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जरूर कराएं ब्रेस्टफीडिंग, शिशु के विकास के लिए है जरूरी

जरूर कराएं ब्रेस्टफीडिंग, शिशु के विकास के लिए है जरूरी





कुछ रोगों, जैसे-निप्पल रिट्रैक्शन या फिर शिशु को बोतल की आदत लग जाने के कारण मां में दूध बनना कम हो सकता है. अत: ऐसे में शिशु को ब्रेस्टफीडिंग कराना बंद करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर शिशु को ब्रेस्टफीडिंग कराने का प्रयास करना चाहिए. 
कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिनके कारण मां ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती है. ऐसा किसी रोग के कारण या कुछ अन्य परिस्थितियों में संभव है. अत: ऐसी स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत होती है. ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाने की तीन अवस्थाएं हो सकती हैं -

यदि मां में दूध नहीं बन रहा हो
यदि मां को दूध नहीं बन पा रहा हो, तो इसे लैक्टेशन फेल्योर कहते हैं. यह कई कारणों से हो सकता है. बच्चे के जन्म के तुरंत बाद जो गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) होता है, उसकी मात्रा कम होती है, क्योंकि उतनी ही मात्रा शिशु की भूख को मिटाने के लिए पर्याप्त होती है. 

घरवाले इसे दूध का कम बनना समझ कर शिशु को अलग से गाय का दूध भी पिला देते हैं, जिससे उसका पेट भर जाता है और ब्रेस्टफीडिंग नहीं करता है. चूंकि ब्रेस्ट में शिशु की भूख और ब्रेस्टफीडिंग के अनुसार ही दूध बनता है, तो समय पर ब्रेस्टफीडिंग नहीं करने पर दूध का बनना कम होने लगता है. अत: मांओं को समय पर ब्रेस्टफीडिंग कराते रहना चाहिए. किसी घाव या कट होने की स्थिति में भी लैक्टेशन फेल्योर हो सकता है. ऐसे में घाव या कट का उचित उपचार कराना चाहिए. मानसिक तनाव या डिप्रेशन के कारण भी यह परेशानी हो सकती है. इस अवस्था में मां की काउंसेलिंग करानी जरूरी होती है. 

कभी-कभी मां को प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार नहीं मिल पाते हैं, इस कारण भी यह समस्या हो सकती है. अत: प्रेग्नेंसी के दौरान मां को पोषक तत्वों से भरपूर आहार मिलना चाहिए. यदि मां को कोई रोग जैसे-हाइपरटेंशन, किडनी या हृदय रोग हो, तो भी यह परेशानी हो सकती है. ऐसी अवस्था में तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. वे इसके लिए कुछ उपाय कर सकते हैं. कई बार इसके लिए कुछ दवाइयों और व्यायाम की भी सलाह दी जाती है, जिससे कुछ लाभ होने की संभावना रहती है. 

मां फीड नहीं करा पा रही हो

दूसरी अवस्था में मां में दूध तो बनता है, लेकिन वह फीडिंग नहीं करा पाती है. इसका एक सबसे आम कारण है, निप्पल रिट्रैक्शन या फ्लैट निप्पल. इसके कारण बच्चा निप्पल को पकड़ ही नहीं पाता है. इस कारण बच्चा ब्रेस्टफीडिंग नहीं कर पाता है और इससे धीरे-धीरे ब्रेस्ट में दूध बनना भी कम होने लगता है. यदि यह समस्या हो, तो तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ या गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. इस समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है.


उसके बाद मां आसानी से ब्रेस्टफीडिंग करा सकती है. यदि मां प्रसव के बाद बेहोश हो गयी हो या आइसीयू में हो, तो भी वह ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती है. हालांकि इस तरह के मामले कम होते हैं, लेकिन इस अवस्था में पंप की मदद से ब्रेस्ट मिल्क निकाल कर बच्चे को दिया जाता है. यदि मां को कैंसर या हाइपर थायरॉयड हो और उसकी दवाइयां चल रही हों, तो भी ब्रेस्टफीडिंग कराने से मना किया जाता है. कुछ मानसिक रोगों की दवाइयों के सेवन के दौरान भी ऐसी सलाह दी जाती है. 

शिशु फीड नहीं कर पा रहा हो
तीसरी अवस्था में मां में दूध तो बनता है, लेकिन बच्चा फीड कर पाने में असमर्थ होता है. ऐसा आमतौर पर प्री-मेच्योर बेबी में होता है. मां को घबराना नहीं चाहिए और डॉक्टर की सलाह से उसे ब्रेस्टफीडिंग कराने का प्रयास करना चाहिए. कुछ रेयर केस में बच्चों में कुछ मेटाबॉलिक रोगों के कारण भी डॉक्टर ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराने की सलाह देते हैं. कुछ लोगों को भ्रम होता है कि सिजेरियन से डिलिवरी होने पर मां का दूध सूख जाता है. यह गलत है. ऐसा तभी हो सकता है, जब बच्चे को बोतल के निप्पल की आदत लग गयी हो या फिर मां का दूध ठीक से नहीं उतरा हो. अत: ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. 
कम दूध होने के कारण
- देर से दूध पिलाना
- बोतल से दूध पिलाना

- पानी, मिश्री आदि देना
- छाती में दर्द या सूजन होना
- आत्मविश्वास की कमी
दूध बढ़ाने के उपाय
- जन्म के तुरंत बाद ही दूध पिलाना 
शुरू करें
- बार-बार दूध पिलाएं
- मां में आत्मविश्वास जगाएं
मां को नहीं होता कैंसर 
बच्चा जब छह माह का हो जाये, तब उसे सॉलिड डायट देना चाहिए, जैसे-खिचड़ी, दाल का पानी और उबला पानी आदि. मगर ध्यान रखें कि ब्रेस्टफीड कराना बंद न करें. इससे मां की भी सेहत बेहतर रहती है. जो मांएं दो साल तक बच्चे को स्तनपान कराती हैं, उनको स्तन कैंसर का खतरा कम होता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि बच्चा इस उम्र में खाना भी खाता है, तो स्तनपान कैसे कराया जाये. इसके लिए जरूरी नहीं है कि दिन भर स्तनपान कराया जाये. कोशिश करें कि दिन में एक या दो बार स्तनपान जरूर कराएं. मांएं आजकल ब्रेस्ट पंप की मदद से ब्रेस्ट मिल्क स्टोर करती हैं. ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करती हैं, तो उसकी सफाई पर विशेष ध्यान दें.

