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स्तनपान के दौरान स्तन में सूजन क्यूं होती है


स्तनपान के दौरान स्तन में सूजन क्यूं होती है और क्या है इसका समाधान

सीजेरियन से गुज़रने वाली कई मॉम्स को स्तनपान की प्रक्रिया शुरु करने में कम से कम 2-3 दिन लग सकते हैं । ऐसे में डिलीवरी के तकरीबन 2-3 दिन बाद ब्रेस्ट में जमा दूध गांठ बना देता है , कई जगह इसे दूध उतरना या दूध आना भी कहते हैं जिसमें बुखार की समस्या हो जाती है ।


नवज़ात शिशु को स्तनपान कराने के दौरान कई मांओं को एक बेहद ही दर्द भरे एहसास से गुजरना पड़ता है और वो है स्तन में गांठ पड़ना या सूजन होना । अधिकांश परिस्थिति में ऐसा देखा जाता है कि जब शिशु पूरी मात्रा में दूध नहीं पी पा रहा हो तो स्तन में गांठ जैसा बन जाता है ।

स्तन का इसप्रकार कड़ा हो जाना बड़ा ही कष्टदायी होता है। इसमें हाई फीवर के साथ-साथ फ्लू जैसा अनुभव होता है । इसे ही मैस्टीटिस यानि स्तन के सूजन के कारण होने वाला बुखार कहा जाता है ।

ये जरुरी नहीं कि ये समस्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ही आए । जब आप स्तनपान की प्रक्रिया पूरी तरह से बंद करेंगी तब भी ऐसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं । स्नपान कराने वाली कई माओं को एक ही स्तन में दर्द का अनुभव होता है इसका कारण ये है कि दोनों स्तन से बराबर मात्रा में दूध नहीं निकाला जा रहा ।

ऐसे में शिशु को स्तनपान कराने के दौरान आप ये ध्यान रखें कि दोनों ब्रेस्ट से वो बराबर फीड ले पाए । अगर आवश्यकता से अधिक मिल्क फार्म हो रहा हो तो आप पंप की सहायता से उसे निकाल सकती हैं जिसके बाद गांठ अपने आप ही गायब हो जाएगा । 

सीजेरियन से गुज़रने वाली कई मॉम्स को स्तनपान की प्रक्रिया शुरु करने में कम से कम 2-3 दिन लग सकते हैं । ऐसे में डिलीवरी के तकरीबन 2-3 दिन बाद ब्रेस्ट में जमा दूध गांठ बना देता है , कई जगह इसे दूध उतरना या दूध आना भी कहते हैं जिसमें बुखार की समस्या हो जाती है ।


ध्यान देने योग्य बातें...
शिशु को फीड कराते वक्त उसके पोजिशन का ध्यान रखें - नवज़ात शिशु को ठीक तरह पकड़ कर स्तनपान करवाएं जिससे वो आसानी से निप्पल तक पहुंच सके ।

अधिक तेजी से दूध के बहने से शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है - स्तन के सभी छिद्रों से जब दूध बहने लगता है तब शिशु के लिए जल्दी-जल्दी चूसना थकान भरा अनुभव हो सकता है ।

बेबी को फीड कराने से पहले पंप का इस्तेमाल कर आप सूजन थोड़ा कम कर सकती हैं जिससे शिशु आसानी से दूध पी सकेगा ।
ब्रेस्ट में सूजन हो तो क्या करें
सोर ब्रेस्ट की समस्या हो तो गर्म पानी से स्नान करें
हल्के गर्म पानी में तौलिया भिगो कर ब्रेस्ट पर रखें
स्तन को हर 2 घंटे में पूरी तरह खाली करें
अधिक मात्रा में पेय पदार्थ लें
पूरी तरह से आराम करें
बुखार के लिए ऐंटीबॉयोटिक ले सकती हैं
इस अवस्था में बेहतर हाईजीन पर ध्यान दें
अच्छी नर्सिंग ब्रा पहनें अधिक टाईट ब्रा बिल्कुल नहीं 

मांएं..जान लें स्तन में दर्द के 10 कारण


स्तन में दर्द होने पर माओं को हमेशा चिंता करने की जरुरत नहीं है। ये असहज होता है लेकिन ज्यादातर स्थिति में ये नुकसान नहीं पहुंचाता है। 

कई वजहों से माओं को स्तन में दर्द हो सकता है। हालांकि कई माओं को चिंता हो सकती है कि ये कुछ गलत है लेकिन असल में स्तन दर्द के कई कारण हो सकते हैं।
1. पीरियड्स

