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अगर आप भी ऐसा करते हैं तो समझ लीजिए बहुत निकट है आपकी मौत


अगर आप भी ऐसा करते हैं तो समझ लीजिए बहुत निकट है आपकी मौत



जॉब करने वाली जेनरेशन

आजकल की जेनरेशन जॉब करने में ज्यादा रुचि रखती है? यह सवाल उन्हीं लोगों से है जो ऑफिस में काम करते हैं। आप कितनी देर तक अपनी सीट से चिपककर बैठते हैं? ऑफिस प्रेशर से त्रस्त लोग यही कहेंगे कि ऑफिस में बिताए जाने वाले 8-9 घंटों में से वे करीब 7 घंटे वे अपने सीट पर ही बैठे रहते हैं। ऑफिस का काम ही इतना होता है कि सीट से हिलने का टाइम नहीं मिलता।

जल्दी होगी मृत्यु

लेकिन अगर आप वाकई दिन का इतना लंबा वक्त सिर्फ और सिर्फ सीट पर बैठे हुए, कंप्यूटर पर काम करते हुए बिताते हैं तो आप यह बात समझ लीजिए कि आप बहुत ज्यादा समय तक जीवित तो नहीं रहने वाले।


नई स्टडी

हम आपको डरा नहीं रहे, एक नई स्टडी की स्थापनाओं से अवगत करवा रहे हैं जो यह स्पष्ट कहती हैं कि कंप्यूटर के सामने बैठकर लगातार काम करने वाले लोग, जो दिनभर सीट से चिपके रहते हैं, कि उम्र अपेक्षाकृत कम होती है, अर्थात वे धीरे-धीरे अपनी मृत्यु की ओर बढ़ते जाते हैं।

बीमारियों का खतरा

एक इंटरनेशल जरनल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार कुर्सी पर ज्यादा समय तक जमे रहने से विभिन्न बीमारियों से मरने का खतरा करीब 27 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर वे लोग जो लगातार बैठकर टी.वी. देखते रहते हैं उनमें यह खतरा करीब 19 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

फिजिकल एक्टिविटी की कमी

इस स्टडी की मानें तो जितना नुकसान स्मोकिंग द्वारा होता है, उससे कहीं ज्यादा सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानि फिजिकल एक्टिविटी की कमी से होता है।


स्मोकिंग

स्मोकिंग की वजह से हार्ट अटैक और कैंसर का खतरा बढ़ता है लेकिन सेडेंटरी लाइफस्टाइल की वजह से व्यक्ति विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाता है, इसलिए ये ज्यादा खतरनाक कही जा सकती है।

सेडेंटरी लाइफस्टाइल

विशेषज्ञों का कहना है कि सेडेंटरी लाइफस्टाइल अपने आप में ही विभिन्न बीमारियों की जड़ है। सेडेंटरी लाइफस्टाइल का अर्थ है एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठे रहना। ज्यादा देर तक बैठे रहने की वजह से व्यक्ति का शरीर पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है। ना चलना-फिरना, ना एक्सरसाइज, ना योगा, इन सभी की कमी स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध होती है।

शरीर का भार

इतना ही नहीं मनुष्य के स्वास्थ्य और बीमारियों की वजह पर लंबे समय से रिसर्च कर रहे शोधकर्ताओं का भी कहना है कि लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने की वजह से व्यक्ति की कमर और उसके शरीर की मांस-पेशियां सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। सनलाइट ना मिलने से विटामिन डी की कमी हो जाती है और शरीर का भार भी बढ़ने लगता है।


कॉलेस्ट्रॉल में वृद्धि

मेट्रो सिटीज में सेडेंटरी लाइफस्टाइल की वजह से हर उम्र के लोग अलग-अलग बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं, कम उम्र में ही लोग खतरनाक बीमारियों से जूझने लगते हैं। इसकी वजह से बच्चों से लेकर बड़ों तक पर असर देखा जा रहा है।

ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल

आप लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं तो इससे आपका ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसके अलावा हृदय संबंधी भी अन्य बीमारियां आपको अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं।

डायबिटीज का खतरा

सेडेंटरी लाइफस्टाइल की वजह से व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी का खतरा तो बढ़ ही जाता है साथ ही बॉडी में लचीलेपन की भी कमी हो जाती है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बाधित होता है।



मेटाबॉलिज्म

लगातार बैठे रहने की वजह से कमर और मांस पेशियों में दर्द होने लगता है। जितना ज्यादा बैठे रहेंगे यह दर्द भी उतना ही बढ़ता जाएगा। इसके अलावा शरीर को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी मेटाबॉलिज्म एक्टिविटी भी कम हो जाती है। जिसकी वजह से भोजन सही तरीके से पच नहीं पाता और शरीर पर फैट जमने लगता है।

हड्डियों की कमजोरी

मांसपेशियों के अलावा सेडेंटरी लाइफस्टाइल का खामियाजा आपकी हड्डियों को भी भुगतना पड़ता है। आपकी हड्डियां कमजोर होकर भुरभुरी होने लगती हैं।
हेल्थ इज वेल्थ

अगर आपको भी ऑफिस में लगातार बैठे रहना होता है तो बीच-बीच में भले ही पांच मिनट का, लेकिन ब्रेक जरूर लें। उठकर टहलें, अपने शरीर को स्ट्रेच करें। अगर समय है तो दिन में एक घंटा वॉक या एक्सरसाइज अवश्य करें। याद रखिए हेल्थ है तभी वेल्थ है।

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