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गर्दन के दर्द का इलाज


गर्दन के दर्द का इलाज -
गर्दन का दर्द सच में आपको बहुत तकलीफ़ दे सकता है। इससे आपको अकड़न और असहजता महसूस हो सकती है और हो सकता है आपके लिए अपना सर हिलाना बहुत मुश्किल हो जाए। अगर आप भी अपने काम, लम्बे समय तक कंप्यूटर के आगे बैठे रहने और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लगातार गर्दन में दर्द का सामना कर रहे हैं। बहुत से लोग गर्दन के दर्द से परेशान रहते हैं और गर्दन के दर्द का उपचार ढूंढते हैं। तो यह है कुछ एक्सरसाइज और घरेलू उपाय जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।


योगासन करें - अध्ययन में पाया गया है कि सही योगासन करने से आपको गर्दन के दर्द से काफी राहत मिल सकती है। इसी तरह के एक मामले में, इस समस्या से जूझते लोगों ने यह महसूस किया कि लगातार योगासन करने से उनके दर्द में काफी कमी आई है। साथ ही उनके विकार दूर हुए और उनके जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि हुई। योग गर्दन की मांसपेशियों में मजबूती, उसकी गति में बढ़ोतरी और उसके लचीलेपन को बढ़ाता है। यह है कुछ आसान जिनके अभ्यास से गर्दन के दर्द को दूर किया जा सकता है।

ताड़ासन - इससे गर्दन में सूजन, अकड़न और दर्द से राहत मिलती है।

शोल्डर श्रग - यह भी गर्दन के दर्द से निजात दिलाने में मददगार होता है।

भुजंगासन - यह आसान पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे आपको मजबूती और गर्दन के दर्द से राहत मिलती है।


संशोधित उत्तानासन - इस आसन से गर्दन और कंधे के दर्द से राहत मिलती है और आसपास की मांसपेशियों की अकड़न भी दूर होती है।

बलासन - इस आसान से वर्क आउट के दौरान आपकी गर्दन को आराम मिलता है।


2. नैक स्ट्रेचिंग और टिल्ट - अगर आप योग नहीं करना चाहते हैं और आपको इंस्ट्रक्टर की मदद की जरूरत है, तो यह स्ट्रेच आपको गर्दन के दर्द से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। अध्ययन में पाया गया है कि एक्सरसाइज़ करने से कुछ लोगों में 75% दर्द कम हुआ है।

नैक स्ट्रेचिंग - सीधे खड़े रहे हैं और अपनी ठोड़ी को आगे की ओर बढ़ाए ताकि आपको अपने गले पर दबाव महसूस हो सके। पांच सेकंड तक यह करें। अपनी गर्दन इसी तरह आगे और पीछे ले जाएं।


नैक टिल्ट - अपनी गर्दन को आगे पीछे और दाएँ बाएँ घूमाएं। धीरे और सौम्यता से यह पांच सेकंड तक करें।

3. पिलेट्स करें - शारीरिक थैरेपी, स्ट्रेचिंग और टिल्ट की तरह पिलेट्स से लम्बे समय से चले आ रहे गर्दन के दर्द, शरीर के पोस्चर को ठीक होने और गर्दन की गति को बढ़ने में मदद मिलती है। पिलेट्स से गर्दन और पीठ की ऊपरी मांसपेशियां भी मजबूत होती है।

हेड नौड - इस एक्सरसाइज़ से गर्दन की स्थिरता बढ़ती है। पीठ के बल घुटने फैलाकर लेटें और अपनी ठोड़ी को छाती पर लगाएं। धीरे धीरे इसी स्थिति में सर पीछे लगाएं। उसके बाद धीरे से गर्दन मैट पर रखे।

स्वान डाइव - इस एक्सरसाइज़ से आपके गर्दन के पीछे की मांसपेशियां मजबूत होती है। पेट के बल लेटें और हाथ बाहर की ओर निकालें। सांस छोड़ते हुए सर ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए सर नीचे रखें।


4. मालिश करें - माना जाता है कि मालिश से रक्त संचार बढ़ता है, जिससे मोच और दर्द से राहत मिलती है। इससे आपकी मांसपेशियों को राहत मिलती है, जिससे इसकी गतिविधि बढ़ती है। आप मालिश तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अध्ययन में पाया गया है कि मारजोरम, काली मिर्च, लेवेंडर और पिपरमिंट तेल का इस्तेमाल करने से आपका दर्द कम होता है।
सर्कुलर मोशन - अपना अंगूठा रीढ़ की हड्डी और कंधों के हिस्से के बीच रखें।


