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कूल्हे के दर्द से बचाव के नायाब तरीके जानिए


कूल्हे के दर्द से बचाव के नायाब तरीके जानिए

कमर के नीचे स्थित हिप या कूल्हे में दर्द हड्डियों के नर्म ऊतकों के टूटने या उनमें खिंचाव की स्थिति उत्पन्न होने से हो जाता है। कूल्हे में दर्द ऐसी समस्या है जो आमतौर पर उम्र की ढलान पर पहुंचे इंसान में गठिया रोग या सन्धिसोथ जैसी समस्याओं के चलते अक्सर देखी जाती है। इसके अलावा इंसानी आदतें भी इस तरह के दर्द का बड़ा कारण बन कर सामने आ रही है। कूल्हे इंसान की शरीर का ऐसा हिस्सा हैं जो हमारे बैठने में सबसे अहम भूमिका का निर्वाह करते हैं।

कूल्हे के दर्द का असर शरीर की अन्य हड्डियों पर पड़ना स्वाभाविक है। चोट या फिर मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति में कमर सहित शरीर के घुटने भी दर्द से कराह उठते हैं। यह ऐसी दिक्कतें साथ लाती है जिससे इंसान उठने बैठने में भी असहाय महसूस करता है। एक हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत जैसे देश मे करोड़ों युवा भी इसकी जद में हैं। हालांकि ऐसी समस्याओं को बुढ़ापे का रोग समझा जाता था लेकिन खान पान और आधुनिक जीवनशैली ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ रखी है। इस लेख के माध्यम से इस तरह के दर्द के कारण और लक्षण सहित सम्पूर्ण समाधान के ऐसे तरीकों पर प्रकाश डालने का है जिसे अपनाकर जीवन मे ऐसे कष्टों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
कूल्हे में दर्द के प्रमुख कारण
कमर में दर्द या रीढ़ की हड्डियों में किसी वजह से हुआ संक्रमण भी कूल्हे में दर्द का कारण बन जाता है। मशीन की तरह की क्रिया प्रणाली इंसान की जीवनशैली प्रभावित करती है जिससे हड्डियों का कमजोर होना तय माना जाता है। पुरानी चोट के प्रभाव से नर्म ऊतकों में विच्छेद हो जाने से कूल्हों में दर्द हो जाता है। एक तरफ करवट लेकर सोने या गलत तरीके से बैठने से भी मांसपेशियों में खिंचाव ऐसे दर्द का प्रमुख कारण बनता है। अर्थराइटिक अटैक की वजह से ऐसी समस्या अक्सर पैदा होती है। किसी आंतरिक समस्या या फिर शरीर मे यूरिक एसिड बढ़ने से हड्डियों में मौजूद फ्लूड सूखने लगता है जो इस तरह के दर्द का कारण बन जाता है। शल्य चिकित्सा के बाद भी नर्म ऊतकों में परिवर्तन भी दर्द का कारण बनता है। मधुमेह या फिर मोटापा ऐसी समस्या का बड़ा कारण माना जाता है।
कूल्हे में दर्द के प्रमुख लक्षण
कूल्हे में दर्द के कई लक्षण होते हैं। हिप पर हल्का छूने पर दर्द का आभास, बैठने पर दर्द और ऐंठन, जकड़न सहित कूल्हों पर सूजन के साथ कमर के निचले हिस्से पर दर्द और सूजन का आभास। बैठने के साथ ही दर्द और खिंचाव सहित कई बार पीड़ा से अचानक बुखार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कूल्हों पर मौजूदा मांसपेशियों में रह रहकर दर्द की स्थिति के साथ पेशाब में जलन जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। मल त्याग के दौरान मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव की स्थिति बनी रहती है।
बदलते मौसम के साथ कूल्हे में दर्द
कूल्हे दाईं और बाईं दोनों तरफ स्थित होते हैं। जरूरी नही कि दोनों में एक साथ दर्द हो। आम समस्या में किसी एक तरफ के कूल्हे में दर्द हो सकता है लेकिन गठिया2 जैसे रोगों में यह दर्द दोनों तरफ हो जाता है। मसलन मौसम के बदलाव के साथ रोगों की प्रकृति में भी बदलाव देखे जाते हैं। सर्दियों के मौसम में गठिया बाई का अटैक हड्डियों पर ज्यादा असर डालता है जिससे सन्धिसोथ होने का खतरा बढ़ जाता है। पुरानी चोट की वजह से पुरवाई हवा के बहने के वक्त दर्द में वृद्धि देखी जाती है।
पुरुषों में कूल्हे का दर्द

