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कमर दर्द में बेहद कारगर हैं कुछ ऐसे घरेलू उपचार


कमर दर्द में बेहद कारगर हैं कुछ ऐसे घरेलू उपचार


कमर इंसानी काया का ऐसा हिस्सा है जो रीढ़ की हड्डी से सीधा जुड़ा होता है। रीढ़ मानव शरीर का ऐसा भाग है जिसमें विकृति आने से इंसान बेहद तकलीफ का अनुभव करता है। अत्यधिक शारीरिक श्रम या फिर चोट मोच के चलते आमतौर पर होने वाला कमर दर्द तकलीफ का कारण बन सकता है। दर्द चाहे जिस भी वजह से हो लेकिन कमर दर्द का घरेलू उपचार बेहद असरदार साबित होता है। दैनिक दिनचर्या के बदलाव या फिर मानसिक तनाव की वजह के कई बार हार्मोनल हार्मोनल विसंगतियां इस तरह के दर्द का प्रमुख कारण बन जाती हैं। इसके अलावा गठिया रोग या फिर अनुवांशिक कारणों से भी लोगों को ऐसी समस्या से दो चार होना पड़ता है। कमर की समस्या के प्रमुख कारण और उसके घरेलू उपाय शरीर को कितना बेहतर बना सकते हैं यह लेख काफी मददगार साबित हो सकता है।

कमर दर्द कारण ओर जटिलताएं।
एक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक देश में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में इस तरह की समस्याओं को बहुतायत देखा जाता है। हालांकि ज्यादा शारीरिक श्रम करने वाले पुरुषों में रीढ़ की हड्डी के संक्रमण या फिर खिंचाव से भी यह दर्द बढ़ जाता है। कमर के दर्द से आज देश का एक बड़ा युवा तबका परेशान है। मसलन बढ़ते प्रदूषण और खानपान की गुणवत्ता से समझौता युवा पीढ़ी पर भारी पड़ रहा है। किडनी संक्रमण के चलते अक्सर ऐसे दर्द सामने आते हैं। महिलाओं में यह समस्या अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान देखी जाती है। इस दौरान शरीर में कैल्शियम की मात्रा का सामान्य ना होना तकलीफ देता है तो कामकाजी महिलाएं भी इस तरह की समस्या से दो चार होती हैं। भारी चोट या हड्डियों के चटकने से कई बार रीढ़ के बोन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। नर्म ऊतकों में संक्रमण सहित कई अन्य कारण वास्तव में कमर दर्द की विसंगतियों को जटिल बना देते हैं।
कमर दर्द का घरेलू उपचार में लाभकारी है अजवाइन पानी।

कमर दर्द का घरेलू उपचार अजवाइन पानी से किया जा सकता है। आमतौर पर कब्ज या वात, पित्त जैसी समस्याओं के चलते भी दर्द का होना आम बात है। अजवाइन में मौजूद वात-पित्त रोधी गुण इसका निवारण करते हैं। सुबह खाली पेट अजवाइन पानी गुनगुने रूप में सेवन करने से काफी लाभ प्राप्त होता है। अजवाइन पानी के सेवन से जहां वैली फैट से निजात मिलती है तो दूसरी तरफ यूरिक एसिड से हो रहे कमर दर्द से छुटकारा मिलता है। यह शरीर से अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाल कर मांसपेशियों भवन मौजूद नर्म ऊतकों की सुरक्षा करता है। नियमित रूप से करीब एक माह तक इसका सेवन लाभकारी होता है। इसके अलावा तवे पर भूनकर एक चम्मच अजवाइन को गुनगुने पानी से सेवन करने से कमर दर्द में अप्रत्याशित लाभ होता है।
कमर दर्द में बेहतर विकल्प है मसाज।
ज्यादा देर एक जगह खड़े होकर काम करने या फिर एक जगह बैठकर दफ्तर का काम निपटाने से कमर दर्द होना स्वाभाविक है। इस स्थिति में हल्का मसाज काफी कारगर साबित हो सकता है। किचन में मौजूद सरसों तेल को गुनगुना कर उसमें एक चुटकी कपूर मिला लें। इस लेप को हल्के हाथों से कमर से लेकर रीढ़ की हड्डी पर मसाज करें। करीब 5 से 7 मिनट इसकी पुनरावृत्ति करें। याद रहे ज्यादा तेज हाथों से कमर पर दबाव न डालें। ज्यादा दबाव पड़ने से मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। इसके अलावा गुनगुने पानी से नहाने से भी कमर की समस्या दूर हो सकती है। मसाज के तहत ऑलिव ऑयल का प्रयोग भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। मालिश करने से कमर की मांसपेशियों में नई ऊर्जा के संचरण होने के साथ ही नसों में खून का संतुलित प्रवाह होना आरम्भ होने लगता है।
कमर दर्द में कारगर है मौसमी फलों का सेवन।
कमर दर्द का घरेलू उपाय में मौसमी फलों का सेवन काफी महत्वपूर्ण होता है। आमतौर पर गर्मियों के मौसम में संतरा और अमरूद का सेवन लाभकारी होता है। यूरिक एसिड से परेशान होने पर संतरे का जूस नियमित रूप से सुबह शाम पीना लाभकारी होता है। इसके अलावा अमरूद में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम सहित आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। एक अमरूद का नियमित तौर पर सेवन काफी लाभ पहुंचता है। इसके अलावा गाजर और पपीते का सेवन लाभकारी होता है। शरीर को लू से बचाने के लिए नीबू पानी का सेवन जहां यूरिक एसिड को संतुलित करता है तो वहीं शरीर को निर्जलीकरण से भी बचाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक संतुलित मात्रा में फलों का सेवन करें इनकी मात्रा ज्यादा होने पर पेट में कब्ज की शिकायत हो सकती है।
कमर दर्द में लाभकारी है हरी पत्तेदार सब्जियां।

