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डिलीवरी के बाद डिप्रेशन


डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव –
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Postpartum Depression In Hindi डिलीवरी के बाद डिप्रेशन या प्रसव के बाद अवसाद यानि पोस्टपार्टम डिप्रेशन (PPD) एक प्रकार का अवसाद है जो शिशु को जन्म देने के बाद कुछ महिलाओं को प्रभावित करता है। अधिकांश नयी माताओं को प्रसव के बाद पोस्टपार्टम बेबी ब्लूज़ (baby blues) का अनुभव होता है, जिसमें आमतौर पर मूड स्विंग्स, रोना आना, चिंता और सोने में कठिनाई होना शामिल होता है। प्रसव के बाद बेबी ब्लूज़ आमतौर पर शुरुआत के दो से तीन दिनों के भीतर शुरू होते हैं, और लगभग दो सप्ताह तक चलते हैं। जबकि बेबी ब्लूज़ के लक्षणों में से कुछ लक्षण पोस्टपार्टम डिप्रेशन के समान हैं, लेकिन प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण बेबी ब्लूज़ से अलग होते है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार केवल माएं ही नहीं पिता भी होते है। एक अध्ययन में पाया गया है की 10 प्रतिशत पिता प्रसवपूर्व या प्रसव के बाद अवसाद का शिकार होते है। इस तरह के अवसाद के मामलें 3-6 महीने बाद ज्यादा देखने को मिलते है। आज इस लेख में हम जानेंगे की पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) क्या है और इसके लक्षण कारण जांच जटिलताएं इलाज और बचाव क्या है।


1. पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) क्या है – What is Postpartum depression in Hindi
2. पोस्टपार्टम डिप्रेशन और बेबी ब्लूज में अंतर – Difference between postpartum depression and baby blues in Hindi
3. बेबी ब्लूज के लक्षण – Baby blues symptoms in Hindi
4.पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण – Postpartum depression symptoms in Hindi
5. पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण – Postpartum depression causes in Hindi
6. पोस्टपार्टम डिप्रेशन के जोखिम कारक – Postpartum depression risk factors in Hindi
7. पोस्टपार्टम डिप्रेशन से होने वाली जटिलताएं – Postpartum depression complications in Hindi
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से माताओं के लिए जटिलताएं – Postpartum depression complications for mothers in Hindi
प्रसवोत्तर अवसाद से पिता के लिए जटिलताएं – Postpartum depression Complications for father in Hindi
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बच्चों के लिए जटिलताएं – Postpartum depression Complications for children in Hindi

8. पोस्टपार्टम डिप्रेशन की जांच – Postpartum depression diagnosis in Hindi
9. पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज – Postpartum depression treatment in Hindi
10. पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचाव – Postpartum depression prevention in Hindi
पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) क्या है – What is Postpartum depression in Hindi
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन (postpartum depression) जिसे प्रसवोत्तर अवसाद (prenatal depression) भी कहते है, यह उन महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है जिन्होंने अभी अभी बच्चे को जन्म दिया हो। पोस्टपार्टम डिप्रेशन बेबी ब्लूज से बिलकुल अलग होता है परन्तु इसके कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते है। जहां बेबी ब्लूज की वजह से महिलाओं को मूड स्विंग्स होते है, रोना आता है, बहुत चिंता होती है और थकान लगती है वहीं पोस्टपार्टम डिप्रेशन में कई गंभीर लक्षण दिखाई देते है जैसे बच्चे से चिढ़ होना और आत्महत्या करने का विचार आना आदि शामिल हैं। प्रसवोत्तर अवसाद कोई चरित्र दोष या कमजोरी नहीं है।
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यह तो बस गर्भवती महिलाओं में कभी-कभी होने वाली परेशानी है जो सिर्फ बच्चे को जन्म देने की जटिलता की वजह से होती है। अगर आपको भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन है तो सही समय पर इलाज करवाकर आप अपने आप को और अपने बच्चे को इससे सुरक्षित रख सकती है।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन और बेबी ब्लूज में अंतर – Difference between postpartum depression and baby blues in Hindi

वैसे तो डिप्रेशन कई तरह के होते है परन्तु महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के बाद दो तरह के डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते है एक है पोस्टपार्टम डिप्रेशन और दूसरा बेबी ब्लूज। ये दोनों ही डिप्रेशन एक दूसरे से अलग होते है इनकी अवधि भी अलग होती है और इनके लक्षण भी परन्तु कभी कभी इनमे कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते है। जहां बेबी ब्लूज की अवधि 2 दिन से लेकर कुछ हफ्तों तक होती है वहीं पोस्टपार्टम डिप्रेशन लम्बे समय तक चलता है और इसके लक्षण और परिणाम भी काफी गंभीर होते है।

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बेबी ब्लूज के लक्षण – Baby blues symptoms in Hindi

बेबी ब्लूज के लक्षण और इसकी अवधि कुछ दिनों या हफ़्तों की होती है जिसमे कुछ सामान्य लक्षण दिखाई देते है, जिनमे शामिल है-