मां को भी होता है फायदा


स्तनपान का फायदा सिर्फ बच्चे को ही नहीं, मां को भी होता है. प्रसव के बाद हर महिला का वजन बढ़ा हुआ रहता है. स्तनपान कराने से पोस्ट प्रेग्नेंसी का वजन कम करने में मदद मिलती है. रोजाना महिला स्तनपान करा कर 300 से 600 कैलोरी बर्न कर सकती है.

इससे वजन कम करने में मदद मिलती है. इसके अलावा महिला में प्रसव के पहले और बाद में कई बदलाव आते हैं जैसे हार्मोनल बदलाव, मूड स्विंग , चिड़चिड़ापन आदि. स्तनपान कराने से इन सबसे भी छुटकारा मिलता है. इसके अलावा अगर महिला स्तनपान करा रही है, तो इस दौरान गर्भधारण की संभावना भी कम हो जाती है. 

छह माह दें सिर्फ मां का दूध
बच्चा जन्म के तुरंत बाद चौकन्ना रहता है. वह चारों ओर नजरें दौड़ाता है. मुंह खोल कर कुछ खाने की चेष्टा करता है. जन्म के बाद बच्चे को साफ कर मां के पास सुला देना चाहिए. इससे उसे मां के शरीर की गरमी मिलती है एवं मां के हृदय में बच्चे के लिए असीम प्यार उमड़ता है, तब परस्पर अपनेपन की भावना उमड़ती है एवं मां के दूध बनने की क्रिया शुरू हो जाती है. अत: जन्म के बाद शिशु को साफ कर मां के समीप लिटा देना चाहिए. दूध का बनना व निकलना दो अलग-अलग प्रक्रिया है. यह दो हॉर्मोन पर निर्भर करता है. दूध बनाने के लिए प्रोलेक्टिन व दूध निकालने के लिए आॅक्सिटोसिन नामक हॉर्मोन की जरूरत होती है. 

मां जब दूध पिलाना शुरू करती है, तो दोनों हॉर्मोन रक्त में बनने लगते हैं. जितनी बार मां दूध पिलायेगी उतनी अधिक मात्रा में हॉर्मोन बनेंगे. जैसे ही मां दूध पिलाना शुरू करती है, इसकी सूचना स्नायु द्वारा मां के मस्तिष्क में पहुंचती है. बच्चा जितनी अधिक देर तक दूध पियेगा रसायन उतनी ही मात्रा में निकलेगा. 
तनावमुक्त वातावरण, बच्चे के प्रति असीम स्नेह, दूध पिलाने की प्रबल इच्छा सभी दूध बनने में सहायक होते हैं. इसके विपरीत गुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव आदि नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. प्रसव के बाद जो पहला दूध आता है उसे कोलस्ट्रम कहते हैं यह गाढ़ा एवं पीला रहता है, जो शिशु के लिए अत्यंत उपयोगी है. इसमें बहुत सारे जीवन रक्षक तत्व होते हैं एवं विटामिन रहते हैं, जोे शिशु को सारी उम्र अनेक रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. इसमें एक तत्व इम्यूनोग्लोबिन होता है, जो अपरिपक्व आंत पर परत बना कर उसे दमे व एग्जिमा जैसी बीमारी से बचाता है. अत: इसे प्रथम टीकाकरण भी कहते हैं. 

क्यों जरूरी है छह माह तक सिर्फ स्तनपान


प्रथम छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराना चाहिए. इसका अर्थ है कि बच्चे को पानी, मिश्री, ग्लूकोज आदि दूसरा कोई आहार नहीं देना चाहिए. ये चीजें बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि-

- गरमी एवं बरसात के मौसम में दूध के अलावा पानी देने से दूध पीने की इच्छा खत्म हो जाती है और पानी से संक्रमण भी हो सकता है.


- दूसरा कोई भी पेय सफल स्तनपान में बाधक हो सकता है.


- छह माह तक केवल स्तनपान कराने से बच्चों के मस्तिष्क का संपूर्ण विकास होता है, जिससे बच्चा तेज बुद्धिवाला होता है.


- इससे दो बच्चों के जन्म में अंतर रखने में मदद मिलती है.


- यह माताओं में गर्भाशय एवं स्तन के कैंसर से बचाव करता है एवं खून की कमी के खतरे को कम करता है.

स्तनपान कराने के तरीके


सबसे पहले आरामदायक अवस्था में बैठना चाहिए. पीठ को सहारे से टिका लेना चाहिए. 


शिशु को इस तरह लिटाएं कि उसका सिर और गरदन मां की बांह पर टिकी हो एवं सिर उसके शरीर से ऊंचा रहे. स्तनपान के समय बच्चों को अपने पेट से सटा लें. शिशु को कम-से-कम कपड़े पहनाएं. जिन महिलाओं को सिजेरियन से शिशु होता है, वे लेट कर भी दूध पिला सकती हैं. किंतु ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे का सिर थोड़ा उठा कर रखें, ताकि बच्चे के सरकने का खतरा कम रहे.


मां का दूध ही क्यों

- मां का दूध संपूर्ण आहार है, जिसमें सभी तरह के आवश्यक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, फैट, विटामिन एवं खनिज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.


- यह सस्ता एवं सुपाच्य है. डब्बे के दूध काफी महंगे हैं एवं बार-बार दूध बनाना कठिन होता है. साफ, सफाई में भी परेशानी होती है.


- यह शरीर के तापक्रम पर रहता है. इसे गरम या ठंडा करने की जरूरत नहीं पड़ती.


- यह सरलता से उपलब्ध है.

- मां के दूध में जीवन रक्षक तत्व रहते हैं, जो नवजात को कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. ये रक्षक तत्व जीवन भर मनुष्य के रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं. 


- दूध पिलाने से एक सुखद मातृ-शिशु संबंध बनता है, जो जीवन भर बना रहता है.

ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल

आजकल अकसर मांओं को बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद नौकरी और काम पर वापस जाना होता है. ऐसे में ब्रेस्ट पंप उनके लिए काफी मददगार साबित होता है. इसकी मदद से कामकाजी महिलाएं दूध स्टोर कर सकती हैं. इसके अलावा कई बार स्तन में दर्द कोई और दिक्कत होने पर भी इससे दूध निकालने में मदद मिलती है. मगर सबसे सही तरीका होगा कि मां खुद ही बच्चे को स्तनपान कराये. 

ब्रेस्ट पंप के दूध को कैसे रखें


अगर ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध स्टोर कर रही हैं, तो ध्यान रखें कि उसे जितनी जल्दी हो सके बच्चे को पिला दें. अगर स्टोर कर रही हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें. दूध को आठ घंटे तक ही सामान्य तापमान पर रखें. इससे ज्यादा देर अगर रखना है, तो उसे फ्रिज में रखें. फ्रिज में भी सिर्फ 24 घंटे तक ही रखा जा सकता है. दूध इस्तेमाल करने के पहले दूध की बोतल गरम पानी के बरतन में रख दें. दूध को न उबाला जाता है और न माइक्रोवेव में गरम किया जाता है.