कमर दर्द का घरेलू उपचार करने में हरी पत्तेदार साग सब्जियां काफी लाभकारी और गुणकारी होती हैं। हरी पालक सहित सोया और मेंथी को एक साथ मिलाकर जूस बनाकर पीने से भी काफी लाभ मिलता है। उसके अलावा इनका साग बनाकर या फिर सलाद में सेवन करने से शरीर में कैल्शियम की मात्रा का संचार होने लगता है। पालक, ऑयरन ओर फॉलिक एसिड का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। गर्भस्थ महिलाओं में कमर दर्द ऑयरन ओर फोलिक एसिड की कमी से भी होने लगता है। इस दौरान हमेशा इस तरह के साग का सेवन लाभकारी होता है। बंद गोभी के साथ पत्तेदार गोभी में प्रचुरता के साथ कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है। इसका सेवन भी कमर के दर्द में लाभ दिल सकता है। गाजर के साथ ही हरी धनिया का सेवन काफी लाभदायक माना जाता है। करेले के जूस का सेवन करने से कमर की हड्डियों में मौजूद जोड़ मजबूत होते हैं तथा शरीर के अन्य भागों में गठिया के प्रकोप से भी निजातप्राप्त होती है।
कमर दर्द से संबंधित जरूरी सलाह/सुझाव।
साधारण दर्द होने की स्थिति में कभी भी एलोपैथी दवाओं का इस्तेमाल नही करना चाहिए। इंसान की यह आदत शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। कमर दर्द का घरेलू उपचार जहां शरीर को बिना साइड इफेक्ट के दर्द से राहत पहुंचाता है तो दूसरी तरफ सस्ता उपाय भी होता है। गर्मियों के मौसम में इस तरह की समस्या निर्जली करण की वजह से भी देखी जाती है। ऊपर दिए गए होम रेमेडीज बेहद कारगर और उपयोगी होते हैं लेकिन उपयोग से पहले उनकी मात्रा के बारे में जानना बेहद आवश्यक होता है। लू से बचाव के लिए खीरे और नींबू का सेवन करते रहना चाहिए तो वहीं ज्यादा समस्या होने पर फौरन चिकित्सकीय सलाह से उपचार करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।कमर का दर्द – Back Pain in Hindi


बढ़ती उम्र के साथ कमर में दर्द एक आम बात होती है लेकिन आज के दौर में यह समस्या हर उम्र के लोगों में घर बनाती जा रही है. मसलन बच्चे, युवा भी आज इस रोग से बुरी तरह जूझ रहे हैं. यह समस्या हो जाने पर पर चलना तो दूर हिलने डुलने में दिक्कते आती हैं. योग सहित चिकित्सा के कुछ साधन कमर दर्द में राहत पहुंचाने का काम करते हैं।

