Header Ads

कपालभाती प्राणायाम


कपालभाती प्राणायाम सम्पूर्ण जानकारी (लाभ, तरीका, सावधानी)
परिचय / introduction
कपालभाती एक संस्कृत भाषा का शब्द है कपाल का अर्थ है माथा और भाती का अर्थ है लाइट/चमक।
कपालभाती करने से हमे काफी लाभ होते है 
तो आइए जानते है की कपालभाती कैसे की जाती है और इसके क्या लाभ है और क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

कपालभती प्राणायाम
कपालभाती कैसे करे/ How to do kapal bhati pranayam
1:- सबसे पहले जमीन पर कोई आसन ले कर पदमासन/बज्रासन में बैठ जाये।
2:- ध्यान रहे कि आपकी रीढ की हड्डी सीधी हो।
3:- अपने पेट को ढीला छोड़ दे।
4:- अब अपने नाक से सांस बाहर निकले ध्यान रहे कि जब आप सांस बाहर निकले तो आपका पेट अंदर जाना चाहिए।
5:- बार बार सांस अंदर लेते रहे । आपको सिर्फ सांस अंदर लेना है बाहर नही निकलना है।
6:- यह प्रकिया लगातार करते रहे।
7:- शुरू में यह 5 मिनट तक करे और धीरे धीरे समय बढ़ा दे।
8:- आप चाहे तो आप बीच में आराम भी कर सकते है और आराम के बाद वापस शुरू कर सकते हैं।
कपालभाती के लाभ / benefits
1:- वजन कम करने में सहायक
2:- पेट की अतिरिक्त चर्बी को हटाता है और कमर को सही shape में लाने में सहायक है।
3:- कब्ज, अपच,गैस कज समस्या को दूर करता है।
4:- चेहरे पर आई झुर्रियों को हातात है और आंखों के नीचे के काले घेरों को हटाता है।
5:- चेहरे पर चमक आती है।
6:- आंखों की बीमारियां (जैसे कम दिखना) में लाभदायक है।
7:- शरीर मे फुर्ती लाता है।
8:- दिमाग को शांत रखता है ।
9:- नकारात्मक विचार नही आते।
10:- bp की समस्या में लाभदायक है।


सावधानियां/ precautions
1:- गर्भवती महिलाओं को नही करना चाहिये।
2:- वैसे तो कपालभाती के कोई नुकसान नही है पर अगर आपको कोई समस्या हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करे।
3:- कपालभती हमेशा खाली पेट ही करे
जैसे सुबह उठने के बाद ओर शाम को उस समय करे जब आपको खाना खाएं 4-5 घन्टे हो गए हो।
4:- अगर आपको कोई बीमारी है तो अपने डॉक्टर से पुछकर ही करे।




कपालभाती प्राणायाम की विधि, सावधानियां और लाभ
अगर आप जीवन भर स्वस्थ और निरोगी रहना चाहते हैं तो आपको कपालभाती प्राणायाम ‌_ Kapalbhati Pranayam करना चाहिए। यह मोटापा कम करने का बहुत सस्ता इलाज है। जिससे आप Weight Loss करके सुखी जीवन की संकल्पना को सच कर सकते हैं। वज़न घटाने के लिए संतुलित आहार के साथ योग और प्राणायाम करके आसानी बढ़ते वज़न को कंट्रोल किया जा सकता है।
आधुनिकता की दौड़ में फ़ूड भी फ़ास्ट फ़ूड बन गया है। जिस वजह से Obesity या मोटापा आज एक गंभीर समस्या बन गई है। मोटापा सिर्फ़ दिखावटी नहीं होता है, यह कई बीमारियों का घर बन जाता है। बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए तरह तरह के इलाज करते हैं और हज़ारों लाखों रुपये खर्च करते हैं। कुछ लोग तो मोटापा कम करने वाली हानिकारक दवाओं का प्रयोग करके अपने लीवर को भी ख़राब कर लेते हैं।

मोटापा कम करने और वज़न घटाने के लिए कपालभाती प्राणायाम का प्रयोग किया जाता है। इससे बड़ी आसानी से वज़न घटाया जा सकता है।Kapalbhati Pranayam
कपालभाती प्राणायाम
कपालभाती संस्कृत का शब्द है। कपाल का अर्थ माथा और भाती का अर्थ प्रकाश होता है। नित्य कपालभाती करने से मुख पर अनोखी कांती मतलब चमक आती है। चेहरे पर चमक होना स्वस्थ और निरोगी काया की निशानी है। चमत्कारी कपालभाती प्राणायाम के कई सारे फ़ायदे होते हैं।
कपालभाती करने की विधि

