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पैरों का दर्द


इन तरीकों को अपनाकर दूर किया जा सकता है पैरों का दर्द

हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले पिंडरा या नर्म ऊतकों में विकृति उत्पन्न होने की दशा में पैरों के दर्द का संकट गहरा जाता है। यह समस्या के कारणों की वजह से पैदा जो सकती है। चोट, मोच या खिंचाव के चलते ऐसे दर्द हड्डियों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। मांसपेशियों का फटना या फिर मानसिक स्ट्रोक भी ऐसे दर्द का कारण बन जाता है। पैरों में कई जोड़ होते हैं जो आपस मे एक चेन की तरह मांसपेशियों से जुड़े होते हैं। इनमे ऊँगली के जोड़ से लेकर कूल्हा तक शामिल होता है। पैरों के मुख्य जोड़ घुटने में दर्द गठिया जैसे रोगों के पनपने की माकूल जगह माना जाता है। एक सर्वे के मुताबिक खिलाड़ियों और ज्यादा मेहनती लोगों में यह समस्या बहुतायत से होती है।
एड़ी दर्द की समस्या से 20 साल से 50 साल की उम्र वर्ग वाले ज्यादा प्रभावित होते हैं। यह समस्या खान पान की विकृतियों के अलावा ज्यादा देर एक जगह खड़े होने की वजह से भी हो जाती है। इस लेख के माध्यम से हड्डियों से संबंधित रोगों और उनमें दर्द के निवारण सहित लक्षणों और कारणों के बारे में विस्तार से जान सकते हैं और सटीक उपचार के माध्यम से काफी हद तक इनसे बचा भी जा सकता है।
पैरों में दर्द के मुख्य कारण

चोट लगने से हड्डियों में फ्रैक्चर की दशा में हड्डियों को नुकसान पहुंचाता ही है अपितु ऊतकों की भारी क्षति भी पहुंचती है। इस दौरान हड्डियों के जोड़ को प्लास्टर से जोड़ा भी जाता है और कई बार ऑपरेशन के माध्यम से भी उपचार किया जाता है। इस दौरान कई बार हड्डियों के जोड़ के बीच मांसपेशियों में दूरी उत्पन्न हो जाती है या फिर घर्षण होने की स्थिति में दर्द बढ़ जाता है। ज्यादा देर एक जगह खड़े होकर काम करने वाले लोगों की एड़ी में दर्दमांसपेशियों में दबाव और हड्डियों में रक्तसंचार का अवरुद्ध होना भी माना जाता है। एथलीटों को तलवे में दर्द की समस्या से दो चार होना पड़ता है क्योंकि दौड़ते समय मांसपेशियों में जकड़न और एड़ियों में ऊतकों का आमतौर पर नष्ट होना स्वाभाविक होता है।

महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम की कमी का शिकार होने पर पैरों के दर्द का शिकार बन जाती हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव और जीवनशैली में लगातार परिवर्तन भी ऐसे दर्द का कारण बनता है। मोटापा पैरों का दुश्मन होता है। इसके चलते पैरों की हड्डियां वजन बर्दाश्त नही कर पाती और उनमें घर्षण होने लगता है।
पैरों में दर्द के प्रमुख लक्षण

पैरों के उंगलियों में जकड़न ओर सुन्नता के साथ दर्द का आभास होना। घुटनों में गांठों का बनना और उनमें तेज या हल्का दर्द की अनुभूति होना। एड़ियों में दर्द होने पर सूजन के साथ ही तलवे को जमीन पर रखते ही दर्द का अनुभव, पैरों को हिलाने डुलाने या चलने की दशा में दर्द का आभास जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में इस तरह के दर्द सामान्य होते हैं जो हल्की मालिश के बाद कुछ समय मे समाप्त हो जाते हैं लेकिन असामान्य जैसे गठिया या अर्थराइटिस जैसे रोगों में मरीज को कई बार तेज दर्द और बुखार में लक्षण भी प्रकट होते हैं।
मौसम का बदलाव लाता है पैरों का दर्द

