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जानिए ये माइग्रेन है या नहीं?


इस तरह के सिर दर्द को ना करें इग्नोर, जानिए ये माइग्रेन है या नहीं?

माइग्रेन का इलाज हो सकता है. बार-बार होने वाले भयानक सिर दर्द को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है.
इस तरह के सिर दर्द को ना करें इग्नोर, जानिए ये माइग्रेन है या नहीं?
बार-बार सिर में असहनीय दर्द की शिकायत माइग्रेन (Migraine) के लक्षण हो सकते हैं. इस दर्द में दिमाग के एक हिस्से में कंपन का अनुभव होता है, हालांकि दोनों तरफ भी हो सकता है. यदि ऐसे लक्षण हों तो माइग्रेन का इलाज तत्काल कराना चाहिए. इंटरनेशनल हैडेक सोसायटी के हैडेक मैनेजमेंट एंड इंडिया चैप्टर एवं माइग्रेन विशेषज्ञ डॉ. के. रविशंकर का कहना है कि, "माइग्रेन एक पुराना और शरीर को कुछ हद तक अक्षम कर देने वाला न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिससे भारत में 15 करोड़ लोग प्रभावित हैं. इसकी अक्सर साइनस से जुड़े सिरदर्द, आंखों से जुड़ी समस्या या तनाव के रूप में गलत पहचान की जाती है."

उन्होंने कहा, "माइग्रेन का इलाज हो सकता है. बार-बार होने वाले भयानक सिर दर्द को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है. इस लक्ष्य को प्राप्त करने और माइग्रेन के सफल इलाज के लिए डॉक्टर को दिखाए बिना पेन किलर्स लेने या अपना इलाज खुद करने से बचना चाहिए. कंसल्टिंग डॉक्टर द्वारा सही पहचान करने के बाद विशिष्ट एंटी-माइग्रेन उपचार से इलाज कराना बेहतर होता है."
डॉ. रविशंकर ने कहा, "चाहे आप माइग्रेन का लंबे समय तक चलने वाला इलाज कराने का विकल्प चुनते हैं या जल्द से जल्द माइग्रेन अटैक से छुटकारा पाना चाहते हैं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इसका इलाज कराना बेहद महत्वपूर्ण है. इलाज न होने की स्थिति में माइग्रेन से पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों पर हानिकारक प्रभाव हो सकता है."
डॉ. रविशंकर ने के अनुसार, "माइग्रेन एक जटिल न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो दिमाग के एक हिस्से के ठीक ढंग से काम न करने का नतीजा हो सकता है. ब्रेनस्टेम नामक दिमाग का यह हिस्सा दर्द और संवेदनशील गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में शामिल है. एक अनोखी उत्तेजना दिमाग के इस हिस्से को सक्रिय कर सकती है, जिससे सिरदर्द और संवेदनशील गड़बड़ी की शिकायत होती है. विश्व स्तर पर माइग्रेन को सभी बीमारियों में सातवें सबसे अक्षम बना देने वाले रोग की रैंकिंग दी गई है. यह सभी तरह की न्यूरोलॉजिकल विकारों में दिव्यांगता का प्रमुख कारण है."

उन्होंने कहा, "इस रोग के अन्य सामान्य लक्षणों में प्रकाश, शोर या किसी भी तरह की गंध के प्रति मरीज में संवेदनशीलता बढ़ जाती है. इससे मरीज को उलटी, मिचली और उबकाई आने की भी शिकायत रहती है. इस स्थिति में नियमित शारीरिक गतिविधि, एक जगह से दूसरी जगह जाने या खांसने और छींकने से भी भयानक दर्द उभर सकता है. अगर माइग्रेन के अटैक का इलाज न किया जाए तो इसका असर चार से लेकर 72 घंटों तक रहता है."


डॉ. रविशंकर ने कहा, "माइग्रेन में जीन्स काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यह अक्सर हार्मोन्स में बदलाव से संबंधित है. कुछ महिलाएं मासिक धर्म की अवधि के दौरान 'मेंस्ट्रअल माइग्रेन' की शिकायत कर सकती हैं. कुछ महिलाओं में यह दर्द गर्भावस्था के दौरान गायब हो सकता है, जबकि कुछ महिलाओं को गर्भ धारण करने पर पहली बार माइग्रेन की शिकायत होती है. माइग्रेन से होने वाले सिरदर्द के निश्चित और सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन इस पर आम सहमति बन चुकी है कि दिमाग के रक्तप्रवाह में होने वाला बदलाव किसी मरीज के माइग्रेन रोग से ग्रस्त होने का प्रमुख कारण होता है."

