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पीठ दर्द से संबंधित रोगों के लिए असरदार हैं ऐसे योगासन


पीठ दर्द से संबंधित रोगों के लिए असरदार हैं ऐसे योगासन

योग ऐसा साधन है जिसके निरन्तर क्रियान्वयन से जहां रोगों से मुक्ति मिलती है तो वहीं रोग हो जाने पर भी इसके चमत्कारी लाभ होते हैं। पीठ दर्द में योग एक ऐसा प्राकृतिक तरीका है जिसे अपनाकर काफी हद तक ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है। पीठ की हड्डियों में किसी भी वजह से उठ रहे दर्द को दूर करने के लिए वैसे तो दुनिया मे कई उपचार विधाएं काम करती हैं लेकिन पंचतत्व से बनी इंसानी शरीर को प्राकृतिक तरीके से ऊर्जा प्रदान करने में योगासनों का बेहद अहम किरदार होता है।

पीठ दर्द की समस्या वैसे तो किसी बड़े रोग का संकेत नही होती लेकिन कई बार आंतरिक रोगों के चलते स्थिति भयावह हो जाती है। सामान्य स्थिति वाले दर्द मसलन ज्यादा बोझ उठाने से लेकर गलत तरीके से खड़े होने और खान पान की विसंगतियों के चलते हो जाते हैं। किडनी स्टोन की समस्या या फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति में पीठ का दर्द जीवन को संकट में डाल देता है। ऐसी स्थिति में ट्यूबरक्लोसिस या किडनी फेल्योर जैसी समस्याओं के चलते पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना एक आम लक्षण माना जाता है। इंसान की ऐसी फितरत है कि हल्का सा भी दर्द होने पर तुरन्त फौरी राहत प्रदान करने वाली आधुनिक दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सक की सलाह के लेना शुरू कर देता है। यह आदत भविष्य में उसे बड़ी मुसीबत में डाल देती है। इस लेख के माध्यम से कुछ ऐसे योग के तरीकों पर प्रकाश डालने जी कोशिश है जो शरीर की हड्डियों को मजबूत कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
सर्व हित आसन के पीठ दर्द में फायदे


यह ऐसा आसान है जो पीठ की हड्डियों को नई ऊर्जा तो देता ही है अपितु शरीर मे मौजूद हड्डियों के जोड़ों में मौजूद नर्म ऊतकों और फ्लूड की भी सुरक्षा करता है। खाली पेट सूर्योदय में समय इस योग का अनुपालन करने से शरीर मे पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की आपूर्ति होती है।
आसन की विधि

पैरों को फैलाकर पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथों को कंधे के समानांतर फैलायें। हथेलियों को ऊपर की तरफ रखते हुए टांगों को मुंह की तरह मोड़ लें। इस दौरान पैरों के तलवे को जमीन से लगे रहने दें। अब शरीर को बाईं तरफ झुकाव देते हुए गहरी सांस लें। अब धीरे- धीरे पैरों को फैलाते हुए सांस को छोड़ना आरम्भ कर दें। ऐसी ही स्थिति में दाईं तरफ शरीर को मोड़ते हुए सांस खींचे और थोड़ी देर के बाद शरीर को हल्का करते हुए सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया के दौरान ध्यान देने वाली बात यह है कि बाजू जमीन से लगे हुए होने चाहिए। यह आसन करीब 4 से 5 बार दोहराएं। इस आसन से पीठ की हड्डियों में खिंचाव होता है और मांसपेशियों में नई ऊर्जा का संचरण भी होने लगता है।
आनंद आसन से पीठ दर्द में लाभ

यह सबसे सरल आसान माना जाता है। इसके प्रयोग से जहां शरीर जो आराम मिलता है तो दूसरी तरफ पीठ में दर्द की समस्या भी छूमंतर होने लगती है। इस आसन से मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति से निजात मिलती है तो हड्डियों में रक्त संचार का प्रवाह भी निरंतर बना रहता है।

योग की विधि
जमीन पर चटाई बिछाकर पैरों को फैलाते हुए सीधा लेट जाएं। यदि पीठ दर्द की समस्या से परेशान हैं तो सिर और कंधे के पास तकिया रख सकते हैं। इस स्थिति में शरीर को पूरा हल्का छोड़ दें और आंखों को बंद कर लें। अब गहरी सांस अंदर की तरफ खींचें और धीरे- धीरे सांस को छोड़ते रहें। ऐसा करीब 4 से 5 मिनट करते रहें। ऐसा करने से सीने की मांसपेशियों के साथ रीढ़ के ऊतकों में रक्त संचार बढ़ता है और दर्द दूर होने लगता है। खाली पेट इस आसन को पीठ के बल लेटने के अलावा पेट के बल लेटकर भी किया जाना हितकारी होता है।


वज्रासन या शशांकासन के फायदे
पीठ दर्द के लिए योग में इस आसान का बहुत महत्व होता है। यह ऐसा आसन है जो मानसिक स्थिरता प्रदान करने के साथ शरीर मे कैल्शियम की मात्रा का संचार करता है। इस योग से फेफड़ों के संक्रमण दूर होने लगते हैं तथा रीढ़ की हड्डियों को नई ऊर्जा मिलती है।

आसन कि विधि

जमीन पर पैरों के बल बैठ जाएं। अब घुटनों के बल पर बैठने के साथ पैर की हथेलियों पर शरीर का वजन रखते हुए शरीर को सीधा रखें और हाथ को आगे की तरफ फैलाते हुए हल्का सा झुकाव के साथ गहरी सांस लें। याद रहे ऐसी स्थिति में वजन पैरों के पंजों पर ही रहे। अब हाथों को जमीन पर रखते हुए सिर को झुकाकर सांस छोड़ें। ऐसा आसन खाली पेट करने से पीठ दर्द में लाभ मिलता है। यह आसन 5 से 10 मिनट तक करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित होता है।
पीठ दर्द में हस्त उत्थानासन के लाभ

पीठ दर्द के लिए योग में इस आसन का बेहद अहम भूमिका होती है। इस योग के माध्यम से शरीर की हड्डियों में लचीलापन आता है और मांसपेशियों में आया खिंचाव दूर होने लगता है। इस योग को प्रयोग में लाने से मन को शांति तो प्राप्त होती ही है बल्कि जोड़ों में मौजूद अवशिष्ट तत्व भी बाहर निकल जाते हैं। हस्त उत्थानासन के सटीक प्रयोग से पीठ में मौजूद स्पाइनल कॉर्ड मजबूत होकर हड्डियों के विकास में योगदान देता है। यह योग शरीर को कैल्शियम की प्रचुर मात्रा भी प्रदान करने में सहायक होता है।

योग की विधि

पीठ दर्द के दौरान जमीन पर सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों को समानांतर स्थिति में थोड़ा सा फैलाकर हाथों को भी फैला लें। ध्यान रखें कि इस दौरान रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहे। अब हल्की सांस ऊपर खिंचे और थोड़ी देर ऐसी स्थिति में बने रहें। ऐसा करीब 5 मिनट तक करते रहें और समय-समय पर शरीर को हल्का ढीला छोड़ दें।
योग संबंधित जरूरी सुझाव

पीठ का दर्द होने के दौरान ज्यादा देर तक कठिन योग से बचने की जरूरत होती है। वैसे भी किसी भी योग को यदि किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की देख रेख में किया जाए तो काफी उत्तम होता है।

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