स्तनपान कराने पर स्तनों में दर्द। बुखार के साथ सीने में दर्द का क्या मतलब है? 
जन्म के बाद सफल स्तनपान की अवधि में, भविष्य की युवा माताओं में अक्सर छाती में दर्द होता है। यह दूध के असमान आगमन और स्तनपान के लिए निपल्स की चोटों के कारण है। लेकिन बहुत जल्द, मां और बच्चे दोनों, कभी-कभी एक अनुभवी सलाहकार की मदद से, उचित लगाव के अनुकूल होंगे और उन दोनों के लिए इष्टतम खिला मोड का चयन करेंगे। हालांकि, अगर छाती में दर्द असहनीय हो जाता है और महिला को महत्वपूर्ण असुविधा होती है, जो शरीर के तापमान में वृद्धि - 37 डिग्री से अधिक होती है, तो यह लैक्टोस्टेसिस के लक्षण विज्ञान का संकेत दे सकता है - स्तन ग्रंथि के नलिका के रुकावट के कारण दूध का ठहराव।

सीने में दर्द बुखार के साथ क्यों होता है

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, ये दो लक्षण, जो एक नर्सिंग मां में एक साथ मौजूद हैं, लैक्टोस्टेसिस के विकास का संकेत दे सकते हैं, जिसमें दूध का दूध दूधिया लोबूल में स्थिर होता है। यह स्थिति सबसे अधिक बार जन्म के बाद पहले महीने के दौरान प्रकट होती है, जब प्राकृतिक स्तनपान को समायोजित नहीं किया जाता है और दूध बच्चे की जरूरतों की परवाह किए बिना यादृच्छिक रूप से आता है। और इसे भड़काने वाले कारक हो सकते हैं: 
स्तन से बच्चे का अनुचित लगाव; 
तंग सनी पहने; 
असहज नींद की स्थिति; 
अत्यधिक शारीरिक परिश्रम। 

अक्सर, लैक्टोस्टेसिस उन महिलाओं में प्रकट होता है जो पहली बार मां बन गई हैं। इसका कारण शिशु के शिशु के मुंह से स्तन का अनुचित रिसाव है, जिसमें वह सभी दूधिया लोबूल से दूध को चूसने में असमर्थ है, जिसके परिणामस्वरूप उसका ठहराव होता है। यही कारण है कि स्तनपान की स्थापना की अवधि में सभी अनुभवहीन माताओं को प्रसूति अस्पताल या स्तनपान सलाहकार में योग्य चिकित्सा कर्मियों की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वह स्तनपान कराते समय स्तन की सही जब्ती पर विचार करता है, जिसमें बच्चे का मुंह चौड़ा होता है, निचला होंठ बाहर हो जाता है, और मसूड़े न केवल निप्पल को पकड़ती हैं, बल्कि इसरो को भी पकड़ लेती हैं। स्तनपान कराने वाली युवा मां को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए।


प्रसव के बाद महिला के स्तन को हमेशा एक जोड़ी आकार में बढ़ाया जाता है, इसलिए गर्भावस्था से पहले पहना जाने वाला सामान्य अंडरवियर तंग और असहज हो सकता है। इसके अलावा, श्रम में महिलाओं को पेट के बल सोने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इस आसन से दूधिया नलिका का निचोड़ और दूध का ठहराव हो सकता है।


अन्य कारणों से छाती में लैक्टोस्टेसिस का दर्द होता है और शरीर के तापमान में 37 या उससे अधिक का तापमान बढ़ जाता है: 
अनियमित निपल आकार; 
युवा मां की शारीरिक विशेषताओं से संबंधित, नलिकाओं के नलिकाओं का रोग संबंधी अवरोध; 
दूध उत्पादन में वृद्धि; 
लगातार पंपिंग प्रयास; 
महिला निपल्स को चोट; 
सुस्त स्तन चूसने बेब; 
उच्च वसा सामग्री और दूध घनत्व। 



इसके अलावा, छाती, 37 डिग्री तक के ऊंचे तापमान के साथ, चोट लगने पर या गलती से ओवरकॉल होने पर दर्द होता है। तो माताओं और दादी के लोगों की परिषद "छाती को ठंडा नहीं करना" निराधार नहीं है। सुपरकोलिंग करते समय, दूधिया नलिकाएं अनायास संकीर्ण होने लगती हैं, जिससे दूधिया लोब्यूल्स में दूध का ठहराव होता है और इसके परिणामस्वरूप, स्तन ग्रंथि में दर्द और दर्द होता है।
लक्षण और संकेत 


एक नर्सिंग मां में लैक्टोस्टेसिस को पहचानना काफी सरल है। इसके विकास का पहला संकेत स्तन ग्रंथि में गंभीर असुविधा होगी, जो बहुत जल्द दर्द में शामिल हो जाएगा। एक ही समय में, स्तन घने और edematous हो जाएगा, और त्वचा के हाइपरमिया अक्सर स्थिर दूध के स्थान पर होता है। बाद में इसकी जगह पर एक मुहर होगी, एक छोटी गेंद के समान। इसके समानांतर, शरीर का तापमान 37 - 38 डिग्री के स्तर तक बढ़ जाता है। इसकी अधिकतम वृद्धि 39 डिग्री के निशान तक हो सकती है, लैक्टोस्टेसिस के लिए बहुत अधिक तापमान विशिष्ट नहीं है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उसकी नर्सिंग मां को अपनी कोहनी के मोड़ पर मापना चाहिए। दुद्ध निकालना के दौरान कांख में, तापमान थोड़ा ऊंचा हो जाएगा। जब लैक्टोस्टेसिस मनाया जाता है तापमान विकृति - छाती के ठहराव से प्रभावित पक्ष से, यह 37 डिग्री से ऊपर होगा।