कमर दर्द का कारण
बदलते मौसम की वजह से कमरदर्द
कमर दर्द के लक्षण
पुरुषों में कमर दर्द
महिलाओं में कमर दर्द
कमर दर्द होने के पहले रोकथाम
कमर दर्द होने के बाद रोकथाम
एलोपैथ से कमर दर्द का इलाज़
यूनानी से कमर दर्द का इलाज़
आयुर्वेद से कमर दर्द का इलाज़ं
होम्योपैथ से कमर दर्द का इलाज़
कमर दर्द होने पर क्या करें क्या ना करें


कमर दर्द का कारण
एक सर्वे के मुताबिक़ देश के करीब 15 फ़ीसदी लोग किसी ना किसी समस्या के चलते कमर दर्द से परेशान हैं. इस तरह की समस्या के कई कारण हो सकते हैं.
अनियमित दिनचर्या से भी कमर में दर्द होने की संभावना बनी रहती है
ज्यादा देर एक जगह बैठकर काम करने से भी इस समस्या का होना आम बात है.
मोटापा इस तरह की समस्या का बड़ा कारण माना जाता है
हार्मोनल परिवर्तन भी कमर दर्द का कारण बन जाता है
पुरानी चोट भी इस तरह की समस्याओं को जन्म देती है
वात कफ और पित्त जैसी समस्याएं भी इसका कारण बन जाती है
किडनी रोग या आन्तरिक समस्याओं के चलते कमर दर्द हो सकता है
शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाने से यह समस्या हो सकती है

बदलते मौसम की वजह से कमरदर्द

सर्दियों के शुरू होते ही बूढ़े बुजुर्गों में कमर दर्द की समस्या होना शुरू हो जाती है. इसके अलावा युवा वर्ग भी इस मर्ज़ से नही बच पाता. सर्दियों में होने वाली कमरदर्द की सबसे बड़ी वजह होती है मांशपेशियों में संकुचन की वजह से यह समस्या बन जाती है. बायुमंद्लीय दबाव और अत्यधिक नमी के चलते नसों का संकुचन कमर में सूजन लाता है. इसके अलावा बारिश के महीनों में तेज हवा के चलते कमोवेश पुरवाई हवा के चलते पुरानी चोट का उभरना आम बात है. यदि कभी आपकी कमर में मोच या चोट लगी होती है तो इस मौसम में दर्द का बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है.

कमर दर्द के लक्षण
कमर रीढ़ की हड्डियों पर टिकी होती है. रीढ़ की हड्डियों में दो डिस्क होती है जो शरीर के झटकों को सहन करती है.
कमर दर्द होने के दौरान रीढ़ की हड्डियों में संकुचन महसूस होता है
कमर के आसपास सूजन महसूस हो सकती है
कमर के आसपास नशों हड्डियों में पीड़ा का अनुभव होता है
कभी कभी दर्द कमर से होकर पैर तक पहुँच जाता है
इस रोग में वजन भी घटना शुरू हो सकता है
पेशाब में जलन पीड़ा या मल त्याग में परेशानी हो सकती है
नितम्बों में सुन्नता आ जाना या फिर बुखार का भी अनुभव हो सकता है

पुरुषों में कमर दर्द

पुरुषों में बढ़ता वजन कमर या पीठ दर्द का बड़ा कारण माना जाता है. शरीर के मध्य भाग में भारीपन से रीढ़ की हड्डियाँ कमजोर पड़ना शुरू हो जाती हैं. अर्थराइटिस ऐसा रोग है जो बुढ़ापे में एक आम रोग बनता जा रहा है लेकिन अब युवा पीढ़ी भी इसकी जद में आ चुकी है. एक सर्वे के मुताबिक़ धूम्रपान और अल्कोहोलिक पुरुष इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं. किडनियों में यूरिक एसिड की मात्रा का जम जाना भी इस तरह के रोग का बड़ा कारण माना जाता है. इसके अलावा पुरानी चोट भी कभी कभार उभरकर सामने आ जाती है जिसके चलते यह समस्या हो जाती है



महिलाओं में कमर दर्द

पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा कोमल होती हैं. कुछ आंतरिक संरचना के चलते महिलाएं पुरुषों से भिन्न होती हैं. गर्भावस्था के दौरान कमर दर्द एक आम समस्या है. एक सर्वे के मुताबिक़ 20 से 50 साल की उम्र में करोड़ों लोग इस समस्या का शिकार हो जाते हैं.