बदलता मौसम खासकर सर्दियां पैर का दर्द साथ लाती हैं। इस मौसम में शरीर से पसीना कम निकलता है जिसके चलते हड्डियों में कठोरता उत्पन्न होती है। मांसपेशियों में संकुचन होने से पुरानी चोट का उभरना जैसी समस्या हो जाती है। गठिया जैसे रोग जो पैरों में ज्यादा प्रभाव डालते हैं इस मौसम में ज्यादा फलते फूलते हैं। इसके अलावा बरसात या गर्मियों के मौसम में तेज हवा के दबाव के दौरान शरीर की मांसपेशियों में जकड़न की वजह से भी दर्द हो सकता है।
पुरुषों में पैर का दर्द
एक हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत जैसे देश में 30 से 50 साल की उम्र वर्ग वाले पुरुष एड़ी के दर्द की समस्या का सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह मानसिक तनाव और खान पान में समझौता करने से होता है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने से भी इस तरह के दर्द बढ़ जाते हैं। मोटापा या वजन का सामान्य से अधिक बढ़ जाने से हड्डियों में मौजूद फ्लूड दबाव के चलते सूखने लगता है जो दर्द का बड़ा कारण भी बनता है। अनुवांशिक रोग भी दर्द का मुख्य कारण माना जा सकता है।
महिलाओं में पैरों का दर्द

महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा पैर में दर्द की समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं। बढ़ती उम्र की महिलाएं गठिया जैसे रोगों के चलते इस समस्या का शिकार हो जाती हैं। खान पान की विकृतियों के चलते यूरिक एसिड की मात्रा का शरीर मे असामान्य होने के चलते भी तलवे के दर्द की समस्या हो जाती है। इस तरह की समस्या से 20 साल से 45 साल की महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। इस दौरान गर्भधारण जैसी परिस्थितियों के चलते शरीर मे ओमेगा 3 और कैल्शियम की मात्रा का ज्यादा जरूरत होती है। किन्हीं कारणों से कैल्शियम की कमी दर्द का कारण बन जाता है। काम काजी स्त्रियों में ज्यादा देर तक एक जगह खड़े होकर काम करने वाली महिलाएं इस तरह के रोग से प्रभावित होती हैं तो मोटापा, मधुमेह और अनुवांशिक कारणों से भी इस तरह के दर्द का दंश झेलना पड़ता है।
पैर में दर्द होने से पहले रोकथाम

पैर में दर्द हो ही नही इसके पहले कुछ उपाय वास्तव में काफी राहत पहुंचा सकते हैं। स्त्रियों को हमेशा इस बात का ध्यान देना चाहिए कि गर्भधारण या डिलीवरी के बाद शरीर मे कैल्शियम की मात्रा को सामान्य रखें। इस दौरान चिकित्सक की सलाह पर दवाओं का सेवन करते रहें। पुरुषों को धूम्रपान ओर अल्कोहल का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। इसकके अलावा यदि आप ज्यादा देर तक खड़े होकर काम करते हैं तो हर आधे घंटे बाद थोड़ी देर के लिए पैरों को आराम दें। तनाव एक ऐसी दशा है जो हड्डियों को विकृत तो करता ही है अपितु शरीर मे कई अन्य तरह के आंतरिक रोगों का कारण बन जाता है। इस वजह से हार्मोनल स्थिति में तेजी से असंतुलन होने से एड़ियोंमें दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। तनाव, खान पान में सुधार के साथ कुछ योग और व्यायाम सहित जीवनशैली में सुधार करने से काफी हद तक इस तरह की समस्या से बचा जा सकता है।
पैर में दर्द हो जाने पर समाधान

पैर में दर्द जिस भी वजह से हो जाये उसका उपचार बेहद आवश्यक होता है। जब भी इस तरह के लक्षण प्रकट हों तुरंत डॉक्टर की सलाह के साथ उपचार आरम्भ कर दें। इस तरह के दर्द से बचने के लिए दुनिया की बहु प्रचलित उपचार माध्यमों एलोपैथ, यूनानी, आयुर्वेद सहित होम्योपैथ से इलाज किया जाता है।
यूनानी से पैरों के दर्द का उपचार