– एक समतल, स्वच्छ और हवादार जगह पर कपड़ा बिछाकर बैठ जाएं।

– आप पदमासन, वज्रासन अथवा सिद्धासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। या सामान्य सरल मुद्रा में भी बैठ सकते हैं।

– इसके बाद अपने पेट को ढीला छोड़ दें।

– नाक से सांस को बाहर छोड़ने की क्रिया करें और सांस बाहर निकालते हुए पेट को अंदर की ओर खींचें।

– श्वास को अंदर खींचने की आवश्यकता नहीं है। यह क्रिया स्वयं हो जाती है।

– आसानी से लगातार नाक से श्वास बाहर छोड़ने और पेट को अंदर खींचने की क्रिया को करते रहें।

– आरंभ में 10 बार और धीरे धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 60 बार तक यह क्रिया करें।

– आवश्यकतानुसर बीच बीच में आराम ले सकते हैं।
प्राणायाम करते समय सावधानियां

– कपालभाती प्राणायाम सुबह पेट साफ़ करने के बाद खाली पेट करना चाहिए।

– इसे करने के बाद ३० मिनट तक कुछ खाना नहीं चाहिए। थोड़ा पानी पी सकते हैं।

– खाना खाने के ५ घंटे बाद की इस प्राणायाम को करना चाहिए।

– इस प्राणायाम को करने से पहले आप योग गुरु से सीख लें।

– गर्भवती महिलाएं, मिर्गी के रोगी, हार्निया और गैस्ट्रिक अल्सर के मरीज़ इसे न करें।

– हाइपर टेंशन, हाइ ब्लड प्रेशर और हृदय रोगी से इसे डॉक्टरी सलाह से करें।

– अगर आपको कपालभाती करते हुए चक्कर आने और जी मिचलाने की शिक़ायत हो, तो अपने डॉक्टर से इसके बारे में बताएं।
कपालभाती के लाभ

– वज़न कम कर सकते हैं। इससे कई लोगों ने 30 किग्रा तक वज़न कम किया है।

– पेट के आस पास की अतिरिक्त चर्बी Belly Fat को कम करने में सहायक है।

– चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे पड़े काले घेरे दूर करके निखार लाता है।

– पेट की गैस, कब्ज़ और एसिडिटी की परेशानी दूर भगाता है।

– मन मस्तिष्क की नकारात्मकता का नाश करता है।

– शरीर के फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालकर उसे को डिटॉक्स करता है।

– श्वसन नलिका की सफ़ाई होती है और कफ विकार नष्ट होते हैं।

– बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल नियंत्रण में आता है। रक्त धमनियों की कार्य क्षमता बढ़ती है।

– शरीर से पसीना निकालता है, जिससे रोम छिद्र खुल जाते हैं।
अब आप कपालभाती प्राणायाम से वज़न घटाने और कई दूसरे फ़ायदों से अवगत हो चुके हैं। आज ही संतुलित आहार और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं ताकि निरोगी काया पा सकें।

अगर आपका वज़न सामान्य है तो भी आप कपालभाती प्राणायाम करके इसके दूसरे लाभ ले सकते हैं



कपालभाती प्राणयाम करने के नियम और लाभ Kapalbhati Pranayam In Hindi
कपालभाती प्राणयाम Kapalbhati Pranayam 
कपालभाति(kapalbhati) संस्कृत भाषा के 2 शब्दों ‘कपाल’ और ‘भाती’ से मिलकर बना है कपाल से तात्पर्य मस्तिष्क और भाती से तात्पर्य प्रकाश से हैं। रोजाना कपालभाति प्राणायाम(kapalbhatipranayam) करने से व्यक्ति के चेहरे पर नई चमक आती है। कपालभाति प्राणायाम(kapalbhati pranayam) करने के कई सारे benefits हैं। तन और मन को कैसे यह स्वस्थ बनाता है , आइए जानते हैं 


kapalbhati pranayam

मोटापा आज की सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है। मोटापा होने पर कई तरह की और बीमारियां भी हमारे शरीर में घर कर लेती हैं। लोग मोटापा से बचने के लिए कई तरह की अंग्रेजी दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं, घंटों जिम में बिताते हैं, खाना नहीं खाते हैं लेकिन हजारों, लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी मोटापा कम नहीं होता है। और बजाय वजन कम होने के हानिकारक दवाओं के सेवन से लीवर पर काफी विपरीत परिणाम देखने को मिलते हैं। अगर मोटापे में कमी दिखती भी है तो शरीर का स्वास्थ्य गड़बड़ होता है।


