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डायबीटीज से लेकर मोटापा कम करने में मदद करता है आलूबुखारा

डायबीटीज से लेकर मोटापा कम करने में मदद करता है आलूबुखारा, ये हैं अन्य फायदे
आलूबुखारा में समाया है अच्छी सेहत का राज, रोजाना खाएं


आलूबुखारा आपने खूब खाया होगा। गर्मियों में होने वाले इस फल को लोग बड़े ही चाव से खाते हैं। लेकिन क्या आपको इसके फायदों के बारे में पता है? स्वाद में खट्टा-मीठा आलूबुखारा कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। आइए आपको बताते हैं इसके फायदों के बारे में:

​मोटापा दूर करे



यदि आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आप अपनी डाइट में सूखा हुआ आलूबुखारा शामिल कर सकते हैं। सूखा हुआ आलूबुखारा वजन को कम करने का सबसे कारगर तरीका है। यह फाइबर का अच्‍छा स्‍त्रोत होता है। सूखा आलूबुखारा आप स्नैक्स बनाकर भी खा सकते हैं और चाहे तो जूस बनाकर भी पी सकते हैं। आलूबुखारा खाने से आपकी भूख नियंत्रित रहती है और वजन कम करने में मदद मिलती है।


​हडि्डयों की मजबूती


आलू बुखारा में मौजूद विटमिन्स के कारण यह हड्डियों को मजबूत रखने में मददगार है। आलू बुखारे में मौजूद फाइट्रोन्‍यूट्रियंट्स महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में भी सहायक है। इसलिए आलूबुखारे के सेवन से आपकी हड्डियां मजबूत होंगी और हड्डी फ्रैक्‍चर का खतरा भी कम होगा।


​ब्‍लड प्रेशर व कलेस्‍ट्रॉल नियंत्रित

आलूबुखारे के सेवन से ब्‍लड प्रेशर और कलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद फाइबर कलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है। इसलिए आलूबुखारा को रोजाना खाएं, लेकिन ध्यान रहे कि मात्रा सीमित ही हो।

​त्‍वचा के लिए


स्किन के लिए भी आलूबुखारा काफी फायदेमंद है। इसमें ऐंटीऑक्‍सिडेंट्स होते हैं तो त्वचा को चमकदार और हेल्दी बनाने में मदद करते हैं। आलूबुखारा खाने के अलावा इसका फेस पैक बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 1 आलूबुखारा को मैश करें और उसमें, 1 चम्‍मच बेसन और 1 चम्‍मच शहद मिलाकर पेस्‍ट बनाएं और इस पेस्‍ट का अपनी त्‍वचा पर इस्‍तेमाल करें।
​शुगर कंट्रोल में मदद


आलूबुखारा शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। आलूबुखारा में कार्बोहाईड्रेट्स काफी मात्रा में होते हैं। चूंकि इसमें फाइबर भी होता है और वह कार्ब्स को अब्जॉर्ब करने की प्रक्रिया को स्लो कर देते हैं। इसकी वजह से खाना खाने के बाद भी शुगर का लेवल नहीं बढ़ता।

​कैंसर का खतरा कम


आलूबुखारा खाने से कैंसर होने का खतरा कम होता है। इसके अलावा यह हार्ट संबंधी बीमारियों और हड्डियों की बीमारियों में भी कारगर माना गया है।
ल्यूकेमिया की तरफ इशारा करते हैं ये 8 लक्षण, न करें नजरअंदाज


​अनदेखी की तो खतरनाक साबित हो सकते हैं ये लक्षण



ल्यूकेमिया एक तरह का ब्लड कैंसर होता है, जिसमें वाइट ब्लड सेल्स यानी सफेद रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। अगर सही समय पर ल्यूकेमिया के लक्षणों का पता न चले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। हर साल लगभग 10 लाख लोग ल्यूकेमिया के शिकार बनते हैं। अब ल्यूकेमिया किस तरह का है कैंसर का रूप लेने वाली रक्त कोशिका के प्रकार पर निर्भर करता है। यहां कुछ लक्षण बताए जा रहे हैं जो गुपचुप तरीके से शरीर पर वार करते हैं और फिर खतरनाक रूप ले लेते हैं: (फोटो साभार: getty)

थकान महसूस होना


अगर आपको अधिक थकान महसूस हो। नींद पूरी होने के बाद भी आपको ऐसा लगे कि शरीर में जान ही नहीं है और उठ नहीं पा रहे हैं तो फिर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। थकान और कमजोरी तब महसूस होती है जब शरीर में खून की कमी हो जाती है। खून की इसी कमी को अनीमिया भी कहते हैं। (
​बिना किसी इंजरी के भी चोट लग जाना


अगर आपको बिना किसी फिजिकल इंजरी के भी चोट लग जाती है या शरीर के किसी भी हिस्से पर कभी भी काले गहरे या नीले रंग के निशान पड़ जाते हैं, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है। इसके अलावा अगर घाव भरने में अधिक समय ले रहा है तो यह ल्यूकेमिया का लक्षण हो सकता है।


​सिरदर्द

अगर सिर में लगातार दर्द हो तो यह ल्यूकेमिया की तरफ इशारा हो सकता है। इसके अलावा यह सिर में हो रही ब्लीडिंग की ओर भी इशारा करता है। 


​रात में अचानक ही पसीना आना


अगर रात को सोते वक्त आपको अचानक ही पसीना आने लगे तो अपने डॉक्टर से बात करें। इस तरह अचानक ही पसीना आना सामान्य नहीं है। आमतौर पर ऐसा कुछ ऐसे इंफेक्शन की वजह से होता है जिनका सीधा संबंध ल्यूकेमिया से होता है।

​मसूड़ों में सूजन

मसूड़ों में सूजन हमेशा मुंह की गंदगी की वजह से ही नहीं होती बल्कि यह ल्यूकेमिया की तरफ एक इशारा भी हो सकता है।
​बुखार

इस बीमारी के होने से शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। जिसके चलते फ्लू, बुखार आदि हमको घेर लेते हैं। बार-बार बुखार आना इसका लक्षण है। 
​सांस लेने में दिक्कत


अधिक थकान और कमजोरी की वजह से शरीर पर अत्यधिक प्रेशर पड़ता है जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत आने लगती है और व्यक्ति जल्दी-जल्दी सांस लेने लगता है। जरा सी सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस फूलने लगती है। 
​ब्लॉटिंग


अगर स्पलीन का साइज बढ़ जाए तो यह क्रॉनिक या एक्यूट ल्यूकेमिया का लक्षण हो सकता है। स्पलीन का साइज बढ़ने से भूख भी मर जाती है।

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