हल्का दबाव बनाते हुए, अपने अंगूठे को मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी की ओर घुमाएं।

गल्डिंग स्ट्रोक - अपने दोनों अंगूठे रीढ़ की हड्डी और कंधों के बीच रखें। अपने अंगूठे घूमाते हुए गर्दन और पीठ की मांसपेशियों पर हल्का दबाव बनाते हुए इसे घूमाएं।


5. कोल्ड और हॉट पैक लगाएँ - कोल्ड या हॉट पैक किसी भी दर्द से प्रभावित जगह पर लगाने से दर्द से राहत, असहजता से छुटकारा और अकड़न कम होती है।

हॉट पैक - इस उपाय से रक्त संचार बढ़ता है और मांसपेशी में जकड़न से राहत मिलती है। इस उपाय को आजमाने के लिए तौलिए को गर्म पानी में डुबोएं (ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल न करें) और इसे गर्दन पर लगाएँ। अगर आप हिट पैड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसे सीधे गर्दन पर न लगाएँ बल्कि कपड़े में लपेट कर इसे गर्दन पर लगाएं।


कोल्ड पैड - इससे आपको सूजन, जलन और तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है। कोल्ड कम्परेसर बनाने के लिए तौलिए को ठंडे पानी में डालें और उसे पंद्रह मिनट के लिए रेफ्रीजिरेटर में प्लास्टिक बैग में रखे। इसके बदले आप आइस बैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
6. सही तकिए और बिस्तर पर सोएं - जब बात गर्दन की आती है तो आपके तकिए से भी बहुत फर्क पड़ता है। आप 7-8 घंटे सोने में बिताते हैं। इसलिए आपको सही तकिए का इस्तेमाल करना चाहिए। अध्ययन में पाया गया है कि सही तकिए में सोने के बाद लोगों को गर्दन की तकलीफ़ से छुटकारा मिला और वह बेहतर नींद भी ले पाए। कम स्तर और हल्का सख्त तकिया आपकी गर्दन के लिए आदर्श होता है इससे आपकी गर्दन को आवश्यक सहारा और गर्दन पर मोच से राहत मिलती है। इसका मतलब यह होता है कि सोने के दौरान आपकी गर्दन को आपके पूरे शरीर के समान स्तर पर रखना। साथ ही सही तरह का बिस्तर आपकी रीढ़ की हड्डी को ठीक रखता है।


7. एक्यूप्रेशर करें - इससे भी गर्दन के दर्द से राहत मिलती है। जोंग जूं और ट्रिपल एनर्जाइजर 3, अपने हाथ की 4 और 5 उंगली के बीच का हिस्सा दबाएं। जियांग जोंग शू, अपने कंधे और गर्दन के बीच का हिस्सा दबाएं। इनसे दर्द से राहत मिलती है। शेन मे शामिल, अपने पैरों में ऐड़ी और टखने के बीच के हिस्से को दबाएँ।

8. सही पोस्चर में बैठें - अक्सर गलत तरीके से बैठने और पोस्चर से भी गर्दन में दर्द होता है। इसलिए सही तरह से बैठें और गर्दन व पीठ पर अधिक दबाव न बनाए।


9. पानी की कमी न होने दें - आपको गर्दन में दर्द और इसका संबंध विपरीत लग सकता है लेकिन रीढ़ की हड्डी में कार्टिलेज होता है और उसमें 70-80% पानी होता है। इसलिए जब आपके शरीर में पर्याप्त पानी होगा तो कार्टिलेज उचित तरह से कार्य कर पाएगा। इसलिए शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे ज्यादा ज़रुरी है।

ऊपर बताए गए उपाय से आपको राहत मिलेगी। योग और एक्सरसाइज ध्यान और धीरे से करें। अगर दर्द ज्यादा महसूस हो तो यह न करें। और अधिक तकलीफ़ होने पर डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें। 


सर्वायकल या गर्दन का दर्द का उपचार कैसे करें ? 
( Neck Pain in Hindi)