अधिकतर महिलायें श्वेतप्रदर-रक्तप्रदर जैसी बीमारी से परेशान रहती हैं। खान-पान, रहन-सहन तथा सामाजिक वातावरण के दुष्प्रभावों के कारण इन बीमारियों से ग्रस्त होकर नवयुवतियां धीरे-धीरे शारीरिक शक्ति खोने लगती हैं. इसके चलते कमर में दर्द का होना एक समस्या बन जाती है. महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन एक बड़ी समस्या होती है जिसके चलते उन्हें यह कष्ट ज्यादा सहना पड़ता है.

आमतौर पर 12 साल यानि पीरियड के दौरान से लेकर करीब 50 साल की उम्र वाली महिलाओं को कमर दर्द सहन करना पड़ता है जबकि इसके बाद की उम्र वाली महिलाओं में अर्थराइटिस जैसे रोगों के लक्षण देखे जाते हैं.

कमर दर्द होने के पहले रोकथाम
कमर हमारी शारीरिक संरचना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. उठने बैठने से लेकर चलने फिरने तक में इसका बड़ा योगदान होता है. इसमें दर्द ना हो इसके लिए कुछ टिप्स अपनाने महत्वपूर्ण होते हैं
अनियमित दिनचर्या से बचने की जरूरत होती है
किसी भी कुर्सी पर बैठकर लगातार काम करने से बचें
महिलाएं गर्भावस्था के दौरान विशेष ख़याल रखें
नियमित दिनचर्या अपनाएं
खानपान की गुणवत्ता बनाएं रखें
योगा और व्यायाम नियमित रूप से करें
आहार में प्रोटीन और विटामिन्स को प्रचुरता से शामिल करें
अल्कोहल या धूम्रपान से बचें

कमर दर्द होने के बाद रोकथाम

कमर में दर्द चाहे जिस वजह से हो जब यह पीड़ा देता तो बहुत दुखदाई हो जाता है. यदि आपकी कमर में दर्द शुरू हो गया है तो इससे बचने के लिए कई तरह के तरीके मौजूद हैं. आधुनिक दौर में चिकित्सा विज्ञान ने नए आयाम स्थापित किए हैं जिसके चलते कई तरह की चिकित्सा पद्धतियाँ मौजूद हैं. मसलन एलोपैथ, आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ.

एलोपैथ से कमर दर्द का इलाज़

एलोपैथ एक ऐसी चिकित्सा व्यवस्था है जिसके चलते इंसान को दर्द में फौरी राहत मिल जाती है. चोट लगने के चलते हो रहे कमर दर्द में कई तरह के दर्द नाशक क्रीम और स्प्रे बाजार में आसानी से मिल जाते हैं. इसके अलावा इस रोग में दर्दनिवारक दवाओं के अलावा एंटीबायोटिक का भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि दर्द में इस विधा से कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है लेकिन बाद में दवाओं के दुष्परिणाम या साइड इफेक्ट शरीर पर बुरा असर डालते हैं.

यूनानी से कमर दर्द का इलाज़
यूनानी दवाएं कमर दर्द में सबसे ज्यादा असरदार होती हैं. इस चिकित्सा से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है यह बात कई शोध में कही गई है. कमर दर्द के लिए यूनानी में कई पद्धतियाँ इजाद की गई हैं मसलन डाइटोथेरेपी, फार्माकोथेरेपी और रेजिमेंटल थेरेपी प्रमुख हैं हालांकि इस विधा से इलाज़ के दौरान खानपान में कई तरह के परहेज भी करना पड़ता है.

आयुर्वेद से कमर दर्द का इलाज़

सदियों से हमारा देश आयुर्वेद का बड़ा ज्ञाता रहा है. वेदों पुराणों में आयुर्वेद की कई तकनीक आज भी मरीजों का समूल इलाज़ करने का दावा करती है. कमर दर्द में अश्वगंधा, शिलाजीत, नारियल तेल और अरंडी सहित दशमूल जैसी औषधियां बिना किसी साइड इफ्फेक्ट के राहत पहुंचाती हैं.

होम्योपैथ से कमर दर्द का इलाज़

ऐसा माना जाता है कि होम्योपैथ की दवाएं शरीर में मौजूद कई तरह के साइड इफेक्ट ख़त्म कर देती हैं. मसलन कमर दर्द चाहे जिस वजह से हो रहा हो इस विधा में कई तरह की दवाइयां मौजूद होती हैं. मसलन अर्निका क्रीम या केलनडुला ऑफिसिनसीड जैसी दवाइयों से कमर दर्द का उपचार किया जाता है. दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है.