दूध के ठहराव के विकास के इस स्तर पर, जब दर्द बहुत मजबूत नहीं होता है, तब भी आप स्वयं इस बीमारी से जूझ सकते हैं। और बच्चा खुद इसमें मदद करेगा, जिसे प्रभावित स्तन पर जितनी बार संभव हो लागू किया जाना चाहिए, और स्तनपान के बीच एक स्तन पंप का उपयोग करें। यदि, हालांकि, लैक्टोस्टेसिस के पहले लक्षणों पर कोई सहायता नहीं दी गई थी, तो स्तन ग्रंथि में दूध के ठहराव के लक्षण बढ़ने लगते हैं। छाती आकार में बढ़ती है, गर्म और edematous हो जाती है, शरीर का तापमान 37 डिग्री से ऊपर हो जाता है, और मजबूत बुखार, अपच और सामान्य अस्वस्थता इसमें शामिल हो जाती है। इस स्तर पर बच्चे के लिए स्तन को पकड़ना मुश्किल है, यह लगभग असंभव है, क्योंकि कुल दूध का बहिर्वाह परेशान है और यह बहुत कठिन हो जाता है। एक ही समय में स्व-पंपिंग एक दर्दनाक प्रक्रिया में बदल जाती है।

मास्टिटिस का विकास 


यदि इस स्तर पर पर्याप्त सहायता प्रदान नहीं की गई थी, तो संक्रमण में शामिल होने पर, उदाहरण के लिए, निपल्स में दरारें से, स्तनदाह विकसित होता है। यह हो सकता है: 
तरल; 
infiltrative; 
पीप। 

इसके सीरियस स्टेज के लक्षण लैक्टोस्टेसिस के समान होते हैं - शरीर के तापमान में 37 डिग्री तक की वृद्धि, स्तन ग्रंथि में दर्द, इसकी सूजन और हाइपरमिया। जब यह घुसपैठ के चरण में गुजरता है, तो प्रभावित स्तन से एक्सिलरी लिम्फ नोड्स में वृद्धि, स्तन के दूध को व्यक्त करने में कठिनाई, स्तन ग्रंथि में एक गांठ का दिखना इन संकेतों में जुड़ जाता है।


एक शुद्ध रूप में मास्टिटिस का संक्रमण शरीर के तापमान में 40 डिग्री के स्तर में वृद्धि के साथ-साथ निप्पल से पीप डिस्चार्ज की उपस्थिति और प्रभावित ग्रंथि की त्वचा द्वारा एक धब्बा छाया के अधिग्रहण के साथ होता है। ये लक्षण बताते हैं कि स्थिर दूध के स्थान पर एक शुद्ध क्षेत्र का निर्माण हुआ है।


पुरुलेंट मास्टिटिस के लिए अस्पताल में एक महिला के अस्पताल में भर्ती होने और दूध पिलाने से बच्चे को अस्थायी रूप से ठीक करने की आवश्यकता होती है। एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक चिकित्सा के बाद, स्तनपान की निरंतरता पर वापस लौटना संभव होगा। लेकिन इससे पहले कि दूध के ठहराव का चरण बेहतर है, ज़ाहिर है, बाहर तक पहुंचने के लिए नहीं।
उपचार और रोकथाम 



जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, लैक्टोस्टेसिस के उपचार में सबसे अच्छा सहायक आपका बच्चा होगा। बार-बार 

लगाव स्थिरता से नलिकाओं को जल्दी से छोड़ने और इसके सामान्य बहिर्वाह को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। यदि crumbs सफल नहीं होते हैं, तो आप एक स्तन पंप का उपयोग कर सकते हैं। यह किया जाना चाहिए, भले ही छाती में दर्द हो। दूध को हाथ से गिराने या इस पति के लिए आकर्षित करने की कोशिश करना आवश्यक नहीं है, ग्रंथि के एक मजबूत निचोड़ या बहुत आक्रामक मालिश से दूधिया लोब्यूल्स को चोट लग सकती है, जो आगे की बीमारी को बढ़ा देगा।

उनकी स्थिति को कम करने के लिए, युवा माताओं जिनके शरीर का तापमान 37 डिग्री से ऊपर है, उन्हें पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन से बना एक एंटीपीयरेटिक टैबलेट लेने की सिफारिश की जाती है।

यदि दो से तीन दिनों के भीतर राहत नहीं मिली और छाती, दोनों गले में खराश, आप एक योग्य विशेषज्ञ की मदद के बिना नहीं कर सकते। इस मामले में, आपको एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। आपका डॉक्टर एक दवा का चयन करेगा जो स्तनपान के साथ संगत है।

जैसा कि ठहराव प्रक्रिया के इलाज के लिए उपयोग किए जाने वाले लोक उपचार के लिए, उनमें से सबसे लोकप्रिय गोभी का पत्ता होगा, जो रोगग्रस्त छाती पर तय होता है। यह दर्द को दूर करने और तापमान को 37 डिग्री से कम करने में मदद करता है।

पारंपरिक चिकित्सा के अन्य साधन, दूधिया नलिकाओं की रुकावट को हटाने में योगदान करते हैं, इसमें शामिल हैं:

कैमोमाइल शोरबा के गैजेट;


शहद और प्याज से केक;


नीलगिरी काढ़े के साथ रोगग्रस्त ग्रंथि का उपचार।

लैक्टोस्टेसिस, साथ ही किसी अन्य बीमारी के लिए सबसे अच्छा उपचार इसकी रोकथाम होगा। दूध के बहिर्वाह में वाहिनी की रुकावट और गड़बड़ी को रोकने के लिए, नवजात को अक्सर खिलाया जाना चाहिए, जिससे दूध पिलाने की स्थिति बदल जाए। स्तन के दूध के उत्पादन में वृद्धि के साथ, इसे राहत पहुंचाना चाहिए। लेकिन इसे ज़्यादा मत करो, क्योंकि अत्यधिक पंपिंग से हाइपरलैक्टेशन हो सकता है।
इसके अलावा, खिलाने से पहले, दूध को थोड़ा व्यक्त करने की सिफारिश की जाती है। यह बच्चे को वापस दूध चूसने की अनुमति देगा, जो अधिक वसायुक्त और पौष्टिक है, और पूरी तरह से सभी दूधिया लोबूल छोड़ता है। आपको स्वच्छता के नियमों के बारे में नहीं भूलना चाहिए और स्तन ग्रंथियों के हाइपोथर्मिया से बचना चाहिए। यदि आपकी छाती में दर्द होता है और तापमान 37 डिग्री से ऊपर बढ़ जाता है, तो डॉक्टर से मिलने जाना बेहतर होता है।

स्तनपान करते समय मम्मी अक्सर कई तरह की समस्याओं का सामना करती हैं। सभी अप्रिय आश्चर्य की तैयारी करना और यह जानना कि किसी दिए गए स्थिति में क्या उपाय करना असंभव है। अज्ञात के लिए, आप सबसे खराब और खुद के साथ या बिना हवा के लिए तैयार करने के लिए एक महिला की अनूठी क्षमता जोड़ सकते हैं।