आज के इस भागदौड़ भरे युग में सर्वायकल स्पान्डयलोसिस के मरीजों मे बहुत बड़ा इजाफा देखा गया हैं। पुराने समय में अस्पताल की लाइन में जहाँ एक या दो मरीजही मुश्किल से इस रोग से ग्रस्त पाए जाते थे वहीं अब काफ़ी बडी संख्या में बहुत से मरीजनजर आते है। आयु से भी अब इसका कोई लेना-देना न रहा। 15 वर्ष की आयु से शुरू होकर बढती हुयी उभ्र के लोगों मे यह समस्या सभी में आम रूप से देखी जा सकती है।
लक्षण और कारण
इस रोग के लक्षण में कोई जरूरी नहीं हैं कि सिर्फ़गर्दन(Neck) में पीड़ा होने पर और गर्दन(Neck) के जकड़े होने पर ही आयें। विभिन्न सर्वायकल मरीजों मे अलग -2 तरह के लक्षण देखे जाते हैं:
गर्दन(Neck) की पीड़ा और जकडन, गर्दन(Neck) स्थिर रहना, बहुत कम या न घूमना।
चक्कर आना, कन्धे का पीड़ा , कन्धे की जकडन और बाँह की नस का पीड़ा ।
ऊगलियों और हथेलियों का सुन्नपन

गर्दन(Neck) की पीड़ा के मुख्य कारण:


अगर आपकी दिनचर्या अनियमित और अनियंत्रित हैं तो आप गर्दन की पीड़ा से ग्रस्त हो सकते हैं ।
टेढ़ी मेढ़ी अवस्था में लेटकर सोना, हमेशा उबड़-खाबड़ बिस्तर पर सोना, आरामदेह गद्देदार सोफ़ों पर या कुर्सी पर देर तक बैठे रहना, सोते समय ऊँचा तकिया रखना या लेट कर टी वी देखना ।
यदि आप गलत ढंग से वाहन को चलाते हैं|
बहुत झुक कर बैठना या बैठे-बैठे पढना या लेटकर पढना।
काफी देर तक जमीन पर बैठकर सिलाई, बुनाई, व कशीदा करने वाले लोगों में।
गलत ढंग से और शारीरिक शक्ति से ज्यादा बोझा उठाने से |
कसरत न करना और हमेशा चिंता में रहते हुए जीवन को जीना।
संतुलित भोजन ग्रहण न करना, भोजन मे ‘विटामिन डी’ की कमी का होना, अधिक मात्रा मे चीनी और अधिक मात्रा में मीठाईयाँ खाना।
अगर व्यक्ति को गठिया आदि का रोग हो|
घंटों कम्पयूटर के सामने बैठकर काम करना|


रोग निवारण के लिये प्रचलित उपचार तरीके:

पीठ की पीड़ा के लिये भी यही सावधानियाँ काम आयेगीं। इसलिये निम्म बातों का ध्यान रखें और अपना जीवन सुचारु रुप से जियें:
जब भी आप किसी कुर्सी या सोफ़े पर बैठें तो अपनी पीठ को सीधा रखने का प्रयास करें तथा घुटने नितम्बों से ऊँचे उठाकर रखें।
चलते समय शरीर को सीधी अवस्था मे रखने का प्रयास करें।
जब भी गाडी चलाये अपनी पीठ को सीधी रखें।
कोमल, फ़ोम के बिस्तर पर लेटना छोडकर लकड़ी के बने तख्त का प्रयोग करें ।
घर का काम करते समय पीठ को सीधी रखें।
अगर पीड़ा अधिक हैं तो गर्म पानी मे थोडा सा नमक डाल कर सिकाई करें। यह क्रम दिन मे कम से कम 2-4 बार तक अवश्य करें। दर्द में जल्द आराम देने मे यह बहुत लाभदायक है।


तकिये (pillow) की बनावट

तकिये को लेकर लोगों मे अलग-अलग तरह की ग़लतफ़हमियाँ हैं। सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस से पीडित व्यक्ति या तो तकिया लगाना ही बन्द कर देता है या फ़िर अन्य सहारे का प्रयोग करने लगता है जैसे तौलिये को मोड कर सिर के नीचे रखना। लेकिन यह सब प्रयोग अन्तः उसके लिये नुकसान ही पैदा करते हैं। सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस के हर मरीज मे कौलर और ट्रेक्शन की आवशयकता नही पडती , लेकिन आजकल इसका प्रयोग कई जगह बेवजह भी होता रहता है। लेकिन मरीजके रोग की वजह के अनुसार इसका महत्व भी अधिक है।
सर्दियों के मौसम में सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस के मरीजों की समस्यायें बढनी शुरु हो जाती हैं, बाजार मे मिलने वाले कालर के अपेक्षा आम प्रयोग में होने वाले गर्म मफ़लर को गले मे इस तरह बाधें कि गर्दन(Neck) का घुमाव नीचे की तरफ़ अधिक न हो। देखने मे भी यह अजीब नहीं लगता और गर्दन(Neck) की माँसपेशियों को ठंड से भी पूरी तरह बचाव हो जाता हैं।