कमर दर्द होने पर क्या करें क्या ना करें

कमर या पीठ का दर्द होने पर कुछ बातों का ख़ास ख्याल रखना पड़ता है.
भोजन में वसा का कम से कम प्रयोग करें
दैनिक आहार में दूध फल और हरे पत्तेदार साग सब्जियों का सेवन करें
अंकुरित बीजों का सेवन करें
अल्कोहल को एकदम से ना कहें
धूम्रपान से बचें
ज्यादा मात्रा में पानी पीयें
दिनचर्या में सुधार करें/ नियमित करें
ज्यादा शारीरिक श्रम से बचें
नियमित योगा और व्यायाम करें
खाने के बाद कुछ दूर पैदल चलें
एक जगह बैठकर काम करने से बचें
किसी बी एक जगह ज्यादा देर तक खड़े ना हों
खट्टे और ज्यादा मीठे पदार्थों को खाने से बचें


सेहतमंद आहार दिला सकता है पीठ दर्द से निजात

पीठ में दर्द अक्सर सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है। बदलते मौसम खासकर गर्मी में पीठ दर्द में खानपान जहां दर्द को कम करता है तो स्वस्थ खानपान हड्डियों के जोड़ों के लिए रामबाण होता है। चिकित्सा विज्ञान में यह बात साबित हो चुकी है कि खान पान या आहार से समझौता करना ही हड्डियों के लिए सबसे बड़े दुश्मन का काम करता है। पीठ की परेशानी वैसे तो कई कारणों के चलते हो जाती है। एक जगह ज्यादा देर तक बैठकर काम करने या फिर गलत तरीके से बैठने से भी हड्डियों में दर्द सामान्य होता है। पीठ पर ज्यादा वजनी समान ढोने से लेकर अत्यधिक शारीरिक श्रम भी इस तरह की विसंगतियों का बड़ा कारण माना जाता है। एक स्वास्थ्य सर्वे की मानें तो गलत खान और अल्कोहल के लती लोगों में इस तरह की जटिलताओं का होना सामान्य होता है। इसके अलावा चोट मोच भी दर्द का बड़ा कारण बन जाते हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि फेफड़ों में संक्रमण या फिर ट्यूबरक्लोसिस जैसे खतरनाक रोग भी पीठ की दर्द का बड़ा कारण माने जाते हैं। उपचार के तरीकों को अपनाकर इस तरह की समस्याओं को दूर तो किया जाता है लेकिन दर्द हो नही इसके लिए आहार या खान पान की गुणवत्ता बनाये रखना बेहद जरूरी होता है। इस लेख से गर्मियों के मौसम में पीठ की समस्या में क्या खाएं यह तो जानेंगे ही साथ ही जटिलताओं के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
पीठ दर्द से सम्बंधित मुख्य जटिलताएं।



सामान्य जीवन में हल्की चोट या मोच के चलते होने वाला पीठ दर्द हो या फिर गलत तरीके से सोने, उठने ओर बैठने से यह सामान्य श्रेणी का होता है। ऐसी समस्या के दौरान जोड़ों के ऊतकों में हल्का खिंचाव सहित मांसपेशियों में जकड़न होती है जो हल्की मालिश के बाद स्वतः समाप्त हो जाती है। पीठ हमारी रीढ़ की हड्डियों को आपस में जोड़े रखने के साथ ही इसका सीधा संबंध हृदय और सीने की हड्डियों से भी होता है। के कारणों के चलते फेफड़ों में होने वाला संक्रमण सेवधे तौर पर पीठ को प्रभावित करता है। आंतरिक संक्रमण के चलते दर्द की स्थिति बेहद जटिल हो जाती है और कई बार जीवन भी संकट में पड़ जाता है। इंसान अपनी दैनिक दिनचर्या में खानपान के महत्व को नजरअंदाज कर गलत खान पान या आहार की तरफ बढ़ता है। इंसानी आदत का यही हिस्सा उसे भारी पड़ता है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के चलते भी कई बार ऐसा देखा गया है कि पीठ में दर्द हो ही जाता है। पीठ दर्द की जटिलताओं में टीबी रोग से लेकर गठिया रोग बेहद जटिल स्थिति पैदा कर देती है।
पीठ दर्द में लाभदायक है ताजा फलों का जूस।