जिम और डायटिंग के जरिए कम किया जाने वाला मोटापे का असर स्थिर नहीं होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। वजन कम करने के लिए संतुलित भोजन के साथ अगर योग कर लिया जाए तो वजन को आसानी से कम किया जा सकता है ।



इसके लिए कपालभाति प्राणायाम से उत्तम कोई भी योग नहीं है निकले पेट को भी अंदर करने में कपालभाति प्राणायाम सहायक है। यह आपकी कमर के आकार को पहले जैसे सामान्य आकार में लाने में सहायता करता है। जानते हैं इस प्राणायाम के संपूर्ण लाभ-

कपालभाति प्राणायाम के नियम Kapalbhati Pranayam Steps In Hindi
➤एक साफ और खुले स्थान पर चादर को बिछाकर आराम से बैठ जाइए।

➤आप सिद्धासन, पद्मासन आदि की मुद्रा में बैठ जाइए। आप चाहे तो आपको जो आसन मुद्रा सबसे आसान लगे उस आसन मुद्रा में शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़कर बैठ जाएं।
➤बैठने के बाद अपने पेट को भी ढीला छोड़ दें।
➤अब अपनी नाक से सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते रहे। जब-जब आप अपनी सांसों को बाहर छोड़ें ठीक उसी समय अपने पेट को अंदर भी की ओर खींचे।

➤श्‍वास अंदर लेने की जरूरत नहीं है। इस क्रिया में श्‍वास स्‍वत ही अंदर लिया जाता है।
➤लगातार जितने समय तक कि आप आराम से यह क्रिया कर सकते हैं तब तक नाक से श्‍वास बाहर छोड़ने और पेट को अंदर कमर तक खींचने की क्रिया करते है ध्यान रहे कि यह क्रिया आराम से की जानी चाहिए और आपका पेट अंदर की तरफ नाभि को केंद्र माना जाना चाहिए।

➤शुरुआत में 10 से 15 बार और धीरे-धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 75 बार तक इस क्रिया को दोहराया जा सकता है।
➤आप चाहें तो बीच में कुछ समय विश्राम करने और पुनः इस क्रिया को दोहराएं।

कापालभाति प्राणायाम करने मे कुछ ध्यान रखने योग्य बातें 

➤कपालभाति सुबह के समय खाली पेट शौच जाने के बाद करें।

➤अगर खाना खाने के बाद कपालभाति करना है तो खाने और कपालभाती में कम से कम 5 घंटे का अंतराल रखे। 

➤कपालभाति क्रिया करने के बाद 45 मिनट तक कुछ भी ना खाएं आप चाहे तो थोड़े पानी का सेवन कर सकते हैं।


➤शुरुआती दिनों में कपालभाति किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही किया जाए तो इसका संपूर्ण लाभ मिलेगा।

➤गर्भवती महिलाएं, र्मिगी, हार्निया के रोगी इस क्रिया को ना करें।

➤उक्त रक्तचाप और हदय रोगी अपने डॉक्टर की सलाह अनुसार इस क्रिया को करें।

कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे Kapalbhati Pranayama Benefits In Hindi 
➤इसे करने से वजन कम होता है। भारत देश में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कपालभाती से अपना वजन कम किया है। 
➤निकले पेट को भी अंदर करने में यह प्राणायाम सहायक है। यह आपकी कमर के आकार को पहले जैसे सामान्य आकार में लाने में सहायता करता है।

➤चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे कालेपन को भी दूर करता है कपालभाती।

➤इस आसन से आपको गैस, कब्ज और अम्‍लपित की समस्या से छुटकारा मिलता है। 

➤शरीर और मन की शुद्धि करने में सहायक है

➤यह शरीर से जहरीले तत्वों को निकाल बाहर करता है।

➤इस आसन से व्यक्ति की स्‍मरणशक्ति तेज होती है।

➤इसे करते समय बहुत अधिक पसीना आता है और पसीने के रास्ते से शरीर से जहरीले तत्व निकल जाते हैं।







