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महिलाओं के यौन सुख के बारे में एक रिसर्च में हुआ खुलासा, जानें रोचक तथ्य

महिलाओं के यौन सुख के बारे में एक रिसर्च में हुआ खुलासा, जानें रोचक तथ्य

महिलाओं के यौन सुख के बारे में हम अक्सर भ्रम की स्थिति में रहते हैं. आज हम आपको महिलाओं के यौन सुख के बारे में हुई रिसर्च के कुछ तथ्य बताएंगे जिन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे-
. कनाडा के सोशल साइंटिस्ट के एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि पॉर्न फिल्मों में दिखाई जाने वाली महिलाओं के सिर्फ 18 फीसदी ऑर्गेज्म रियल होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक पॉर्न देखकर ज्यादातर मर्द ये गलतफहमी पाल लेते हैं कि महिलाओं के लिए यौन सुख के चरम पर पहुंचना आसान है जबकि ऐसा होता नहीं है.

. रिसर्च के लिए एक वेबसाइट पर सबसे अधिक देखे गए 50 वीडियो का विश्लेषण किया गया. 18 फीसदी महिलाओं के मुकाबले 78 फीसदी पुरुषों ने रियल क्लाइमेक्स हासिल किया

यूनिवर्सिटी ऑफ क्वीबेक के इस रिसर्च से इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि पुरुष इन वीडियोज से महिलाओं के यौन सुख के बारे में सही समझ नहीं बना पाते. पॉर्न लोगों को सेक्स के बारे में कई गलत चीजें बताता है

. ट्रेसी कहती हैं कि पॉर्न वीडियोज में न सिर्फ ऑर्गेज्म बल्कि सबकुछ फेक होता है

. उन्होंने कहा कि सबसे फ्रस्ट्रेटिंग बात ये है कि हम नहीं जानते हैं कि बेस्ट सेक्शुअल एक्सपीरियंस के क्या सही रास्ते हैं. कामसूत्र इस बात का उदाहरण है.

. एक रिसर्च के मुताबिक पॉर्न का एडिक्शन कोकीन जितना खतरनाक है. इससे पुरुषों के सेक्स लाइफ पर बेहद खराब असर हो सकता है

. कैलिफोर्निया में हुई एक अन्य स्टडी के मुताबिक 22 फीसदी पुरुष पॉर्न देखकर उसी तरह का एक्ट अपने पार्टनर के साथ भी उम्मीद करते हैं.
. इसी साल अप्रैल में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की यौन क्रिया की खास बात ये है कि वे लगातार 20 बार तक ऑर्गेज्म हासिल करने के बाद संतुष्ट होती हैं.

. उस रिसर्च के मुताबिक दो फीसदी महिलाएं लगातार 20 बार चरम सुख तक पहुंचती हैं.

. सिर्फ 8 फीसदी महिलाएं लगातार 10 बार चरम सुख के बाद ही संतुष्ट होती हैं.

. इस सर्वे में 20 से 24 की उम्र की कुल 1,250 लड़कियों ने भाग लिया था. सर्वे में उनसे यौन क्रिया में कामोत्तेजना के बारे में पूछा गया था.

. रिसर्च के मुताबिक सेक्स के दौरान 12 फीसदी महिलाएं दर्द का सामना भी करती हैं.

महिला को संभोग के दौरान ऑर्गेज्म तक पहुंचने में होती है परेशानी, तो हो सकती है ये वजह


सेक्सुअल डिसऑर्डर की समस्या को मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ कर देखा जाता है। इनमें से कुछ शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं जैसे डायबिटीज, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, पेल्विक डिसऑर्डर आदि। यह समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों को हो सकती है। इनके लक्षण काफी मिलते-जुलते होते हैं। जानें,ऑर्गेज्‍म डिसऑर्डर के बारे में विस्तार से।

क्‍या होता है ऑर्गेज्‍म डिस्‍फंक्‍शन 
ऑर्गेज्‍म डिस्‍फंक्‍शन वह स्थिति होती है जब एक महिला को संभोग के दौरान उचित उत्‍तेजना के बाद भी ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऑर्गेज्‍म तक पहुंचना महिलाओं में काफी सामान्‍य है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के मुताबिक हर तीसरी महिला को भरपूर उत्‍तेजना के बाद भी ऑर्गेज्‍म नहीं होता। महिलाओं में ऑर्गेज्‍म डिस्‍फंक्‍शन को एनोग्रास्मा अथवा फीमेल ऑर्गेज्मिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है। हालांकि पुरुषों में यह समस्‍या महिलाओं की अपेक्षा कम होती है।
क्‍यों होता है ऑर्गेज्मिक डिसऑर्डर 
ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में होने वाली परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ये कारण मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के हो सकते हैं इसलिए ऑर्गेज्मिक डिसऑर्डर के लिए किसी एक कारण को रेखांकित करना मुश्किल हो जाता है।