पैर दर्द के उपचार के लिए यूनानी दवाओं का सेवन काफी असरदार होता है। पैरों के तलवे में दर्द के दौरान हर्बल द्वारा तैयार दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। गठिया जैसे रोग पैरों के घुटने और एड़ियों का दर्द बढ़ा देते हैं। इन सबके स्थाई इलाज के लिए यूनानी विधा की दवाएं दुनिया की अचूक पद्धति मानी जाती है। कच्चे हर्बल से तैयार यूनानी दवाएं रोग को जड़ से समाप्त तो करती ही हैं अपितु इनका किसी भी तरह का साइड इफेक्ट भी नही होता।
आयुर्वेद से पैर के दर्द का उपचार

पैरों में सूजन का इलाज के लिए जड़ी बूटियों द्वारा तैयार आयुर्वेदिक दवाओं का व्यापक असर होते हुए देखा गया है। इस तरह के दर्द में अशोक की छाल और दशमूल से तैयार की आयुर्वेदिक संहिताओं के मार्गदर्शन से तैयार दवाएं राहत पहुंचाने का काम करती हैं। वैद की सलाह पर दवाओं का सेवन और परहेज वास्तव में असरदार तो होता ही है बल्कि इस विधा के साथ कई बार एलोपैथी का भी व्यापक इस्तेमाल किया जाता है।
एलोपैथी से पैर दर्द का समाधान
पैर दर्द की दवा के रूप में एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल व्यापक रूप से दुनिया भर में किया जाता है। सामान्य स्थिति के दर्द में पेन किलर दवाएं दर्द दूर कर देती हैं तो गठिया या तलवों में सूजन के उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाएं भी असर डालती हैं। मरीज को आराम ना होने पर आखिरी विकल्प के रूप में पैरों के उस जोड़ का ऑपरेशन कर ऊतकों के निर्माण का तरीका अपनाया जाता है जी कष्टकारी तो होता है लेकिन काफी लंबे समय तक असरदार होता है। हालांकि यह दवाएं तुरन्त राहत तो पहुंचाती हैं लेकिन इनके साइड इफेक्ट शरीर को नुकसान भी पहुंचाते हैं।
होम्योपैथी से पैरों के दर्द का इलाज

पैर के दर्द का इलाज करने में जर्मन तकनीक से विकसित होम्योपैथ काफी असरदार साबित होती है। यह ऐसी चिकित्सा व्यवस्था है जो पहले दर्द के लक्षणों को उत्पन्न करती है जिसके आधार पर चिकित्सक दवाओं का चयन करता है। रोग के आधार पर मरीज को दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। हालांकि यह उपचार विधा लंबे समय तक चलने वाली होती है और इसमें कई तरह के परहेज भी बताए जाते हैं। परहेज ना करने पर यह दवाइयां बेअसर साबित होती हैं। इस पद्धति में तुरंत राहत देने वाली दवाएं मौजूद नही होती हैं लेकिन लंबे उपचार के बाद राहत जरूर मिलती है।
पैर में दर्द हो जाने पर क्या करें/ क्या ना करें

एड़ी में दर्द का उपचार करते हुए दवाओं के साथ कुछ बातों पर गौर करने की जरूरत होती है। दर्द के दौरान ज्यादा देर तक शारीरिक श्रम करने से बचें। यदि भारी मशीन या फिर सिलाई का काम करते हैं तो उससे परहेज रखें। समय पर खान पान की आदत डालें। समय से नींद पूरी करने के साथ तनाव मुक्त रहें। भोजन में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ाएं। प्रोटीन युक्त भोजन डॉक्टर की सलाह पर करें और खट्टे पदार्थों का चुनाव कम से कम मात्रा में करें। दैनिक जीवन मे पानी की मात्रा का सेवन बढ़ाएं इस वजह से शरीर से यूरिया का विकसित और विकृत रूप बाहर निकल जाता है।

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