कपालभाति प्राणायाम | Kapalbhati Pranayam in Hindi


कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayam in Hindi) को नियमित करने से व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक परेशानियां दूर होती है। कपालभाति एक आसान योग है और कुछ दिन के लगातार अभ्यास से ये और आसान हो जाता है। इसे करने के बाद व्यक्ति को आत्मिक शांति का अहसास होता है। जो व्यक्ति इस प्राणायाम को करता है सिर्फ उसे ही इसकी अनुभूति होती है।

कपालभाति के तरीके

यह प्राणायाम करने के लिए सुबह का समय चुनें।

स्वच्छ और खुली जगह पर आलथी -पालथी की मुद्रा में बैठ जायें।

अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें कमर को बिलकुल सीधा रखें।

पेट को बिलकुल ढीला रखें।

ध्यान रहें कपालभाति में हमें सांसों (Breath) को बाहर छोड़ने पर ज्यादा ध्यान देना होता है।

नाक से साँस बाहर की ओर छोड़ें और पेट को अंदर की ओर खींचे।

इस क्रिया में साँस अंदर की ओर न खीचें जब आपका पेट बाहर की ओर आएगा साँस अपने आप खींची जाएगी।

इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहरायें।

शुरुआत में इसे 5-10 बार करें धीरे-धीरे गिनती बढ़ाते रहे।

ज्यादा तेज गति से इस प्राणायाम को न करें। आराम से और एकाग्र होकर इस क्रिया को बार-बार करें।

बीच-बीच में थोड़ा आराम लेना चाहें तो अवश्य ले सकते है।

सावधानी

कपालभाति सुबह खाली पेट और शौच के बाद करें।

इसको करने के बाद काम से काम आधे घंटे तक कुछ भी ना खायें।

शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

गर्भवती महिलायें, हाल ही में जिसका ऑप्रेशन हुआ हो और हर्निया के मरीज़ इस योग को न करें।

शुरुआती दिनों में जानकर की देखभाल में इसे कर सकते है।

इसके लाभ

कपालभाति प्राणायाम करने से वजन कम (Weight Loss) किया जा सकता है।

इसे करने से निर्जीव से दिखने वाले चेहरे पर चमक आ जाती है।

प्राणायाम दिमागी तौर पर व्यक्ति को शांत रखता है, तनाव और मानसिक परेशानियां भी दूर हो जाती है।

आँखों के नीचे कालापन (How to Dark Circle in Hindi) और झुर्रियां दूर करने में मदद करता है।

एसिडिटी (Acidity) और गैस जैसी समस्या भी कम होती है।

यह प्राणायाम रोजाना करने से रक्त प्रभाव (Blood circulation) भी सही तरह से होता है।

स्मरण शक्ति (memory power) बढ़ाता है।

अगर व्यक्ति चिंता एवं मानसिक तनाव से मुक्त रहता है तो प्रसन्न रहने से साथ व्यक्ति आत्मविश्वास भी लौटता है।

कपालभाति शब्द दो अलग-अलग शब्दों से बना है कपाल और भाति। कपाल शब्द का मतलब है माथा (forehead) और भाति शब्द का मतलब चमक (lighting) होता है। कपालभाति करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है। इसके अलावा यह योग साँस लेने वाले अंगो को भी सही तरीके से काम करने में मदद करता है।



कपालभाती प्राणायाम की विधि, सावधानियां और लाभ

अगर आप जीवन भर स्वस्थ और निरोगी रहना चाहते हैं तो आपको कपालभाती प्राणायाम ‌_ Kapalbhati Pranayam करना चाहिए। यह मोटापा कम करने का बहुत सस्ता इलाज है। जिससे आप Weight Loss करके सुखी जीवन की संकल्पना को सच कर सकते हैं। वज़न घटाने के लिए संतुलित आहार के साथ योग और प्राणायाम करके आसानी बढ़ते वज़न को कंट्रोल किया जा सकता है।

आधुनिकता की दौड़ में फ़ूड भी फ़ास्ट फ़ूड बन गया है। जिस वजह से Obesity या मोटापा आज एक गंभीर समस्या बन गई है। मोटापा सिर्फ़ दिखावटी नहीं होता है, यह कई बीमारियों का घर बन जाता है। बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए तरह तरह के इलाज करते हैं और हज़ारों लाखों रुपये खर्च करते हैं। कुछ लोग तो मोटापा कम करने वाली हानिकारक दवाओं का प्रयोग करके अपने लीवर को भी ख़राब कर लेते हैं।