मूड स्विंग्स होना
चिंता करना
उदासी महसूस होना
चिड़चिड़ापन लगना
अभिभूत (overwhelmed) सा लगना
रोना आना
एकाग्रता में कमी लगना
भूख की समस्या होना
नींद ना आने की परेशानी होना
डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) के लक्षण – Postpartum depression symptoms in hindi

पोस्टपार्टम डिप्रेशन या प्रसव के बाद का अवसाद माता-पिता दोनों को कई अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकता है। जिसके कुछ इस तरह के लक्षण देखने को मिलते है, जैसे-
अभिभूत (overwhelmed) होना और फस जाने की भावना आना, या ऐसा महसूस होना की किसी भी चीज का सामना करना असंभव है
मूड ख़राब होना ,जो एक सप्ताह से अधिक समय तक रहता है
अस्वीकार किए जाने की अनुभूति होना
बहुत रोना आना
कोई ग़लती महसूस हो रही हो
लगातार चिड़चिड़ापन रहना
सिरदर्द, पेट में दर्द, धुंधली दृष्टि होना
भूख की कमी होना
कामेच्छा की कमी लगना
पैनिक अटैक आना
लगातार थकान लगना
एकाग्रता की समस्या उत्पन्न होना
मोटिवेशन की कमी लगना
नींद न आने की समस्या से पीड़ित होना
माता-पिता की खुद में दिलचस्पी की कम होना
अपर्याप्तता की भावना आना
नए बच्चे में कम रुचि लेना
मित्रों से मिलने या उनके पास रहने की इच्छा में कमी होना

पोस्टपार्टम डिप्रेशन बेबी ब्लूज के सामान नहीं होता है जो माता पिता को सिर्फ कुछ दिन तक ही प्रभावित करें। अगर कार्यशीलता में कमी और मूड स्विंग्स लम्बे समय तक हो तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन की निशानी हो सकती है।
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन की वजह से कुछ लोग अपने बच्चे को नुकसान पहुँचाने का भी सोचते है या उनके मन में कभी कभी आत्महत्या (suicide) और आत्मघात (self harming) के बुरे विचार भी आ सकते है। ज्यादातर मामलों में ना तो माता-पिता और ना ही शिशु को नुकसान होना पाया गया है, लेकिन ऐसे भयानक विचार आना भी किसी बड़ी अनहोनी का संकेत हो सकते है।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण – Postpartum depression causes in Hindi

प्रसवोत्तर अवसाद या पोस्टपार्टम डिप्रेशन (पीपीडी) कई कारकों का परिणाम होता है। हालाँकि, इसके सही कारणों का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है। अवसाद आमतौर पर भावनात्मक (emotional), तनावपूर्ण घटनाओं (stressful events), या जैविक परिवर्तन (biological change) के कारण होता है, जो मस्तिष्क रसायनों के असंतुलन को ट्रिगर करता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन (पीपीडी) में योगदान करने वाले कारकों में शामिल हो सकते हैं-

गर्भावस्था के समय हुए कुछ शारीरिक परिवर्तनों की वजह से
बच्चे के बारे में और माता-पिता होने की जिम्मेदारियों के बारे में अत्यधिक चिंता करना
एक जटिल या कठिनाई से हुआ लेबर और प्रसव
परिवार के समर्थन की कमी की वजह से
रिश्तों की चिंता करना वित्तीय कठिनाइयां महसूस होना
अकेलापन लगना या किसी करीबी दोस्त और परिवार के आसपास नहीं होना
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इतिहास होना
मूत्र असंयम (urinary incontinence) , एनीमिया, रक्तचाप में परिवर्तन की वजह से और चयापचय में परिवर्तन सहित बच्चे के जन्म के समय रही स्वास्थ्य समस्याओं के कारण।
बच्चे के जन्म के बाद एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) के स्तर में अचानक और गंभीर गिरावट के कारण हार्मोनल परिवर्तन होना
नींद चक्र में परिवर्तन की वजह से
स्तनपान कराने में कठिनाई होने की वजह से

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन के जोखिम कारक – Postpartum depression risk factors in Hindi

कोई भी महिला जो अभी अभी माँ बनी हो उसमे डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (Postpartum depression) की समस्या का विकास हो सकता है। आपके जोखिम को बढ़ाने वाले कारक हो सकते हैं-
पिछला अवसाद या कोई अन्य मूड डिसऑर्डर
अवसाद का कोई पारिवारिक इतिहास रहा हो
गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं रही हों
हालिया तनाव, जैसे कि तलाक या किसी प्रिय व्यक्ति की गंभीर बीमारी से मृत्यु
अनचाही या मुश्किल गर्भावस्था
जुड़वा, तीन या उससे ज्यादा बच्चे होना
आपके बच्चे का जन्म समय से पहले या किसी स्वास्थ्य समस्याओं के साथ हुआ हो
अलगाव या भावनात्मक समर्थन की कमी होना
खाने में कमी
दवा या शराब का जरुरत से ज्यादा सेवन करना
नींद की कमी और थकावट होना