पीरियड्स के आसपास स्तन में दर्द देना बहुत कॉमन है और ऐसा एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के बढ़ने के कारण होता है। ये दर्द बहुत तेज नहीं बल्कि हल्का-हल्का होता है। ये दर्द एक सप्ताह से लेकर 10 दिन तक भी रह सकता है और इसके लिए महिलाओं को दवा की जरुरत नहीं पड़ती है। या हो सकता है कि कुछ महिलाएं को काफी दर्द हो और असहज महसूस करें और उन्हें दवा की जरुरत पड़े।
2. प्रेग्नेंसी
पीरियड्स की तरह ही प्रेग्नेंसी में भी आपके शरीर के हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। पहली तिमाही में शरीर हार्मोन प्रोड्यूस करता है और आपके शरीर को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करता है। इन बदलाव की वजह से ब्रेस्ट का साइज बढ़ जाता है, Milk Ducts का होना, संवेदनशील निप्पल जैसा बदलाव महसूस करेंगे और ये दूसरी या तीसरी तिमाही में खत्म हो जाता है। 
3. स्तनपान

ब्रेस्टफीड के कारण भी आपको ब्रेस्ट में दर्द हो सकता है, खासकर कई महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग को काफी दर्द भरा और असहज पाती हैं। ये कई कारणों से हो सकता है जिसमें बच्चे का अच्छे से दूध को नहीं पी पाना भी एक कारण हो सकता है। 

कभी कभी ब्रेस्ट में दर्द ड्राइ निप्पल की वजह से भी होते हैं और कुछ केस में Milk Ducts में सूजन होने के कारण भी।
4. कुछ खास तरह का इलाज या दवाई का लेना

बहुत बार इलाज की वजह से भी स्तन में दर्द होता है।खासकर जब महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं या हार्मोन थैरेपी या इनफर्टिलिटी का इलाज करवाती हैं तो इन सब की वजह से शरीर में हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। अगर इलाज की वजह से आपके स्तन में अधिक दर्द है तो आप अपने डॉक्टर से इलाज के किसी और विकल्प के बारे में बात करें जिससे ब्रेस्ट में अधिक दर्द ना हो। 
5. सिस्ट का होना

सिस्ट सुनकर डरावने जरुर लगते हैं लेकिन ये 35 साल से अधिक उम्र की मम्मियों में काफी कॉमन है। सिस्ट असल में ब्रेस्ट में ब्लॉक ग्लैंड की वजह से होते हैं जिसकी वजह से बाद में द्रव्य जमा हो जाता है। 

ज्यादातर सिस्ट हानिकारक नहीं होते हैं लेकिन कभी-कभी इनकी वजह से काफी दर्द हो सकता है। अगर आपके ब्रेस्ट में भी सिस्ट है तो बेहतर होगा कि डॉक्टर से मिलें और इलाज करवाएं।
6. खुजली/चर्म रोग
दाद एक तरह से चिकन पॉक्स वायरस की ही तरह है जो आमतौर पर जीवन में बाद में होता है। अगर आपको पहले चिकन पॉक्स हुआ है तो हो सकता है आगे जाकर आपको दाद हो। दाद कभी-कभी काफी दर्दनाक भी होते हैं खासकर अगर आपको ब्रेस्ट पर रैश होते हैं तो इससे काफी खुजली हो सकती है और आपके फोड़े-फुंसियों भी फट सकते हैं। इसकी वजह से आपको बुखार, सिर दर्द हो सकता है। फिलहाल दाद का कोई इलाज नहीं है लेकिन इसका टीका है। दाद 2-6 सप्ताह में खत्म हो जाता है। 
7. मसल्स में खिंचाव

अगर आप नियमित रुप से व्यायाम करती हैं तो इस बात की संभावना है कि आपके ब्रेस्ट में पेक्टोरल मसल्स के खिंचाव की वजह से दर्द हो।आपके पेक्टोरल मसल्स छाती में होते हैं और ये कभी-कभी बहुत दर्द करते हैं। ज्यादातर हिस्से में दर्द निवारक और आराम से आपको राहत मिल सकती है। 
8. साइज में बड़ा है आपका ब्रेस्ट

अगर आपका ब्रेस्ट बड़ा है तो ये भी काफी दर्दनाक हो सकता है। अधिक बड़े ब्रेस्ट के होने के कारण ब्रेस्ट लिगामेंट और टिशू में खिंचाव आ सकता है । इसकी वजह से आपके कंधे और गर्दन में भी दर्द हो सकता है। 

सपोर्टिव ब्रा पहनने से आपको इसमें काफी मदद मिल सकती है और इसके लिए सर्जरी भी उपलब्ध है जिससे ब्रेस्ट का साइज कम हो सकता है। 
9. आप गलत ब्रा पहन रही हैं
क्या आपको पता है कि आप इतने दिनों से गलत ब्रा पहन रही थीं? गलत ब्रा पहनने से भी महिलाओं को स्तन में दर्द की समस्या हो सकती है। हालांकि कभी-कभी अगर आपने सही साइज की ब्रा भी गलत तरीके से पहना है तो आपको दर्द हो सकता है। 

