीमिया में फायदा होता है और शरीर में हीमोग्लोबिन(Haemoglobin) को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह खाने के पोषक तत्वों को शरीर को उपयोग में लाने में मदद करता है जिससे अनीमिया जल्दी ठीक होता है।
जुकाम(Cold) और अस्थमा(Asthma) में लाभ

जीरे में विटामिन सी(Vitamin C) की भी अच्छी मात्रा होती है साथ ही एंटी फंगल(Anti-Fungal) और एंटी बैक्टीरियल(Anti-Bacterial) गुणों के कारण यह जुकाम और अस्थमा में रामबाण का काम करता है, इसका प्रयोग अस्थमा में करते समय यह ध्यान रखें कि इसकी अधिक मात्रा एक साथ ना लेकर इसकी धीरे धीरे आदत डालें।
एंटी कैंसर(Anti-Cancer) गुण

जीरे में एंटी कैंसर गुणों की भरमार है, इसके द्वारा कोलोन कैंसर(Colon Cancer), पेट का कैंसर(Stomach Cancer) और ब्रैस्ट कैंसर(Breast Cancer) होने की संभावना कम होती है, साथ ही इसका उपयोग कई ब्रैस्ट कैंसर और कोलोन कैंसर की दवाओं में भी किया जात है। इस प्रकार इसका प्रयोग कैंसर की रोकथाम के साथ साथ इलाज़ में भी मदद करता है।
मोटापा(Fat) कम करना

जीरे का प्रयोग शरीर के मेटाबोलिक रेट (Metabolic Rate) को बढ़ता है जिससे यह मोटापे(Fat) को कम करने में मदद करता है, खास तौर पर पेट पर चढ़े मोटापेBelly Fat) को कम करने में काफी मदद मिलती है। इसके लिए खाने में इसके उपयोग को बढ़ाने के साथ साथ इसको गरम पानी में उबाल कर चाय की तरह पीना चाहिए।
मासिक धर्म(Menstrual Cycle) को ठीक करता है

जीरे का उपयोग सभी उम्र की महिलाओं के लिए वरदान की तरह है। इसके नियमित उपयोग से मासिक धर्म नियमित(Menstrual Cycle Regular) होने के साथ साथ इसके दौरान होने वाले दर्द और अन्य समस्याओं में भी आराम मिलता है।

तो अब मुझे लगता है आप जीरे के छोटे आकार के पीछे छुपे बड़े गुणों को जान गए होंगे और अब इसको अपने खाने में शामिल करके इसके सभी लाभों को पाने की कोशिश करेंगे।
जवान त्वचा का साथी : रेटिनॉल BEST FRIEND OF SKIN: RETINOL


साथियों आजकल की तनाव भरी और दौड़ती भागती ज़िंदगी ने हमें समय से पहले ही थकाना शुरू कर दिया है और इसके निशान सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखने लगते हैं जिसके नतीजे में बारीक रेखायें, झुर्रियां, रूखी और बेजान त्वचा जैसी समस्यायें हमारी परेशानियों को और बढ़ाने लगती हैं।

अब हम बढ़ती उम्र, व्यस्त दिनचर्या, तनाव को तो बिल्कुल खत्म नहीं कर सकते लेकिन अपनी त्वचा की सही तरीके से देखभाल करके उम्र के निशान कम ज़रूर कर सकते हैं। जवां त्वचा का ऐसा ही एक साथी है : रेटिनॉल (Retinol), तो आइये जानते हैं इसके बारे में

रेटिनॉल (Retinol) क्या है?
रेटिनॉल विटामिन ए(Vitamin A) का ही एक रूप है जिसे सौन्दर्य प्रसाधनों(Cosmetics) और त्वचा की झुर्रियों(Wrinkles) और महीन रेखाओं(Fine Lines) को दूर करने वाली क्रीम में इस्तेमाल किया जाता है।
रेटिनॉल (Retinol) कैसे काम करता है ?