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नोट- यदि आपको इनमें से कोई भी जोखिम कारकों के लक्षण महसूस हो रहे हो तो तुरन्त अपने डॉक्टर से संपर्क करे और इलाज करवाएं क्योकि ये आपके और आपके बच्चे के लिए बहुत ही घातक साबित हो सकता है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से होने वाली जटिलताएं – Postpartum depression complications in Hindi

यदि पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज सही समय पर नहीं करवाया जाये तो इसकी वजह से माँ और बच्चे के बीच के बंधन में बाधा उत्पन्न हो सकती है और बहुत सी पारिवारिक परेशानी भी हो सकती है, जैसे-

पोस्टपार्टम डिप्रेशन से माताओं के लिए जटिलताएं – Postpartum depression complications for mothers in Hindi

प्रसव के बाद होने वाले अवसाद (Postpartum depression) का अगर समय से इलाज ना कराया जाये तो यह कई महीनों या उससे अधिक समय तक रह सकता है, कभी-कभी यह एक गंभीर अवसादग्रस्तता विकार (chronic depressive disorder) बन जाता है। यहां तक ​​कि जब तक इसका इलाज किया जाता है, तब तक अवसादग्रस्त महिला के अंदर प्रमुख अवसाद (major depression) के भविष्य के खतरनाक लक्षण पनपने लगते है।
प्रसवोत्तर अवसाद से पिता के लिए जटिलताएं – Postpartum depression Complications for father in Hindi

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का असर पिताओं पर भी होता है जिससे नए बच्चे की तरफ भी उनका तनाव बढ़ सकता है। यदि माँ में अवसाद और उदासी बढ़ती है, तो बच्चे के पिता में भी अवसाद का खतरा बढ़ सकता है। और शोध में तो यह पहले ही साबित हो चुका है की नए पिता पहले से ही पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार हो सकते है चाहें उनके साथी में इसके लक्षण हो या ना हो।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बच्चों के लिए जटिलताएं – Postpartum depression Complications for children in hindi

पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ग्रस्त माताओं की संतान को भी भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याएं हो सकती है, जैसे नींद आने और खाना खाने में कठिनाई, अत्यधिक रोना आना, और भाषा के विकास में देरी की संभावना हो सकती है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन की जांच – Postpartum depression diagnosis in hindi

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन या पोस्टपार्टम डिप्रेशन और पोस्टपार्टम बेबी ब्लूज के बीच का अंतर समझने और आपको दोनों में से कौन से तरह का अवसाद है यह जानने के लिए आपका डॉक्टर आपसे आपकी भावनाओं, विचारों और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात कर सकता है। इसलिए डॉक्टर को कुछ भी बताने में शर्मिंदगी महसूस ना करें क्योकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक आम समस्या है और आपके बताये हुए लक्षणों के द्वारा ही डॉक्टर आपका उचित इलाज कर पायेगा। आपको किस तरह का डिप्रेशन है इसकी जांच करने के लिए डॉक्टर कुछ तरीके अपना सकते है, जैसे-
डॉक्टर आपका एक अवसाद स्क्रीनिंग कर सकता है जिसमे आपको कुछ प्रश्नों के जवाब देने होंगे।
डॉक्टर आपका ब्लड टेस्ट भी करवा सकता है यह पता करने के लिए की कहीं आपके डिप्रेशन के लक्षण और संकेतो को अंडरएक्टिव थाइरोइड तो बढ़ावा नहीं दे रहा है।
डॉक्टर के द्वारा कुछ अन्य परीक्षण भी करवाए जा सकते है।
डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) का इलाज – Postpartum depression treatment in Hindi

प्रसवोत्तर अवसाद या डिलीवरी के बाद डिप्रेशन में इलाज और रिकवरी में समय लग सकता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज आपके अवसाद की गंभीरता और व्यक्तिगत जरूरतों पर निर्भर करता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ मेडिकेशन दे सकता है और आपको किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (mental health professional) से मिलने का भी कह सकता है। अगर आपको बेबी ब्लूज डिप्रेशन के लक्षण है तो इसके इलाज के लिए डॉक्टर निम्न उपाय कर सकता है, जैसे-

जितना हो सके उतना आप आराम करने की कोशिश करें।
अगर आपका परिवार और दोस्त आपकी मदद कर रहे हो तो उसे खुशी से स्वीकार करें।
अन्य नए बच्चों की माताओं के साथ जुड़ें।
अपना ख्याल रखने के लिए समय निकलें।
शराब और ड्रग्स लेने से बचें, यह आपके मूड स्विंग को और बदतर बना सकते हैं।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लिए इलाज के निम्न तरीके अपनाये जा सकते हैं- पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लिए डॉक्टर अक्सर मनोचिकित्सा जिसे टॉक थेरेपी या मानसिक स्वास्थ्य परामर्श (talk therapy or mental health counseling) भी कहा जाता है और दवाओं या दोनों का उपयोग करते है। इसमें शामिल है-