गर्मी में पीठ दर्द में खान पान के लिए ताजे फलों का जूस बेहद अहम होता है। मौसमी फलों में लीची, संतरा, अंगूर सहित गाजर के जूस हड्डियों के जोड़ों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। गर्मी के मौसम में जूस का सेवन पीठ दर्द भगाने का एक अहम तरीका माना जाता है। जूस पीने के अलावा सीधे तौर पर भी हम फलों का सेवन कर सकते हैं। फलों में परोक्ष रूप से कैल्शियम और खनिज तत्वों की मौजूदगी होती है जो शरीर से अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालकर हड्डियों को स्वस्थ बनने का काम करती हैं। इंसान को अपने वजन के अनुसार फलों के जूस का नियमित सेवन करने की आवश्यकता होती है। ज्यादा मात्रा में जूस का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। उम्र और वजन के लिहाज से संतुलित मात्रा में फलों का सेवन मांसपेशियों को नई ऊर्जा देता है। आजकल बाजार में रेडी पटरी पर दुकान सजाकर बर्फ मिलाये हुए जूस बेचने वालों से परहेज रखें और नार्मल जूस पियें।
हल्दी वाला दूध का करें भरपूर सेवन।

दूध कई तरह से बाजार में उपलब्ध होता है। अक्सर खबरें आती हैं कि फलां दूध में मिलावट पाई गई! यदि हम गांव में रहते हैं तो देशी गाय या भैंस का दूध सेवन कैल्शियम युक्त भी होता है और मिलावट रहित भी। यदि शहर में हैं तो भी हमें दूध की गुणवत्ता के बारे में जानकर ही उपयोग में लाना चाहिए। मिलावटी दूध शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। दूध ऐसा तत्व है जो गर्मी में पीठ दर्द में खान पान के लिए बेहद उत्तम है। आहार में नियमित तौर पर इसको शामिल करें। शाम को सोने से पहले गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी या फिर एक चम्मच शहद डालकर पीने से पीठ की हड्डियों हुआ संक्रमण भी दूर होने लगता है। हल्दी को आहार में इसलिए भी शामिल करना आवश्यक है क्योंकि यह एक उत्तम गुणवत्ता का एन्टी ऑक्सीडेंट होता है जो हड्डियों में मौजूद फ्लूड की सुरक्षा तो करता ही है साथ ही नर्म ऊतकों के संक्रमण को रोकने में भी काफी कारगर होता है।
गर्मी में पीठ दर्द का आहार के लिए जंक फूड को कहें अलविदा।

आज की युवा पीढ़ी जंक फूड के पीछे दीवानी नजर आती है। अक्सर देखने में आता है कि लोग दफ्तर में कई तरह के जंक फूड ऑनलाइन ऑर्डर कर प्रयोग में लाते हैं। यह हड्डियों के लिए जितना नुकसानदेह है उतना ही शरीर के अन्य भागों के लिए भी। ऐसे खाद्य पदार्थ मोटापा बढ़ाने के साथ ही दिल की बीमारियों को भी बढ़ाने का काम करते हैं। मोटापा बढ़ने से हड्डियों में घर्षण होना स्वाभाविक है। एक मोटा व्यक्ति उठने बैठने में अपनी पीठ को सही दिशा में नही रख पाता जिसके चलते बैक पेन होना स्वाभाविक है। यदि हड्डियों को सुरक्षित रखना है तो जंक फूड को हमेशा के लिए बॉय बॉय बोलना होगा।
गर्मी में पीठ दर्द में आहार के लिए जरूरी सुझाव।


गर्मी के मौसम में पानी सबसे आवश्यक होता है। भोजन के बिना तो कुछ घण्टे रहा जा सकता है लेकिन पानी बिना नही! गर्मियों के मौसम में शरीर को निर्जलीकरण से बचाना एक बड़ी चुनौती होती है। इस मौसम में लू के थपेड़े चलते हैं। जब भी पीठ दर्द महसूस जो तब हर एक घंटे पर थोड़ा थोड़ा पानी ग्लूकोज के साथ या नीबू के साथ लेते रहें। इसके अलावा हरे पुदीने का रस पानी में मिलाकर लेते रहने से दर्द से भी राहत मिलती है साथ ही शरीर मे पानी की भी कमी नही रहती। ऊपर दिए गए आहार के तरीके फायदा तो पहुंचाते हैं लेकिन पीठ दर्द ज्यादा बढ़ने पर चिकित्सकी परामर्श आवश्यक हो जाता है।