आप सुनिश्चित कर लें कि आप सही साइज की ब्रा पहनती हैं, इसके लिए इन बातों को फॉलो करें: 
अपनी ब्रा को सबसे नजदीक हुक में लगाए
अपने ब्रेस्ट को अच्छे से कप में एडजस्ट करें। 
हर महीने ब्रा की स्ट्रीप्स टाइट करे।
10. मेनोपाउज के समय

अधिक उम्र की माओं को ब्रेस्ट में दर्द मेनोपाउज की वजह से भी हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि duct eustasia या Milk Ducts मेनोपाउज के समय अधिक विस्तारित हो जाते हैं। इससे ब्रेस्ट में तरल पदार्थ का निर्माण हो सकता है और इस वजह से निप्पल के आसपास बहुत अधिक दर्द होता है। हालांकि दर्द धीरे धीरे खुद ही चला जाता है।

स्तनपान के दौरान ब्रैस्ट कम्प्रेशन के होते हैं ये फायदे, इसे करने का सही तरीका



स्तनपान के दौरान स्तन को दबाना और निचोड़ना ब्रेस्ट कंप्रेशन 'या' स्तन संपीड़न कहा जाता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कंप्रेशन से कई फायदे मिलते हैं, जो उनके शिशु और उनके ब्रैस्ट से जुड़े होते हैं। इसका सबसे अच्छा फायदा स्तनों के स्त्राव को रोकना और दूध के बहाव को तेज करना है। जिससे शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल पाता है, और स्तनों का स्त्राव भी बंद हो जाता है। आइए जानते हैं बेस्ट कंप्रेशन से जुड़े कई अन्य फायदे और इसका सही तरीके से इस्तेमाल कैसे किया जाता है।

स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया में मददगार

ब्रेस्ट कंप्रेशन से आपके स्तन में रुके हुआ दूध का बहाव काफी तेज हो जाता है, और आपका शिशु इसे पूरा निचोड़ लेता है। जिससे आपके स्तन दूध से खाली हो चुके होते हैं और दोबारा से दूध का निर्माण सही ढंग से और स्वस्थ तरीके से होना शुरू हो जाता है।

अगर स्तनों से दूध पूरी तरह से नहीं निकल पाता है, तो स्तनों में दूध जम जाता है, फिर महिलाओं के स्तन से दूध का स्त्राव होने लगता है। इसलिए, ब्रैस्ट कंप्रेशन से यह बहुत बड़ा फायदा मिलता है।

स्तनपान को बनाता है आसान

ब्रेस्ट कंप्रेशन यानी स्तन संपीड़न से स्तनपान आसान बनाया जा सकता है। इससे शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल जाता है और शिशु का पेट पूरी तरह से भर जाता है। जब शिशु दूध निचोड़ रहा होता है और एक वक्त ऐसा आता है कि दूध निकलना बंद हो जाता है तो, शिशु दूध पीना बंद कर देता है। अगर आप उस वक्त ब्रेस्ट कंप्रेशन का इस्तेमाल करते हैं तो दूध का बहाव तेज हो जाता है और सही तरीके से हो जाता है। जिससे शिशु दूध तब तक निचोड़ता है जब तक आपका दूध खत्म नहीं हो जाता है। आप अपने स्तनों पर तब तक दबाव बनाए रहे जब तक आपका शिशु पूरी तरह से दूध पीना बंद ना कर दे।

नहीं ब्लॉक होने देता दूध की नालिका और दूध का प्रवाह तेज करता है
कई लोगों की यह गलत धारणा है कि ब्रेस्ट कंप्रेशन से दूध की नली अवरुद्ध हो जाती हैं जिससे स्तन से दूध निकलना बंद हो जाता है। जबकि ऐसा नहीं होता है। स्तन संपीड़न से दूध का प्रवाह करने वाली नली का मार्ग अच्छी तरह से खुल जाता है। जिससे दूध का बहाव तेज होता है और शिशु को आसानी से पर्याप्त मात्रा में दूध मिल जाता है।

स्तन का दर्द कम करता है

स्तन में दूध का जमाव होने से स्तन भारी होने लगते हैं और इससे काफी दर्द होता है। ब्रेस्ट कंप्रेशन की मदद से दूध पूरी तरह से बाहर निकल आता है और स्तनों का दर्द कम हो जाता है।

नई माँ दे ध्यान
ब्रेस्ट कंप्रेशन के दौरान नई माओं को अपने स्तनों पर दबाव हल्का-हल्का बनाना चाहिए, और धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को तेज करनी चाहिए।
इन बातों का जरूर दे ध्यान

स्तन संपीड़न चाहे आप हाथों से करें या फिर पंप से। दोनों ही इंस्ट्रुमेंट्स साफ-सुथरे होनी चाहिए।

इस दौरान तनाव मुक्त रहें। दरअसल, स्तनपान कराते दौरान ऑक्सीटॉसिन नामक एक हार्मोन निकलता है जिससे दूध बनता है। लेकिन, तनावपूर्ण होने के चलते इस हार्मोन का स्त्राव रुक जाता है और फिर दूध नहीं बनता।



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