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के इलाज के लिए मनोचिकित्सा (Psychotherapy)- इस प्रक्रिया में एक मनोचिकित्सक (psychiatrist), मनोवैज्ञानिक (psychologist) या अन्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (mental health professional) आपकी चिंताओं के माध्यम से बात करने में आपकी मदद कर सकते है। इस थेरेपी के माध्यम से, आप अपनी भावनाओं के साथ सामना करने, समस्याओं को हल करने, यथार्थवादी लक्ष्य (realistic goals) निर्धारित करने और स्थितियों का सकारात्मक तरीके से जवाब देने के लिए बेहतर तरीके पा सकते हैं। कभी-कभी पोस्टपार्टम डिप्रेशन में परिवार या संबंध चिकित्सा (family or relationship therapy) भी मदद करती है।
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प्रसवोत्तर अवसाद के इलाज के लिए एंटीडिप्रेसन्ट (Antidepressants)- आपका डॉक्टर आपको एंटीडिप्रेसेंट लेने की सलाह भी दे सकता है। यदि आप बच्चे को स्तनपान करा रही हैं, तो आपके द्वारा ली गई कोई भी दवा आपके स्तन के दूध में प्रवेश कर सकती है। हालांकि, ज्यादातर एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का उपयोग स्तनपान के दौरान किया जा सकता है परन्तु इसके थोड़े से साइड इफेक्ट आपके बच्चे पर हो सकते है पर इनके जोखिम कम रहते है। विशिष्ट एंटीडिपेंटेंट्स के संभावित जोखिमों और लाभों के बारे में अपने डॉक्टर से पूरी जानकारी लें।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचाव – Postpartum depression prevention in hindi

वास्तव में डिलीवरी के बाद डिप्रेशन की पूरी रोकथाम संभव नहीं है। फिर भी, कुछ कारक आपको प्रसवोत्तर अवसाद (prenatal depression) से ग्रस्त कर सकते हैं, इसलिए आप अवसाद के जोखिम को कम करने के लिए कुछ उपाय अपना सकती है, जैसे-
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डिलीवरी के बाद डिप्रेशन से बचने के लिए एक संतुलित और स्वस्थ आहार लें ।
अपने ब्लड शुगर के स्तर को बनाए रखने के लिए थोड़ा थोड़ा खाते रहे।
हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे की अच्छी गुणवत्ता वाली नींद अवश्य लें।
डिलीवरी के बाद डिप्रेशन और तनाव कम करने के लिए चीजों की सूचियां बनाएं और अपने आप को व्यवस्थित रखें।
भावनाओं और चिंताओं के बारे में अपने करीबी दोस्तों, साथी और परिवार के सदस्यों से खुल कर बात करें।



डिप्रेशन और उदासी दूर करने के उपाय 
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डिप्रेशन और उदासी को कैसे दूर करे जानें डिप्रेशन और उदासी दूर करने के उपाय के बारे में। डिप्रेशन (depression) में होने के कारण आप असहाय महसूस करते है। डिप्रेशन का बहुत बार लोगों को पता भी नहीं चलता है लेकिन लंबे समय तक इस परिस्थिति में रहना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हो सकता है। तनाव (stress), डिप्रेशन मानसिक बीमारी होती है लेकिन ये आपके शरीर को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। दोस्तों और परिवार के प्यार (love) के कारण इस परिस्थिति से काफी हद तक पार पाया जाता है। लेकिन अगर आप अकेले हैं और अपना तनावऔर डिप्रेशन साझा करने के लिए आपके पास कोई नहीं होता है तो आपको अपनी मदद खुद करनी होती है।

इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से कुछ उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो की आपको डिप्रेशन (depression) की स्थिति से उबरने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं डिप्रेशन की समस्या को कम करने के लिए आप किन-किन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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डिप्रेशन और उदासी दूर करने के लिए डिप्रेशन की करें पहचान – Tips to get rid of depression know your strees in Hindi
डिप्रेशन को दूर करना है दिनचर्या का पालन करें – Tips to get rid of depression follow your routine in hindi
डिप्रेशन और उदासी से बचने के लिए एक्सरसाइज करें- Depression aur Udasi Dur Karne Ke Upay exercise daily in hindi
डिप्रेशन से दूर रहने के लिए सेहतमंद खाना खाएं – Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay eat healthy food in hindi
डिप्रेशन और उदासी से छुटकारा चाहते हैं तो नकारात्मक ना सोचें – Tips to get rid of depression stay away from negative thoughts in hindi
डिप्रेशन और उदासी को दूर करने के लिए कुछ नया करें – Tips to get rid of depression try somthing new in hindi
डिप्रेशन और उदासी से छुटकारा चाहते हैं तो मनोरंजन करना सीखें – Tips to get rid of depression have some fun in hindi
डिप्रेशन और उदासी से निजात पाने के लिए सिर में तेल मालिश करें – Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay oil massage in hindi
डिप्रेशन और उदासी दूर करने के उपाय पर्याप्त नींद लें – Depression aur Udaasi Dur Karne ke Upay good sleep in hindi
डिप्रेशन और उदासी को खत्म करने के लिए जड़ी-बूंटियों का इस्तेमाल- Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay use herbs in hindi
डिप्रेशन और उदासी दूर करने के लिए डिप्रेशन की करें पहचान – Tips to get rid of depression know your strees in hindi
डिप्रेशन की पहचान करना बहुत मुश्किल होता है। एक लंबे समय तक तनाव (stress) और परिस्थितियों से परेशान रहने के बाद जब आपको अपनी हरकतें संदिग्ध लगने लगे तो समझ जाएं की आपको डिप्रेशन (depression) है। डिप्रेशन के कारण नींद ना आना, भूख ना लगना और आपके सामान्य कार्यों का बाधित होना जैसी कई परेशानियां पैदा हो जाती है। यदि आपको लगता है कि आप डिप्रेशन और तनाव में हैं तो सबसे पहले डॉक्टर से परामर्श लें। यदि आप अकेले रहते हैं तो आपका डॉक्टर और थैरेपिस्ट डिप्रेशन की पहचान करने में आपकी मदद करते हैं।