उदाहरण के लिए, जब छाती में दर्द होता है और तापमान बढ़ जाता है, तो नर्सिंग मां अक्सर घबरा जाती है। यदि आप इन दो सामान्य लक्षणों का सामना करते हैं, तो हम आपसे शांत रहने का आग्रह करते हैं और आपको बताते हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है।


स्तनपान कराने वाली माताओं का प्रतिशत तुरंत स्थापित हो गया था और किसी भी समस्या के साथ नहीं था, बहुत बड़ा नहीं है। मातृ रोजमर्रा की जिंदगी की वास्तविकता ऐसी है कि किसी भी दिन काफी अप्रत्याशित लक्षण दिखाई दे सकते हैं। सबसे आम हैं असुविधा और यहां तक ​​कि सीने में दर्द और बुखार।


इस मामले में व्यवहार की गलत रणनीति स्वास्थ्य की खराब स्थिति की अनदेखी कर सकती है। शरीर के इन संकेतों को बर्दाश्त न करें: कारणों से निपटने और आवश्यक उपाय करना बेहतर होगा। आप सीखेंगे कि दो सामान्य लक्षण किस बारे में बात कर रहे हैं, वे अक्सर एक साथ क्यों दिखाई देते हैं और क्या वे एक बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कारणों की तलाश


एक, बिल्कुल सच है, समस्याओं को डिकोड करना, अफसोस, मौजूद नहीं है। ऐसे कई कारण हैं जो स्तनपान के दौरान बुखार के साथ एक कंपनी में सीने में दर्द को ट्रिगर कर सकते हैं। कुछ प्राकृतिक हैं और कुछ एक गंभीर बीमारी की उपस्थिति का संकेत देते हैं जिसके लिए कार्रवाई की आवश्यकता होती है। यदि आप इस लेख को पढ़ रहे हैं, तो आप पहले ही कदम उठा चुके हैं - लक्षणों को नजरअंदाज न करें, बल्कि इस बात में दिलचस्पी लें कि इससे क्या हो सकता है और उपचार के संभावित तरीके।

हमने सबसे आम कारकों का हवाला दिया जो स्तन कोमलता और बुखार का कारण बनते हैं। डॉक्टर आपको आपकी व्यक्तिगत विशेषताओं के आधार पर, समस्या का सबसे सही स्रोत बताएंगे। लेकिन डॉक्टर की यात्रा से पहले भी, आप इन लक्षणों में से 2 के संयोजन के कारण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पहला आम कारण है शरीर के शरीर विज्ञान में परिवर्तन। स्तन के दूध का विकास और दूध पिलाना एक आसान प्रक्रिया नहीं है, और एक महिला अपने बच्चे के जन्म से पहले इसके लिए तैयारी कर रही है। कभी-कभी यह माँ के लिए लगभग अपूर्ण रूप से होता है, लेकिन लक्षण स्पष्ट हो सकते हैं। यदि हम शरीर के पुनर्गठन की समय अवधि के बारे में बात करते हैं, तो प्रक्रिया आमतौर पर स्तनपान के पहले कुछ हफ्तों तक ले जाती है, जब हार्मोन ऑक्सीटोसिन सबसे अधिक सक्रिय रूप से उत्पादित होता है। इस अवधि के दौरान, माताएं छाती में दर्द और बुखार के लिए इंतजार कर सकती हैं।


एक और प्राकृतिक कारण है एक महिला की व्यक्तिगत शारीरिक विशेषताएं। इनमें निपल्स का आकार या उनके आकार शामिल हैं। यदि लैक्टेशन के साथ विफलता का कारक इसमें ठीक है, तो खिला के दौरान सही मुद्रा का विकल्प आपको समस्या को हल करने में मदद करेगा। हाँ, कभी-कभी यह इतना आसान हो सकता है!


एक संभावित अपराधी हो सकता है बच्चे की गलत पकड़। ऐसा होता है कि बच्चा सही ढंग से खाना खाने लगता है, जबकि ऐसा लगता है कि टुकड़ा खा जाता है और उसे कुछ भी परेशान नहीं करता है। लेकिन यहां गंभीरता की बदलती डिग्री के स्तन दर्द को बुखार के साथ जोड़ा जाता है। यह एक घंटी हो सकती है कि आपको स्तनपान की तकनीक की समस्या है, या बच्चा गलत तरीके से निप्पल को पकड़ता है।


जब एचबी के साथ स्तन ग्रंथि की नलिकाएं संकरी हो जाती हैं, तो यह भड़काती है सील गठन, कभी-कभी एक विशेषता ज्वरग्रस्त अवस्था के साथ। ऐसा क्यों हो रहा है? यहां कई जोखिम कारक हैं - यह दुर्लभ भोजन है, और अतिरिक्त दूध, और वाहिनी रुकावट है। यदि आवश्यक उपचार उपाय नहीं किए जाते हैं, तो नर्सिंग मां को बाद में मास्टिटिस का सामना करना पड़ सकता है, जो एक अधिक गंभीर स्थिति है।


थ्रश या यौन संचारित रोग - खिलाने के दौरान सीने में दर्द और बुखार का एक और संभावित कारण। एक बीमारी के निदान में केवल डॉक्टर की मदद कर सकते हैं।
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यदि स्तनपान निप्पल क्षेत्र में आपके स्तनों को चोट पहुँचाता है, तो इससे उनमें दरारें पड़ सकती हैं। कुछ माताएँ इस समस्या को पहले से ही अस्पताल में बताती हैं। शायद निपल्स की संवेदनशील त्वचा का उपयोग अभी तक बच्चे के चूसने वाले आंदोलनों के लिए नहीं किया गया है। समय के साथ, दर्द कम हो जाना चाहिए, क्योंकि पूरा शरीर माँ की नई भूमिका के लिए अनुकूल है। एक नियम के रूप में, यह प्रक्रिया 2 सप्ताह से अधिक नहीं होती है।


होते हैं स्तन रोग, जिनमें से लक्षण बुखार और दर्द की उपस्थिति के लक्षण हैं। इनमें मास्टोपैथी, मास्टिटिस और अन्य शामिल हैं। केवल एक स्तनधारी रोग की पहचान कर सकता है और अनुशंसित उपचार लिख सकता है।

सीने में दर्द के सामान्य कारणों और तापमान में वृद्धि के बीच, डॉक्टर बुलाते हैं एचबी के साथ दूध ठहराव और लैक्टोस्टेसिस। अनुभव के साथ माताओं इन अप्रिय घटनाओं से पहले से परिचित हैं। और जब से नर्सिंग महिलाओं के जीवन में ऐसा अक्सर होता है, हमने इसी कारण से रहने का फैसला किया।