पुरुष जो शारीरिक श्रम ज्यादा करते हैं उनमें यह समस्या देखी गई है। एक जगह काफी देर तक बैठकर काम करने वाले 20 से 50 साल की उम्र वर्ग वाले लोग कूल्हे में दर्द का ज्यादा शिकार होते हैं। इस प्रक्रिया में कूल्हे की हड्डियों में मौजूद फ्लूड के सूखने और हड्डियों से जुड़ी नरम मांसपेशियों को क्षति पहुंचती है। अधिक उम्र वाले पुरुषों की हड्डियों में मौजूद फ्लूड सूखने या फिर हड्डियों के प्लेटों के कमजोर पड़ने और कैल्शियम की कमी से दर्द में वृद्धि हो जाती है।
महिलाओं में कूल्हे दर्द का कारण

महिलाओं में कूल्हे का दर्द पुरुषों की अपेक्षा अधिक देखा जाता है। 30 से 60 साल की उम्र वर्ग की महिलाओं में कई वजहों से दर्द की स्थिति प्रकट होती है। मोटापा और मधुमेह की शिकार महिलाएं इस दर्द की चपेट में आती है। युवा स्त्रियों में बार-बार गर्भपात की स्थिति भी इसका कारण बन जाता है। गर्भावस्था या फिर इसके बाद शरीर मे मौजूद कैल्शियम की मात्रा का क्षय भी इसका कारण बनता है। बढ़ती उम्र के साथ ही गठिया और जोड़ों के दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। घरेलू काम काजी महिलाओं की दिनचर्या के दौरान ज्यादा देर गलत तरीके से एक जगह बैठने से भी कूल्हे में दर्द हो ही जाता है। कूल्हे की समस्या कमर दर्द से भी जुड़ी होती है जो महिलाओं में कुछ आंतरिक विकारों की वजह से भी देखी जाती है।
कूल्हे में दर्द होने से पहले रोकथाम के तरीके

क्या कभी आपने सोचा है कि आप को ऐसी समस्या का सामना ही ना करना पड़े? जी हां!! वाकई कुछ ऐसे तरीके हैं जिनको अमल में लाकर काफी हद तक कूल्हे के दर्द या उसकी भयानक स्थिति से बचा जा सकता है। हल्का दर्द होने पर बर्फ से सिंकाई के साथ ही गुनगुने पानी से सेंकने पर ऊतकों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। भोजन में मिलावट रहित खाद्यान्न का उपयोग करना हितकारी होता है। कैल्शियम की मात्रा बढ़ती उम्र के साथ लेने की जरूरत होती है।

दूध का इस्तेमाल शरीर के लिए हितकारी होता है। हड्डियों की देखभाल के लिए जीवनशैली में एकाग्रता जरूरी होती है। समय पर नींद पूरी करने के साथ मानसिक संतुलन बनाये रखना आवश्यक होता है। मोटापे पर नियंत्रण करने से हड्डियों में घर्षण नही होता जिसके फलस्वरूप ऊतकों में विच्छेद होने से बचाव होता है। ऐसी ही कुछ चीजों को अमल में लाने पर इंसान काफी हद तक कूल्हे में दर्द जैसी समस्याओं से काफी हद तक बच सकता है।
कूल्हे में दर्द हो जाने पर उपचार