डिप्रेशन को दूर करना है दिनचर्या का पालन करें – Tips to get rid of depression follow your routine in Hindi

आप रोजाना सोकर उठते हैं, ऑफिस जाते हैं, खाना खाते हैं, सोने के लिए जाते हैं। लेकिन डिप्रेशन के कारण आपको नींद नहीं आती, भूख नहीं लगती और हमेशा आप थकान का अनुभव करते हैं। इसलिए अपना ध्यान भटकाने की बजाय और ज्यादा सोचने की बजाय अपनी दिनचर्या (routine) का बेहतर ढंग से पालन करें।
डिप्रेशन और उदासी से बचने के लिए एक्सरसाइज करें- Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay exercise daily in hindi


उदासी से बचने के लिए एक्सरसाइज सबसे अच्छा तरीका है एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडोर्फिन (Endorphin) और सेरोटोनिन (Serotonin) हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। ये फील गुड (Feel good) हार्मोन होते हैं जो की आपको बेहतर एहसास करवाते हैं। रोजाना एक्सरसाइज करने से आपका तनाव, उदासी (sadness) और डिप्रेशन कम हो जाता है।



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डिप्रेशन से दूर रहने के लिए सेहतमंद खाना खाएं – Depression aur Udasi Dur Karne Ke Upay eat healthy food in Hindi


दिल ही नहीं बल्कि दिमाग का रास्ता भी पेट से गुजरता है। तनाव और डिप्रेशन के कारण सिर्फ भूख ना लगने की ही नहीं बल्कि जरुरत से ज्यादा भूख (hunger) लगने की समस्या भी पैदा हो जाती है। सोडा, अधिक शुगर और नमक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से आपका डिप्रेशन बढ़ जाता है। ऐसे में आपको हेल्दी खाना खाना चाहिए जिसमें फॉलिक एसिड (folic acid) और ओमेगा-3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में होता है। साल्मन, टूना, एवोकाडो, पालक आदि का सेवन करने से आप स्वस्थ रहते हैं साथ ही डिप्रेशन भी कम होता है।

डिप्रेशन और उदासी से छुटकारा चाहते हैं तो नकारात्मक ना सोचें – Tips to get rid of depression stay away from negative thoughts in Hindi



नकारात्मक ख्याल (negative thoughts) बार-बार आना डिप्रेशन का सबसे बड़ा लक्षण है। इससे आपके तनाव और डिप्रेशन में ईजाफा भी होता है। ऐसे में नकारात्मक बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए। अपनी सोच को सकारात्मक (positive) बनाकर रखें। अपने आसपास ऐसे लोगों को रखें जो की आपको मोटीवेट (motivate) कर सकें। सकारात्मक और आशावादी नजरिया (Optimistic view) जीवन में डिप्रेशन को कम करने में मदद करता है।

डिप्रेशन और उदासी को दूर करने के लिए कुछ नया करें – Tips to get rid of depression try somthing new in Hindi


आपकी दिनचर्या काफी बोरिंग (boring) हैं। आप कुछ नया सीख नहीं रहें हैं। आपने अपने आपको एक दायरे में सीमीत कर लिया है ऐसे में उदास रहना तय है। अपनी उदासी को कम करने के लिए आपको कुछ नया ट्राई (try) करना चाहिए। अगर आपकी गाने (songs), डांस (dance) करने या लिखने में दिलचस्पी है तो अपनी हॉबी (hobby) को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। कुछ भी नया सीखने से आपकी ऊर्जा और रचनात्मकता तो बढ़ती ही है साथ ही आप डिप्रेशन से पार पा लेते हैं।



डिप्रेशन और उदासी से छुटकारा चाहते हैं तो मनोरंजन करना सीखें –
 Tips to get rid of depression have some fun in hindi