जब अपराधी लैक्टोस्टेसिस होता है

यह समस्या आधे नर्सिंग माताओं और विभिन्न कारणों से सभी के जीवन में दिखाई देती है। हम आपको याद दिलाते हैं कि लैक्टोस्टेसिस को दूध वाहिनी की रुकावट कहा जाता है या, जैसा कि लोगों द्वारा स्तनपान के दौरान दूध का ठहराव होता है। यह घटना तंग अंडरवियर, पेट पर नींद, अनुचित खिला, तनाव या शारीरिक परिश्रम का कारण बन सकती है, जो स्तनपान की अवधि के दौरान मां के जीवन की लय के साथ असंगत हैं।

लैक्टोस्टेसिस हमेशा छाती में दर्द की उपस्थिति के साथ शुरू होता है, जो वृद्धि करते हैं। इस घटना के दौरान तापमान में वृद्धि आपके द्वारा पारित हो सकती है, लेकिन फिर भी, ज्यादातर मामलों में, यह होने का स्थान है। थर्मामीटर 37-38 डिग्री के स्तर का संकेत दे सकता है। कभी-कभी, हालांकि बहुत कम बार, तापमान अधिक खतरनाक 39 डिग्री तक बढ़ जाता है। एक महत्वपूर्ण बिंदु: मां को कोहनी पर मापा जाना चाहिए। यह इस तथ्य से उचित है कि लैक्टोस्टेसिस के दौरान एक्सिलरी गुहा में तापमान थोड़ा अधिक होगा।

पहले संदेह पर, मां को तत्काल उपचार शुरू करना चाहिए। प्रारंभिक चरण में, जीतने की समस्या काफी सरल है: बच्चे को इस मिशन पर ले जाना चाहिए। लैक्टोस्टेसिस सही और अधिक लगातार खिला के प्रभाव में पीछे हट जाता है। यदि किसी कारण से यह संभव नहीं है, तो मां एक स्तन पंप का उपयोग कर सकती है या खुद को व्यक्त कर सकती है।

इस घटना में कि पहले आवश्यक उपाय नहीं किए गए थे, बीमारी के और विकसित होने की संभावना है। दर्द बदतर हो सकता है, तापमान थोड़ा अधिक बढ़ जाएगा, और इन लक्षणों में अपच और बुखार शामिल होने की संभावना है। खिला आहार भी उल्लंघन होगा, क्योंकि एक बच्चे के लिए, स्तन हथियाने की समस्या होगी।

एचबी में लैक्टोस्टेसिस के विकास को रोकने के लिए, हम सभी माताओं से सटीक निदान का पता लगाने का आग्रह करते हैं यदि संदिग्ध लक्षण पाए जाते हैं और यदि आवश्यक हो तो उपचार शुरू करना है।



मास्टिटिस क्रेप्ट पर किसी का ध्यान नहीं गया


यदि लैक्टोस्टेसिस को खत्म करने के लिए समय पर उपाय नहीं हैं, तो मास्टिटिस का खतरा है - समस्या अधिक गंभीर और दर्दनाक है। स्तनपान के दौरान इस घटना के कई प्रकार हैं:

तरल;

infiltrative;

पीप।
इसका मतलब यह है कि मास्टिटिस गंभीरता की अलग-अलग डिग्री में हो सकता है और विभिन्न लक्षणों की विशेषता हो सकती है। आइए देखते हैं।


पहला प्रकार - सीरस - लक्षणों की विशेषता है जो हम इस लेख में बात कर रहे हैं, लेकिन गंभीर रूप में नहीं। एक नर्सिंग मां में मध्यम तापमान और सहन करने योग्य छाती का दर्द भी बढ़े हुए स्तन ग्रंथियों के साथ होगा।


पर infiltrative मास्टिटिस का दर्द और मजबूत होगा यह लगभग हमेशा छाती में लालिमा और गर्मी से पूरक होता है। तापमान के अनुसार, यह 37 डिग्री के निशान को पार कर सकता है। आप अंडरआर्म क्षेत्र में लिम्फ नोड्स के बढ़े हुए आकार को भी देख सकते हैं।


पुरुलेंट मास्टिटिस सबसे गंभीर है, और अन्य प्रकारों की तुलना में बहुत कठिन है। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच सकता है, दर्द अक्सर लगभग असहनीय हो जाता है। इस तरह की बीमारी की विशेषता निप्पल से मवाद की रिहाई और प्रभावित त्वचा का नीला रंग होगा। एक नियम के रूप में, प्युलुलेंट मास्टिटिस के मामले में, एक महिला अस्पताल में भर्ती और एंटीबायोटिक दवाओं का एक कोर्स अपरिहार्य है। यह स्पष्ट है कि मां को अस्थायी रूप से बच्चे के स्तनपान को निलंबित करना होगा।

यदि आपको संदेह है कि आप मास्टिटिस विकसित करते हैं, तो डॉक्टर की यात्रा एक जरूरी उपाय होगी। केवल एक योग्य विशेषज्ञ जटिल क्रियाओं की मदद से रोग का निदान कर सकता है - यदि आवश्यक हो, तो अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण, स्तन दूध परीक्षण। इसके बाद, डॉक्टर यह तय करता है कि एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से बचा जा सकता है या आवश्यक उपचार निर्धारित करता है।


रोकथाम से बेहतर कोई उपचार नहीं है।
एचबी के साथ बुखार और सीने में दर्द जैसे अप्रिय लक्षण हमेशा अपने कारण और इलाज की तुलना में रोकने के लिए आसान होते हैं। कुछ सरल अनुशंसाओं का पालन करके, आप कई समस्याओं से बचेंगे जो इतनी बार माताओं पर हमला कर रही हैं। हर कोई इस तथ्य के बारे में सच्चाई जानता है कि रोकथाम सबसे अच्छा उपचार है, और माताओं के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है। तो, बुखार के साथ संयोजन में सीने में बेचैनी के लिए, आपको निम्न सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:


गर्भवती महिलाएं निपल्स की त्वचा को कोमल बनाने में बहुत मददगार होती हैं। ऐसा करने के लिए, जितनी बार संभव हो, अपने स्तनों को ऐंठन वाले अंडरवियर से आराम करने दें, शांत पानी से स्तन ग्रंथियों को कुल्लाएं और उन्हें किसी न किसी तौलिया के साथ पोंछ दें।


दूध पिलाने की इष्टतम विधि शिशु की मांग पर होगी। स्तन के लिए बार-बार लगाव, लैक्टोस्टेसिस की अनुपस्थिति और आने वाले सभी परिणामों की गारंटी दे सकता है। कभी-कभी यह दूध को आगे बढ़ाने के लिए समझ में आता है।