हिप पेन या कूल्हे में दर्द हो जाने की परिस्थिति में कई ऐसे उपचार माध्यम हैं जिनके सटीक प्रयोग से इन पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। हल्का दर्द होने पर इंसान आधुनिक पेन किलर का इस्तेमाल करने से बाज नही आता वह भी बिना डॉक्टर की सलाह के। यह आदत अक्सर लोगों पर भारी पड़ती है। दुनिया मे कई चिकित्सा पद्धतियां मौजूद हैं जो इस तरह की समस्याओं को ठीक करने का काम करती हैं। आज हम बहु प्रचलित एलोपैथ, यूनानी, आयुर्वेद और होम्योपैथी के उपचार माध्यमों के बारे में बात करेंगे और जानेंगे कि कौन सी उपचार विधा ऐसे रोगों में सबसे सटीक असर पहुंचाती है।
एलोपैथी से कूल्हे दर्द का इलाज
आधुनिक या फिर फौरी राहत देने वाली या विधा दुनिया की सबसे तेज असर करने वाली विधा है। कूल्हे दर्द के दौरान आमतौर पर पेन किलर के माध्यम से दर्द ठीक किया जाता है। यदि मर्ज पुराना है तब के तरह के एक्सरे और खून जांच के बाद एंटीबायोटिक और सूजन की दवाओं के साथ कुछ स्प्रे और क्रीम के साथ उपचार की सलाह दी जाती है। इस उपचार माध्यम में आखिरी इलाज ऑपरेशन होता है जिसके माध्यम से कूल्हे में मौजूद विकृत ऊतकों को हटा दिया जाता है। हालांकि यह काफी उपयोगी होता है लेकिन जड़ से मर्ज को ठीक नही कर पाता। लंबे समय तक राहत के बाद मर्ज का फिर से उभरने का खतरा बना रहता है। सबसे खराब बात यह होती है कि इन दवाओं का शरीर पर कई तरह का साइड इफेक्ट होता है जो कई अन्य रोगों का कारण बन जाता है।
यूनानी से कूल्हे दर्द का उपचार

यूनानी हड्डियों से संबंधित रोगों को जड़ से समाधान देने के लिए ख्याति प्राप्त उपचार मध्य है। यह उपचार माध्यम सदियों से अमल में लाया जा रहा है। कूल्हे में दर्द के दौरान हर्बल विधा से तैयार कई तरह की दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। चिकित्सक इस माध्यम में रोगी को कुछ परहेज की सलाह भी देता है। परहेज के साथ दवाओं का सेवन करने से एक निश्चित समय के बाद मर्ज का स्थाई समाधान प्राप्त हो जाता है और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के।
आयुर्वेदिक विधा से कूल्हे दर्द का उपचार

परंपरागत उपचार माध्यम आयुर्वेद कूल्हे के दर्द में काफी असरदार होता है। जड़ी बूटियों के इस्तेमाल से बनी दवाओं से दर्द को राहत मिलती है। नाड़ी देखकर चिकित्सक रोग के आधार पर दवाओं का चयन करता है। मसलन अशोक, नीम और कई तरह के दर्द नाशक जड़ी बूटियों से तैयार दवाएं दर्द दूर करने में असरदार होती हैं। इस विधा का इस्तेमाल यूनानी के साथ भी जमकर किया जाता है। दवा एक निश्चित समय के बाद काफी हद तक असर पहुंचाती है।
होम्योपैथी से कूल्हे दर्द का निदान
होम्योपैथी या जर्मन तकनीक की दवाएं काफी चलन में हैं। कूल्हे दर्द के दौरान इस विधा की दवाएं काफी लंबे समय तक चलती हैं जिसके दौरान मरीज को काफी धैर्य की जरूरत होती है। इस माध्यम में कई तरह के परहेज का पालन करना पड़ता है तब जाकर आराम मिलता है। हालांकि ऐसी दवाएं शरीर की हड्डियों में कैल्शियम की पूर्ति नही कर पाती और तत्काल राहत पहुंचाने में विफल होती हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि इस माध्यम से कई तरह के साइड इफेक्ट दूर हो जाते हैं।
कूल्हे दर्द में क्या करें/ क्या ना करें