मोटापा कम करने और वज़न घटाने के लिए कपालभाती प्राणायाम का प्रयोग किया जाता है। इससे बड़ी आसानी से वज़न घटाया जा सकता है।Kapalbhati Pranayam
कपालभाती प्राणायाम

कपालभाती संस्कृत का शब्द है। कपाल का अर्थ माथा और भाती का अर्थ प्रकाश होता है। नित्य कपालभाती करने से मुख पर अनोखी कांती मतलब चमक आती है। चेहरे पर चमक होना स्वस्थ और निरोगी काया की निशानी है। चमत्कारी कपालभाती प्राणायाम के कई सारे फ़ायदे होते हैं।

कपालभाती करने की विधि

– एक समतल, स्वच्छ और हवादार जगह पर कपड़ा बिछाकर बैठ जाएं।

– आप पदमासन, वज्रासन अथवा सिद्धासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। या सामान्य सरल मुद्रा में भी बैठ सकते हैं।

– इसके बाद अपने पेट को ढीला छोड़ दें।

– नाक से सांस को बाहर छोड़ने की क्रिया करें और सांस बाहर निकालते हुए पेट को अंदर की ओर खींचें।

– श्वास को अंदर खींचने की आवश्यकता नहीं है। यह क्रिया स्वयं हो जाती है।

– आसानी से लगातार नाक से श्वास बाहर छोड़ने और पेट को अंदर खींचने की क्रिया को करते रहें।

– आरंभ में 10 बार और धीरे धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 60 बार तक यह क्रिया करें।

– आवश्यकतानुसर बीच बीच में आराम ले सकते हैं।
प्राणायाम करते समय सावधानियां

– कपालभाती प्राणायाम सुबह पेट साफ़ करने के बाद खाली पेट करना चाहिए।

– इसे करने के बाद ३० मिनट तक कुछ खाना नहीं चाहिए। थोड़ा पानी पी सकते हैं।

– खाना खाने के ५ घंटे बाद की इस प्राणायाम को करना चाहिए।

– इस प्राणायाम को करने से पहले आप योग गुरु से सीख लें।

– गर्भवती महिलाएं, मिर्गी के रोगी, हार्निया और गैस्ट्रिक अल्सर के मरीज़ इसे न करें।

– हाइपर टेंशन, हाइ ब्लड प्रेशर और हृदय रोगी से इसे डॉक्टरी सलाह से करें।

– अगर आपको कपालभाती करते हुए चक्कर आने और जी मिचलाने की शिक़ायत हो, तो अपने डॉक्टर से इसके बारे में बताएं।
कपालभाती के लाभ

– वज़न कम कर सकते हैं। इससे कई लोगों ने 30 किग्रा तक वज़न कम किया है।

– पेट के आस पास की अतिरिक्त चर्बी Belly Fat को कम करने में सहायक है।

– चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे पड़े काले घेरे दूर करके निखार लाता है।

– पेट की गैस, कब्ज़ और एसिडिटी की परेशानी दूर भगाता है।

– मन मस्तिष्क की नकारात्मकता का नाश करता है।

– शरीर के फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालकर उसे को डिटॉक्स करता है।

– श्वसन नलिका की सफ़ाई होती है और कफ विकार नष्ट होते हैं।

– बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल नियंत्रण में आता है। रक्त धमनियों की कार्य क्षमता बढ़ती है।

– शरीर से पसीना निकालता है, जिससे रोम छिद्र खुल जाते हैं।

अब आप कपालभाती प्राणायाम से वज़न घटाने और कई दूसरे फ़ायदों से अवगत हो चुके हैं। आज ही संतुलित आहार और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं ताकि निरोगी काया पा सकें।

अगर आपका वज़न सामान्य है तो भी आप कपालभाती प्राणायाम करके इसके दूसरे लाभ ले सकते हैं।



मस्तिष्क को शीतलता देते है योगासन


Best yoga tips in hindi योग शुद्ध भारतीय कला है| यह केवल शरीर को ही स्वस्थ नहीं रखता बल्कि मन-मस्तिष्क को शीतल भी रखता है.

