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पहली बार योग करने से पहले मालूम होनी चाह‍िए ये जरुरी बातें,



पहली बार योग करने से पहले मालूम होनी चाह‍िए ये जरुरी बातें, जानें कौनसी गलतियां करने से बचें

विश्‍वभर में आज योग करने वालों की संख्‍या तेजी से बढ़ती जा रही है। लोग योग के जर‍िए खुद को आध्‍यात्‍म से जोड़ने का मार्ग मानते हैं। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड सेल‍िब्रेटीज मानसिक और शारीर‍िक तौर पर फिट रहने के ल‍िए योग का सहारा लेते हैं।

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मकसद योग के जरिए वैश्विक स्वास्थ्य, सद्भाव और शांति लाना है। लेकिन हर नए योगी को योग करने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी होती हैं ताकि उसे किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। आइए जानते हैं कि अगर आपने नया-नया योग करना शुरू किया है तो क्या सावधानियां बरतनी चाहिए...


सहज कपड़े पहनकर करें योग

आपको पता होना चाहिए कि योग करने के लिए आपको किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए। क्योंकि आप हर तरह के कपड़ों में योग नहीं कर सकते हैं। योग करने के लिए ऐसे कपड़े होने चाहिए जिसमें आप आसानी से एक जगह से दूसरी जगह मूव कर सकें। योग के दौरान आपको पसीना भी आएगा इसलिए हल्के और ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिए। ज्यादा कसे हुए कपड़ों में योग नहीं करना चाहिए।
सही आसन और मुद्रा की हो जानकारी
आपको पता होना चाहिए कि योग की किसी भी क्रिया में किसी भी मुद्रा को कितनी देर तक करना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर रहता है कि आप किस तरह का योग कर रहे हैं। योग को कभी भी जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए।
जल्‍दबाजी में न करें योग
योग करते वक्त आपको किसी भी तरह की हड़बड़ी नहीं दिखानी चाहिए। योग में आपकी सांसों को बहुत महत्व होता है। कहा भी जाता है कि आप जो सांस लेते हैं वह योग की चाबी है। इसलिए अगर आप नया-नया योग कर रहे हैं तो इसका प्रशिक्षण जरूर लें ताकि आपको सही मुद्राओं और योगाभ्यास के बारे में जानकारी मिल सके।

खाना खाकर न करें योग
योग कोई जिम नहीं है इसलिए इस बात का ख्याल रखें कि आप हर योग की क्रिया को आराम से करें। योग करने के लिए शरीर सबसे पहले शरीर को तैयार करना होता है। भरपेट खाने के बाद कभी भी योग नहीं करना चाहिए। इसी तरह योग के फौरन बाद कभी नहीं नहाना चाहिए।
महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप महिला हैं तो पहली बार योग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। महिलाओं को पीरियड के समय योग करना चाहिए या नहीं इसकी जानकारी भी अपने डॉक्टर से जरूर ले लें। क्योंकि ज्यादातर योगाचार्य बताते हैं कि पीरियड के समय योग करने से बचना चाहिए।

चुनें सही प्रशिक्षक
अगर आप पहली बार योग करने जा रहे हैं तो आपको सही योगा क्लास का चयन करना चाहिए। क्योंकि योग करने की जगह और मौसम का असर भी शरीर पर पड़ता है। अगर आप कभी भी योग नहीं किए हैं तो एक बेहतर योग प्रशिक्षक का चयन बेहद जरूरी है। इसल‍िए कभी भी योगा क्‍लासेज ज्‍वॉइन करने से पहले एक ट्रायल क्‍लास अवश्‍य लें।



इन योगासनों से बढ़ती है एकाग्रता की शक्‍ति
Yoga for concentration | 
शक्ति पान मुद्रा योग, Shakti Pan Mudra Yoga | Yoga for sixth sense | Boldsky

हमारी रोज़ाना की ज़िंदगी में एकाग्रता और याद्दाश्‍त बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। आजकल लोगों और कुछ बच्‍चों को भी अपने काम में ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत आती है। मस्तिष्‍क और शरीर को शांति देने का योग एक वैज्ञानिक तरीका है। दवाओं या काउंसलिंग की जगह योग द्वारा भी एकाग्रता को प्राप्‍त किया जा सकता है।
आज हम आपको ऐसे कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे एकाग्रता बढ़ती है। एकाग्रता बढ़ाने वाले योगासन शुरु करने से पहले आपको कुछ बातों को ध्‍यान रखना पड़ेगा। ढीले कपड़े पहनें और खुली हवा में योग करें। सुबह जल्‍दी उठकर योग करेंगे तो ज़्यादा फायदा होगा।

सैल्‍यूटेशन सील (अंजली मुद्रा)
एकाग्रता बढ़ाने का ये सबसे आसान और सुविधाजनक योगासन है। पैरों को क्रॉस करके ज़मीन पर बैठ जाएं और दोनों हथेलियों को मिला लें। स्‍पाइन को सीधा रखें और गहरी सांस लें। अपने दिमाग से सारी चिंताएं निकाल दें। इस योगासन से ध्‍यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ेगी। रोज़ 15 मिनट तक नियमित ये आसन करें।
लोटस पोज़ (पद्मासन)