कमर दर्द में होम्योपैथिक कितना असरदार
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आमतौर पर कमर में दर्द हो जाना किसी बड़े रोग का संकेत नही होता. जब यह दर्द दवा खाने के बाद भी ना मिटता हो तब किसी आंतरिक तकलीफ़ की तरफ अंदेशा होना स्वाभाविक है. अमूमन ऐसे दर्द चोट, मोच या फिर हड्डियों के रेशों में हो रहे विकारों के द्वारा भी हो सकते हैं. यदि इन वजहों से कमर की समस्या हो रही है तो डरने वाली बात नही है. कभी कभार शरीर में कमर की पीड़ा आंतरिक रोगों की वजह भी बन जाता है. इन रोगों में किडनी की समस्या सबसे मुख्य वजह होती है.

किडनी में यूरिक एसिड की अधिकता से इस तरह की समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है. भागदौड़ भरी जिन्दगी में इंसान अपने खानपान पर नियंत्रण खो बैठता है. खानपान और जीवनशैली में अचानक हुए परिवर्तन से आंतरिक अंगों पर बुरा असर पड़ता है. मसलन हमारे विश्व पटल पर कई तरह की दवाइयां इजाद की गई हैं जो दर्द रोकने का काम करती हैं लेकिन इन्ही विधाओं में एक उपचार माध्यम का नाम होम्योपैथी है. होम्योपैथी दवा कमर की पीड़ा को किस तरह कम करती है या इसके क्या फायदे नुकसान हैं आज हम इस लेख के माध्यम से बताने वाले हैं.

होम्योपैथी दवा का कमर दर्द में फायदा
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होम्योपैथी दवाओं को जर्मन पद्धति के उपचार के रूप में जाना जाता है. फायदे की बात करें तो कमर दर्द के स्थाई इलाज के लिए बहुत से मरीज इस विधा का इस्तेमाल करते हैं और भले चंगे भी हो जाते हैं. आपने अपने आसपास कभी भी कुछ लोगों को एक डिब्बे में रखी छोटी चीनी की गोलियों को खाते हुए देखा होगा. यह वही दवाइयां हैं जिन्हें हम उपचार की विधा में होम्योपैथ के नाम से जानते हैं, दर्द की स्थिति में चिकित्सक कुछ गोलियों को एक डिब्बी में डालकर उसमें थोड़ा सा द्रव मिलाते हैं. इस द्रव के साथ ही दवाइयां काफी तीक्ष्ण गंधयुक्त होती हैं मसलन अल्कोहल की मानिंद. इसके साथ ही कुछ द्रव से भरी दवाओं को पानी में डालकर पीने की सलाह भी दी जाती है. इन दवाओं में बल्गेरिस, सल्फर आदि से मरीज के उपचार का दावा किया जाता है. कई शोधों में यह बात सामने आई है कि इस उपचार से कमर दर्द सहित हड्डियों से सम्बंधित विकार दूर हो जाते हैं. इसके अलावा यह यूरिक एसिड को भी शरीर में जमने नही देता है. ख़ास बात यह है कि ऐसी दवाइयां शरीर पर साइड इफेक्ट को भी कम करने का काम करती हैं.
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होम्योपैथिक के नुकसान
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इन दवाओं के लेने से पहले कई तरह के परहेज की सलाह दी जाती है. हालंकि ऐसी दवाएं शरीर पर साइड इफेक्ट तो नही करती लेकिन इनके रियक्शन काफी खतरनाक होते हैं. इस विधा के इस्तेमाल से पहले खट्टी, मीठी, तीखी वस्तुओं के सेवन के साथ ही प्याज लहसुन आदि तक के इस्तेमाल से परहेज बताया जाता है. सबसे कठिन बात यह है कि दर्द के समय यह दवाइयां तुरंत राहत पहुचाने में सहायक नही होती हैं. इन दवाइयों से कैल्शियम सहित किसी भी तरह का पोषण हड्डियों को नही प्राप्त हो पाता है. चिकित्सक की सलाह के बिना इस विधा की दवाइयों के साथ अन्य उपचार माध्यम की दवाइयों का सेवन शरीर के लिए काफी नुकसान पहुंचा सकता है.

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