उन्होंने बताया, "माइग्रेन के दर्द को उभारने के प्रमुख कारणों में मौसम में अचानक बदलाव, बहुत ज्यादा या बहुत कम सोना, तीक्ष्ण गंध, बहुत ज्यादा शोर, चमकदार और आंखों को चकाचौंध कर देने वाली रोशनी, भावनाओं के उफान, तनाव, बेचैनी, डिप्रेशन, थकान, लंबी यात्रा, सफर के दौरान उलटी होने, खाना छोड़ने, ज्यादा धूम्रपान करने, सिर में चोट लगने, धूप में ज्यादा देर तक रहने और बहुत ज्यादा शराब पीने के बाद होने वाला हैंगओवर शामिल है."
उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में करीब हर सात में एक व्यक्ति माइग्रेन से पीड़ित है. अकेले भारत में ही यह आंकड़ा 15 करोड़ से अधिक है. एक अनुमान के मुताबिक 18 से 49 साल की 25 फीसदी महिलाएं माइग्रेन से जूझ रही हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन होने की संभावना तीन गुना ज्यादा होती है


माइग्रेन में सिर के इस हिस्से में होता है दर्द, जानिए इस बीमारी का इलाज और बचाव

Migraine एक आनुवांशिक बीमारी है, जो खानपान, वातावरण में बदलाव, बढ़ते तनाव या कभी-कभी बहुत अधिक सोने से भी हो सकता है.

माइग्रेन को नजरअंदाज न करें


माइग्रेन (Migraine) एक प्रकार का सिरदर्द है. माइग्रेन ग्रस्त लोगों को नियमित तौर पर सिरदर्द के दौरे पड़ते हैं. अक्सर यह दर्द कान व आंख के पीछे अथवा कनपटी में होता है. वैसे यह दर्द सिर के किसी भी भाग में हो सकता है. इससे कुछ लोगों के देखने की क्षमता भी कम हो जाती है.
सर गंगाराम अस्पताल के न्यूरो एंड स्पाइन विभाग के निदेशक, डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा का मानना है, "माइग्रेन (Migraine) ने लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को अपना शिकार बना रखा है. हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो इससे ग्रसित न हो. फिर भी माइग्रेन को लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं और न ही इसका उचित उपचार कराते हैं. पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है और बहुत कम ही महिलाएं इसका उपचार कराती हैं. वे इसे एक सामान्य बीमारी समझकर दर्द को कम करने वाली दवाएं खा लेती हैं और बिना उचित इलाज के जीती रहती हैं. वे इसे तब तक अनदेखा करती हैं. जब तक यह किसी गंभीर बीमारी का रूप नहीं ले लेता है." 

उन्होंने कहा, "यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जो खानपान, वातावरण में बदलाव, बढ़ते तनाव या कभी-कभी बहुत अधिक सोने से भी हो सकता है. इसकी शुरुआत बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने पर कभी भी हो सकती है. कभी-कभी उल्टी, जी मिचलाना आदि की शिकायत भी हो सकती है. अगर उपचार न हो तो यह दर्द 4-5 घंटों तक रह सकता है."

छाबड़ा के अनुसार, बायोफीडबैक, योग, एक्यूप्रेशर और नियमित व्यायाम आदि से माइग्रेन (Migraine) के दौरे को घटाने में मदद मिलती है. माइग्रेन से बचने के लिए सिरदर्द उत्पन्न करने वाले कारणों से बचना चाहिए, जैसे ऊंची आवाज में गाने सुनना, तनावग्रस्त रहना आदि. साथ ही दर्दनिवारक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए. संतुलित दिनचर्या का पालन करना चाहिए. समय पर सोना व जगना चाहिए. नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए. बहुत ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहना चाहिए. बहुत तेज व चुभने वाली रोशनी से बचना चाहिए. 

छाबड़ा ने कहा कि इस दर्द का असली कारण है- वासोडिवलेटेशन यानी रक्त कोशिकाओं के फैलने एवं उनके नाड़ी तंतुओं से स्त्रावित रसायन, जो इन रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं. माइग्रेन (Migraine) में सिर के आधे भाग में दर्द होता है. इसलिए माइग्रेन को अधकपाड़ी भी कहते हैं.