ऑर्गेज्मिक डिस्‍ऑर्डर के कारण

उम्र 
उम्र इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। ज्‍यों-ज्‍यों आपकी उम्र बढ़ती जाती है उनके लिए ऑर्गेज्‍म हासिल करना मुश्किल होता जाता है। महिलाओं में मेनोपॉज इसका एक अहम कारण हो सकता है।

झिझक 
कई बार साथी सेक्‍स को लेकर झिझकते रहते हैं। इससे भी वे सेक्‍स के पूरे आनंद से वंचित रह जाते हैं। महिलाएं अक्सर सेक्‍स के दौरान अपने साथी को अपनी पसंद के बारे में नहीं बतातीं। वहीं अधिकतर पुरुष भी अपनी महिला साथी की पसंद और उत्‍तेजना के बारे में जानने की जरूरत नहीं समझते। इससे न तो वे और न ही उनकी साथी ऑर्गेज्‍म प्राप्‍त करते हैं। याद रखें, यदि संभोग के दौरान एक साथी भी असंतुष्‍ट रह गया, तो दूसरा भी चरमानंद नहीं प्राप्‍त कर सकता।

हिस्‍ट्रेक्‍टॉमी 
यदि ऑपरेशन के जरिए किसी महिला का गर्भाशय निकाल लिया गया हो, तो वह ऑर्गेज्‍म प्राप्‍त नहीं कर पाती। कई बार डायबिटीज या किसी मानसिक रोग के कारण भी ऑर्गेज्‍म पाने में दिक्‍कत आती है।

यूं पाएं छुटकारा

- विशेषज्ञ से मिलकर बात करें। दवाओं के बारे में पता करें। यूं ही किसी भी दवा का सेवन न करें और न ही राह चलते किसी नीम-हकीम के पास ही जाएं। अपना पूरा इलाज करवाएं।
- तनाव सेक्‍स का बड़ा दुश्‍मन है। आपको चाहिए कि आप तनाव मुक्‍त रहने का प्रयास करें। यह बेहतर सेक्‍स लाइफ के लिए बहुत जरूरी है। तनाव को दूर करने के लिए आप योग, ध्‍यान, नियमित जीवनशैली आदि तरीके अपना सकते हैं।

- साइकोथेरेपी की मदद लें। इससे सेक्सुअल डिसऑर्डर से ग्रस्त लोगों का इलाज किया जा सकता है। यह इस बीमारी को ठीक करने का बहुत ही आम तरीका है। इस थेरेपी के दौरान एक पुरुष और एक महिला थेरेपिस्ट के साथ रोगी की मीटिंग कराई जाती है। वे रोगी की समस्याओं को सुनने के बाद इलाज का चुनाव करते हैं।
- सेक्‍स के दौरान अपनी परफॉर्मेंस को लेकर अधिक विचार न करें। अपने मन से यह बात निकाल दें कि आप अपने साथी को संतुष्‍ट कर पाएंगे अथवा नहीं या क्‍या आपका साथी संभोग का पूरा आनंद उठा पा रहा है अथवा नहीं। इन सब बातों के बारे में विचार न करें। सेक्‍स के दौरान उसका आनंद उठाने का प्रयास करें। कई पुरुष इसी डर की वजह से सेक्स से मन चुराने लगते हैं। उसकी इच्छा में कमी आने लगती है।
- कई बार आपके रिश्‍ते में चली आ रही निजी समस्‍याएं भी रिश्‍ते को प्रभावित करती है। आपसी मनमुटाव, भरोसे की कमी, रिश्‍तों में तनाव आदि के कारण आप बिस्‍तर पर एक-दूसरे के साथ होते हुए भी मानसिक रूप से कहीं अलग होते हैं। ऐसी परिस्थिति में सेक्‍स का आनंद उठाने की बात सोचना भी बेमानी है।




ये है महिलाओं की यौन संतुष्टि का राज, रिसर्च में हुआ खुलासा

कनाडा के सोशल साइंटिस्ट के एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि पॉर्न फिल्मों में दिखाई जाने वाली महिलाओं के सिर्फ 18 फीसदी ऑर्गेज्म रियल होते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पॉर्न देखकर ज्यादातर मर्द ये गलतफहमी पाल लेते हैं कि महिलाओं के लिए यौन सुख के चरम पर पहुंचना आसान है. जबकि ऐसा होता नहीं है.