उचित खिला तकनीक सीखें, पोज़ बदलना न भूलें और सुनिश्चित करें कि आपका टोटका सही तरीके से स्तन को पकड़ रहा है। यदि आप अपने स्वयं के ज्ञान या कौशल पर संदेह करते हैं, तो हम आपको एक स्तनपान विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह देते हैं - यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और कई माताओं को बचाता है।

हमेशा समय पर डॉक्टर के पास जाएं और सभी आवश्यक परीक्षण कराएं। यदि कोई बीमारी है, तो इस तरह का एक जिम्मेदार दृष्टिकोण समय में समस्या का पता लगाने में मदद करेगा।


एचबी के साथ स्तन की समस्याओं से कैसे बचें: 

स्तनपान के दौरान बुखार और सीने में दर्द के लिए एक सार्वभौमिक कार्य योजना की तलाश में आपने यह लेख पढ़ा होगा। काश, इन लक्षणों के सभी कारणों के लिए एक ही रणनीति बस मौजूद नहीं है। प्रत्येक मामले में, उठाए गए उपाय सीधे उस कारक पर निर्भर करेंगे जो अवांछनीय घटना को उकसाता है। मुख्य बात यह है कि आपने उन्हें समय पर खोजा, जिसका अर्थ है कि बाद में उपचार जल्द ही आपको परिणाम से खुश कर देगा।

स्तनपान अक्सर कुछ समस्याओं से जुड़ा होता है। कुछ युवा माताओं की शिकायत है कि उन्हें खिलाते समय सीने में दर्द होता है, दूसरों को असुविधा महसूस होती है, जो पहले ही स्तनपान की अवधि पूरी कर चुके हैं। किसी भी मामले में, स्तन ग्रंथियों के क्षेत्र में दर्द एक महिला को असुविधा देता है, और वह यह पता लगाना चाहती है कि स्तनपान करते समय स्तनपान क्यों दर्द होता है, इससे कैसे छुटकारा पाएं।


स्तनपान कराने के दौरान सीने में दर्द आने वाले दिनों में पहले भोजन के बाद दिखाई दे सकता है। बहुत बार, अनुभवहीन युवा माताओं ऐसी अप्रिय संवेदनाओं को सहन करने में असमर्थ होते हैं क्योंकि वे स्तनपान कराने के कारणों का पता लगाने की कोशिश किए बिना स्तनपान रोकते हैं जो खिलाते समय सीने में दर्द का कारण बनते हैं। दर्द की उपस्थिति सबसे अधिक बार स्तन के अनुचित लगाव से जुड़ी होती है, क्योंकि पहले की माताओं को अभी भी ठीक से पता नहीं है कि स्तन को शिशु के मुंह में कैसे डाला जाए, और बच्चा खुद ही यह समय के साथ सीख लेगा। यदि स्तन ग्रंथि अनुचित रूप से बच्चे के मुंह में स्थित होती है, तो स्तनपान के दौरान सीने में दर्द, इसोला और निप्पल के क्षेत्र में स्थानीयकृत होता है, कभी-कभी यह केवल असहनीय हो सकता है, साथ ही दरारें भी दिखाई दे सकती हैं।

यदि लगाव के साथ कोई समस्या नहीं है, तो आपको स्तनपान के दौरान सीने में दर्द के अन्य कारणों के बारे में सोचना चाहिए। उनमें से हैं:


लैक्टोस्टेसिस - नलिकाओं में दूध का ठहराव। यह दूध की एक अत्यधिक मात्रा के कारण होता है, दूध पिलाने के लिए आसनों का एक दुर्लभ परिवर्तन, जब एक बच्चे के अगले भोजन को लंघन या दूध वाहिनी के रुकावट के कारण होता है। यदि लैक्टोस्टेसिस के कारण स्तनपान कराने के दौरान एक महिला को स्तन दर्द होता है, तो यह एक या दोनों स्तन ग्रंथियों के बढ़ने, तेज दर्द, गर्मी और लालिमा के कारण ठहराव के स्थान पर होता है और बुखार के साथ हो सकता है। सबसे उज्ज्वल स्तन "जीवाश्म" की भावना है।


हाइपरलैक्टेशन - स्तन के दूध का अत्यधिक उत्पादन। इस मामले में दूध पिलाने वाली मां के स्तन डेयरी ज्वार में दर्द करते हैं। एक महिला स्तन ग्रंथियों में भारीपन की निरंतर भावना महसूस करती है, आवेदन करने से अपेक्षित राहत नहीं मिलती है, और भोजन के बाद छाती में दर्द बना रहता है।

थ्रश सबसे संभावित कारणों में से एक है कि दूध पिलाने के बाद दर्द क्यों होता है। यदि उस समय के दौरान जब बच्चा स्तन को चूसता है, तो नर्सिंग मां को किसी भी असुविधा का अनुभव नहीं होता है, लेकिन अगली फीडिंग खत्म होने पर उन्हें नोटिस करना शुरू हो जाता है, फिर कैंडिडा सबसे अधिक संभावना अपने दूध नलिकाओं में बस गई है। थ्रश के मुख्य लक्षण निपल्स पर देखे जा सकते हैं: वे सूजन, पपड़ीदार, दरार और खून बह सकता है। बैक्टीरिया बच्चे के मुंह को जल्दी से संक्रमित करते हैं, जिससे श्लेष्म झिल्ली पर सफेद रंग का निर्माण होता है।
एक नियम के रूप में, अगर एक नर्सिंग मां के सीने में दर्द होता है, तो वह खुद समझ सकती है कि यह क्या कारण है, एक विशेष रोग स्थिति की बाहरी अभिव्यक्तियों को देखते हुए, और एक विशिष्ट समस्या के साथ डॉक्टर से परामर्श करें। लेकिन अगर स्तनपान के दौरान स्तन दर्द के कारण एक महिला के लिए एक रहस्य बने हुए हैं, तो उसे संकोच नहीं करना चाहिए, अन्यथा उसे जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है जिन्हें लंबे और कठिन उपचार और समय से पहले स्तनपान कराने की आवश्यकता होगी।


स्तनपान के दौरान स्तन दर्द से छुटकारा पाने के लिए कैसे?