बहुत ज्यादा गंभीरता जीवन को उदास और नकारात्मक बना देती है। ऐसे में खुश रहें, हर बात को दिल से लगाने की बजाय हंसकर टाल दें। दोस्तों के साथ घूमें-फिरें और मनोरंजन (fun) करें। आपका तनाव और उदासी खुद ही कम हो जाएगी।
डिप्रेशन और उदासी से निजात पाने के लिए सिर में तेल मालिश करें – Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay oil massage in hindi


सुनकर हैरान हो रहे होंगे आप लेकिन ये सच है कि तनाव और डिप्रेशन से निजात दिलाने के लिए तेल मालिश (oil massage) करना काफी कारगर रहता है। दरअसल एसेंशियल ऑयल (Essential Oil) जै से लेवेंडर, जैस्मीन आदि की खुशबू नसों को रिलैक्स करती है। तनाव और डिप्रेशन के कारण दिमाग की नसों में खिंचाव (stress) पैदा हो जाता है। एक कटोरी में नारियल का तेल डालें और उसमें कुछ बूंदें एसेंशियल ऑयल मिलाकर सिर में तेल मालिश करें। ऐसा करने से दिमाग रिलैक्स (relax) होता है और डिप्रेशन से छुटकारा मिलता है।


डिप्रेशन और उदासी दूर करने के उपाय पर्याप्त नींद लें – Depression aur Udaasi Dur Karne ke Upay good sleep in hindi


उदासी, तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन के कारण आपकी नींद काफी बुरी तरह प्रभावित होती है। नींद ना आने के कारण शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है जिससे आप अगले दिन थका (fatigue) हुआ और उदास महसूस करते हैं। सोने से पहले मालिश करें और दूध पीएं ताकि आपको नींद आ सके। रोजाना 8 घंटे की नींद (sleep) लेने का प्रयास करें क्योंकि ऐसा करने से आपका तनाव और थकान तो कम होते ही हैं साथ ही आप स्वस्थ भी रहते हैं।

डिप्रेशन और उदासी को खत्म करने के लिए जड़ी-बूंटियों का इस्तेमाल- Depression aur Udasi Dur Karne ke Upay use herbs in hindi



लेमन बाम, ग्रीन टी (green tea), कावा-कावा (kava-kava), कैमोमाइल आदि कुछ ऐसा जड़ी-बूंटियां होती है जिनमें एंटी-डिप्रेशन (anti-depression) और एंटी-एंग्जायटी गुण होते हैं। इन जड़ी-बूंटियों का इस्तेमाल करने से आपका तनाव और डिप्रेशन कम होता है और आप स्वस्थ रहते हैं।



अच्छी नींद के लिए सोने से पहले खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ
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Best Foods for Good Sleep in Hindi आज हम आपको अच्छी नींद के लिए सोने से पहले खाए जाने वाले उन खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहें है जो आपको रात में पूरी नींद लेने में मदद करेंगे साथ ही उन खाद्य पदार्थों के बारे में भी जिन्हें बिस्तर में जाने से पहले खाने से बचना चाहिए।

अच्छी नींद लेना स्वस्थ्य रहने के लिए बहुत ही जरुरी होती है। अच्छे तरीके से ली गई नींद कुछ पुरानी बीमारियों के उत्पन्न होने के जोखिमों को भी कम कर सकती है, दिमाग और पाचन तंत्र को स्वस्थ रख सकती है, और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ा सकती है।

आम तौर पर स्वस्थ जीवन जीने के लिए, प्रत्येक रात 7 से 9 घंटे के बीच बिना किसी बाधा के नींद लेने की सिफारिश की जाती है, हालांकि कई लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पते है और इसके लिए बहुत संघर्ष करते हैं।

अच्छी नींद में वृद्धि करने लिए आप कई आदतें अपना सकते हैं, जिनमें से आहार में बदलाव, एक प्रमुख तरीका हैं। क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थों में नींद में वृद्धि करने वाले गुण होते हैं। नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए आप बिस्तर में जाने से पहले या सोने से पहले नीचे दिए गए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
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1. अच्छी नींद के लिए खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ – Best Foods to Eat Before Bed in Hindi

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2. सोने से पहले क्या खाने से बचें – Avoid eating before Sleep in Hindi
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विभिन्न स्वास्थ्य लाभों से परिपूर्ण बादाम, ड्राई फ्रूट्स का एक प्रकार है। बादाम बहुत से पोषक तत्वों का एक उत्तम स्रोत हैं, क्योंकि लगभग 28.3495 ग्राम में दैनिक क्रियाओं के लिए उपयोगी होने वाले फॉस्फोरस का 14%, ,मैंगनीज का 32% और रिबोफ्लाविन का 17%, शामिल होता हैं। इसके अलावा नियमित रूप से बादाम खाने से कुछ बीमारियों जैसे- मधुमेह और हृदय रोग, के होने का खतरा कम होता हैं। क्योकि इन विशेषताओं के लिए बादाम में पाई जाने वाली स्वस्थ सामग्री जैसे मोनोअनसेचुरेटेड (monounsaturated) वसा, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स, जिम्मेदार होती है।