कूल्हे में दर्द हो जाने पर एक तरफ करवट लेकर ना सोएं। आम परिस्थितियों में दर्द होने पर तुरंत पेन किलर का इस्तेमाल ना करें। गर्म पानी और नमक से मांसपेशियों की सिंकाई करें। अधिक खट्टे पदार्थ अचार लाल मिर्च और गरम मसाले से परहेज करें। मांसाहार का त्याग करें। ऐसा भोजन करें जो हल्का और सुपाच्य हो। जंक फ़ूड को ना कहें। शराब और धूम्रपान से परहेज करें। पानी की मात्रा का भरपूर प्रयोग करें। दूध और कैल्शियम युक्त भोजन का प्रयोग करें। तनाव से बचें और चिकित्सक की सलाह पर दवाओं का सेवन करें।

खान पान की गुणवत्ता में सुधार दूर कर सकता है कूल्हे का दर्द


बेतहाशा भागती इंसानी जिंदगी जब अपने खान पान से समझौता कर बैठती है तब कूल्हे में दर्द जैसी समस्याओं के साथ शरीर मे कई अन्य विकृतियों का जन्म होता है। वास्तव में मिलावटी भोजन सामग्री मीठे जहर के समान होती है जो धीरे- धीरे ही सही लेकिन जीवन को असमय काल के गाल में पहुंचा कर ही छोड़ती है। पैरों के सबसे छोर पर स्थित कमर की हड्डियों से जुड़ा हिप पुरानी चोट या फिर आंतरिक हड्डी रोग मसलन गठिया जैसे विकारों के प्रकट होने पर दर्द देता है।

इस तरह का दर्द हो जाने पर इंसान को अपनी जीवनशैली में सुधार के साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार लाने की जरूरत होती है। खान पान की विकृति से ही खून में बढ़ा यूरिया का स्तर हड्डियों को बेहद कमजोर बना देता है जिसकी वजह से घर्षण उत्पन्न होता है। घर्षण के फलस्वरूप हड्डियों के जोड़ में मौजूद फ्लूड सूखने के खतरा बढ़ जाता है। इस लेख के माध्यम से खान पान के कुछ अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालने की कोशिश है। कूल्हे दर्द का आहार के रूप में कुछ चीजों को अमल में लाकर दर्द जैसी समस्या पर लगाम लगाया जा सकता है।
हरी पत्तेदार साग सब्जियों का सेवन



सर्दियों के मौसम में हड्डी रोग के लक्षण उत्पन्न होना शुरू हो जाते है। इसी मौसम में पालक और बथुआ जैसे साग भारी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। पालक और बथुआ जैसे साग में कैल्शियम और आयरन जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जिनके सेवन से शरीर को कैल्शियम की आपूर्ति तो होती ही है अपितु शरीर मे मौजूद हानिकारक तत्व समाप्त हो जाते हैं। साग के सेवन से आंत में मौजूद कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं। इस मौसम में हरी पत्तेदार गोभी का सेवन भी कैल्शियम की भरपूर मात्रा प्रदान करता है। पालक और बथुए को साग के रूप में लेने के अलावा जूस बनाकर सेवन करने से भी कूल्हे के दर्द में राहत मिलती है।
लहसुन का सेवन

