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Gestational diabetes से मां और शिशु को हो सकते हैं ये 6 नुकसान

Gestational diabetes
से मां और शिशु को हो सकते हैं ये 6 नुकसान
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प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज को गैस्टेशलन डायबिटीज कहा जाता है। यह डायबिटीज गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में बाधा डालती है। दरअसल ये गर्भ में पल रहे शिशु के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद खतरनाक है। पंचकुला स्थित पारस बिलास हॉस्पिटल में कंसल्टेंट पीजीआई डॉक्टर शिल्वा आपको बता रहे हैं कि गैस्टेशलन डायबीटिज से मां और शिशु को किस तरह नुकसान हो सकता है।



भ्रूण का विकास प्रभावित हो सकता है- इसका इलाज नहीं कराने से फेटल मैक्रोसोमिया (fetal macrosomia) का खतरा होता है, जिसका मतलब है कि जन्म के समय बच्चे का वजन आठ पाउंड से अधिक और बच्चा सामान्य से बड़ा हो सकता है। गैस्टेशलन डायबिटीज भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को भी प्रभावित करता है।




मोटापा और डायबिटीज- डॉक्टर के अनुसार गैस्टेशलन डायबिटीज से पीड़ित मां से जन्मे बच्चे को मोटापे और डायबिटीज का खतरा अधिक होता है।



पेट का मोटापा बढ़ना- गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना आम बात है जिसे एक्सरसाइज़ से कम किया जा सकता है। हालांकि गैस्टेशलन डायबिटीज महिला के पेट का मोटापा बढ़ने के अधिक चांस होते हैं।


टाइप 2 डायबिटीज- गैस्टेशलन डायबिटीज से पीड़ित महिला को टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित होने के भी अधिक चांस होते हैं।



हृदय रोग- गैस्टेशलन डायबिटीज से सीरम लिपिड लेवल प्रभावित होता है और यह हाइपरटेंशन का कारण बन सकता है जिससे आपको विभिन्न हृदय रोगों का खतरा हो सकता है।

दूसरी गर्भावस्था में भी है इसका खतरा- अगर कोई महिला अपनी पहली गर्भावस्था के दौरान गैस्टेशलन डायबिटीज से पीड़ित होती है, तो अगली गर्भावस्था में भी उसके इस समस्या से पीड़ित होने के अधिक चांस हो सकते हैं।



तनाव और डायबिटीज से राहत पाना चाहते है तो ऑफिस में ही करें ये 5 योगासन
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कई शोधों में इस बात की पुष्टि हुई है कि जो लोग ऑफिस में घंटों एक ही जगह पर बैठे रहते हैं उनमें मोटापे या डायबिटीज के शिकार होने की संभावना काफी ज्यादा रहती है। इसलिए ज़रूरी है कि आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव लायें जिससे आप इन समस्याओं से दूर रहें। जाने माने योग एक्सपर्ट शमीन अख्तर अपनी किताब ‘योगा इन दि वर्कप्लेस टू प्रिवेंट डायबिटीज’ में कुछ ऐसे योगासन बता रहे हैं जिन्हें आप ऑफिस में बैठे बैठे कर सकते हैं।



कपालभाति प्राणायाम बैठ कर किया जाने वाला योगासन है, इसे आप कुर्सी पर बैठकर भी कर सकते हैं। सबसे पहले अपनी आंखें बंद करें और हथेलियों को अपनी जाँघों पर रखें। गहरी सांस अंदर लें और और इसे तेजी से नाक द्वारा बाहर निकालें। सांस बाहर छोड़ते समय आवाज आनी चाहिए। धीरे धीरे सांस लेने और छोड़ने की स्पीड बढ़ायें और इसे कई बार दोहरायें। इस योगासन को करने से शरीर के सभी अंगों में ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है।
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प्रणामासन या प्रेयर पोज खड़े होकर किये जाने वाला एक योगासन है। अपने दोनों हथेलियों को नमस्ते वाली मुद्रा में करें और इसे अपने सिर के ऊपर ठीक बीचोबीच में रखें। इस पोजीशन में बने रहते हुए कुछ देर तक सांसे लें। इस आसान को करने से स्ट्रेस में कमी आती है साथ ही डायबिटीज के लक्षणों में भी कमी आती है।




कटिचक्रासन को आप बैठकर या खड़े होकर भी कर सकते हैं। अपने बाएं हाथ को दाहिने घुटने पर रखें और दाहिने हाथ को पीछे पीठ पर रखें। अब सांस अंदर लें और शरीर को दाहिनी तरफ घुमाएं। फिर सांस बाहर छोड़ें और शुरुवाती पोजीशन में आयें और फिर सांस अंदर लेते समय अब बायीं ओर मुड़े। इस पूरी प्रक्रिया को कम से कम 3-5 बार दोहरायें। कई बार पैंक्रियास में संक्रमण के कारण भी डायबिटीज की समस्या हो जाती है वहीँ ये योगासन पैंक्रियास को सुचारू रूप से चलने में मदद करता है।



पृथ्वी मुद्रा करने के लिए आपको पहले ध्यान वाली मुद्रा में बैठना पड़ेगा। सबसे पहले अपनी आंखें बंद कर लें और अपने रिंग फिंगर की टिप को अंगूठे की टिप से छुएं और ध्यान वाली मुद्रा में कम से कम 3-5 सेकेंड तक बैठें। इस योगासन को करने से स्ट्रेस कम होता है और आपका माइंड रिलैक्स होता है।



उत्तानासन करने के लिए सबसे पहले अपने हाथो को सिर के ऊपर ले जाएँ। अब पूरे शरीर को आगे की तरफ ऐसे झुकाएं जिससे आपकी हथेलियां पूरी तरह फर्श को टच करती रहें। इस पोजीशन में थोड़ी देर बने रहते हुए कुछ सांसे लें और फिर वापस शुरुवाती पोजीशन में आ जायें। यह योगासन आपकी एंडोक्राइन ग्लैंड को एक्टिवेट कर देती है साथ ही आपके पैंक्रियास भी ठीक ढंग से काम करने लगते हैं।


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