प्राणायाम
प्राणायाम करने की सबसे अच्छी मुद्रा पद्मासन होती है। पद्मासन में न बैठ पाएं तो सुखासन की मुद्रा में पालथी मारकर बैठें।

शीतली प्राणायाम 
दांतों को हल्के से जोड़ लें। दांतों के पीछे जीभ लगाकर गहरी लंबी सांस लें
सांस मुंह से लें और नाक से छोड़ें। यह दिन में किसी भी समय किया जा सकता है
इसे सामान्यत: 11 बार करें
होंठ सूख जाते हों तो शुरूआत में पांच से छह बार करें
शरीर के तापमान को कम करने और मस्तिष्क को ठंडा रखने के लिए भी अच्छा होता है
जिन्हें कफ है, वे इसे न करें

शीतकारी प्राणायाम (Best yoga tips in hindi)
मुंह खुला रखें और जीभ बाहर
होंठों को घुमाकर ‘ओ’ का आकार बनाएं
मुंह से सांस लें और नाक से छोड़ें
मुंह से सांस लेने पर जीभ के द्वारा ठंडी हवा अंदर जाती है
ध्यान दें कि शीतली और शीतकारी प्राणायाम गर्मी के मौसम में किए जाते हैं
शीत ऋतु में करने से सर्दी-ज़ुकाम हो सकता है

भ्रामरी प्राणायाम
मस्तिष्क ठंडा रखने के भ्रामरी प्राणायाम बेहतर होता है
कान और आंखों को बंद कर ‘म’ ध्वनि का उच्चारण करें
बुज़ुर्ग या सर्वाइकल से पीड़ित कंधे दुखने पर रुक-रुक कर इसे कर सकते हैं

ध्यान देने वाली बातें

आसन और प्राणायाम के सबसे बेहतर परिणामों के लिए सुबह का वक़्त उपयुक्त है
आसन खाली पेट ही करें
योग करने के बाद 40 से 45 मिनट चाय या पानी न पिएं
योग करने के लिए कंबल को चार बार मोड़ कर या योग मैट का ही इस्तेमाल करें
एकदम खुली हवा में न बैठें
ऐसी जगह का चुनाव करें जहां हवा रुक कर आती
आसन (Best yoga tips in hindi)

सर्वांगासन 
गर्मी के दिनों में शरीर का तापमान काफ़ी बढ़ जाता है
सर्वांगासन करने से रक्त प्रवाह मस्तिष्क की ओर जाता है
सर्वाइकल और उच्च रक्तचाप के मरीज़ बिल्कुल न करें।

विधि
कंबल को 4 बार मोड़ कर या योग मैट पर पीठ के बल लेटें
दोनों पैरों को घुटने मोड़े बिना ऊपर की ओर उठाएं
कोहनियां जमीन पर टिकाकर दोनों हाथों से कमर को सहारा दें
दोनों पैरों को सीधा ऊपर की ओर रखें और 90 डिग्री का कोण बनाएं
थोड़ी देर तक इसी अवस्था में रहें और फिर धीरे-धीरे नीचे कर लें

पवनमुक्तासन

पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए पवनमुक्तासन सबसे अच्छा आसन माना गया है।

विधि
सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं
एक पैर मोड़कर सीने के पास लाएं
सिर को उठाकर घुटने पर नाक या ठुड्‌डी लगाने की कोशिश करें
जब पैर नासिका के पास लाएं तो पूरी सांस बाहर निकाल दें
यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं
अब दोनों घुटनों को सीने तक लाएं
पैरों को पकड़कर पीठ के बल झूला झूलें
जिन्हें कमर दर्द, स्लिप डिस्क या सायटिका की समस्या हो तो वे इसे दाएं-बाएं करें

वृक्षासन
वृक्ष की तरह खड़े होने के कारण इसे वृक्षासन नाम दिया गया है। यह हमारे मस्तिष्क, शरीर और लिवर को आराम पहुंचाता है।

विधि (Best yoga tips in hindi)
सीधे खड़े हो जाएं
अब अपना एक पैर मोड़कर दूसरे पैर पर घुटने के ऊपर टिका लें
अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाएं और नमस्कार की मुद्रा बनाएं
कुछ देर इसी स्थिति में सांस रोककर खड़े रहें और सामने किसी एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें
सांस छोड़ते हुए दोनों हाथ नीचे ले आएं
यही क्रिया दूसरे पैर से दोहराएं





