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स्तनों में होने वाले दर्द को ना करें ‘इग्नोर’ –


स्तनों में होने वाले दर्द को ना करें ‘इग्नोर’ –


महिलाओं के स्तन में दर्द होना वैसे तो आम बात है। लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को ब्रेस्ट में दर्द की शिकायत होती है। महिलाओं के स्तन में यह दर्द एक या फिर दोनों स्तनों में हो सकता है।

महिलाओं के स्तन में दर्द के कई कारण होते हैं। कभी कभी पीरियड्स आने के समय हार्मोन्स असंतुलित होने की वजह से भी स्तन में दर्द की शिकायत रहती है। इस दर्द को चक्रीय दर्द कहा जाता है। चक्रीय दर्द, माहवारी आने के एक या दो हफ्ते पहले शुरू होता है और माहवारी के बाद यह दर्द बंद हो जाता है। इसके अलावा गैर चक्रीय कारण भी हैं जो कि स्तन में दर्द का कारण बनता है।

महिलाओं के स्तन में दर्द का कारण महिलाओं के हार्मोन्स और उनके स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है और इसका लगभग 20 प्रतिशत इलाज भी संभव है। लेकिन स्तन में दर्द होने का मतलब कैंसर नहीं है। कैंसर होने पर ब्रेस्ट की कोशिकाएं अनियमित रूप से विभाजित होने लगती है। महिलाओं के स्तन में दर्द होने के और भी कई कारण है और आज हम उसके उपचार के बारे में आपको अपने इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं।
स्तनों में होने वाले दर्द को दो प्रकारों में विभाजित किया गया है।

1. चक्रीय दर्द
चक्रीय दर्द महिलाओं को मासिक धर्म शुरू होने के पहले होना शुरू होता है। इसे चक्रीय मसतालगिया कहा जाता है। यह दर्द हार्मोन्स के बदलने से होता है। इस दर्द के अधिकम मामलों में स्तनों के बाहरी और ऊपरी क्षेत्र में दर्द होता है। यह दर्द सामान्य होता है और इससे घबराने की जरूरती नहीं होती है। यह दर्द मासिक चक्र के साथ आता है और पीरियड्स के जाते ही चला जाता है।

2. गैर-चक्रीय दर्द
इस प्रकार के दर्द अकसर 30 से 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में देखा जाता है। इसमे बहुत तीव्र दर्द होता है। मानों जैसे स्तनों में चोट लग गई हो। स्तन में दर्द होने से महिलाओं की ब्रेस्ट में दर्द, भारीपन, स्तनों में कोमलता, जकड़न और स्तनों के उत्तकों में जलन आदि का अनुभव होता है। यह दर्द होने के कई कारण होते हैं। लेकिन हर केस में कोई भी निर्धारित कारण निकाल पाना संभव नहीं है। फिर भी कुछ ऐसे कारण होते हैं जिनकी वजह से स्तन में दर्द होता है तो चलिए आज हम बताते हैं आपको स्तनों में दर्द के कारण
स्तनों में दर्द के कारण

1. हार्मोन्स में परिवर्तन
चक्रीय छाती में दर्द महिलाओं में होने वाले मासिक धर्म और हार्मोन्स के बीच की सबसे मजबूत कड़ी होता है। यह दर्द मासिक चक्र आने से पहले होना शुरू होता है और मासिक चक्र के जाने के बाद दर्द भी चला जाता है।

2. स्तन की संरचना
महिलाओं में गैर-चक्रिय ब्रेस्ट का दर्द भी होता है। जो कि दूग्ध नलिकाओं और दूग्ध ग्रंथियों में परिवर्तन के कारण होता है। यह कारण स्तनों में अल्सर के विकास को भी बढ़ावा देता है। स्तन आघात होने के कई कारण है जैसे यदि पहले कभी आपने स्तन की सर्जरी करवाई हो या कोई अन्य कारण भी हो सकता है। स्तन की संरचना अलग होने से छाती के आस-पास मांसपेशियों, छाती के जोड़ो और दिल पर भी दर्द होने की शिकायत रहती है।

3. फैटी एसिड के असंतुलन के कारण
शरीर की कोशिकाओं के अंदर फैटी एसिड के असंतुलन या फिर गड़बड़ी होने से स्तन के हार्मोन्स के प्रवाह में सहायक ऊत्तकों की संवेदनशीलता को प्रभावित करता है।

4. दवाओं का सेवन
कभी-कभी महिलाएं अपने बांझपन के उपचार के लिए दवाएं लेती है। उनकी वजह से भी स्तन में दर्द होता है। इसके अलावा गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से या फिर हार्मोन्ल दवाओं के सेवन से भी ब्रेस्ट में दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही रजोनिवृत्ति के समय उपयोग की जाने वाली एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन थेरेपी भी दर्द का कारण बनती है।

5. स्तन की आकृति
महिलाओं की छाती में दर्द होने का एक सबसे बड़ा कारण स्तनों के आकार का अधिक बड़ा होना भी होता है। इसके अलावा स्तनों के आकार का बड़ा होने से छाती, पीठ और कमर दर्द की शिकायत भी होने लगती है।

6. स्तनों की सर्जरी
स्तनों में पैदा गांठ की वजह से या फिर किसी और कारण से करवाई गई स्तनों की सर्जरी भी स्तनों में होने वाले दर्द का कारण बनता है।

स्तनों में दर्द के अन्य कारण

1. तनाव और डिप्रेशन की वजह से स्तन में दर्द होना
2. कैफिन का ज्यादा सेवन करने से दर्द
3. स्तनों के बाहर दर्द की वजह से
4. यौवन
5. पसली में फ्रैक्चर होने से

कुछ ऐसे टिप्स जिनकी मदद से महिलाओं में होने वाले स्तन के दर्द को दूर किया जा सकता है।

1. रोजाना अच्छी फिटिंग वाली ब्रा पहनें
2. अपनी ब्रा को रोजाना धोएं जिससे संक्रमण से बचा जा सके
3. रात को सोते समय कंफर्टेबल ब्रा पहने
4. व्यायाम के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा पहने
5. अपने आहार में हेल्दी फलों और सब्जियों का सेवन करें।

आज हमने आपको स्तनों में होने वाले दर्द के कारण और निदान बताए। लेकिन अगर दर्द आपको ज्यादा होता है तो इसे बिल्कूल भी हल्के में ना लें। बल्कि किसी चिकित्सक से कंसल्ट करें और इलाज कराएं।

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