एकयूप्रेशर (Acupressure) विधि से


बहुत से डॉक्टर संभवत: एकयूप्रेशर की उपयोगिता से सहमत नहीं हैं, मगर सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस के कई मरीजों मे इस पद्दति से आराम मिला हैं , भले ही यह इस दर्द के कारणों को दूर करने मे सक्षम न हो लेकिन पीड़ा के अधिक बढ़ने पर यह आपको काफ़ी जल्द ही आराम दे देती है।
सर्वायकल स्प्पान्डयलोसिस मे फ़िजयोथिरेपी की भूमिका:
सर्वायकल व्यायाम पीड़ा को बढ़ने से रोकते हैं साथ मे अकडे हुये जोडों और माँसपेशियों को भी सही करते हैं ।
अपने सिर को दाहिनी तरफ़ कन्धे तक झुका ले , थोड़ी देर रूकें और उसके बाद पुन: सीधी कर ले। यही क्रम फिर बायें तरफ़ भी करें।
अपनी ठुड्डी (chin) को छाती की तरफ़ झुकायें, रुकें,तत्पश्चात सिर को पीछे की ओर ले जायें।
अपने सिर को बायें ओर के कान की तरफ़ मोडें, रुकें और तत्पश्चात मध्य मे लायें। यही क्रम बायें तरफ़ भी धीरे-धीरे करें।
इस व्यायाम को करते समय साँस को रोके नहीं। हर व्यायाम को पांच से छ: बार तक करें और इसके बाद शरीर को बिलकुल ढीला छोड दें।
अपने माथे को हथेलियों से दबाये और सिर को अपनी जगह से जरा भी हिलने न दें।
अपनी हथेलियों का दबाब सिर के बायें तरफ़ दे और सिर को हिलने न दें। यही क्रम दायें तरफ़ भी करें।
अपनी दोनों हथेलियों का दबाब सिर के पीछे की ओर दें और सिर को बिलकुल स्थिर रखें।
अपनी हथेलियों का दबाब माथे पर दें और सिर को बिलकुल स्थिर रखें।
फ़िजयोथिरेपी व्यायामों को करते समय यह बात हमेशा ध्यान रहें कि अगर किसी भी समय ऐसा लगे कि पीड़ा अधिक हो रही हैं तो व्यायाम न करें। सर्वायकल व्यायामों को कम से कम दिन मे दो से तीन बार जरूर करें ।
एक समतल फ़र्श पर बिना तकिये के पीठ के बल आराम से लेट जाएँ| फिर अपनी गर्दन(Neck) को जितना संभव हो उतना धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाते जाएँ| यह ध्यान रहे कि पीठ का हिस्सा बिलकुल न उठे| गहरी से गहरी सांस भीतर की ओर खींचें| फिर उतने ही धीरे-धीरे गर्दन(Neck) नीचे की ओर करते जाएँ| सांस धीरे-धीरे छोड़ें और पूरी शक्ति से अंदर फेफड़े की हवा बाहर फेंक दे | यह व्यायाम कम से कम दस से बारह बार, सुबह-शाम करें| इस व्यायाम से आपके गर्दन(Neck) की मांसपेशियों को ताकत मिलती है तथा इसके परिणाम आपको पंद्रह दिन के भीतर मिलने लगेंगे| नियमित व्यायाम से गर्दन(Neck) की पीड़ा से पीछा छुट सकता है.


होम्योपैथी चिकित्सा (Homeopathic Treatment)

जहाँ अन्य चिकित्सा की पद्धतियाँ विशेष कर एलोपैथी चिकित्सा पद्धति सिर्फ़ पीड़ानाशक औषधियों तक ही सीमित हैं वहीं होम्योपैथी रोग के मूलकारण और उससे उत्पन्न होनी वाली समस्यायों को दूर करने मे कारगर है। एक होम्योपैथिक चिकित्सक को सर्वायकल रोगों मे न सिर्फ़ औषधि के चयन बल्कि रोग को करने के तरीको के बारे मे 
भी अच्छी तरह जानना चाहिये।