एक आसन हर रोज : बस पंद्र‍ह मिनट करें ये प्राणायाम, बालों का सफेद होना रुक जायेगा
योग की यह विधि आपकी संवेदनशीलता की भावना को संतुलित कर अनचाहे तनाव और अन्‍य समस्‍याओं से छुटकारा दिलाती है।
 एक आसन हर रोज
योग की यह विधि आपकी संवेदनशीलता की भावना को संतुलित कर अनचाहे तनाव और अन्‍य समस्‍याओं से छुटकारा दिलाती है। 


बालों का सफेद होना मतलब उम्र बढ़ने का संकेत, लेकिन आजकल यह समस्‍या इतनी आम हो गई है कि छोटे-छोटे बच्‍चों के भी बाल सफेद होने लगे हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बाल समय से पहले सफेद न हों, तो आज ही से हर राेेेज योगासन करें। योगासन में शामिल यह प्राणायाम मात्र पंद्र‍ह मिनट करने से ही आपको लाभ जरूर होगा।

इसलिए बाल हो जाते हैं समय से पहले सफेद


ज्यादा तनाव लेना, ऑटोइम्यून डिजीज, थायराइड डिसऑर्डर, विटामिन बी12 की कमी, स्मोकिंग करना आदि शामिल है। हालांकि इन सभी कारणों में एक कारण अनुवांशिक या जेनेटिक भी है। बाल सफेद होने में इसकी बहुत ही बड़ी भूमिका है। अगर बाल सफेद होने की समस्या को दूर करना है तो आप अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कीजिए और विटामिन तथा मिनरल को शामिल कीजिए। इसके अलावा आप अपने जीवन में योग को शामिल कीजिए। यह भी पढ़ें – फर्टिलिटी बढ़ाकर कई बीमारियों से बचाता है नाभि में दो बूंद तेल

करें ये उपाय

आप रोजाना यदि 15 मिनट कपालभाति प्राणायाम करते हैं तो इससे बाल सफेद होने की समस्या दूर हो सकती है। कपालभाती प्राणायाम को हठयोग में शामिल किया गया है। यह सबसे कारगर प्राणायाम माना जाता है।

क्या है कपालभाती प्राणायाम

कपाल का मतलब माथा और भाती का अर्थ चमक होता है, और’ प्राणायाम का मतलब सांस लेने की तकनीक है। कपलभाती प्राणायाम एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है फोरहेड शाइनिंग ब्रीथिंग तकनीक। यह भी पढ़ें – एक आसन हर रोज : बच्‍चों के योगाभ्‍यास के लिए कौन सा समय होता है सही, सुबह या शाम ?

कपालभाती करने की विधि

कपालभाती प्राणायाम करने के लिए आप सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर सांसों को बाहर छोड़ने की क्रिया करें। सांसों को बाहर छोड़ने या फेंकते समय पेट को अंदर की ओर धक्का देना है।

ध्यान रखें कि श्वास लेना नहीं है क्योंकि इस क्रिया में श्वास अंदर ही अंदर चली जाती है। हालांकि अभ्यास के दौरान अपनी सीमाओं को ध्यान में रखें और तदनुसार प्रक्रिया के माध्यम से इस प्राणायाम करें। यह भी पढ़ें – एक आसन हर रोज : योगासन की पहली क्‍लास में जरूर करें ये दो क्रियाएं 

कपालभाती प्राणायाम के अन्य लाभ
कपालभाती प्राणायाम शरीर से विषाक्त पदार्थों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
यह किडनी और लीवर के कामकाज में सुधार करता है। इसके अलावा यह ब्लड सर्कुलेशन और पाचन को बढ़ाता है।
यह आंखों से तनाव को दूर करता है और डार्क सर्कल मिटा को देता है।
कपालभाती आपके फेफड़ों को मजबूत करता है और उसकी क्षमता को बढ़ाता है।
कपालभाती का नियमित अभ्यास आपको सक्रिय करेगा और आपके चेहरे पर ग्लो लाएगा।
यह स्मृति और एकाग्रता शक्ति में सुधार करता है।
यह अवसाद से दूर रखता है और सकारात्मकता उर्जा देता है।
यह आपकी संवेदनशीलता की भावना को संतुलित करता है। यह एसिडिटी और गैस से संबंधित समस्याओं को दूर करता है।
यह प्राणायाम मेटाबोलिक रेट को बढ़ाता है, इस प्रकार यह तेजी से वजन घटाने में सहायता करता है।