माइग्रेन से परेशान हैं? होम्योपैथी दवाइयां आजमाएं

आज के समय में हर व्यक्ति भागदौड़ में लगा है। हमारे पास खुद के लिए समय ही नहीं रहता हैं। न समय पर खाना और न सोना। प्रकृति के विपरीत चलना तो मानो फैशन बन गया हैं। नतीजा, तरह-तरह की बीमारियां। माइग्रेन भी इसी जीवनशैली का परिणाम हैं।


माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है, जिसमें सिर के एक तरफ (दाहिनी या बायीं) दर्द होता है। यह दर्द कुछ घंटे से ले कर कुछ दिन तक रहता है। इसे हिंदी में आधाशीशी या अधकपारी भी कहते हैं। माइग्रेन का कोई समय निश्चित नहीं होता, यह कभी तो जल्दी-जल्दी भी होता है, तो कभी महीनों में होता है। ज्यादा पुराना (Chronic) होने के कारण कुछ लोगो को माइग्रेन का पहले से पता चल जाता हैं। कभी-कभी अधिक दर्द के कारण उल्टी हो जाती हैं, जिससे दर्द में आराम आ जाता है।



माइग्रेन के कुछ प्रमुख कारण- आनुवांशिक कारण, कब्ज या पेट की खराबी, हारमोन्स में परिवर्तन, महिलाओं में पीरियड्स की गड़बड़ी, ब्रेन के केमिकल्स में बदलाव, नींद पूरी न होना, दिनचर्या में बदलाव, तनाव, गर्भ निरोधिक गोलियों की वजह से, गलत खान-पान, वातावरण में बदलाव आने के कारण।


माइग्रेन पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा होता है। यह 14 साल की उम्र से ले कर 40 साल की उम्र के लोगों को अधिक होता है।


माइग्रेन के लक्षण- सिर में एक तरफ (दायी या बायीं) ओर तेज दर्द, दर्द कुछ घंटे से ले कर कुछ दिन तक रहना, उल्टी होना या जी मचलना, तेज रोशनी या आवाज़ सहन ना होना, उल्टी होने पर दर्द कम होना, अंधेरे में अकेले चुपचाप बैठना अच्छा लगना, चिड़चिड़ाहट होना या गुस्सा आना, नींद ना आना, धूप में जाने पर तकलीफ होना, आंखों के ऊपर (आइब्रो पर दर्द) होना, कब्ज या दस्त रहना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या अजीब सी आकृतियां दिखना, बार-बार पेशाब होना।


माईग्रेन के लिए होम्योपैथिक मे बहुत सी दवाएं हैं, जिन्हें कुछ समय तक लेने से माईग्रेन की समस्या हमेशा के लिए ठीक हो जाती हैं। जानकारी हेतु यहां पर कुछ होम्योपैथिक दवाए बताई गई हैं। कृपया खुद उपचार न करें, क्योंकि होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर किया जाता है।


स्पाईजेलिया (Spigelia)

बायीं ओर सिरदर्द होना, बहुत तेज दर्द जो बायीं आंख के ऊपर आईब्रो पर ज्यादा होता है। रोशनी और शोर बर्दाश्त नहीं होता, चक्कर आते रहते हैं।


साईलिसिया(Silicea)

उपवास करने के कारण सिरदर्द होता है, ठंड में ज्यादा तकलीफ होती है, सिर में अत्याधिक पसीना आता है। आखों में तेज दर्द होता है, गर्दन के पिछले भाग में दर्द होता है। कुपोषण के कारण होने वाला सिरदर्द। पीरियड्स के समय ज्यादा तकलीफ होती हैं।


नेट्रम-म्यूर (Nat-Mur)

किसी भी मानसिक परेशानी के कारण होने वाला सिरदर्द, धूप में जाने पर होने वाला सिरदर्द। सूरज उगने से ले कर डूबने तक सिरदर्द होता है। उसके बाद ठीक हो जाता हैं। एनीमिया के कारण होने वाला सिरदर्द, खास कर किशोरावस्था में होने वाला सिरदर्द, दर्द एक निश्चित समय पर होता हैं, जो लेटने या सोने जाने पर कम हो जाता है।


काफिया (Coffea)
अचानक ख़ुशी या किसी दुःख के कारण माइग्रेन होना। शोर या किसी प्रकार की गंध से सिरदर्द बढ़ जाना, सिर में असहनीय दर्द होना। नींद न आना।


ब्रायोनिया (Bryonia)

दायीं तरफ सिरदर्द हो, जो कि हिलने-डुलने पर ज्यादा बढ़ जाए, यहां तक कि आंख खोलने तक में दर्द होता है। मरीज चुपचाप अंधेरे कमरे में लेटे रहना चाहता हैं। चिड़चिड़ापन, जी मिचलाना और चक्कर आना।

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