रिसर्च के लिए एक वेबसाइट पर सबसे अधिक देखे गए 50 वीडियो का विश्लेषण किया गया. 18 फीसदी महिलाओं के मुकाबले, 78 फीसदी पुरुषों ने रियल क्लाइमेक्स हासिल किया.

यूनिवर्सिटी ऑफ क्वीबेक के इस रिसर्च से इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि पुरुष इन वीडियोज से महिलाओं के यौन सुख के बारे में सही समझ नहीं बना पाते.


सेक्स एंड रिलेशनशिप एक्सपर्ट ट्रेसी कोक्स के मुताबिक, पॉर्न लोगों को सेक्स के बारे में कई गलत चीजें बताता है.


ट्रेसी कहती हैं कि पॉर्न वीडियोज में न सिर्फ ऑर्गेज्म बल्कि सबकुछ फेक होता है.

उन्होंने कहा कि सबसे फ्रस्ट्रेटिंग बात ये है कि सैकड़ों साल पुरानी ये बात हो चुकी है, फिर भी हम नहीं जानते हैं कि बेस्ट सेक्शुअल एक्सपेरिएंस के क्या-क्या सही रास्ते हैं. कामसूत्र इस बात का उदाहरण है.


एक रिसर्च के मुताबिक, पॉर्न का एडिक्शन कोकीन जितना खतरनाक है. इससे पुरुषों के सेक्स लाइफ पर बेहद खराब असर हो सकता है.

कैलिफोर्निया में हुई एक अन्य स्टडी के मुताबिक, 22 फीसदी पुरुष पॉर्न देखकर उसी तरह का एक्ट अपने पार्टनर के साथ भी उम्मीद करते हैं.


इसी साल अप्रैल में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की यौन क्रिया की खास बात ये है कि वे लगातार 20 बार तक ऑर्गेज्म हासिल करने के बाद संतुष्ट होती हैं.

उस रिसर्च के मुताबिक, दो फीसदी महिलाएं लगातार 20 बार चरम सुख तक पहुंचती हैं.


वहीं 8 फीसदी महिलाएं लगातार 10 बार चरम सुख के बाद ही संतुष्ट होती है. सेलेब्रिटी सेक्सुअल एक्सपर्ट डॉ डेल्विन और डॉ क्रिस्टीनी वेबर ने इसके लिए ऑनलाइन सर्वे किया था.इस सर्वे में 20 से 24 की उम्र की कुल 1,250 लड़कियों ने भाग लिया था. सर्वे में उनसे यौन क्रिया में कामोत्तेजना के बारे में पूछा गया था. डॉ डेवलिन मानते थे कि यौन क्रिया में कई बार चरम सुख (ऑर्गेज्म) तक पहुंचना बहुत कम बार होता होगा.


क्रिस्टीनी वेबर ने कहा कि काफी संख्या में महिलाएं अपने ऑर्गेज्म को लेकर समस्या का सामना भी करती है.रिसर्च के मुताबिक, सेक्स के दौरान 12 फीसदी महिलाएं दर्द का सामना भी करती हैं.



स्वप्नदोष का नाम सुनते ही शर्मिंदा हो जाने वाले पुरुष अब ले सकते हैं राहत की सांस

स्वप्नदोष का नाम सुनते ही शर्मिंदा हो जाने वाले पुरुष अब राहत की सांस ले सकते हैं. इस बीमारी के बारे में माना जाता रहा है कि यह सिर्फ पुरुषों को ही होता है. लेकिन अध्‍ययनों से पता चला है कि महिलाओं को भी स्वप्नदोष होता है.
महिलाओं को भी स्वप्नदोष होता है!

स्वप्नदोष का नाम सुनते ही शर्मिंदा हो जाने वाले पुरुष अब राहत की सांस ले सकते हैं. इस बीमारी के बारे में माना जाता रहा है कि यह सिर्फ पुरुषों को ही होता है. लेकिन अध्‍ययनों से पता चला है कि महिलाओं को भी स्वप्नदोष होता है.