रेटिनॉल एक ऐसा कैमिकल कम्पाउण्ड(Chemical Compound) है जो सीधा त्वचा की कोशिकाओं (Cells) पर काम करता है। जब 30 की उम्र के बाद त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत धीमी होने लगती है तब रेटिनॉल के इस्तेमाल से इस गति को बढ़ाया जा सकता है।

रेटिनॉल लगातार त्वचा की ऊपरी परत पर काम करता है जिससे त्वचा की मृत(Dead) और रूखी(Dry) परत का स्थान नयी और स्वस्थ परत ले लेती है। इससे त्वचा चमकदार और ज़्यादा स्वस्थ दिखने लगती है। रेटिनॉल त्वचा पर उम्र के साथ पड़ने वाली झुरियों और महीन रेखाओं पर भी काम करके उनका बढ़ना कम करता है। यह कोलॅजन (Collagen) के बनने की दर को बढ़ाता है जिससे त्वचा चमकदार और कसी हुई नज़र आती है।
त्वचा की देखभाल के लिए रेटिनॉल का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
रात को सोते समय 

रेटिनॉल युक्त कॉस्मेटिक्स का उपयोग रात के समय करना उचित रहता है क्यूंकि नींद में हमारा शरीर मरम्मत(Repair) का काम करता है और ऐसे में त्वचा पर रेटिनॉल युक्त क्रीम का इस्तेमाल ज़्यादा असरदार रहता है।
सीरम(Serum) के रूप में उपयोग
रेटिनॉल युक्त सीरम का इस्तेमाल उन लोगो के लिए फायदेमंद रहता है जिनकी त्वचा ज़्यादा संवेदनशील होती है। सीरम त्वचा में ज़्यादा गहराई तक समाकर कोशिकाओं पर काम करता है और उसे स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
एंटी रिंकल क्रीम(Anti-wrinkle Cream) के रूप में 


आज के समय में बाज़ार में कई तरह की एंटी रिंकल क्रीम उपलब्ध हैं जिनमे मुख्य तौर पर रेटिनॉल का इस्तेमाल किया गया होता है। आप अपनी त्वचा की ज़रूरत और बजट के हिसाब से कोई भी क्रीम चुन सकते हैं।
रेटिनॉल मिश्रण

जिन्हे रेटिनॉल की ज़्यादा मात्रा की ज़रूरत है वह लोग किसी कैमिस्ट की दुकान से भी इसे खरीद सकते हैं। यह मिश्रण त्वचा पर सीधे लगाया जाता है।
रेटिनॉल युक्त उत्पादों की पहचान कैसे करें ?

रेटिनॉल युक्त प्रॉडक्ट(Product) की पहचान करने के लिए लिस्ट में Retinyl acitate, Retinyl palmitate, Retinyl aldehyde जैसे शब्दों पर ध्यान दें। ये सभी रेटिनॉल के ही प्रकार हैं।
रेटिनॉल का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें 
रेटिनॉल त्वचा पर काफी असरदार होता है लेकिन कई बार यह त्वचा को संवेदनशील, लालिमा युक्त और रूखा भी बना सकता है इसलिए रेटिनॉल युक्त क्रीम को चेहरे पर लगाने से पहले अच्छे मोइश्चराइजर (Moisturiser) का इस्तेमाल करें।
शुरुआत में रोजाना रेटिनॉल युक्त प्रॉडक्ट का इस्तेमाल न करें। सप्ताह में दो बार से शुरू करें और जब त्वचा आदी हो जाए तब इसकी मात्रा को बढ़ाएँ।
रेटिनॉल त्वचा को सूर्य की किरणों के प्रति संवेदनशील बनाता है इसलिए इसका इस्तेमाल रात के समय करें।

दिन में घर से बाहर जाने से पहले कम से कम SPF 30 युक्त सनस्क्रीन(Sunscreen) का इस्तेमाल ज़रूर करें।
तो यदि आप भी रूखी, बेजान त्वचा और बढ़ती उम्र के कारण पड़ने वाली झुर्रियों की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो रेटिनॉल युक्त प्रोडक्ट्स को अपना साथी बनाएँ।

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👉🏽 5. मुंह की बदबू से परेशान हों तो दालचीनी का टुकड़ा मुंह में रखें।
मुंह की बदबू तुरंत दूर हो जाती हैं।