बादाम, नींद को बढ़ावा देने वाला हार्मोन मेलाटोनिन का अच्चा स्रोत हैं। इसीलिए यह अच्छी नींद लेने में भी मदद करता हैं।

बादाम में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जो नींद की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उपयोगी है। जो लोग अनिद्रा की बीमारी से पीड़ित है उन लोगों के लिए बादाम सबसे अच्छा साधन हैं।
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इसके अतिरिक्त, यह तनाव हार्मोन कोर्टिसोल जो नींद को बाधित करता है, के स्तर को कम करने में मदद करता है।


गहरी नींद के आसान उपाय कैमोमाइल चाय – Achi neend ke liye Chamomile Tea in Hindi
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कैमोमाइल चाय एक लोकप्रिय हर्बल चाय है, जो विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकती है। कैमोमाइल चाय एंटीऑक्सिडेंट्स की तरह सूजन को कम करती है।

कैमोमाइल चाय पीने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ सकती है, चिंता और अवसाद कम हो सकता है, और त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। इसके अलावा, कैमोमाइल चाय के कुछ अद्वितीय गुण, नींद की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।
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विशेष रूप से, कैमोमाइल चाय में एपिगेनिन होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है, और अनिद्रा को कम करता है।

यदि आप अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार करना चाहते हैं, तो निश्चित ही कैमोमाइल चाय बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। अतः बिस्तर पर जाने से पहले कैमोमाइल चाय अवश्य ही उपयोग में लायें।

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अनिद्रा रोग का उपचार फैटी मछली – Fatty Fish For Insomnia in Hindi


सैल्मन, ट्यूना, ट्राउट और मैकेरल (salmon, tuna, trout and mackerel) जैसे फैटी मछली निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती हैं। क्योंकि इनमें विटामिन डी की मात्रा अधिक पाई जाती है।

इसके अतिरिक्त, स्वस्थ फैटी मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विशेष रूप से ईपीए और डीएचए (EPA and DHA) की मात्रा अधिक होती है, ये दोनों एसिड सूजन को कम करने के रूप में जाने जाते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय रोग के उपचार में भी सहायता करते हैं, और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं।

फैटी मछली में उपस्थित ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन डी में संयुक्त रूप से नींद की गुणवत्ता में वृद्धि करने की क्षमता होती है।

रत को सोने से पहले फैटी मछली का सेवन करने से व्यक्ति बहुत जल्दी, अधिक गहरी और अच्छी नींद में सो सकता है।

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अच्छी नींद के उपाय सफ़ेद चावल – Achi neend Ka Upay White Rice in Hindi

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सफेद चावल एक अनाज है, जिसे कई देशों में व्यापक रूप से मुख्य भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है।

सफेद और भूरे रंग के चावल के बीच अंतर यह है कि सफेद चावल के ब्राउन परत को हटाकर फाइबर, पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा कम कर दी जाती है। फिर भी, सफेद चावल में कुछ विटामिन और खनिजों की उचित मात्रा होती है, जो दैनिक कार्यों के लिए उपयोगी होते है।

यह सुझाव दिया गया है कि बिस्तर में से कुछ घंटे पहले या सोने के कुछ घंटे पहले सफेद चावल जैसे- उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ, खाने से नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

सोने के समय, कम से कम एक घंटे पहले खाया जाने वाला सफेद चावल नींद में सुधार करने के लिए सबसे अधिक प्रभावी माध्यम है।

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अच्छी नींद लाने के उपाय दूध – Achi neend Lane Ke Liye Milk in Hindi


दूध में शामिल एमिनो एसिड ट्रिप्टोफेन (tryptophan), मस्तिष्क रासायनिक सेरोटोनिन (serotonin) को प्रेरित करता है। माना जाता है कि ट्रिप्टोफेन और सेरोटोनिन, नींद को आसान बनाते है। अतः एक ग्लास साधारण दूध, अच्छी नींद में मदद करता है।

सोने से पहले एक ग्लास दूध,अच्छी नींद के लिए सबसे अच्छा साधन माना जाता है।

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रात को अच्छी नींद आने के उपाय कीवी – Achi neend aane ke liye gharelu nuskhe Kiwi in Hindi


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एक सामान्य कीवी में केवल 50 कैलोरी ऊर्जा और पोषक तत्वों की महत्वपूर्ण मात्रा होती है, जिसमें दैनिक आवश्यकताओं के लिए, उपयोग किये जाने वाले विटामिन-सी का 117% और विटामिन-K का 38% शामिल हैं।

इसमें फोलेट और पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा के साथ ही बहुत से खनिज भी शामिल हैं।

इसके अलावा, कीवी खाने से आपके पाचन तंत्र को लाभ पहुँचता है, सूजन को कम करने में मदद मिलती है और यह कोलेस्ट्रॉल को भी कम कर सकती है।