स्वप्नदोष में दरअसल नींद में 'रंगीन' सपनों के माध्यम से ऑर्गेज्‍म का अनुभव होता है और वीर्यपात होता है.
1953 में डॉ अल्फ्रेड किंस्ले ने लगभग 6 हजार महिलाओं पर शोध किया. इनमें से 37 फीसदी महिलाओं ने माना कि 45 साल की उम्र तक कम से कम एक बार उन्हें स्वप्नदोष का अनुभव हुआ है. उन्होंने इसे रात के वक्‍त की उत्तेजना के तौर पर परिभाषित किया, जिससे महिलाएं ऑर्गेज्‍म पाने के लिए जाग उठती हैं. उन्होंने अपने रिसर्च में यह भी पाया कि जिन महिलाओं को अपने सेक्स जीवन में ऑर्गेज्‍म की प्राप्ति कम होती है, उनके साथ स्वप्नदोष की समस्या ज्यादा होती है.

1986 में हुए एक और अध्‍ययन में बारबरा वेल्स ने पाया कि स्वप्नदोष का अनुभव करने वाली महिलाओं में से लगभग 85 फीसदी को यह अनुभव काफी कम उम्र में हुआ. सामान्यत 21 साल की उम्र से पहले और कुछ मामलों में तो 13 साल से भी पहले. 


सेक्सप्लेनेशन्स नाम की किताब लिखने वाले डॉ बेली के अनुसार, नींद में भावनाओं पर हमारा नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है और हमारी दबी हुई भावनाएं, चाहतें सांकेतिक तौर पर उभरकर समने आ जाती हैं. बेली के अनुसार, कई महिलाएं नींद में अपेक्षाकृत जल्दी ऑर्गेज्‍म हासिल कर लेती हैं.

सेक्स से संबंधित नियम-कायदों से भी आपका सपना प्रभावित होता है. डॉ. बेली के अनुसार, एक व्यक्ति जिसने सेक्स से संबंधित कठोर नियम-कायदे बना रखे हों, हो सकता है कि सपने में वह उतना ही 'उदार' हो.

Amsterdam University की एक मनोवैज्ञानिक के अनुसार, महिलाओं को स्वप्नदोष होना कोई बहुत हैरानी की बात नहीं है. उत्तेजना के उन पलों में जब वो नींद में ही ऑर्गेज्‍म पा रही होती हैं, तो वे पूरी तरह नींद में नहीं होती हैं.

हालांकि महिलाओं के स्वप्नदोष के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उनकी शारीरिक बनावट इस तरह की होती है कि स्वप्नदोष का ठीक-ठीक अंदाजा उनको भी नहीं लग पाता.

एक महीने में कितनी बार ऑर्गेज्म कर सकती हैं महिलाएं ?

'आर्काइव्स ऑफ सेक्शुअल बिहेवियर' में पब्लिश हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है कि कुछ महिलाएं एक महीने में 55 बार तक ऑर्गैज्म कर सकती हैं. यहां हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी बार ऑर्गैज्म हासिल करने वाली इन महिलाओं ने किसी पुरुष के साथ इंटरकोर्स नहीं किया था.

जी हां, इन महिलाओं ने पुरुषों के साथ नहीं बल्कि फीमेल पार्टनर संग सेक्स किया. इस रिसर्च से जुड़े और भी कई हैरान करने वाले नतीजे सामने आए हैं.

अनुसंधानकर्ताओं ने 3 हजार महिलाओं को 2 अलग-अलग कैटिगरी में रखा. पहली कैटिगरी में वैसी महिलाएं जिनका प्राइमरी पार्टनर पुरुष था और दूसरी कैटिगरी उन महिलाओं की जिनकी प्राइमरी पार्टनर महिला थी.

इसके बाद इन महिलाओं से यह सवाल पूछा गया कि वे कितनी बार ऑर्गैज्म करती हैं, कितनी बार सेक्शुअल ऐक्टिविटीज में शामिल होती हैं और किस तरह की सेक्शुअल ऐक्टिविटी उन्हें पसंद है. रिसर्च में शामिल महिलाओं की सेक्शुअल गतिविधियों पर 4 हफ्ते तक नजर रखी गई.
रिसर्च के नतीजों के मुताबिक लेस्बियन महिलाओं ने 1 महीने में 10 बार सेक्स किया जबकि नॉर्मल कपल्स ने 1 महीने में 15 बार सेक्स किया. लेकिन सेक्स की फ्रीक्वेंसी का फीमेल ऑर्गैज्म से कोई संबंध नहीं था.

ऐसी महिलाएं जो फीमेल पार्टनर के साथ थी वे 3 गुना ज्यादा ऑर्गैज्म महसूस करती थीं उन महिलाओं की तुलना में जिन्होंने पुरुष पार्टनर संग इंटरकोर्स किया.

रिसर्च में बताए गए स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, 95 प्रतिशत पुरुष पार्टनर वाली महिलाओं ने बताया कि उनके पुरुष पार्टनर हर बार ऑर्गैज्म महसूस करते हैं. जबकि सिर्फ 73 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि उनकी फीमेल पार्टनर हर बार ऑर्गैज्म महसूस करती है.