कपालभाति प्रणायाम के कुछ जबरदस्त फायदे 

कपालभाति के फायदे है। कपालभाती आसन एक ऐसा आसन है जिसमें सभी योगासनों का
फायदा मिलता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें और निरोग रहें। योग की हर क्रिया
कारगर होती है, लेकिन बात जब कपालभाती प्राणायाम की होती है तो इसे जीवन की संजीवनी
कहा जाता है। कपालभाती प्राणायाम को सबसे कारगर माना जाता है। कपालभाती प्राणायाम को
ठयोग में शामिल किया गया है। योग के आसनों में यह सबसे कारगर प्राणायाम माना जाता है। यह
तेजी से की जाने वाली एक रोचक प्रक्रिया है। दिमाग आगे के हिस्‍से को कपाल कहते हैं और भाती
का अर्थ ज्योति होता है। 


कपालभाति – तरीका


1.) अपने पैरों को मोड़कर फर्श पर एकदम सीधे होकर बैठ जाएं। अपनी पीठ को बिल्कुल सीधे


रखें और अपनी आंखें बंद कर लें।


2.) अब अपनी दाएं हाथ की हथेली को दांये घुटने पर और बाएं हाथ की हथेली को बांए घुटने पर


आराम से रखें।


3.) गहरी सांस खींचे और फिर पूरे दबाव के साथ सांसों को छोड़ें। दबाव सिर्फ इतना ही दें कि सांस


छोड़ते समय आपका पेट भी अंदर की तरफ चला जाए।

4.) जब आप सांस छोड़ने लगते हैं तो अपने सांसों की आवाज को सुनते हुए यह सोचें कि आपके

शरीर की सारी बीमारियां नाक के रास्ते बाहर निकल रही हैं।

5.) जब सांस खींच रहे हैं तो इसपर कोई दबाव न दें। सांस खींचने में आपको जोर भी नहीं लगाना


है, बस हर बार सामान्य तरीके से ही सांस लें।

6.) पांच मिनट तक लगातार इस प्रक्रिया को दोहराएं और फिर थोड़ी देर आराम लें। इस प्राणायाम

को आप पंद्रह से तीस मिनट तक भी कर सकते हैं।

7.) कपालभाति प्राणायाम को बहुत तेज गति से न करें। इसे बिल्कुल आराम से करें और बार-बार


करें।

 : बवासीर से बचने के कुछ घरेलू उपचार
कपालभाति – फायदे
चिंता दूर करे


यह प्राणायाम नियमित करने से व्यक्ति हर तरह के स्ट्रेस, डिप्रेशन, चिंता एवं मानसिक तनाव से

मुक्त रहता है और उसका मन भी प्रसन्न रहता है। इसके अलावा यह प्राणायाम मन और दिमाग को


शांत रखता है और व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाता है।




शरीर की क्रिया सुधारे

यह प्राणायाम करने से व्यक्ति की पाचन क्रिया सुचारू रूप से काम करती है और यकृत एवं
किडनी भी अपना काम सही तरीके से करने लगती है। इसके अलावा आंत से जुड़ी समस्या भी दूर

हो जाती है।
डार्क सर्कल दूर करे

यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से कपालभाति प्राणायाम करता है तो उसके आंखों में तनाव कम

उत्पन्न होता है जिससे की आंखों के आसपास डार्क सर्कल नहीं पड़ते हैं और यदि यह समस्या होती

भी है तो इस प्राणायाम को करने से दूर हो जाती है।
रक्त के प्रवाह सुधारे

इस प्राणायाम के रोजाना सही तरीके से करने से शरीर में रक्त प्रवाह सही तरीके से होने लगता है

और शरीर के सभी अंग भी अपना कार्य अच्छे से करते हैं।


कपालभाति – सावधानियां
1.) कपालभाती व्‍यायाम सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन जिन लोगों को सांस संबंधी

समस्‍या हो उनको चिकित्‍सक की सलाह के बाद ही यह आसन करना चाहिए।
2.) हर्निया, मिर्गी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, हाइपरटेंशन, पेट की सर्जरी के बाद और स्टेंट के

मरीजों कों यह योग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान,

गर्भावस्था से पहले और बाद में यह योग नहीं करना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.