ये गुण कीवी में फाइबर और कैरोटेनोइड (carotenoid) एंटीऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा के कारण होते हैं। कीवी में उपस्थित लाभदायक तत्व, मस्तिष्क रसायन सेरोटोनिन को उत्प्रेरित करने का काम करते है। जिसके कारण किवी को, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए, सोने से पहले खाए जाने वाले सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक माना जाता है।

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गहरी नींद के आसान उपाय में करें केले का सेवन – Bananas for Deep Sleep in Hindi

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आम तौर पर ऊर्जा-बढ़ाने वाले भोजन के रूप में केले का सेवन किया जाता है जो मैग्नीशियम से परिपूर्ण होते हैं, जो मांसपेशियों को आराम देते हैं। इसके साथ ही उनमें सेरोटोनिन और मेलाटोनिन भी होते हैं, जो अच्छी नींद को प्रोत्साहित करते हैं।

इसके अतिरिक्त इसमें वे कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते है जो अच्छी नींद को बढ़ावा देते है।

अतः बिस्तर में जाने से पहले केले का सेवन अच्छी नींद के लिए बहुत लाभदायक है।

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रात में अच्छी नींद आने के उपाय खट्टा चेरी जूस – Rat Me Achi neend aane ke Upay Cherry Juice in Hindi

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महत्वपूर्ण पोषक तत्वों जैसे विटामिन ए, विटामिन सी और मैंगनीज से परिपूर्ण चेरी जूस को विभिन्न स्वस्थ लाभदायक के रूप में जाना जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट के अतिरिक्त एंथोसायनिन और फ्लैवोनोल (flavonols) का समृद्ध स्रोत है। एंटीऑक्सिडेंट आपकी कोशिकाओं को हानिकारक सूजन से बचा सकता है। खट्टी चेरी का जूस नींद को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है।

अतः यह अनिद्रा को दूर करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए लाभदायक है। नींद को बढ़ावा देने वाला हार्मोन मेलाटोनिन चेरी के रस में उपस्थित होने के कारण इसे सोते समय खाए जाने वाली सामग्री में शामिल किया जा सकता है।

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अच्छी नींद के लिए घरेलू उपाय है पालक – Spinach For Good Sleep in Hindi


नींद-प्रेरित पोषक तत्वों से भरपूर, पालक अनिद्रा से पीड़ित लोगों का सबसे अच्छा दोस्त है।

पालक ट्रिप्टोफान (tryptophan), का बहुत अच्छा स्रोत है, इसके साथ ही फोलेट, मैग्नीशियम, विटामिन-बी6 और विटामिन-सी का एक उत्कृष्ट स्रोत है। ये सभी कारक सेरोटोनिन को संश्लेषित करने में मदद करते हैं। पालक में ग्लूटामाइन भी होता है, जो अच्छी नींद का प्रमुख कारक है।
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बिस्तर में जाने से पहले केले और बादाम के दूध के साथ कच्ची पालक खाना सबसे अधिक लाभदायक है।

इसके अतिरिक्त आप रात में बिस्तर में जाने से पहले इन खाद्य सामग्री का उपयोग कर सकते है जैसे – अखरोट, शहद इत्यादि।

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सोने से पहले क्या खाने से बचें – Avoid eating before Sleep in Hindi

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रात में सोने से पहले कुछ पदार्थों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अतः नीचे दिए गए कुछ खाद्य पदार्थों को रात के समय खाने से बचें क्योकि ये पदार्थ आपकी नींद में बाधा उत्पन्न कर सकते है।

शराब (Alcohol) – शराब गहरी और अच्छी नींद के लिए बहुत हानिकारक होती है। अतः रात के समय शराब का सेवन सेहत और अच्छी नींद के लिए ना करें।

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पनीर (Cheese) – पनीर में एमिनो एसिड टायरामाइन (tyramine) के उच्च स्तर होते हैं, जो वास्तव में मस्तिष्क को अधिक सतर्क बनाते हैं। जिससे रात के समय सोने में रूकावट आ सकती है।

(और पढ़े – पनीर खाने के फायदे और उसमे पाए जाने वाले पोषक तत्व…)

मसालेदार भोजन (Spicy food) – मिर्च में कैप्सैसिन (capsaicin) होता है जो आपके शरीर को तापमान को नियंत्रित करने में कठिनाई पैदा करता है। जिसके परिणामस्वरूप रात की नींद आरामदायक नहीं होती है।

फैटी भोजन (Fatty food) – फैटी खाद्य पदार्थ का पाचन कठिनाई से होता है और हार्टबर्न (heartburn) पैदा होने की अधिक संभावना होती है, जो नींद को ओर अधिक कठिन बनाता है।
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कॉफी (Coffee) – कॉफी में कैफीन उत्तेजक पाया जाता है जिसका तंत्रिका तंत्र में लंबे समय तक प्रभाव रहता है, और इसे लेने के दस घंटे बाद भी इसके प्रभाव को महसूस किया जा सकता हैं। अतः रात को सोते समय कॉफी का सेवन करना नींद को कमजोर और थकावट पूर्ण बनाती है।

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