👉🏽 6. बहती नाक से परेशान हों तो युकेलिप्टस(सफेदा) का तेल रूमाल में डालकर सूंघे। आराम मिलेगा।
👉🏽 7. कुछ दिनों तक नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं।
बाल सफेद से काले होने लगेंगे।

👉🏽 8. चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं, इससे बाल कम गिरेंगे।
👉🏽 9. बैंगन के भरते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग का नाश होता है।
ऐसा शाम को भोजन में भरता बनाते समय करें।

👉🏽 10. संतरे के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में तीन बार एक-एक कप पीने से गर्भवती की दस्त की शिकायत दूर हो जाती हैं।
👉🏽 11. गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता हैं।
👉🏽 12. सवेरे भूखे पेट तीन चार अखरोट की गिरियां निकालकर कुछ दिन खाने मात्र से ही घुटनों का दर्द समाप्त हो जाता हैं।
👉🏽 13. ताजा हरा धनिया मसलकर सूंघने से छींके आना बंद हो जाती हैं।
👉🏽 14. प्याज का रस लगाने से मस्सो के छोटे–छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।
👉🏽 15. प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टियां आना तत्काल बंद हो जाती हैं।
👉🏽 16. गैस की तकलीफ से तुरंत राहत पाने के लिए लहसुन की 2 कली छीलकर 2 चम्मच शुद्ध घी के साथ चबाकर खाएं फौरन आराम होगा।
👉🏽 17. मसालेदार खाना खाएं मसालेदार खाना आपकी बंद नाक को तुरंत ही खोल देगा।
👉🏽 18. आलू का छिलका आपकी त्वचा पर ब्लीच की तरह काम करता है। इसे लगाने से आपकी काली पड़ी त्वचा का रंग सुधरता है।
इसलिए आज के बाद आलू के छिलके को फेके नहीं बल्कि उनका इस्तेमाल करें।

👉🏽 19. यदि आपको अकसर मुंह में छाले होने की शिकायत रहती है तो रोज़ाना खाना खाने के बाद गुड को चूसना ना भूलें। ऐसा करने छाले आपसे बहुत दूर रहेंगे।
👉🏽 20. पतली छाछ में चुटकी भर सोडा डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती ह
👉🏽 21. प्याज और गुड रोज खाने से बालक की ऊंचाई बढती हैं।
👉🏽 22. रोज गाजर का रस पीने से दमें की बीमारी जड़ से दूर होती हैं।
👉🏽 23. खजूर गर्म पानी के साथ लेने से कफ दूर होता हैं।
👉🏽 24. एक चम्मच समुद्री नमक लें और अपनी खोपड़ी पर लगा लें। इसे अच्छी तरह से मसाज करें और ऐसा करते समय उंगलियों को गीला कर लें। बाद में शैम्पू लगाकर सिर धो लें। महीने में एक बार ऐसा करने से रूसी नहीं होगी।
👉🏽 25. अगर आपके नाखून बहुत कड़े हैं तो उन्हे काटने से पहले हल्के गुनगुने पानी में नमक डालकर, हाथों को भिगोकर रखें। और 10 मिनट बाद उन नाखूनों को काट दें। इससे सारे नाखून आसानी से कट जाएंगे।
👉🏽 26. शरीर में कहीं गुम चोट लग जाए या नकसीर आए तो बर्फ की सिकाई बहुत फायदेमंद होती हैं।
👉🏽 27. अगर कोई कीड़ा-मकोड़ा काट ले, तो तुरंत कच्चे आलू का एक पतला टुकड़ा काटकर उस पर नमक लगाकर कीड़े के काटे हुए स्थान पर 5-7 मिनट तक रगड़ें।जलन और दर्द गायब हो जाएगा।
👉🏽 28. बवासीर से छुटकारा पाने के लिए सुबह खाली पेट 2 आलू-बुखारे खाए
👉🏽 29. दांत के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अदरक का छोटा सा टुकड़ा चबाएं। दर्द तुरंत दूर हो जाएगा....!!

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