गर्दन के दर्द से राहत पाने का नेचुरल उपाय
प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है। हमारा रोजाना का काम अधिकांश कंप्यूटर, स्मार्ट फोन और लैपटॉप पर हो रहा है। जाहिर है अधिकतर लोगों का पूरा दिन इन उपकरणों पर ही बीत रहा है।

लेकिन तकनीक अपने साथ कई समस्याएं लेकर आती है। कंप्यूटर या मोबाइल फोन स्क्रीन पर लगातार देखने से आंखें ड्राई हो सकती है रौशनी पर भी असर पद सकता है। दृष्टि के अलावा आपकी गर्दन पर भी असर पड़ता है और इसका परिणाम गर्दन दर्द के रूप में आता है, सर्वाइकल पेन भी कहा जाता है।

हमारी गर्दन बहुत लचीली है, लेकिन इसमें भी तनाव और दर्द हो सकता है। गर्दन से आपके सिर को सपोर्ट मिलता है। शाब्दिक रूप से इसे सात कशेरुकाओं के स्टैक द्वारा सपोर्ट मिलता है। इन हड्डियों के बीच फिब्रोस कार्टिलेज शॉक एब्जोर्बर के रूप में कार्य करता है। गर्दन से गुजरने वाले तंत्रिकाएं बहुत हैं।

मांसपेशियों का अनुबंध करते समय हम गर्दन में दर्द महसूस करते हैं लेकिन आराम नहीं करते। यह गर्दन की असुविधाजनक स्थिति के कारण होता है या यह एक लंबे समय के लिए एक ही स्थिति में बने रहने से होता है। यह असुविधाजनक तकिया पर सोने, या कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन को लंबे समय देखने से भी हो सकता है। सड़क पर यात्रा करते समय अचानक झटके के कारण भी गर्दन का दर्द हो सकता है।

गर्दन का दर्द बहुत असुविधाजनक हो सकता है और इसलिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। दर्द से आराम पाने के लिए कई सारे दर्द बाम और टैबलेट हैं लेकिन प्रकृति तरीके से भी आप इससे आराम पा सकते हैं, जिसमें एक ओलिव ऑयल यानि जैतून का तेल और नमक भी हैं।

ओलिव ऑयल मानव के लिए एक बेहतर उपाय है। यह हमारे शरीर के लिए बहुत स्वास्थ्यप्रद तेल माना जाता है। साथ ही यह हमारे शरीर के अंदर शानदार ढंग से काम करता है, दर्द के क्षेत्रों पर इसे लगाने से दर्द को दूर किया जा सकता है।


एक्स्ट्रा वर्जिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जोकि एस्पिरिन जैसी दवाओं में पाए जाते हैं। यह हमारे शरीर में दर्द पैदा करने वाले रसायनों के उत्पादन को रोक कर काम करता है।

नमक, विशेष रूप से एपसॉन साल्ट नैचुरली रूप से दर्द को कम करता है। नमक में मौजूद मैग्नीशियम सल्फेट शरीर को दर्द से उबरने में मदद करता है। मैग्नीशियम त्वचा में अवशोषित होता है और दर्द को महसूस करने की मस्तिष्क की क्षमता को कम करता है। सल्फेट मांसपेशियों की वसूली को बढ़ावा देने के लिए विषाक्त पदार्थों और प्रोटीन को बाहर निकालता है।

इन दो अद्भुत चीजों का मिश्रण गर्दन के दर्द से राहत पाने का एक पुराना उपाय है। हम आपको बता रहे हैं आप इन घटकों का उपयोग आपकी गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए कैसे कर सकते हैं।

सामग्री:
नमक के 5 बड़े चम्मच
जैतून का तेल के 10 बड़े चम्मच
एक साफ ग्लास जार


तरीका:
एक कांच के जार में सामग्री लें और अच्छी तरह से उन्हें मिक्स कर लें।
ढक्कन को अच्छी तरह बंद करें और इसे कुछ घंटों के लिए एक शांत सूखी जगह में रखें।
कुछ घंटों के बाद, यह रंग में हल्का हो जाएगा।
इस मिश्रण का प्रयोग धीरे-धीरे आपकी गर्दन को 2-3 मिनट के लिए मालिश करने के लिए करें।
इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और दर्द कम हो जाता है। इसके अलावा, मालिश से मांसपेशियों में तनाव को दूर करने में मदद मिलेगी।
मालिश के बाद एक साफ कपड़े से क्षेत्र को साफ करें।
बेहतर परिणाम के लिए हर दिन इस उपाय को दोहराएं।

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