लहसुन ऐसा प्राकृतिक पेन किलर है जिसका प्रयोग आयुर्वेद और यूनानी दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। लहसुन की एक कली को छीलकर खाली पेट सेवन करने से वात और पित्त जैसी समस्या दूर हो जाती है। कई परिस्थितियों में वात रोग भी कूल्हे दर्द का कारण बन जाता है। इसके अलावा लहसुन की 5 से 6 कलियों को हल्का कूटकर पानी मे उबालकर सूप की तरह इस्तेमाल करने से हड्डियों में दर्द दूर तो होता ही है बल्कि शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति भी होती है। खान पान में लहसुन का सेवन शरीर से यूरिक एसिड जैसे तत्वों को बाहर निकलकर हड्डियों को मजबूत बनाता है।
मौसमी फलों का सेवन कूल्हे के दर्द में लाभदायक
मौसमी फलों के सीधे सेवन करने से या उनके जूस पीने से हड्डियों के जोड़ मजबूत होते हैं और शरीर से अवशिष्ट पदार्थ बाहर निकल जाता है। मौसमी, अनार, सेब संतरा और चुकंदर जैसे फलों के नियमित सेवन करने से कूल्हे मजबूत होते हैं और उनमें दर्द की समस्या से राहत मिलती है।
दूधदूध का भरपूर सेवन दूर भगाए कूल्हे का दर्द

दूध में मौजूद कैल्शियम के साथ कई पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। रोजाना सुबह शाम दूध की निश्चित मात्रा का रोजाना सेवन कूल्हे के दर्द में काफी राहत पहुंचाता है।
जंक फ़ूड जैसे आहार से बनाएं दूरी

भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान भोजन से समझौता कर जल्दबाजी के चक्कर मे जंक फूड का बेतहाशा इस्तेमाल कर रहा है। एक सर्वे के मुताबिक शहरों में निवास करने वाली आबादी का करीब 30 फीसदी तबका ऐसी आदतों के चलते कूल्हे दर्द जैसी समस्या से दो चार हो रहा है। इंसान की यह आदत उसे ऐसे ही कई रोगों की चपेट में ले लेती है। इसके सेवन से मोटापा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो हिप पर असर डालता है। इसलिए जितना भी हो सके जंक और स्ट्रीट फूड से परहेज करें।
अंडों और लाल मीट का सेवन
मुर्गी के अंडों में प्रचुरता से कैल्शियम मौजूद होता है। नियमित अंडे का सेवन करने से हड्डियों का विकास होता है और ऊतकों की क्षतिपूर्ति होती रहती है। लाल मीट ऊर्जा के साथ ही विटामिन डी का बड़ा स्रोत माना जाता है। इसके सेवन से हड्डियाँ मजबूत होती है और कूल्हे में दर्द जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। मांसाहारी भोजन करने से पहले जितना संभव हो उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर कर लें।
तैलीय भोजन से करें परहेज

वैसे सीमित मात्रा में तैलीय भोजन शरीर के विकास के लिए बेहद आवश्यक होता है लेकिन हद से ज्यादा इसका सेवन हड्डियों सहित कूल्हे में दर्द की वजह बन जाता है। वसा युक्त भोजन शरीर के मोटापे का कारण बनता है जिससे हड्डियों में घर्षण उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। ज्यादा तली भुनी चीजें शरीर मे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देती है जिसके चलते कूल्हे के नर्म ऊतकों को भारी क्षति पहुंचती है। शुद्ध सरसों के तेल के सिवा किसी भी तरह के तेल को भोजन में शामिल करने से बचें।
खट्टे पदार्थों के सेवन से रहें दूर

नीबू पानी और आंवले का सेवन जहां हड्डियों के पोषण का काम करता है तो दूसरी तरफ अचार, इमली और खटाई जैसे आहार कूल्हे के दर्द का कारण बन जाते हैं। जितना भी संभव हो ऐसे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें क्योंकि इनके सेवन से हड्डियों के जोड़ों में मौजूद फ्लूड को भारी क्षति पहुंचती है।
कूल्हे दर्द की समस्या हो या हड्डियों संबंधित रोग, खान पान में विकृति ही इसके सबसे बड़े कारक होते हैं। अपने व्यस्त समय से थोड़ा सा समय निकालकर अपनी जीवनशैली में निरंतरता और आहार में सुधार अपनाने से काफी हद तक कूल्हे के दर्द से निजात मिल सकती है। बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की सुरक्षा बेहतर आहारों के चुनाव द्वारा बेहतर ढंग से की जा सकती है।

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