ये बहुत आसान पद्मासन पोज़ है। पैरों को क्रॉस करके ज़मीन पर बैठ जाएं और पीठ को सीधा रखें। अब अंगूठे और तर्जनी उंगली को एकसाथ रखें और हाथों को घुटनों पर रखकर ध्‍यान करें। गहरी सांस लें और छोड़ें। 10 से 25 मिनट तक ऐसा करें। इससे नर्वस सिस्‍टम दुरुस्‍त रहता है। साथ ही मन और शरीर के बीच प्राकृतिक संतुलन बनता है।
क्रेन पोज़ (बकासन)

ये संतुलित योग पोज़ है। सीधे खड़े हो जाएं और धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकें। हाथों को जमीन पर रखें और पैरों को ऊपर हवा में उठाने की कोशिश करें। एकाग्रता पाने के इस योगासन में आपको अपने शरीर का पूरा भार हाथों पर छोड़ना है। ये आसन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन आपको इससे बहुत फायदे मिलेंगे। जितनी देर हो सके इस अवस्‍था में रहें।

बैठकर आगे की ओर झुकें

एकाग्रता बढ़ाने का ये बेहतरीन योगासन है। ज़मीन पर बैठ जाएं और अपने सामने पैरों को फैलाएं और इस दौरान कमर को सीधा रखें। माथे के सामने हाथों को खीचें और गहरी सांस भरें। अब झुक जाएं और पैरों को छुएं। इस अवस्‍था में रहते हुए 20-30 सेकेंड तक सांस लें। वापस सामान्‍य अवस्‍था में आ जाएं और रिलैक्‍स हो जाएं। अगले 5-10 मिनट तक ये आसन करें।

ऑल्‍टरनेट नॉस्ट्रिल ब्रीथिंग (अनुलोम विलोम प्राणायाम)

इस योगासन द्वारा भी ध्‍यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। पैरों को क्रॉस करके बैठ जाएं और सीधी नाक की सांस को उंगली से रोक लें। अब दूसरी तरफ से सांस अंदर खीचें और बाहर छोड़ें। रोज़ 5-6 मिनट तक ये आसन करें। इससे ध्‍यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और दिमाग तेज़ होता है।

एकाग्रता की क्षमता बढ़ाने के लिए आप ये योगासन कर सकते हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए एकाग्रता बहुत ज़रूरी है।




स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बचा जा सकता है एनसीडी रोगों से

नई दिल्ली: आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 61 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी के कारण हो रही हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें से लगभग 23 प्रतिशत लोग इन रोगों के साथ-साथ समय से पहले मृत्यु के खतरे में भी जी रहे हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, देश में इन गंभीर परिस्थितियों के खिलाफ काम में खास प्रगति नहीं हुई है। तेजी से शहरीकरण के कारण, भारत में गैर-संचारी रोग पैटर्न बढ़ रहा है।

एनसीडी के बोझ के लिए जिम्मेदार चार जोखिम वाले कारक तंबाकू, दूषित आहार, शारीरिक निष्क्रियता और शराब की अत्यधिक खपत है। कुछ अन्य प्रमुख कारकों में मोटापा, रक्तचाप, रक्त शर्करा और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि शामिल हैं। ये सभी व्यवहार जोखिम कारक हैं और जीवनशैली में बदलाव से बदले जा सकते हैं।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, ”आधुनिक और उन्नत तकनीक निि>त रूप से हमारे लिए जीवन आसान कर रही है। इनमें ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन भुगतान, सूचना का उपयोग, ऐसे काम जो सभी हमारे घर से आराम से किए जा सकते हैं। इनका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि हमारे स्वास्थ्य की कीमत पर प्रौद्योगिकी ने यह सब क्या किया है। हम अब शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं।” डॉ. अग्रवाल ने कहा, ”कंप्यूटर पर काम करते हुए लंबे समय तक एक डेस्क पर बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया का उपयोग कर टीवी देखते हैं। ये सभी गतिविधियां गतिहीन व्यवहार को बढ़ावा देती हैं।

खुली जगह की कमी के कारण, सभी आयु समूहों में शारीरिक गतिविधि का स्तर कम हो गया है।” उन्होंने कहा कि एनसीडी को नियंत्रित करने और शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए आईएमए ने ‘मूव मूव मूव’ नामक एक अभियान का प्रस्ताव रखा है। नियमित व्यायाम करने के अतिरिक्त लोगों को दिनभर में अधिक बार घूमना फिरना चाहिए।

एचसीएफआई द्वारा आयोजित किए जाने वाले आगामी परफेक्ट हेल्थ मेला में चर्चा के मुख्य विषयों में यह विषय भी शामिल रहेगा। मेला चार से आठ अक्टूबर तक नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।

कुछ उपयोगी टिप्स :
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* जितनी बार हो सके सीढ़ियों पर चढ़ें उतरें * बस स्टॉप से बाहर निकल कर बाकी रास्ते पैदल चलें * ड्राइविंग के बजाए पास की दुकान तक पैदल जाएं * फोन पर बात करते समय खड़े होकर घूमें फिर

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