पुरुष पार्टनर की तुलना में महिला पार्टनर के साथ रहने वाली महिलाएं ज्यादा ऑर्गैज्म महसूस क्यों करती हैं इसका कारण यह है कि हेट्रोसेक्शुअल कपल जब इंटरकोर्स करते हैं तो उनका मुख्य फोकस पेनिट्रेटिव सेक्स पर होता है और इसमें महिलाओं को क्लाइमैक्स तक पहुंचने में मदद मिले ऐसा जरूरी नहीं है.

इस प्रक्रिया में मेल ऑर्गैज्म को सेक्स सेशन का फिनाले माना जाता है और इस दौरान महिलाओं को ऑर्गैज्म महसूस हुआ या नहीं इस बात को तवज्जो नहीं दी जाती.


लड़कियों की ये आदतें कर देती है बेडरुम में पार्टनर का मूड ऑफ, ये गलतियां करने से बचें
बेडरुम में लवमेकिंग के दौरान पार्टनर्स को दोनों की पसंद और नापसंद का ख्‍याल रखना जरुरी होता है। और ज़्यादातर कपल्स ऐसी कोशिश भी करते हैं। इसीलिए लवमेकिंग के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि सेक्स के दौरान आप ऐसी कोई गल‍ती न करें, जो कि बेडरुम में आपके पार्टनर का मूड ही खराब कर दें।

खासतौर पर महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्‍यान रखना होता है। बेडरूम में फीमेल पार्टनर्स को इन गलतियों को करने से बचना चाह‍िए, ताकि उनके पार्टनर का मूड ऑफ न हो जाएं।


उन्‍हें एक्‍साइटेड फील कराएं, बोरियत नहीं

कई महिलाएं उम्मीद करती हैं कि उनके पार्टनर उन्हें लुभाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाएं , जबकि वो खुद ऐसी कोशिश कभी नहीं करती। लेकिन सभी पुरुषों को यह बात पसंद नहीं आतीं। पुरुष चाहेंगे कि आप बेडरुम में महिलाओं से बहुत सारी उम्मीदें रखते हैं। महिलाओं को भी पहल करनी चाह‍िए। थोड़े जतन आप भी करें और उन्‍हें थोड़ा स्‍पेशल महसूस कराएं।
हाइजीन रहें

हालांकि आप और आपके पार्टनर एक दूसरे के साथ कम्‍फर्टेबल हो गए हैं तो इसका ये मतलब नहीं है कि आप हाइजीन की तरफ ध्‍यान नहीं देगी। आपने कई बार सेक्स कर लिया है इसलिए आप अपने प्यूबिक हेयर साफ करने की नहीं सोचतीं हैं। ध्‍यान रहे कि मर्दो को साफ सुथरी महिलाएं खूब लुभाती है। इसल‍िए सफाई पर खास ध्‍यान दें।
चोट न पहुंचा दें
लवमेकिंग के दौरान दोनों लोग बहुत उत्तेजित हो जाते है इस दौरान पार्टनर को उत्तेजित करने के लिए उन्हें यहां-वहां लब बाइट ना दें। इस तरह न केवल उन्हें तकलीफ होगी बल्कि गहरे घाव भी हो सकते हैं। इसके अलावा उन्‍हें नाखून न चुभा दे इससे भी उन्‍हें घाव पहुंच सकता है।


भरपूर एंजॉय करें

सेक्‍स का दूसरा नाम है एंजॉय, लेकिन बहुत सी महिलाओं को इस बात की चिंता सताती रहती है कि सेक्स के दौरान वे कैसी दिख रही हैं। ऑवरथिकिंक के चक्‍कर में आप एन्जॉय नहीं कर पाएंगी। वैसे भी लवमेकिंग के दौरान आपका पार्टनर आपके सेक्‍स अपील से आकर्षित होता है। रूप-रंग या ड्रेस से उसे कोई मतलब नहीं होता है।
संतुष्टि है जरुरी
अगर आपको ऑर्गैज़्म नहीं महसूस हो रहा तो फेक ऑर्गैज़्म का नाटक ना करें। अगर आपको कई बार सेक्‍स करने के बाद भी ऑर्गेज्‍म नहीं महसूस हुआ है तो इस बारे में आपके पार्टनर से बात कीजिए इस तरह आप दोनों की समस्या हल हो जाएगी। क्‍योंकि एक बेहतर सेक्‍स के ल‍िए संतुष्टि बहुत जरुरी है।




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