यह समझने के लिए कि स्तनपान के दौरान या सीधे उसके दौरान स्तन में होने वाले दर्द को कैसे खत्म किया जाए, सबसे पहले यह पता लगाना आवश्यक है कि स्तनपान कराते समय स्तन क्यों दर्द करते हैं। इससे काफी हद तक यह निर्भर करता है कि एक युवा मां को अप्रिय उत्तेजनाओं से कैसे छुटकारा मिलेगा।

एचबीवी के साथ छाती में दर्द, जो बच्चे को स्तन के अनुचित लगाव के कारण होता है, जैसे ही युवा मां शिशु को दूध पिलाने की सिफारिशों का पालन करती है और लगाने वाली तकनीक का पालन करती है, धीरे-धीरे गायब हो जाएगी। यह सावधानीपूर्वक निगरानी करने के लिए आवश्यक है कि बच्चा निप्पल को मुंह में कैसे ले जाता है: बच्चे के मसूड़ों को निप्पल पर दबाया जाना चाहिए, निप्पल के सिरे पर नहीं, फिर कम दर्दनाक संवेदनाएं होंगी। यदि निपल्स पर दरारें बनती हैं, तो उन्हें बेपेंटेन के साथ चिकनाई की जा सकती है। यह दवा माइक्रोटेमा हीलिंग की प्रक्रिया को तेज करती है और नवजात शिशु के लिए भी बिल्कुल सुरक्षित है। जब तक दरारें ठीक नहीं होती हैं, तब तक नर्सिंग मां विशेष निप्पल लाइनर्स का उपयोग कर सकती है: यदि आपकी छाती में दर्द होता है, तो यह असुविधा को कम करने में मदद करेगा।


यदि एक महिला ने दूध वाहिनी को अवरुद्ध कर दिया है, और इससे लैक्टोस्टेसिस का विकास होता है, तो आपको जल्द से जल्द कार्य करने की आवश्यकता है: दूध के ठहराव से गंभीर जटिलता हो सकती है - मास्टिटिस। ज्यादातर मामलों में मास्टिटिस का उपचार शल्य चिकित्सा द्वारा किया जाता है। पहली बात जो डॉक्टर घर पर करने की सलाह देते हैं, वह है कि बच्चे को अधिक बार दूध पिलाएं, नर्सिंग करते समय स्तन को क्या नुकसान होता है, इस पर ध्यान नहीं देने की कोशिश करते हैं, और अंतराल के बीच अंतराल में नरम मालिश आंदोलनों के साथ सील को खींचने और दूध निकालने की कोशिश करते हैं। कुछ महिलाएं लैक्टोस्टेसिस के लिए लोक उपचार का उपयोग करने की कोशिश करती हैं, उदाहरण के लिए, गोभी या शराब संकुचित होती है, लेकिन वे हमेशा मदद नहीं करते हैं। यदि दर्द न केवल दूर हो जाता है, बल्कि तेज होना शुरू हो जाता है, ठंड लगना और बुखार दिखाई देता है, यह चिकित्सा सहायता की शीघ्र मांग का कारण है।



उन मामलों में जहां थ्रश के कारण एक स्तन की नर्सिंग महिला होती है, स्व-उपचार की दृढ़ता से अनुशंसा नहीं की जाती है। अक्सर कैंडिडिआसिस बच्चे को प्रेषित होता है, जिससे उसे बहुत असुविधा होती है, इसलिए थेरेपी को मां के संबंध में और बच्चे के संबंध में किया जाता है। उपयुक्त दवाओं की नियुक्ति केवल एक विशेषज्ञ कर सकता है, बच्चे की उम्र और एक नर्सिंग महिला के शरीर की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए।


स्तनपान के बाद सीने में दर्द
आप अक्सर सुन सकते हैं कि महिलाओं को एचबी के पूरा होने के बाद सीने में दर्द होता है। यह एक नियम के रूप में, इस तथ्य के कारण है कि एक नर्सिंग मां दूध उत्पादन के प्राकृतिक विलुप्त होने से पहले स्तनपान की अवधि पूरी करती है, जब उसका शरीर अभी तक इसके लिए तैयार नहीं है। यदि एक महिला स्तनपान को दबाने के लिए दवाओं के उपयोग के बिना खिलाने से रोकना पसंद करती है, तो उसे इस तथ्य के लिए तैयार रहना चाहिए कि कुछ समय के लिए शरीर पहले की तरह लगभग उसी मात्रा में स्तन दूध का उत्पादन करेगा। यह अच्छा है अगर एक नर्सिंग मां धीरे-धीरे दूध पिलाने की संख्या को कम करती है - यह कुछ हद तक जीडब्ल्यू की मजबूर समाप्ति के परिणामों को कम करता है। हालांकि, इस बात की संभावना है कि पोषक द्रव नलिकाओं में स्थिर हो जाएगा और स्तन ग्रंथियों में दर्द पैदा करेगा, फिर भी काफी अधिक है। इस मामले में क्या करना है?

आपको उन आशंकाओं से बाहर निकलना नहीं छोड़ना चाहिए जो इन आंदोलनों के जवाब में दूध का उत्पादन होगा। तरल पदार्थ के एक मजबूत उत्पादन को भड़काने के लिए नहीं, आपको केवल कभी-कभी क्षय करने की आवश्यकता होती है, और केवल स्तन ग्रंथियों में राहत की भावना तक। पंपिंग की पूर्ण अनुपस्थिति लैक्टोस्टेसिस के विकास को जन्म दे सकती है।


यह आपके द्वारा पीने वाले द्रव की मात्रा और दूध उत्पादन में वृद्धि में योगदान करने वाले उत्पादों के उपयोग को अस्थायी रूप से सीमित करने के लिए अनुशंसित है।


स्तनपान को रोकने के लिए प्राकृतिक हर्बल उपचार के उपयोग की अनुमति है। यह, उदाहरण के लिए, ऋषि का एक आसव हो सकता है।

इन सरल क्रियाओं को करते समय, छाती 2-3 सप्ताह के बाद दर्द करना बंद कर देगी। हालांकि, अगर इनमें से कोई भी सुझाव राहत नहीं लाता है, तो एक महिला को दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

कुछ महिलाएं, जितनी जल्दी हो सके कोशिश कर रही हैं, तंग छाती पट्टी का उपयोग करें। लेकिन विशेषज्ञ स्पष्ट रूप से इस बर्बर विधि का उपयोग करने की सलाह नहीं देते हैं और चेतावनी देते हैं: अक्सर इस वजह से, नर्सिंग माताओं के स्तन को दर्द होता है। स्तनपान कराने के ऐसे तरीकों से मास्टिटिस सहित खतरनाक जटिलताएं हो सकती हैं।
स्तनपान एक माँ और बच्चे के जीवन का एक महान समय होता है, जो काफी लंबे समय तक रह सकता है अगर यह एक नर्सिंग महिला को असुविधा न करे। यही कारण है कि छाती में दर्द के कारणों को समझना इतना महत्वपूर्ण है जो स्तनपान के दौरान होता है और जितनी जल्दी हो सके उन्हें खत्म करने का प्रयास करें।

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